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  • 1000 ई-बसें व 100 हाईड्रोजन बसें खरीदेंगे: मुख्यमंत्री

    1000 ई-बसें व 100 हाईड्रोजन बसें खरीदेंगे: मुख्यमंत्री

    सीएम ने 297 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

    शिमलाः मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज सोलन जिले के क्यारीघाट में 297 नई टाइप-एक इलेक्ट्रिक बसों को हरी झण्डी दिखाकर हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम के विभिन्न डिपुओं के लिए रवाना किया, जो हिमाचल प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। इन इलेक्ट्रिक बसों से न केवल लोगों की यात्रा सुगम होगी, बल्कि यह स्वच्छ, हरित, आधुनिक एवं टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने इस अवसर पर ‘हिमबस प्लस कार्ड’ का भी शुभारंभ किया गया, जो प्रदेश में डिजिटल एवं स्मार्ट सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इन अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक, शांत एवं प्रदूषण-मुक्त यात्रा का अनुभव प्राप्त होगा। इनके संचालन से जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी, कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी, परिचालन लागत घटेगी तथा हिमाचल पथ परिवहन निगम की वित्तीय स्थिति और अधिक सुदृढ़ होगी। राज्य सरकार ने इनके निर्बाध संचालन के लिए विभिन्न बस डिपुओं में आधुनिक चार्जिंग अवसंरचना विकसित की है तथा ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने हेतु आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं।

    सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल बेहतर परिवहन उपलब्ध करवाना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हिमालय, स्वच्छ वायु और स्वस्थ पर्यावरण सुनिश्चित करना भी है। इलेक्ट्रिक बसों का यह विस्तार इसी दूरदर्शी सोच का परिणाम है।

    उन्होंने कहा कि ‘हिमबस प्लस कार्ड’ के माध्यम से हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम अपने यात्रियों को एक आधुनिक, डिजिटल एवं कैशलेस यात्रा अनुभव प्रदान करने जा रहा है। इस कार्ड के माध्यम से सामान्य यात्रियों को बस किराए में 5 प्रतिशत तथा वरिष्ठ नागरिकों को 15 प्रतिशत तक की रियायत प्राप्त होगी। साथ ही यात्रियों को उनके मासिक परिवहन निगम उपयोग के आधार पर 2000 रुपये प्रति माह तक कैशबैक का लाभ भी मिलेगा।

    पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इन इलेक्ट्रिक बसों के साथ ही अब हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम में इलेक्ट्रिक बसों की संख्या 500 हो गई है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसें डीजल बसों से काफी किफायती होती हैं। इलेक्ट्रिक बसों पर स्टाफ सहित अन्य खर्च 36 से 38 रुपये प्रति किलोमीटर आता है जबकि डीजल बसों पर 76 से 86 रुपये प्रति किलोमीटर व्यय होता है। इन इलेक्टिक बसों के निगम के बेड़े में आने से 40 से 50 रुपये प्रति किलोमीटर की बचत सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार परिवहन निगम को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष 1000 और इलेक्ट्रिक बसें खरीद रही है तथा आने वाले समय में टेंडर हो जाएंगे। इसके अतिरिक्त प्रदेश सरकार 100 हाईड्रोजन बसों को भी खरीदने पर विचार कर रही है ताकि प्रदेश के प्रकृति एवं वातावरण को जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुक्सान को बचाया जा सके तथा हिमाचल प्रदेश को देश का अग्रणी राज्य बने।

    उन्होंने कहा कि हमने पहले बजट में ही प्रदेश को हरित राज्य बनाने की परिकल्पना की थी तथा प्रदेश में इलेक्ट्रिक बसों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि अब इलेक्ट्रिक बसों में नई प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है। उन्होंने कहा कि अभी इलेक्ट्रिक बसें प्रति चार्ज 200 किलोमीटर चल रही है तथा आने वाली बसों में प्रति चार्ज 250 से 300 किलोमीटर तक चलेगी। उन्होंने कहा कि इन बसों को सरकार द्वारा खरीदा जा रहा है तथा निगम को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में निगम के कर्मचारियों एवं पैंशनरों को दो महीने तक वेतन और पैंशन नहीं मिलती थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार अपने कर्मचारियों एवं पैंशनरों को समय पर वेतन एवं पैंशन प्रदान कर रही है।

