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Punjab News: मुख्यमंत्री मान ने बाजवा को लताड़ा, PR 126 को बताया किसानों के लिए लाभकारी

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Punjab News: मुख्यमंत्री मान ने बाजवा को लताड़ा, PR 126 को बताया किसानों के लिए लाभकारी

Highlights:

  1. मुख्यमंत्री ने प्रताप सिंह बाजवा के PR 126 पर दिए गए बयानों को भ्रामक और गैर-जिम्मेदाराना बताया, और उन्हें किसान हितों के खिलाफ खड़ा बताया।
  2. PR 126 ने पानी की खपत में 20-25 प्रतिशत की कमी की है और इससे किसानों को लागत में भी बचत होती है, जो उनके आर्थिक विकास में सहायक है।
  3. मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य में धान की खरीद प्रक्रिया सही तरीके से चल रही है और इसके लिए राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं, जिससे किसान संतुष्ट हैं।

पंजाब, (चंडीगढ़), 11 अक्टूबर, 2024: पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा को उनकी ‘आधे अधूरे ज्ञान’ के लिए जमकर लताड़ा है। उन्होंने कहा कि बाजवा अपने निराधार बयानों के जरिए लोगों को गुमराह कर रहे हैं, खासकर कृषि मुद्दों पर। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “यह वक्त है कि बाजवा राजनीति को अलविदा कह दें, क्योंकि वह लगातार झूठ बोलकर मीडिया का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि बाजवा का PR 126 पर बयान पूरी तरह से भ्रामक है, और यह किसानों की मेहनत को हतोत्साहित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के विशेषज्ञों ने PR 126 की प्रभावशीलता की पुष्टि की है। यह धान की एक विशेष किस्म है जो पानी की खपत को 20-25 प्रतिशत तक कम करती है। इस प्रकार, किसानों को प्रति एकड़ लगभग 5000 रुपये की लागत में भी बचत होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। मुख्यमंत्री मान ने आगे बताया कि PR 126 की लोकप्रियता पिछले पांच वर्षों में 13.9 प्रतिशत से बढ़कर 45 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसान इस किस्म को अपनाने में रुचि रख रहे हैं। उन्होंने कहा, “किसान अब समझते हैं कि यह किस्म न केवल उनकी फसल के उत्पादन को बढ़ाती है बल्कि जल संरक्षण में भी मदद करती है।” इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि धान की खरीद प्रक्रिया सुचारु रूप से चल रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस प्रक्रिया के लिए व्यापक व्यवस्था की है, जिसमें खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाना और तकनीकी सहायता प्रदान करना शामिल है। उन्होंने कहा कि “किसान अब पहले से अधिक सशक्त हैं और वे जानकारियों के माध्यम से अपने अधिकारों को समझ रहे हैं।”  

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