जालंधर, ENS: थाना 7 के अधीन आते सुदामा विहार का ग्लेनमोर ग्रीन इलाके में स्ट्रीट डॉग को लेकर 2 पड़ोसियों में विवाद हो गया। दोनों में विवाद इतना बढ़ गया कि महिला की बेटी ने दूसरे पक्ष की महिला की आंखों में चिल्ली स्प्रे फेंक दिया। इस घटना के बाद कालोनी के लोगों की मदद से उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।
वहीं मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित शरणप्रीत कौर ने बताया कि उनके घर की छत पर पड़ोसी डॉक्टर हरलीन कौर रहती है। महिला ने कहा कि बीते दिन शाम को गली के कुत्तों द्वारा गंदगी फैलाई जा रही है। जिसको लेकर उसने हरलीन कौर को कुत्तों को लेकर बात की। इस दौरान महिला की बेटी ने उसके साथ गलत शब्दावली का इस्तेमाल किया। जिसके बाद महिला हरलीन कौर ने भी उसके साथ विवाद करना शुरू कर दिया।
इस दौरान महिला द्वारा उसकी आंखों में चिल्ली स्प्रे फेंक दिया गया। महिला ने कहा कि घटना को लेकर परिवार द्वारा पुलिस को शिकायत दी गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। पीड़िता ने कहा कि महिला हरलीन कौर सिविल अस्पताल में नौकरी करती है। हालांकि दूसरे पक्ष का आरोप है कि पीड़िता शरणप्रीत कौर ने उस पर डंडे से हमला किया। जिसके बाद यह घटना हुई।
वहीं घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। सीसीटीवी फुटेज में देखा जा सकता है कि महिला द्वारा डंडे से हमला किया और उसके बाद डॉक्टर की बेटी द्वारा महिला की आंखों में चिल्ली स्प्रे डाल दिया गया। इस घटना में महिला तड़पने लगी और आसपास के लोगों की मदद से उसे उपचार के लिए अस्पताल में दाखिल करवाया गया।
मामले की जानकारी देते हुए पीड़ित महिला के पति गुरप्रीत ने बताया कि पड़ोसियों के साथ विवाद होने पर पड़ोसी महिला ने उसकी पत्नी पर चिल्ली स्प्रे आंखों में फेंक दिया। पीड़ित ने कहा कि वह सुबह 6.45 बजे घर से निकला। इस दौरान वह भगवान वाल्मीकि चौक पहुंचा तो दोस्त का फोन आया कि उसकी पत्नी की तबीयत ठीक नहीं। जिसके बाद उसे पता चला कि उसकी पत्नी पर चिल्ली स्प्रे कर दिया गया। ऐसे में हालत खराब होने के कारण उन्हें अस्पताल लेकर जा रहे है। जहां डॉक्टरों ने अभी दवाई दी है और कहा कि मरीज का हालत अभी ठीक नहीं है। इस घटना को लेकर वह कालोनी के निवासियों के साथ मिलकर थाना 7 में शिकायत देने गए।
जहां एएसआई सुरिंदर ने उनके हाथ में पर्चा दे दिया और कहने लगे कि वह शिकायत लिख दें। इस दौरान वहां पर सिंह व्यक्ति हाईपर हो गया। पीड़ित ने कहा कि वह इस तरह हाईपर हुए जैसे उन्हें दूसरी पार्टी से फोन आया गया। इस दौरान वह शिकायत की फोटो खींचने को पहले मना करने लग गए। जिसके बाद काफी हंगामा होने के बाद शिकायत की फोटों खींचने दी। पीड़ित ने कहा कि पुलिस घर पर गई लेकिन उसकी पत्नी के बयान नहीं लिए। पीड़ित ने कहा कि जिसके बाद उसने थाने में फोन किया।
पुलिस ने 12 बजे तक आने का कहा, लेकिन अभी तक पुलिस का कोई अधिकारी घटना स्थल पर नहीं आया। वहीं महिला रिंकी ने कहा कि वह सैर कर रही थी। इस दौरान पीड़ित महिला ने कहा कि उसे पड़ोसी काफी परेशान कर रहे है। जिसके बाद वह सैर करके जैसे ही लौटी तो देखा कि पड़ोसन महिला ने पीड़िता की आंखों में चिल्ली स्प्रे फेंक दिया। जिसके बाद महिला को कार में बिठाकर उपचार के लिए सिविल अस्पताल लाया गया।
इस मामले मे डॉक्टर हरलीन कौर से संपर्क करना चाहा लेकिन हो नहीं पाया, यदि वह अपना पक्ष रखते है, तो उसे भी प्रकाशित किया जायेगा।











बस स्टैंड से पिम्स अस्पताल की ओऱ ट्रैवल एजैंटों की एक नई पॉकेट तैयार हुई है जहां शिफ्ट हुए 100 से ज्यादा ट्रैवल एजैंटों ने अपने कारोबार का मायाजाल फैलाने के लिए यूनिपोल से भी बड़े साईज के अवैध विज्ञापन लगाए हैं जिन्हे नगर निगम की विज्ञापन शाखा रोकने में बुरी तरह से फेल साबित हो रही है। विभाग का कहना है कि उन्हे जब शिकायत मिलती है तो वह पार्टी को निगम एक्ट 1976 की धारा 123 के तहत नोटिस जारी करते हैं जिसका ज्वाब एक सप्ताह में देना जरुरी होता है मगर हकीकत यह है कि नगर निगम का यही लचर सिस्टम निगम का खजाना लूटने में ट्रैवल एजैंटों को खूब रास आ रहा है।
इस नोटिस के बाद कोई भी अपने संस्थान के बाहर लगा अवैध विज्ञापन नहीं हटाता और न ही निगम के नोटिस का ज्वाब ही देता है कारण है कि इस नोटिस के बाद भी निगम प्रशासन अपने स्तर पर न तो उक्त अवैध विज्ञापनों को हटा पाता है और न ही भारी भरकम जुर्माना लगाकर निगम का खजाना भरने की जहमत करता है।
इस विभाग में काम कर चुके कई पुराने कर्मचारियों का कहना है कि यह सिस्टम पिछले कई सालों से इसी तरह से ही चल रहा है और ऐसे ही चलेगा। मिली जानकारी अनुसार विज्ञापन शाखा का शहर में लगे अवैध विज्ञापनों सहित अन्य रिकवरी महीने की सिर्फ एक लाख रुपये तक ही सिमट चुकी है जबकि इस विभाग का सालाना टारगेट 25 करोड़ रुपये है अगर हालात इसी तरह से चलते रहे तो इस विभाग यह विभाग निगम के सालाना बजट से पूरी तरह से गायब हो जाएगा।
इस विभाग की जिम्मेदार ज्वाईंट कमिशनर मनदीप कौर के पास है उनका इस सबंधी पक्ष जानने के लिए फोन किया गया मगर उन्होने रिसीव नहीं किया।