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  • मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने स्कूल फीस में मनमानी बढ़ोतरी पर लगाम लगाई

    मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने स्कूल फीस में मनमानी बढ़ोतरी पर लगाम लगाई

    वार्षिक बढ़ोतरी की सीमा 5 प्रतिशत तय

    चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब कैबिनेट ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के हितों की रक्षा करने, औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने, डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने तथा प्रशासनिक पहुंच में सुधार लाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। कैबिनेट ने निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए अध्यादेश को मंजूरी दी, औद्योगिक रियायतों संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन किया, स्टेट डेटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म लागू करने की स्वीकृति दी तथा जिला होशियारपुर के अंतर्गत आने वाले दसूहा उपमंडल के लिए अतिरिक्त उपायुक्त (जनरल) और सहायक स्टाफ के पद सृजित करने को मंजूरी दी।

    निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस वृद्धि पर लगाम

    मुख्यमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा फीस में की जाने वाली अनावश्यक और अनुचित बढ़ोतरी को नियंत्रित करने के लिए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई वाली पंजाब कैबिनेट ने ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (संशोधन) अध्यादेश, 2026’ को लाने को मंजूरी दे दी है। यह अध्यादेश ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अन-एडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2016’ में संशोधन करके लाया गया है। इस कदम का उद्देश्य फीस वृद्धि पर प्रभावी नियंत्रण रखना, विद्यार्थियों और अभिभावकों को मनमानी फीस बढ़ोतरी से सुरक्षा प्रदान करना, फीसों के ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा उनके हितों की रक्षा करना है। इन संशोधनों के तहत फीस, फीस वृद्धि और कुल फीस वृद्धि की परिभाषाओं को अधिक स्पष्ट बनाया गया है। साथ ही, निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा वार्षिक फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा 5 प्रतिशत तय की गई है। 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने के लिए संबंधित नियामक संस्था की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

    औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए पूंजी सब्सिडी संबंधी दिशानिर्देशों में संशोधन

    एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में कैबिनेट ने राज्य की औद्योगिक नीतियों के तहत कैपिटल सब्सिडी एवं निवेश प्रोत्साहनों के वितरण के लिए 13 नवंबर 2019 के दिशानिर्देशों में संशोधन को भी मंजूरी दी।
    इन संशोधनों का उद्देश्य सब्सिडी वितरण प्रक्रिया को सरल और सुचारु बनाना, प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना तथा पात्र औद्योगिक इकाइयों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करना है। संशोधित व्यवस्था के अनुसार, दिशानिर्देशों की धारा 1.1 और 1.2 में छूट मिलने के बाद पात्र बनने वाली औद्योगिक इकाइयों को आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन और निर्धारित शर्तों की पूर्ति के आधार पर कैपिटल सब्सिडी जारी की जाएगी।

    पंजाब में स्टेट डेटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म लागू करने को मंजूरी

    राज्य के विभिन्न विभागों के अनेक डेटाबेसों को आपस में जोड़ने, किसी भी दोहराव को समाप्त करने और मौजूदा प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कैबिनेट ने पंजाब में स्टेट डेटा इंटीग्रेशन प्लेटफॉर्म (एसडीआईपी) लागू करने को मंजूरी दी है। परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में तीन-स्तरीय संचालन समिति गठित की जाएगी। इस संचालन समिति में पंजाब के मुख्य सचिव चेयरपर्सन होंगे, प्रशासनिक सचिव (गुड गवर्नेंस) मैंबर कनवीनर होंगे तथा विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव सदस्य के रूप में शामिल होंगे।

