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  • World Rabies Day 2025: रेबीज का कारण बन सकते हैं ये जानवर, जरुर बरतें सावधानी

    World Rabies Day 2025: रेबीज का कारण बन सकते हैं ये जानवर, जरुर बरतें सावधानी

    नई दिल्ली: हर साल 28 सितंबर को वर्ल्ड रेबीज डे मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को रेबीज जैसी खतरनाक बीमारी के प्रति जागरुक करना और इसे रोकने के तरीके समझाना है। रेबीज एक इस तरह का वायरस है जो इंसानों और जानवरों के दिमाग और नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है। यदि इसका इलाज समय पर न करवाया जाए तो यह मौत का कारण भी बन सकता है। ज्यादातर लोगों की सोच है कि रेबीज सिर्फ कुत्तों के काटने से फैलता है परंतु कई रिसर्च और डॉक्टरों की मानें तो कुछ और जानवर भी इस बीमारी के फैलने का कारण बन सकते हैं।

    इसलिए खतरनाक होता है रेबीज

    यह एक वायरल बीमारी होती है जो कि लाइसावायरस के कारण होती है। यह वायरस ज्यादातर संक्रमित जानवरों की लार के जरिए ही इंसानों में फैलता है। यह वायरस सीधा नर्वस सिस्टम पर हमला करता है और दिमाग में सूजन पैदा कर देता है। इससे मरीज कोमा में भी जा सकते हैं। इसके अलावा उसकी मौत भी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में हर साल रेबीज के कारण करीबन 59,000 लोगों की मौत जो जाती है। इसके ज्यादातर मामले एशिया और अफ्रीका में होते हैं।

    सही समय पर इलाज करवाना जरुरी

    भारत में रेबीज के 95% मामले कुत्तों के काटने के कारण ही होते हैं परंतु यह सिर्फ कुत्तों तक सीमित नहीं है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, रेबीज एक इस तरह की बीमारी है जिसका कोई भी स्थायी तौर पर इलाज नहीं होता। यदि इसके लक्षण शुरु हो जाएं तो मरीज का बचना मुश्किल हो जाता है। ऐसे समय पर वैक्सीन लगाना और सही इलाज बहुत जरुरी माना जाता है।

    इन जानवरों के कारण भी फैल सकता है रेबीज

    . गाय, भैंस और बाकी खेत के जानवर यदि रेबीज से संक्रमति हो तो उनके काटने के कारण भी यह बीमारी फैल सकती है। . चमगादड़ के काटने से भी रेबीज का खतरा काफी होता है क्योंकि उनके काटने का पता नहीं चलता। अमेरिका में चमगादड़ रेबीज का मुख्य स्त्रोत मानी जाती है। . कुत्ते रेबीज के सबसे बड़े वाहक माने जाते हैं। खासतौर पर आवारा कुत्ते। भारत में रेबीज के 99% मामले कुत्तों के काटने से ही होते हैं। . लोमड़ी, रैकून और सियार जैसे जंगली जानवर भी रेबीज को फैलान का मुख्य कारण माने जाते हैं। . पालतु या आवारा बिल्लियां भी रेबीज फैला सकते हैं। यदि उनको वैक्सीन न लगी हो तो वह इस इंफेक्शन का कारण बन सकती है। . यदि बंदर काटे या खरोच जाए तो भी रेबीज हो सकता है। खासतौर पर ऐसे इलाकों में जहां बंदर ज्यादा होते हैं वहां इसका खतरा रहता है।  
  • पर्दों से Dust चुटकियों में होगी साफ, जानें इन्हें साफ करने का तरीका

    पर्दों से Dust चुटकियों में होगी साफ, जानें इन्हें साफ करने का तरीका

    लाइफस्टाइलः  घर में पर्दे सबसे ज्यादा गंदे होते हैं। प्लास्टिक से लेकर अलग-अलग प्रकार के फैब्रिक के इन पर्दों को साफ करना भी मुश्किल लगता है। अगर आप इन्हें ठीक से साफ और सुखा नहीं कर पाते तो ये काफी भद्दे और पुराने दिखने लगते हैं। यहां हम आपको इन्हें साफ करने के कुछ आसान तरीके बता रहे हैं जिनकी मदद से आप बिना ज्यादा मेहनत के इन्हें साफ कर सकते हैं और नए जैसा चमका सकते हैं।

