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  • तकनीकी संस्थानों के लिए नई नीति से हिमाचल, देश के नवाचार केंद्र के रूप में उभरेगाः मुख्यमंत्री

    तकनीकी संस्थानों के लिए नई नीति से हिमाचल, देश के नवाचार केंद्र के रूप में उभरेगाः मुख्यमंत्री

    शिमला: प्रदेश में नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने तकनीकी शैक्षणिक संस्थानों के लिए राज्य नवाचार नीति तथा राज्य नवाचार कोष कार्यान्वयन दिशा निर्देशों (2026-2028) को स्वीकृति प्रदान की है। इस नीति का उद्देश्य नवाचारों को व्यावहारिक, प्रौद्योगिकी और बाज़ार के अनुरूप समाधान के रूप में परिवर्तित करना है जिससे विद्यार्थी, शिक्षक और स्टार्टअप्स सशक्त बनेंगे। इससे राज्य में नवाचार आधारित ईको सिस्टम तैयार होगा और हिमाचल प्रदेश, देश के नवाचार केन्द्र के रूप में स्थापित होगा। यह नीति प्रोटोटाइप विकास, स्टार्टअप इनक्यूबेशन, सीड फंडिंग, बौद्धिक संपदा प्रबंधन, क्षमता निर्माण और उद्योगों के साथ सहयोग के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार करती है। इसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और परिणामों को सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया है।

    नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026-2028 की अवधि के लिए दो करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ राज्य नवाचार कोष का गठन किया है। इस कोष के माध्यम से नवाचारों को आकार प्रदान करने के लिए माइक्रो ग्रांट, स्टार्टअप्स के लिए सीड फंडिंग, इनक्यूबेशन केंद्रों को सुदृढ़ करने के लिए वित्तीय सहायता, नवाचार प्रतियोगिताएं, बूट कैंप, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा उद्योगों एवं कॉर्पाेरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के सहयोग से सह-वित्तपोषण जैसी पहलों को सहयोग प्रदान किया जाएगा। नीति के माध्यम से समावेशी नवाचार पर विशेष बल देते हुए महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा ग्रामीण युवाओं की तकनीकी शिक्षा एवं स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाएगा।

    तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग के निदेशक इस नीति के क्रियान्वयन के लिए नोडल अधिकारी होंगे। संस्थागत स्तर पर क्लस्टर इनोवेशन समितियां तथा राज्य स्तर पर राज्य नवाचार सलाहकार समूह परियोजनाओं के चयन, निधि के उपयोग और नीति के समग्र कार्यान्वयन की निगरानी करेंगे, ताकि इसका प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह नीति बौद्धिक संपदा स्वामित्व और राजस्व साझेदारी के लिए एक समान एवं स्पष्ट प्रारूप स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत विकसित नवाचारों का स्वामित्व नवाचारकर्ताओं के पास रहेगा, जबकि शैक्षणिक संस्थानों को केवल शैक्षणिक उपयोग के लिए नॉन-एक्सक्लूसिव अधिकार प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार दो वर्षों के बाद इस नीति की व्यापक समीक्षा करेगी और नीति के अंतर्गत विकसित प्रोटोटाइप, स्थापित स्टार्टअप्स, बौद्धिक संपदा पंजीकरण, सृजित रोजगार तथा निवेश जैसे प्रमुख परिणामों का मूल्यांकन किया जाएगा।

     

  • प्रदेश सरकार हिमाचल को प्राकृतिक खेती में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री

    प्रदेश सरकार हिमाचल को प्राकृतिक खेती में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री

     शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को देश का अग्रणी प्राकृतिक खेती राज्य बनाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री ने आज यहां कृषि विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को इस दिशा में पूर्ण दक्षता व लगन से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विभाग को कृषि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करेगी। उन्होंने प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए उत्पादों को बाजार उपलब्ध करवाने के लिए कृषि विभाग में अलग मार्केटिंग विंग स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन उत्पादों की डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म पर बिक्री की संभावनाएं तलाशने को भी कहा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के 2,56,870 किसान 44,784.73 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की नई पहलों के बाद प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जो किसान खेती छोड़ चुके थे, वे भी अब दोबारा खेती की ओर लौट रहे हैं और प्राकृतिक खेती में रुचि दिखा रहे हैं। सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने प्राकृतिक खेती से तैयार की गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती से तैयार की गई फसलों की एमएसपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। अब प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी की जौ 80 रुपये प्रति किलोग्राम तथा अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू करने के बाद प्रदेश में दूध उत्पादन तथा सहकारी डेयरी प्रणाली से जुड़ने वाले किसानों की संख्या में निरंतर वृद्धि हुई है। सरकार ने गाय के दूध का एमएसपी 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर तथा भैंस के दूध का एमएसपी 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य छोटे और सीमांत डेयरी किसानों के अलावा अधिक से अधिक किसानों को इस योजना का लाभ सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में प्रदेश के दूध उत्पादकों को 300 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल क्षेत्र को प्राकृतिक खेती पंचायत घोषित करने की सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने बड़ा भंगाल क्षेत्र में उगाई जाने वाली राजमाह के लिए भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए धन की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार, सचिव कृषि सी. पॉलरासु, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड के प्रबंध निदेशक राम कुमार गौतम तथा कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे। .0.    
  • प्रदेश के 7,000 गांवों को मिलेगा सुरक्षित फीकल स्लज प्रबंधन

    प्रदेश के 7,000 गांवों को मिलेगा सुरक्षित फीकल स्लज प्रबंधन

    शिमला: ग्रामीण विकास विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि खुले में शौचमुक्त बनने के बाद हिमाचल प्रदेश अब ग्रामीण स्वच्छता के अगले चरण की ओर बढ़ रहा है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में मलीय कचरे (फीकल स्लज) के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इसके तहत ग्रामीण विकास विभाग और जल शक्ति विभाग मिलकर प्रदेश के चिन्हित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में फीकल स्लज के को-ट्रीटमेंट की व्यवस्था विकसित कर रहे हैं। इस पहल से प्रदेश के लगभग 7,000 गांवों को लाभ मिलेगा।

    उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश घरों में शौचालयों से निकलने वाले अपशिष्ट के संग्रह के लिए सेप्टिक टैंक या एकल मलीय गड्डों का उपयोग किया जाता है। समय के साथ इनमें मल, कीचड़ और अन्य अपशिष्ट जमा हो जाते हैं, जिन्हें फीकल स्लज कहा जाता है। कई बार इन टैंकों की समय पर सफाई और मलीय कचरे का सुरक्षित प्रबंधन नहीं हो पाता। ऐसे में यह अपशिष्ट खुले में, नालों, खड्डों, नदियों या जंगलों में फेंक दिया जाता है। इससे जल स्रोत प्रदूषित होते हैं और डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

    प्रवक्ता ने बताया कि इस समस्या के समाधान के लिए प्रदेश में फीकल स्लज मैनेजमेंट को ग्रामीण स्वच्छता की अगली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सेप्टिक टैंकों से निकले मलीय कचरे का सुरक्षित संग्रह, परिवहन, उपचार और वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित करना है। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी भूगोल, वन क्षेत्र की अधिकता, उपयुक्त भूमि की कमी तथा संचालन एवं रख-रखाव पर अधिक खर्च के कारण अलग-अलग फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करना व्यावहारिक नहीं है। इसे ध्यान में रखते हुए लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट में तकनीकी सहयोग दे रहे वाश इंस्टीच्यूट के सुझाव पर मौजूदा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में को-ट्रीटमेंट मॉडल अपनाया गया है, जिसे व्यावहारिक, किफायती और टिकाऊ समाधान माना गया है।

    उन्होंने बताया कि इस मॉडल के तहत अलग-अलग फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के बजाय मौजूदा एसटीपी में आवश्यक संरचनाएं विकसित की जा रही हैं। इनके माध्यम से सेप्टिक टैंकों से निकाले गए फीकल स्लज को एसटीपी में लाकर सीवेज के साथ वैज्ञानिक तरीके से उपचारित किया जाएगा। इससे नए संयंत्र बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, लागत कम होगी और मौजूदा एसटीपी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा इन परियोजनाओं की स्वीकृति और तकनीकी समीक्षा के लिए ग्रामीण विकास विभाग के सचिव की अध्यक्षता में स्टेट लेवल अप्रूवल कमेटी (एसएलएसी) का गठन किया गया है। समिति द्वारा एसटीपी की क्षमता, फीकल स्लज की अनुमानित मात्रा, लागत तथा अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा के बाद अब तक प्रदेश में 30 को-ट्रीटमेंट परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है।

