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  • चंडीगढ़ स्थित सरकारी मकानों में रहने वाले कर्मचारियों को देना होगा रूफटॉप सोलर अंडरटेकिंग फॉर्म

    चंडीगढ़ स्थित सरकारी मकानों में रहने वाले कर्मचारियों को देना होगा रूफटॉप सोलर अंडरटेकिंग फॉर्म

    चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों तथा मुख्य प्रशासकों को निर्देश दिए हैं कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा आवंटित सरकारी मकानों में रहने वाले राज्य सरकार के कर्मचारी रूफटॉप सोलर ऊर्जा प्रणाली के उपयोग से संबंधित अपना विकल्प/अंडरटेकिंग फॉर्म 10 जुलाई, 2026 तक अनिवार्य रूप से जमा कराएं। ये निर्देश चंडीगढ़ प्रशासन की हाउस अलॉटमेंट कमेटी से प्राप्त पत्र के बाद जारी किए गए हैं। केंद्र सरकार की पहल के तहत सरकारी आवासीय भवनों में रूफटॉप सोलर प्रणाली की शत-प्रतिशत स्थापना सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि पात्र कर्मचारी निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने-अपने विभागाध्यक्षों के माध्यम से निर्धारित प्रारूप में सहमति प्रपत्र जमा करें, ताकि उन्हें आगे की कार्रवाई के लिए हाउस अलॉटमेंट कमेटी, चंडीगढ़ के कार्यालय को समय पर भेजा जा सके।

    चंडीगढ़ प्रशासन के अनुसार, सोलर उपयोगकर्ता शुल्क (यूजर चार्जेज) के संबंध में सरकारी कर्मचारियों से प्राप्त प्रतिवेदनों के बाद यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत कर्मचारियों को अंडरटेकिंग फॉर्म में निर्धारित विकल्पों में से एक का चयन करना होगा। वे या तो रूफटॉप सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली का उपयोग करने तथा निर्धारित उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान करने के लिए सहमति दे सकते हैं। इसके अलावा वे इस सुविधा का उपयोग नहीं करने का विकल्प भी चुन सकते हैं या यह भी बता सकते हैं कि यह विकल्प उन पर लागू नहीं होता।

    अंडरटेकिंग में यह भी उल्लेख किया गया है कि जो कर्मचारी सोलर ऊर्जा का उपयोग करने का विकल्प चुनेंगे, उन्हें निर्धारित सोलर उपयोगकर्ता शुल्क का भुगतान करना होगा तथा सोलर संयंत्र के रखरखाव के लिए अधिकृत कर्मियों को परिसर में प्रवेश की अनुमति देनी होगी। वहीं, जो कर्मचारी इस सुविधा का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके मामले में रूफटॉप सोलर संयंत्र से बनने वाली बिजली को प्रचलित नियमों के अनुसार ग्रॉस मीटरिंग प्रणाली के माध्यम से विद्युत वितरण लाइसेंसधारी को हस्तांतरित किया जाएगा।

    मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि इन निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए सभी पात्र कर्मचारियों से निर्धारित समयावधि में अंडरटेकिंग फॉर्म प्राप्त कर समय पर हाउस अलॉटमेंट कमेटी को भेजे जाएं। हाउस अलॉटमेंट कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यदि 10 जुलाई, 2026 तक किसी कर्मचारी का अंडरटेकिंग फार्म प्राप्त नहीं होता है, तो यह मान लिया जाएगा कि संबंधित कर्मचारी ने रूफटॉप सोलर ऊर्जा सुविधा के उपयोग के लिए अपनी सहमति प्रदान नहीं की है।

  • 9वीं व 11वीं कक्षा के छात्र/छात्राओं के वार्षिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अपलोड करने की तिथि बढ़ाई

    9वीं व 11वीं कक्षा के छात्र/छात्राओं के वार्षिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अपलोड करने की तिथि बढ़ाई

    चंडीगढ़ : हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी से संबद्धता प्राप्त सभी राजकीय/अराजकीय विद्यालयों/गुरुकुलों/विद्यापीठों द्वारा शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए कक्षा 9वीं व 11वीं के छात्र/छात्राओं के वार्षिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अपलोड करने की अंतिम तिथि 7 जुलाई, 2026 निर्धारित की गई थी, जिसे अब बढ़ाकर 24 जुलाई, 2026 कर दिया गया है। ऐसे विद्यालय जिन द्वारा कक्षा 9वीं व 11वीं की वार्षिक परीक्षा के अंक ऑनलाइन अपलोड नहीं किए हैं वे 24 जुलाई, 2026 तक अंक अपलोड कर सकते हैं।

    बोर्ड के अध्यक्ष  शंकर लाल धूपड़ ने बताया कि सभी संबंधित संस्थाएं बोर्ड की आधिकारिक वेबसाईट www.bseh.org.in पर दिए गए लिंक पर आई.डी./पासवर्ड से लॉगिन करते हुए समय रहते अंक अपलोड करना सुनिश्चित करें। उन्होंने आगे बताया कि यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित तिथि में छात्र/छात्राओं के अंक अपलोड नहीं किए जाते हैं, तो ऐसे छात्र/छात्राओं को बोर्ड की कक्षा 10वीं एवं 12वीं की आगामी वार्षिक परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

    उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी कठिनाई के लिए दूरभाष नं 01664-254300, 254302 पर किसी भी कार्यदिवस में 09:00 बजे से 05:00 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त एनरोलमेंट शाखा की ई-मेल आई.डी. asenr@bseh.org.in के माध्यम से किसी भी कार्य दिवस में संपर्क कर सकते हैं।

  • हरियाणा ने लोक अवसंरचना को दिव्यांगजनों, बुजुर्गों सहित सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाना किया सुनिश्चित

    हरियाणा ने लोक अवसंरचना को दिव्यांगजनों, बुजुर्गों सहित सभी नागरिकों के लिए सुलभ बनाना किया सुनिश्चित

    चंडीगढ़ : लोक अवसंरचना को समावेशी और बाधा-मुक्त बनाने के उद्देश्य से हरियाणा सरकार ने ‘राज्यों को पूंजीगत निवेश के लिए विशेष सहायता’ (एसएएससीआई) योजना के तहत वित्त पोषित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सार्वभौमिक सुलभता मानकों का अनुपालन अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र प्रायोजित इस योजना के तहत सभी पात्र परियोजनाओं के लिए ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ और ‘भारत में सार्वभौमिक सुलभता के लिए सुसंगत दिशानिर्देश और मानक, 2021’ का अनुपालन करना आवश्यक होगा। यह कदम मौजूदा इमारतों में बाद में बदलाव करने के बजाय, योजना और डिजाइन के स्तर पर ही सुलभता सुविधाओं को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। इसके तहत लोक निर्माण विभाग और वास्तुकला विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि नई सरकारी इमारतों के साथ-साथ नवीनीकरण और मरम्मत कार्यों सहित सभी पात्र परियोजनाओं के डिजाइन और निष्पादन में सुलभता मानकों को शामिल किया जाए।

    डॉ. मिश्रा ने कहा कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के पास लोक अवसंरचना का एक बड़ा नेटवर्क है, जिसमें मिनी सचिवालय भवन, तहसील और उप-तहसील कार्यालय परिसर, सरकारी आवासीय क्वार्टर और पारगमन फ्लैट शामिल हैं। विभाग यह सुनिश्चित करेगा कि उसके प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आने वाली सभी परियोजनाओं में सुलभता मानदंडों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि योजना और डिजाइन के चरण में ही सुलभता उपायों को एकीकृत करने से (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम, 2016 के वैधानिक प्रावधानों का अनुपालन सुनिश्चित होगा, साथ ही निर्माण के बाद होने वाले महंगे रैट्रोफिटिंग (संशोधनों) की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही सार्वभौमिक डिजाइन सिद्धांतों को अपनाने से ऐसा बुनियादी ढांचा तैयार करने में मदद मिलेगी जो हर नागरिक के लिए समावेशी, टिकाऊ और सुलभ हो।

    उन्होंने कहा कि सार्वभौमिक सुलभता केवल दिव्यांगजनों तक ही सीमित नहीं है। सार्वभौमिक सुलभता सिद्धांतों पर डिजाइन किया गया बुनियादी ढांचा वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और अस्थायी रूप से चलने-फिरने में असमर्थ लोगों को भी लाभ पहुंचाता है। उन्होंने कहा कि रैंप, सुलभ प्रवेश द्वार, लिफ्ट, स्पर्श पथ, हैंड्रेल्स, सुलभ शौचालय और उचित साइनबोर्ड जैसी विशेषताएं सरकारी भवनों को समाज के सभी वर्गों के लिए सुरक्षित, अधिक सुविधाजनक और उपयोग में आसान बनाती हैं। उन्होंने कहा कि लोक अवसंरचना में सुलभता को मुख्यधारा में लाने से न केवल (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम की वैधानिक आवश्यकताएं पूरी होंगी, बल्कि समावेशी और समान विकास के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी।

    इस निर्णय के साथ हरियाणा ने अपने बुनियादी ढांचे के नियोजन को ‘सुगम्य भारत अभियान’ (के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप संरेखित किया है। इस कदम से भविष्य की लोक अवसंरचना परियोजनाओं के लिए सार्वभौमिक सुलभता को बाद के विचार के बजाय एक मुख्य डिजाइन आवश्यकता बनाकर एक नया मानदंड स्थापित करने की उम्मीद है।

     
  • प्राकृतिक खेती विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तंभ – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

    प्राकृतिक खेती विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तंभ – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