    – पर्दों को धोने से पहले उन्हें रात भर के लिए साबुन वाले पानी में भिगोकर छोड़ दें। ऐसा करने से उन पर लगा मैल नर्म हो जाएगा और वो आसानी से साफ होंगे। इसके बाद उन्हें मशीन में डालें और डेलिकेट मोड पर ठंडे पानी से साफ करें। पद्रों को धोने के लिए हल्के डिटर्जेंट का ही प्रयोग करें ताकि उनका रंग खराब न हो।

    – अगर पर्दे रेशम या किसी नाजुक कपड़े के हैं तो मशीन में धोने से बचें। आप उन्हें ठंडे पानी में हल्के डिटर्जेंट के साथ भिगोकर रखें और एक से दो घंटे बाद हल्के हाथों से रगड़कर धोए और फिर हल्की धूप या दवा में सुखाएं।

    – इसके अलावा पर्दों को धोने से पहले उन्हें उतारकर किसी खुली जगह पर ले जाकर अच्छे से झाड़ें। इससे उनकी सतह पर जमी धूल निकल जाएगी और फिर आपको उन्हें धोना आसान हो जाएगा।

    – इसके लिए आप चाहें तो वैक्यूम क्लीनर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप पर्दों को नहीं हटा सकते तो सॉफ्ट ब्रश अटैचमेंट वाले वैक्यूम क्लीनर से हल्के-हल्के से साफ करें। यह तरीका पर्दों पर जमा ऊपरी धूल और गंदगी को हटा देता है।

    – पर्दों को हमेशा सीधी धूप में डालने से बचाें। उन्हें छाया में डालें या फिर बहुत हल्की धूप में ही डालें। सीधी धूप से उनका रंग फीका पड़ सकता है।

  • SBI बैंक ने बदला अपना नियम, ग्राहकों के लिए बढ़ाई Auto Sweep लिमिट

    SBI बैंक ने बदला अपना नियम, ग्राहकों के लिए बढ़ाई Auto Sweep लिमिट

    नई दिल्ली: भारतीय स्टेट बैंक ने अपनी एक स्कीम को लेकर अहम बदलाव किया है। बैंक ने लिमिट बढ़ा दी है ऐसे में इसका अर्थ है कि सेविंग अकाउंट में पैसे रखने वाले काफी लोग इसका फायदा ले पाएंगे। यह स्कीम ऑटो स्वीप डिपॉजिट है इसको मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट(MOD) भी कहते हैं। 1 सितंबर 2025 से ऑटो स्वीप शुरु करने के लिए बचत खाते में जमा राशि की सीमा 15,000 कर दी गई है। अब बचत खाते में जमा राशि 50,000 से ज्यादा होने पर मल्टी ऑप्शन डिपोजिट स्कीम शुरु की जाएगी। पहले यह सीमा 35,000 रुपये थी जो अब बढ़ा दी गई है।

    आखिर क्या होती है ऑटो स्वीप स्कीम?

    यह एक बैंकिंग सर्विस होती है जो आपके सेविंग अकाउंट्स और फिक्स्ड डिपॉजिट को जोड़ेगी। यह आपके अकाउंट में एक तय की गई लिमिट से ज्यादा डिपॉजिट हुई एक्स्ट्रा अमाउंट को ऑटोमैटिक तौर से FD में निवेश करेगी। इससे आप हाई इंटरेस्ट रेट का फायदा भी उठा पाएंगे। जरुरत पड़ने पर यही एक्स्ट्रा अमाउंट खुद ही आपके सेविंग अकाउंट में आ जाएगा। इससे अब लिक्विडिटी की समस्या भी नहीं होगी और एफडी जैसे हाई ब्याज दर का भी फायदा आपको मिलेगा।

