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  • भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग सशक्त और तकनीक आधारित कार्य प्रणाली अपनाएः मुख्यमंत्री

    भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग सशक्त और तकनीक आधारित कार्य प्रणाली अपनाएः मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां ‘लोक निर्माण विभागों में गुणवत्ता आश्वासन’ विषय पर आयोजित उत्तर क्षेत्रीय अंतर-राज्यीय संवाद सत्र की अध्यक्षता की। इस संवाद सत्र में हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों और अभियंताओं ने भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने भविष्य की चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए लोक निर्माण विभाग में व्यापक सुधारों की शुरुआत की है। पिछले तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश ने कई प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया है। इन आपदाओं के दौरान लोक निर्माण विभाग की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही है।

    उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के प्रतिकूल प्रभाव हिमाचल प्रदेश में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं और भविष्य में अन्य राज्यों को भी इनका सामना करना पड़ सकता है। राज्य का लगभग 90 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र पहाड़ी है और यहां सड़क संपर्क सुविधा लोगों की मूलभूत आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि विभाग को अब सुरंग निर्माण और बहुमंजिला भवनों जैसी उन्नत एवं दक्ष अधोसंरचना के विकास की दिशा में आगे बढ़ना होगा। नई तकनीकों और कार्य प्रणालियों को अपनाने में शुरूआत में चुनौतियां आ सकती हैं लेकिन सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए इन प्रणालियों को अपनाना बहुत जरूरी है।

    सुक्खू ने कहा कि आने वाले वर्षों में आपदाओं के कारण क्षतिग्रस्त अवसंरचना का पुनर्निर्माण सबसे बड़ी चुनौतियों में एक होगा। वर्तमान में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग चार प्रतिशत आपदा पुनर्निर्माण पर खर्च किया जा रहा है और वर्ष 2050 तक यह व्यय बढ़कर 14 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। इस स्थिति में आधुनिक तकनीकें अपनाने और विभाग की क्षमताओं का विस्तार करना अत्यंत आवश्यक है। लोक निर्माण विभाग को अपने पारंपरिक कार्यक्षेत्र एवं कार्य प्रणाली से आगे बढ़कर उभरते क्षेत्रों में भी अवसर तलाशने चाहिए। उन्होंने कहा कि विभाग बांध निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में विभाग के कार्यक्षेत्र को विस्तार देने पर विचार करेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘क्वालिटी कंट्रोल फॉर रोड वर्क्स’ नामक पुस्तक का विमोचन भी किया।

    लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि क्षमता निर्माण और आधुनिक तकनीकों को अपनाना वर्तमान समय की मांग है। उन्होंने कहा कि संवाद सत्र अभियंताओं को नवीन तकनीकों और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों की जानकारी उपलब्ध करवाने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। ग्लोबल वार्मिंग से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पूरे उत्तर भारत में नई कार्यप्रणालियों और नवाचार आधारित समाधानों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में सतत विकास की दृष्टि से कार्य करना अनिवार्यता है।

    लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 45,000 किलोमीटर लंबी सड़कों का जाल बिछा हुआ है और राज्य की अधिकांश पंचायतें अब सड़कों की सुविधा से जुड़ चुकी हैं। इसके दृष्टिगत प्रदेश में विशाल अवसंरचना का नियमित रख-रखाव एक बड़ी चुनौती है। इसके समाधान के लिए राज्य सरकार ने नई ड्रेनेज नीति तैयार की है, जिसका उद्देश्य सड़कों के रख-रखाव और उनकी आयु बढ़ाने में सुधार करना है।

  • मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से Green Hydrogen क्षेत्र में शोध करने का किया आह्वान

    मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से Green Hydrogen क्षेत्र में शोध करने का किया आह्वान

