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  • ODF से सतत स्वच्छता की ओरः ग्रामीण स्वच्छता का नया अध्याय लिख रहा हिमाचल प्रदेश

    ODF से सतत स्वच्छता की ओरः ग्रामीण स्वच्छता का नया अध्याय लिख रहा हिमाचल प्रदेश

    नवाचार आधारित समाधान प्रशस्त कर रहे विकास की नई राह

    7,000 से अधिक गांवों को मिला वैज्ञानिक स्वच्छता प्रबंधन का लाभ

    शिमला: खुले में शौच मुक्त होना स्वस्थ, स्वच्छ और सम्मानजनक समाज की आधारशिला है। स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए हिमाचल प्रदेश पहले ही खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) राज्य का दर्जा प्राप्त कर चुका है।अब राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि स्वच्छता के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियां दीर्घकाल तक कायम रहें और उन्हें वैज्ञानिक तथा पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

    इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि राज्य में वैज्ञानिक फीकल स्लज मैनेजमेंट (एफएसएम) पहल को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। यह महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम प्रदेश के लगभग 7,000 गांवों को लाभान्वित करेगा तथा सेप्टिक टैंकों और एकल गड्ढा शौचालयों से निकलने वाले मल अपशिष्ट का सुरक्षित संग्रहण, परिवहन, उपचार और निस्तारण सुनिश्चित करेगा।

    पिछले वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देने में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। अधिकांश ग्रामीण परिवारों तक शौचालय सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। हालांकि, स्वच्छता केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है। समय-समय पर सेप्टिक टैंकों और गड्ढों की सफाई तथा उनमें जमा होने वाले फीकल स्लज का सुरक्षित प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है।

    यदि इस अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण न किया जाए तो यह जल स्रोतों, कृषि भूमि और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को प्रदूषित कर सकता है। इससे डायरिया, हैजा और टायफाइड जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने के साथ-साथ पेयजल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।

    पर्वतीय प्रदेश हिमाचल में प्राकृतिक जल स्रोतों, झरनों, खड्डों और नदियों का संरक्षण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग और जल शक्ति विभाग के माध्यम से एक अभिनव एवं व्यवहारिक मॉडल अपनाया है।

    राज्य सरकार ने अलग-अलग फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के बजाय सह-उपचार (को-ट्रीटमेंट) मॉडल को अपनाया है। इस मॉडल के अंतर्गत मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) का उपयोग फीकल स्लज के वैज्ञानिक उपचार के लिए किया जाएगा।

    यह व्यवस्था हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, जहां सीमित भूमि, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और व्यापक वन क्षेत्र बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समक्ष चुनौतियां प्रस्तुत करते हैं। मौजूदा सुविधाओं का उपयोग करके राज्य सरकार संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर रही है, जिससे लागत में कमी आने के साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी न्यूनतम होगा।

    को-ट्रीटमेंट मॉडल के अंतर्गत चयनित एसटीपी में आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों से एकत्रित फीकल स्लज का वैज्ञानिक उपचार नगरों के सीवेज के साथ किया जाएगा। इससे अलग उपचार संयंत्रों की आवश्यकता नहीं होगी और अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित होगा।

    परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक अनुमोदन समिति का गठन किया गया है, जो उपचार क्षमता, अपशिष्ट उत्पादन के अनुमान और तकनीकी व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने के बाद परियोजनाओं को स्वीकृत करेगी। अब तक प्रदेश में 30 को-ट्रीटमेंट परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। राज्य सरकार ने इस महत्त्वाकांक्षी पहल के लिए जल शक्ति विभाग को लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। ग्रामीण विकास विभाग और जल शक्ति विभाग के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) ने विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाया है तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई है।

    पालमपुर और सुंदरनगर में मौजूदा एसटीपी के साथ को-ट्रीटमेंट सुविधाओं के निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को इसका लाभ मिलना भी प्रारंभ हो गया है। यह दर्शाता है कि सरकार की योजनाएं धरातल पर प्रभावी रूप से साकार हो रही हैं।

    यह पहल हिमाचल प्रदेश की स्वच्छता यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। अब ध्यान केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण स्वच्छता श्रृंखला के सुरक्षित और सतत प्रबंधन पर केंद्रित किया जा रहा है। इससे ओडीएफ उपलब्धि को स्थायी बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जन स्वास्थ्य को भी नई मजबूती मिलेगी।

    राज्य सरकार ने 31 मार्च, 2027 तक सभी स्वीकृत को-ट्रीटमेंट परियोजनाओं को संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनके पूर्ण होने के बाद हजारों गांवों को वैज्ञानिक फीकल स्लज प्रबंधन सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे जल स्रोतों का संरक्षण, ग्रामीण स्वच्छता में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिलेगी।

