Home Chandigarh Punjab News: पहाड़ों पर बर्फबारी से मैदानी इलाकों में बढी ठिठुरन, शीतलहर की चेतावनी

Punjab News: पहाड़ों पर बर्फबारी से मैदानी इलाकों में बढी ठिठुरन, शीतलहर की चेतावनी

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Punjab News: पहाड़ों पर बर्फबारी से मैदानी इलाकों में बढी ठिठुरन, शीतलहर की चेतावनी

चंडीगढ़: नए साल के आने के साथ ही उत्तर भारत में ठंड ने अपना तीखा रुख ले लिया है। कई राज्यों में घने कोहरे और ठंडी हवाओं की वजह से तापमान लगातार गिर रहा है। सुबह और रात में ठंड इतनी बढ़ गई है कि लोग घरों में रहने को मजबूर हैं और आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू-मनाली और लाहौल की ऊंची चोटियों पर लगातार बर्फबारी रिकॉर्ड की गई है। ताबो इलाके में तापमान माइनस 6.8 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया है। कश्मीर का गुलमर्ग माइनस 6.5 डिग्री के साथ सबसे ठंडा इलाका रहा। उत्तराखंड में केदारनाथ और आसपास के इलाके भी बर्फ की सफेद चादर से ढक गए हैं।

पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में ठंड
मैदानी इलाकों में भी सर्दी ने लोगों को कंपकंपा दिया है। हरियाणा के महेंद्रगढ़ में तापमान 4 डिग्री तक गिर गया, जबकि पंजाब का फरीदकोट 5.5 डिग्री के साथ सबसे ठंडा इलाका रहा। उत्तर प्रदेश के कई इलाके घने कोहरे की चपेट में हैं, जहां कई जगहों पर विजिबिलिटी 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई। घने कोहरे को देखते हुए दिल्ली में येलो अलर्ट जारी किया गया है।

7 जनवरी तक शीतलहर की संभावना
मौसम विभाग के अनुसार, अगले सात दिनों तक उत्तर भारत में रात और सुबह के समय बहुत घना कोहरा रह सकता है। उत्तराखंड और राजस्थान में 4 और 5 जनवरी को कोहरे की तीव्रता बढ़ने की संभावना है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कई हिस्सों में 7 जनवरी तक शीतलहर जारी रहने की संभावना है।

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ने बढ़ाई परेशानी
मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं के कारण उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश और बिहार के कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 2 से 5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इन स्थितियों से पाला और शीतलहर का खतरा और बढ़ रहा है।

रबी की फसलों और सब्जियों पर खतरा
इस कड़ाके की ठंड का सीधा असर रबी की फसलों और सब्जी उत्पादन पर पड़ने की संभावना है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, बहुत अधिक ठंड और पाला खासकर मुलायम पौधों के टिशू को नुकसान पहुंचा सकता है। इस मौसम में आलू, टमाटर, मटर, पत्तागोभी, फूलगोभी और हरी पत्तेदार सब्जियों पर ज़्यादा असर पड़ सकता है।

किसानों के लिए सावधानी ज़रूरी है
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे पाले के खतरे वाले इलाकों में रात में हल्की सिंचाई करें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि नमी वाली मिट्टी ज़्यादा समय तक गर्मी बनाए रखती है, जिससे अचानक तापमान गिरने से होने वाले नुकसान को काफी कम किया जा सकता है।

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