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू), शिमला में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास किए। उन्होंने 10.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मल्टी फैकल्टी भवन का उद्घाटन किया। इस भवन में तीन शैक्षणिक मंजिलें, कंप्यूटर-कम-सीबीटी लैब तथा पार्किंग सुविधा उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री ने नवनिर्मित सीबीटी लैब का भी उद्घाटन किया। यह सुविधा शिक्षण क्षमता बढ़ाने और डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    मुख्यमंत्री ने 8.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए अकादमिक ब्लॉक का शिलान्यास भी किया। यह पांच मंजिला भवन होगा, जिसमें पार्किंग, नई कक्षाएं और बढ़ती छात्र संख्या के अनुरूप अतिरिक्त शैक्षणिक स्थान उपलब्ध करवाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की समीक्षा भी की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय को सशक्त बनाने के लिए हर संभव सहयोग प्रदान कर रही है तथा इसके विकास के लिए प्रतिवर्ष 150 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान कर रही है। इन पहलों से विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, डिजिटल बदलाव और शैक्षणिक उत्कृष्टता को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि वह स्वयं हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं और विगत वर्षों में यहां काफी सकारात्मक बदलाव आए है। छात्रों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान की आवश्यकता पर बल दिया।

    सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इसी दिशा में सोलन जिले के नालागढ़ में हिमाचल प्रदेश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना स्थापित की जा रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय से ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में शोध करने का आग्रह करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में राज्य के लिए अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

    हिमाचल प्रदेश, देश को लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है। लेकिन 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद किए जाने से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 8,000 से 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। प्रदेश सरकार के प्रयासों से हिमाचल इस चुनौती का दृढ़ता से सामना करेगा और अग्रणी राज्य बनकर उभरेगा।

    राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है और राज्यहित में उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार, हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से कई परिवर्तनकारी कदम उठा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कंप्यूटर-कम-सीबीटी लैब के माध्यम से शिमला जिले के युवाओं को विभिन्न परीक्षाओं के कंप्यूटर आधारित टेस्ट हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में ही देने की सुविधा मिलेगी। इससे पहले उन्हें ऐसी परीक्षाओं के लिए अन्य जिलों में जाना पड़ता था। इस सीबीटी लैब में लगभग 250 युवा एक साथ इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    विधायक हरिश जनारथा, सुरेश कुमार, संजय अवस्थी, विवेक शर्मा, महापौर नगर निगम शिमला सुरेंद्र चौहान, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति महावीर सिंह और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

  • प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध: डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल

    प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध: डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल

    शिमला: स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने आज यहां ब्लाइंड पर्सन्स एसोसिएशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड्स के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में दिव्यांगजनों के कल्याण से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने 100 प्रतिशत दिव्यांगता वाले दिव्यांगजनों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 1,700 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रतिमाह करने का निर्णय लिया है। इस वृद्धि से प्रदेश के लगभग 7,000 दिव्यांगजन लाभान्वित होंगे।

    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि वर्तमान में विभिन्न विभागों में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लगभग 311 पद रिक्त हैं, जिनमें से 174 पदों पर भर्ती प्रक्रिया अंतिम चरण में है। भर्ती के अंतर्गत शिक्षा विभाग में 41 पद, पशुपालन विभाग में 13 पद, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में 4 पद तथा शेष पद अन्य विभागों में शामिल हैं।

    डॉ. शांडिल ने कहा कि हिम बस कार्ड के माध्यम से परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा, दृष्टिबाधित कर्मचारियों के लिए कौशल प्रशिक्षण, राज्य में दिव्यांगजनों के लिए स्वतंत्र राज्य आयुक्त की नियुक्ति, सहारा पेंशन योजना से जुड़े मुद्दों तथा मंडी जिले के सुंदरनगर और शिमला जिले के ढली में संचालित दिव्यांगजनों के विशेष विद्यालयों से संबंधित विषयों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने ब्लाइंड पर्सन्स एसोसिएशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड्स के प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों के कल्याण से जुड़े सभी मुद्दों और चिंताओं के प्रति संवेदनशील है।

    डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश के युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करने की दिशा में कार्य कर रही है, जिसका लाभ दिव्यांग व्यक्तियों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि वह स्वयं ब्लाइंड पर्सन्स एसोसिएशन और नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड्स के कार्यालय के लिए स्थान उपलब्ध कराने के विषय को संबंधित प्राधिकारियों के समक्ष उठाएंगे। बैठक में ईसोमसा के निदेशक सुमित खिमटा, अतिरिक्त निदेशक डॉ. भावना, ब्लाइंड पर्सन्स एसोसिएशन के अध्यक्ष शोभू राम और उपाध्यक्ष शिशु पाल मेहता, नेशनल फेडरेशन ऑफ ब्लाइंड्स के विभिन्न प्रतिनिधि तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

