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  • बड़ा भंगाल में मुख्यमंत्री बोले, राजनीति करने नहीं दुख-दर्द बांटने आया हूं

    बड़ा भंगाल में मुख्यमंत्री बोले, राजनीति करने नहीं दुख-दर्द बांटने आया हूं

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने जिला कांगड़ा के दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल का दौरा कर आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया तथा स्थानीय लोगों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनी और संबंधित अधिकारियों को त्वरित समाधान करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और प्रशासनिक अधिकारियों से राहत एवं पुनर्वास कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल तक सड़क निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश देते हुए अधिकारियों को प्रत्येक किलोमीटर के लिए अलग-अलग निविदाएं आमंत्रित करने तथा कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने सड़क निर्माण के लिए आवश्यक मशीनरी को हवाई मार्ग से पहुंचाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। इस अवसर पर उन्होंने बड़ा भंगाल सड़क निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की।

    क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति के संबंध में मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों के साथ विस्तृत चर्चा की। उन्होंने विद्युत बोर्ड को गांव में उपयुक्त क्षमता के डीजल जनरेटर स्थापित करने तथा सभी घरों में विद्युत कनेक्शन और वायरिंग के लिए सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए। सड़क सुविधा उपलब्ध होने तक वैकल्पिक बिजली व्यवस्था जारी रखने का आश्वासन देते हुए उन्होंने अप्पर बड़ा भंगाल और लोअर बड़ा भंगाल के लिए एक-एक डीजल जनरेटर सेट उपलब्ध करवाने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, बाढ़ से प्रभावित जलविद्युत परियोजना को पुनः संचालित करने तथा सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल के प्रसिद्ध राजमाह की अलग ब्रांडिंग कर उसे विशेष पहचान और बेहतर बाजार मूल्य दिलाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्थानीय कृषि एवं बागवानी को प्रोत्साहित करते हुए लोगों से अखरोट एवं चेस्टनट के पौधे लगाने का आह्वान किया। स्थानीय मीट उत्पादों को भी बेहतर मूल्य उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया गया। उन्होंने प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।

    मोबाइल नेटवर्क सुविधा के संबंध में ग्रामीणों द्वारा उठाई गई मांग पर मुख्यमंत्री ने निजी दूरसंचार कंपनियों से बातचीत कर शीघ्र मोबाइल सेवा आरंभ करवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने वन भूमि का उपयुक्त क्षेत्र चिन्हित कर पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए तथा बड़ा भंगाल को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की। शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल के विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रोत्साहन योजना लाने, छात्रावास निर्माण पर विचार करने तथा बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करने की बात कही। उन्होंने घोषणा की कि विद्यार्थियों को शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने और समाप्त होने के समय हेली-टैक्सी सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। साथ ही बच्चों को सीबीएसई स्कूलों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था करने का भी आश्वासन दिया।

    स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं हेतु प्रशिक्षित करने की बात कही, ताकि दुर्गम क्षेत्र में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके। इसके बाद जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वे राजनीति करने नहीं, बल्कि बड़ा भंगाल के लोगों का दुख-दर्द बांटने आए हैं। उन्होंने कहा कि यदि राजनीति करनी होती तो वे अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में जाते, लेकिन उनकी सरकार का उद्देश्य प्रदेश के अंतिम छोर पर बसे लोगों तक विकास पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि शिमला में बैठकर योजनाएं बनाई जा सकती हैं, लेकिन धरातल पर लोगों की वास्तविक समस्याओं को समझने के लिए क्षेत्र का दौरा आवश्यक है।

    मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल को प्राकृतिक पंचायत घोषित करने, क्षेत्र को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिलाने के लिए प्रयास करने तथा राशन डिपो में खाद्यान्न कोटा बढ़ाने का आश्वासन दिया। उन्होंने बाढ़ से सुरक्षा के लिए प्रोटेक्शन वॉल निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने दो स्थानीय महिला मंडलों को दो-दो लाख रुपये तथा एक युवक मंडल को एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने पात्र महिलाओं को इंदिरा गांधी सुख सम्मान निधि योजना के तहत 1500 रुपये प्रतिमाह पेंशन देने की घोषणा भी की।