    ओडीएफ उपलब्धि से आगे बढ़ते हुए हिमाचल प्रदेश अब सतत स्वच्छता प्रबंधन की दिशा में एक नया मानक स्थापित कर रहा है। यह पहल न केवल ग्रामीण स्वच्छता की एक महत्त्वपूर्ण कमी को दूर करेगी, बल्कि यह भी दर्शाती है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार आधारित समाधान किस प्रकार विकास की नई राह प्रशस्त कर सकते हैं।

    स्वच्छता के क्षेत्र में यह परिवर्तनकारी पहल एक स्वच्छ, स्वस्थ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल हिमाचल प्रदेश के निर्माण की दिशा में राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच और प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

     

  • सरकार का संकल्प स्पष्ट है, कोई जरूरतमंद अवसर से वंचित नहीं रहेगा: CM Nayab Saini

    सरकार का संकल्प स्पष्ट है, कोई जरूरतमंद अवसर से वंचित नहीं रहेगा: CM Nayab Saini

    चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत प्रदेशभर में लगने वाले अंत्योदय मेले आशाओं,अवसरों और आत्मनिर्भरताओं के मेले है। अंत्योदय मेलों के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि विकास के लाभ उन लोगों तक पहुंचाया जाए,जो दशकों से उपेक्षित रहे है। मेलों में एक मंच पर ही 19 विभागों की 47 योजनाओं का लाभ सीधा पात्र लाभार्थी को दिया जा रहा है। अहम पहलू यह है कि प्रदेश में अब तक 166 जगहों पर अंत्योदय मेलों का आयोजन किया जा चुका है। जिनमें 4 लाख 24 हजार 278 परिवारों को आमंत्रित भी किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी रविवार को कुरुक्षेत्र के लाडवा के आईजीएन कॉलेज में जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत लगाए गए मेले का उद्घाटन करने के बाद संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने मेले में विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं के लाभ देने के लिए लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गांव गोबिंदपुरा निवासी लाभार्थी ताराचंद को पीएम स्ट्रीट वैंडर योजना के तहत स्वीकृति पत्र प्रदान किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि अंत्योदय मेले के माध्यम से सरकार स्वयं चलकर उन गरीब जरुरतमन्द परिवारों के पास पहुंची है, जो अपने अधिकार और अवसर की प्रतीक्षा कर रहे थे। यह अंत्योदय मेला उस संकल्प का जीवंत स्वरूप है, जिसमें सरकार की प्रत्येक योजना, प्रत्येक संसाधन और प्रत्येक प्रयास अंतिम पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति के लिए है। उन्होंने कहा कि अंत्योदय हमारे लिए केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि हमारी संस्कृति का संस्कार है। यानी सभी सुखी हों, सभी स्वस्थ हों और कोई भी दु:खी न रहे। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने इसी भावना को अंत्योदय का नाम दिया। उनका विचार था कि विकास की सार्थकता तभी है, जब उसका प्रकाश अंतिम घर तक पहुंचे और उसकी गर्माहट अंतिम व्यक्ति अनुभव करे। आज प्रदेश में डबल इंजन सरकार अंत्योदय के विचार को जमीन पर उतार रही है। सरकार का संकल्प स्पष्ट है, कोई गरीब पीछे नहीं रहेगा, कोई जरूरतमंद अवसर से वंचित नहीं रहेगा और किसी परिवार को केवल इसलिए आगे बढऩे से नहीं रोका जाएगा कि उसके पास साधन, संपर्क या सही जानकारी नहीं है। सरकार के लिए शासन का अर्थ केवल कार्यालयों में फाइलें चलाना नहीं है, बल्कि जनता की कठिनाइयों को समझना, समाधान को सरल बनाना और उस समाधान को जरूरतमंद के द्वार तक पहुंचाना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार की मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि हर जरूरतमंद परिवार को स्थायी आजीविका से जोडऩा है। स्वरोजगार, कौशल विकास, रोजगार, वित्तीय समावेशन और सामाजिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं को एक मंच पर लाकर पात्र परिवारों को उनकी आवश्यकता और योग्यता के अनुसार अवसर प्रदान करना हैं। यहां परिवार को केवल आवेदन देकर वापस नहीं भेजा जाता। उसकी रुचि, क्षमता, परिस्थिति और आवश्यकता को समझकर उचित मार्गदर्शन देने का प्रयास किया जाता है।