  • NEET-2026 अभ्यर्थियों को एचआरटीसी प्रदान करेगी निःशुल्क बस यात्रा सुविधा

    NEET-2026 अभ्यर्थियों को एचआरटीसी प्रदान करेगी निःशुल्क बस यात्रा सुविधा

    शिमला: हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि 21 जून, 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-2026) में भाग लेने वाले सभी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने तथा इसके उपरांत अपने घर लौटने के लिए एचआरटीसी की साधारण बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान की जाएगी।

    प्रवक्ता ने कहा कि यह निर्णय राष्ट्रीय स्तर की इस परीक्षा में भाग लेने वाले विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। अभ्यर्थी अपने ‘नीट-2026 प्रवेश पत्र’ को पहचान पत्र, निवास स्थान तथा परीक्षा केंद्र के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत कर इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।

    उन्होंने बताया कि यह सुविधा अभ्यर्थी के निवास स्थान से परीक्षा केंद्र तक ‘एक बार आने तथा एक बार वापस लौटने’ की यात्रा के लिए उपलब्ध होगी। यह रियायत ‘20 जून से 22 जून, 2026 (दोनों दिन)’ तक मान्य रहेगी। प्रवक्ता ने बताया कि निःशुल्क यात्रा सुविधा केवल एचआरटीसी की ‘साधारण बसों’ में ही उपलब्ध होगी। सुविधा के दुरुपयोग को रोकने के लिए बस परिचालकों को रियायत के अंतर्गत की गई यात्राओं का आवश्यक विवरण अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र पर अंकित करने के निर्देश दिए गए है।

    एचआरटीसी के सभी इकाई अधिकारियों को इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा रियायत का लाभ उठाने वाले विद्यार्थियों का समुचित रिकॉर्ड बनाए रखने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रवक्ता ने कहा कि इस पहल का उददेश्य नीट अभ्यर्थियों को राहत प्रदान करना तथा परीक्षा के लिए उनकी यात्रा को सुगम एवं सुरक्षित बनाना है।

     

  • सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को दिया जाएगा नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंसः मुख्यमंत्री

    सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को दिया जाएगा नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंसः मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए राज्य सरकार सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सकों को नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री गत सांय स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है और स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में स्वास्थ्य अवसंरचना और सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।

    सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य सुधारों को लेकर सरकार ने चिकित्सकों के साथ विस्तृत चर्चा की है। आने वाले महीनों में वह स्वयं विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों का दौरा करेंगे और चिकित्सकों से संवाद कर स्वास्थ्य क्षेत्र के सुदृढ़ीकरण और आधुनिकीकरण की रूपरेखा तैयार करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों को पर्याप्त स्टाफ और अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाकर उन्हें एम्स, नई दिल्ली के स्तर का बनाया जा रहा है। राज्य सरकार आधुनिक चिकित्सा मशीनरी और उपकरणों की खरीद पर लगभग 3,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन जिलों में मेडिकल कॉलेज नहीं हैं, वहां के क्षेत्रीय और जोनल अस्पतालों की सुविधाओं को भी उन्नत किया जा रहा है ताकि मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की कमी को दूर करने के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है। उन्होंने बताया कि सरकार के प्रयासों से पहली बार प्रदेश में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। पहले इस तरह की उन्नत चिकित्सा सुविधा प्राप्त करने के लिए लोगों को हिमाचल प्रदेश से बाहर जाना पड़ता था और काफी खर्च वहन करना पड़ता था।

    सुक्खू ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों का वर्गीकरण जनसंख्या के आधार पर किया जाए ताकि वास्तविक आवश्यकता के अनुसार स्टाफ और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। इससे लोगों को उनके घरों के निकट ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग में चल रही विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं की स्थिति की भी समीक्षा की।

    बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, विशेष सचिव डॉ. अश्विनी कुमार शर्मा, जितेंद्र सांजटा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रबंध निदेशक प्रदीप ठाकुर, हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक दिव्यांशु सिंगल तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • चिट्टा-मुक्त हिमाचल के संकल्प को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न जिलों में चलाया गया अभियान

