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Acting छोड़ Spiritual Leader बने Karan Wahi, Paras Chhabra के Podcast पर किए खुलासे

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Acting छोड़ Spiritual Leader बने Karan Wahi, Paras Chhabra के Podcast पर किए खुलासे
नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्टर करण वाही इन दिनों काफी सुर्खियों में बने हुए हैं। उनका झुकाव इन दिनों अध्यात्म की दुनिया की ओर हो गया है। उन्होंने खुद इस बारे में बात की और अपने मन में चल रही उथल पुथल को जाहिर किया है। करण टीवी की दुनिया के रिच एंड मोस्ट पॉपुलर एक्टर में गिने जाते हैं। हाल ही में पारस छाबड़ा के पॉडकॉस्ट में वो शामिल हुए जहां उनके गले में कंठी यानी की तुलसी की माला भी नजर आई।

पिछले कुछ महीनों में बने आध्यात्मिक

करण ने रिवील किया कि पिछले कुछ महीनों से वो आध्यात्मिक हो गए हैं। वो नॉन वेज खाना छोड़ चुके हैं। राधा-कृष्ण का नाम जपते हैं। इससे उनका मन शांत रहता है। करण ने बताया कि – ‘मेरे काफी दोस्त सरप्राइज हो गए हैं मुझे कंठी माला पहने देख। किसी ने मुझे कहा कि नहीं ऐसा करने को, मैंने खुद ही पहना है। बस मन किया मेरा 4-5 महीने पहले किसी ऐसे ही आदमी ने मुझे कहा था कि तुम्हें गुस्सा बहुत आता है। शांत रहा करो। करण ने बताया कि ऐसा नहीं है कि मैं स्प्रिरिचुअल नहीं था। बस कुछ समय के लिए इससे दूर चला गया था। कोई खास वजह भी नहीं थी’।
 
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करण का झुकाव अपने आप इस ओऱ हुआ। वो बोले – ‘फिर कुछ महीने पहले मैंने चेक किया कि कैसे में वृंदावन से तुलसी की माला ला सकता हूं। मुझे तो ये भी नहीं पता था कि ये दो करके पहनी जाती है’। करण को इस बारे में पारस ने बताया। उन्होंने कहा कि – ‘वो इसलिए कि एक को कहते हैं राधाष और एक को कहते हैं कृष्ण। सिंगल होगी तो कोई मतलब नहीं डबल करके पहनते हैं तो गले में टच होती है’।

सब कुछ ठीक चल रहा है

करण के इसी के साथ जाहिर किया कि ऐसा करने में उनके आस-पास की एनर्जी पॉजिटिव हो गई है। वो कहते हैं कि – ‘मैंने हाल ही में नाम जप करना शुरु किया है। ये खूबसूरती स्पिरिचुअलिटी की कि मेरे साथ सब कुछ ठीक चल रहा है’। करण ने बताया कि – ‘वो वृंदावन के वर्ल्ड फेमस प्रेमानंद महाराज के प्रवचन भी सुनने लगी है। उन्हें सुनने के बाद पता चला कि नाम जप का अर्थ है कि क्या ये भी पता चला कि क्यों राधा-कृष्ण साथ में कहा जाता है। इनके मायने क्या है’। करण खुश होकर बताते हैं कि अब जब भी समय होता है जब भी दिमाग इधर-उधर जाता है या जब भी नेगेटिव सोचने लगता हूं तो मैं नाम जप करने लगता हूं।        

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