    दसूहा उपमंडल के लिए एडीसी (जनरल) और सहायक स्टाफ के पदों को मंजूरी

    कैबिनेट ने जिला होशियारपुर के अंतर्गत आने वाले दसूहा उपमंडल के लिए अतिरिक्त उपायुक्त (जनरल) तथा अन्य सहायक स्टाफ के पद सृजित करने को भी मंजूरी दे दी है। इस निर्णय से क्षेत्र के उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें जिला स्तरीय प्रशासनिक कार्यों, अनुमतियों, राजस्व मामलों तथा जन शिकायतों के निपटारे के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। इससे लोगों के समय और धन दोनों की बचत होगी तथा जनहित से जुड़े मामलों का निपटारा भी तेजी से हो सकेगा। इसलिए जनसुविधा को ध्यान में रखते हुए जिला होशियारपुर के अंतर्गत दसूहा उपमंडल में अतिरिक्त उपायुक्त (जनरल) सहित सहायक स्टाफ के कुल पांच पद सृजित करने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

     

     

  • प्रदेश में सभी पात्र परिवारों को दी जाएगी आवास सुविधा: मुख्यमंत्री

    प्रदेश में सभी पात्र परिवारों को दी जाएगी आवास सुविधा: मुख्यमंत्री

    चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रत्येक प्रदेशवासी को रहने के लिए छत देना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और वर्तमान केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा यह कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है। उन्होंने हाउसिंग फोर ऑल विभाग को निर्देश दिए कि वे शेष बचे सभी पात्र परिवारों की पहचान कर उन्हें आवास उपलब्ध करवाने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करें।

    मुख्यमंत्री ने यह निर्देश बृहस्पतिवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन-2047 के तहत हाउसिंग फोर ऑल विभाग के अगले 5 साल के रोडमैप व कार्ययोजना की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी अपात्र व्यक्ति या परिवार को योजना का लाभ दिया जाता है तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    हाउसिंग फोर ऑल के महानिदेशक जे गणेशन ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मुख्यमंत्री शहरी आवास योजना, मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना 2.0 तथा लाइसेंसी कालोनियों में ईडब्ल्यूएस आवासों के वितरण के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार विभाग द्वारा आगामी समय में बचे हुए पात्र परिवारों को आवास सुविधाएं उपलब्ध करवाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

    उन्होंने बताया कि अब तक 5 योजनाओं के तहत प्रदेश में 2,31,215 परिवारों को आवास उपलब्ध करवाने के लिए लगभग 2375 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। इनके अलावा 10649 प्लाट व फ्लैट वितरित करने हेतु तैयार है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन प्लाट व फ्लैट के आबंटन का कार्य जल्द पात्र परिवारों को किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि हर पात्र परिवार को सरकारी मदद से छत मुहैया करवाई जाए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि योजना का दुरुपयोग न हो। उन्होंने कहा कि सभी लाभार्थियों की सूची ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक की जाए ताकि तसदीक हो सके कि लाभ लेने वाले परिवार वास्तव में योजना के लिए पात्र थे या नहीं। यदि यह साबित होता है कि अपात्र व्यक्तियों को योजना का लाभ दिया गया है तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने घुमंतु जाति के ऐसे गरीब परिवारों के लिए पंजीकरण शुल्क में रियायत देने के भी निर्देश दिए जिनकी आर्थिक स्थिति खराब है।

    इस अवसर पर मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार, हाउसिंग फोर ऑल के महानिदेशक जे गणेशन, मुख्यमंत्री के ओएसडी भारत भूषण भारती तथा ओएसडी एवं स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

     

  • राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के महानिदेशक ने राज्यपाल से भेंट की

    राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के महानिदेशक ने राज्यपाल से भेंट की

    शिमला: राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी शिमला के महानिदेशक एस. आलोक ने आज लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से भेंट की। इस अवसर पर एस. आलोक ने राज्यपाल को भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा विभाग तथा अन्य संस्थानों के अधिकारियों के लिए अकादमी द्वारा संचालित प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण एवं अनुसंधान संबंधी पहलों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य अधिकारियों की पेशेवर दक्षता, वित्तीय जवाबदेही तथा सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन को सुदृढ़ करना है। राज्यपाल ने कौशल विकास, पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देने में अकादमी के योगदान की सराहना करते हुए उसके भावी प्रयासों के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं।

