इसी वजह से यह घटना आस्था और विज्ञान, दोनों दृष्टिकोणों से चर्चा का विषय बन गई है। मामले की सूचना मिलते ही देखते ही देखते घर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ जुट गई। कई लोगों ने हाथ जोड़कर भगवान शिव का स्मरण किया, तो कुछ ने फूल, जल और बेलपत्र चढ़ाकर पूजा की। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने ऐसी आकृति पहले कभी नहीं देखी। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के भजन गाए और ‘हर-हर महादेव’ तथा ‘बोले बम बम’ के जयकारे लगाए। इस घटना के बाद कई लोग इस आकृति की तुलना जम्मू-कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा में बनने वाले प्राकृतिक हिमलिंग से कर रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यह भगवान शिव की विशेष कृपा का संकेत हो सकता है। इसी बीच, जिस घर में यह आकृति बनी है, वहां मोहल्ले के एक बाबा भी पहुंचे। उन्होंने मौजूद लोगों को अमरनाथ गुफा में रहने वाले कबूतरों के जोड़े की कथा सुनाई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमरनाथ गुफा में रहने वाले कबूतरों के जोड़े को अमर रहने का वरदान प्राप्त है और उन्हें भगवान शिव से जुड़ी आस्था का प्रतीक माना जाता है। बाबा की इस कथा को सुनने के लिए भी लोग बड़ी संख्या में जुटे रहे। इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां बड़ी संख्या में लोग इसे भगवान शिव का चमत्कार मान रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे बर्फ जमने की सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया का परिणाम बता रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फ्रिज या फ्रीजर के अंदर तापमान, नमी, हवा के प्रवाह और पानी के जमने के तरीके के कारण कई बार बर्फ अलग-अलग आकार ले लेती है। कई बार ये आकृतियां किसी परिचित वस्तु या प्रतीक जैसी दिखाई दे सकती हैं। इसे मनोविज्ञान में पैरेडोलिया (Pareidolia) भी कहा जाता है, जिसमें इंसानी मस्तिष्क किसी अनियमित आकृति में परिचित चेहरा, आकृति या धार्मिक प्रतीक देखने लगता है। यानी किसी आकृति का किसी धार्मिक प्रतीक से मिलता-जुलता दिखाई देना अपने आप में असामान्य नहीं माना जाता।