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  • राज्यपाल ने सामाजिक सेवा कार्यों के लिए लाडली फाउंडेशन को सराहा

    राज्यपाल ने सामाजिक सेवा कार्यों के लिए लाडली फाउंडेशन को सराहा

    शिमला: लाडली फाउंडेशन, हिमाचल प्रदेश के पदाधिकारियों ने आज लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। इस मौके पर राज्यपाल ने फाउंडेशन का स्वरोजगार योजना – सशक्त नारी, सशक्त हिमाचल का पोस्टर जारी किया।

    लाडली फाउंडेशन हिमाचल प्रदेश द्वारा शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके अंतर्गत महिलाओं द्वारा अपने कौशल एवं हस्तशिल्प से तैयार किए गए उत्पादों के विपणन और बिक्री के अवसर उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।

    राज्यपाल ने इस पहल के लिए फाउंडेशन को बधाई देते हुए लाडली स्वरोजगार योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण तथा समाज में उनकी आर्थिक भागीदारी को सुदृढ़ बनाने की दिशा में फाउंडेशन के समर्पित प्रयासों की सराहना की।

    गुप्ता ने कहा कि मानव सेवा ही ईश्वर सेवा है तथा समाज के समग्र विकास के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सामाजिक कल्याण के कार्यों में सक्रिय रूप से भागीदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाले ऐसे कार्यक्रम एक सशक्त एवं समृद्ध हिमाचल प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

    इससे पूर्व, लाडली फाउंडेशन की प्रदेशाध्यक्ष शालू अख्तर एवं दीक्षा शर्मा ने राज्यपाल को सम्मानित किया तथा उन्हें पिछले 15 वर्षों के दौरान फाउंडेशन द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक कल्याण गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि लाडली स्वरोजगार योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनके द्वारा हस्तनिर्मित उत्पादों के विपणन एवं बिक्री के माध्यम से स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान कर आत्मनिर्भर बनाना है। इस अवसर पर फाउंडेशन की पदाधिकारी एवं सदस्य गीतांजलि शर्मा, मीनाक्षी शर्मा, गीता सूद, शीला सिंह तथा नीतू भी उपस्थित थीं।

  • हिमाचल के फलों की मिठास बनी ओमान की पहली पसंद

    हिमाचल के फलों की मिठास बनी ओमान की पहली पसंद

    शिमला: हिमाचल प्रदेश से पहली बार ताजी चेरी और प्लम की निर्यात खेप सफलतापूर्वक ओमान पहुंच गई है। यह प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। इससे हिमाचल के फलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलेगी और बागवानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा।

    हाल ही में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने 400 किलोग्राम ताजी चेरी तथा 400 किलोग्राम ताजे प्लम की पहली खेप को रवाना किया था। ओमान पहुंचने पर मस्कट स्थित भारतीय दूतावास ने प्रचार अभियान को शुरू किया तथा फलों को ओमान के विभिन्न खुदरा स्टोर में आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया। यहां लोगों ने हिमाचल प्रदेश के फलों की उत्कृष्ट गुणवत्ता और स्वाद की सराहना की और उपभोक्ताओं से उत्साहजनक प्रतिक्रियाएं मिल रही है।

    यह उल्लेखनीय उपलब्धि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी मार्गदर्शन में संभव हुई है। सरकार बागवानी क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने तथा राज्य के उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। बागवानी विभाग ने निर्यात प्रक्रिया को सुचारु रूप से संपन्न करवाने में सक्रियता से कार्य किया ताकि बागवानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के माध्यम से बेहतर एवं लाभकारी मूल्य प्राप्त हो सके।

    कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ ने किसानों, किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों, निर्यातकों, एचपीएमसी, राज्य सरकार के विभिन्न विभागों तथा विभिन्न साझेदारों के साथ समन्वय स्थापित कर निर्यात प्रक्रिया को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन सभी के संयुक्त प्रयासों से अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता, ग्रेडिंग, पैकेजिंग तथा फाइटोसैनिटरी मानकों का पूर्ण पालन सुनिश्चित किया गया।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश से चेरी और प्लम के सफल निर्यात पर बागवानी विभाग तथा राज्य के बागवानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि बागवानों और विभाग की मेहनत तथा समर्पण के सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं और हिमाचल प्रदेश के प्राकृतिक रूप से समृद्ध एवं उच्च गुणवत्ता वाले फलों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के द्वार खुल रहे हैं।

