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  • चौपाल क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट की

    चौपाल क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट की

    शिमला: जिले के चौपाल नगर पंचायत की नवनिर्वाचित अध्यक्ष प्रमिता ठाकुर के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और उन्हें नगर पंचायत से संबंधित विभिन्न मांगों से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। इस अवसर पर नगर पंचायत चौपाल के पूर्व अध्यक्ष चंद्र मोहन ठाकुर तथा हिमाचल प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव यशपाल तनैक भी उपस्थित थे।

     

  • कांग्रेस नेता राम लाल ठाकुर ने नैना देवी जी और जुखाला महाविद्यालयों में संकाय बहाली पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया

    कांग्रेस नेता राम लाल ठाकुर ने नैना देवी जी और जुखाला महाविद्यालयों में संकाय बहाली पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया

    शिमला: पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राम लाल ठाकुर ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से शिष्टाचार भेंट की। उन्होंने जिला बिलासपुर के राजकीय महाविद्यालय नैना देवी जी में वाणिज्य संकाय तथा राजकीय महाविद्यालय जुखाला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकायों को बहाल करने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

    राम लाल ठाकुर ने कहा कि इन संकायों की बहाली से क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपने घर के निकट ही इन विषयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं को उनके घर-द्वार के निकट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    शिक्षा क्षेत्र को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान करते हुए वर्तमान सरकार के व्यावहारिक एवं दूरदर्शी प्रयासों के परिणामस्वरूप ही हिमाचल प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में देश में 21वें स्थान से पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि जबकि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में राज्य की रैंकिंग 21वें स्थान पर फिसल गई थी।

  • प्रशासनिक आंकड़ों की संभावनाओं को उजागर करना विषय पर राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया

    प्रशासनिक आंकड़ों की संभावनाओं को उजागर करना विषय पर राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया

    शिमला: प्रख्यात सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में आज प्रदेश में 20वां राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस मनाया गया। उनके योगदान ने भारत की आधुनिक सांख्यिकीय प्रणाली की नींव रखी। इस वर्ष का राष्ट्रीय विषय प्रशासनिक आंकड़ों की संभावनाओं को उजागर करना है, जो साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, प्रभावी शासन तथा नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवाएं प्रदान करने में प्रशासनिक आंकड़ों के बढ़ते महत्त्व को रेखांकित करता है।

    इस अवसर पर प्रधान सचिव आर्थिक एवं सांख्यिकी डॉ. अभिषेक जैन ने विभागीय पुस्तकालय का उद्घाटन किया, जिससे विभाग में ज्ञान संसाधनों के सुदृढ़ीकरण तथा अनुसंधान एवं डेटा-आधारित अधिगम की संस्कृति को प्रोत्साहित करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी विभागों द्वारा प्रतिदिन उत्पन्न प्रशासनिक आंकड़े देश की सबसे मूल्यवान, लेकिन अभी तक कम उपयोग में लाई गई सार्वजनिक परिसंपत्तियों में से एक हैं। यदि इन्हें व्यवस्थित रूप से संगठित, समन्वित एवं सुरक्षित रूप से साझा किया जाए, तो ये शासन को अधिक तीव्र, सूचित और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में सशक्त बना सकते हैं।

    वर्तमान समय में सरकारों से जटिल विकासात्मक चुनौतियों का त्वरित समाधान अपेक्षित है, जिसके लिए समयबद्ध, विश्वसनीय एवं सूक्ष्म स्तर की जानकारी आवश्यक है, जिसे पारंपरिक सर्वेक्षण हमेशा उपलब्ध नहीं करा सकते। सरकारी कार्यक्रमों के नियमित क्रियान्वयन से उत्पन्न प्रशासनिक आंकड़े वास्तविक समय में सतत जानकारी प्रदान करते हैं, जो नीति निर्माण, निगरानी एवं मूल्यांकन को सुदृढ़ बनाते हैं। डॉ. जैन ने कहा कि प्रशासनिक डेटा शासन को प्रतिक्रियात्मक व्यवस्था से सक्रिय निर्णय प्रणाली में परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। यह कल्याणकारी योजनाओं के लक्ष्य निर्धारण में सुधार, सार्वजनिक संसाधनों के समुचित आवंटन, निगरानी प्रणाली को सशक्त बनाने तथा पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

     