    इस तरह काम करेगा एसबीआई का ऑटो स्वीप

    इस स्कीम के अंतर्गत सेविंग अकाउंट में एक्स्ट्रा राशि खुद ही एफडी में ट्रांसफर हो जाएगी। यदि बाद में सेविंग अकाउंट का बचा हुआ अमाउंट या डेबिट कम पड़ेगा तो एसबीआई रिवर्स स्वीप शुरु करेगी और कमी को पूरा करेगी। एसबीआई के अनुसार, MODS योजना की खास विशेषता ग्राहकों को अधिशेष निधियों पर उच्च ब्याज निकालने में मदद करेगा।

    नाबालिग भी उठा पाएंगे लाभ

    MOD अकाउंट एक व्यक्ति, ज्वाइंट या फिर नाबालिग के तौर पर भी खोल सकते हैं। हर ऑटो स्वीप अकाउंट को मिनिमम पीरियड 1 साल होता है जरुरत पड़ने पर आप इसको पहले तोड़ भी सकते हैं। इस पर ब्याज तिमाही या कंपाउंडिग बेस पर दिया जाता है। समय से पहले यदि आप इसको विड्रॉल करेंगे तो आप पर छोटा सा जुर्माना भी लग सकता है। इस व्यवस्था से यह तय होता है कि क्स्टमर्स FD से ज्यादा रिटर्न का फायदा उठा पाएं। इसके अलावा अपनी रोजाना की जरुरतों के लिए भी पैसा बचाकर रख पाएं।

    क्या होता है ऑटो स्वीप बदलाव?

    एसबीआई की ऑटो स्वीप डिपॉजिट, सेविंग अकाउंट के कम रिटर्न और फिक्स्ड डिपॉजिट की कठोरता के बीच में एक जरुरी निवेश स्कीम है। लिमिट को 50,000 रुपये तक बढ़ाकर एसबीआई ने यह सुनिश्चित किया है कि सिर्फ सार्थक अधिशेष ही एमओडी में जमा हो पाएं इससे यह योजना और भी ज्यादा सुव्यवस्थित हो जाएगी।
  • 29 मिनट तक सांस रोककर शख्स ने बनाया World Record, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ Video

    29 मिनट तक सांस रोककर शख्स ने बनाया World Record, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ Video

    नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर आए दिन कुछ ऐसे वीडियो वायरल होते हैं जो फैंस को एंटरटेन करते हैं तो कई बार हैरान कर देते हैं। अब एक ऐसा ही वीडियो क्रोएशिया के फीड ड्राइवर का हो रहा है। फीड ड्राइवर का नाम विटोमिर मारीचिक बताया जा रहा है। इसमें उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया है जो एक आम इंसान शायद नहीं कर पाएगा। मारिचिक ने 3 मीटर गहरे पूले में पुरे 29 मिनट और 3 सैकेंड तक अपनी सांस रोक कर रखी। इस तरह उन्होंने अपने नाम एक नया वर्ल्ड रिकॉर्ड किया। इस रिकॉर्ड के साथ उन्होंने अपने पिछले रिकॉर्ड को करीब 5 मिनट के साथ तोड़ दिया है। सोशल मीडिया पर जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ तो लोग हैरान हो गए हैं। इस वीडियो में हालांकि खुद मारिचिक ने अपना अनुभव बताया है।

    21 मिनट तक रोक ली सांस

    वैसे तो कोई भी व्यक्ति कुछ सैकेंड या फिर ज्यादा से ज्यादा 1-2 मिनट तक सांस रोक सकता है। 1-2 मिनट भी बहुत ही मुश्किल होते हैं और इसमें ही फेफड़ों का दम घुटने लग जाता है परंतु फीड ड्राइवर खास ट्रेनिंग के जरिए पानी के अंदर काफी देर तक सांस रोक सकते हैं। इसके लिए वो खास तरह की सांस लेने की एक्सरसाइज भी करते है, ध्यान लगाते हैं और शरीर को ऐसी स्थिति के लिए तैयार करते हैं।