    इन परियोजनाओं के निर्माण के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने जल शक्ति विभाग को लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। दोनों विभागों के बीच इस संबंध में एक समझौता ज्ञापन भी हस्ताक्षरित किया गया है। स्वीकृत परियोजनाओं में पालमपुर और सुंदरनगर स्थित एसटीपी में फीकल स्लज को-ट्रीटमेंट का कार्य शुरू हो चुका है और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को इसका लाभ मिलने लगा है। प्रवक्ता ने बताया कि 31 मार्च, 2027 तक सभी स्वीकृत एसटीपी में को-ट्रीटमेंट की व्यवस्था शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद प्रदेश के हजारों गांवों में सेप्टिक टैंकों से निकलने वाले मलीय कचरे का सुरक्षित और वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित होगा। इससे जल स्रोत सुरक्षित रहेंगे, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, जनस्वास्थ्य में सुधार होगा और ग्रामीण स्वच्छता को नई मजबूती मिलेगी।

     

  • ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ विश्व को भारत का शाश्वत संदेश हैः राज्यपाल

    ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ विश्व को भारत का शाश्वत संदेश हैः राज्यपाल

    शिमला : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज शिमला में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान द्वारा आयोजित शिव-शक्ति महाकथा एवं शिव विवाह महोत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि तथा सर्वांगीण विकास की कामना की। इस आध्यात्मिक आयोजन में भाग लेने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ऐसे आयोजन भारत की सनातन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि करुणा, समरसता और सार्वभौमिक बंधुत्व जैसे शाश्वत मूल्यों पर आधारित जीवन पद्धति है। उन्होंने प्राचीन भारतीय दर्शन ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आदर्श आज भी मानवता को शांति, सह-अस्तित्व और विश्व बंधुत्व का मार्ग दिखाता है।

    राज्यपाल ने कहा कि संयुक्त परिवारों से एकल परिवारों की ओर बढ़ना सामाजिक परिवर्तन को प्रतिबिंबित करता है लेकिन इसके कारण पारिवारिक संस्कार, भावनात्मक जुड़ाव और परिवार के सदस्यों के बीच सार्थक संवाद कमजोर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिवार की नींव प्रेम, परस्पर सम्मान और संवाद पर आधारित होनी चाहिए। युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि इस बुराई के समूल नाश के लिए कानून की सख्ती से अनुपालना सुनिश्चित करना आवश्यक है, लेकिन सामाजिक दुष्प्रभावों से बचाव का सबसे प्रभावी माध्यम संस्कारयुक्त परवरिश है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के साथ समय बिताएं, उनसे खुलकर संवाद करें तथा उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परम्पराओं से जोड़ें। राज्यपाल ने समाज से आह्वान किया कि सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित किया जाए कि भारत की सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक परम्पराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से युवाओं को जोड़ा जाएं।

     

  • राज्यपाल ने ‘चलो हिमाचल’ अभियान का पोस्टर जारी किया

    राज्यपाल ने ‘चलो हिमाचल’ अभियान का पोस्टर जारी किया

    शिमला: गोविंद सागर एडवेंचर एंड वाटर स्पोर्ट्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज लोकभवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर राज्यपाल ने एसोसिएशन के ‘चलो हिमाचल’ अभियान का पोस्टर जारी किया। इस अभियान का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के प्रमुख जलाशयों एवं झीलों में साहसिक पर्यटन और जल क्रीड़ा गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने एसोसिएशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश को साहसिक पर्यटन और ईको-टूरिज्म के प्रमुख गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि पर्यटन प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक प्रमुख आधार है और राज्य की प्राकृतिक सुंदरता तथा साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाओं को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने वाली ऐसी पहल अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित करेंगी।

