- सांस फूलने की दिक्कत कम होती है। पहले जो लोग छोटी दूरी चलने पर भी थक जाते थे, वे धीरे-धीरे अधिक देर तक चल या काम कर सकते हैं।
- ऊर्जा और आत्मविश्वास बढ़ता है। एक्सरसाइज करने से शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह सही रहता है, जिससे थकान कम महसूस होती है।
- दैनिक कामकाज आसान हो जाते हैं। व्यक्ति ज्यादा देर तक बिना थके काम कर पाता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है।
- बॉक्स ब्रीदिंग (Box Breathing):
इसमें चारों चरण समान समय के होते हैं –
- 4 सेकंड तक सांस लें
- 4 सेकंड तक सांस रोकें
- 4 सेकंड तक सांस छोड़ें
- 4 सेकंड तक रुकें यह तकनीक तनाव घटाने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है।
- अनुलोम-विलोम (Alternate Nostril Breathing): इसमें एक नथुने से सांस लेकर दूसरे से छोड़ते हैं। यह फेफड़ों को साफ रखती है, मन को शांत करती है और शरीर में ऑक्सीजन का संतुलन बनाए रखती है।