    सुक्खू ने कहा कि वर्तमान सरकार का ध्येय वर्ष 2027 तक प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार से 1952 से 2026 तक आरडीजी मिल रही थी, जो प्रतिवर्ष 8000 से 10000 करोड़ रुपये थी। परन्तु 16वें वित्तायोग से भाजपा ने आरडीजी को बंद करवा कर प्रदेश के लोगों के साथ धोखा किया है। परन्तु वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के चोर दरवाजों को बंद कर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया है। उन्होंने कहा कि विगत वर्ष आपदा के लिए घोषित किए गए 1500 करोड़ रूपये के लिए भी भाजपा नेता प्रधानमंत्री से नहीं मिले। उन्होंने कहा कि भाजपा ने प्रदेश की सम्पदा को लुटाया है तथा नालागढ़ बद्दी में 5000 बीघा की जमीन 1 करोड़ रूपये में बिना रजिस्ट्रेशन फीस के कस्टमाइड पैकेज के आधार पर बडे़-बडे़ उद्योगपतियों के नाम कर दी।

    वर्तमान सरकार ने प्रदेश की सम्पदा को बचाया है तथा 421 करोड़ रुपये वाइल्ड फलॉवर हॉल से लिये तथा 150 करोड़ रुपये जेडब्ल्यूएस से लिए हैं। उन्होंने कहा कि किशाऊ विद्युत परियोजना से 1000 करोड़ रुपये की आय होगी तथा हिमाचल प्रदेश ने हरियाणा से किशाऊ परियोजना पर हस्ताक्षर करने के लिए  2011 से बीबीएमबी के एरियर को जारी करने की शर्त लगाई है। अगर किशाऊ परियोजना पर समझौता ज्ञापन नहीं हुआ तो पड़ोसी राज्य प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि कानूनी फैसला होने के बावजूद पड़ोसी राज्यों द्वारा एरियर नहीं दिया जा रहा है। यह प्रदेश के लोगों का अधिकार है तथा हम इसे लेकर ही रहेंगे।

    इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डा. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरदीप बावा तथा कुलदीप राठौर, कांग्रेस नेता शिव कुमार, मुख्यमंत्री के सलाहकार (अधोसंरचना) अनिल कपिल, अतिरिक्त मुख्य सचिव औंकार चंद शर्मा, हिमाचल प्रदेश परिवहन निगम के प्रबन्ध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

  • राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश स्थानीय निकायों की आम चुनाव -2026 की रिपोर्ट प्राप्त की

    राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश स्थानीय निकायों की आम चुनाव -2026 की रिपोर्ट प्राप्त की

    स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव करवाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की सराहना की

    शिमलाः राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन में राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची से हिमाचल प्रदेश स्थानीय निकायों की आम चुनाव- 2026 की रिपोर्ट प्राप्त की। यह रिपोर्ट मई 2026 में आयोजित पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों के आम चुनावों से संबंधित है। इस रिपोर्ट में चुनाव प्रक्रिया की कार्य योजना, तैयारियों और संचालन का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें चुनावों के सफल आयोजन से जुड़े प्रशासनिक उपायों, महत्त्वपूर्ण व्यवस्थाओं, विभिन्न चुनौतियों और प्रमुख उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया है।

    राज्यपाल ने स्वतंत्र, निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से चुनाव संपन्न करवाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की सराहना की। उन्होंने विस्तृत रिपोर्ट के प्रकाशन की भी प्रशंसा करते हुए कहा कि नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, प्रशासकों तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में कार्यरत एवं आम नागरिकों के लिए एक महत्त्वपूर्ण संदर्भ दस्तावेज साबित होगा।

    राज्यपाल ने कहा कि सशक्त, उत्तरदायी और जवाबदेह संस्थाएं जीवंत लोकतंत्र की आधारशिला होती हैं। उन्होंने कहा कि चुनावों का सफल आयोजन हिमाचल प्रदेश की जनता, राजनीतिक दलों और चुनाव से संबंधित अधिकारियों की लोकतांत्रिक मूल्यों को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने सभी नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे समावेशी विकास और जनकल्याण के प्रति समर्पण, ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