    चिट्टा-मुक्त हिमाचल के संकल्प को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न जिलों में चलाया गया अभियान

    शिमला: माननीय मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश द्वारा 15 नवंबर 2025 को प्रारंभ किए गए प्रदेशव्यापी एंटी-चिट्टा जन-आंदोलन के अंतर्गत “चिट्टा-मुक्त हिमाचल” के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा जिला मंडी एवं ऊना में सघन नाकाबंदी एवं चेकिंग अभियान चलाया गया।

    दिनांक 18.06.2026 को स्पेशल टास्क फोर्स की टीम द्वारा बिंद्राबनी फोरलेन, जिला मंडी में नाका लगाकर वाहनों की नियमित चेकिंग की जा रही थी। चेकिंग के दौरान एक कार को रोककर तलाशी ली गई, तलाशी के दौरान वाहन के भीतर विशेष रूप से छिपाकर रखी गई 4.859 किलोग्राम चरस बरामद की गई। यह बरामदगी वाहन में सवार दो व्यक्तियों के कब्जे से हुई। आरोपियों को तत्काल हिरासत में लेकर उनके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई। इस संबंध में पुलिस थाना सदर मंडी में एन.डी.पी.एस. अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया तथा मामले की आगामी जांच जारी है।

    दिनांक 17.06.2026 को स्पेशल टास्क फोर्स की टीम द्वारा गाँव बेहड़ाला, तहसील मेहतपुर, जिला ऊना में नाका लगाकर वाहनों की नियमित चेकिंग की जा रही थी। चेकिंग के दौरान एक सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार को रोककर तलाशी ली गई, जिसमें एक व्यक्ति के कब्जे से 25.03 किलोग्राम पोस्त भूसा (डोडा अफीम) बरामद की गई। आरोपी के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई। इस संबंध में पुलिस थाना सदर ऊना में एन.डी.पी.एस. अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया तथा मामले की आगामी जांच जारी है।

    इस समन्वित कार्रवाई का उद्देश्य न केवल नशा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाना है, बल्कि युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना तथा समाज में व्यापक जन-जागरूकता को बढ़ावा देना भी है। हिमाचल प्रदेश पुलिस नागरिकों, विशेषकर युवाओं से मुख्यमंत्री द्वारा की गई अपील को दोहराती है कि वे चिट्टा/नशे से संबंधित किसी भी सूचना को तुरंत 112 या नजदीकी पुलिस थाना में दें। सूचना देने वालों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी। माननीय मुख्यमंत्री के सशक्त नेतृत्व और युवाओं की सहभागिता से हिमाचल पुलिस प्रदेश में चिट्टा का खात्मा करने को दृढ़ संकल्प है।

     

     

  • मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मनोरंजन केंद्र का लोकार्पण किया

    मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और मनोरंजन केंद्र का लोकार्पण किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जिला कांगड़ा के धर्मशाला स्थित जिला आयुर्वेदिक अस्पताल परिसर में निर्मित होने वाले 50 बिस्तरों की क्षमता वाले एकीकृत आयुष अस्पताल का शिलान्यास किया। राज्य सरकार आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ आयुष चिकित्सा पद्धतियों का समन्वय कर समग्र एवं एकीकृत स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस नए अस्पताल के निर्माण से क्षेत्र में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूती मिलेगी तथा लोगों को आयुष चिकित्सा पद्धतियों से युक्त एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं अधिक सुगमता से उपलब्ध हो सकेंगी।

    इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने धर्मशाला के चरान में स्मार्ट सिटी लिमिटेड (डीएससीएल) द्वारा 7.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित शॉपिंग कॉम्प्लेक्स एवं मनोरंजन केंद्र का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से स्थानीय लोगों को ख़रीदारी, मनोरंजन तथा दैनिक उपयोग से जुड़ी अन्य आवश्यक सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी, जिससे उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इससे लोगों के समय और धन दोनों की बचत होगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इस केंद्र के आरम्भ होने से क्षेत्र में लोगों की आवाजाही बढ़ेगी, जिससे आसपास के दुकानदारों एवं लघु उद्यमियों के लिए व्यापार एवं आय के नए अवसर सृजित होंगे और उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इस अवसर पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक किशोरी लाल, मलेंद्र राजन तथा कमलेश ठाकुर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

