पंजाबः गैस लीक मामले में निगम की बड़ी लापरवाही आई सामने! 6 सदस्यों की कमेटी का गठन

लुधियाना: ग्यासपुरा के 33 फुटा रोड के नजदीक गैस रिसाव से 11 लोगों की मौत की घटना के बाद प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला प्रशासन की तरफ से कहा गया कि घटनास्थल पर किसी तरह का गैस सिलेंडर या वस्तु नहीं मिली है, जिससे यह पता चले कि किस चीज से गैस का रिसाव हुआ है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि घरेलू सीवरेज में केमिकल युक्त पानी कहां से आया। कहीं किसी को बचाने की कोशिश तो नहीं हो रही, क्योंकि आसपास बड़ी कंपनियों की फैक्ट्रियां भी हैं। इस मामले में अब मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। 6 सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी से 1 मई को रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। 6 सदस्यीय कमेटी में एडीएम सिवाति टिवाना, नगर निगम के ज्वाइंट कमिशनर कुलप्रीत सिंह, एसीपी वैभव सहगल, पंजाब प्रदूष्ण नियंत्रण बोर्ड के सुपरीटेंडिंग इंजीनियर आर.के बत्रा और परमजीत सिंह व डिप्टी डायरेक्टर फोरेंसिक गौरव पुरी को शामिल किया गया है।

यह टीम सोमवार को इस पूरे मामले पर अपनी रिपोर्ट देगी। डिप्टी कमिश्नर सुरभी मलिक के अनुसार, एनडीआरएफ की जांच में सामने आया है कि हवा में हाईड्रोजन सलफाइड गैस की मात्रा बेहद अधिक थी। मगर यह गैस कहां से आई और कैसे बनी इसकी जांच की जा रही है। इसके लिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं। विधायक राजिंदर कौर छीना ने सरकार से सीवरेज में केमिकल युक्त पानी डालने पर वालों कार्रवाई की मांग की है। बताया जा रहा है कि गोयल किराना स्टोर के पास सीवरेज में धमाका हुआ और गैस का रिसाव हुआ। इससे साफ संकेत मिलते हैं कि सुबह सीवरेज में किसी फैक्टरी की तरफ से केमिकल युक्त पानी सीवरेज में डाला गया। इसके बाद सीवरेज में विस्फोट हुआ और गैस का रिसाव हुआ। क्योंकि सीवरेज में दरारें मिली है। इससे पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नगर निगम की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चीफ इंजीनियर संदीप बहल ने बताया कि सीवरेज में केमिकल युक्त पानी डाला गया या सीवरेज से ही गंदे पानी की वजह से गैस रिसाव हुआ। इन सब कारणों के बारे में स्पष्ट रूप से नहीं कहा जा सकता है। घटनास्थल की जांच की जा रही है, नमूने लिए गए हैं। जांच के सामने आने के बाद ही कार्रवाई होगी। वहीं, डीसी सुरभि मलिक ने कहा है जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सबसे बड़ा सवाल यह कि यह क्षेत्र रिहायशी है। यहां घनी आबादी रहती है। ऐसे में यहां फैक्ट्रियां कैसे लगीं। यह जांच का विषय है। नगर निगम ने फैक्टरी लगाने वाले उद्यमियों को एनओसी कैसे जारी की। घटनास्थल पर जो सीवरेज पाइप लाइन है, वह भी घरेलू बताई जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि घरेलू सीवरेज में केमिकल युक्त पानी क्यों डाला गया। पीपीसीबी इसकी जांच क्यों नहीं करता। समय समय पर पीपीसीबी उद्यमियों की काउंसिलिंग क्यों नहीं करता।

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