    रिपोर्ट में समयबद्ध चुनाव करवाने के लिए की गई तैयारियों का भी विस्तृत उल्लेख किया गया है। इसमें राज्य सरकार और जिला प्रशासन के साथ समन्वय, ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों का परिसीमन, मतदाता सूचियों की तैयारी और पुनरीक्षण तथा आयोग द्वारा विभिन्न कानूनी मामलों के समाधान की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय और भारत के सर्वाेच्च न्यायालय में हुई न्यायिक कार्यवाहियों का भी विवरण शामिल है, जिनके बाद चुनाव प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हुई।

    रिपोर्ट के अनुसार, परिसीमन के बाद राज्य की स्थानीय शासन व्यवस्था का दायरा बढ़ा है। वर्ष 2021 में ग्राम पंचायतों की संख्या 3,615 थी, जो 2026 में बढ़कर 3,758 हो गई। इसी प्रकार पंचायत समितियों की संख्या 81 से बढ़कर 92 हो गई है। शहरी क्षेत्रों में नगर पंचायतों की संख्या 27 से बढ़कर 39 तथा नगर निगमों की संख्या पांच से बढ़कर आठ हो गई है।

    रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि राज्य में मतदाताओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है और वर्ष 2026 में यह 54.55 लाख पहुंच गई। पंचायती राज चुनावों में लगभग 80 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में 70.14 प्रतिशत मतदान हुआ। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में जनता की मजबूत भागीदारी का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

  • हिमबस प्लस कार्ड से लाभान्वित होंगे सभी श्रेणियों के यात्रीः मुकेश अग्निहोत्री

    हिमबस प्लस कार्ड से लाभान्वित होंगे सभी श्रेणियों के यात्रीः मुकेश अग्निहोत्री

    शिमलाः उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण, सतत एवं पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने तथा हिमाचल पथ परिवहन निगम को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उप-मुख्यमंत्री ने आज सोलन जिला के क्यारीघाट में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के साथ एचआरटीसी के बेड़े में शामिल की गई 297 इलेक्ट्रिक बसों को झंडी दिखाकर रवाना करने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आगामी वर्षों में निगम 1,000 इलेक्ट्रिक बसें खरीदेगा। इन 297 नई बसों के शामिल होने से निगम के बेड़े में इलेक्ट्रिक बसों की कुल संख्या बढ़कर 507 हो गई हैं।

    उन्होंने कहा कि ‘हिमबस प्लस कार्ड’ की शुरुआत सभी श्रेणियों के यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा साबित होगी। यह स्मार्ट कार्ड एचआरटीसी की विभिन्न यात्रा रियायत योजनाओं एवं कार्डों के लाभों को एक ही कार्ड में समाहित करेगा। यह कार्ड मात्र 365 रुपये के वार्षिक सदस्यता शुल्क पर उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि इस कार्ड का उपयोग दिल्ली मेट्रो तथा पंजाब और हरियाणा की बस सेवाओं में भी किया जा सकेगा, जिससे यात्रियों की यात्रा और अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनेगी।
    अग्निहोत्री ने कहा कि एचआरटीसी के बेड़े में शामिल की गई नई इलेक्ट्रिक बसों को हिमाचल प्रदेश के दुर्गम एवं पहाड़ी मार्गों को ध्यान में रखते हुए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। भविष्य में केवल 47-सीटर श्रेणी की डीजल बसों की ही खरीद की जाएगी, जबकि राज्य में चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगले 12 वर्षों तक कम्पनी द्वारा इन बसों का रखरखाव किया जाएगा।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार एचआरटीसी के कर्मचारियों एवं पेंशनरों के कल्याण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। सरकार प्रयास कर रही है कि प्रत्येक माह की पहली तारीख को कर्मचारियों का वेतन तथा प्रत्येक माह की 10 तारीख तक पेंशन का भुगतान सुनिश्चित किया जाए और इसके लिए व्यवस्था को सुव्यवस्थित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन योजना की बहाली से एचआरटीसी के 9,099 कर्मचारियों को लाभ मिला है, जिससे उनका भविष्य अधिक सुरक्षित हुआ है।