    अब तक 166 स्थानों पर अंत्योदय मेलों का हुआ सफल आयोजन

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के पहले चरण में उल्लेखनीय यात्रा तय की है। प्रदेश में अब तक 166 स्थानों पर अंत्योदय मेलों का आयोजन किया गया है। इन मेलों के दौरान 4 लाख 24 हजार 272 परिवारों का आमंत्रित किया गया और 1 लाखा 88 हजार 792 परिवार मेलों में पहुंचे। इनमें से 1 लाख 52 हजार 157 परिवारों को विभाग के पास भेजा गया। उन्होंने कहा कि अब तक 55 हजार 422 पात्र लाभार्थियों तक आजीविका के लाभ पहुंचे है।

    ऑटो मोड से 40 लाख परिवारों के बनाए गए बीपीएल कार्ड

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी योजनाओं और सेवाओं को परिवार पहचान-पत्र से जोड़ा गया है। घर बैठे ऑटो मोड में अब तक लगभग 40 लाख परिवारों के बीपीएल कार्ड बनाए गये हैं। इसके अलावा गरीब परिवार को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-चिरायु योजना के तहत 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। अब तक लगभग 30 लाख लोगों का 4 हजार 314 करोड़ रुपये की लागत से मुफ्त इलाज करवाया जा चुका है। सरकार ने किडनी के रोग से पीडि़त रोगियों के लिए सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में मुफ्त डायलिसिस की सेवाएं शुरू की है।

    बेटियों को शादी पर दी 1523 करोड रुपए की शगुन राशि

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के तहत अनुसूचित जाति के गरीब परिवारों की बहन-बेटियों की शादी पर 71 हजार रुपये तक शगुन राशि दी जाती है। अब तक 3 लाख 85 हजार बेटियों की शादी पर 1 हजार 523 करोड़ रुपये शगुन राशि दी गई। गरीब महिलाओं को अपनी रसोई चलाने के लिए हर महीने केवल 500 रुपये में गैस सिलेंडर दिया जा रहा है। यह लाभ प्रदेश के लगभग 14 लाख 43 हजार परिवारों को मिल रहा है। इस मौके पर पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा, पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन, एडीसी विवेक आर्य, एसडीएम अनुभव मेहता, चेयरमैन सुभाष कलसाना, भाजपा के वरिष्ठ नेता जयभगवान शर्मा डीडी, चेयरमैन गुरनाम सैनी, चेयरमैन रविंद्र सांगवान, जिलाध्यक्ष रमेश सैनी, चेयरपर्सन साक्षी खुराना, चेयरमैन डा. गणेश दत्त, सतीश मथाना सहित गणमान्य मौजूद थे।  
  • Jalandhar News :  बब्बर खालसा मॉड्यूल का आतंकी गिरफ्तार,1. 3 किलो IED बरामद

    Jalandhar News : बब्बर खालसा मॉड्यूल का आतंकी गिरफ्तार,1. 3 किलो IED बरामद

    जालंधर (ens) : देहात पुलिस और काउंटर इंटेलिजेंस की टीम ने संयुक्त ऑपरेशन मे एक आतंकवादी को गिरफ्तार किया है। इस मामले मे जानकारी देते हुए DGP Gaurav Yadav ने बताया कि उक्त आतंकवादी बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सदस्य है। पुलिस ने आतंकी से भारी मात्रा में विस्फोटक जब्त किया है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि यह आतंकी मॉड्यूल विदेशों में बैठे हैंडलर्स के इशारों पर काम कर रहा था।

    आरोपी से 1.3 किलोग्राम हाई एक्सप्लोसिव से भरा एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बरामद हुआ है। पुलिस का दावा है कि इस आतंकी के पकड़े जाने से एक बड़ी साजिश नाकाम हुई है। पुलिस ने अभी आतंकी की पहचान जारी नहीं की है। पुलिस ने थाना पतारा में भारतीय न्याय संहिता (BNS), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और असलहा कानून की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

    पुलिस आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए आरोपी से पूछताछ कर रही है। इसके साथ ही आरोपी के बैक्वोर्ड और फॉरवर्ड लिंक्स की बी चंबिन की जा रही है। तांकि इस साजिश में जुड़े अन्य लोगो का पता लगाया जा सके।

     

     

     

     

     

     

  • मछुआरों को राहत देगी मुख्यमंत्री सम्मान निधि योजना

    मछुआरों को राहत देगी मुख्यमंत्री सम्मान निधि योजना

    शिमला: मत्स्य संरक्षण एवं प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर वर्ष लागू होने वाले मछली पकड़ने के प्रतिबंध (क्लोज़ सीजन) के दौरान मछुआरों को होने वाली आर्थिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जलाशयों में मत्स्य पालन से जुड़े पात्र मछुआरों को वित्तीय सहायता एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