    उन्होंने कहा कि समान डेटा शब्दावली, मानकीकृत वर्गीकरण और मेटाडेटा ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि सरकारी डेटा मशीन-पठनीय और एकीकृत करने योग्य बन सके। रीयल-टाइम प्रशासनिक डेटाबेस का संचालन, समन्वित डेटा के माध्यम से लाभार्थियों की पहचान का स्वचालन तथा राज्य योजनाओं का केंद्र की योजनाओं के साथ एकीकरण, कल्याणकारी सेवाओं को एकीकृत दृष्टि प्रदान करेगा और दक्षता में वृद्धि करेगा। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक नीति और कार्यक्रम सटीक, समयबद्ध और विश्वसनीय आंकड़ों पर आधारित हो, जिससे सुशासन और बेहतर नागरिक सेवाएं सुनिश्चित हों।

    डॉ. जैन ने कहा कि तकनीकी प्रगति के साथ-साथ डेटा शासन गोपनीयता, सुरक्षा और सार्वजनिक विश्वास के सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। डेटा साझाकरण के लिए मजबूत विधिक प्रावधान, पारदर्शी व्यवस्था और स्पष्ट जवाबदेही आवश्यक है। डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम इस दिशा में एक महत्त्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।

    सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय, भारत सरकार के उप-महानिदेशक डॉ. जे. एस. तोमर ने कहा कि भारत सरकार प्रशासनिक डेटा के उपयोग हेतु कई पहल कर रही है। आंकड़ों का समन्वयन उन्हें पुनः उपयोग योग्य और मशीन-पठनीय बनाता है। उन्होंने कहा कि भविष्य का साक्ष्य-आधारित शासन डेटा गुणवत्ता में सुधार, समान मेटाडेटा मानकों को अपनाने, व्यापक डेटा सूची तैयार करने और सुरक्षित डेटा साझाकरण पर निर्भर करेगा। इस अवसर पर आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने कहा कि विश्वसनीय प्रशासनिक डेटा अब केवल रिकॉर्ड नहीं रहा, बल्कि यह समावेशी विकास, जन विश्वास और लोकतांत्रिक शासन को सशक्त बनाने वाला एक महत्त्वपूर्ण संसाधन है।

     

  • बड़ा भंगाल प्रवास से मुख्यमंत्री का दुर्गम क्षेत्रों के प्रति आत्मीय लगाव फिर आया सामने

    बड़ा भंगाल प्रवास से मुख्यमंत्री का दुर्गम क्षेत्रों के प्रति आत्मीय लगाव फिर आया सामने

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का हिमाचल प्रदेश के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में शामिल कांगड़ा जिले के बड़ा भंगाल का दो दिवसीय प्रवास दूरस्थ क्षेत्र के लोगों के समग्र विकास के प्रति उनकी संवेदनशीलता एवं विशेष लगाव का सशक्त प्रमाण है। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि वर्तमान सरकार की विकास यात्रा केवल सड़कों और शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे प्रत्येक नागरिक तक पहुंचने के संकल्प से प्रेरित है। जिन क्षेत्रों की आवाज वर्षों तक शिमला में सत्ता के गलियारों तक मुश्किल से पहुंच पाती थी, वहां आज मुख्यमंत्री स्वयं पहुंचकर लोगों के बीच बैठ रहे हैं, उनकी समस्याएं सुन रहे हैं और मौके पर समाधान सुनिश्चित कर रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के संकल्प को धरातल पर उतारते हुए यह सिद्ध किया है कि उनके लिए विकास का पैमाना वोटों की संख्या नहीं, बल्कि लोगों की जरूरतें हैं। कम आबादी वाले और राजनीतिक दृष्टि से कम प्रभाव वाले क्षेत्रों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की उनकी प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है। बड़ा भंगाल पहुंचकर मुख्यमंत्री ने स्वयं कहा, ‘मैं यहां राजनीति करने नहीं, बल्कि आपका दुख-दर्द बांटने आया हूं।’ यह कथन उनकी कार्यशैली और जनसेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।