    अग्निहोत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में एचआरटीसी में 686 नई भर्तियां की गई हैं, जबकि 2,198 अनुबंध कर्मचारियों को नियमित किया गया है। इसके अतिरिक्त, कर्मचारियों एवं पेंशनरों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति, ओवरटाइम भत्ता, रात्रि ड्यूूटी भत्ता, महंगाई भत्ता तथा अन्य लंबित वित्तीय देनदारियों के भुगतान के लिए लगभग 70 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जून, 2026 तक के सभी चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों का निपटारा कर दिया गया है तथा 12 माह से लंबित ओवरटाइम एवं रात्रि ड्यूटी भत्ते का भुगतान भी अगले दो-तीन दिनों में कर दिया जाएगा।

    उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान सेवानिवृत्त कर्मचारियों को डीसीआरजी तथा अर्जित अवकाश नकदीकरण (लीव एनकैशमेंट) के रूप में लगभग 172 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। इसके साथ ही 1,155 नए पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि 75 वर्ष से अधिक आयु के पेंशनरों को लगभग 23 करोड़ रुपये की पेंशन एरियर राशि जारी की गई है। साथ ही 65, 70 और 75 वर्ष आयु वर्ग के पेंशनरों को अतिरिक्त पेंशन लाभ भी प्रदान किए जा रहे हैं।

    अग्निहोत्री ने एचआरटीसी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की प्रतिबद्धता और सेवाभाव की सराहना करते हुए कहा कि वे एक परिवार की तरह कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी लोगों को निर्बाध परिवहन सेवाएं उपलब्ध करवा रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार निगम और उसके कर्मचारियों के हितों की रक्षा तथा उनके कल्याण के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
    स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनीराम शांडिल ने कहा कि उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के विशेष प्रयासों के परिणामस्वरूप एचआरटीसी के बेड़े में 297 इलेक्ट्रिक बसों को शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि इनमें से 40 नई इलेक्ट्रिक बसें सोलन जिले को आवंटित की गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा एवं परिवहन अवसंरचना को निरंतर सुदृढ़ कर रही है।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा ने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन में विस्तार करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे एचआरटीसी की परिचालन लागत में कमी आएगी तथा यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होंने कहा कि सतत सार्वजनिक परिवहन की दिशा में निगम की यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

    इस अवसर पर एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष सुभाष बरमानी, एचपीएसआईडीसी के उपाध्यक्ष अनुराग शर्मा, कैलाश फेडरेशन के अध्यक्ष बलदेव ठाकुर, एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक डॉ. निपुण जिंदल, ओलेक्ट्रा ग्रीनटेक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक महेश बाबू, निदेशक परिवहन नीरज शर्मा, एचआरटीसी बोर्ड के सदस्य छत्र सिंह, निशांत ठाकुर, प्रदीप सूर्या, अजय वर्मा तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • हिमाचल का इतिहास, अर्थव्यवस्था, बोलियां, राजनीति और व्यंजन छठी से आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में होेंगे शामिलः रोहित ठाकुर

    हिमाचल का इतिहास, अर्थव्यवस्था, बोलियां, राजनीति और व्यंजन छठी से आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में होेंगे शामिलः रोहित ठाकुर

    शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर की अध्यक्षता में आज यहां आयोजित बैठक में छठी से आठवीं कक्षा की पुस्तकों में बदलाव एवं सुधार को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। इन पुस्तकों में हिमाचल प्रदेश से संबंधित भौगोलिक, सामाजिक, ऐतिहासिक, लोक सांस्कृतिक मूल्यों, अर्थ-व्यवस्था और राजनीति आदि महत्त्वपूर्ण मुद्दों को छठी, सातवीं एवं आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रमों में शामिल करने पर गहनता से विचार विमर्श किया गया।

