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नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया, संसद में बोले बालेन शाह

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नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा किया, संसद में बोले बालेन शाह

Balendra Shah in Nepal Parliament: नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मार्च 2026 में सत्ता संभालने के बाद पहली बार देश की संसद को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने नेपाल की घरेलू और विदेश नीति के कई अहम मुद्दों पर बात की। इस दौरान भारत के साथ चल रहे सीमा विवाद को लेकर भी उन्होंने अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया।

बातचीत से सुलझाया जाएगा भारत-नेपाल सीमा विवाद
संसद में बोलते हुए बालेन शाह ने कहा कि भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी जैसे क्षेत्रों को लेकर जो सीमा विवाद चल रहा है, उसका समाधान बातचीत और राजनयिक प्रयासों के जरिए निकाला जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से इस मुद्दे को सुलझाने की दिशा में काम करना चाहिए।

नेपाल ने भी कुछ जगहों पर भारतीय जमीन पर किया अतिक्रमण
सांसदों के सवालों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री शाह ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि सीमा से जुड़े मामलों की समीक्षा में यह सामने आया है कि सिर्फ भारत ने ही नेपाल की जमीन पर अतिक्रमण नहीं किया है, बल्कि कुछ स्थानों पर नेपाल ने भी भारतीय क्षेत्र में अतिक्रमण किया है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों का समाधान तथ्यों और ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर होना चाहिए।

विशेषज्ञों की मदद से निकलेगा समाधान
बालेन शाह ने सुझाव दिया कि सीमा विवाद को हल करने के लिए दोनों देशों के सर्वेक्षक, इतिहासकार और क्षेत्रीय विशेषज्ञ मिलकर काम करें। उनका मानना है कि विशेषज्ञों की मदद से वास्तविक स्थिति को समझा जा सकता है और स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।

भारत, चीन और ब्रिटेन से हुई बातचीत
प्रधानमंत्री शाह ने यह भी बताया कि नेपाल ने सीमा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भारत, चीन और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के साथ बातचीत की है। उनकी सरकार पड़ोसी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाए रखने और विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने के पक्ष में है।

मार्च में बने थे नेपाल के प्रधानमंत्री
बालेन शाह ने 27 मार्च 2026 को नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। आम चुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी सफलता मिली थी, जिसके बाद उन्होंने सरकार बनाई। प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने अभी तक कोई विदेश दौरा नहीं किया है और न ही विदेशी नेताओं के साथ ज्यादा मुलाकातें की हैं।

संसद के पहले भाषण पर थी सबकी नजर
प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला संसदीय संबोधन था, इसलिए देश और विदेश के राजनीतिक जानकारों की नजर इस भाषण पर थी। खास तौर पर भारत के साथ संबंधों और विदेश नीति को लेकर उनकी सरकार का रुख जानने की उत्सुकता थी।

भारत को लेकर अब तक रहा है संतुलित रुख
नेपाल में जेन-जी आंदोलन और राजनीतिक बदलाव के बाद हुए चुनाव में बालेन शाह की पार्टी को बड़ी जीत मिली थी। हालांकि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने भारत को लेकर कोई आक्रामक बयान नहीं दिया है। अपने पूर्ववर्ती प्रधानमंत्रियों के मुकाबले उन्होंने अब तक भारत का दौरा भी नहीं किया है। ऐसे में संसद में दिया गया उनका यह बयान भारत-नेपाल संबंधों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

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