    हर वर्ष मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान आजीविका के लिए मुख्य रूप से मत्स्य पालन पर निर्भर बड़ी संख्या में मछुआरों की आय अस्थायी रूप से बंद हो जाती है, जिससे उनके परिवार आर्थिक संकट का सामना करते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने प्रतिबंध अवधि के दौरान प्रत्येक पात्र लाभार्थी को प्रतिवर्ष 3,500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य गैर-मत्स्यन अवधि में समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर मछुआरों की आजीविका को सुरक्षित बनाना है।

    यह योजना पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से जलाशयों में मत्स्य पालन से जुड़े सक्रिय एवं पात्र मछुआरों पर लागू होगी, जिनके पास वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस होगा। योजना का उद्देश्य प्रतिबंध अवधि के दौरान आर्थिक राहत प्रदान करना, मत्स्य संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना तथा मत्स्य क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले वास्तविक मछुआरों को सहयोग प्रदान करना है।

    पात्र मछुआरों को निर्धारित प्रपत्र में संबंधित मत्स्य सहकारी समिति के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस, आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर की प्रति, वैध एनएफडीपी पंजीकरण संख्या तथा सहकारी समिति की सदस्यता प्रमाण-पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने आवश्यक हैं। प्राप्त आवेदनों की जांच एवं सत्यापन संबंधित मत्स्य सहकारी समितियों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। इसके उपरांत जिला स्तर पर उपनिदेशक मत्स्य अथवा सहायक निदेशक मत्स्य द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। स्वीकृत वित्तीय सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, लाभार्थियों का रिकॉर्ड तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मत्स्य निदेशालय द्वारा नियमित निगरानी एवं सत्यापन किया जाएगा, ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र मछुआरों तक पहुंचे।

    इस योजना से प्रतिवर्ष गोबिंद सागर, पौंग बांध, कोल बांध, चमेरा तथा रंजीत सागर जलाशयों से जुड़े लगभग 3,700 मछुआरें परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है। योजना के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 1.20 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को पर्याप्त सहयोग एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मछुआरें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मत्स्य क्षेत्र में उनका बहुमूल्य योगदान है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’ जलाशयों पर निर्भर मत्स्यजीवी परिवारों को मछली पकड़ने की प्रतिबंध अवधि के दौरान आवश्यक वित्तीय संबल प्रदान करेगी। राज्य सरकार मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने, मछुआरों की आय बढ़ाने तथा जलीय संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा विकास का लाभ राज्य के दूरदराज़ एवं कमजोर वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम है।

     

     

  • राज्य सरकार ने जुलाई माह में करुणामूलक रोजगार नीति के तहत 94 ग्रुप-सी कर्मचारियों को दी नियुक्ति

    राज्य सरकार ने जुलाई माह में करुणामूलक रोजगार नीति के तहत 94 ग्रुप-सी कर्मचारियों को दी नियुक्ति

    शिमला: राज्य सरकार ने दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए निदेशालय भर्ती, हिमाचल प्रदेश के माध्यम से जुलाई 2026 के दौरान करुणामूलक रोजगार नीति के तहत विभिन्न विभागों में 94 ग्रुप-सी कर्मचारियों को नियुक्ति प्रदान की है।

    यह नियुक्तियां जल शक्ति, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, गृह तथा बागवानी विभागों में की गई हैं। सरकार ने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे करुणामूलक नियुक्ति के वास्तविक मामलों को प्राथमिकता के आधार पर भेजें, ताकि पात्र आश्रितों को बिना अनावश्यक विलंब के रोजगार उपलब्ध करवाया जा सके। करुणामूलक रोजगार नीति के तहत नियुक्ति प्राप्त करने वाले कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित विभागों को करुणामूलक नियुक्ति के मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करने के निर्देश दिए, जिससे वर्षों से लंबित पात्र परिवारों को राहत मिली है।

    ऊना जिले के कुठेड़ा खैरला निवासी अक्षय कुमार ने बताया कि उनके पिता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2018 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने उसी वर्ष करुणामूलक रोजगार के लिए आवेदन किया, लेकिन उनका मामला वर्ष 2018 से 2022 तक लंबित रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके मामले पर कार्रवाई शुरू हुई। फरवरी, 2026 में उन्हें चयन की सूचना मिली, मार्च 2026 में उन्होंने टाइपिंग परीक्षा दी और जुलाई, 2026 में उन्हें नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ।