    रोहित ठाकुर ने कहा कि हिमाचल के प्रागैतिहासिक काल से लेकर हिमाचल के निर्माण तक, यहां की बोलियों, व्यंजनों, स्वतंत्रता सेनानियों, कारगिल विजेताओं, सैनिकों, हिमाचल के समक्ष चुनौतियां, अर्थव्यवस्था, राजनीति आदि विषयों पर रोचक जानकारी एवं तथ्यों का किताबों में समावेश किया जाएगा। इस जानकारी को एक माह के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा ताकि इन्हें शीघ्र प्रकाशित किया जा सके। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से नए पाठ्यक्रम की इन किताबों को स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई के लिए उपयोग में लाया जाएगा।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पर आधारित जानकारी और तथ्यों को जानने से विद्यार्थियों में विशलेष्णात्मक सोच और गहराई से जानने की जिज्ञासा जागृत होगी तथा भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सहायक सिद्ध होगी।
    शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में छठी से आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में बदलाव और सुधार के लिए एक कमेटी गठित की गई है, जिसकी नियमित अंतराल में बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इस कमेटी में शिक्षा सचिव, हिमाचल प्रदेश शिक्षा बोर्ड और एससीईआरटी के प्रतिनिधि तथा सहायक प्रो. आदि शामिल हैं। बैठक में सचिव शिक्षा राकेश कंवर, राज्य परियोजना निदेशक सम्रग शिक्षा राजेश शर्मा, सचिव शिक्षा बोर्ड अंकुश शर्मा, निदेशक उच्च शिक्षा सुनिता सिंह और प्रिंसिपल एससीईआरटी डॉ. रितु शर्मा सोनी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • ‘अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ के तहत 6, 7 व 8 अगस्त को ब्लॉक स्तर पर आयोजित होंगे जन-संवाद कार्यक्रम: CM Sukhu

    ‘अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ के तहत 6, 7 व 8 अगस्त को ब्लॉक स्तर पर आयोजित होंगे जन-संवाद कार्यक्रम: CM Sukhu

    अति निर्धन परिवारों के साथ कार्यक्रम में विधायक करेंगे संवाद

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कल सायं यहां ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रदेश सरकार 6, 7 व 8 अगस्त, 2026 को ‘अपना परिवार सुखी परिवार योजना’ के तहत जन-संवाद कार्यक्रम आयोजित करेगी। यह कार्यक्रम ब्लॉक स्तर पर आयोजित किए जाएंगे और इनकी अध्यक्षता विधायक करेंगे। इस कार्यक्रम के लिए ग्राम पंचायतों के क्लस्टर बनाये जाएंगे और एक क्लस्टर में अधिकतम 10 ग्राम पंचायतें चिन्हित की जाएंगी। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जन-संवाद कार्यक्रम में ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से चिन्हित अति निर्धन परिवारों को आमंत्रित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में इन अति निर्धन परिवारों के विकास और कल्याण के लिए जरूरी विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की व्यापक स्तर पर चर्चा की जाएगी। इस चर्चा के फीडबैक के आधार पर प्रदेश सरकार द्वारा योजनाएं बनाई जाएंगी और उन्हें धरातल पर कार्यान्वित किया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से लगभग 1.78 लाख अति निर्धन परिवार चिन्हित किए गए हैं। यह प्रक्रिया आठ चरणों के दौरान पूर्ण की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य उस हर परिवार को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करना है जो अभी तक अपने हक से वंचित रहे हैं। अभी तक प्रदेश में 85 हजार परिवार ऐसे हैं जो अति निर्धन हैं लेकिन उन्हें कभी बीपीएल परिवार में शामिल ही नहीं किया गया और न ही उन्हें प्रदेश सरकार की किसी योजना का लाभ मिला। इस वित्त वर्ष के बजट में अपना परिवार सुखी परिवार योजना की घोषणा की गई थी, जिसे उद्देश्यों के अनुरूप अब कार्यान्वित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार चिन्हित किए गए इन अति निर्धन परिवारों का सहारा बनेंगी। इनकी आर्थिक स्थिति में परिवर्तन लाकर हम अर्थव्यवस्था में समृद्धि के साथ प्रदेश की समृद्धि के रास्ते पर आगे बढ़ेंगे। प्रदेश सरकार ने अति निर्धन परिवारों के चयन के सर्वेक्षण की प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता और ईमानदारी से पूरा किया है। सम्बन्धित अधिकारियों को इस बारे में जवाबदेह बनाया गया है। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरूद्ध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, ग्रामीण विकास विभाग के सचिव सी. पालरासु, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा, निदेशक डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस डॉ. निपुण जिंदल और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
  • मुख्यमंत्री ने ‘जाखू मन्दिर-संजीवनी बूटी का रहस्य’ पुस्तक का विमोचन किया

