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  • क्रूरता की हदें पार, दहेज के लिए गर्भवती को तेजाब पिलाकर मार डाला

    क्रूरता की हदें पार, दहेज के लिए गर्भवती को तेजाब पिलाकर मार डाला

    ग्वालियरः मध्य प्रदेश के ग्वालियर से इंसानियत को झकझोर देने वाला एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। जहां एक गर्भवती नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। महिला के परिवार ने आरोप लगाया है कि दहेज की मांग को लेकर उसे लंबे समय से परेशान किया जा रहा था और इसी दौरान उसे जबरन तेजाब पिलाया गया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने महिला के पति, सास और ननद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

    अस्पताल में भर्ती कराने के बाद हुई मौत
    जानकारी के अनुसार, ठाठीपुर थाना क्षेत्र की न्यू मेहर कॉलोनी निवासी निशा राठौर को 22 जून को गंभीर हालत में जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और इलाज के दौरान दो दिन बाद उसकी मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना में सबसे दुखद बात यह रही कि निशा गर्भवती थी। उसकी मौत के साथ ही गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान चली गई।

    मौत से पहले वीडियो में लगाए गंभीर आरोप
    मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब निशा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। यह वीडियो उसकी मौत से पहले अस्पताल में रिकॉर्ड किया गया था।

    वीडियो में निशा ने अपने पति गजेंद्र राठौर और सास उषा राठौर पर गंभीर आरोप लगाए। उसने कहा कि शादी के बाद से ही उसे दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। निशा ने यह भी दावा किया कि उसे जबरन तेजाब पिलाया गया, जिसके कारण उसकी हालत इतनी खराब हो गई। वीडियो में वह बेहद दर्द और तकलीफ में दिखाई दे रही थी और अपनी आपबीती बता रही थी।

    शादी के बाद से चल रहा था विवाद
    पुलिस जांच में पता चला है कि निशा और गजेंद्र की शादी करीब ढाई साल पहले हुई थी। शादी के कुछ समय बाद से ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गए थे। परिजनों का आरोप है कि दहेज की मांग को लेकर निशा को मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था। उसे अक्सर मारपीट और प्रताड़ना का सामना करना पड़ता था।

    पहले भी दर्ज कराई थी शिकायत
    जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि करीब ढाई साल पहले निशा ने अपने पति के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। उस समय उसने प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था और मामला आगे नहीं बढ़ा। लेकिन आरोप है कि इसके बाद भी प्रताड़ना का सिलसिला बंद नहीं हुआ।

    सात दिन की जांच के बाद पुलिस ने दर्ज किया केस
    ग्वालियर के एसडीओपी मनीष यादव ने बताया कि पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सात दिनों तक प्रारंभिक जांच की। जांच के दौरान मृतका के बयान, वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों को आधार बनाया गया।

    इसके बाद पुलिस ने पति गजेंद्र राठौर, सास उषा राठौर और ननद मनीषा राठौर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न, मारपीट और आत्महत्या के लिए उकसाने सहित कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

    आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
    एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस की टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

     

     

     

  • एशियन, विश्व और ओलंपिक चैंपियनों की नर्सरी बनकर उभरेगा संगरूर

    एशियन, विश्व और ओलंपिक चैंपियनों की नर्सरी बनकर उभरेगा संगरूर

    संगरूर : पंजाब को भारत का खेल केंद्र बनाने के लिए पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज संगरूर में 9.50 करोड़ रुपये की लागत से बने ओलंपिक स्तर के स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संगरूर जिला एशियन, विश्व और ओलंपिक चैंपियनों की नर्सरी के रूप में उभरेगा। खेलों के बुनियादी ढांचे में सरकार द्वारा किए गए अभूतपूर्व निवेश का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि पिछली सरकारों ने कभी भी पंजाब का खेल बजट 200 करोड़ रुपये से अधिक नहीं बढ़ाया था, जबकि हमारी सरकार ने खेल बजट को बढ़ाकर 1,790 करोड़ रुपये कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहली बार पंजाब को एशियन हॉकी चैंपियनशिप ट्रॉफी की मेजबानी मिली है और राज्य अब अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाओं को निखारने के लिए क्रिकेट और हॉकी प्रीमियर लीग शुरू करने के लिए भी तैयार है।