    शरीर ने मान ली थी हार

    मारिचिक ने कहा कि उनको 20 मिनट तक यह काम बहुत ही मुश्किल लगा। उनके डायाफ्राम सिकुड़ने लग गए और शरीर बार-बार उनको सांस लेने के लिए मजबूर कर रहा था परंतु उन्होंने हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उनका मन शांत हुआ और वो आखिरकार 29 मिनट तक ऐसे ही पानी के अंदर बिना सांस रोके रह पाए। मारिचिक ने यह रिकॉर्ड 14 जून को बनाया था। इससे पहले इस रिकॉर्ड पर क्रोएशियाई के फ्रीड ड्राइवर बुदिमिर सोबात का नाम था। उन्होंने 2021 में यह कारनामा किया था परंतु अब मारिचिक ने दुनिया को यह दिखा दिया कि पूरी मेहनत, ट्रेनिंग और हिम्मत के साथ इंसान कोई भी मु्श्किल काम आसान कर सकता है।

    यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया

    जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो लोग कई तरह के सवाल करने लग गए। उनमें यह होड़ मच गई कि कौन अमूमन 29 सैकेंड तक सांस रोक पाएगा क्योंकि 2 मिनट से यदि ज्यादा सांस रोको तो शरीर भी साथ छोड़ देता है। ऐसे में लोग यह देखकर काफी हैरान थे कि 29 मिनट तक कैसे कोई सांस रोक सकता है। यूजर्स ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। एक ने लिखा कि – ‘भाई ये झूठ है या फिर वो इंसान मर गया होगा ऐसा कैसे हो सकता है’। अन्य ने लिखा कि – ‘खास ट्रेनिंग करके ही यह संभव हो पाया है’। एक ने लिखा कि – ‘मेरा तो इसको सुनकर ही दम घुटने लग गया है’।
  • आखिर क्यों मनाया जाता है Hindi Diwas? जानें इस दिन का पूरा इतिहास

    आखिर क्यों मनाया जाता है Hindi Diwas? जानें इस दिन का पूरा इतिहास

    नई दिल्ली: भारत में कई तरह की भाषाएं बोली जाती है। हर भाषा की अपनी खासियत भी है। किसी भी भाषा का महत्व दूसरी भाषा से कम नहीं है परंतु हिंदी भाषा शुरु से ही भारत की पहचान रही है। यह हमारी राष्ट्रभाषा भी है। इसी वजह से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है। परंतु काफी लोग यह नहीं जानते कि आखिर 14 सितंबर को ही हिंदी दिवस क्यों मनाया जाता है। हिंदी दिवस के मौके पर आपको बताते हैं कि आखिर इस दिन को मनाने का उद्देश्य क्या है।

    एक नहीं साल में 2 बार मनाया जाता है हिंदी दिवस

    कुछ लोग इस बात को लेकर भी कंफ्यूज हो जाते है कि हिंदी दिवस जनवरी मे मनाया जाता है। सितंबर वाले हिंदी दिवस को लेकर उनके मन में असमंजस ही रहती है। बता दें कि 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है और 14 सितंबर को सिर्फ हिंदी दिवस मनाया जाता है। साल में दो बार ऐसे मौके आते हैं जब हिंदी दिवस मनाया जाता है।

    14 सितंबर को इसलिए मनाते हैं हिंदी दिवस

    14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि के साथ भारत की राजभाषा के तौर पर स्वीकार किया था। इसके बाद 1953 से इस दिन को औपचारिक तौर पर राष्ट्रीय हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाता है। ये दिन हिंदी भाषा का महत्व, उपयोगिता और हिंदीभाषा होने का गर्व बढ़ाता है। मातृभाषा को प्रति हमारा सम्मान और आदर दर्शाने का यह दिन खास होता है।

    10 जनवरी को मनाया जाता है विश्व हिंदी दिवस

    हिंदी दिवस को वैश्विक स्तर पर पहचान और सम्मान 10 जनवरी को मिला था इसलिए उस दिन विश्व हिंदी दिवस मनाया जाता है। ये तारीख इसलिए भी खास है क्योंकि साल 1975 में इसी दिन नागपुर में पहला विश्व हिंदी दिवस सम्मेलन आयोजित हुआ था। इसके बाद साल 2006 से हर साल 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के तौर पर मनाया जाने लगा है। हिंदी विदेशों में भी काफी प्रचलित हो रही है क्योंकि पीएम जब भी विदेश में दौरे के लिए जाते हैं तो वह हमेशा हिंदी भाषा को ही प्राथमिकता देते हैं। उन्होंने हिंदी भाषा को काफी बढ़ावा भी दिया है।  
  • क्या भारत में सस्ती होगी मोटापे की दवाईयां? WHO ने बताया सच