     

  • एचसीएस अधिकारियों की एपीआर दर्ज करने की समय-सीमा बढ़ी

    चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के अधिकारियों की वर्ष 2025–26 की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (पीएआर) दर्ज करने समय-सीमा एक महीने के लिए बढ़ा दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी एक पत्र के अनुसार, अब एचसीएस अधिकारियों को 31 मई की बजाय 30 जून, 2026 तक अपना स्व-मूल्यांकन प्रस्तुत करना होगा। रिपोर्टिंग प्राधिकारी को 31 अगस्त तक मूल्यांकन पूरा करना होगा। रिव्यूइंग प्राधिकारी को 31अक्टूबर तक समीक्षा करनी होगी, जबकि स्वीकार करने वाले प्राधिकारी द्वारा 31 दिसंबर, 2026 तक रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।

    गौरतलब है कि हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को एचसीएस (कार्यकारी शाखा) अधिकारियों की वर्ष 2025–26 की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट राज्य के इंट्रानेट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। एचसीएस अधिकारियों की एपीआर वेबसाइट http://intrahry.gov.in पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी और इसे 31 दिसंबर, 2026 तक अंतिम रूप देना अनिवार्य होगा।

    सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों तथा बोर्डों और निगमों के प्रमुखों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। अधिकारी एचआरएमएस पोर्टल पर उपलब्ध अपने पेयी कोड और पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे। सत्यापन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर पर वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजा जाएगा।

    इसके अतिरिक्त डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट अथवा स्कैन किए गए हस्ताक्षर अपलोड पर भी प्रमाणीकरण किया जा सकेगा। 40 साल से अधिक आयु के एचसीएस अधिकारियों के लिए स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है और स्व-मूल्यांकन के साथ मेडिकल रिपोर्ट का सारांश भी अपलोड करना होगा।

    कार्य निष्पादन का मूल्यांकन 1 से 10 के पैमाने पर संख्यात्मक ग्रेडिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसमें कार्य निष्पादन, व्यक्तिगत गुणों तथा कार्यात्मक दक्षताओं को शामिल किया जाएगा। ऑनलाइन प्रणाली में यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के अंदर संबंधित प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है। ऑनलाइन प्रणाली में यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है तो रिपोर्ट स्वतः अगले स्तर पर अग्रेषित हो जाएगी, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

  • बदलाव के लिए तैयार हिमाचल, बनेगी कांग्रेस सरकार, असम में CM Sukhu ने किया धुआंधार प्रचार

    बदलाव के लिए तैयार हिमाचल, बनेगी कांग्रेस सरकार, असम में CM Sukhu ने किया धुआंधार प्रचार

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज असम में कई जगहों पर कांग्रेस पार्टी के लिए धुआँधार प्रचार किया। उन्होंने असम की जलेश्वर और सेंगा विधानसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए वोट मांगे और कांग्रेस पार्टी को जिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता इस बार बदलाव चाहती है और पिछले दस वर्षों की भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों से परेशान हो चुकी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा शासनकाल में भ्रष्टाचार चरम पर रहा और असम की संपदा को लूटा गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि कांग्रेस सरकार बनने पर सभी भ्रष्टाचार मामलों की जांच करवाई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासन में असम विकास की दौड़ में पिछड़ गया है और राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।

    मुख्यमंत्री ने गायक जुबीन गर्ग की संदिग्ध मौत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मामले में अब तक की कार्रवाई से असम की जनता संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार बनने के 100 दिनों के भीतर इस मामले में न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कांग्रेस को देशहित में काम करने वाली पार्टी बताते हुए कहा कि भाजपा धर्म और जाति के आधार पर राजनीति करती है।

    मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी के घोषणा-पत्र का ज़िक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार बनने पर असम में अपना व्यवसाय शुरू करने वाली प्रत्येक महिला को 50,000 रुपये की प्रारंभिक सहायता दी जाएगी। इसके साथ ही बुजुर्गों को हर महीने 1,250 रुपये की पेंशन प्रदान की जाएगी, जिसके लिए एक अलग विभाग का गठन किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक परिवार को इलाज के लिए 25 लाख रुपये तक की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी असम की जनता से किए हर वादे को निभाएगी।

  • वन विस्तार की ओर हिमाचल सरकार का बड़ा कदम, CM Sukhu ने चलाया खास मिशन

    वन विस्तार की ओर हिमाचल सरकार का बड़ा कदम, CM Sukhu ने चलाया खास मिशन

    शिमला: प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में एक दूरदर्शी और महत्त्वाकांक्षी पहल के रूप में ‘मिशन 32 प्रतिशत’ की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में इस मिशन के तहत वर्ष 2030 तक राज्य के वन आवरण को 29.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह निर्णय ‘‘हिमाचल को हरित हिमालय राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा निर्णय है’’ और इससे जैव विविधता बढ़ेगी। यह लक्ष्य केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और सतत विकास सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

    हिमाचल में वनावरण को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने गत तीन वर्षों में कई अभिनव पहल की हैं, जो वन विस्तार, संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को एकीकृत करती हैं। इनमें मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस योजना का उद्देश्य बंजर और अनुपयोगी पहाड़ियों को हरित आवरण में बदलना है। इस योजना के पहले वर्ष में ही लगभग 600 हेक्टेयर बंजर भूमि पर पौधरोपण किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से वन भूमि पर पौधरोपण किया जा रहा है, जिसमें 60 प्रतिशत पौधे फलदार प्रजातियों के शामिल हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भविष्य में आय के स्रोत भी सृजित हो रहे हैं।

    इसी क्रम में राजीव गांधी वन संवर्धन योजना वन क्षेत्र के पुनर्जीवन की दिशा में एक मजबूत कदम है। इस योजना के तहत वन भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है और पौधों की देखभाल के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। लोगों और संस्थाओं को प्रति हेक्टेयर एक लाख 20 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण और जीवितता दर सुनिश्चित की जा सके। यह योजना स्थानीय स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और युवाओं के माध्यम से धरातल पर उतारी जा रही है जिससे उन्हें रोजगार भी उपलब्ध हुआ है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

    सरकार ने हरित विकास को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए ग्रीन एडॉप्शन योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत निजी उद्यम, कंपनियां और गैर-सरकारी संगठन बंजर वन भूमि को गोद लेकर वहां पौधरोपण और संरक्षण कार्य करेंगे। यह पहल कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी को प्रोत्साहन प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रही है। इससे सरकारी संसाधनों पर निर्भरता कम होती है और बड़े स्तर पर हरित परियोजनाओं को गति मिलती है।

    इन सभी पहलों का समेकित प्रभाव राज्य को ‘ग्रीन हिमाचल’ की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। वन आवरण में वृद्धि के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मदद मिल रही है।बजट 2026-27 में ‘मिशन 32 प्रतिशत’ को केंद्र में रखना और वनों के संरक्षण
    और संवर्धन के लिए अन्य कदम व नीतियां स्पष्ट करती हैं कि हिमाचल प्रदेश सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को संबल प्रदान कर रही है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण की नींव भी है।

     

     

  • लोक भवन में तीन राज्यों का स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया गया

    लोक भवन में तीन राज्यों का स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया गया

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लोक भवन में आयोजित राजस्थान, ओडिशा एवं बिहार के राज्य स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य राज्यों के बीच सांस्कृतिक एकता एवं भावनात्मक जुड़ाव को प्रोत्साहित करना है। राज्यपाल ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए विशिष्ट अतिथियों को भाईचारे एवं एकता की भावना के प्रतीक के रूप में पारंपरिक हिमाचली टोपी एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

