रोपड़ः आवारा कुत्तों का कहर अभी भी जारी है। वहीं मोरिंडा में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जहां अवारा कुत्तों ने गली से गुजर रही 8 साल की बच्ची पर हमला कर दिया। इस घटना में आधा दर्जन अवारा कुत्तों ने बच्ची को नोच-नोच कर उसकी जान ले ली।
इस भयानक दृश्य की पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई है, जिसमें साफ दिख रहा है कि अवारा कुत्ते कितनी बेरहमी से उस बच्ची को नोच रहे थे। घटना के दौरान बच्ची मदद के लिए ज़ोर-ज़ोर से रो-रो कर चिल्ला रही थी, लेकिन मौके पर किसी ने भी आकर उसे बचाने की कोशिश नहीं की।
मिली जानकारी के अनुसार शहर के वार्ड नंबर-1 में पिछले लगभग 4 साल से यह प्रवासी परिवार रह रहा था। दोपहर के समय यह 8 साल की बच्ची दूध लेने अपने घर से मार्केट जा रही थी, जब चढ़ती दोपहर की गर्मी में और सड़कें सुनसान होने के दौरान उस पर अवारा कुत्तों ने हमला कर दिया और बुरी तरह नोच-नोच कर उसकी जान ले ली। मोहल्ले वालों ने बताया कि बच्ची को एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद पीजीआई चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां लड़की इन अवारा कुत्तों के हमले सहन नहीं कर पाई और उसने अपनी जान गंवा दी।
गुस्साए मोहल्ले वालों का कहना है कि म्युनिसिपल कमेटी और अन्य सरकारी अधिकारियों को कई बार शिकायत की गई थी कि इन अवारा कुत्तों का समाधान किया जाए, लेकिन प्रशासन ने किसी तरह की कार्रवाई नहीं की और अवारा कुत्ते रोज़ाना किसी न किसी को अपना शिकार बना रहे हैं।








जानकारी मुताबिक, आर्किटेक्ट भाई अंश और राघव कुमार कॉर्पोरेट जगत के शोर-शराबे और भागदौड़ भरी जिंदगी से बचने के लिए भारत के एक दूरदराज कस्बे में बस गए और उन्होंने वहां मिट्टी का एक सुंदर विला तैयार किया। उनके इस विला में ठहरने के लिए अब लोग हजारों रुपयों को खर्च करने के लिए तैयार हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक कोविड में उन्होंने तय किया कि वह दोनों एक बड़ा कदम उठाएंगे। तभी दोनों भाइयों ने नई दिल्ली में घर पर क्वारंटाइन में रहते हुए घर बनाने के लिए अपनी चीजों से एक्सपेरिमेंट किया, जिसमें उन्होंने घर में उगाए गए मशरूम से माइसेलियम का टेस्ट किया और मिट्टी, भूसे और पानी से बनी प्राकृतिक चीजों से कोब बनाने के बारे में सीखा। यही वह समय था जब शहर के शोरगुल से दूर पहाड़ों में घर बनाने का विचार उनके मन में पनपा जिसके बाद उन्होंने पहाड़ी की ढलान पर मिट्टी, पत्थर और भूसे से एक अनोखा घर बना दिया। इस विला को कोई हैरी पॉटर का घर कहता है तो कोई हॉबिट का घर और कोई परियों की कहानी का घर कहकर बुलाता है, लेकिन दोनों भाइयों के लिए ये प्यार से बनाया गया घर है। वह मानते हैं कि इस घर की हर एक आकृति उन सभी प्यारे लोगों की कहानी बयां करती है जो यहां आए और इसे बनाने में मेहनत की।
अपने इस सुंदर विला को बनाने के लिए दोनों ने हिमालय की तलहटी में बसे ऋषिकेश को चुना। इस जगह को भारत की योग राजधानी के रूप में जाना जाता है और यह नई दिल्ली से लगभग 250 किलोमीटर है। गंगा नदी के किनारे बसा यह शहर ऐतिहासिक रूप से तीर्थयात्रा का केंद्र रहा है, लेकिन अब ये जगह कैफे, कॉर्पोरेट और वेलनेस रिट्रीट का एक फेमस पॉइंट बन गई है। शायद इसी वजह से विला बनाने के लिए इस जगह को चुना गया।
इस घर को बनाने में दोनों भाइयों ने 28 से 30 लाख रुपये खर्च किए हैं। अब ये विला 2 बेडरूम और वन बाथरूम कि लिस्ट में शामिल है, जिसमें ठहरने के लिए प्रति रात के हिसाब से लगभग 13 से 14 हजार रुपये लगते हैं। वैसे तो ये विला हर किसी के मन को भाएगा। लेकिन इस तक पहुंचने के लिए छोटी सी ट्रैकिंग करनी होगी। इंटरनेट से दूर, प्रकृति की गोद में बसे इस विला में लोग शांति का अनुभव करते हैं।