    इस कार्यक्रम का वीडियो ‘एक्स’ पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “आज संगरूर के लोगों को खेलों के क्षेत्र में बड़ा प्रोत्साहन मिला है क्योंकि वार हीरोज स्टेडियम में ओलंपिक स्तर के आधुनिक स्विमिंग पूल का उद्घाटन किया गया है। 9.50 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 50×21 मीटर आकार का स्विमिंग पूल खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण ढांचा उपलब्ध कराएगा।” उन्होंने आगे लिखा, “पंजाब की खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए हमारी सरकार ने खेल बजट को 200 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,790 करोड़ रुपये कर दिया है। खिलाड़ियों को अब प्रशिक्षण के लिए अग्रिम राशि उपलब्ध कराई जाएगी, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को स्वर्ण पदक के लिए 1 करोड़ रुपये, रजत पदक के लिए 75 लाख रुपये और कांस्य पदक के लिए 50 लाख रुपये का नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा।”

    पोस्ट के अंत में लिखा गया, “खेल संस्कृति को और बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार जल्द ही पंजाब प्रीमियर लीग और पंजाब हॉकी लीग शुरू करेगी। इसके अलावा, अक्टूबर-नवंबर के दौरान मोहाली और जालंधर में एशियन चैंपियंस ट्रॉफी (हॉकी) की मेजबानी की जाएगी, जिससे देश में खेलों के एक प्रमुख केंद्र के रूप में पंजाब की स्थिति और मजबूत होगी।” उद्घाटन के बाद सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि आज का दिन संगरूर के लोगों, विशेष रूप से युवाओं के लिए अत्यंत गौरव और खुशी का दिन है, क्योंकि यह नया अत्याधुनिक स्विमिंग पूल उन्हें समर्पित किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह स्विमिंग पूल मात्र एक इमारत नहीं है, बल्कि यह हमारे भविष्य के ओलंपियन खिलाड़ियों की नर्सरी के रूप में उभरेगा।” खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए अपनी सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विश्वस्तरीय स्विमिंग पूल पंजाब को देश का नंबर एक खेल राज्य बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।

    मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “यह स्विमिंग पूल अंतरराष्ट्रीय मानकों और ओलंपिक विनिर्देशों के अनुरूप 9.50 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। इसका आकार 50 मीटर × 21 मीटर है, इसकी गहराई 4.5 फीट से 7.5 फीट तक है तथा इसमें 2.5 लाख लीटर पानी की क्षमता है।” इस परिसर में विकसित सुविधाओं का विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि खिलाड़ियों और खिलाड़ीाओं की सुविधा के लिए अलग-अलग आधुनिक शॉवर, चेंजिंग रूम, प्रशिक्षकों के लिए विशेष कक्ष तथा स्टोर रूम बनाए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता और फिटनेस बढ़ाने के लिए आधुनिक जिमनेजियम भी स्थापित किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “7 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए एक विशेष मिनी स्विमिंग पूल भी तैयार किया गया है।”

    मुख्यमंत्री ने बताया कि इस स्विमिंग पूल का निर्माण विश्वस्तरीय ‘मिर्था रेनोवएक्शन’ और ‘क्लासिक मॉड्यूलर सिस्टम’ तकनीक का उपयोग करके किया गया है। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “इसमें लैमिनेटेड पीवीसी और स्टेनलेस स्टील के पैनल लगाए गए हैं, जो इसे देश के सबसे आधुनिक स्विमिंग पूलों में से एक बनाते हैं। स्वच्छ और सुरक्षित पानी सुनिश्चित करने के लिए यूरोपीय मानकों के अनुरूप फिल्ट्रेशन और डिसइन्फेक्शन सिस्टम स्थापित किया गया है।” संगरूर तथा आसपास के क्षेत्रों के अभिभावकों से अपील करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे अपने बच्चों को खेलों के प्रति प्रेरित करें। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि खेलों के विकास के लिए सुविधाओं अथवा धन की कभी कोई कमी न आने पाए।” राज्यभर में खेलों के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार खेलों को बढ़ावा देने तथा युवाओं को नशे की बुराई से दूर रखने के उद्देश्य से पूरे पंजाब में 3,100 खेल मैदानों का निर्माण कर रही है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. रवजोत तथा तरुनप्रीत सिंह सौंद भी उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री ने नेरी में स्थापित किए जा रहे देश के पहले बायोचार संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की