    यह उपलब्धि राज्य के किसानों और बागवानों के लिए समृद्धि के नए अवसर लेकर आएगी तथा उन्हें उच्च मूल्य वाले वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करेगी। उन्होंने बागवानों से गुणवत्ता, ग्रेडिंग तथा वैज्ञानिक खेती की तकनीकों पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया ताकि वैश्विक स्तर पर प्रदेश उच्च गुणवत्ता वाले फलों के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सके।

    राज्य सरकार किसानों और बागवानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है और उन्हें तकनीकी मार्गदर्शन, क्षमता विकास, गुणवत्ता सुधार, बेहतर कृषि अवसंरचना और विपणन सहायता सहित हर संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि निरंतर प्रयासों और सरकार के सहयोग से अंतरराष्ट्रीय बाजार में हिमाचल प्रदेश का बागवानी क्षेत्र प्रतिस्पर्धात्मक रूप से और अधिक मजबूत बनेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी और उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार बागवानी को अधिक लाभकारी एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार ने उच्च गुणवत्ता वाले फलों के उत्पादन को बढ़ावा देने तथा बागवानों को बेहतर मूल्य वाले घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच उपलब्ध करवाने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की है।

    ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में से एक है और किसानों के उत्पादों के निर्यात के अवसरों का विस्तार इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बागवानों से उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री अपनाने तथा वैज्ञानिक खेती की आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर उत्पादन और गुणवत्ता में वृद्धि करने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार किसानों और बागवानों को उनके उत्पादों के विपणन, बेहतर कृषि अवसंरचना के विकास तथा निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान करती रहेगी ताकि उन्हें बेहतर मूल्य और अधिक आय सुनिश्चित हो सके। विश्वास व्यक्त किया कि ओमान को निर्यात की गई पहली खेप के सफल निर्यात से हिमाचल प्रदेश के फलों के लिए अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों के द्वार भी खुलेंगे।

  • HAS एवं संबद्ध सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की

    HAS एवं संबद्ध सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से शिष्टाचार भेंट की

    शिमला: वर्ष 2026 बैच के हिमाचल प्रशासनिक सेवा एवं संबद्ध सेवाओं के 27 प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से शिष्टाचार भेंट की। ये अधिकारी डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान, शिमला में फाउंडेशन कोर्स का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत के दौरान कहा कि एचएएस एवं संबद्ध सेवाओं के अधिकारियों की राज्य सरकार की नीतियों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने अधिकारियों से पूरी ईमानदारी, समर्पण और सेवा भाव के साथ लोगों की सेवा करने का आह्वान किया।

    सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार पारदर्शी, जवाबदेह और सुशासन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अधिकारियों से लोगों की समस्याओं और शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र समाधान करने तथा जनता की अपेक्षाओं और विश्वास पर खरा उतरने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा अधिकारी राज्य का भविष्य हैं और प्रदेश के संसाधनों के संरक्षक भी, इसलिए लोगों के हितों की रक्षा करना उनकी महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पूरी पारदर्शिता, बिना किसी भेदभाव से पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने अधिकारियों से जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य करने और समावेशी विकास तथा सामाजिक कल्याण के सरकार के संकल्प को साकार करने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारियां निभाने पर भी बल दिया। मुख्य सचिव के.के. पंत, डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान की निदेशक डॉ. रूपाली ठाकुर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • हिमाचल प्रदेश के आठ पारंपरिक उत्पादों को मिला GI Tag