    प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने और हिमाचल प्रदेश को देश-विदेश के पर्यटकों के पसंदीदा पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर कार्य करना चाहिए।
    इस अवसर पर एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य ईशान अख्तर ने राज्यपाल को ‘चलो बिलासपुर, चलो हिमाचल’ अभियान की विस्तृत जानकारी दी।

    एसोसिएशन का बिलासपुर जिले की गोविंद सागर झील और कोल डैम, कांगड़ा जिले के पौंग डैम तथा चंबा जिले के चमेरा डैम में विभिन्न साहसिक खेल गतिविधियों के आयोजन का प्रस्ताव है।
    उन्होंने कहा कि प्रस्तावित आयोजनों में वाटर स्पोर्ट्स चैंपियनशिप, पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं, कार एवं मोटरसाइकिल रेसिंग चौंपियनशिप तथा बिलासपुर से भाखड़ा बांध में लगभग 50 किलोमीटर की अंतरराष्ट्रीय ओपन वाटर स्विमिंग चौंपियनशिप शामिल है।

    इन आयोजनों से हिमाचल प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इस अवसर पर एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य ईशान अख्तर तथा कार्यकारी सदस्य बिलाल अहमद शाह ने राज्यपाल को सम्मानित किया। एसोसिएशन के अध्यक्ष सराज अख्तर, हेमराज ठाकुर, अधिवक्ता इमरान खान, पवन शर्मा सहित एसोसिएशन के अन्य पदाधिकारी एवं सदस्य इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • मुख्य सचिव ने आपदा तैयारियों में जनभागीदारी, तकनीक और समन्वय को और मजबूत बनाने पर बल दिया

    मुख्य सचिव ने आपदा तैयारियों में जनभागीदारी, तकनीक और समन्वय को और मजबूत बनाने पर बल दिया

    शिमला: मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने कहा कि आपदा प्रबंधन केवल आपदा आने पर की जाने वाली प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि एक सतत प्रक्रिया है, जिसके लिए सभी संबंधित विभागों, संस्थाओं और समुदायों के बीच प्रभावी समन्वय आवश्यक है। उन्होंने कहा कि संस्थागत व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने, जनभागीदारी बढ़ाने तथा आधुनिक तकनीक के अधिकाधिक उपयोग से ही हिमाचल प्रदेश को आपदा के प्रति अधिक सक्षम और सुरक्षित बनाया जा सकता है।

    मुख्य सचिव आज यहां राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) तथा हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एचपीएसडीएमए) द्वारा आयोजित पोस्ट डिजास्टर रिव्यू सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे थे। हिमाचल प्रदेश अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र तथा संवेदनशील हिमालयी पारिस्थितिकी के कारण बादल फटने, बाढ़, भूस्खलन तथा जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न अन्य आपदाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हैं। बीते वर्षों में विशेषकर मानसून के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं से राज्य की आपदा प्रबंधन प्रणाली की क्षमताओं और चुनौतियों का पता चला है।

    हाल के वर्षों में विभिन्न आपदाओं के दौरान राज्य सरकार के विभागों, सशस्त्र बलों, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, पुलिस, अग्निशमन सेवाओं, जिला प्रशासन, पंचायती राज संस्थाओं, स्वयंसेवकों तथा स्थानीय समुदायों के समन्वित प्रयासों से जनहानि को कम करने में सफलता मिली है। प्रत्येक आपदा भविष्य की तैयारियों को और बेहतर बनाने का अवसर भी प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि पूर्व में आई आपदाओं की समीक्षा से संचालन संबंधी कमियों की पहचान करने, संस्थागत क्षमता का आकलन करने तथा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को और प्रभावी बनाने में सहायता मिलती है।

    आपदाओं के दौरान सड़क संपर्क बाधित होना, संचार व्यवस्था प्रभावित होना, दुर्गम क्षेत्रों तक पहुंचने में कठिनाई, प्रतिकूल मौसम, संसाधनों की उपलब्धता तथा वास्तविक समय में सूचना प्राप्त करने जैसी चुनौतियां सामने आईं। ऐसे में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और तकनीक आधारित त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली विकसित करना आवश्यक है। मुख्य सचिव ने कहा कि यह सेमिनार इन चुनौतियों का विश्लेषण करने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का रिकॉर्ड रखने तथा भविष्य में आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी, समन्वित और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण मंच है।