    शिमला जिले के कोटखाई की शालू चौहान ने बताया कि उनके पिता जल शक्ति विभाग में पंप ऑपरेटर थे और वर्ष 2013 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में उनकी करुणामूलक नियुक्ति की मांग पर कोई विचार नहीं किया गया। लेकिन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उनके मामले का शीघ्र निपटारा किया गया। उन्होंने मार्च 2026 में टाइपिंग परीक्षा दी और जुलाई, 2026 में उन्हें नियुक्ति पत्र मिला इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का हृदय से आभार व्यक्त किया।

    कांगड़ा जिले के बैजनाथ की आकांक्षा कपूर ने बताया कि उनके पिता हाइड्रोलॉजी विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2019 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में उनके करुणामूलक रोजगार के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान राज्य सरकार ने उनके मामले को प्राथमिकता से निपटाते हुए जुलाई, 2026 में उन्हें नियुक्ति प्रदान की।

    सिरमौर जिले के नाहन निवासी लोकेश चौहान ने बताया कि उनके पिता जल शक्ति विभाग में कार्यरत थे और वर्ष 2014 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने उन्हें जुलाई, 2026 में करुणामूलक आधार पर रोजगार प्रदान किया, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।
    हमीरपुर जिले के कुठेड़ा की शिवानी कुमारी ने स्वास्थ्य विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के पद पर नियुक्ति मिलने पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। उनके पति स्वास्थ्य विभाग में डेंटल मैकेनिक के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2023 में उनका निधन हो गया था।

    राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि विभिन्न विभागों द्वारा पूर्व में विभिन्न कारणों से अस्वीकृत किए गए करुणामूलक नियुक्ति के मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। एकमुश्त विशेष पहल के तहत वास्तविक एवं पात्र अस्वीकृत मामलों की दोबारा जांच की जाएगी तथा नीति के प्रावधानों के अनुरूप जहां आवश्यक होगा, वहां उपयुक्त छूट प्रदान करने पर विचार किया जाएगा, ताकि पात्र परिवारों को राहत मिल सके।

    राज्य सरकार करुणामूलक रोजगार के पात्र मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए प्रतिबद्ध है तथा यह सुनिश्चित करेगी कि इस नीति का लाभ सभी पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों तक निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचा सके।

  • युवा स्वस्थ, अनुशासित व नशा मुक्त होगा तो विकसित भारत का सपना होगा साकार : CM Nayab Saini

    युवा स्वस्थ, अनुशासित व नशा मुक्त होगा तो विकसित भारत का सपना होगा साकार : CM Nayab Saini

    दौड़ में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को किया सम्मानित

    चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी उसके युवा होते हैं। युवा केवल वर्तमान नहीं होते बल्कि भविष्य के निर्माता होते हैं, यदि युवा स्वस्थ, अनुशासित व नशा मुक्त होगा तो निश्चित रूप से विकसित भारत का सपना साकार होगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी रविवार को यमुनानगर में नशे से जंग-यमुनानगर के संग के अन्तर्गत आयोजित दौड़ में उपस्थित युवाओं को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने इस दौरान हरी झंडी दिखाते हुए दौड़ का आगाज किया। उन्होंने दौड़ में भाग लेने वालों को नशे से दूर रहने की शपथ भी दिलाई। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि यमुनानगर का युवा, बच्चे, बेटियां,बुजुर्ग व महिलाएं नशे से जंग यमुनानगर के संग का नारा बुलंद करते हुए उनके साथ खड़े हुए हैं। यह आयोजन कोई साधारण आयोजन नहीं है, बल्कि यह दौड़ हरियाणा के युवाओं के संकल्प और सरकार व संस्कार का उत्सव है। आज यहां से दो रास्तों के बीच मुकाबला होना है एक रास्ता जो जीवन की ओर जाता है और दूसरा रास्ता बर्बादी की ओर जाता है, एक रास्ता जो खेल की ओर जाता है, दूसरा रास्ता अंधेरे की ओर जाता है। उन्होंने कहा कि एक रास्ता भविष्य बनाता है तो दूसरा भविष्य छिन लेता है। इसलिए उनका विश्वास है कि हरियाणा के युवा, यमुनानगर के युवा सही रास्ता, विकास व स्वास्थ्य का रास्ता चुनेगें। आज यमुनानगर की युवा शक्ति ने यह तय किया है कि हम दौड़ेगे, लेकिन नशे की ओर नहीं बल्कि समाज को नशा मुक्त बनाने के लिए अपने सपने साकार करने के लिए। यह दौड़ 5 किलोमीटर-10 किलोमीटर की दौड़ नहीं बल्कि उस सामाजिक बुराई नशे के खिलाफ ऐसा जनजागरण अभियान है जिसकी आवाज पूरे हरियाणा में सुनाई देगी। योग के महत्व को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिट इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत की थी। प्रधानमंत्री के प्रयासों से पूरी दुनिया ने योग के महत्व को जाना और परिणामस्वरूप पूरे विश्व में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाने लगा है। उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में आज हमारे युवा नशे से जंग-यमुनानगर के संग दौड़ में भाग ले रहे हैं, यह कार्यक्रम हरियाणा उदय के तहत बहुत बड़ा आउटरीच कार्यक्रम भी है। मुख्यमंत्री ने सभी अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे युवाओं के साथ इस प्रकार की दौड़ में भाग अवश्य लें। भागदौड की जिन्दगी में बच्चों से चर्चा करें, उनसे बातचीत अवश्य करें, क्योंकि अकेलापन ही व्यक्ति को नशे जैसी बुराई की ओर लेकर जाता है। बच्चों को नशे की ओर नहीं, बल्कि विकास, स्वास्थ्य और फिटनेस की ओर आगे बढ़ाना है। आज हमारे देश का युवां देश की रक्षा वीर सैनिक बनकर कर रहा है। हरियाणा के युवा ओलंपिक, पैरालंपिक, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय खेलों में देश में सबसे अधिक पदक जीतकर देश का झंडा ऊंचा करके सबसे आगे चलता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी नेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों, धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं, एनजीओ व युवाओं से अपील करते हुए कहा कि हमें नशे जैसी बुराई से दूर रहकर स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना होगा।