    मुख्यमंत्री ने ‘जाखू मन्दिर-संजीवनी बूटी का रहस्य’ पुस्तक का विमोचन किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कल सायं भाषा एवं संस्कृति विभाग के पूर्व सहायक निदेशक एवं हिमाचल प्रदेश किसान कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता त्रिलोक सूर्यवंशी द्वारा लिखित पुस्तक ‘जाखू मन्दिर-संजीवनी बूटी का रहस्य’ का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने लेखक के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह पुस्तक पर्यटन की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।

    इस पुस्तक से श्रद्धालु और पर्यटकों को मन्दिर की जानकारी के साथ-साथ शिमला के इतिहास व संस्कृति के बारे में भी जानकारी प्राप्त होगी। इस पुस्तक में लेखक त्रिलोक सूर्यवंशी द्वारा विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल जाखू मन्दिर के पौराणिक इतिहास, संजीवनी बूटी का रहस्य, मन्दिर से जुड़े रोचक तथ्यों, शिमला के विरासत भवनों, अन्य धार्मिक स्थलों तथा ऐतिहासिक स्थलों का वर्णन किया गया है। इस अवसर पर लेखक की धर्मपत्नी माया सूर्यवंशी, जगमोहन शर्मा, पूर्ण चन्द तथा अजय भारद्वाज उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री ने पूर्व विधायक के निधन पर शोक व्यक्त किया

    मुख्यमंत्री ने पूर्व विधायक के निधन पर शोक व्यक्त किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक रामचंद भाटिया के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उनका निधन बुधवार को कांगड़ा जिले के डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में हुआ। वे 82 वर्ष के थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामचंद भाटिया ने नगरोटा बगवां विधानसभा क्षेत्र के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया तथा वह क्षेत्र के लोगों के कल्याण के लिए समर्पित रहते थे।

    उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की तथा ईश्वर से दिवंगत की आत्मा को शांति और परिवार को इस दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।

  • करूणामूलक नीति के तहत नियुक्त जेओए (आई.टी.) प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट की

    करूणामूलक नीति के तहत नियुक्त जेओए (आई.टी.) प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट की

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज यहां करूणामूलक रोजगार नीति के तहत निदेशालय भर्ती, हिमाचल प्रदेश में नियुक्त जेओए (आई.टी) के प्रतिनिधिमंडल ने भेंट की और उन्हें नियुक्ति प्रदान करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि उन्हें सम्बन्धित कार्यालय में तैनाती शीघ्र प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बारे में सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश जारी किए जा चुके हैं।

  • प्रदेश में तीन वर्षों में खनिजों से प्राप्त राजस्व में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरीः मुख्यमंत्री

    प्रदेश में तीन वर्षों में खनिजों से प्राप्त राजस्व में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरीः मुख्यमंत्री

    खनिजों के दोहन के दौरान पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करें

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान प्रदेश में खनिजों के दोहन से प्राप्त राजस्व में लगभग 70 प्रतिशत की बढ़ौतरी दर्ज की गई है। आज यहां उद्योग विभाग के तहत खनन विंग के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में मुख्य खनिज और लघु खनिजों से 200 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ जोकि वर्ष 2025-26 में बढ़कर 340 करोड़ रुपये हो गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमावर्ती राज्य पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड द्वारा हिमाचल से परिवहन होने वाले लघु खनिजों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया गया, जिससे प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से खनिजों के बाहर भेजने की मात्रा में कमी होने के कारण राजस्व प्राप्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने विभाग को इस मामले को पड़ोसी राज्यों से विधिपूर्वक उठाने के निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से केन्द्र सरकार ने चूना पत्थर की रॉयल्टी की दरें संशोधित नहीं की हैं, इससे राज्य की राजस्व प्राप्ति पर प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश अपना वाजिब हक प्राप्त करने के लिए इस मामले को प्रमुखता से उठायेगा। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि प्रदेश में खनिजों का दोहन वैज्ञानिक एवं पर्यावरण अनुकूल तरीके से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चलने चाहिए तथा प्राकृतिक संसाधनों का दोहन निर्धारित नियमों एवं मानकों के अनुरूप ही किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन गतिविधियों के दौरान पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि नदियों, नालों, वनों तथा अन्य प्राकृतिक संसाधनों को किसी भी प्रकार की क्षति न पहुंचे और पर्यावरणीय मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। खनन केवल चिन्हित क्षेत्रों में ही किया जाए तथा संबंधित एजेंसियां नियमित निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि सभी गतिविधियां निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित हों।

