Category: Government News>Himachal Govt

  • मुख्यमंत्री ने जोहड़जी-मल्ला सड़क के लिए 20 करोड़ रुपये की घोषणा

    मुख्यमंत्री ने जोहड़जी-मल्ला सड़क के लिए 20 करोड़ रुपये की घोषणा

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज सोलन जिला के कसौली विधानसभा क्षेत्र के नेरी कलां में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए जोहड़जी-मल्ला सड़क के लिए 20 करोड़ रुपये प्रदान करने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम में उपस्थित पांच ग्राम पंचायतों की पात्र महिलाओं को इंदिरा गांधी सुख सम्मान निधि के तहत 1500 रुपये पेंशन प्रदान करने, प्राथा विद्यालय को सीबीएसई से संबद्ध करने, जोगिंद्रा सहकारी बैंक की शाखा खोलने तथा चाटी ढांक में बांध निर्माण के लिए सर्वेक्षण करवाने की भी घोषणा की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के बाद उन्हें इस क्षेत्र में आने का अवसर मिला है। जिला परिषद सदस्य नेत्र अत्री के आग्रह पर वह क्षेत्र की समस्याओं को समझने और लोगों से संवाद करने के लिए यहां पहुंचे हैं। विधायक विनोद सुल्तानपुरी की सराहना करते हुए उन्हें जुझारू और युवा नेता बताया तथा कहा कि वे क्षेत्र की समस्याओं हल करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं।

    किशाऊ बांध परियोजना के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में प्रदेश के हितों को मजबूती से रखा। राज्य सरकार ने तीन वर्षों तक पुरानी शर्तों को स्वीकार नहीं किया और अब हिमाचल प्रदेश को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के 211 मेगावाट बिजली प्राप्त होगी, जिससे प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 600 करोड़ रुपये का लाभ होगा। केंद्र की मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित नई व्यवस्था हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है तथा इससे प्रदेश के लाखों श्रमिक प्रभावित हो सकते हैं। केंद्र सरकार ने मनरेगा की मूल भावना को समाप्त किया, आरडीजी को बंद कर दिया और फौज में नियमित भर्ती भी बंद कर दी, जिससे लोगों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।

    अगर हिमाचल प्रदेश की आरडीजी का 10 हजार करोड़ नहीं काटा होता, तो प्रदेश इसी वर्ष आत्मनिर्भर बन जाता लेकिन हम दृढ़ संकल्प के साथ हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे है। प्रदेश सरकार ग्रामीण विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं चला रही है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित हल्दी के लिए 150 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा गाय का दूध 61 रुपये तथा भैंस का दूध 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित मक्की 50 रुपये तथा गेहूं 80 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदी जा रही है। किसानों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया जा रहा है। राजीव गांधी वन संवर्धन योजना के तहत महिला मंडलों और युवक मंडलों को पौधरोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। वन विभाग पौधे उपलब्ध करवा रहा है तथा पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है।

    राज्य सरकार ने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा देकर देश का पहला ऐसा कानून बनाया है। 27 वर्ष की आयु तक उनकी शिक्षा, आवास, पालन-पोषण तथा अन्य आवश्यकताओं का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अतिरिक्त, इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के माध्यम से विधवा एवं एकल महिलाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च भी सरकार उठा रही है। डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को मात्र एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। यूको बैंक तथा हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक इस योजना के नोडल बैंक हैं।

    सुक्खू ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के दौरान शिक्षा की गुणवत्ता का स्तर गिरा और हिमाचल प्रदेश 21वें स्थान पर पहुंच गया था। वर्तमान सरकार के प्रयासों से प्रदेश अब पांचवें स्थान पर पहुंच चुका है। पिछली सरकार ने चुनावी लाभ के लिए लगभग 600 नए संस्थान खोल दिए थे, जबकि उनमें पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं करवाया गया था। वर्तमान सरकार ने पहले शिक्षकों की भर्ती सुनिश्चित की और अब तक लगभग 7000 शिक्षकों की नियुक्ति की जा चुकी है। प्रदेश में 150 सीबीएसई स्कूल शुरू किए गए हैं, जिनमें अंग्रेजी और गणित के शिक्षक तैनात किये चुके हैं। जुलाई माह तक और शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, जिससे इन विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि हिमाचल के स्वास्थ्य संस्थानों में वही आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हों, जो देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में थ्री टेस्ला एमआरआई और अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड मशीनें स्थापित की जा रही हैं। चमियाना, आईजीएमसी शिमला, नेरचौक मेडिकल कॉलेज और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू हो चुकी है और लगभग 200 मरीज इसका लाभ उठा चुके हैं।