    क्या भारत में सस्ती होगी मोटापे की दवाईयां? WHO ने बताया सच

    सेहत: मोटापा आज के समय में सबसे बड़ी दिक्कत बना हुआ है। दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से यह एक है हालांकि हेल्थ इंडस्ट्री में वजन घटाने के लिए कई तरह की दवाईयां मौजूद भी है। अब World Health Organization की ओर से मोटापा कम करने वाली दवाईयों को Model List Of Essential Medicines में शामिल कर लिया गया है। यह कदम सिर्फ हेल्थकेयर सेक्टर ही नहीं बल्कि आम लोगों की जिंदगी पर भी बड़ा असर डालेगा।

    इसलिए खास है WHO की दवाईयों की लिस्ट

    WHO के द्वारा पेश की गई लिस्ट में 150 से ज्यादा देश शामिल हैं। इसमें भारत भी शामिल है। दवाईयों की खरीदी, सप्लाई, हेल्थ इंश्योरेंस और कुछ स्किम्स की डिटेल भी इसमें मौजूद हैं। यदि भारत इस लिस्ट को अपनाएगा तो आने वाले समय में भारत में इन सभी दवाईयों की कीमत में भारी कमी हो जाएगी।

    भारत में दवाईयों की कीमत

    .Wegovy (Semaglutide): इस दवाई की कीमत प्रति माह करीबन 17,000 से 26,000 के बीच में है। . Mounjaro (Tirzepatide): इसकी कीमत 14,000 से 27,000 प्रति महीने है। इसमें शीशियों की कीमत थोड़ी कम है परंतु Kwikpens (Pre Filled disposable Device) ज्यादा मंहगी है।

    WHO का आया बयान

    . विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि इन दवाईयों की ज्यादा कीमत लोगों की पहुंच सीमित कर रही है। . इसके लिए जेनेरिक दवाईयों को बढ़ावा देना चाहिए ताकि कीमतें कम हो सके। . प्राइमरी हेल्थकेयर में ये दवाईयां कितनी मात्रा में उपलब्ध हैं इसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि उन सभी क्षेत्रों को सुविधाएं मिल पाएं जिन्हें दवाईयां मिल न पाए।

    तेजी से बढ़ रहा है मोटापा

    भारत में इस समय मोटापा और ओवरवेट की समस्या काफी तेजी से बढ़ती जा रही है। . 1990 में 53 मिलियन लोग ओवरवेट और मोटापे से जूझ रहे थे। . यदि अभी कदम नहीं उठाया तो संख्या बढ़कर 520 मिलियन तक पहुंच जाएगी। . 2021 तक संख्या 235 मिलियन हो सकती है।

    लाखों लोगों को होगा फायदा

    WHO सिर्फ मोटापा और डायबिटीज ही नहीं बल्कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाईयां भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहता है। वहीं भारत जैसे देश में मोटापा और डायबिटीज के मरीज हर साल बढ़ते ही जा रहे हैं ऐसे में डब्ल्यूएचओ का यह कदम बड़ा बदलाव साबित होगा। यदि भारत में इन दवाईयों की लिस्ट जारी की जाए तो कीमतें कम होगी और लाखों लोगों को फायदा भी होगा।
  • अब Online खाना मंगवाना पड़ेगा महंगा, Swiggy Zomato जैसे प्लेटफॉर्म्स ने बढ़ाए Service Rate

    अब Online खाना मंगवाना पड़ेगा महंगा, Swiggy Zomato जैसे प्लेटफॉर्म्स ने बढ़ाए Service Rate