    मुख्यमंत्री ने नेरी में स्थापित किए जा रहे देश के पहले बायोचार संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की

    शिमला: हमीरपुर जिले के नेरी में देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित करेगी। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जन-जागरूकता बढ़ाने में भी यह महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।

    हमीरपुर जिले के नेरी और जाहू में दो बायोचार संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले वर्ष अगस्त माह में डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, वन विभाग और प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई के बीच त्रिपक्षीय समझौता हस्ताक्षरित किया गया था।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां राज्य में स्थापित किए जा रहे बायोचार संयंत्रों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना रोजगार के अवसर बढ़ाने, वन संसाधनों के सतत् प्रबंधन को प्रोत्साहित करने तथा राज्य को कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में सहायक सिद्ध होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। परियोजना के लिए एकत्रित बायोमास की खरीद 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है तथा गुणवत्ता बनाए रखने पर प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत चीड़ की पत्तियांे (पाइन नीडल्स), लैंटाना, बांस तथा अन्य वृक्ष एवं पौध-आधारित बायोमास का उपयोग कर बायोचार का उत्पादन किया जाएगा। परियोजना की 10 वर्ष की परिचालन अवधि में लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होने का अनुमान है, जिससे हिमाचल प्रदेश की हरित पहलों को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा।

    सुक्खू कहा कि हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि प्रणालियों में वृक्षों का समावेश किया जाएगा। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रयास बढ़ेंगे तथा किसानों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक अवसर सृजित होंगे। हिमाचल प्रदेश के 50,000 हेक्टेयर पात्र कृषि क्षेत्र में लागू होने वाला यह कार्यक्रम 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के प्रबंधन में योगदान देगा। इससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैव विविधता का संरक्षण, कृषि की जलवायु अनुकूलता में वृद्धि तथा कार्बन अवशोषण के माध्यम से मापनीय जलवायु परिणाम प्राप्त होंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार मानकों के अनुरूप जीआईएस, रिमोट सेंसिंग तथा डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

    प्रोक्लाइम के सलाहकार मंडल के सदस्य एवं संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोलहाइम ने कहा कि संस्था जलवायु संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के समन्वय के लिए प्रतिबद्ध है। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार के रहे प्रयासों की सराहना की। पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला और प्रोक्लाइम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) केविन कुमार कंदासेमी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • आईएएस अधिकारी धीरेंद्र खड़गटा को अतिरिक्त जिम्मेदारी

    आईएएस अधिकारी धीरेंद्र खड़गटा को अतिरिक्त जिम्मेदारी

    चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने आईएएस अधिकारी श्री धीरेंद्र खड़गटा को तत्काल प्रभाव से फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। धीरेंद्र खड़गटा वर्तमान में पर्यावरण, वन एवं वन्यजीव विभाग में विशेष सचिव तथा नगर निगम फरीदाबाद के आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं।

     

  • तोशाम रोड से कैमरी गंगवा लिंक रोड का होगा निर्माण: Cabinet Minister Ranbir Gangwa

    तोशाम रोड से कैमरी गंगवा लिंक रोड का होगा निर्माण: Cabinet Minister Ranbir Gangwa

    चंडीगढ़: प्रदेश में सडक़ नेटवर्क को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए हरियाणा सरकार ने हिसार के तोशाम रोड (कैमरी माइनर के साथ) से कैमरी गंगवा लिंक रोड तक सड़क के निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। लोक निर्माण एवं जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रस्ताव के अनुसार इस परियोजना पर 23.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह कार्य मुख्यमंत्री घोषणा के तहत प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर एवं सुरक्षित सडक़ संपर्क उपलब्ध होगा।

    इस परियोजना के पूरा होने के बाद कैमरी, गंगवा तथा आसपास के गांवों के निवासियों को आवागमन में काफी सुविधा मिलेगी। साथ ही कृषि, व्यापार एवं दैनिक यातायात को भी गति मिलेगी। कैमरी माइनर के नीचे अंडरग्राउंड क्रॉसिंग बनने से यातायात अधिक सुरक्षित और सुगम होगा।