    अगले दो महीनों के भीतर प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में ऑटोमेटेड लैब स्थापित कर दी जाएंगी। इसके साथ ही सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रतिष्ठित दवा कंपनियों की गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके। प्रदेश सरकार जनता के हितों के लिए कार्य कर रही है और विकास कार्यों में किसी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।

    विधायक कसौली विनोद सुल्तानपुरी ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रदेश की जनता से भरपूर प्रेम करते हैं और एक योद्धा की तरह प्रदेश की जनता के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दिल्ली तक प्रदेश के लोगों की आवाज पहुंचाई, जिससे हिमाचल को लाभ मिल रहा है। इतिहास में पहली बार किसी सरकार ने किसानों के बारे में सोचा और प्राकृतिक खेती के उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया, जिससे किसान लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य सरकार लोगों के कल्याण के लिए समुचित धनराशि उपलब्ध कर रही है।

    इस अवसर पर विधायक चौधरी राम कुमार, संजय अवस्थी तथा बावा हरदीप, पूर्व विधायक तिलक राज शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष वरमाणी, कांग्रेस नेता शिव कुमार, सुरेंद्र सेठी, एपीएमसी सोलन के अध्यक्ष रौशन ठाकुर, जोगिंद्रा सहकारी बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, उपायुक्त मनमोहन शर्मा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

     

  • हिमाचल के ग्रामीण विकास एवं राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने की अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस, किए अहम ऐलान

    हिमाचल के ग्रामीण विकास एवं राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने की अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस, किए अहम ऐलान

    शिमला: ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आज यहां एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की मूल भावना के विपरीत है। यह अधिनियम राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय एवं प्रशासनिक बोझ डालने के साथ-साथ उनकी वित्तीय स्वायत्तता को भी प्रभावित करेगा। इस कानून को तैयार करने से पहले राज्यों से वित्तीय दायित्व, मजदूरी दर, कार्यों की प्रकृति तथा रोजगार की मांग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कोई व्यापक परामर्श नहीं किया गया।

    मनरेगा एक मांग आधारित योजना थी, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक मांग के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराया जाता था तथा केंद्र और राज्य सरकारें अपनी-अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती थीं। वहीं प्रस्तावित विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत केंद्र सरकार वार्षिक मानक बजट आवंटन तक ही अपनी वित्तीय जिम्मेदारी सीमित करना चाहती है, जिससे अतिरिक्त वित्तीय बोझ सीधे राज्यों पर आएगा।

    ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि वर्तमान में केन्द्र सरकार द्वारा गैर जनजातीय क्षेत्रों के लिए 247 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित की गई है। प्रस्तावित विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत अब तक केन्द्र सरकार द्वारा मजदूरी दरों में किसी भी प्रकार की वृद्धि की अधिसूचना जारी नहीं की गई है। ऐसे में श्रमिकों के हित प्रभावित होने की संभावना है तथा राज्य सरकार पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी बना रहेगा।

    वर्तमान व्यवस्था में मजदूरी का 100 प्रतिशत व्यय केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है, जबकि प्रस्तावित अधिनियम के तहत मजदूरी व्यय में राज्य सरकारों को भी 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी देनी होगी। इसके अतिरिक्त प्रशासनिक व्यय, कर्मचारियों के वेतन तथा अन्य संचालन संबंधी खर्चों में भी राज्यों का योगदान बढ़ाया गया है, जिससे राज्यों की वित्तीय जिम्मेदारी पहले की तुलना में कहीं अधिक हो जाएगी।

    हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों की विशेष भौगोलिक परिस्थितियों, प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता, निर्माण कार्यों की अधिक लागत, बिखरी हुई ग्रामीण आबादी तथा सीमित रोजगार अवसरों को नए आवंटन फार्मूले में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। यदि वास्तविक मांग केंद्र द्वारा निर्धारित नार्मेटिव आवंटन से अधिक होती है तो अतिरिक्त व्यय का पूरा भार राज्य सरकार को वहन करना पड़ेगा, जिससे ग्रामीण रोजगार योजना के प्रभावी संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    नए अधिनियम में ग्राम पंचायतों पर विकास योजनाओं के विस्तृत निर्माण, जीआईएस आधारित योजना प्रणाली, पीएम गति शक्ति एवं विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के एकीकरण, बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जीपीएस आधारित निगरानी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित योजना निर्माण तथा डिजिटल अनुपालन जैसी नई जिम्मेदारियां भी डाली गई हैं। इससे प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ेंगी तथा विशेष रूप से हिमाचल जैसे दुर्गम राज्यों में योजना के क्रियान्वयन में अतिरिक्त चुनौतियां उत्पन्न होंगी।

    वर्तमान रोजगार स्तर के आधार पर हिमाचल प्रदेश की अनुमानित वित्तीय देनदारी 164.63 करोड़ रुपये हो जाएगी। यदि केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित वार्षिक आवंटन वास्तविक मांग से कम रहा तो अतिरिक्त व्यय पूरी तरह राज्य सरकार को उठाना पड़ेगा, जिससे प्रदेश पर हर वर्ष भारी वित्तीय बोझ पड़ने की आशंका है।

    अनिरूद्ध सिंह ने कहा कि आरडीजी बंद किए जाने से हिमाचल प्रदेश को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि जब हिमाचल प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में थी, तब केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश को लगभग 47,000 करोड़ रुपये आरडीजी प्राप्त हुई थी, जबकि वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में अब तक केवल लगभग 11,000 करोड़ रुपये आरडीजी प्राप्त हुई। केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026 में आरडीजी बंद कर दी जाएगी जिसके कारण प्रदेश सरकार पर 800 करोड़ से 1,000 करोड़ तक का वार्षिक अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह अंतर केंद्र सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। प्रदेश सरकार हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे को लगातार मजबूती से उठाती रहेगी और राज्य के अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

     

  • नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर शुरु हुआ जागरूकता कार्यक्रम

    नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर शुरु हुआ जागरूकता कार्यक्रम

    शिमला: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि विभाग द्वारा 26 जून, 2026 को शिमला के रिज पर प्रातः 10ः30 बजे नशीली दवाओं के दुरूपयोग और अवैध तस्करी के विरूद्ध अंतरराष्ट्रीय दिवस-2026 के उपलक्ष्य पर कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर वाकाथॉन एवं साइकिल रैली भी आयोजित की जाएगी।

    बचत भवन, शिमला में प्रातः 11 बजे केंद्र सरकार द्वारा ऑनलाइन आयोजित नशा मुक्त भारत अभियान के तहत राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया जाएगा। इस समारोह में 17 से 26 जून तक जिले में आयोजित जागरूकता रैलियों, साइकिल एवं बाइक रैलियों, योग एवं ध्यान सत्र, शपथ ग्रहण अभियान, पोस्टर, निबंध एवं स्लोगन प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम, हस्ताक्षर अभियान, वेबिनार, स्वास्थ्य एवं परामर्श शिविर तथा विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं पंचायत स्तर पर व्यापक रूप से जन-जागरूकता संबंधी गतिविधियों का समापन किया जाएगा। इस अवसर पर नशे के विरुद्ध शपथ ग्रहण तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाएगा।

  • प्रदेश सरकार पारदर्शी एवं प्रभावी जनसेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री

    प्रदेश सरकार पारदर्शी एवं प्रभावी जनसेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्धः मुख्यमंत्री

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभिन्न विभागों की परियोजनाओं एवं योजनाओं की निगरानी के लिए विकसित मुख्यमंत्री डैशबोर्ड की प्रगति की समीक्षा की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बागवानी विभाग के उन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की, जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म में शामिल किए जाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि अन्य विभाग भी अपने फ्लैगशिप कार्यक्रमों की पहचान करेंगे, जिन्हें आगामी समय में रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर लाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में वर्तमान राज्य सरकार ने आम लोगों के हित में अनेक पहलें शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड विभिन्न योजनाओं की प्रगति एवं क्रियान्वयन की निगरानी के लिए एक प्रभावी माध्यम सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सरकारी विभागों के कार्यों में आधुनिक तकनीक का व्यापक समावेश कर रही है, ताकि पारदर्शिता, कार्यकुशलता एवं सेवा प्रदायगी में सुधार हो तथा प्रदेश के लोगों को अधिक से अधिक लाभ सुनिश्चित किया जा सके। राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी, सचिव सी. पालरासु एवं आशीष सिंहमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