    नई दिल्ली: अगर आप भी ऑनलाइन ऑर्डर खाना मंगवाते हैं और स्विगी, जौमेटो जैसे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते हैं तो आपको अब मंहगा पड़ेगा। आने वाले त्योहारी सीजन में ऑनलाइन फूड की डिमांड में भारी इजाफा देखने को मिलेगा। बीते दिनों सरकार की ओर से जीएसटी काउंसिल की बैठक में ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की डिलीवरी सर्विस पर 18% जीएसटी का ऐलान किया था। इसके बाद नुकसान की भरपाई के लिए पूरी कंपनियों ने टैक्स लागू होने से पहले ही ग्राहकों को झटका दिया है। 3 सितंबर को हुई जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में जीएसटी रिफॉर्म से जुड़े कई बड़े ऐलान किए हैं। इसमें शुरुआत से लागू 4 टैक्स स्लैब की जगह अब 5%-18% के सिर्फ दो टैक्स स्लैब ही रहे हैं। वहीं घरेलू इस्तेमाल से लेकर टीवी-एसी, कार बाइक्स समेत सारी चीजों के दाम घटाने की घोषणा भी की गई है। कुछ ऐसे सामान भी है जिन पर टैक्स का बोझ बढ़ाया गया है या नया टैक्स लगाया गया है। इसी बीच जीएसटी काउंसिल की ओर से ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की डिलीवरी सर्विस पर 18% टैक्स लगाया गया है जो 22 सितंबर से लागू हो जाएगा। बता दें कि इससे पहले ये सर्विस टैक्स के दायरे से बाहर ही थी जिसको अब cGST Act की धारा 9(5) के अंतर्गत शामिल किया गया है।

    जीएसटी लागू होने से महंगा होगा ऑनलाइन फूड

    सरकार के इस फैसले को लागू करने के लिए अभी 15 दिन का समय बाकी है लेकिन पीटीआई के मुताबिक, जोमैटो, स्विगी और मैजिकपिन जैसे ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्मों ने लगाए गए जीएसटी से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए अभी से प्लेटफॉर्म फीस में भी बढ़ोतरी कर दी है। इस बढ़ोतरी से अब देशभर के लाखों लोगों के लिए ऑनलाइन खाना ऑर्डर करना महंगा हो जाएगा। एक ओर जहां स्विगी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस की जीएसटी समेत 15 रुपये कर दिया है वहीं जोमैटो ने अपने चार्ज बढ़ाकर 12.50 रुपये कर दिया है। सिर्फ यही नहीं है बल्कि फूड डिलीवरी सेक्टर की एक और बड़ी कंपनी मैजिकपिन ने भी जीएसटी के बिजनेस पर पड़ने वाले व्यापक असर को देखते हुए अपनी प्लेटफॉर्म फीस पर 10 रुपये प्रति ऑर्डर करने का ऐलान किया है। विश्लेषकों ने आकड़ों के साथ बताया है कि अप्रैल-जून तिमाही में जोमैटो ने 451 करोड़ रुपये और स्विगी के फूड डिलीवरी बिजनेस ने 192 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है परंतु अतिरिक्त जीएसटी देनदारी से मार्जिन पर दबाव पड़ने की संभावना है।
  • अब कैंसर का इलाज होगा आसान, रूस ने बनाई खास Vaccine वैज्ञानिकों ने किया दावा

    अब कैंसर का इलाज होगा आसान, रूस ने बनाई खास Vaccine वैज्ञानिकों ने किया दावा

    नई दिल्ली: रुस ने कैंसर पीड़ित मरीजों के खिलाफ लड़ाई में सफलता हासिल की है। फेडरल मेडिकल एंड बायोलॉजिकल एजेंसी ने कैंसर की वैक्सीन बनाई है। FMBD के प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने कहा कि रुसी एंटरोमिक्स कैंसर वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार हो गई है। mRNA-बेस्ड इस वैक्सीन ने सभी प्रीक्लिनिकल टेस्ट को भी सफलतापूर्वक पार कर लिया है। इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता साबित हुई है। इस टीके का शुरुआती लक्ष्य कोलोरेक्टल कैंसर का निदान करना होगा।