    चंडीगढ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने प्रदेश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज एक बड़ा ऐलान किया है, उन्होंने कहा कि प्रदेश में प्रकृति  अन्न प्रेरक किसान कमेटी बनाई जाएगी, यह कमेटी हर जिला में होगी। इस कमेटी का मुख्य कार्य किसानों से संपर्क करना, उनके फार्म पर जाना और सरकार से सामंजस्य करवाकर प्राकृतिक खेती के साथ जोड़ने का कार्य होगा। यह एक तरह से प्राकृतिक खेती के प्रेरक एम्बेस्डर होंगे।

    मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी बुधवार को पंचकूला में हरियाणा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती संवाद को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान किसानों से संवाद भी किया, मुख्यमंत्री ने किसानों से मिले सुझावों को जल्द पूरा करवाने की दिशा में काम करने का आश्वासन भी दिया। साथ ही उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती करने वाले जिन किसानों ने गाय खरीदने के लिए सब्सिडी के लिए आवेदन किया है, उन्हें सब्सिडी जारी कर दी जाए।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती करने का एक तरीका नहीं, बल्कि किसान, प्रकृति और समाज के बीच टूट चुके संबंधों को फिर से मजबूत करने का अभियान है। यह धरती माता की सेवा, खेती की लागत कम करने, जल और मिट्टी के संरक्षण तथा आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का माध्यम है। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती के ब्रांड एंबेसडर बनने का आह्वान करते हुए कहा कि अब केवल चिंतन नहीं, बल्कि अमल करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का समय है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समय-समय पर किसानों से सीधा संवाद करेगी और प्राकृतिक खेती के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती पर प्रत्येक माह इसी प्रकार के संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। उन्होंने कहा कि बड़े सेमिनारों में गुजरात के राज्यपाल आचार्य  देवव्रत को भी आमंत्रित किया जाएगा ताकि किसान उनके अनुभवों से लाभान्वित हो सकें।

    उन्होंने कहा कि आज का सेमिनार केवल प्राकृतिक खेती की तकनीक सीखने का अवसर नहीं है, बल्कि किसान और प्रकृति के बीच सदियों पुराने अटूट रिश्ते को फिर से मजबूत करने का अभियान है। पहले खेती का संबंध धरती माता और गौ माता से था। यही संबंध किसान के जीवन में समृद्धि और खुशहाली लेकर आता था, लेकिन समय के साथ यह रिश्ता कमजोर हुआ और आज प्राकृतिक आपदाएं तथा पर्यावरणीय संकट हमारे सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़े हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मानव ने विकास तो किया है, लेकिन कहीं न कहीं धरती का अत्यधिक दोहन भी किया है। आज सवाल यह नहीं है कि खाद और कीटनाशकों की कमी है, बल्कि यह है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए कैसी धरती और कैसा पर्यावरण छोड़कर जा रहे हैं। हमारे पूर्वज हमें भरपूर भूजल और उपजाऊ मिट्टी देकर गए थे, लेकिन आज कई क्षेत्रों में भूजल स्तर हर सीजन में 20 से 25 फुट तक नीचे जा रहा है। इस पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पहले श्रमिक मंडियों में अनाज की भारी-भरकम बोरियां आसानी से उठा लेते थे, लेकिन आज बदलती जीवनशैली, रासायनिक खेती और प्राकृतिक असंतुलन के कारण सभी के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इसलिए खेती की दिशा बदलना समय की आवश्यकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का स्पष्ट विजन है कि प्राकृतिक खेती 21वीं सदी की आवश्यकता है। यह केवल खेती की नई पद्धति नहीं, बल्कि धरती बचाने का अभियान है। यह किसानों की लागत कम करने, पर्यावरण संरक्षण करने और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्ध भारत बनाने का माध्यम है। भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है और उसकी सेवा करना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे प्राकृतिक खेती के एंबेसडर बनकर गांव-गांव लोगों को इसके लाभ बताएं। उन्होंने कहा कि केवल चर्चा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि स्वयं भी प्राकृतिक खेती अपनानी होगी और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना होगा। उन्होंने कहा कि किसानों को नकली बीज और दवाइयां ना मिले, इसे रोकने के लिए राज्य सरकार ने विधानसभा में कड़ा कानून बनाया है। अब यदि कोई किसान को नकली बीज बेचते हुए पाया जाता है तो उसे पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने देशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का अभियान शुरू किया है। हरियाणा सरकार ने भी किसानों से सुझाव लेकर तैयार किए गए राज्य बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की उपज की बिक्री में किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। सरकार ने पहले ही घोषणा की है कि प्राकृतिक खेती से तैयार उपज के लिए मंडियों में अलग स्थान उपलब्ध कराया जाएगा तथा हैफेड इसकी खरीद करेगा। इसकी व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में क्षेत्रवार बागवानी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। गन्नौर मंडी में प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए अलग शेड बनाया गया है तथा राज्य में चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं, जहां आधुनिक बागवानी और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रही है। मिट्टी की उर्वरता लगातार घट रही है और खेती की लागत बढ़ रही है। इसलिए कृषि वैज्ञानिकों को देशी और गुणवत्तापूर्ण बीज विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। दुनिया के अनेक विकसित देश अब रासायनिक खेती से दूरी बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि भारत के पास ऋषि-मुनियों की परंपरा, किसानों का अनुभव और प्राकृतिक खेती का समृद्ध ज्ञान पहले से मौजूद है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में प्राकृतिक खेती सबसे मजबूत स्तंभ साबित होगी। इसके लिए सरकार और किसानों को मिलकर जन आंदोलन के रूप में इस अभियान को आगे बढ़ाना होगा।