  • Sirmaur Police व Special Task Force ने 4.41 करोड़ रुपये संपत्ति जब्त की, Drug Syndicate पर कसा शिकंजा

    Sirmaur Police व Special Task Force ने 4.41 करोड़ रुपये संपत्ति जब्त की, Drug Syndicate पर कसा शिकंजा

    शिमला: हिमाचल प्रदेश पुलिस विभाग के एक प्रवक्ता ने यहां बताया कि नशा तस्करी पर व्यापक कार्रवाई करते हुए आज सिरमौर पुलिस एवं स्पेशल टास्क फोर्स ने नशा तस्कर महमूद अली तथा उसके ड्रग सिंडिकेट की लगभग 4.41 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की है। आरोपी द्वारा अर्जित संपत्तियों में 12 छोटे वाहन, एक ट्रक तथा तीन मकानों की पहचान कर उन्हें जब्त किया गया है। जब्त संपत्ति से संबंधित प्रकरण को विधिक कार्यवाही के लिए सक्षम प्राधिकारी नई दिल्ली को प्रेषित किया गया है, जहां संपत्ति की पुष्टि तथा स्थायी जब्ती की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

    प्रवक्ता ने बताया कि एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत की गई यह कार्रवाई नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। महमूद अली एवं उसके सहयोगियों के विरुद्ध हिमाचल प्रदेश और अन्य राज्यों में एनडीपीएस अधिनियम के कई अभियोग पंजीकृत हैं। स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा मुख्य आरोपी महमूद अली को वर्तमान में पीआईटी एनडीपीएस एक्ट के तहत मॉडर्न सेंट्रल जेल, नाहन में निरुद्ध किया गया है।

    उन्होंने बताया कि विस्तृत वित्तीय जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि महमूद अली, उसके परिजनों एवं सहयोगियों ने अफीम, चूरा पोस्त तथा अन्य मादक पदार्थों की अंतरराज्यीय तस्करी के माध्यम से भारी मात्रा में अवैध संपत्ति अर्जित की है। जांच में पाया गया कि पिछले छः वर्षों में आरोपियों की वैध आय मात्र 72,58,198 रुपये थी, जबकि उनके द्वारा अर्जित संपत्तियों का कुल मूल्य 4.41 करोड़ रुपये से अधिक है। आय और संपत्ति के बीच यह अत्यधिक अंतर स्पष्ट रूप से अवैध मादक पदार्थ व्यापार से अर्जित धन की ओर संकेत करता है।

    जांच में यह भी उजागर हुआ कि ड्रग सिंडिकेट द्वारा मैसर्स बुलबुल ट्रांसपोर्ट कंपनी तथा मैसर्स बुलबुल फ्रूट सप्लायर जैसी मुखौटा कंपनियों का उपयोग नशा तस्करी से अर्जित धन को वैध स्वरूप देने तथा अवैध गतिविधियों को छिपाने के लिए किया जा रहा था।

    इस समन्वित अभियान का उद्देश्य केवल नशा तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना ही नहीं, बल्कि अपराध से अर्जित अवैध संपत्तियों को जब्त कर नशा कारोबार के आर्थिक तंत्र को ध्वस्त करना तथा इसके मूल स्रोतों पर निर्णायक प्रहार करना भी है। प्रदेशवासी नशे से संबंधित किसी भी प्रकार की सूचना हिमाचल प्रदेश पुलिस को प्रदान करने क लिए 112 नम्बर पर सम्पर्क कर सकते हैं अथवा नजदीकी पुलिस थाना में सूचना दे सकते हैं। पुलिस द्वारा सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा 15 नवम्बर, 2025 को आरम्भ किए गए प्रदेशव्यापी एंटी-चिट्टा जन-आंदोलन के अंतर्गत ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल’ के संकल्प को पूर्ण करने की दिशा में स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा जिला पुलिस के साथ मिलकर निरंतर एवं प्रभावी अभियान चलाया जा रहा है।

