मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध के तौर-तरीकों में लगातार बदलाव आ रहा है और अपराधी नई-नई तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिनमें डिजिटल अरेस्ट जैसे मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में ठगी गई राशि को कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस, बैंकों के सहयोग से संबंधित राशि को तुरंत होल्ड कर देती है। वर्ष 2024 में होल्ड की गई राशि का प्रतिशत 27 था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 40 प्रतिशत हो गया है, अर्थात इसमें 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि सरकार ने जीरो एफआईआर की व्यवस्था भी लागू की है, जिसके तहत साइबर अपराध के मामलों में पीड़ित व्यक्ति 1930 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। यह एफआईआर स्वतः संबंधित थाने को स्थानांतरित कर दी जाती है, जिससे त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित होती है।
वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तीन नए साइबर पुलिस स्टेशन खोलने की घोषणा
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि साइबर क्राइम कंट्रोल रूम में विभिन्न बैंकों के 16 नोडल अधिकारी तैनात हैं, जो पुलिस के साथ समन्वय कर ठगी गई राशि को होल्ड कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। जांच पूरी होने तक इस राशि को निकाला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में साइबर अपराध पर और प्रभावी नियंत्रण के लिए गोहाना, बहादुरगढ़ और सोनीपत में तीन नए साइबर पुलिस स्टेशन खोलने की घोषणा की गई है, जिससे इस दिशा में कार्यों को और गति मिलेगी।