    प्राकृतिक खेती किसानों को बनाएगी आत्मनिर्भर और कर्जमुक्त- श्याम सिंह राणा

     हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों को कर्जमुक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का प्रभावी माध्यम है, जबकि रासायनिक खेती किसानों की लागत बढ़ाकर उन्हें कर्ज की ओर धकेलती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा लागू की जाने वाली प्रत्येक योजना और नीति जनकल्याण को केंद्र में रखकर तैयार की जाती है। नई पहल का प्रारंभिक स्तर पर विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन किसानों को यह समझना चाहिए कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने का उद्देश्य उनकी आय बढ़ाना, खेती की लागत घटाना और कृषि को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है।  राणा ने कहा कि रासायनिक खेती में किसानों की कमाई का बड़ा हिस्सा उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि रसायन बनाने वाली कंपनियों के पास चला जाता है। इसके विपरीत प्राकृतिक खेती में बाहरी संसाधनों पर निर्भरता कम होने से खेती की लागत घटती है और किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनता है।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान में रासायनिक, जैविक और प्राकृतिक खेती की तीन प्रमुख पद्धतियां प्रचलित हैं। जैविक खेती में अधिक मात्रा में गोबर एवं अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है, जबकि प्राकृतिक खेती कम लागत वाली, आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल खेती की प्रणाली है। इसी कारण राज्य सरकार प्राकृतिक खेती के विस्तार के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी प्राकृतिक खेती को जनआंदोलन बनाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वरता बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्राकृतिक खेती समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप वर्ष 2047 तक देश में प्राकृतिक खेती का दायरा 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि प्राकृतिक खेती की शुरुआत अपने पशुओं के चारे से करें और चारे के उत्पादन में भी कीटनाशकों के उपयोग से बचें। उन्होंने कहा, मैं स्वयं एक किसान हूं और खेती से जुड़ी चुनौतियों तथा किसानों की जरूरतों को भली-भांति समझता हूं।

    प्राकृतिक खेती का अपना वैज्ञानिक तंत्र हैइसे समझना हर किसान के लिए जरूरी- धर्मपाल यादव

    कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के प्रगतिशील किसान धर्मपाल यादव ने कहा कि कृषि करना और कृषि को समझना, दोनों अलग-अलग बातें हैं। प्रकृति की धारा को समझकर उसके अनुरूप चलना या उसे सकारात्मक दिशा देना ही वास्तविक कृषि ज्ञान है। यदि खेती को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाएगा, तो उसके पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की अनदेखी होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1907 में भूजल स्तर उस गहराई पर था, जहां वह सदियों से बना हुआ था, लेकिन रासायनिक खेती के बढ़ते प्रयोग से आज भूजल स्तर कई फीट नीचे चला गया है। इसके साथ ही पर्यावरण भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। बढ़ता प्रदूषण भी आज एक बड़ी समस्या बन गया है। धर्मपाल यादव ने कहा कि रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों के चलते आज अस्पतालों की संख्या बढ़ रही है और लोगों में गंभीर बीमारियां भी बढ़ी हैं। अब दुनिया भी प्राकृतिक खेती की ओर लौटने की आवश्यकता महसूस कर रही है और बड़े शहरों से लोग गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का अपना एक वैज्ञानिक तंत्र है, जिसे समझना आज हर किसान के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि वे अपने खेतों में कभी भी कीटनाशकों या अन्य रासायनिक दवाइयों का प्रयोग नहीं करते। उनका मानना है कि कीट प्रबंधन के लिए भी प्राकृतिक उपाय पर्याप्त हैं और रासायनिक दवाइयों पर निर्भरता कम करनी चाहिए। उन्होंने किसानों के साथ अपने उत्पादों के विपणन (मार्केटिंग) मॉडल की भी जानकारी साझा की और प्राकृतिक खेती से बेहतर आय प्राप्त करने के अपने अनुभव बताए।

    मुख्यमंत्री का जताया आभारप्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए दिए सुझाव

    कार्यक्रम के दौरान किसानों ने मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी के समक्ष प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा सकने वाले विभिन्न सुझाव साझा किए। किसानों ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं किसानों के साथ आमने-सामने बैठकर संवाद करना उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उनका कहना था कि जब प्रदेश का मुखिया किसानों से सीधे संवाद करता है और उनकी बात सुनता है, तो इससे किसानों का मनोबल बढ़ता है तथा उन्हें यह विश्वास मिलता है कि राज्य सरकार उनके हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसानों ने राज्य सरकार की किसान हितैषी नीतियों तथा किसानों के कल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से मंडी व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए उठाए गए कदमों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इससे किसानों के हितों को मजबूती मिली है। किसानों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार आगे भी इसी प्रकार सहयोग करती रहेगी।

