Home Health Africa में बढ़ते Ebola केसों के बीच भारत की हुई Entry, वैक्सीन बनाने में जुटा भारत का Serum Institute

Africa में बढ़ते Ebola केसों के बीच भारत की हुई Entry, वैक्सीन बनाने में जुटा भारत का Serum Institute

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Africa में बढ़ते Ebola केसों के बीच भारत की हुई Entry, वैक्सीन बनाने में जुटा भारत का Serum Institute
नई दिल्ली: अफ्रीका एक बार फिर इबोला वायरस के बड़े खतरे का सामना कर रहा है। इस बार चिंता की कारण इबोला का बुंडीबुग्यो स्ट्रेन है जिसके लिए अभी तक कोई मंजूर वैक्सीन मौजूद नहीं है। कांगों लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में तेजी से बढ़ते मामलों ने दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, सैंकड़ों संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हुई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह वायरस अब घनी आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहा है जिससे दूसरे देशों में फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और अफ्रीका सीडीसी ने इस स्थिति को गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल माना है। अभी तक इबोला के जिस जेरे स्ट्रेन के लिए वैक्सीन मौजूद है। वह बुंडीबुग्यो स्ट्रेन पर कितना असर करेगी। यह साफ नहीं है। इसी कारण दुनिया अब नई वैक्सीन तैयारी करने में दौड़ में जुट गई है।

वैक्सीन बनाएगा भारत

इस मुश्किल समय में भारत की बड़ी वैक्सीन कंपनी Serum Institute Of India अहम भूमिका निभाने जा रही है। पुणे स्थित यह कंपनी ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और CEPI के साथ मिलकर नई वैक्सीन बनाने की तैयारी कर रही है। यह वैक्सीन ChAdOx प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी जिसका इस्तेमाल कोविड-19 के समय कोविडशील्ड वैक्सीन में भी किया गया था। सीरम इंस्टीट्यूट का कहना है कि उसके पास पहले से ऐसी तकनीक और मशीनें मौजूद हैं। इनकी मदद से बहुत कम समय में वैक्सीन की खुराक तैयारी की जा सकती है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने जिस तरह दुनिया के बड़ी मात्रा में वैक्सीन दी थी। उसी तरह अब इबोला संकट में भी भारत एक भरोसेमंद साथी बनकर सामने आ सकता है। साथ ही यह भारत की मेडिकल और बायोटेक ताकत को भी दिखाता है।

वैज्ञानिकों के सामने समय और सुरक्षी की चुनौती

फिलहाल वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय की है। बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लिए दो वैक्सीन उम्मीदवारों पर काम हो रहा है। पहला Rvsv तकनीक पर आधारित है जो पहले से मौजूद Ervebo वैक्सीन जैसी तकनीक का इस्तेमाल करता है लेकिन इसकी समस्या यह है कि इसकी खुराक अभी उपलब्ध नहीं है और इसे तैयार करने में कई महीने में लग सकते हैं। दूसरी ओर ChAdOx प्लेटफॉर्म की खासियत इसकी तेज उत्पादन क्षमता है क्योंकि कोविड के समय इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल हो चुका है इसलिए इसकी फैक्ट्री व्यवस्था पहले से तैयार है हालांकि इसकी भी एक कमजोरी है। अभी तक इस वैक्सीन का जानवरों या इंसानों पर बुंडीबुग्यो वायरस के खिलाफ पूरा परीक्षण नहीं हुआ है। ऐसे में स्वास्थ्य एजेंसियों को यह फैसला बहुत सोच-समझकर लेना होगा कि तेजी को प्राथमिकता दी जाए या लंबे परीक्षण का इंतजार किया जाए। यह फैसला आने वाले समय में लाखों लोगों की सुरक्षा तय कर सकता है।

दुनिया की उम्मीद बना भारत

अफ्रीका में फैल रहा यह इबोला संकट पूरी दुनिया के लिए चेतावनी है कि महामारी कभी भी वापिस आ सकती है। इसके साथ ही संघर्ष और गरीबी से जूझ रहे इलाकों में बीमारी को रोकना और भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय में भारत की एंट्री उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई है। अगर सीरम इंस्टीट्यूट और उसके सहयोगी जल्दी सुरक्षित और असरदार वैक्सीन तैयार करने में सफल होते हैं। इससे हजारों लोगों की जान बचाई जा सकती है। साथ ही यह साबित होगा कि सिर्फ अपने लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के स्वास्थ्य संकट में मदद करने की क्षमता रखता है। आने वाले कुछ महीने बहुत अहम होंगे क्योंकि यह तय करेंगे कि दुनिया इस नए इबोला खतरे को कितनी तेजी से रोक पाती हैं।    

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