    उन्होंने बताया कि प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त होने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगामी कार्रवाई शुरू की जाएगी, ताकि निर्माण कार्य शीघ्र प्रारंभ किया जा सके। यह परियोजना क्षेत्र के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ विकास को नई गति प्रदान करेगी।

    कैबिनेट मंत्री रणबीर गंगवा ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार सडक़ अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को बेहतर, सुरक्षित और सुगम यातायात सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जिसके लिए शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी सड़क नेटवर्क का तेजी से विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। अच्छी सड़कें विकास की आधारशिला होती हैं और यही कारण है कि सरकार सडक़ निर्माण एवं मरम्मत कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

    राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक गांव को मजबूत एवं गुणवत्तापूर्ण सडक़ नेटवर्क से जोडऩा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

  • आलीशान होटल में चल रहे देह व्यापार रैकेट का पर्दाफाश, दो अभिनेत्रियों को छुड़ाया गया, दलाल गिरफ्तार

    आलीशान होटल में चल रहे देह व्यापार रैकेट का पर्दाफाश, दो अभिनेत्रियों को छुड़ाया गया, दलाल गिरफ्तार

    मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरगांव इलाके में चल रहे एक कथित हाई-प्रोफाइल देह व्यापार रैकेट का पर्दाफाश किया है। यह रैकेट एक आलीशान होटल से संचालित किया जा रहा था। पुलिस ने छापेमारी के दौरान दो अभिनेत्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला और मौके से एक एजेंट को गिरफ्तार कर लिया। यह कार्रवाई एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग सेल (AHTC) द्वारा की गई।

    दो अभिनेत्रियों को किया गया रेस्क्यू
    पुलिस द्वारा बचाई गई दोनों महिलाएं फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी बताई जा रही हैं। इनमें से एक अभिनेत्री मराठी फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभा चुकी है, जबकि दूसरी अभिनेत्री बंगाली और हिंदी फिल्मों में छोटे और कैमियो रोल कर चुकी है। पुलिस ने दोनों की पहचान गोपनीय रखी है ताकि उनकी सुरक्षा और निजता बनी रहे।

    मेकअप आर्टिस्ट निकला रैकेट का एजेंट
    जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार किया गया एजेंट पेशे से मेकअप आर्टिस्ट है। वह फिल्म और मनोरंजन जगत से जुड़े कई लोगों के संपर्क में था। पुलिस को शक है कि इसी नेटवर्क का इस्तेमाल कर महिलाओं को इस अवैध धंधे में फंसाया जा रहा था।

    फर्जी ग्राहक भेजकर जुटाए गए सबूत
    पुलिस को इस रैकेट की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना की पुष्टि करने के लिए पुलिस ने पहले एक फर्जी ग्राहक को होटल में भेजा। जब सौदे की पुष्टि हो गई और पुलिस को संकेत मिला, तब टीम ने तुरंत होटल पर छापा मार दिया।

    छापेमारी में महिलाओं को छुड़ाया गया
    पुलिस की कार्रवाई के दौरान दो महिलाओं को रेस्क्यू किया गया। शुरुआती जांच में पता चला है कि उनसे देह व्यापार कराया जा रहा था और ग्राहकों से इसके बदले बड़ी रकम वसूली जाती थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

    होटल प्रबंधन की भूमिका भी जांच के दायरे में
    क्राइम ब्रांच इस मामले में होटल प्रबंधन की संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस आर्थिक लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि रैकेट से जुड़े सभी लोगों तक पहुंचा जा सके।

    आगे हो सकते हैं बड़े खुलासे
    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला काफी बड़ा और हाई-प्रोफाइल हो सकता है। जांच आगे बढ़ने के साथ इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों और कुछ बड़े नामों का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ जारी है।

     

     