    दौड़ विजेताओं को सम्मानित भी किया

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 10 किलोमीटर की दौड़ में भाग लेने वाले प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया गया। उन्होंने 10 किलोमीटर दौड़ में पुरुष वर्ग से महेंद्रगढ़ के मोहित को प्रथम पुरस्कार यानि एक लाख रुपये, द्वितीय सत्यम को 75 हजार रुपये व उत्तर प्रदेश के सचिन यादव को 51 हजार रुपये तृतीय पुरस्कार के रूप में प्रदान किया। वहीं, महिला वर्ग में सोनीपत की भारती को एक लाख रुपये प्रथम, भिवानी की सोनिका को 75 हजार रुपये द्वितीय व लखनऊ उत्तर प्रदेश की शशि लता को 51 हजार रुपये तृतीय पुरस्कार के रूप में प्रदान किए गए। इस दौड़ में पानीपत निवासी 73 वर्षीय त्रिलोकी नाथ ने भाग लिया और 10 किलोमीटर की दौड़ पूर्ण करने पर उन्हें विशेष श्रेणी में पुरस्कृत किया गया। उपायुक्त प्रीति ने बताया कि इस दौड़ के लिए यमुनानगर के साथ साथ हरियाणा के सीमावर्ती राज्यों के लगभग सवा लाख लोगों ने रजिस्ट्रेशन करवाया था। दौड़ में अनुमानित 70 हजार लोगों ने शिरकत की जो कि एक कीर्तिमान है। इस दौरान कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा, विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, मुख्यमंत्री कार्यालय में विशेष अधिकारी (सामुदायिक पुलिसिंग और आउटरीच) पंकज नैन, पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर,जिला अध्यक्ष राजेश सपरा, उपायुक्त प्रीति, पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल सहित गणमान्य मौजूद थे।  
  • Punjab News: बिजली कर्मियों को अमन अरोड़ा ने दी सख्त चेतावनी, देखें वीडियो

    Punjab News: बिजली कर्मियों को अमन अरोड़ा ने दी सख्त चेतावनी, देखें वीडियो

    चंडीगढ़: पंजाब में चल रहे बिजली विभाग की कर्मचारियों की हड़ताल पर आम आदमी पार्टी की सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने आज एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि हड़ताली कर्मचारियों को आड़े हाथों ले लिया है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया है कि वो आम जनता और किसानों को मोहरा बनाकर सरकार को दबाव में लाने का गंदा खेल खेल रहे हैं।

    3 करोड़ जनता हुई परेशान

    मंत्री अमन अरोड़ा ने तीखे लहजे में यह कह दिया है कि सिर्फ 18,500 कर्मचारियों की कारण से आज पूरे पंजाब के 3 करोड़ लोग अंधेरे और भारी परेशानी में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने यह कहा है कि जनता को परेशान करके, किसानों की खेती पर लात मारकर सरकार की बाजू मरोड़ना और मांगे मनवाना किस हद तक सही है। यह तरीका बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

