Home Haryana Covid-19 से भी ज्यादा खतरा बनेगी यह बीमारी, अगली महामारी के लिए क्या तैयार है दुनिया

Covid-19 से भी ज्यादा खतरा बनेगी यह बीमारी, अगली महामारी के लिए क्या तैयार है दुनिया

0
Covid-19 से भी ज्यादा खतरा बनेगी यह बीमारी, अगली महामारी के लिए क्या तैयार है दुनिया
सेहत: कोविड-19 के बाद दुनिया ने सोचा था कि अब अगली महामारी से निपटने की तैयारी पहले से बेहतर होगी लेकिन नई रिपोर्ट् ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। मिडिल अफ्रीका के कई हिस्सों में इबोला के नए प्रकोप। साथ ही हंतावायरस मंकीपॉक्स और बर्ड फ्लू जैसी बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच एक ग्लोबल रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि दुनिया भविष्य की महामारियों के लिए पहले से ज्यादा कमजोर होती जा रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन और वर्ल्ड बैंक के समर्थन से बने स्वतंत्र संगठन ग्लोबल प्रिपेयर्डनेस मॉनिटरिंग बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इंफेक्शन बीमारियों का खतरा अब पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले दस सालों की तुलना में अब देश और स्वास्थ्य व्यवस्था महामारी से उबरने में कम सक्षम हो गए हैं। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन ने कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में फैले इबोला के नए प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। इस बार इबोला का कम समझा जाने वाला बुंडिबुग्यो स्ट्रेन सामने आया है जिसने चिंता और बढ़ा दी है।

क्यों तेजी से फैल रहा है इंफेक्शन का खतरा?

प्रायोरिटीज फॉर ए पैंडेमिक-रेजिलिएंट फ्यूचर में कहा गया कि महामारी से निपटने की तैयारियों पर हुए तनाव, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पर्यावरणीय गड़बड़ी, बढ़ती वैश्विक आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय विकास फंडिंग में कमी वर्ल्ड साबित हो रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव, जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पर्यावरणीय गड़बड़ी, बढ़ती वैश्विक आवाजाही और अंतरराष्ट्रीय विकास फंडिंग में कमी वर्ल्ड हेल्थ सिक्योरिटी को कमजोर कर रही हैं।

रिपोर्ट में किन बातों को लेकर की गई चर्चा

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2014-16 और 2019-20 के इबोल प्रकोप, कोविड-19 और मंकीपॉक्स जैसी बड़ी स्वास्थ्य आपात स्थितियों की समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि कोविड के बाद नई स्वास्थ्य व्यवस्थाएं और योजनाएं तो बनाई गई लेकिन महामारी से निपटने की वैश्विक क्षमता अब भी बहुत असमान बनी हुई हैं। सबसे चिंताजनक बात वैक्सीन और दवाओं की पहुंच को लेकर सामने आई है। रिपोर्ट् के अनुसार, मंकीपॉक्स वैक्सीन गरीब देशों तक पहुंचने में करीब दो साल लग गए जो कोविड वैक्सीन से भी ज्यादा देरी थी। बोर्ड ने चेतावनी दी कि दुनिया वैक्सीन, जांच और इलाज की समान पहुंचे के मामले में पीछे की ओर बढ़ रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि महामारी अब सिर्फ स्वास्थ्य संकट नहीं रह गई बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और लोगों को भरोसे पर भी असर डाल रही है। कोविड और इबोला दोनों के दौरान राजनीति ध्रुवीकरण साइंटफिक संस्थाओं पर हमले और गलत सूचनाओं का तेज प्रसार देखने को मिला। इसके प्रभाव महामारी खत्म होने के बाद भी लंबे समय तक बने रहते हैं।

भारत के लिए रिपोर्ट क्यों अहम

यह रिपोर्ट भारत के लिए बहुत अहम मानी जा रही है। दुनिया के सबसे बड़े कोविड प्रकोपों में से एक झेल चुके भारत में घनी आबादी तेजी से बढ़ते शहर और बड़े पैमाने पर होने वाला आतंरिक पलायन भविष्य की महामारियों का खतरना बढ़ाते हैं। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स पहले भी चेतावनी दे चुके हैं कि देश में बीमारी निगरानी व्यवस्था ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा और इमरजेंसी फंडिंग सिस्टम को और मजबूत करने की जरुरत है। भारत के लिए भी यह रिपोर्ट अहम मानी जा रही है। दुनिया के सबसे बड़े कोविड प्रकोपों में से एक झेल चुके भारत में घनी आबादी तेजी से बढ़ते शहर और बड़े पैमाने पर होने वाला आंतरिक पलायन भविष्य की महामारियों का खतरा बढ़ाते हैं। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स पहले भी चेतावनी दे चुके हैं। देश में बीमारी निगरानी व्यवस्था, ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा, बड़े पैमाने पर होने वाला आंतरिक पलायन भविष्य की महामारियों का खतरा बढ़ाते हैं। पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स पहले भी चेतावनी दे चुके हैं। देश में बीमारी निगरानी व्यवस्था, ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचा और इमरजेंसी फंडिंग सिस्टम को और मजबूत करने की जरुरत है।        

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here