  • प्रदेश सरकार बच्चों के कल्याण के लिए वचनबद्ध: CM Sukhu

    प्रदेश सरकार बच्चों के कल्याण के लिए वचनबद्ध: CM Sukhu

    शिमला: जिला ऊना बाल कल्याण कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष ओंकार कपिला ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से शिष्टाचार भेंट की तथा मुख्यमंत्री को सम्मानित कर इस नियुक्ति के लिए उनका आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नव नियुक्त अध्यक्ष को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार बच्चों के कल्याण के लिए वचनबद्ध है तथा उनके सर्वांगीण विकास एवं कल्याण के लिए राज्य में अनेक योजनाएं आरम्भ की हैं। इन योजनाओं को धरातल तक ले जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और समाज में जागरूकता लाने के लिए कमेटी को निष्ठापूर्वक कार्य करना चाहिए।

    नवनियुक्त अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि वह कर्मठता से सरकार की नीतियों के अनुसार बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में कार्य करेंगे। इस अवसर पर पूर्व विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने जिला ऊना में विकास की गति में तीव्रता लाने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद से जिले के विकास में हरसंभव सहायता मिल रही है। बैठक के दौरान क्षेत्र के विकास से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों और आगामी योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

  • हरियाणा से जापान तक प्रतिभा का सेतु बनेगा J.C Bose विश्वविद्यालय

    हरियाणा से जापान तक प्रतिभा का सेतु बनेगा J.C Bose विश्वविद्यालय

    चण्डीगढ: भारत-जापान सहयोग को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए जे.सी. बोस विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद ने आज जापान के फुकुओका प्रीफेक्चर से आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई की। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व फुकुओका प्रीफेक्चरल गवर्नमेंट के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के उप महानिदेशक नाकानो शिन्या ने किया। प्रतिनिधिमंडल में फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सचिव जनरल मिसावा रेइइचिरो सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

    प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय का दौरा कर मानव संसाधन आदान-प्रदान, अनुसंधान सहयोग तथा संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की। यह यात्रा विशेष रूप से ऑटोमोबाइल, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में फुकुओका स्थित उद्योगों के लिए कुशल मानव संसाधन उपलब्ध कराने की संभावनाओं का आकलन करने के उद्देश्य से आयोजित की गई। यह पहल जापान सरकार के उस व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है जिसके अंतर्गत आगामी पाँच वर्षों में 50,000 कुशल भारतीय पेशेवरों को जापान में अवसर उपलब्ध कराए जाने हैं।

    इस अवसर पर विश्वविद्यालय ने औपचारिक रूप से सेतु (स्ट्रैटेजिक एक्सचेंज फॉर टैलेंट एंड यूनिवर्सिटी कोलैबोरेशन) – प्रतिभा एवं विश्वविद्यालय सहयोग के लिए रणनीतिक आदान-प्रदान का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस पहल के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने स्वयं को हरियाणा के लिए जापान सहयोग का केंद्र विकसित करने की परिकल्पना प्रस्तुत की, जिसके माध्यम से प्रतिभा संवर्धन, उद्योग सहयोग, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, इंटर्नशिप एवं प्लेसमेंट तथा छात्र एवं शिक्षक आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही विश्वविद्यालय ने एक सुव्यवस्थित तीन-चरणीय प्रतिभा विकास मॉडल भी प्रस्तावित किया, जिसमें प्रथम चरण में इंटर्नशिप, द्वितीय चरण में कॉर्पोरेट नेटवर्किंग एवं भर्ती तथा तृतीय चरण में दीर्घकालिक रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। यह मॉडल भारत सरकार के कुशल भारतीय प्रतिभाओं को जापान से जोड़ने के राष्ट्रीय उद्देश्य को भी सुदृढ़ करेगा।

    कार्यक्रम के प्रारंभ में डीन (शैक्षणिक मामले) प्रो. अतुल मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय एवं कार्यक्रम की संक्षिप्त जानकारी प्रस्तुत की। विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने अपने संबोधन में भारत और जापान के साझा सांस्कृतिक मूल्यों एवं कार्य संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1969 में भारत-जर्मनी संयुक्त परियोजना के रूप में स्थापित यह विश्वविद्यालय कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार एवं स्टार्टअप इनक्यूबेशन के क्षेत्र में सशक्त पहचान रखता है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय का जापान के एहिमे विश्वविद्यालय के साथ पहले से ही शैक्षणिक समझौता है तथा विश्वविद्यालय जापान के लिए प्रशिक्षित एवं उद्योग-उन्मुख मानव संसाधन तैयार करने हेतु तीन-चरणीय संरचित मॉडल विकसित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