    मुख्यमंत्री के आगमन से बड़ा भंगाल के लोग बहुत खुश नज़र आए। स्थानीय निवासी कमलो देवी ने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे से उम्मीद है कि यहां पर सुविधाओं में बढ़ौतरी होगी। वहीं रिशू राम ने कहा कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू पहले मुख्यमंत्री है जिन्होंने यहां पर रात्रि ठहराव किया है। अब हमारी समस्याओं का समाधान होगा। संतोष कुमारी ने कहा कि हमने अपनी बातें मुख्यमंत्री के सामने रखी हैं और अब उन्होंने अधिकारियों को इनका समाधान करने के तुरंत निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री इससे पहले भी शिमला जिले के दुर्गम क्षेत्र डोडरा-क्वार और कुपवी, कुल्लू जिले के बागा सराहन तथा बंजार विधानसभा क्षेत्र के सरची जैसे कठिन इलाकों का दौरा कर चुके हैं। इन क्षेत्रों में रात्रि प्रवास कर स्थानीय लोगों की समस्याओं को निकट से समझा और उनके समाधान के लिए तत्काल निर्णय भी लिए। बड़ा भंगाल सहित प्रदेश के अनेक दुर्गम क्षेत्रों में रात्रि प्रवास करने वाले ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने हैं। यह केवल एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि शासन की संवेदनशीलता और जनसरोकारों को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने का उदाहरण है।

    कांग्रेस सरकार के गठन के बाद जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के संतुलित विकास को नई गति मिली है। मुख्यमंत्री ने यह सुनिश्चित किया कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें। इसी सोच के तहत सरकार बनने के बाद पहला राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस जनजातीय क्षेत्र स्पीति के काजा में आयोजित किया गया। इसके बाद वर्ष 2025 का राज्य स्तरीय हिमाचल दिवस भी देश के सबसे दुर्गम क्षेत्रों में से एक पांगी में आयोजित कर सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकास और सम्मान पर प्रदेश के हर क्षेत्र का समान अधिकार है।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के इन दुर्गम क्षेत्रों के प्रवासों ने यह स्पष्ट किया है कि वर्तमान सरकार के लिए प्रदेश का कोई भी गांव, कोई भी परिवार और कोई भी नागरिक दूर नहीं है। यही व्यवस्था परिवर्तन की वास्तविक भावना है, जिसमें विकास की किरण प्रदेश के अंतिम छोर तक समान रूप से पहुंचाने का संकल्प दिखाई देता है।

  • राज्यपाल Kavinder Gupta ने राष्ट्रीय स्तरीय शूलिनी मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता की

    राज्यपाल Kavinder Gupta ने राष्ट्रीय स्तरीय शूलिनी मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता की

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने रविवार सायं सोलन में आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय शूलिनी मेले के समापन समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उनके साथ उपस्थित रहीं। राज्यपाल ने जिला प्रशासन एवं शूलिनी मेला समिति को मेले के सफल एवं गरिमामय आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि शूलिनी मेला केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और गहरी आस्था का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने, प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने तथा पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने राज्यपाल को सम्मानित किया। राज्यपाल ने सोलन रेडक्रॉस सोसायटी के नव-नामित आजीवन सदस्यों को बैज प्रदान किए तथा मानव सेवा और जनकल्याण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि रेडक्रॉस से उनका जुड़ाव जिले में स्वैच्छिक सेवा गतिविधियों को और अधिक सशक्त बनाएगा।

    राज्यपाल ने इस अवसर पर शूलिनी मेले के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक महत्व पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया। इसके उपरांत उन्होंने स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत रंगारंग सांस्कृतिक संध्या का आनंद लिया, जिसमें हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोक संस्कृति एवं परंपराओं की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं। इससे पूर्व राज्यपाल ने सोलन के गंज बाजार स्थित ऐतिहासिक दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उनके साथ उपस्थित रहीं। विधायक विनोद सुल्तानपुरी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

    उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा ने राज्यपाल एवं अन्य गणमान्य अतिथियों का स्वागत किया। समारोह में वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी, शूलिनी मेला समिति के सदस्य, रेडक्रॉस सोसायटी के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।

     

  • राज्य सरकार Electric बसों पर 50 प्रतिशत और डीजल बसों पर 30 प्रतिशत सब्सिडी देगी: CM Sukhu

    राज्य सरकार Electric बसों पर 50 प्रतिशत और डीजल बसों पर 30 प्रतिशत सब्सिडी देगी: CM Sukhu