    हिमाचल प्रदेश की नाजुक पारिस्थितिकी और प्राकृतिक धरोहर का संरक्षण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने खनन कार्यों से जुड़े सभी हितधारकों से पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने तथा सतत एवं जिम्मेदार खनन को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खनिजों के दोहन से संबंधित सभी गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जाए, ताकि विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी प्रभावी ढंग से सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, प्रधान सचिव एम. सुधा देवी, सचिव पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी व जलवायु परिवर्तन डॉ. सुशील कुमार सिंगला, निदेशक उद्योग विवेक भाटिया, संयुक्त सदस्य सचिव हिमकोस्ट डॉ. सुरेश चन्द अत्री और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • हिमाचल पुलिस के 13 अराजपत्रित अधिकारियों को सेवानिवृत्ति पर मिलेगा मानद उच्च पद

    हिमाचल पुलिस के 13 अराजपत्रित अधिकारियों को सेवानिवृत्ति पर मिलेगा मानद उच्च पद

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की घोषणा की अनुपालना में हिमाचल प्रदेश पुलिस के 13 पात्र अराजपत्रित अधिकारियों, उप-निरीक्षकों, सहायक उप-निरीक्षकों तथा मुख्य आरक्षकों को उनकी सेवानिवृत्ति के दिन अगले उच्च पद का मानद रैंक प्रदान किया जा रहा है।

    राज्य पुलिस विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां जानकारी दी कि जिला किन्नौर के रिकांगपिओ में आयोजित राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की थी कि हिमाचल प्रदेश पुलिस के सभी पात्र अराजपत्रित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनकी समर्पित, अनुशासित और सराहनीय सेवाओं के सम्मान में सेवानिवृत्ति के दिन एक मानद उच्च पद प्रदान किया जाएगा।

    इस घोषणा की अनुपालना में राज्य पुलिस मुख्यालय ने 12 मई, 2026 को एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया जारी की जिसमें इसमें पात्रता की शर्तों, सेवा अभिलेखों की जांच, स्क्रीनिंग व्यवस्था तथा मानद पद प्रदान करने की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाया गया।

    इसी व्यवस्था के अंतर्गत गठित राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति ने पात्र अधिकारियों के सेवा अभिलेखों का परीक्षण किया तथा प्रथम चरण में 13 अधिकारियों को मानद उच्च पद प्रदान करने की संस्तुति की। इनमें उप-निरीक्षकों को मानद निरीक्षक, सहायक उप-निरीक्षकों को मानद उप-निरीक्षक तथा पात्र मुख्य आरक्षक को मानद सहायक उप-निरीक्षक का पद प्रदान किया जा रहा है।

    यह मानद पद वित्तीय अथवा पेंशन संबंधी लाभ के लिए नहीं, बल्कि पुलिस अधिकारियों द्वारा दशकों तक राज्य, समाज और पुलिस संगठन को दी गई निष्ठापूर्ण एवं उल्लेखनीय सेवाओं की औपचारिक मान्यता के रूप में प्रदान किए जा रहे हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि पुलिस कर्मी अपनी सेवा के अंतिम दिन विभाग से केवल सेवानिवृत्त न हों, बल्कि सम्मान, गौरव और उच्चतर पद की पहचान के साथ विदा हो।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की यह पहल पुलिस बल के प्रति उनकी संवेदनशीलता और दूरदर्शी नेतृत्व को दर्शाती है। इससे न केवल सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों की सेवाओं को उचित सम्मान मिलेगा, बल्कि वर्तमान में सेवारत पुलिस कर्मियों में भी कर्त्तव्य-निष्ठा, अनुशासन, ईमानदारी और उत्कृष्ट कार्य-संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा।

    विभाग इस निर्णय के लिए मुख्यमंत्री आभार व्यक्त करता है। यह कदम पुलिस कर्मियों और उनके परिवारों के लिए गौरव का विषय है। राज्य सरकार की यह पहल यह स्पष्ट संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों में प्रदेश की शांति, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले प्रत्येक समर्पित पुलिस कर्मी की सेवा को सरकार सम्मानित करती है।