    डीन एलुमनाई अफेयर्स प्रो. संजीव गोयल ने विश्वविद्यालय की प्रमुख उपलब्धियों एवं फुकुओका प्रीफेक्चर के साथ प्रस्तावित सहयोग पर विस्तृत प्रस्तुति दी। अपने संबोधन में श्री नाकानो शिन्या ने फुकुओका प्रीफेक्चर का परिचय देते हुए बताया कि वहाँ लगभग 400 सेमीकंडक्टर आधारित उद्योग कार्यरत हैं तथा यह क्षेत्र जापान के प्रमुख स्टार्टअप एवं औद्योगिक नवाचार केंद्रों में से एक है। उन्होंने वर्ष 2025 में भारत के प्रधानमंत्री की जापान यात्रा का भी उल्लेख किया।

    फुकुओका इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के सचिव जनरल श्री मिसावा रेइइचिरो ने संस्थान के शैक्षणिक कार्यक्रमों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग गतिविधियों की जानकारी दी। विशेष रूप से दिल्ली बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन के साथ हुए समझौते के अंतर्गत संचालित छात्र सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का उल्लेख किया। कार्यक्रम का प्रभावी समन्वय आईजे काकेहाशी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक श्री संजय पांडा ने किया तथा अनुवाद संबंधी सहयोग भी प्रदान किया।

    संवाद सत्र के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के औद्योगिक केंद्र में स्थित विश्वविद्यालय की रणनीतिक स्थिति, जापानी कंपनियों से जुड़े प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों के व्यापक नेटवर्क तथा जापानी उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित कौशल विकास प्रणाली की सराहना की। प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि विद्यार्थियों को जापान में बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय में जापानी भाषा पाठ्यक्रम भी प्रारंभ किए जाएँ। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत सेतु प्रस्ताव पर जापान सरकार के स्तर पर सकारात्मक विचार किए जाने तथा शीघ्र ही औपचारिक प्रतिक्रिया देने का भी आश्वासन दिया।

    कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव प्रो. अजय रँगा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जापानी प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त किया तथा विश्वविद्यालय की ओर से दीर्घकालिक एवं सार्थक भारत-जापान साझेदारी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम का समापन प्रतिनिधिमंडल के विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी, विश्वविद्यालय स्टूडियो तथा केंद्रीय अनुसंधान सुविधा के भ्रमण के साथ हुआ।

     

  • एनएच पर अनधिकृत पार्किंग पर सख्ती, क्रेन से हटाए जाएंगे वाहन

    एनएच पर अनधिकृत पार्किंग पर सख्ती, क्रेन से हटाए जाएंगे वाहन

    ऊना सुशील पंडित : राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनधिकृत रूप से वाहन खड़े करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई होगी। जिला प्रशासन ने इसके लिए व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। इसके तहत पहले वाहन स्वामियों को प्रारंभिक नोटिस जारी कर वाहन हटाने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भी वाहन नहीं हटाने पर जिला प्रशासन एवं पुलिस की देखरेख में सड़क एजेंसियों की क्रेन एवं मशीनरी से उन्हें हटाया जाएगा। साथ ही निर्धारित प्रक्रिया के तहत ई-चालान भी जारी किए जाएंगे।

    उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने बताया कि यह एसओपी माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 13 अप्रैल, 2026 के आदेश तथा कंट्रोल ऑफ नेशनल हाईवे (लैंड एंड ट्रैफिक) अधिनियम, 2022 के प्रावधानों के अनुरूप लागू की गई है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों को अवरोध मुक्त बनाकर सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि एसओपी के तहत उपमंडल स्तर पर प्रवर्तन दल गठित किए जाएंगे। इनमें संबंधित एसडीएम अध्यक्ष, एसडीपीओ सदस्य, एनएचएआई पीआईयू हमीरपुर के परियोजना निदेशक अथवा उनके प्रतिनिधि सदस्य, एचपीपीडब्ल्यूडी (एनएच) के संबंधित अधिशासी अभियंता सदस्य सचिव, सहायक अभियंता सदस्य तथा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सह-संयोजक के रूप में शामिल होंगे। यह दल राष्ट्रीय राजमार्गों पर अनधिकृत पार्किंग की निगरानी कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

