Home Himachal>Una प्रदेश ऐसे नेतृत्व के हाथ में, जिसके पास न कोई नीति न ही नीयत: करण नंदा

प्रदेश ऐसे नेतृत्व के हाथ में, जिसके पास न कोई नीति न ही नीयत: करण नंदा

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प्रदेश ऐसे नेतृत्व के हाथ में, जिसके पास न कोई नीति न ही नीयत: करण नंदा

ऊना/सुशील पंडित: हिमाचल प्रदेश भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी करण नंदा ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के विरुद्ध तीखा हमला बोला है। नंदा ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश आज एक ऐसे नेतृत्व के हाथ में है, जिसके पास न तो कोई नीति है और न ही कोई नीयत। उन्होंने मुख्यमंत्री को ‘पूरी तरह विफल’ करार देते हुए कहा कि प्रदेश में अराजकता का माहौल है और सरकार केवल अपने चहेतों को पालने में व्यस्त है।उनके साथ प्रदेश सहमीडिया संयोजक राज कुमार पठानियाँ उपस्थित रहे।

​आपदा और दुर्घटनाओं का अंबार: सुक्खू सरकार मौन

​करण नंदा ने प्रदेश की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब से कांग्रेस सत्ता में आई है, हिमाचल प्रदेश बदहाली के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने कहा, “आज हिमाचल में दुर्घटना पर दुर्घटना हो रही है और आपदा पर आपदा आ रही है, लेकिन सरकार चैन की नींद सोई हुई है।” नंदा ने निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आए दिन हो रहे सड़क हादसों और प्राकृतिक आपदाओं के समय सरकार का राहत तंत्र पूरी तरह फेल साबित हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री केवल मंचों से घोषणाएं करने में माहिर हैं, जबकि धरातल पर जनता त्राहि-त्राहि कर रही है।

मंत्री लड़ रहे नीरो बंसरी बजा रहे हैं 

करन नंदा ने मंत्रियों की अधिकारियों को लेकर हो रही लड़ाई पर तंज कसते  हुए कहा कि मंत्री लड़ रहे हैं और प्रदेश के मुखिया नीरो की तरह बंसरी बज रहे हैं ।उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ा विस्फोट होगा, कांग्रेस में टूट होगी और मुख्यमंत्री के विरुद्ध आने वाले समय में अनेक लोग खड़े होंगे।

​’जनता परेशान, मित्रों की बल्ले-बल्ले’

​भाजपा मीडिया प्रभारी ने सरकार पर ‘मित्रवाद’ का आरोप लगाते हुए तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू के कार्यकाल में आम जनता को दो वक्त की रोटी और बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि मुख्यमंत्री के खास ‘मित्रों’ की चांदी हो रही है। नन्दा ने कहा कि ​”यह सरकार जनता की नहीं, बल्कि अपने चहेते मित्रों की सरकार बनकर रह गई है। प्रदेश का खजाना खाली होने का रोना रोया जाता है, लेकिन चहेतों को कैबिनेट रैंक और सुख-सुविधाएं बांटने में कोई कमी नहीं छोड़ी जा रही। जनता महंगाई और बेरोजगारी की मार झेल रही है और मुख्यमंत्री के मित्रों की ‘बल्ले-बल्ले’ हो रही है।”

​व्यवस्था परिवर्तन नहीं, ‘अवसरवाद’ है यह सरकार

​करण नंदा ने कांग्रेस के ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे को प्रदेश की जनता के साथ सबसे बड़ा मजाक बताया। उन्होंने कहा कि जिस व्यवस्था परिवर्तन का वादा करके कांग्रेस सत्ता में आई थी, वह आज ‘विनाशकारी परिवर्तन’ में बदल चुका है। प्रदेश कर्ज के बोझ तले दबा जा रहा है, लेकिन फिजूलखर्ची रुकने का नाम नहीं ले रही। पूर्व भाजपा सरकार द्वारा शुरू किए गए विकास कार्यों को रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि 10 गारंटियों के नाम पर सत्ता में आई कांग्रेस ने प्रदेश के युवाओं और महिलाओं को केवल ठगा है।

​उन्होंने  कहा कि हिमाचल की जनता अब कांग्रेस के इस ‘कुशासन’ से तंग आ चुकी है। जिस तरह से विकास कार्य ठप पड़े हैं और केवल अपनों को उपकृत किया जा रहा है, उसका जवाब आने वाले समय में प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री को जरूर देगी।

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