अमृतसरः खाने-पीने के शौकीनों के लिए एक बेहद खुशखबरी है। अमृतसर की विश्वप्रसिद्ध विशेषता ‘अमृतसरी कुलचे’ को अब एक अलग और आधिकारिक पहचान मिलने वाली है। पंजाब सरकार के फूड प्रॉसेसिंग विभाग ने इसे ‘जीआईटैग’ (जियोग्राफिकल इंडिकेशन) दिलाने के लिए एक विशेष मुहिम शुरू की है। इसी संबंध में अमृतसर के प्रसिद्ध कुलचा उत्पादकों और कारीगरों की चंडीगढ़ से आई एक विशेष टीम और विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस मुहिम के तहत एक संगठन (एसोसिएशन) बनाया जाएगा जो इस टैग को हासिल करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। जीआईटैग मिलने के बाद कोई भी नकली उत्पाद या अमृतसरी कुलचे के नाम पर गलत पकवान बेचकर ग्राहकों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकेगा।
बैठक में शामिल ‘खालसा कुलचा’ के मालिक ने बताया कि यह एक बहुत ही सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि अमृतसरी कुलचे का इतिहास लगभग 60-70 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत छोटे ठेलों और रेहड़ियों से हुई थी और आज यह दुनियाभर में प्रसिद्ध हो चुका है। जीआईटैग मिलने से कुलचा बनाने के प्रोटोकॉल और एसओपी (SOP) तय होंगे, जिससे इसके असली स्वाद और मानक को कायम रखा जा सकेगा।
इस फैसले से जहां अमृतसर के हुनरमंद कारीगरों को उनका अधिकार और रोजगार मिलेगा, वहीं बिना अनुमति दुकानें खोलने वालों पर भी रोक लगेगी। कुलचा कारोबारियों ने इस ऐतिहासिक पकवान को अंडे रहित (शुद्ध वेज) बनाकर परोसने वाले पुराने कुछ बुज़ुर्ग कारीगरों को याद करते हुए कहा कि यह टैग उनकी विरासत को सच्ची श्रद्धांजलि होगा। अब अमृतसरी कुलचा सिर्फ अमृतसर, लुधियाना या दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विदेशों में भी अपनी असली पहचान के साथ और अधिक लोकप्रिय होगा।