    कमेटी बन चुकी है

    मंत्री ने किसानों के दर्द का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि – यह समय धान की रोपाई की पीक सीजन है। उन्होंने एक पीड़ित पट्टेदार किसान का जिक्र करते हुए यह कहा है कि एक गरीब किसान 3 एकड़ जमीन ठेके पर लेकर खेती कर रहा है परंतु हड़ताल के कारण से उनकी रोजी-रोटी पर लात पड़ रही है। इसमें उस बेकसूर किसान का क्या कसूर है? जब कमेटी बन गई है तो हड़ताल का ड्रामा क्यों? अमन अरोड़ा ने कर्मचारियों के दोहरे रवैये पर सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने कर्मचारियों की मांग पर 20-25 दिन पहले ही फाइनेंस, पावर और पर्सनल विभाग के अफसरों के साथ खुद ही कर्मचारियों के चार ग्रूप को मिलाकर एक स्पेशल कमेट बनाई थी। जब बातचीत और समाधान का दौर चला तो अचानक से हड़ताल पर जाकर पंजाब की जनता को आखिर क्यों ब्लैकमेल कर रहे हैं।

    हम बातचीत के लिए तैयार हैं

    अमन अरोड़ा ने यह भी साफ किया है कि भगवंत मान सरकार वित्त मंत्री हरपाल चीमा और बिजली मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद से बातचीत के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि जो भी वाजिब मांगें होगी वो मानी जाएगी परंतु उसके साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया है कि ब्लैकमेल न करें। कर्मचारियों को अपनी हड़ताल खत्म कर देनी चाहिए और बिजली की सप्लाई को भी बहाल करें नहीं तो ऐसा रवैया बर्दाश्त नहीं करेंगे।        
  • मुख्यमंत्री ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण

    मुख्यमंत्री ने एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत किया पौधारोपण

    चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने यमुनानगर में आयोजित नशे से जंग-यमुनानगर के संग कार्यक्रम के बाद पुलिस लाइन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से चलाए जा रहे एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत पौधारोपण किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान प्रदेशवासियों को अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संदेश दिया। कारगिल विजय दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने पुलिस शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर वीर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि कारगिल के वीरों का सर्वोच्च बलिदान सदैव हमें राष्ट्रसेवा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देता रहेगा।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पौधे केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की अमूल्य धरोहर भी हैं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाना चाहिए और उसकी देखभाल भी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रकृति का संरक्षण सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है तथा जनभागीदारी से ही हरियाणा को अधिक हरित और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।

    पुलिस लाइन यमुनानगर परिसर में विशेष पौधारोपण अभियान के तहत लगभग 1500 पौधे लगाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ समाज में जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डीएवी स्कूल पुलिस लाईन के बच्चों ने इस पौधारोपण अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

    इस अवसर पर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर,पूर्व विधायक बलवंत सिंह, भाजपा जिला अध्यक्ष राजेश सपरा, जिला महामंत्री नरेंद्र राणा, उपायुक्त प्रीति, पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल, अतिरिक्त उपायुक्त नवीन आहूजासहित अन्य गणमान्य व्यक्ति एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

     

  • Ukraine में नहीं थम रहे हमले, एक बार फिर हुआ भारतीय जहाज पर Attack, दूतावास ने दी जानकारी

    Ukraine में नहीं थम रहे हमले, एक बार फिर हुआ भारतीय जहाज पर Attack, दूतावास ने दी जानकारी

    नई दिल्ली: यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह में रविवार को 4 भारतीय नागरिकों को लेकर जा रहे एक व्यापारी जहाज पर हमला हुआ है। कीव में भारतीय दूतावास के एक ऑफिशियल बयान के अनुसार, चालक दल के 2 सदस्य सुरक्षित बताए जा रहे हैं। वहीं 2 के बारे में जानकारी अभी भी इंतजार है। दूतावास के बयान के अनुसार, यह घटना शनिवार को हुई है। जब ओडेसा बंदरगाह पर MV AGN Ragnar पर हमला हो गया है। ओडेसा यूक्रेन के अहम ब्लैक सी बंदरगाहों में से एक है। इस पर 2022 में रुस-यूक्रेन संघर्ष शुरु होने के बाद से कई बार हमले हुए हैं। भारतीय मिशन ने एक बयान में कहा गया है कि वह स्थिति पर बारीकी के साथ नजर रख रहे हैं। बता दें कि यह घटना ओडेसा बंदरगाह पर रुसी हमले में 4 भारतीय नाविकों की मौत के कुछ दिनों बाद हुई हैं।

    भारतीय नागरिकों की स्थिति पर रखी जा रही नजर

    यूक्रेन की राजधानी कीव स्थित भारतीय दूतावास ने रविवार को यह कहा कि जहाज पर मौजूद दो भारतीय चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। वहीं बाकी के दो भारतीयों के बारे में जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। दूतावास ने कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है तथा भारतीय नागरिकों की स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए हैं। घटना को लेकर अब लोग आगे की जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।

