डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा AIIMS, एक चौथाई Operation Theatre खाली!

इलाज के लिए महीनों इंतजार करने को मजबूर मरीज

नई दिल्लीः देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शुमार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज की क्षमता होने के बावजूद उसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। हालात यह हैं कि अस्पताल में बेड, ऑपरेशन थियेटर और आईसीयू जैसी अहम सुविधाएं आंशिक रूप से खाली पड़ी हैं, जबकि मरीजों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी बात एम्स फिलहाल डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। इसका खुलासा संसदीय समिति की रिपोर्ट में हुआ है। रुपोर्ट के अनुसार, मानव संसाधन की कमी के कारण करीब एक चौथाई आप्रेशन थिएटर बंद पड़े हैं, जिससे मरीजों के इलाज पर सीधा असर पड़ रहा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स में मानव संसाधन की कमी के चलते करीब 20 प्रतिशत बेड उपयोग में नहीं हैं। इसके अलावा लगभग एक चौथाई ऑपरेशन थियेटर और 18 प्रतिशत से ज्यादा आईसीयू बेड भी खाली पड़े हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि एम्स के कई सर्जिकल विभागों में ऑपरेशन के लिए मरीजों को हफ्तों से लेकर महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। न्यूरोसर्जरी विभाग में तो यह प्रतीक्षा अवधि कई मामलों में पांच साल तक पहुंच गई है, जो बेहद चिंताजनक है।

कई ओटी इस्तेमाल में नहीं

आंकड़ों के अनुसार, अस्पताल में कुल 4178 बेड उपलब्ध हैं, लेकिन इनमें से केवल 3335 बेड पर ही मरीजों का इलाज हो रहा है। इसी तरह 112 बड़े और 44 छोटे ऑपरेशन थियेटर मौजूद हैं, लेकिन 26 बड़े ओटी फिलहाल इस्तेमाल में नहीं हैं। ट्रॉमा सेंटर की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है, जहां 10 ओटी होने के बावजूद केवल 6 ही चालू हैं, जबकि हाल ही में 5 नए मॉड्यूलर ओटी तैयार किए गए हैं। आईसीयू सुविधाओं की बात करें तो कुल 433 बेड में से 81 बेड खाली पड़े हैं। समिति ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी और प्रशासनिक ढिलाई इसकी मुख्य वजह है।

फैकल्टी के करीब 34.6 प्रतिशत पद खाली

स्टाफ की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संस्थान में फैकल्टी के करीब 34.6 प्रतिशत पद खाली हैं। इसके अलावा अन्य चिकित्सा कर्मचारियों की भी कमी बनी हुई है। दूसरी ओर, अस्पताल के पुराने वार्डों का नवीनीकरण कार्य भी जारी है, जिससे सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि एम्स को अपने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जल्द से जल्द खाली पदों को भरना होगा और प्रशासनिक स्तर पर सुधार लाने होंगे, ताकि मरीजों को समय पर और बेहतर इलाज मिल सके।

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