  • शिमला में क्षेत्रीय निवेशक जागरूकता संगोष्ठी आयोजित

    शिमला में क्षेत्रीय निवेशक जागरूकता संगोष्ठी आयोजित

    शिमला: भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) तथा बीएसई इन्वेस्टर्स प्रोटेक्शन फंड (बीएसई-आईपीएफ) के संयुक्त तत्वावधान में आज हिमाचल प्रदेश राज्य सचिवालय, शिमला में रीजनल इन्वेस्टर सेमिनार फॉर अवेयरनेस (आरआईएसए) आयाजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य निवेशकों एवं सरकारी अधिकारियों में वित्तीय साक्षरता, सुरक्षित निवेश तथा पूंजी बाजार के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

    कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश सरकार के वित्त, योजना, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने बतौर मुख्यातिथि भाग लिया। प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए उन्होंने वित्तीय जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला तथा नागरिकों से विवेकपूर्ण एवं सुरक्षित निवेश अपनाने का आह्वान किया।

    इस अवसर पर सेबी के उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय के उप महाप्रबंधक मृदुल रस्तोगी ने मुख्य वक्ता के रूप में पूंजी बाजार, निवेशकों के अधिकारों तथा साइबर धोखाधड़ी से बचाव के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। कार्यक्रम में बीएसई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौरव कपूर ने निवेशकों के लिए उपलब्ध अवसरों एवं बाजार की पारदर्शिता पर अपने विचार व्यक्त किए।

    वित्तीय शिक्षा विशेषज्ञ मनजीत एस. ढिल्लों ने तकनीकी सत्र में प्रतिभागियों को निवेश के मूल सिद्धांत, जोखिम प्रबंधन तथा वित्तीय योजना से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान की। इस संगोष्ठी में हिमाचल प्रदेश सचिवालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

  • खेल युवाओं में अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करते हैं: CM Sukhu

    खेल युवाओं में अनुशासन और आत्मविश्वास विकसित करते हैं: CM Sukhu

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार देर सायं यहां ऐतिहासिक रिज पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रो-बॉक्सिंग चैंपियनशिप के समापन समारोह की अध्यक्षता की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस प्रतियोगिता का आयोजन पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की स्मृति में किया गया है। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता थे और प्रदेश के विकास में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है।

    स्वर्गीय वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रतियोगिता नवोदित खिलाड़ियों को खेलों के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगी। उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभागियों में अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को विकसित करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं का अनुभव मिलता है और उनके खेल कौशल में वृद्धि होती है।

    इस प्रतियोगिता में श्रीलंका, भारत, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय स्तर के मुक्केबाजों ने भाग लिया। इस अवसर पर लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह, विधायक हरीश जनारथा और हरदीप बावा, हिमुडा के उपाध्यक्ष यशवंत छाजटा, महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

  • हिमाचल प्रदेश में 28 जून को आयोजित होगा Plus Polio अभियान

    हिमाचल प्रदेश में 28 जून को आयोजित होगा Plus Polio अभियान

    शिमला: हिमाचल प्रदेश में 28 जून, 2026 को आयोजित किए जाने वाले पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों की समीक्षा के लिए आज यहां राज्य स्तरीय प्रतिरक्षण कार्यबल समिति की बैठक सचिव स्वास्थ्य एम. सुधा देवी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में अभियान के सफल एवं प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विभिन्न विभागों की भूमिका एवं दायित्वों पर विस्तृत चर्चा की गई।

    बैठक में बताया गया कि अभियान के लिए आवश्यक पोलियो वैक्सीन की आपूर्ति प्रदेश के सभी जिलों को कर दी गई है तथा अभियान के सफल संचालन के लिए अन्य सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। स्वास्थ्य सचिव ने अभियान को सफल बनाने के लिए विभिन्न विभागों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने पात्र बच्चों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध करवाने, बच्चों की अधिकतम संख्या में भागीदारी सुनिश्चित करने, बूथ गतिविधियों के प्रभावी संचालन, घर-घर जाकर जागरूकता एवं सत्यापन कार्य तथा समुचित पर्यवेक्षण एवं निगरानी पर विशेष बल देने के निर्देश दिए।