    सिर्फ अप्रूवल का इंतजार कर रहे वैज्ञानिक

    रुस की समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, रुस की कैंसर वैक्सीन काफी कारगार साबित हुई है। एफएमबीए की प्रमुख वेरोनिका स्क्वोर्त्सोवा ने ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम (EEF) में इसकी घोषणा की है। स्कवोर्त्सोवा ने कहा कि यह शोध कई सालों तक चला है इसमें पिछले तीन साल सिर्फ मैंडेटरी प्रीक्लिनिकल स्टडीज को समर्पित थे। वैक्सीन अब इस्तेमाल के लिए तैयार है। हम आधिकारिक स्वीकृति की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहना है कि प्रीक्लिनिकल ट्रॉयल्स टीके की सुरक्षा, बार-बार इस्तेमाल करने के बाद इसकी प्रभावशीलता की पुष्टि करते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा है कि इस दौरान ट्यूमर के आकार में कमी आई और ट्यूमर के विकास में भी कमी देखी गई। इसके अलावा अध्ययन में यह भी देखा गया कि टीके के कारण मरीज की जीवित रहने के दर में भी बढ़ोतरी दिखी है।

    अभी भी चल रहा है वैक्सीन पर काम

    एफएमबीए प्रमुख के अनुसार, वैक्सीन के पहले संस्करण का इस्तेमाल कोलोरेक्टल कैंसर के इलाज के लिए होगा। वहीं ग्लियोब्लास्टोमा (मस्तिष्क कैंसर) और मेलेनोमा (स्किन कैंसर) के खास प्रकारों के लिए टीका विकसित करने के लिए उम्मीद की किरण जगी है। वर्तमान समय में यह एडवांस के चरण में है।
  • Ananya Panday की मोतियों से सजी ड्रेस ने बटोरी सुर्खियाँ, Bold और Glamorous लुक ने जीता फैंस का दिल

    Ananya Panday की मोतियों से सजी ड्रेस ने बटोरी सुर्खियाँ, Bold और Glamorous लुक ने जीता फैंस का दिल

    मुंबईः बॉलीवुड की चुलबुली अदाकारा अनन्या पांडे हमेशा किसी न किसी अंदाज से सबका ध्यान खींचती हैं, लेकिन इस बार उनका फैशन स्टाइल उनके पिता और वेटरन एक्‍टर चंकी पांडे के मज़ेदार रिएक्शन की वजह से और भी खास बन गया। हाल ही में अनन्या ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वह मोती-झिलमिलाती मिनी ड्रेस में तैयार होती दिख रही थीं। यह ड्रेस इतनी शानदार थी कि इसे देखकर फैशन के शौकीन भी तारीफ किए बिना नहीं रह सकते।

    कल रात हुए GQ बेस्ट ड्रेस्ड अवार्ड्स में भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला। जैसे ही अनन्या ने एंट्री ली सबकी नजरें उन पर टिक गईं। दरअसल, एक्ट्रेस ने कुछ ऐसा पहना था जो बहुत ही खास और अलग था। उन्होंने मोतियों वाली मिनी ड्रेस पहनकर रेड कार्पेट पर एंट्री ली थी और सबको अपने बोल्ड और ग्लैमरस लुक से चौंका दिया था। उनका ये अंदाज फैंस को बहुत पसंद आ रहा है। अनन्या ने अपने लुक को कंप्लीट करने के लिए ड्रेस साथ मेटैलिक स्ट्रैपी हील्स पहनी थी। इसका स्लीक और खूबसूरत डिजाइन बहुत ही सुंदर लग रहा था। सिल्वर टच हील्स को खास चमक दे रहा था, जो उनके लुक में चार चांद लगाने का काम कर रही थी।