    कार्यक्रम में राजस्थान, ओडिशा एवं बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करती आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गई। इन राज्यों से संबंधित सरकारी कर्मचारियों ने हिमाचल प्रदेश में अपने कार्यकाल एवं जीवन से जुड़े अनुभव साझा किए, जिससे उन्हें यहां प्राप्त आत्मीयता, सहयोग एवं अपनत्व की भावना का पता चलता है। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की शक्ति उसकी ‘विविधता में एकता’ में निहित है। उन्होंने कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ जैसी पहलें विभिन्न राज्यों के लोगों के बीच आपसी समझ और सम्मान को बढ़ावा देकर देश की सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करती हैं।

    गुप्ता ने कहा कि बिहार, राजस्थान एवं ओडिशा अपनी प्राचीन सभ्यताओं, समृद्ध इतिहास और जीवंत सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं। एक-दूसरे की संस्कृति, भाषा और परंपराओं को समझना राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। राज्यपाल ने कहा कि इन राज्यों के लोगों ने हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान से सौहार्द, आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिलता है, जिससे राष्ट्र की सामाजिक संरचना और सुदृढ़ होती है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने लोक भवन, शिमला को सप्ताह में दो दिन आम जनता के लिए खोलने की घोषणा भी की। इस पहल का उद्देश्य लोक भवन को जनता के और समीप लाना तथा नागरिकों में इस संस्थान के प्रति अपनत्व और जुड़ाव की भावना विकसित करना है। लोक भवन केवल आधिकारिक कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यहां जनता की आकांक्षाओं और सहभागिता की भावना भी प्रदर्शित होनी चाहिए। कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज भी उपस्थित थे।

     

  • ‘मैं जनता का सेवक हूं, किसी कारोबार से मेरा कोई लेना-देना नहीं’: मुख्यमंत्री

    ‘मैं जनता का सेवक हूं, किसी कारोबार से मेरा कोई लेना-देना नहीं’: मुख्यमंत्री

    लुधियाना: Bhagwant Singh Mann ने पंजाब की खेती के भविष्य को लेकर बड़ा बयान देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को निर्णायक बदलाव का माध्यम बताया। Punjab Agricultural University में आयोजित राज्य स्तरीय किसान मेले को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेती अब अपनी सीमाओं तक पहुंच चुकी है और किसानों की आय बनाए रखना मुश्किल हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई तकनीक के जरिए खेती को लाभदायक बनाया जा सकता है, जिससे उत्पादन बढ़ेगा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव भी कम होगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार किसानों के हित में कई ठोस कदम उठा रही है, जिनमें बेहतर सिंचाई व्यवस्था, दिन के समय बिजली आपूर्ति और फसलों का उचित मूल्य शामिल है। उन्होंने बताया कि राज्य में नहरों का विस्तार, मरम्मत और आधुनिकीकरण तेजी से किया गया है, जिससे लाखों एकड़ क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा बढ़ी है। साथ ही गेहूं और धान की खरीद के लिए किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

    वहीं, विपक्ष पर निशाना साधते हुए भगवंत मान ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों की नीतियों के कारण पंजाब संकट में पहुंचा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता फिर से राज्य को पीछे ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी सरकार विकास और जनकल्याण के रास्ते पर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया कि किसानों, महिलाओं और आम लोगों के हित में योजनाएं लगातार लागू की जाएंगी, ताकि पंजाब को फिर से समृद्ध बनाया जा सके।

     

     

     

  • राज्य सरकार ने प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने के लिए कैबिनेट रैंक का दर्जा वापस लिया

    राज्य सरकार ने प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने के लिए कैबिनेट रैंक का दर्जा वापस लिया

    शिमला: राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि प्रदेश सरकार ने विभिन्न प्राधिकरणों को दिए गए ‘कैबिनेट रैंक’ के दर्जे को वापस लेने का निर्णय लिया है। इसमें बोर्ड, निगम और आयोगों के चेयरमैन, वाईस चेयरमैन, डिप्टी चेयरमैन तथा प्रधान सलाहकार और राजनीतिक सलाहकार शामिल हैं।