     

  • बड़ा भंगाल की सभी पात्र महिलाओं को मिलेंगे 1500 रुपये: मुख्यमंत्री

    बड़ा भंगाल की सभी पात्र महिलाओं को मिलेंगे 1500 रुपये: मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज जिला कांगड़ा के अति दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल पहुंचे और स्थानीय लोगों के साथ संवाद किया और उनकी समस्याओं को जाना। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री होंगे, जो यहां रात्रि प्रवास करेंगे।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने लोगों से संवाद के दौरान 6 बड़ी घोषणाएं की। उन्होंने बड़ा भंगाल की सभी पात्र महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत 1,500 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की। इस दुर्गम क्षेत्र में 24 घंटे बिजली आपूर्ति के लिए जनरेटर सेट लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बड़ा भंगाल के स्कूली बच्चों को उच्च शिक्षा जारी रखने के लिए इंसेंटिव दिया जाएगा। इस क्षेत्र के नजदीकी स्कूलों को सरकार नोडल स्कूल बनाएगी ताकि बीड़ इत्यादि क्षेत्रों में जाकर यहां के बच्चे स्कूली शिक्षा ग्रहण कर सकें।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बड़ा भंगाल को इको टूरिज्म के तौर पर विकसित करने के निर्देश दिए तथा शीघ्र ही विस्तृत कार्य योजना बनाने को कहा। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में प्राकृतिक खेती से उगाए गए राजमाह पर सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करेगी। सुक्खू ने कृषि विभाग के अधिकारियों को बड़ा भंगाल के लोगों को प्राकृतिक खेती के साथ जोड़ने व इसके लिए सभी सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश भी दिए। इस क्षेत्र के भेड़ पालकों के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि प्रेदश सरकार भेड़ पालकों से मीट की उचित मूल्य पर खरीद करेगी।

    मुख्यमंत्री ने क्षेत्रवासियों को आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार उनका जीवन सुगम बनाने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। उन्होंने क्षेत्र का दौरा कर आपदा के समय हुए नुकसान का जायजा भी लिया। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में जीवन यापन कर रहे स्थानीय लोगों के अनुभवों को करीब से जाना। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 के बाद प्रदेश के किसी भी मुख्यमंत्री ने बड़ा भंगाल का दौरा नहीं किया है। इस अवसर पर विधायक किशोरी लाल भी उपस्थित थे।

     

     

     

     

  • शिक्षा मंत्री ने चंबा सड़क दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया

    शिक्षा मंत्री ने चंबा सड़क दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया

    शिमला: शिक्षा मंत्री ने चंबा सड़क दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज चंबा जिले के भरमौर क्षेत्र में लुणा -सामरा -उरेई संपर्क मार्ग पर सारनी पुल के समीप हुई दुखद सड़क दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया, जिसमें चार लोगों की मृत्यु हो गई तथा एक व्यक्ति घायल हो गया है।

    शिक्षा मंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुःख की घड़ी में उनकी संवेदनाएं शोकाकुल परिवारों के साथ हैं। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की तथा शोक संतप्त परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की। उन्होंने दुर्घटना में घायल व्यक्ति के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की भी कामना की।

  • सरकार बकाया कृषि ऋणों पर 50 प्रतिशत ब्याज करेगी वहन, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

    सरकार बकाया कृषि ऋणों पर 50 प्रतिशत ब्याज करेगी वहन, किसानों को मिलेगी बड़ी राहत

    शिमला: वित्तीय बोझ के तले दबे किसानों को बड़ी राहत देते हुए राज्य सरकार ने वन-टाइम सेटलमेंट नीति के तहत कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना शुरू करने का निर्णय लिया है। यह योजना वर्तमान सरकार की बजट घोषणा को लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। योजना के तहत उन किसानों को सहायता प्रदान की जाएगी जिनकी कृषि भूमि की ऋण अदायगी न हो पाने के कारण नीलामी की कगार पर है।

