Nationalचंडिका मंदिर में मां सती के नेत्र की होती है पूजा, दर्शनमात्र...

चंडिका मंदिर में मां सती के नेत्र की होती है पूजा, दर्शनमात्र से दूर हो जाती है आंखों से जुड़ी हर दिक्कतें

WhatsApp Group Join Now
WhatsApp Channel Join Now

पटना। बिहार के मुंगेर जिले में सुप्रसिद्ध मां चंडिका मंदिर में मां सती के एक नेत्र की पूजा की जाती है जहां, श्रद्धालुओं को नेत्र संबंधी विकार से मुक्ति मिलती है। जिला मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर पूरब गंगा किनारे पहाड़ी गुफा में अवस्थित मां चंडिका का मंदिर लाखों भक्तों के लिए ‘आस्था‘ का केन्द्र बना हुआ है। यहां माथा टेकने दूर-दूर से लोग आते रहते हैं।

माता के दरबार में काजल लेकर आते हैं भक्त
ऐसी मान्यता है कि इस स्थल पर माता सती की बाईं आंख गिरी थी। यहां आंखों के असाध्य रोग से पीड़ित लोग पूजा करने आते हैं और यहां से काजल लेकर जाते हैं। लोग मानते हैं कि यह काजल नेत्ररोगियों के विकार दूर करता है। नेत्र रोग से पीड़ित भक्तगण चंडिका मंदिर में नेत्र-रोग से मुक्ति की आशा लेकर आते हैं।

सामाजिक मान्यता है कि कोई भी भक्त निराश नहीं लौटता है। संतान की चाहत और जीवन की अन्य इच्छाओं की पूर्ति के लिए भक्त राज्य के कोने-कोने से इस मंदिर में पहुंचते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर के काजल से हर प्रकार के नेत्रविकार दूर होते हैं। दूर-दूर से पीड़ित भक्तजल यहां मंदिर का काजल लेने पहुंचते हैं। नवरात्र-पूजा के दौरान नवमी तक इस मंदिर में भक्तों की भीड़ देखने को मिलती हैं।

मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा है
कतार में लगकर भक्त इस व्यवस्था से मां चंडिका के नेत्र पर जल-अर्पण करते हैं। मंदिर में भगवान शंकर, माता पार्वती, नौ ग्रह देवता, मां काली और मां संतोषी और भगवान हनुमान के अलग-अलग मंदिर भी हैं, जहां भक्तजन पूजा-अर्चना करते हैं। सामान्य दिनों में प्रत्येक मंगलवार को मंदिर में काफी संख्या में भक्तजन पहंचते हैं। मंदिर के पूर्व और पश्चिम में शमशान है। इसी कारण इस मंदिर को शमशान चंडिका’ के रूप में भी जाना जाता है। नवरात्र पूजा के दौरान तांत्रिक यहां तंत्र-सिद्धि के लिए भी जमा होते हैं। इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा बताया जाता है।

ऐसी जनश्रुति है कि अंग देश के राजा कर्ण मां चंडिका के भक्त थे और हर दिन खौलते हुए तेल की कड़ाह में कूदते थे। इस प्रकार अपनी जान देकर वह मां चंडिका की पूजा किया करते थे। माता उनके इस बलिदान से अत्यंत प्रसनन हो जाती थी और हर रोज वह राजा कर्ण को जीवित कर देती थीं। इसके अलावा माता कर्ण को सवा मन सोना भी देती थीं। राजा कर्ण उस सोने को मुंगेर के कर्ण चैड़ा पर ले जाकर गरीबों में बांट देते थे। इस बात की जानकारी उज्जैन के राजा विक्रमादित्य को मिली। एक दिन राजा विक्रमादित्य वेश बदलकर अंग देश पहुंच गए।

उन्होंने देखा कि महाराजा कर्ण ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान कर मां चंडिका के सामने रखे खौलते तेल के कड़ाह में कूद जाते हैं और माता उनके अस्थि-पंजर शरीर पर अमृत छिड़ककर उन्हें पुनर्जीवित कर देती हैं। माता उन्हें पुरस्कार स्वरूप सवा मन सोना भी देती थीं। एक दिन चुपके से राजा विक्रमादित्य राजा कर्ण के आगमन के पहले ही मंदिर पहुंच गए और खौलते तेल के कड़ाह में कूद गए। बाद में रोजाना की भांति मां ने उन्हें जीवित कर दिया।

उन्होंने लगातार तीन बार कड़ाह में कूदकर अपना शरीर समाप्त किया और माता ने उन्हें हर बार जीवित कर दिया। चौथी बार माता ने उन्हें रोका और वर मांगने को कहा। राजा विक्रमादित्य ने माता से सोना देनेवाला थैला और अमृत कलश मांग लिया। ऐसी मान्यता है कि माता ने दोनों चीज देने के बाद वहां रखे कड़ाह को उलट दिया और उसी के अन्दर विराजमान हो गईं।

Disclaimer

All news on Encounter India are computer generated and provided by third party sources, so read and verify carefully. Encounter India will not be responsible for any issues.

Advertisement

Related Articles

Hot this week

1000 ई-बसें व 100 हाईड्रोजन बसें खरीदेंगे: मुख्यमंत्री

सीएम ने 297 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर किया...

राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश स्थानीय निकायों की आम चुनाव -2026 की रिपोर्ट प्राप्त की

स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव करवाने के लिए राज्य...

स्वास्थ्य मंत्री ने फूड सेफ्टी सैमिनार में स्वस्थ भोजन पर दिया जोर

शुद्ध भोजन स्वस्थ समाज की नींव: डॉ. बलबीर सिंह चंडीगढ़/पटियाला:...

हिमबस प्लस कार्ड से लाभान्वित होंगे सभी श्रेणियों के यात्रीः मुकेश अग्निहोत्री

शिमलाः उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार...

1000 ई-बसें व 100 हाईड्रोजन बसें खरीदेंगे: मुख्यमंत्री

सीएम ने 297 ई-बसों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना शिमलाः मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज सोलन जिले...

शुतराना हलके के 56 गांवों की 68,500 एकड़ भूमि को सिंचाई के लिए मिला नहरी पानी: बरिंदर कुमार गोयल

80.35 करोड़ रुपये की लागत से 137.13 किलोमीटर नहरों, रजबाहों और सब-माइनरों का नवीनीकरण तथा 53.9 किलोमीटर पाइपलाइनें बिछाई...

राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश स्थानीय निकायों की आम चुनाव -2026 की रिपोर्ट प्राप्त की

स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव करवाने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की सराहना की शिमलाः राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज...

स्वास्थ्य मंत्री ने फूड सेफ्टी सैमिनार में स्वस्थ भोजन पर दिया जोर

शुद्ध भोजन स्वस्थ समाज की नींव: डॉ. बलबीर सिंह चंडीगढ़/पटियाला: पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह...