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Punjab News: विपक्ष को झटका, पूर्व मंत्री सुरजीत रखड़ा आप पार्टी में हुए शामिल, देखें Live

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Punjab News: विपक्ष को झटका, पूर्व मंत्री सुरजीत रखड़ा आप पार्टी में हुए शामिल, देखें Live

पटियालाः पंजाब के आप पार्टी ने विपक्ष को बड़ा झटका दिया है। सीएम मान की अगुवाई में पूर्व मंत्री सुरजीत रखड़ा को आप पार्टी में करवाया शामिल करवाया गया। इस दौरान सीएम मान ने उनका पार्टी में आने पर स्वागत किया। सुरजीत रखड़ा ने 2012 में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरेंद्र सिंह के बेटे रणइंद्र सिंह को हराया था। वहीं 2012 से 2017 तक वह शिरोमणि अकाली में मंत्री के पद पर रहे।

बेअदबी मामले पर पंजाब सरकार द्वारा लाए गए सख्त कानून से प्रभावित होकर उन्होंने आप पार्टी में शामिल होने का फैसला लिया। बता दें कि, सुरजीत सिंह रखड़ा पंजाब की राजनीति में बड़ा और रसूखदार नाम हैं। राजनीति के साथ-साथ उनका और उनके भाइयों का विदेश में बड़ा कारोबार है। रखड़ा परिवार का अमेरिका में बिजनेस अंपायर है, जिसके कारण उनका पंजाब के प्रवासी भारतीयों के बीच अच्छा-खासा प्रभाव माना जाता है। रखड़ा समाना से 2 बार विधायक रह चुके है। बीते दिन पार्टी अध्यक्ष ज्ञानी हरप्रीत सिंह द्वारा निलंबन के आदेश जारी किए गए थे। आदेशों में कहा गया कि रखड़ा की गतिविधियां पार्टी के हितों के खिलाफ थीं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐसे समय में रखड़ा का आप में शामिल होना पार्टी के लिए महत्वपूर्ण है, जब कई नेता, जिनमें सात राज्यसभा सदस्य भी शामिल हैं, सत्तारूढ़ पार्टी से दूरी बना चुके हैं।

मंच संभालते ही पूर्व मंत्री सुरजीत सिंह रखड़ा ने प्रेस और मीडिया के उन सवालों का खुलकर जवाब दिया, जो पिछले कुछ दिनों से उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर पूछे जा रहे थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनका आम आदमी पार्टी में आने का फैसला पूरी तरह से पंजाब के हितों और सिखों की धार्मिक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। रखड़ा ने समाना में बेअदबी मामले को लेकर करीब डेढ़ साल तक चले गुरुजीत सिंह खालसा के मोर्चे का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि किस तरह कड़ाके की ठंड, भीषण गर्मी और आंधियों के बीच प्रदर्शनकारियों ने 400 फीट ऊंचे टावर पर रहकर संघर्ष किया। इस मोर्चे के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने वादा किया था कि यदि वे इस मामले पर कड़ा कानून बनवा देते हैं, तो रखड़ा को उनका साथ देना होगा।

उन्होंने शिरोमणि अकाली दल छोड़ने की वजह का खुलासा करते हुए कहा कि पूर्ववर्ती अकाली सरकार बेअदबी के मामलों को सुलझाने और दोषियों को सजा दिलाने में नाकाम रही थी। उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे के कारण 2017 से लेकर 2024 तक के चुनावों में अकाली दल का ग्राफ लगातार नीचे गिरता गया, क्योंकि जनता में भारी नाराजगी थी। रखड़ा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान की तारीफ करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि बेअदबी पर इतना सख्त कानून कभी धरातल पर आ पाएगा। इससे पहले अकाली-बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस की सरकारें भी यह कानून नहीं बना सकी थीं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल द्वारा इस ऐतिहासिक बिल पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद, नैतिक रूप से उनका यह फर्ज बन गया था कि वे भगवंत मान के साथ खड़े हों।

 

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