    हिमाचल प्रदेश के आठ पारंपरिक उत्पादों को मिला GI Tag

    शिमला: हिमाचल प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और कृषि महत्व वाले आठ पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकरण मिल गया है। इन उत्पादों में स्पीति का सी-बकथॉर्न (छरमा), सलूणी सफेद मक्का, चंबा मेटल आर्ट, सिरमौरी लोइया, किन्नौरी टोपी, मंडी की सेपूबड़ी, किन्नौरी सेब और किन्नौरी आभूषण शामिल हैं। इन आठ नए उत्पादों के साथ अब हिमाचल प्रदेश के कुल 17 पारंपरिक उत्पादों को हिमाचल प्रदेश विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद् (हिमकोस्ट) के माध्यम से जीआई पंजीकरण मिल चुका है। ये सभी उत्पाद हिमाचल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक ज्ञान, हस्तशिल्प और कृषि उत्कृष्टता का प्रतीक हैं तथा प्रदेश की विशिष्ट पहचान को दर्शाते हैं।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा पिछले साढ़े तीन वर्षों में हिमाचल की पारंपरिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है। जीआई टैग मिलने से इन उत्पादों की मौलिकता और पहचान सुरक्षित रहेगी, बाजार में इनकी मांग और मूल्य बढ़ेगा, नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मान्यता हमारी अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ आर्थिक विकास, ग्रामीण उद्यमिता और आजीविका के नए अवसर भी प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चार अन्य पारंपरिक उत्पादों को भी जीआई टैग दिलाने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है। इनमें चंबा ज़िले के पांगी क्षेत्र का भोट जौ, चंबा चुख, भरमौर क्षेत्र का प्लेक्ट्रेंथस शहद तथा सिरमौर ज़िले का अदरक शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को इन उत्पादों का जीआई पंजीकरण जल्द सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए।

    सुक्खू ने कहा कि जीआई टैग मिलने से जनजातीय समुदायों, कारीगरों, बुनकरों, किसानों और पारंपरिक उत्पादकों की आजीविका को मजबूती मिलेगी। साथ ही उत्पादों में मूल्य संवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता और सतत आर्थिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला ने कहा कि जीआई पंजीकरण इन उत्पादों को नकली और अनाधिकृत उपयोग से बचाने का प्रभावी माध्यम है। इससे इनकी ब्रांड पहचान मजबूत होगी, बाजार में इनकी स्वीकार्यता बढ़ेगी और निर्यात की संभावनाओं को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

    उल्लेखनीय है कि इससे पहले हिमाचल प्रदेश के नौ उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। इनमें कुल्लू शॉल, कांगड़ा चाय, चंबा रूमाल, किन्नौरी शॉल, कांगड़ा पेंटिंग, हिमाचली काला जीरा, हिमाचली चुल्ली तेल, चंबा चप्पल तथा लाहौली बुने हुए मोजे और दस्ताने शामिल हैं। इस अवसर पर डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान की निदेशक डॉ. रूपाली ठाकुर तथा पर्यावरण एवं विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद् के सदस्य सचिव डॉ. सुरेश अत्री भी उपस्थित थे।

  • राज्यपाल ने चिट्टा मुक्त हिमाचल के लिए एलीवेट अभियान का शुभारंभ किया

    राज्यपाल ने चिट्टा मुक्त हिमाचल के लिए एलीवेट अभियान का शुभारंभ किया

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही नशे के दुष्प्रभावों के बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए नशे के विरुद्ध सामूहिक रूप से मिशन मोड में अभियान चलाने का आह्वान किया। वह आज लोक भवन में अनुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा आयोजित ‘एलीवेट-एक्सपीरियंस द रियल हाई, ए स्टेप टुवर्ड्स ड्रग-फ्री हिमाचल’ अभियान के शुभारम्भ सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सोसायटी के राज्यव्यापी नशा जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया, जिसे आगामी दिनों में हिमाचल प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंचाया जाएगा।

    कार्यक्रम में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, राजस्थान तथा देश के अन्य राज्यों से प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों और युवाओं ने भाग लिया।
    राज्यपाल ने इस पहल को ‘नशा मुक्त भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह अभियान नशे की बेड़ियों से मुक्त भारत के निर्माण का राष्ट्रीय संकल्प है, जहां युवा अपनी प्रतिभा, दृढ़ निश्चय और मेहनत के बल पर सफलता प्राप्त करेंगे, न कि नशे की गिरफ्त में आकर अपना भविष्य बर्बाद करेंगे।

    उन्होंने एलीवेट अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका अर्थ ऊंचाइयों तक पहुंचना है, लेकिन वास्तविक ऊंचाई स्वस्थ, उद्देश्यपूर्ण और सेवा-भाव से परिपूर्ण जीवन जीने में है। उन्होंने कहा कि यह पहल अब एक राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप ले रही है, जो युवाओं को सार्थक एवं अनुशासित जीवन अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

    राज्यपाल ने कहा कि यदि इस अभियान के विचारों और उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से जमीनी स्तर पर लागू किया जाए तो हिमाचल प्रदेश नशा मुक्त राज्य बनने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर सकता है।युवा राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति हैं और उन्हें नशे जैसी बुराई से बचाना समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की भूमिका युवा पीढ़ी के निर्माण में अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। यदि शिक्षक नियमित रूप से विद्यार्थियों का मार्गदर्शन और परामर्श करें, तो उन्हें नशे की ओर बढ़ने से रोका जा सकता है।