    बैठक में औद्योगिक इकाइयों को भी अपने कर्मचारियों एवं श्रमिकों को पल्स पोलियो अभियान तथा बूथ दिवस की जानकारी देने के निर्देश जारी करने पर बल दिया गया, ताकि कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे। इसके अतिरिक्त, अभियान को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान करने के लिए महिला मंडलों, स्थानीय संस्थाओं तथा समर्पित क्षेत्रीय कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।

    बैठक के दौरान अवगत करवाया गया कि भारत में वाइल्ड पोलियो वायरस का अंतिम मामला वर्ष 2011 में दर्ज किया गया था। हिमाचल प्रदेश में वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप-3 (पी-3) का अंतिम मामला वर्ष 2009 में सोलन ज़िला में तथा वाइल्ड पोलियो वायरस टाइप-1 (पी-1) का अंतिम मामला वर्ष 2006 में कुल्लू ज़िला में दर्ज किया गया था।

    स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि पोलियो उन्मूलन की उपलब्धि को बनाए रखने के लिए सतत सतर्कता और उच्च प्रतिरक्षण कवरेज अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी विभागों से समन्वित प्रयासों के माध्यम से अभियान को सफल बनाने तथा प्रत्येक पात्र बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाने का आह्वान किया। बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के उप-मिशन निदेशक डॉ. राजेश गुलेरिया, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी, निदेशक चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान डॉ. राकेश शर्मा और विभिन्न विभागों के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • प्रदेश के 12 लाख मजदूरों के हित में नहीं VB-Ram Ji योजना, Central Government करेगी केंद्र से मजबूती से पैरवी

    प्रदेश के 12 लाख मजदूरों के हित में नहीं VB-Ram Ji योजना, Central Government करेगी केंद्र से मजबूती से पैरवी

    शिमला: मनरेगा के स्थान पर वीबी-जीराम-जी योजना शुरु होने से हिमाचल प्रदेश के लगभग 12 लाख मजदूरों को बड़ा झटका लग सकता है। केंद्र सरकार ने मनरेगा के स्थान पर वीबी-जीराम-जी योजना लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और सभी राज्यों को 30 जून तक नई योजना को अधिसूचित करने के निर्देश दिए हैं। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि नई योजना को अधिसूचित करने वाले राज्यों को ही बजट आवंटित किया जाएगा। हालांकि, हिमाचल प्रदेश सरकार का मानना है कि वर्तमान स्वरूप में इस योजना के कई प्रावधान राज्य और यहां के श्रमिकों के हितों के अनुरूप नहीं हैं।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को केंद्र सरकार के समक्ष राज्य का पक्ष मजबूती से रखने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश के लाखों ग्रामीण श्रमिकों की आजीविका से जुड़े किसी भी मुद्दे पर राज्य सरकार कोई समझौता नहीं करेगी। योजना के प्रावधानों के तहत फिलहाल हिमाचल प्रदेश के गैर-जनजातीय क्षेत्रों में मजदूरी दर 247 रुपये तथा जनजातीय क्षेत्रों में 309 रुपये निर्धारित है। राज्य सरकार का मानना है कि प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों, महंगाई और जीवन-यापन की लागत को देखते हुए यह मजदूरी दर पर्याप्त नहीं है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को केंद्र सरकार से मजदूरी दर में उचित वृद्धि की मांग करने के निर्देश दिए हैं।

    रोजगार गारंटी योजना का मूल स्वरूप ‘डिमांड आधारित’ ही रहना चाहिए, जैसा कि मनरेगा में था। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था किसी निर्धारित सीमा से नहीं बंधनी चाहिए और जरूरत के अनुसार कार्य उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए। वर्ष 2024-25 में हिमाचल प्रदेश में मनरेगा के तहत लगभग 395 लाख मानव दिवस (मैन-डे) सृजित किए गए थे। जबकि वर्ष 2025-26 में भारत सरकार ने हिमाचल प्रदेश को 250 लाख मानव दिवस का लक्ष्य ही आवंटित किया। वीबी-जीराम-जी योजना के प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार प्रदेश को मिलने वाले मानव दिवस और अधिक सीमित हो जाएंगे। राज्य सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और लाखों श्रमिकों की आय प्रभावित हो सकती है। इस विषय को भी केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से उठाया जाएगा।