    इस किसान हितैषी योजना के तहत राज्य सरकार प्रति किसान 3 लाख रुपये तक के कृषि ऋण पर बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत वहन करेगी। इस योजना से राज्य के लगभग 6,356 किसानों को लाभ मिलने की संभावना है। इसके लिए सरकार ने 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस योजना का क्रियान्वयन हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक तथा कांगड़ा सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के माध्यम से किया जाएगा। संबंधित बैंक शाखाएं पात्र किसानों की पहचान कर उनकी सूची तैयार करेंगी ताकि उन्हें ब्याज अनुदान का लाभ दिया जा सके।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका कल्याण सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अनेक किसान आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, इसलिए सरकार ने पात्र किसानों को यह एकमुश्त राहत देने का निर्णय लिया है। यह योजना कृषि ऋण बकाया की स्थिति में कृषि भूमि की वित्तीय संस्थानों द्वारा नीलामी के खतरे से किसानों को राहत प्रदान करेगी। सरकार द्वारा बकाया ब्याज का आधा हिस्सा वहन करने से किसानों के लिए ऋण का नियमितीकरण आसान होगा जिससे उनकी आर्थिक परेशानियां कम होंगी और वह कृषि गतिविधियां जारी रख पाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों और वित्तीय संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि योजना को शीघ्र लागू किया जाए ताकि पात्र किसानों को समय पर इसका लाभ मिल सके। किसान कल्याण की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को आर्थिक कठिनाइयों से बचाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है तथा प्राकृतिक रूप से उगाई गई फसलों के लिए ऐतिहासिक समर्थन मूल्य भी प्रदान किए जा रहे है। इससे उपभोक्ताओं को रसायन-मुक्त खाद्य पदार्थ उपलब्ध हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के साथ-साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। सरकार किसानों के हितों की रक्षा करते हुए हिमाचल प्रदेश में कृषि से समृद्धि और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है।

     

     

     

     

     

  • बागवानी मंत्री ने चण्डीगढ़ से Cherry एवं Plum की पहली निर्यात खेप को ओमान के लिए हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

    बागवानी मंत्री ने चण्डीगढ़ से Cherry एवं Plum की पहली निर्यात खेप को ओमान के लिए हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

    शिमला: राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने आज चण्डीगढ़ से ओमान के लिए शिमला जिले के जड़ोल-टिक्कर एवं बागी क्षेत्र के छः प्रगतिशील किसानों द्वारा उत्पादित 400 किलोग्राम चेरी एवं 400 किलोग्राम प्लम की प्रथम निर्यात खेप को हरी झण्डी दिखाकर हवाई मार्ग से रवाना किया। यह प्रदेश के बागवानी क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक एवं गौरवपूर्ण क्षण है।

    इस अवसर पर बागवानी मंत्री ने कहा कि मध्य-पूर्व एवं खाड़ी के देश हिमाचल प्रदेश के फलों के लिए एक बड़े एवं संभावनाशील निर्यात बाजार के रूप में उभर रहे हैं। यह पहल प्रदेश के स्टोन फ्रूट्स के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए द्वार खोलेगी तथा किसानों को उनकी उपज का बेहतर एवं लाभकारी मूल्य दिलवाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    जगत सिंह नेगी ने किसानों से आह्वान किया कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों का उत्पादन करें, ताकि हिमाचल प्रदेश के फल वैश्विक बाजारों में अपनी विशिष्ट पहचान बना सकें। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है तथा भविष्य में सेब सहित अन्य बागवानी उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं का भी विस्तार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एचपीएमसी बागवानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्यात के नए अवसर विकसित करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।

    उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल प्रदेश के बागवानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश को वैश्विक फल निर्यात मानचित्र पर सशक्त पहचान दिलाने में महत्त्वपूर्ण सिद्ध होगी। यह पहल एचपीएमसी द्वारा कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीईडीए), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से की गई है। इस निर्यात से संबंधित ग्रेडिंग, पैकिंग, गुणवत्ता परीक्षण एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं का व्यय एचपीएमसी द्वारा एपीईडीए के सहयोग से वहन किया गया है, ताकि किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। हवाई परिवहन के माध्यम से फल अपनी ताजगी एवं उत्कृष्ट गुणवत्ता बनाए रखते हुए शीघ्र ही विदेशी बाजार तक पहुंचेंगे।