    इसी क्रम में करनाल के एक किसान ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं और इससे उन्हें अच्छा लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में उठाए जा रहे कदमों के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए सुझाव दिया कि कृषि की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में भी प्राकृतिक खेती को शामिल किया जाना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ी शुरुआत से ही टिकाऊ, पर्यावरण-अनुकूल और रसायन-मुक्त खेती की वैज्ञानिक समझ विकसित कर सके। इस दौरान कृषि विभाग के निदेशक  राजनारायण कोशिक, ओएसडी वीरेंद्र बढ़खालसा,  पंचकूला के मेयर  श्याम लाल बंसल, पार्टी की नेता श्रीमती बंतो कटारिया, मुख्यमंत्री के मीडिया सचिव श्री प्रवीण आत्रेय, शिवालिक विकास बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश देवीनगरिया, जिलाध्यक्ष  अजय  भी मौजूद थे।

  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आइकिया इंडिया के सीईओ  ने  की मुलाकात

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से आइकिया इंडिया के सीईओ  ने  की मुलाकात

    चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से बुधवार को चंडीगढ़ स्थित संत कबीर कुटीर में आइकिया इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पैट्रिक एंटोनी के नेतृत्व में आए स्वीडन के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। बैठक में हरियाणा और आइकिया के बीच सहयोग को और सुदृढ़ बनाने तथा हरियाणा में भविष्य के निवेश अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के दौरान पैट्रिक एंटोनी ने हरियाणा में आइकिया की परियोजनाओं के निर्माण कार्यों तथा अन्य संबंधित प्रक्रियाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन में राज्य सरकार द्वारा दिए गए निरंतर सहयोग के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का  आभार व्यक्त किया। उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय, विदेश सहयोग विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों द्वारा नियमित स्वीकृतियों में तेजी लाने और कंपनी की आवश्यकताओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए दिए गए सहयोग की भी सराहना की।

    उल्लेखनीय है कि आइकिया स्वीडन की अग्रणी होम फर्निशिंग कंपनी है। भारत कंपनी के सबसे महत्वपूर्ण विकासशील बाजारों में शामिल है। साथ ही, कंपनी की संपूर्ण वैल्यू-चेन उपस्थिति के लिहाज से भी भारत का विशेष महत्व है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा में आइकिया द्वारा निवेश करने संबंधी प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में निवेश करने वाली कंपनियों को बेहतर अवसर और सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। भविष्य की विस्तार योजनाओं के लिए कंपनी को हरसंभव सहयोग प्रदान किया जायेगा।

    बैठक में पैट्रिक एंटोनी ने मुख्यमंत्री को अगले वर्ष गुरुग्राम में आइकिया स्टोर के निर्माण कार्य पूरा होने के बाद उसके उद्घाटन के लिए आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री ने हरियाणा के प्रति आइकिया की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना वैश्विक कंपनियों के लिए हरियाणा को एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में और अधिक सुदृढ़ करेगी। उल्लेखनीय है कि इस स्टोर की आधारशिला हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय मंत्री  मनोहर लाल ने रखी थी।

    कंपनी वर्तमान में गुरुग्राम में अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से हरियाणा में लगभग 3,500 से 4,000 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है, जिससे प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 10,000 रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। लगभग 10 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही यह परियोजना भारत में आइकिया के प्रमुख निवेशों में से एक होगी, जिसमें एक ही परिसर में रिटेल, कार्यालय परिसर तथा समुदाय-केंद्रित अनुभवों का समावेश होगा। हरियाणा सरकार भी कंपनी के साथ मिलकर अपने सुदृढ़ कौशल विकास तंत्र के माध्यम से कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य कर रही है, ताकि इस परियोजना से सृजित रोजगार के अवसरों का लाभ राज्य के युवाओं को मिल सके।

    बैठक में मुख्यमंत्री  को अवगत करवाया गया कि हरियाणा का विदेश सहयोग विभाग राज्य के अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नोडल विभाग है, जो वैश्विक साझेदारियों को बढ़ावा देने, कूटनीतिक संपर्कों को सुदृढ़ करने तथा प्रवासी हरियाणवियों को आवश्यक सहयोग प्रदान करता है। यह विभाग राज्य सरकार के ‘गो ग्लोबल एप्रोच’ के माध्यम से हरियाणा को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने  पैट्रिक एंटोनी को मद्भगवद्गीता  की प्रति भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के सलाहकार पवन कुमार चौधरी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