  • समय से पहले आपकी स्किन दिखेगी Aged, तुरंत खाना छोड़ दें ये Foods

    समय से पहले आपकी स्किन दिखेगी Aged, तुरंत खाना छोड़ दें ये Foods

    सेहत: हेल्दी और जवान दिखने के लिए लोग आज के समय में क्या-क्या नहीं करते। कई तरह के प्रोडक्ट्स लगाते हैं नुस्खे अपनाते हैं परंतु इसका असली कारण खान-पान होता है। कुछ ऐसी चीजें भी होती हैं जो लोग जाने-अनजाने में खा लेते हैं उसके कारण स्किन डल हो जाती है और एजिंग का प्रोसेस तेज होता है। हैरानी की बात यहां यह है कि इसमें से ज्यादातर चीजें हमारी फेवरेट ट्रीट्स या कंफर्ट फूड होती है। तो चलिए आपको बताते हैं कि ऐसी कौन सी खाने-पीने की चीजें होती है जिनको खाने से आपको परहेज करना चाहिए।

    सोडा

    इसको रिफ्रेशिंग ड्रिंक कहते हैं परंतु सच्चाई इससे बिल्कुल ही अलग है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इसमें काफी मात्रा में शुगर और फॉस्फोरिक एसिड पाया जाता है। ये दोनों मिलकर आपकी हड्डियां और दांत कमजोर कर देते हैं और ब्लड शुगर लेवल बढ़ जाता है। इससे आपकी स्किन डल हो जाती है ऐसे में यदि आप चाहते हैं कि आपकी स्किन ग्लोइंग और हेल्दी रहे तो सोडा जैसी ड्रिंक्स से दूरी बनाएं।

    अल्कोहल

    यह आपके शरीर को डिहाइड्रेट करेगा और विटामिन-ए को भी कम करेगा। यह स्किन रिपेयर के लिए बेहद जरुरी होता है। इससे आपकी त्वचा डल और बेजान दिखने लगती है। यदि आप शराब बार-बार पीते हैं तो ये आपके लिवर को नुकसान पहुंचाएगी। इससे शरीर में से टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाएंगे और शरीर कमजोर हो जाएगा। ऐसे में यदि आप चाहते हैं कि शरीर हेल्दी रहे और ग्लोइंग स्किन हो तो शराब से परहेज करें।

    आइसक्रीम

    खुशी के मौके पर लोगों को आइसक्रीम खाना बहुत अच्छा लगता है। इसमें शुगर और फैट दोनों ही ज्यादा होते हैं। जब ये दोनों चीजें मिलती है तो शरीर में ग्लाइकेशन प्रोसेस तेज हो जाता है। इससे कोलेजन जैसे प्रोटीन कमजोर पड़ने लगते हैं जो स्किन को टाइट रखते हैं। इससे नतीजा यह होता है कि त्वचा ढीली पड़ जाती है और चेहरे पर झुर्रियां दिखने लगती हैं। कई-कई बार आइसक्रीम खाना आपकी सेहत के लिए अच्छा है पर रोज इसे खाने से सिर्फ शरीर ही नहीं सेहत पर भी बुरा असर होता है।

    आर्टिफिशयल स्वीटनर

    कुछ लोगों चीनी नहीं खाते पर इसकी जगह आर्टिफिशियल स्वीटनर खा लेते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इनमें कैलोरी कम मात्रा में पाई जाती है परंतु रिसर्च की मानें तो ये आपके गट में हेल्दी बैक्टीरिया को बिगाड़ेंगे और मीठा खाने की क्रेविंग को बढ़ाएंगे। बार-बार यदि ऐसा हो तो मेटाबॉलिक स्ट्रेस बढ़ेगा और चेहरे पर समय से पहले झुर्रियां आने लगेगी।

    फ्रूट जूस

    कुछ लोगों को लगता है कि फ्रूट जूस काफी हेल्दी होता है परंतु सच्चाई यहां यह है कि ज्यादातर पैक्ड जूस में बहुत सारी शुगर होती है और इनमें पूरे फलों जैसा फाइबर नहीं होता। फाइबर न होने के कारण शुगर को शरीर बहुत जल्दी खिंच लेता है जिसेस इंसुलिन पर दबाव पड़ता है। इससे शरीर में सूजन होती है और स्किन ढीली हो जाती है ऐसे में पैक्ड जूस की जगह आप ताजा फल खा सकते हैं। यह आपके शरीर को भी हेल्दी रखेंगे और एजिंग भी स्लो होगी।