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने युवाओं को रोजगार प्रदान करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ने बेरोजगार युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर सृजित करने, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को सदृढ़ बनाने तथा पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना (चरण-Ⅳ) प्रारम्भ करने का निर्णय लिया है। योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर 50 प्रतिशत तथा डीजल बसों की खरीद पर 30 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेशभर में चिन्हित 1,000 मार्गों पर बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को इलेक्ट्रिक बसों के लिए पांच वर्षों तक 65 हजार रुपये प्रतिमाह तथा डीजल बसों के लिए 50 हजार रुपये प्रतिमाह परिचालन प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी। यह योजना पूरे हिमाचल प्रदेश में लागू होगी तथा प्रत्येक उपमंडल में कम-से-कम 10 मार्ग चिन्हित किए जाएंगे। योजना के तहत न्यूनतम 32 सीटों वाली इलेक्ट्रिक एवं डीजल यात्री बसें पात्र होंगी।

    योजना का क्रियान्वयन श्रम, रोजगार एवं विदेशी नियोजन विभाग द्वारा परिवहन विभाग तथा जिला प्रशासन के सहयोग से किया जाएगा। चिन्हित उपमंडलीय मार्गों पर बसों के संचालन से लोगों की शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य सेवाओं, सरकारी कार्यालयों, औद्योगिक क्षेत्रों, पर्यटन स्थलों तथा दूरस्थ पंचायतों तक पहुंच अधिक सुगम होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत होने के साथ-साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    योजना के लिए आवेदक को हिमाचल प्रदेश का स्थायी निवासी होना अनिवार्य होगा। उसकी आयु 25 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए तथा उसके पास कम-से-कम तीन वर्ष का अनुभव और वैध हेवी ड्राइविंग लाइसेंस होना आवश्यक होगा। बस का संचालन स्वयं लाभार्थी द्वारा किया जाएगा। राज्य के रोजगार कार्यालयों में पंजीकृत अभ्यर्थियों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा चयन प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के आवेदकों को वरीयता प्रदान की जाएगी।

    योजना के प्रभावी एवं पारदर्शी संचालन के लिए सभी बसों में जीपीएस आधारित वाहन ट्रैकिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी तथा उनकी नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। योजना के तहत संचालित बसों में यात्रा करने वाली महिलाओं को किराये में 50 प्रतिशत की रियायत मिलेगी, जबकि कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को विशेष पास प्रणाली के माध्यम से रियायती यात्रा सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।

    राज्य सरकार का मानना है कि इस पहल से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर स्वरोजगार के अवसर सृजित होंगे, ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी, पर्यटन एवं स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी तथा स्वच्छ एवं हरित परिवहन तकनीकों को अपनाने में तेजी आएगी।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह योजना राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसके तहत बेरोजगार युवाओं को कम वित्तीय बोझ के साथ टिकाऊ परिवहन उद्यम स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों पर बढ़ाई गई सब्सिडी हरित परिवहन, कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा स्वच्छ पर्यावरण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह योजना न केवल युवाओं को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराएगी, बल्कि प्रदेश में पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को भी नई गति प्रदान करेगी।

  • चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए इस वर्ष अब तक 212 करोड़ रुपये जारी

    चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए इस वर्ष अब तक 212 करोड़ रुपये जारी

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के सकारात्मक परिणाम अब आर्थिक मोर्चे पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। वित्तीय अनुशासन, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा जनहित को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने की नीति के चलते कांग्रेस सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबे समय से लंबित वित्तीय लाभों का तेजी से निपटारा कर रही है। इसी क्रम में वित्त वर्ष 2026-27 में 27 जून तक राज्य सरकार ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों के भुगतान के लिए 212 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इनमें 131.03 करोड़ रुपये पेंशनरों तथा 80.97 करोड़ रुपये सरकारी कर्मचारियों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान के लिए जारी किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार वित्त विभाग ने कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के शीघ्र भुगतान के लिए यह धनराशि जारी की है। कर्मचारी एवं पेंशनर अपने चिकित्सा प्रतिपूर्ति के भुगतान के संबंध में अपने आहरण एवं वितरण अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। वर्तमान सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के कल्याण के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। वर्षों से लंबित वित्तीय दायित्वों का चरणबद्ध समाधान कर कांग्रेस सरकार ने यह सिद्ध किया है कि कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

    कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2016 के बाद सेवानिवृत्त हुए अथवा दिवंगत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं उनके आश्रित परिवारों को भी बड़ी राहत प्रदान की है। जिनकी मूल पेंशन 25,000 रुपये प्रतिमाह तथा पारिवारिक पेंशन 15,000 रुपये प्रतिमाह तक है, उनके लंबित एरियर जारी कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक जनवरी, 2016 से पूर्व सेवानिवृत्त हुए पेंशनभोगियों एवं पारिवारिक पेंशनरों के संशोधित पेंशन एरियर का पूर्ण भुगतान भी सुनिश्चित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को आरडीजी तथा जीएसटी क्षतिपूर्ति के रूप में केंद्र सरकार से लगभग 60 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता प्राप्त हुई थी। इसके बावजूद कर्मचारियों और पेंशनरों को छठे वेतन आयोग के एरियर तथा अन्य देय वित्तीय लाभों का समयबद्ध भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इसके विपरीत वर्तमान कांग्रेस सरकार ने सत्ता संभालते ही कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी। सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया तथा अब प्रदेश की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ-साथ कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित वित्तीय लाभों का भी भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है। व्यवस्था परिवर्तन का उद्देश्य केवल आर्थिक सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और आम जनता के विश्वास को मजबूत करना भी है।

  • Special Task Force ने Nurpur के Jassur में 223 ग्राम चिट्टा बरामद किया

    Special Task Force ने Nurpur के Jassur में 223 ग्राम चिट्टा बरामद किया

    शिमला: पुलिस विभाग के एक प्रवक्ता ने आज बताया कि जिला कांगड़ा के स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने जसूर स्थित शास्त्री औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) के समीप तीन संदिग्ध व्यक्तियों की तलाशी ली जिसके दौरान उनके कब्जे से 223 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया।

    चिट्टा मुक्त हिमाचल के संकल्प को सशक्त बनाने के उद्देश्य से गठित एसटीएफ जसूर क्षेत्र में नियमित गश्त पर थी जिस दौरान उन्हें आईटीआई के निकट चिट्टा तस्करी की विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को पकड़ा गया। प्रवक्ता ने बताया कि तीनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया तथा उनके विरुद्ध पुलिस थाना नूरपुर, पुलिस जिला नूरपुर, में एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है। मादक पदार्थ की उत्पत्ति, आपूर्ति श्रृंखला तथा तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य संभावित संबंधों का पता लगाने के लिए पुलिस द्वारा पूछताछ जारी की जा रही है। यह समन्वित कार्रवाई नशा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाने, युवाओं को नशे की लत के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखने तथा मादक पदार्थों के विरुद्ध जन-जागरूकता बढ़ाने के प्रति राज्य पुलिस की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

    प्रवक्ता ने बताया कि मादक पदार्थों की तस्करी अथवा नशीले पदार्थों से संबंधित सूचना नागरिक पुलिस हेल्पलाइन 112 नम्बर पर अथवा अपने निकटतम पुलिस थाने में दी जा सकती है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने 15 नवंबर, 2025 को राज्यव्यापी ‘एंटी-चिट्टा अभियान’ का शुभारंभ किया था। इस अभियान को सफल बनाने तथा ‘चिट्टा मुक्त हिमाचल’ के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए राज्य पुलिस एवं विशेष कार्य बल पूरे प्रदेश में निरंतर अभियान चला रहे हैं। मुख्यमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व तथा प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं, की सक्रिय भागीदारी के साथ पुलिस विभाग चिट्टे के बढ़ते खतरे का समूल उन्मूलन कर नशा मुक्त हिमाचल प्रदेश के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

  • बड़ा भंगाल की सभी पात्र महिलाओं को मिलेंगे 1500 रुपये: मुख्यमंत्री, देखें वीडियो

    बड़ा भंगाल की सभी पात्र महिलाओं को मिलेंगे 1500 रुपये: मुख्यमंत्री, देखें वीडियो

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज जिला कांगड़ा के अति दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल पहुंचे और स्थानीय लोगों के साथ संवाद किया और उनकी समस्याओं को जाना। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री होंगे, जो यहां रात्रि प्रवास करेंगे।ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने लोगों से संवाद के दौरान 6 बड़ी घोषणाएं की। उन्होंने बड़ा भंगाल की सभी पात्र महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत 1,500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की। इस दुर्गम क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर सेट लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बड़ा भंगाल के स्कूली बच्चों को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए इंसेंटिव दिया जाएगा। इस क्षेत्र के नजदीकी स्कूलों को सरकार नोडल स्कूल बनाएगी ताकि बीड़ इत्यादि क्षेत्रों में जाकर यहां के बच्चे स्कूली शिक्षा ग्रहण कर सकें।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बड़ा भंगाल को इको टूरिज्म के तौर पर विकसित करने के निर्देश दिए तथा शीघ्र ही विस्तृत कार्य योजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती से उगाए गए राजमाह पर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करेगी। सुक्खू ने कृषि विभाग के अधिकारियों को बड़ा भंगाल के लोगों को प्राकृतिक खेती के साथ जोड़ने व इसके लिए सभी सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश भी दिए। इस क्षेत्र के भेड़ पालकों के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि प्रेदश सरकार भेड़ पालकों से मीट की उचित मूल्य पर खरीद करेगी।

    मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार उनका जीवन सुगम बनाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने क्षेत्र का दौरा कर आपदा के समय हुए नुकसान का जायजा भी लिया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे स्थानीय लोगों के अनुभवों को करीब से जाना। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 के बाद प्रदेश के किसी भी मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल का दौरा नहीं किया है। इस अवसर पर विधायक किशोरी लाल भी उपस्थित थे।

     

     

  • हिमाचल के सबसे दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल में मसीहा बनकर पहुंचे CM Sukhu

    हिमाचल के सबसे दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल में मसीहा बनकर पहुंचे CM Sukhu

    शिमला: करीब 15 साल के एक लंबे अंतराल के बाद हिमाचल प्रदेश के मुखिया को अपने बीच पाकर सिर्फ कांगड़ा जिला ही नहीं बल्कि प्रदेश के सबसे दुर्गम और कठिन क्षेत्र बड़ा भंगाल के लोग खुशी से चहक उठे। खासकर उन युवाओं की खुशी का ठिकाना नहीं था जिन्होंने बचपन की दहलीज को अभी-अभी लांघा है और पहली बार किसी मुख्यमंत्री को देखने का सपना पूरा हुआ।

    लगभग डेढ़ दशक के बाद कोई मुख्यमंत्री न सिर्फ बड़ा भंगाल क्षेत्र के दौरे पर पहुंचा बल्कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पूरी रात स्थानीय लोगों के साथ बिताकर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया। यह पहली बार नहीं जब श्री सुक्खू ने दुर्गम क्षेत्र में पहंुचकर लोगों का दुःख-दर्द साझा किया है। ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम की नई सोच के साथ वह लगातार ऐसे कठिन क्षेत्रों में रात्रि ठहराव करते आए हैं जहां आमतौर पर कोई नेता पहुंचने में रुचि नहीं दिखाता है। इससे पहले उन्होंने शिमला ज़िले के डोडरा-क्वार और कुपवी, कुल्लू ज़िले के बागा सराहन सहित जनजातीय जिलों लाहौल-स्पिति और किन्नौर के दूरस्थ गांवों का दौरा कर वहां के लोगों के बीच रात्रि प्रवास कर उनकी समस्याओं और परेशानियों का समाधान किया है। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर बड़ा भंगाल के क्षेत्र के लोगों में उत्सवी माहौल है। स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है कि वर्ष 2011 के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल का दौरा कर उनकी सुध ली है। क्षेत्र में पहली बार किसी मुख्यमंत्री के रात्रि ठहराव से स्थानीय लोग बहुत उत्साहित हैं और उन्होंने विश्वास जताया है कि मुख्यमंत्री की घोषणाओं और प्रशासन को दिए गए निर्देशों से बड़ा भंगाल क्षेत्र के विकास को नया आयाम मिलेगा।

    बड़ा भंगाल के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं में रंगे नजर आए। उन्होंने पारंपरिक वेशभूषा ‘चोला-डोरा’ धारण कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया तथा स्थानीय लोगों के साथ पारंपरिक लोकनृत्य में भी सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने स्थानीय किसानों के खेतों का दौरा कर उनकी समस्याओं को नजदीक से समझा। उन्होंने किसानों से राजमाह की खेती, उत्पादन और विपणन से जुड़े मुद्दों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की तथा भेड़पालकों की समस्याएं भी सुनीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है तथा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऊन का समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है, जिससे भेड़पालकों और स्थानीय किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि बड़ा भंगाल के लोग भी सरकार की इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्ट-अप योजना’ लागू की है। इसके तहत प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तथा पांगी घाटी में उत्पादित जौ का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसके अतिरिक्त, हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है, जबकि अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। इस अवसर पर स्थानीय विधायक किशोरी लाल, उपायुक्त हेमराज बैरवा तथा पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा सहित अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।