    आपदा प्रबंधन में समुदाय की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि किसी भी आपदा के समय स्थानीय लोग ही सबसे पहले राहत एवं बचाव कार्य शुरू करते हैं। इसलिए जागरूकता कार्यक्रमों, क्षमता निर्माण तथा स्वयंसेवी नेटवर्क के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाना अत्यंत आवश्यक है। आपदा रक्षक योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य प्रशिक्षित सामुदायिक स्वयंसेवकों का ऐसा नेटवर्क तैयार करना है, जो पेशेवर राहत दलों के पहुंचने तक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता प्रदान कर सके। उन्होंने कहा कि ये स्वयंसेवक खोज एवं बचाव, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित निकासी तथा कमजोर वर्गों की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

    मुख्य सचिव ने संसाधन मानचित्रण (रिसोर्स मैपिंग) के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्तर पर उपलब्ध मानव संसाधन, मशीनरी, चिकित्सा सुविधाओं, राहत शिविरों, आपातकालीन उपकरणों, परिवहन साधनों तथा संचार व्यवस्था का अद्यतन विवरण हर समय उपलब्ध रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के साथ एकीकृत यह व्यवस्था आपदा के समय संसाधनों के प्रभावी उपयोग और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगी।

    हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाने में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा दिए जा रहे तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सेमिनार से प्राप्त सुझाव राज्य की संस्थागत तैयारियों को और सुदृढ़ करेंगे तथा हिमाचल प्रदेश को अधिक सुरक्षित एवं आपदा-सक्षम बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। इस अवसर पर एनडीएमए के सदस्य एवं विभागाध्यक्ष कृष्णा एस. वत्सा ने वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं के दौरान हिमाचल प्रदेश सरकार की तैयारियों और प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में एसडीआरएफ ने सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाई है तथा भविष्य में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और आपदा न्यूनीकरण के लिए राज्य की क्षमता को और सुदृढ़ करने की आवश्यकता है।

    एनडीएमए, एसडीएमए, एनडीआरएफ, सशस्त्र बलों, अर्द्धसैनिक बलों, विभिन्न विभागों तथा जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने सेमिनार में भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं आपदा पूर्व तैयारियों को और सुदृढ़ बनाने के संबंध में सुझाव प्रस्तुत किए। एसडीएमए के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, एनडीएमए की सदस्य रीता मिसल तथा निदेशक-सह-विशेष सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) डॉ. पुष्पेंद्र राणा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • स्वास्थ्य मंत्री ने रोगी कल्याण समिति की बैठक की अध्यक्षता की

    स्वास्थ्य मंत्री ने रोगी कल्याण समिति की बैठक की अध्यक्षता की

    शिमला: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने आज शिमला से वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा रोगी कल्याण समिति की गवर्निंग बॉडी की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में मंत्री ने पिछले तीन वित्तीय वर्षों की उपलब्धियों और प्रदर्शन की समीक्षा की।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि रोगी देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ करने और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के कायाकल्प की दिशा में कार्य कर रही है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्त्वपूर्ण पहल की है। देश के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों की तर्ज पर राज्य के चिकित्सा संस्थानों को स्तरोन्नत किया जा रहा है। सरकार के प्रयासों से राज्य में अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है।

    सरकार ने अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज चमियाणा, आईजीएमसी शिमला और टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में आधुनिक ऑटोमेटिड लैब स्थापित करने के लिए 75 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। उन्होंने कहा कि टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में पीजी की सीटों में वृद्धि, मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी कोर्सिस (एमएलटी) और नर्सिंग की छात्राओं की सुविधा के लिए बेहतर अधोसंरचना को सुनिश्चित किया जाएगा। महाविद्यालय में मरीजों की सुविधा के लिए हाई-परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (एचपीएलसी), कटीन्यूअस रीनल रिपलेसमेंट थेरपी (सीआरआरटी) और हीमोडायाफिलट्रेशन (एचडीएफ) डाईलिसिस मशीनें स्थापित की गई है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय में लोगों की सुविधा के लिए पार्किंग की सुविधा के विस्तार की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।