    एसओपी के अनुसार एनएचएआई एवं एचपीपीडब्ल्यूडी (एनएच) की गश्ती टीमें तथा जिला पुलिस के गश्ती दल अनधिकृत पार्किंग वाले स्थानों की जीपीएस आधारित फोटोग्राफिक रिकॉर्डिंग करेंगे। इसके आधार पर संबंधित सड़क एजेंसी वाहन स्वामियों को प्रारंभिक नोटिस जारी कर वाहन हटाने के लिए सात दिन का समय देगी। निर्धारित अवधि के बाद भी वाहन नहीं हटाने पर जिला प्रशासन एवं जिला पुलिस की देखरेख में सड़क एजेंसियों की क्रेन एवं मशीनरी की सहायता से वाहनों को निर्धारित स्थान पर हटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि कार्रवाई से संबंधित सभी साक्ष्य संबंधित एसडीपीओ को भेजे जाएंगे, जिसके आधार पर केवल ई-चालान जारी किए जाएंगे। मौके पर मैनुअल चालान जारी नहीं किए जाएंगे। जहां एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) उपलब्ध होगा, वहां वीआईडीईएस कैमरों के माध्यम से उल्लंघनों की पहचान कर सूचना सीधे पुलिस विभाग को भेजी जाएगी।

    उन्होंने बताया कि प्रवर्तन कार्रवाई की समीक्षा जिला हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स की मासिक बैठक में की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए 75 किलोमीटर से अधिक के अंतराल पर रिकवरी क्रेन की उपलब्धता भी सुनिश्चित की जाएगी। उपायुक्त ने कहा कि एसओपी का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों को सुरक्षित, व्यवस्थित और अवरोध मुक्त बनाकर सड़क उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित एवं निर्बाध आवागमन उपलब्ध कराना तथा सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना है।

  • मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बावल में 125 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की दी सौगात

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बावल में 125 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं की दी सौगात

    चंडीगढ़: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बावल हलका जिला रेवाड़ी के लिए करीब सवा सौ करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर उनके साथ हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, पूर्व मंत्री डा. बनवारी लाल भी मौजूद रहे।

    केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान व मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के बावल स्थित महाविद्यालय परिसर में खेत बचाओ अभियान के समापन समारोह के दौरान बावल हलका की विभिन्न विकास परियोजनाओं का शुभारंभ किया। इनमें 19 करोड़ 75 लाख रुपए की लागत से बनाए गए राजकीय कन्या महाविद्यालय, बावल, 20 करोड़ 29 लाख रुपए की लागत से बने नगरपालिका बावल के शॉपिंग कॉम्प्लेक्स तथा पार्किंग स्थल और तीन करोड़ 33 लाख रुपए की लागत से बने पुलिस थाना रामपुरा के भवन का उद्घाटन किया गया।

    इसी प्रकार आईएमटी बावल के फेज-3 में 31 करोड़ 26 लाख रुपए की लागत से बनने वाले सीसी रोड, माजरा एम्स के लिए 28 करोड़ 78 लाख रुपए की लागत से बनने वाले जल घर, 6 करोड़ 60 लाख रूपए से गांव रणसी माजरी में स्थापित होने वाले 33 केवी सब स्टेशन तथा गांव बिदावास में 8 करोड़ 19 लाख रुपए की लागत से बनने वाले 33 केवी सब स्टेशन की आधारशिला रखी गई।

    विकास परियोजनाओं की श्रृंखला में गांव बिशनपुर गुज्जर माजरी, गुज्जरों की ढाणी से पीलियों वाली ढाणी तक 49 लाख रुपए की लागत से बनने वाले लिंक रोड, 4 करोड़ 58 लाख रुपए की लागत से गांव बखापुर में बनने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 55 लाख रुपए की लागत से गांव मनेठी तथा 55 लाख रुपए की लागत से गांव भालखी माजरा के सब हेल्थ सेंटर की आधारशिला रखी गई।