    इसके अतिरिक्त वर्तमान में मनरेगा की विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत 1194 कर्मचारी स्कीम आधारित, अनुबंध अथवा आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं। नई व्यवस्था में इन कर्मचारियों के भविष्य और वेतन भुगतान को लेकर भी अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वीबी-जीराम-जी के तहत केंद्र सरकार से मिलने वाला धन सीमित होगा और एसएनए-स्पर्श मोड में आएगा, न कि राज्य सरकार की ट्रेजरी में, जिससे स्कीम के कर्मचारियों को वेतन मिलने में भी दिक्कत आ सकती है। राज्य सरकार इस मामले को भी केंद्र सरकार के साथ उठाएगी और यह पैसा एडवांस में मांगेगी, ताकि वेतन भुगतान में किसी प्रकार की बाधा न आए। इन कर्मचारियों के लिए नई योजना के तहत ही सेवा शर्तें लागू होंगी।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वीबी-जीराम-जी योजना के सभी पहलुओं का विस्तृत अध्ययन करने तथा प्रदेश के हितों के अनुरूप सुझाव तैयार करने के लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। समिति में पंचायती राज विभाग के सचिव सी. पालरासू तथा निदेशक राघव शर्मा भी सदस्य होंगे। यह समिति 29 जून तक अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगी, जिसके आधार पर राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश में वीबी-जीराम-जी योजना को लागू करने पर फैसला करेगी।

  • प्रदेश में 140 करोड़ की 45 योजनाएं हुई क्रियाशील

    प्रदेश में 140 करोड़ की 45 योजनाएं हुई क्रियाशील

    शिमला: जल शक्ति विभाग के सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने सोमवार देर सायं पेयजल एवं सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि विभाग का लक्ष्य हर घर और खेत तक प्राथमिकता के आधार पर जल आपूर्ति सुनिश्चित करना है। विभाग के सतत् प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश में 66.52 करोड़ रुपये व्यय कर 134 योजनाओं में बिजली आपूर्ति एवं उपकरणों संबंधी कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, राज्य में लगभग 140 करोड़ रुपये व्यय कर 45 योजनाओं को क्रियाशील किया गया है। इन योजनाओं के क्रियाशील होने से प्रदेश की बड़ी आबादी सीधे तौर पर लाभान्वित होगी और अन्य 89 योजनाओं जिनमें बिजली आपूर्ति की गई है को भी 10 दिन में क्रियाशील कर दिया जाएगा।

    उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के दिशा-निर्देशों के अनुरूप विभाग पेजयल एवं सिंचाई योजनाओं के सफल संचालन की दिशा में कार्य कर रहा है। विभाग जल प्रबन्धन को मजबूत करने के लिए नवाचार और प्रौद्योगिकी आधारित रणनीति को केन्द्र में रखकर कार्य कर रहा है। विभाग द्वारा प्रस्तुत उपयोगिता प्रमाण पत्रों की संख्या में भी 201 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। राज्य में 119 करोड़ रुपये की 388 योजनाओं के उपयोगिता प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं। विभाग के प्रभावी वित्तीय प्रबन्धन, समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन के फलस्वरूप राज्य में अब लम्बित योजनाओं की प्रतिशतता 54.25 प्रतिशत कम हो गई है।

    डॉ. जैन ने कहा कि प्रदेश में निष्क्रिय पड़ी योजनाओं को शुरू करने के लिए रूपरेखा तैयार की गई है। आगामी चार माह में 62 योजनाओं को क्रियाशील किया जाएगा। इनमें जून में 30, जुलाई में 13, अगस्त में 10 और सितम्बर में 9 योजनाओं को क्रियाशील करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, लम्बित योजनाओं को चालू करने के लिए विभाग द्वारा बिजली बोर्ड को 48.89 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

    सचिव जल शक्ति ने कहा कि विभाग के अधिकारियों को हिमाचल प्रदेश राज्य बोर्ड के साथ निरन्तर समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। हर 15 दिनों में विभिन्न पेजयल एवं सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जा रही है। बैठक में प्रमुख अभियन्ता अंजू शर्मा, विद्युत बोर्ड के प्रबन्ध निदेशक आदित्य नेगी, मुख्य अभियन्ता राकेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।