    प्रवक्ता ने बताया कि यह निर्णय प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के तहत लिया गया है। इस निर्णय के साथ ही इन पदों को दिए गए ‘कैबिनेट रैंक’ से संबंधित सभी प्रावधान तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए हैं।

    उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त, संबंधित अधिकारियों के वेतन और मासिक भत्तों का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर, 2026 तक स्थगित रहेगा। प्रवक्ता ने बताया कि इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि इस निर्णय को शीघ्रता से लागू किया जा सके और उनके अधीन सभी विभागों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।

     

  • राज्यपाल ने HPNLU में कर सुधारों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ किया

    राज्यपाल ने HPNLU में कर सुधारों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ किया

    शिमला: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय शिमला में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘भारत में कर सुधारः चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय पर आयोजित सम्मेलन का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के पश्चात विशेषकर उदारीकरण के बाद भारत की कर प्रणाली में व्यापक सुधार किए गए है जिससे कर ढांचा अधिक सरल, पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बना है। हाल ही के वर्षों में प्रशासन के डिजिटलीकरण, फेसलेस असेसमेंट, ऑनलाइन अपील, सरल रिटर्न प्रक्रिया तथा कर दाता चार्टर जैसी पहलों से पारदर्शिता बढ़ी है और कर दाताओं का विश्वास सुदृढ़ हुआ है। ‘विवाद से विश्वास’ जैसी योजनाएं संग्रह के प्रति सहभागितापूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाती है।

    राज्यपाल ने कहा कि उल्लेखनीय प्रगति के बावजूद कर आधार का विस्तार, कर चोरी पर नियंत्रण, डिजिटल अर्थव्यवस्था से उत्पन्न जटिलताओं का समाधान तथा वैश्विक कर प्रतिस्पर्धा के बीच संतुलन बनाए रखना जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। उन्होंने बल देते हुए कहा कि कर सुधार केवल विधिक विषय नहीं है बल्कि यह अर्थशास्त्र, लोक वित्त, प्रशासन और नीति-निर्माण से गहराई से जुड़ा हुआ है। राज्यपाल ने आचार्य चाणक्य के अर्थशास्त्र का उल्लेख करते हुए कहा कि कर व्यवस्था न्यायसंगत, संतुलित एवं लोक-कल्याणकारी होनी चाहिए ताकि नागरिकों पर अनावश्यक बोझ न बने बल्कि उत्पादन और समृद्धि को प्रोत्साहित करे।

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रीति सक्सेना ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा सम्मेलन की मुख्य विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता प्रो. निगम नुग्गेहल्ली, प्रो. एवं रजिस्ट्रार, एनएलएसआईयू बेंगलुरु ने लोक वित्त और शासन की वास्तविक जटिलताओं पर विचार वयक्त करते हुए कहा कि जीएसटी जैसे बड़े सुधारों को बदलती आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप निरंतर विकसित होना चाहिए।
    सम्मेलन संयोजक प्रो. गिरिजेश शुक्ला ने कर प्रणाली के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के प्रयासों, जैसे फेसलेस असेसमेंट और एआई आधारित विश्लेषण पर प्रकाश डालते हुए मध्यम तथा निम्न आय वर्ग पर बोझ डाले बिना कर आधार का विस्तार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। रजिस्ट्रार प्रो. आलोक कुमार, ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

    इससे पूर्व, राज्यपाल ने नव-डिजाइन एचपीएनएलयू लिटिगेशन लैब का उद्घाटन किया तथा विश्वविद्यालय के यूथ रेड क्रॉस द्वारा आयोजित रक्तदान शिविर का भी शुभारंभ किया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष कैप्टन रामेश्वर सिंह ठाकुर, राज्यपाल के सचिव चंद्र प्रकाश वर्मा, शिक्षाविद, प्रतिनिधि, छात्र एवं अन्य गणमान्य उपस्थित थे।