    राज्यपाल ने कहा कि भारत वर्ष-2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए युवाओं को नशे से सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने प्रत्येक नागरिक से नशे के विरुद्ध इस लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करने तथा ‘नशा मुक्त भारत’ के राष्ट्रीय संकल्प को सफल बनाने में योगदान देने का आग्रह किया।

    उन्होंने बदलती सामाजिक संरचना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण युवाओं को पहले की तरह परिवार के बुजुर्गों का मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। इससे उनमें अकेलापन, तनाव, अवसाद और नशे की ओर झुकाव जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत पारिवारिक संबंध, खुला संवाद और भावनात्मक सहयोग आवश्यक है।

    राज्यपाल ने कहा कि देवभूमि हिमाचल प्रदेश भी अब नशे की बढ़ती समस्या से अछूता नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश का युवा वर्ग नशामुक्त रहेगा तो वह राज्य को अधिक सशक्त, स्वस्थ और समृद्ध बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे सकेगा। इस अवसर पर राज्यपाल ने नशा उन्मूलन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया तथा नशा जागरूकता पर आधारित एक पुस्तिका का विमोचन भी किया।

    एनआईटी जालंधर के निदेशक एवं ‘एनआईटी श्रीनगर’ के अतिरिक्त निदेशक प्रो. विनोद कुमार कनोजिया ने हिमाचल प्रदेश को भारत की आध्यात्मिक चेतना, प्राकृतिक सौंदर्य और सरलता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ऊंचे पर्वत लोगों को ऊंची सोच और उत्कृष्टता की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने युवाओं में मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

    इससे पूर्व एलीवेट के राष्ट्रीय आउटरीच प्रमुख संयोग दत्त शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया। विद्या भारती हिमाचल प्रदेश के संगठन मंत्री ज्ञान कुमार ने नशे के दुष्प्रभावों पर अपने विचार साझा किए, जबकि प्रख्यात समाजसेवी गोपाल किशन ने नशा मुक्त भारत के लिए जन-जागरूकता अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया।

    अनुव्रत विश्व भारती सोसायटी के सदस्य मनीष शर्मा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थी, शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

     

  • शिक्षा मंत्री ने पूर्व मंत्री राजा विजेंद्र सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया

    शिक्षा मंत्री ने पूर्व मंत्री राजा विजेंद्र सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया

    शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने के पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री राजा विजेंद्र सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। ठाकुर ने कहा कि राजा विजेंद्र सिंह एक सम्मानित, अनुभवी एवं जनप्रिय नेता थे, उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन के दौरान हिमाचल प्रदेश के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री राम लाल ठाकुर के कार्यकाल में भी स्वास्थ्य क्षेत्र की मजबूती और विस्तार के लिए अपनी बहुमूल्य सेवाएं दीं।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि राजा विजेंद्र सिंह वर्ष 1977, 1982, 1985, 1990 तथा 1993 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और विशेष रूप से प्रदेश के विकास तथा विशेषकर नालागढ़ क्षेत्र के लोगों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किया।

    रोहित ठाकुर ने कहा कि राजा विजेंद्र सिंह अपनी सादगी, समर्पण और जनसेवा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के लिए सदैव याद किए जाएंगे। राज्य की प्रगति और जनकल्याण के लिए उनके अमूल्य योगदान को हमेशा स्मरण किया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने परिवार के सदस्यों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करने की भी प्रार्थना की है।

  • मुख्यमंत्री ने Raja Vijendar Singh के निधन पर शोक व्यक्त किया

    मुख्यमंत्री ने Raja Vijendar Singh के निधन पर शोक व्यक्त किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पूर्व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री राजा विजेंद्र सिंह के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उनका निधन आज प्रातः दिल्ली में हुआ, वे 80 वर्षीय थे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राजा विजेंद्र सिंह का प्रदेश के विकास, विशेषकर सोलन जिला के नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र के विकास में उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि समाज कल्याण के उनके कार्यों को प्रदेशवासी सदैव याद रखेंगे।

    मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। राजा विजेंद्र सिंह वर्ष 1977, 1982, 1985, 1990 और 1993 में हिमाचल प्रदेश विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उन्होंने मई 1982 से अप्रैल 1983 तक मुख्य संसदीय सचिव के रूप में कार्य किया। इसके अलावा उन्होंने वर्ष 1983-84 तथा 1988-89 के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री के पद पर भी कार्य किया।

