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पेशाब में खून? पेल्विक दर्द? पंजाब के डॉक्टर ने बताए प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण, समय पर जांच कराने की दी सलाह

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पेशाब में खून? पेल्विक दर्द? पंजाब के डॉक्टर ने बताए प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण, समय पर जांच कराने की दी सलाह

चंडीगढ़: स्टेट हेल्थ एजेंसी (एसएचए), पंजाब के आंकड़ों के अनुसार, पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत प्रोस्टेट कैंसर के उपचारों में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हार्मोन थेरेपी का रहा है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि राज्य में प्रोस्टेट कैंसर का बोझ बढ़ रहा है और साथ ही उन्नत (एडवांस्ड) कैंसर के महंगे उपचारों का खर्च उठाने के लिए लोगों का सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं पर भरोसा भी बढ़ रहा है।

स्टेट हेल्थ एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच महीनों में प्रोस्टेट कैंसर से संबंधित 1478 उपचार पैकेज स्वीकृत किए गए, जिन पर कुल 2.86 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें हार्मोन थेरेपी सबसे प्रमुख उपचार रही, जिसके 918 ऑपरेशन किए गए। यह कुल स्वीकृत उपचारों का लगभग 60 प्रतिशत है और इस उपचार पर 1.57 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो कुल खर्च का आधे से अधिक हिस्सा बनता है।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा, “एडवांस्ड प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में हार्मोन थेरेपी अभी भी सबसे महत्वपूर्ण विकल्प है क्योंकि यह टेस्टोस्टेरोन के स्तर को कम करती है, जो ट्यूमर की वृद्धि का प्रमुख कारण होता है। जब कैंसर केवल प्रोस्टेट ग्रंथि तक सीमित नहीं रहता, तब इसे उपचार के पहले और मुख्य विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।” स्टेट हेल्थ एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, हार्मोन आधारित उपचारों में लियूप्रोलाइड सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली दवा रही है। उल्लेखनीय है कि इसकी विभिन्न खुराकों से संबंधित 853 प्रक्रियाएं की गईं, जिनकी लागत 1.43 करोड़ रुपये से अधिक रही।

योजना के तहत कीमोथेरेपी दूसरा सबसे बड़ा उपचार रहा। इसके 490 मामलों का इलाज किया गया, जिन पर 1.15 करोड़ रुपये खर्च हुए। इनमें डोसेटैक्सेल आधारित उपचार के अलावा पैक्लिटैक्सेल-कार्बोप्लैटिन, सिस्प्लैटिन-इटोपोसाइड और माइटोक्सैन्ट्रोन जैसे संयोजन उपचार शामिल थे। कुछ उन्नत कीमोथेरेपी पैकेजों की लागत प्रति उपचार 3.58 लाख रुपये तक दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त योजना के तहत रेडिएशन थेरेपी भी प्रदान की गई, जिसमें 70 फ्रैक्शन पर कुल 13.36 लाख रुपये खर्च हुए। यह दर्शाता है कि चुनिंदा मामलों में रेडिएशन थेरेपी भी एक महत्वपूर्ण उपचार विकल्प है।

डॉ. सुप्रान शर्मा, सहायक प्रोफेसर, यूरोलॉजी विभाग, सरकारी मेडिकल कॉलेज, पटियाला ने बताया कि वित्तीय सहायता ने कैंसर मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि बीमा या सरकारी सहायता के अभाव में महंगे उपचार अक्सर मरीजों के लिए चुनौती बन जाते हैं और इलाज में देरी का कारण बनते हैं। डॉ. शर्मा ने प्रोस्टेट कैंसर की समय पर पहचान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “50 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों को पेशाब में खून आना, पेल्विक क्षेत्र में दर्द, बार-बार पेशाब आना और बिना किसी कारण वजन कम होना जैसे लक्षणों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।”

उन्होंने 50 वर्ष की आयु के बाद प्रोस्टेट स्पेसिफिक एंटीजन (पीएसए) जांच करवाने की सलाह दी। जिन लोगों के परिवार में प्रोस्टेट कैंसर का इतिहास रहा है, उन्हें लगभग 40 वर्ष की आयु से ही नियमित स्क्रीनिंग शुरू कर देनी चाहिए। डॉ. शर्मा ने कहा कि हालांकि आनुवंशिक (जेनेटिक) कारण प्रोस्टेट कैंसर के प्रमुख कारक हैं, लेकिन कुछ मामलों में जीवनशैली से जुड़े कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। शुरुआती अवस्था में कैंसर की पहचान होने से मरीजों के बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है और कीमोथेरेपी जैसे गंभीर उपचारों की आवश्यकता भी कम हो सकती है।

डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से कैंसर उपचार के लिए वित्तीय सहायता के विस्तार से अधिक पुरुष बिना आर्थिक बोझ की चिंता किए समय पर इलाज करवा रहे हैं। इससे मरीजों की चिंताएं कम हुई हैं, उनकी जेब से होने वाला खर्च घटा है और पूरे राज्य में जीवनरक्षक उपचारों तक पहुंच बेहतर हुई है।

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