    4 भारतीय नाविकों की हो चुकी है मौत

    यूक्रेन के तट के पास एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले में 4 भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। वहीं 1 अन्य भारतीय गंभीर तौर पर घायल हो गया है। इस घटना के बाद भारत ने रुस के प्रभारी राजदूत को तलब कर इस हमले पर कड़ा विरोध दर्ज करवाया था। विदेश मंत्रालय ने रुसी राजनयिक से साफ तौर पर कह दिया है कि जिस तरह एक व्यापारी जहाज पर हमला हुआ है। उसमें भारतीय नागरिकों की जान चली गई है वो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।    
  • एक ही घर के दोनों बच्चों का दिमाग आखिर क्यों होता है अलग? Scientists ने ढूंढा सवाल का जवाब

    एक ही घर के दोनों बच्चों का दिमाग आखिर क्यों होता है अलग? Scientists ने ढूंढा सवाल का जवाब

    सेहत: एक ही घर में पले-बढ़े भाई बहनों के बीच में अक्सर यह देखा जाता है कि उनकी बुद्धि, सोचने का तरीका और व्यवहार एक-दूसरे से काफी अलग होता है। समान परवरिश, एक जैसे संसाधन और एक ही माहौल के बाद भी यह अंतर क्यों आता है। यह सवाल लंबे समय से साइकोलॉजिस्ट और रिसर्चर ढूंढ रहे हैं। अब रिसर्स के इस रहस्य पर कुछ बातें भी सामने आई हैं।

    आखिर कौन सा बच्चा होता है ज्यादा बुद्धिमान?

    अक्सर यह भी माना जाता है कि पहला बच्चा सबसे ज्यादा बुद्धिमान होता है। इस धारणा के पीछे कुछ साइंटिफिक आधार भी मिलते हैं। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के एक स्टडी के अनुसार, पहले जन्मे बच्चों में सोचने-समझने की क्षमता अपने छोटे भाई-बहनों की तुलना में ज्यादा होती है। ऐसे ही एडिनवर्ग यूनिवर्सिटी, एनालिसिस ग्रूप और सिडनी यूनिवर्सिटी के इकोनॉमिस्ट ने अमेरिकी का ब्यूरो ऑफ लेब स्टैटिस्टिकस के आंकड़ों का एनालिसिस किया है। इस रिसर्च में यह पाया गया है कि पहले जन्मे हुए बच्चे एक साल की उम्र से ही इंटेलिंजेंस टेस्ट में अपने भाई-बहनों से आगे रहने लगते हैं।

    क्या होता है इसका कारण?

    इस अंतर के पीछे कई कारण बताए गए हैं। पहला कारण होता है माता-पिता का पूरा ध्यान, परिवार में जब पहला बच्चा होता है तो उसको अपने परिवार का पूरा साथ और मार्गदर्शन मिल जाता है। एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के रिसर्च में यह सामने आया है कि भले ही माता-पिता सभी बच्चों को इमोशनल रुप से समान समर्थन देते हो लेकिन पहले बच्चे को मानसिक विकास से जुड़े कामों में ज्यादा मदद मिलती है।

    सिखाने का भी प्रभाव

    दूसरा महत्वपूर्ण कारण है सिखाने का प्रभाव। बड़ा बच्चा अक्सर अपने छोटे भाई बहनों को चीजें सिखाता है। यह प्रक्रिया उसके अपने ज्ञान और समझ को और मजबूत करती है। यानी सिखाने से उसकी सीखने की क्षमता और बेहतर हो जाती है हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि मंझला या सबसे छोटा बच्चा कम बुद्धिमान होता है। कई बार छोटे बच्चे अलग तरह की क्षमताओं में आगे निकल जाते हैं कि क्रीएइवटिविटी, सामाजिक समझ या नए विचारों के प्रति खुलापन है।

    पालन पोषण में बदलाव का होगा असर

    एक और जरुरी पहलू होता है कि पालन-पोषण में बदलाव। हर बच्चे के साथ माता-पिता का व्यवहार थोड़ा बदल जाता है। अनुभव बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे बच्चों का तरीका भी बदल जाता है। अनजाने में बच्चों के आत्मविश्वास, सोच और व्यक्तित्व को प्रभावित करता है। माता-पिता के लिए सबसे ज्यादा जरुरी बात है कि बच्चों को किसी एक पहचान में बांधकर न रखें। यह सबसे होशियार है और यह शरारती है जैसे कि लेबल बच्चों के मन पर गहरा असर डालते हैं। वो खुद को उसी नजर से देखने लगते हैं। इसके कारण बच्चों के प्रयास, मेहनत और प्रगति पर ध्यान देना ज्यादा जरुरी है।