  • मुख्यमंत्री ने नेरी में स्थापित किए जा रहे देश के पहले बायोचार संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की

    मुख्यमंत्री ने नेरी में स्थापित किए जा रहे देश के पहले बायोचार संयंत्र की प्रगति की समीक्षा की

    शिमला: हमीरपुर जिले के नेरी में देश का पहला स्वदेशी बायोचार संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान देने के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर सृजित करेगी। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में जन-जागरूकता बढ़ाने में भी यह महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करेगी।

    हमीरपुर जिले के नेरी और जाहू में दो बायोचार संयंत्र स्थापित करने के लिए पिछले वर्ष अगस्त माह में डॉ. वाई.एस. परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, वन विभाग और प्रोक्लाइम सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई के बीच त्रिपक्षीय समझौता हस्ताक्षरित किया गया था।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां राज्य में स्थापित किए जा रहे बायोचार संयंत्रों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना रोजगार के अवसर बढ़ाने, वन संसाधनों के सतत् प्रबंधन को प्रोत्साहित करने तथा राज्य को कार्बन क्रेडिट अर्जित करने में सहायक सिद्ध होगी। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ राज्य के आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी। परियोजना के लिए एकत्रित बायोमास की खरीद 2.50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जा रही है तथा गुणवत्ता बनाए रखने पर प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन भी दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत चीड़ की पत्तियांे (पाइन नीडल्स), लैंटाना, बांस तथा अन्य वृक्ष एवं पौध-आधारित बायोमास का उपयोग कर बायोचार का उत्पादन किया जाएगा। परियोजना की 10 वर्ष की परिचालन अवधि में लगभग 28,800 कार्बन क्रेडिट उत्पन्न होने का अनुमान है, जिससे हिमाचल प्रदेश की हरित पहलों को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा।

    सुक्खू कहा कि हिम एवरग्रीन इंटीग्रेटेड क्लाइमेट-स्मार्ट एग्रीकल्चर एंड एग्रो-फॉरेस्ट्री कार्यक्रम के अंतर्गत कृषि प्रणालियों में वृक्षों का समावेश किया जाएगा। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रति प्रयास बढ़ेंगे तथा किसानों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक अवसर सृजित होंगे। हिमाचल प्रदेश के 50,000 हेक्टेयर पात्र कृषि क्षेत्र में लागू होने वाला यह कार्यक्रम 1.35 करोड़ (13.5 मिलियन) टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के प्रबंधन में योगदान देगा। इससे मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैव विविधता का संरक्षण, कृषि की जलवायु अनुकूलता में वृद्धि तथा कार्बन अवशोषण के माध्यम से मापनीय जलवायु परिणाम प्राप्त होंगे। कार्यक्रम के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार मानकों के अनुरूप जीआईएस, रिमोट सेंसिंग तथा डिजिटल डेटा संग्रह प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

    प्रोक्लाइम के सलाहकार मंडल के सदस्य एवं संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के पूर्व कार्यकारी निदेशक एरिक सोलहाइम ने कहा कि संस्था जलवायु संकट से निपटने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के समन्वय के लिए प्रतिबद्ध है। कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने की दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार के रहे प्रयासों की सराहना की। पर्यावरण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव सुशील कुमार सिंगला और प्रोक्लाइम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) केविन कुमार कंदासेमी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • प्रदेश सरकार बच्चों के कल्याण के लिए वचनबद्ध: CM Sukhu

    प्रदेश सरकार बच्चों के कल्याण के लिए वचनबद्ध: CM Sukhu

    शिमला: जिला ऊना बाल कल्याण कमेटी के नवनियुक्त अध्यक्ष ओंकार कपिला ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से शिष्टाचार भेंट की तथा मुख्यमंत्री को सम्मानित कर इस नियुक्ति के लिए उनका आभार व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने नव नियुक्त अध्यक्ष को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार बच्चों के कल्याण के लिए वचनबद्ध है तथा उनके सर्वांगीण विकास एवं कल्याण के लिए राज्य में अनेक योजनाएं आरम्भ की हैं। इन योजनाओं को धरातल तक ले जाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को न्याय दिलाने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और समाज में जागरूकता लाने के लिए कमेटी को निष्ठापूर्वक कार्य करना चाहिए।

    नवनियुक्त अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि वह कर्मठता से सरकार की नीतियों के अनुसार बच्चों के अधिकारों के संरक्षण में कार्य करेंगे। इस अवसर पर पूर्व विधायक सतपाल सिंह रायजादा ने जिला ऊना में विकास की गति में तीव्रता लाने के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके आशीर्वाद से जिले के विकास में हरसंभव सहायता मिल रही है। बैठक के दौरान क्षेत्र के विकास से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों और आगामी योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

  • राज्यपाल ने दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग वितरित किए

    राज्यपाल ने दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग वितरित किए

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन में गैर-सरकारी संगठन एक्ट ह्यूमेन द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य रेड क्रॉस सोसायटी के सहयोग से आयोजित कृत्रिम अंग वितरण शिविर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग 15 लाभार्थियों को कृत्रिम अंग प्रदान किए गए, जिससे उन्हें पुनः शारीरिक गतिशीलता प्राप्त होगी और वे अधिक आत्मनिर्भर जीवन जी सकेंगे।

    विभिन्न आयु वर्ग के ये लाभार्थी ऊना, कांगड़ा, रोहड़ू, शिमला और सिरमौर जिलों से इस शिविर में पहुंचे थे। कृत्रिम अंगों का वितरण 4 जून को राज्य रेड क्रॉस भवन में एक्ट ह्यूमेन द्वारा आयोजित पंजीकरण एवं मूल्यांकन शिविर के आधार पर किया गया, जिसमें पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उनकी आवश्यकताओं का आकलन किया गया था।

    लाभार्थियों से संवाद करते हुए राज्यपाल ने उन्हें जीवन की चुनौतियों का साहस और आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कई बार अप्रत्याशित परिस्थितियां और दुर्घटनाएं लोगों से चलने-फिरने या दैनिक कार्य करने की क्षमता छीन लेती हैं, लेकिन इस प्रकार की संवेदनशील पहल न केवल उनकी शारीरिक गतिशीलता लौटाती है, बल्कि उनके आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और जीवन में नई आशा का भी संचार करती है।

    राज्यपाल ने एक्ट ह्यूमेन की समर्पित मानवीय सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि संस्था का कार्य समाज के प्रति निस्वार्थ सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण है। उन्होंने दिव्यांगजनों तक पहुंचकर उन्हें आधुनिक कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराने के लिए संस्था और राज्य रेड क्रॉस सोसायटी के संयुक्त प्रयासों की प्रशंसा की।

    राज्यपाल ने लोगों से ऐसी कल्याणकारी पहलों का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान करते हुए दिव्यांगजनों से कहा कि वे स्वयं को कभी भी असहाय या किसी से कम न समझें। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति में अपार क्षमता और शक्ति होती है। दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और उचित सहयोग के बल पर कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज को मिलकर दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर, सुगम वातावरण और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

    इससे पूर्व एक्ट ह्यूमेन की संस्थापक हरलीन कौर ने राज्यपाल का स्वागत किया और संस्था द्वारा संचालित विभिन्न मानवीय गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक्ट ह्यूमेन ने इससे पहले सोलन, कांगड़ा, धर्मशाला और मंडी जिलों में भी कृत्रिम अंग वितरण शिविर आयोजित कर अनेक दिव्यांगजनों को निःशुल्क कृत्रिम अंग उपलब्ध करवाए है। संस्था केवल सहायक उपकरण ही नहीं, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को चिकित्सा उपचार के लिए आर्थिक सहायता भी प्रदान करती है।

    उन्होंने कहा कि संस्था ने हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजन-अनुकूल आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए भी कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। सोलन मॉल रोड स्थित चिल्ड्रन्स पार्क को दिव्यांगजन-अनुकूल पार्क में परिवर्तित किया गया है। इसके अतिरिक्त, शिमला के रानी झांसी पार्क और ब्रॉकहर्स्ट पार्क को भी सुगम एवं व्हीलचेयर-अनुकूल बनाया गया है, जिससे दिव्यांगजन और व्हीलचेयर उपयोगकर्ता सम्मानपूर्वक एवं सहजता से सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों का आनंद ले सकें।

    एक्ट ह्यूमेन हिमाचल के प्रबंधक योगेश शर्मा ने भी राज्यपाल को संस्था की प्रदेश में संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की जानकारी दी। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज भी उपस्थित थे।