    उल्लेखनीय है कि इस वर्ष 7 जून को ठियोग में एपीईडीए एवं एचपीएमसी द्वारा स्टोन फ्रूट उत्पादक किसानों के लिए एक संयुक्त कार्यशाला का आयोजन किया गया था। कार्यशाला में मध्य पूर्व एवं खाड़ी देशों के बाजारों में हिमाचल प्रदेश के स्टोन फ्रूट्स के निर्यात को बढ़ावा देने पर विस्तृत चर्चा हुई थी तथा प्रथम निर्यात खेप भेजने का निर्णय लिया गया था उसी निर्णय के अनुरूप आज यह पहली निर्यात खेप सफलतापूर्वक रवाना की गई। इस अवसर पर एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा, महाप्रबंधक सनी शर्मा तथा एपीईडीए के क्षेत्रीय अधिकारी हरप्रीत सिंह भी उपस्थित थे।

     

     

  • मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटना में छः लोगों के निधन पर शोक व्यक्त किया

    मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटना में छः लोगों के निधन पर शोक व्यक्त किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार सायं शिमला जिला के रामपुर के तहत तकलेच-काशापाट में हुई सड़क दुर्घटना में छः लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में प्रदेश सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता एवं राहत प्रदान की जाए। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

  • अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध और अवैध तस्करी निवारण दिवस को ‘एंटी-चिट्टा दिवस’ के रूप में आयोजित किया गया

    अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध और अवैध तस्करी निवारण दिवस को ‘एंटी-चिट्टा दिवस’ के रूप में आयोजित किया गया

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा 15 नवंबर, 2025 को आरम्भ किए गए ऐतिहासिक प्रदेशव्यापी ‘एंटी-चिट्टा जन-आंदोलन’ के अंतर्गत चिट्टा-मुक्त हिमाचल के संकल्प को धरातल पर पूरी तत्परता से लागू करने के लिए हिमाचल प्रदेश पुलिस बल निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए 26 जून को ‘अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध और अवैध तस्करी निवारण दिवस’ को सम्पूर्ण हिमाचल में ‘एंटी-चिट्टा दिवस’ के रूप में आयोजित किया गया। हिमाचल के इतिहास में यह पहला ऐसा अवसर है, जब संपूर्ण प्रदेश में एक साथ एक ही समय पर इतनी विशाल मात्रा में नशीले पदार्थों के वैज्ञानिक निस्तारण की कार्रवाई को मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत द्वारा फ्लैग ऑफ कर संचालित और मॉनिटर किया गया।

    इस अवसर पर प्रदेश सरकार और पुलिस प्रशासन द्वारा नशे के सौदागरों की रीढ़ तोड़ने के उद्देश्य से एक अभूतपूर्व एवं दूरगामी कार्रवाई अमल में लाई गई है। नशे के काले कारोबार के विरुद्ध प्रदेश सरकार की शून्य सहनशीलता की नीति को अपनाते हुए प्रदेशभर में 10 विभिन्न स्थानों पर एन.डी.पी.एस. अधिनियम के तहत दर्जनों मुकद्मों में भारी मात्रा में जब्त की गई मादक पदार्थों की केस प्रॉपर्टी (जब्तशुदा माल) को सामूहिक रूप से पूरी तरह नष्ट किया गया। प्रदेश भर में नष्ट किए गए इन मादक पदार्थों का कुल अनुमानित अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य लगभग 13.28 करोड़ रुपये आंका गया है।
    इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल प्रशासनिक तौर पर जब्त मादक पदार्थों का सुरक्षित निपटारा करना मात्र नहीं है, बल्कि नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त अंतरराज्यीय और स्थानीय ड्रग माफिया और असामाजिक तत्वों को यह स्पष्ट संदेश देना है कि हिमाचल प्रदेश में उनके काले साम्राज्य के खिलाफ एक निर्णायक कार्यवाही आरम्भ हो चुकी है।

