Home Himachal>Una श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन: गलती हो जाए तो प्रायश्चित जरूर करें: स्वामी भागवत शरण

श्रीमद्भागवत कथा का दूसरा दिन: गलती हो जाए तो प्रायश्चित जरूर करें: स्वामी भागवत शरण

0
ऊना/ सुशील पंडित: जिला ऊना के गांव बदोली में आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रीधाम वृंदावन से पधारे कथा व्यास स्वामी भागवत शरण जी ने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना बड़ी बात नहीं। लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। वहीं कथा व्यास ने बताया गुरू की महिमा अपार है और उनकी करूणा अदभुत है कब किस पर अनुग्रह हो जाएं। उन्होंने धार्मिक ग्रंथो में वर्णित अवतारों के बारे में बताया कि कहीं पर 24 तो कहीं पर दसावतार की कथा बताई जाती है परंतु दो प्रमुख अवतारों राम और कृष्ण का वर्णन करते हुए कहा कि अवतारों की संख्या की गणना संभव नहीं है।


क्योंकि जितने भक्त होते हैं उतने ही अवतार होते हैं। प्रभु के अवतार प्रयोजन पर भी कहा गया कि यहां किसी राक्षस, दानव और अधर्मी का वध करने के लिए ही अवतरित नहीं होते हैं बल्कि अपने भक्तजनों पर कृपा बरसाने के लिए आते हैं। रावण, कंस को मारने के लिए भगवान को अवतार लेने की जरूरत नहीं थी। उन्होंने कहा कि घर द्वार छोड़कर वन में चले जाने ही वैराग्य नहीं होता बल्कि अपने अंतःकरण की शुद्धता इसमें नितांत आवश्यक है। हमारे जीवन में विचारों का आदान प्रदान रोम-रोम से होता है इसके लिए सिर्फ नाक, कान और आखें ही नहीं होती हैं। संत महात्मा की दृष्टि को दिव्य बताते हुए कहा गया कि हम उतना ही देख सकते हैं जितनी दूर तक हमारी दृष्टि जाती है।

लेकिन संत जन अनंत तक देखने की दृष्टि रखते हैं। कथा व्यास ने पांडवों के जीवन में होने वाली श्रीकृष्ण की कृपा को बड़े ही सुंदर ढंग से दर्शाया। कहा कि परीक्षित कलियुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं। उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। साथ ही जीवन के बाद मोक्ष भी सुनिश्चित करती है। कथा व्यास स्वामी भागवत शरण जी ने कहा कि द्वापर युग में धर्मराज युधिष्ठिर ने सूर्यदेव की उपासना कर अक्षयपात्र की प्राप्ति किया। हमारे पूर्वजों ने सदैव पृथ्वी का पूजन व रक्षण किया।

इसके बदले प्रकृति ने मानव का रक्षण किया। भागवत के श्रोता के अंदर जिज्ञासा और श्रद्धा होनी चाहिए। परमात्मा दिखाई नहीं देता है वह हर किसी में बसता है। श्रीमद्भागवत कथा जीवन के सत्य का ज्ञान कराने के साथ ही धर्म और अधर्म के बीच के फर्क को बताती है। कथा श्रवण से सूना जीवन धन्य हो जाता है।श्रीमद्भागवत कथा में जीवन का सार छिपा है। यह प्रेम और करुणा की महत्ता समझाती है। इस अवसर पर कथा पंडाल श्रोताओं से खचाखच भर गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here