    प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में दशकों पुरानी मशीनों एवं उपकरणों के स्थान पर नई अत्याधुनिक मशीनों और उपकरणों को स्थापित किया जा रहा है। स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक एमआरआई, सीटी स्कैन, डिजिटल रेडियोग्राफी और डिजिटल मैमोग्राफी सहित आधुनिक उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य संस्थानों में बड़े स्तर पर डाक्टरों, प्रोफेसरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मचारियों को भर्ती किया जा रहा है जिससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में ठोस निर्णय लिए जा रहे है।

    बैठक में विशेष सचिव स्वास्थ्य डॉ. अश्वनी शर्मा और वर्चुअल माध्यम से टांडा से एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आर.एस. बाली और टांडा महाविद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. मिलाप तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • वन विकास निगम लिमिटेड के कर्मचारियों को 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता और 175 कर्मचारियों को बोनस स्वीकृत

    वन विकास निगम लिमिटेड के कर्मचारियों को 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता और 175 कर्मचारियों को बोनस स्वीकृत

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश राज्य वन विकास निगम लिमिटेड के निदेशक मंडल की 216वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में प्रदेश सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुरूप निगम के कर्मचारियों को पहली अप्रैल, 2025 से 3 प्रतिशत महंगाई भत्ता बढ़ाने को स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही, 21,000 रुपये तक मासिक वेतन प्राप्त करने वाले 175 कर्मचारियों को बोनस देने की स्वीकृति भी प्रदान की गई।

    बैठक के दौरान निदेशक मंडल ने प्रदेश सरकार द्वारा पहली अप्रैल, 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार उन दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने की भी स्वीकृति दी, जिन्होंने पिछले चार वर्षों में प्रत्येक वर्ष 240 दिन का कार्य पूरा किया है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश सरकार की नीति के अनुरूप पात्र अनुबंध कर्मचारियों की सेवाओं के नियमितीकरण को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

    निदेशक मंडल ने विभिन्न श्रेणियों के श्रमिकों के लिए न्यूनतम दैनिक मजदूरी 425 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये करने को भी स्वीकृति प्रदान की। यह संशोधन पहली अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा और प्रदेश सरकार की अधिसूचना के अनुरूप लागू किया जाएगा।

    निगम के कार्यों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बिलासपुर स्थित रेजिन एवं टरपेंटाइन (आरएंडटी) फैक्ट्री के आधुनिकीकरण के बाद राजस्व में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रसन्नता व्यक्त की। निदेशक मंडल ने सकारात्मक परिणामों को ध्यान में रखते हुए नाहन स्थित आरएंडटी फैक्ट्री के आधुनिकीकरण का भी निर्णय लिया ताकि उत्पादकता और राजस्व में और अधिक वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।

    मुख्यमंत्री ने निगम की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए प्रबंध निदेशक द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना करते हुए अधिकारियों को राजस्व बढ़ाने, कार्यकुशलता में सुधार लाने और निगम की दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नवाचारपूर्ण उपाय जारी रखने के निर्देश दिए। उपाध्यक्ष एचपीएसएफडीसीएल केहर सिंह खाची, मुख्य सचिव के.के. पंत, वन बल प्रमुख एवं प्रबंध निदेशक संजय सूद, निदेशक (पीएफएंडपीई) एवं विशेष सचिव (वित्त) विजय वर्धन, निदेशक मंडल के गैर-सरकारी सदस्य तथा निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

     

  • निदान सेवाओं में शून्य प्रतीक्षा समय सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री

    निदान सेवाओं में शून्य प्रतीक्षा समय सुनिश्चित करें: मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग को सीटी स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी निदान सेवाओं में शून्य प्रतीक्षा अवधि सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इससे मरीजों को समय पर और बिना किसी असुविधा के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। प्रदेश सरकार आवश्यक श्रम शक्ति और आधुनिक निदान उपकरण उपलब्ध करवा रही है तथा विभाग को इन आवश्यक सेवाओं में प्रतीक्षा समय समाप्त करने के लिए समन्वित प्रयास करने चाहिए।

    मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (आईजीएमसी), शिमला तथा चमियाना सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निदान विभागों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह निर्देश दिए। उन्होंने चिकित्सकों से निदान सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने तथा मरीजों के लिए शून्य प्रतीक्षा समय के लक्ष्य को साकार करने के लिए सुझाव और सहयोग भी मांगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदेश के भीतर ही उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से चिकित्सकों, पैरामेडिकल तथा तकनीकी कर्मचारियों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भर रही है ताकि उन्नत उपचार के लिए मरीजों को हिमाचल से बाहर न जाना पड़े। वर्तमान सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना के उन्नयन और प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    सुक्खू ने आईजीएमसी के चिकित्सकों की मांग पर संस्थान को शीघ्र ही 256-स्लाइस सीटी स्कैन मशीन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया। स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों के लिए धन की कोई कमी नहीं है तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और प्रदेशवासियों की बेहतर सेवा के लिए सरकार हर संभव सहयोग प्रदान करेगी।

    प्रदेश सरकार सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में स्वास्थ्य अवसंरचना को व्यापक रूप से सशक्त बना रही है। एम्स, नई दिल्ली के समकक्ष उच्चस्तरीय चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह अत्याधुनिक मशीनें केवल चिकित्सा महाविद्यालयों में ही नहीं, बल्कि राज्य के जिला अस्पतालों, जोनल अस्पतालों तथा अन्य नागरिक अस्पतालों में भी स्थापित की जाएंगी, जिससे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सुदृढ़ होगी। प्रधान सचिव देवेश कुमार, सचिव (स्वास्थ्य) एम. सुधा देवी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

     

  • रामपुर में भाजपा को झटका, क्षेत्र के प्रमुख नेता बृजलाल अपने 300 से अधिक समर्थकों सहित कांग्रेस में शामिल

    रामपुर में भाजपा को झटका, क्षेत्र के प्रमुख नेता बृजलाल अपने 300 से अधिक समर्थकों सहित कांग्रेस में शामिल

    शिमला: भाजपा को झटका देते हुए शिमला जिले के रामपुर विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख नेता बृजलाल अपने 300 से ज्यादा समर्थकों सहित आज कांग्रेस में शामिल होने के बाद सचिवालय में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के साथ शिष्टाचार भेंट की।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बृजलाल और उनके समर्थकों का कांग्रेस पार्टी में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पार्टी सबके मान-सम्मान का ध्यान रखेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सभी वर्गों के कल्याण के लिए समर्पित भाव से काम कर रही है और प्रदेश का एक समान विकास सुनिश्चित बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रामपुर पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह का घर है और विकास की कोई कमी नहीं रखी जाएगी। इस अवसर पर बृजलाल ने मुख्यमंत्री को क्षेत्र की समस्याओं को लेकर एक मांग पत्र भी सौंपा तथा मुख्यमंत्री ने इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

    उन सभी के कांग्रेस पार्टी में आने की उन्हें बेहद खुशी है। उन्होंने सभी से प्रदेश सरकार की उपलब्धियों एवं नीतियों को जन-जन तक पहुंचाकर कांग्रेस पार्टी के हाथ मजबूत करने को कहा। इस अवसर बृजलाल ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार की कार्य प्रणाली और मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की दूरगामी सोच से प्रभावित होकर आज वे कांग्रेस पार्टी में आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने भाजपा को नेताओं की पार्टी बताया है, जबकि यह पूर्व में कार्यकर्ताओं की पार्टी थी। पूर्व मुख्यमंत्री की यह बात शत-प्रतिशत सही है और आज भाजपा के पांच वरिष्ठ नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी हथियाने के लिए आपसी लड़ाई में उलझे हुए हैं। प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू और कांग्रेस पार्टी के साथ मजबूती से खड़ी है और प्रदेश में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी रिपीट करेगी। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी उपस्थित थे।