  • हरियाणा में एक आईएएस, एक एचसीएस अधिकारी का तबादला

    हरियाणा में एक आईएएस, एक एचसीएस अधिकारी का तबादला

    चंडीगढ़ : 7 जुलाई-हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से एक आईएएस तथा एक एचसीएस अधिकारी के तबादला एवं नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा आदेश जारी किए गए हैं।  जयदीप कुमार, अतिरिक्त सचिव, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग को सैनिक एवं अर्धसैनिक कल्याण विभाग का निदेशक तथा अतिरिक्त सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग का निदेशक भी लगाया गया है।

    विराट को अतिरिक्त उपायुक्त-सह-जिला नागरिक संसाधन सूचना अधिकारी, अंबाला एवं एपीजेड, अंबाला के विशेष अधिकारी के दायित्वों से मुक्त कर दिया गया है। वे अब केवल मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव के ओएसडी के रूप में कार्य करते रहेंगे।

  • पल्स पोलियो अभियान में 36 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी दवा

    पल्स पोलियो अभियान में 36 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी दवा

    हरियाणा में 28 जून से शुरू होगा अभियान

    चंडीगढ़ : राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन , हरियाणा के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि 28 जून 2026 से पल्स पोलियो के लिए ‘राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस’ (NID) का आयोजन किया जा रहा है। इस पल्स पोलियो अभियान के दौरान, हरियाणा में लगभग 36 लाख बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि 28 जून को 17,331 बूथ स्थापित किए जाएंगे, और इसके बाद के दिनों में सभी पात्र लाभार्थियों को कवर करने के लिए 34,000 टीमें घर-घर जाएंगी। अभियान के पहले दिन प्रमुख स्थानों पर पोलियो की खुराक देने के लिए बूथ बनाए जाएंगे, जबकि 29 और 30 जून को टीमें छूटे हुए बच्चों को कवर करने के लिए घर-घर जाएंगी। गतिविधि की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए बूथों की निगरानी और चेकिंग के लिए लगभग 3,400 सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। इसके साथ ही, गतिविधियों की निगरानी के लिए राज्य मुख्यालय के अधिकारियों को भी जिलों में तैनात किया गया है।

    डॉ. वीरेंद्र यादव ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि वे इस राष्ट्रीय अभियान का समर्थन करें, जिसका उद्देश्य हमारे देश को पोलियो मुक्त बनाए रखना और पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान से इसके आयात के जोखिम को कम करना है, जहाँ अभी भी पोलियो के मामले सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोग 28 जून को अपने 0-5 वर्ष के पात्र बच्चों को टीकाकरण के लिए नजदीकी पोलियो बूथ पर लाएं और अगले दिनों में छूटे हुए बच्चों को कवर करने के लिए अपने घरों का दौरा करने वाली स्वास्थ्य टीमों को सहयोग दें। स्वास्थ्य विभाग ने सभी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन्स किंडरगार्टन और क्रेच से भी अपील की है कि वे सभी पात्र बच्चों को पोलियो ड्रॉप्स पिलाने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों के दौरे को सुगम बनाएं। डॉ. वीरेंद्र यादव ने यह भी बताया कि इस दौर के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए सभी संबंधित विभाग जैसे महिला एवं बाल स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायती राज, शहरी स्थानीय निकाय, जनसंपर्क, ईएसआई, श्रम, आयुष, चिकित्सा शिक्षा, परिवहन, रेलवे, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स  और रोटरी आदि भी आवश्यक सहयोग प्रदान करेंगे।

  • सदनों में व्यवधान लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती, जनविश्वास बढ़ाना हमारी जिम्मेदारी

    चंडीगढ़ : कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (CPA) इंडिया रीज़न ज़ोन-II (नॉर्थ ज़ोन) का द्वितीय सम्मेलन, जिसका उद्घाटन कल लोक सभा अध्यक्षओम बिरला द्वारा किया गया था, आज हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष के समापन संबोधन के साथ संपन्न हुआ। समापन समारोह को संबोधित करते हुए लोक सभा अध्यक्ष  ने कहा कि सदनों का बार-बार बाधित होना और व्यवधान उत्पन्न होना लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने रेखांकित किया कि इस समस्या का समाधान विधायी संस्थाओं के भीतर जनअपेक्षाओं के अनुरूप आचरण, संवाद और सार्थक चर्चा को बढ़ावा देने में निहित है। जनता का विश्वास मजबूत करना आज सभी जनप्रतिनिधियों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों का आह्वान किया कि विधायी संस्थानों में उनका आचरण अनुकरणीय होना चाहिए, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति का कल्याण सुनिश्चित किया जा सके। बिरला ने कहा, “जैसा नेतृत्व का आचरण और व्यवहार होता है, वैसा ही समाज बनता है। जनता ने हमें चुनकर भेजा है, इसलिए हमारे आचरण का सीधा प्रभाव समाज पर पड़ता है।” उन्होंने अपेक्षा व्यक्त की कि सभी विधायक अपने-अपने राज्यों और संस्थाओं में इन संकल्पों को आत्मसात कर आगे बढ़ेंगे। दो दिवसीय सम्मेलन के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए बिरला ने कहा कि विभिन्न राज्यों से आए जनप्रतिनिधियों और नीति-निर्माताओं ने यहाँ अपने अनुभव, दृष्टिकोण और नवाचार साझा किए। उन्होंने बताया कि यह सम्मेलन चार महत्वपूर्ण संकल्पों के साथ संपन्न हुआ है, जिनका उद्देश्य विधायी संस्थाओं को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुख बनाना है।

    उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना मजबूत संसदीय और विधायी संस्थाओं पर ही आधारित है। इसके लिए जनभागीदारी बढ़ाना, तकनीक का अधिकतम उपयोग, विधायकों का क्षमता संवर्धन, नीतियों एवं कानूनों के निर्माण में नागरिकों की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा संविधान एवं संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि सम्मेलन में पारित सभी संकल्प भविष्य की एक मजबूत नींव हैं, जिनके माध्यम से देश की विधायी और लोकतांत्रिक संस्थाएँ जनता के सहयोग से आगे बढ़ेंगी।

    उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा उद्देश्य एक ऐसे सहभागी लोकतंत्र का निर्माण करना है, जिसमें राज्यों के विकास को विशेष महत्व दिया जाए, क्योंकि राज्यों के समग्र विकास से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। भारत के संघीय ढांचे में राज्य और केंद्र मिलकर ही योजनाओं, कानूनों और नीतियों के माध्यम से लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज नए दृष्टिकोण और नए विचारों के साथ परिवर्तन लाना समय की मांग है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि सम्मेलन में लगभग 40 वक्ताओं ने इस दिशा में सार्थक सुझाव दिए हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि यदि हम इन विचारों पर तत्परता से कार्य प्रारंभ करते हैं, तो देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जनता की भागीदारी और विश्वास दोनों में वृद्धि होगी।

    बिरला ने कहा कि 21वीं सदी भारत की सदी है और हमें युवाओं, महिलाओं तथा समाज के सभी वर्गों की आकांक्षाओं को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में युवाओं और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, विद्यार्थी जीवन से ही संविधान और कर्तव्यबोध के प्रति जागरूकता विकसित करने तथा राज्यों के विकास को राष्ट्रीय विकास का आधार बनाने पर विशेष बल दिया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन से प्राप्त नए विचार और संकल्प विकसित भारत के निर्माण में नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करेंगे।

    इस दो दिवसीय CPA इंडिया रीज़न ज़ोन-II (नॉर्थ ज़ोन) कॉन्फ्रेंस में देश के 12 राज्यों की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसमें सीपीए ज़ोन–II के सदस्य राज्यों—हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली—के अतिरिक्त मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गोवा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, सिक्किम और पश्चिम बंगाल जैसी अन्य राज्य विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारियों ने भी सहभागिता की। इस अवसर पर राज्य सभा के उपसभापति हरिवंश और हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण  ने भी अपने विचार व्यक्त किए। हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष कृष्ण लाल मिड्ढा ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

  • चंडीगढ़ में 8-9 जून 2026 को होने वाले सीपीए इंडिया रीजन ज़ोन II सम्मेलन में पारित संकल्प

    चंडीगढ़ में 8-9 जून 2026 को होने वाले सीपीए इंडिया रीजन ज़ोन II सम्मेलन में पारित संकल्प

    हम, राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) इंडिया क्षेत्र, ज़ोन-II के पीठासीन अधिकारी, चंडीगढ़ में 9 जून 2026 को आयोजित ज़ोनल सम्मेलन में निम्नलिखित संकल्पों को स्वीकार करते हैं।

    संकल्प 1

    आउटरीच कार्यक्रम और जन-जागरूकता पहल के माध्यम से विधि निर्माताओं और नागरिकों के बीच निकटता सुदृढ़ करना जिसका उद्देश्य संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देना और तकनीक का ज़िम्मेदारी से उपयोग करना है, ताकि एक ऐसा समाज निर्मित हो जो जानकार, जागरूक और सशक्त हो तथा ‘विकसित भारत-2047’ के विज़न में प्रभावी योगदान दे सके।

    संकल्प 2

    निरंतर प्रोफेशनल प्रक्षिशण, बेहतरीन संव्यवहारों के आदान-प्रदान, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और बेहतर अनुसंधान सपोर्ट के माध्यम से विधि निर्माताओं की क्षमता को सुदृढ़ करना। सम्मेलन ने माना कि प्रभावी शासन के लिए जानकार और सक्षम विधि निर्माता आवश्यक हैं।

    संकल्प 3

    विधायी निगरानी को सुदृढ़ करना, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में जनता का विश्वास बढ़ाना और नीति बनाने व उसे लागू करने में नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना।

    संकल्प 4

    सार्वजनिक सेवा प्रदायगी में पारदर्शिता, कार्य-कुशलता और सुलभता बढ़ाने के लिए डिजिटल तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डाटा-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया के अधिक उपयोग को बढ़ावा देना।

