गजेंद्र चौहान ने महाराज को सुनाया प्रसंग
इसके बाद गजेंद्र चौहान ने प्रेमानंद महाराज से इजाजत लेकर महाभारत का उन्हें एक संवाद सुनाया। उन्होने कहा कि यह वो समय था जब पांडवों को वनवास जाना था और पांचाली जाने से रोक नहीं थी तब युद्धिष्ठिर ने उनको समझाते हुए कहा कि जो होने वाला है वह हमारे कर्मों का फल है।युद्धिष्ठिर ने कहा कि – ‘भगवान राम जानते थे कि सोने का मृग असली नहीं होता फिर भी वे सीता की इच्छा का सम्मान करते हुए उसके पीछे गए। यह कोई लोभ नहीं था बल्कि कर्तव्य और मर्यादा का पालन था। युद्धिष्ठिर यह भी कहते हैं कि जो होना है उसे कोई रोक नहीं सकता न भीम की गदा और न ही अर्जुन का बाण इसलिए हमें वनवास जाना ही होगा क्योंकि ज्येष्ठ पिता श्री को प्रतीक्षा करवाना मर्यादा का उल्लंघन है’।View this post on Instagram