    प्रदेश की होनहार युवा पीढ़ी को चिट्टा और अन्य सिंथेटिक ड्रग्स के दलदल से बचाकर उनके भविष्य को सुरक्षित बनाना इस आंदोलन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग, शैक्षणिक संस्थानों, पंचायतों और परिवारों को इस आंदोलन से जोड़कर एक सजग प्रहरी के रूप में खड़ा करना है। इस अवसर पर आज प्रदेश की सभी अत्यधिक प्रभावित पंचायतों में पंचायत प्रतिनिधियों एवं शासकीय अधिकारियों की उपस्थिति में नशा निवारण समितियों की बैठक का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य नशे के विरुद्ध प्रदेश सरकार की शून्य सहनशीलता की नीति को धरातल पर सख्ती से लागू करना है। प्रदेश के सभी सरकारी व गैर-सरकारी स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और शासकीय कार्यालयों में नशे के विरुद्ध एकजुट होकर लड़ने के लिए शपथ भी दिलाई गई।

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा समस्त प्रदेशवासियों से आह्वान किया गया कि चिट्टा अथवा अन्य किसी भी मादक पदार्थ की तस्करी, बिक्री, भंडारण अथवा सेवन से संबंधित कोई भी सूचना तत्काल 112 या निकटतम पुलिस थाना को दें। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी तथा प्राप्त प्रत्येक सूचना पर त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के कुशल एवं दूरदर्शी नेतृत्व, जनसहयोग तथा युवाओं की सक्रिय भागीदारी से हिमाचल प्रदेश पुलिस ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता, दृढ़ संकल्प एवं निरंतर कार्रवाई के साथ आगे बढ़ रही है।

  • मुख्यमंत्री ने पंजाब के राज्यपाल के समक्ष हिमाचल प्रदेश से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए

    मुख्यमंत्री ने पंजाब के राज्यपाल के समक्ष हिमाचल प्रदेश से जुड़े महत्त्वपूर्ण मुद्दे उठाए

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से शिष्टाचार भेंट की तथा हिमाचल प्रदेश के लंबित और अत्यंत महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने राज्यपाल से इन मामलों के शीघ्र एवं न्यायोचित समाधान के लिए सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ में हिमाचल प्रदेश के वैध 7.19 प्रतिशत हिस्से के दावे को पुनः दोहराया। उन्होंने कहा कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के प्रावधानों के अनुसार हिमाचल प्रदेश तत्कालीन अविभाजित पंजाब का उत्तराधिकारी राज्य है तथा राज्य को हस्तांतरित क्षेत्रों की जनसंख्या के अनुपात में चंडीगढ़ में हिस्सेदारी प्राप्त करने का अधिकार है।

    उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ का विकास अविभाजित पंजाब के संयुक्त संसाधनों से किया गया था। पिछले पांच दशकों से पंजाब और हरियाणा इस शहर की भूमि, परिसंपत्तियों और प्रशासनिक व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश अब तक अपने वैध अधिकार से वंचित है। उन्होंने आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश को चंडीगढ़ में उसका 7.19 प्रतिशत वैधानिक हिस्सा प्रदान किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ में एक अतिरिक्त हिमाचल सदन के निर्माण की आवश्यकता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कई दशक पहले निर्मित वर्तमान हिमाचल भवन अब राज्य के लोगों की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं है। हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों, मरीजों तथा अन्य नागरिकों के लिए उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं एवं प्रशासनिक कार्यों के लिए चण्डीगढ़ प्रमुख केंद्र है। विशेष रूप से पीजीआई चंडीगढ़ में प्रतिमाह उपचार के लिए बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के साथ विचार-विमर्श के उपरांत सेक्टर-52 में 4.736 एकड़ भूमि हिमाचल सदन के निर्माण के लिए चिन्हित की गई है।

    मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से संबंधित लंबे समय से लंबित देयों के शीघ्र निपटारे का विषय भी उठाया। इसके साथ ही शानन जलविद्युत परियोजना का मुद्दा भी राज्यपाल के समक्ष रखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शानन जलविद्युत परियोजना के संबंध में 99 वर्ष की लीज 2 मार्च, 2024 को समाप्त हो चुकी है। लीज की अवधि समाप्त होने के साथ ही लीज संबंधी सभी अधिकार स्वतः समाप्त हो गए हैं। ऐसे में समाप्त हो चुकी लीज के आधार पर परियोजना के संचालन, प्रबंधन अथवा कब्जे का कोई भी दावा विधिक दृष्टि से निराधार है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इन सभी लंबित मुद्दों का समाधान रचनात्मक संवाद, पारस्परिक सम्मान तथा सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप किया जा सकता है।

  • QR Code की सुविधा से खाद्यान्नों का वितरण किया जा रहा सुनिश्चित

    QR Code की सुविधा से खाद्यान्नों का वितरण किया जा रहा सुनिश्चित

    शिमला: खाद्य नागरिक, आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि आधार प्रमाणीकरण सेवाओं में तकनीकी कारणों से उत्पन्न व्यवधान के कारण ई-पास मशीनों के माध्यम से आधार आधारित राशन वितरण अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ है। इस संबंध में मामला संबंधित विभाग के साथ उठाया गया है तथा आधार प्रमाणीकरण सेवाओं को शीघ्र बहाल करने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।

    उन्होंने बताया कि पात्र लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए विभाग द्वारा अंतरिम व्यवस्था के रूप में ई-पास मशीनों में उपलब्ध क्यूआर कोड आधारित वितरण सुविधा को सक्रिय किया गया है इसलिए सभी पात्र लाभार्थियों से अनुरोध है कि वे अपनी निर्धारित उचित मूल्य की दुकानों से निर्धारित खाद्यान्न को पूर्व की भांति लेना सुनिश्चित करें।

     

  • मुख्यमंत्री ने नेरी कलां में 90.66 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास किए

    मुख्यमंत्री ने नेरी कलां में 90.66 करोड़ रुपये की 12 विकास परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास किए

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज सोलन जिला के कसौली विधानसभा क्षेत्र के नेरी कलां में 90.66 करोड़ रुपये लागत की 12 विकासात्मक परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास किए। मुख्यमंत्री ने 12.92 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शालाघाट-अर्की- कुनिहार-बरोटीवाला मार्ग पर गम्बर खड्ड पर 45 मीटर स्पैन के डबल लेन आर्च पुल, 3.42 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित बीडीओ कार्यालय भवन धर्मपुर तथा पीएम राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय प्रथा में 51 लाख रुपये की लागत से निर्मित विज्ञान भवन का उद्घाटन किया।

    उन्होंने दत्यार के समीप 20.83 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले कौशल्या बांध, 16.24 करोड़ रुपये की लागत से किम्मूघाट से चक्की का मोड़ सड़क के सुधार एवं सुदृढ़ीकरण, 6.33 करोड़ रुपये की लागत से जंगेशू से औडा वाया भनेट सड़क, 7.03 करोड़ रुपये की लागत से ग्रोणी से सरी सड़क वाया बोहरों के उन्नयन, 3.77 करोड़ रुपये की लागत से सुबाथू से ग्राम चपला, ग्राम पंचायत शडयाना सड़क पर शहीद सुदेश मार्ग की मेटलिंग एवं तारकोल बिछाने, 3.48 करोड़ रुपये की लागत से रेहला से मठान वाया शार्ड संपर्क मार्ग, 8.06 करोड़ रुपये की लागत से देवठी-बराह कून सड़क के सुधार एवं सुदृढ़ीकरण, 5 करोड़ रुपये की लागत से धर्मपुर-कसौली सड़क के उन्नयन तथा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-प्ट के अंतर्गत 3.08 करोड़ रुपये की लागत से नागली से चेवा सड़क के निर्माण/उन्नयन कार्यों के शिलान्यास किए।