  • हरियाणा के राज्यपाल ने सीपीए नॉर्थ ज़ोन सम्मेलन में ‘विकसित भारत’ के चार स्तंभों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का किया आह्वान

    हरियाणा के राज्यपाल ने सीपीए नॉर्थ ज़ोन सम्मेलन में ‘विकसित भारत’ के चार स्तंभों के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का किया आह्वान

    चंडीगढ़ : हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने आज विधायकों एवं जनप्रतिनिधियों से ‘विकसित भारत’ कार्यक्रम के चार प्रमुख स्तंभों युवा, गरीब, महिला और किसान के प्रति स्वयं को समर्पित करने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा परिकल्पित समावेशी एवं विकसित भारत का सपना हमारी सामूहिक राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। राज्यपाल चंडीगढ़ में आयोजित दूसरी कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन (सीपीए), इंडिया रीजन ज़ोन-II नॉर्थ ज़ोन सम्मेलन के समापन सत्र में पीठासीन अधिकारियों एवं विशिष्ट प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष श्री हरविंदर कल्याण सहित अन्य गणमान्य भी उपस्थित रहे

    सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र केवल कानून निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सभी को साथ लेकर जवाबदेही सुनिश्चित करना भी शामिल है। इससे सही मायने में जमीनी स्तर पर विकास को गति मिलती है तथा यह सुनिश्चित होता है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा, समय एवं संसाधनों का उपयोग वंचित और कम संसाधन-संपन्न वर्गों को सशक्त बनाने में करें। उन्होंने कहा कि यही वर्ग भारत की दीर्घकालिक विकास रणनीति का मजबूत आधार हैं।

    सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रो. घोष ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने और भविष्य की चुनौतियों को समझने में जागरूक समाज और विधायकों की भूमिका’ विषय पर हुई चर्चाएं ज्ञानवर्धक, दूरदर्शी तथा उच्चस्तरीय रहीं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार का सार्थक विमर्श लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ बनाता है तथा देश के भविष्य के लिए स्पष्ट दिशा निर्धारित करने में सहायक सिद्ध होता है। राज्यपाल ने लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने विभिन्न विधानसभाओं के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाने की महत्वपूर्ण पहल की। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन ने संसदीय लोकतंत्र, विधायी प्रक्रियाओं, लोकतांत्रिक शासन तथा विभिन्न विधानसभाओं के मध्य साझा हितों के विषयों पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

    प्रो. असीम कुमार घोष ने सभी सहभागी प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे सम्मेलन से प्राप्त सुझावों, सिफारिशों एवं विचारों को अपनी-अपनी विधानसभाओं तथा संस्थानों तक पहुंचाएं और एक समावेशी एवं समृद्ध ‘विकसित भारत’ के निर्माण में सार्थक योगदान दें। सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए हरियाणा विधानसभा तथा उसके अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण को बधाई देते हुए राज्यपाल ने प्रतिनिधियों के लिए की गई उत्कृष्ट व्यवस्थाओं की सराहना की, जिन्होंने कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    लोक सभा के अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि सभी विधान सभा संस्थाओं में जनता की भागीदारी, टेक्नोलॉजी का उपयोग, कानून और नीतियां बनाने में जनता की भागीदारी और समाज में जागरूकता बढ़ाने पर कार्य करेंगे तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा। नई ऊर्जा और नया सामर्थ पर कार्य करते हुए विकसित भारत के रोडमैप में भागीदारी बढ़ाएंगे। कॉन्फ्रेंस में लिये गये इन चार संकल्पों पर कार्य करेंगे। इसके अलावा समाज के अंतिम व्यक्ति को लाभ दिलाना हमारी जवाबदेही होगी। इस प्रकार राज्यों की संस्थाओं में समाज की भागीदारी बढ़ाने का कार्य करेंगे जिसमें महिलाओं और युवाओं की अधिक भागीदारी होनी चाहिए। संविधान का विचार हर व्यक्ति तक पहुंचाने में अग्रणीय होकर कार्य करेंगे जिससे देश व राष्ट्र के प्रति सभी को दायित्व का बोध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं पर खरा उतरने का कार्य करेंगे।

    विकसित भारत का सपना मजबूत संस्था पर टीका हुआ है। इसलिए इनके बजट आवंटन में सहयोग करेंगे। जनता का विश्वास जीतने के लिये पूरी गंभीरता से समाज में जागरूकता और भागीदारी पर सभी प्रतिनिधि बल देंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान बदलाव के समय में जनता से संवाद बढ़ा कर ही विकसित भारत की नींव को मजबूती दी जा सकती है। राजसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने भी कॉन्फ्रेंस के बारे में विस्तार से अवगत करवाया। हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण लाल मिड्ढा ने राज्यों से आये जन प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। कॉमनवेलथ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन इंडिया रीज़न नॉर्थ जोन- 11कॉन्फ्रेंस के समापन अवसर पर ए आई पर प्रेजेंटेशन दिखाई गई।