  • जनजातीय क्षेत्रों में यौन संचारित रोगों पर शोध रिपोर्ट जारी

    जनजातीय क्षेत्रों में यौन संचारित रोगों पर शोध रिपोर्ट जारी

    शिमला: जनजातीय विकास विभाग द्वारा हिमाचल प्रदेश की जनजातीय जनसंख्या में यौन संचारित रोगों की व्यापकता, जोखिम कारकों एवं उपचार-खोज व्यवहार विषयक शोध अध्ययन की रिपोर्ट जारी की गई है। इस रिपोर्ट को अतिरिक्त मुख्य सचिव जनजातीय विकास ओंकार चंद शर्मा ने जारी किया। यह रिपोर्ट जनजातीय विकास विभाग द्वारा आईजीएमसी शिमला के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के सहयोग से तैयार की गई है।

    जिला चंबा, किन्नौर एवं लाहौल-स्पीति के 3,000 प्रतिभागियों पर आधारित इस अध्ययन में जनजातीय क्षेत्रों में यौन संचारित रोगों से संबंधित लक्षणों, जागरूकता, जोखिम कारकों एवं उपचार प्राप्त करने के व्यवहार का आकलन किया गया है। अध्ययन में जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच एवं उपचार सुनिश्चित करने तथा दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

    ओंकार चंद शर्मा ने कहा कि अध्ययन के निष्कर्ष जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में प्रस्तुत महत्वपूर्ण निष्कर्षों एवं सिफारिशों पर समयबद्ध उचित कार्यवाही की जाएगी। इस अवसर पर संयुक्त सचिव जनजातीय विकास डॉ. विक्रम सिंह नेगी, अनुसंधान अधिकारी डॉ. रूपल सूद, प्रधान अन्वेषक प्रो. (डॉ.) अनमोल गुप्ता, सहायक प्रो. डॉ. अमित सचदेवा तथा जूनियर रेजिडेंट डॉ. अर्चित शर्मा भी उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटना में सात लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया

    मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटना में सात लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने चंबा जिले की मसरूंड-हमल सड़क पर छतरुंड के निकट गत रात्रि हुई सड़क दुर्घटना में सात लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने शोक-संतप्त परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है।

    उन्होंने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की तथा शोकाकुल परिवारों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

  • Maharana Pratap का साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति आज भी कर रहे हैं पीढ़ियों को प्रेरितः CM Saini

    Maharana Pratap का साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति आज भी कर रहे हैं पीढ़ियों को प्रेरितः CM Saini

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जिला कांगड़ा के महाराणा प्रताप इंटरनेशनल पब्लिक स्कूल, पठियार में इंडोर स्टेडियम के निर्माण के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें त्याग, स्वाभिमान, स्वतंत्रता और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक बताया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया तथा स्मृति-चिन्ह (स्मारिका) का विमोचन भी किया।

    कांगड़ा जिला के धर्मगिरि पठियार में महाराणा प्रताप की 487वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक निर्भीक योद्धा ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता भी थे, जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया। उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि यह युद्ध आज भी साहस, बलिदान तथा स्वतंत्रता एवं सम्मान के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बना हुआ है।

    मुख्यमंत्री ने युवाओं से महाराणा प्रताप के आदर्शों का अनुसरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि वे त्याग, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को अपनाकर राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव को मजबूत बनाने में अपना योगदान दें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, ग्रामीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास तथा पर्यावरण संरक्षण के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    उन्होंने प्रदेश की समृद्ध देशभक्ति की परंपरा का उल्लेख करते हुए मेजर सोमनाथ शर्मा, कर्नल डी.एस. थापा, कैप्टन विक्रम बत्रा तथा सूबेदार मेजर संजय कुमार जैसे वीर सैनिकों के बलिदान को स्मरण किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जुब्बल के फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शवीर सिंह ठाकुर द्वारा प्रदर्शित अद्वितीय साहस की भी सराहना की।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के हितों की रक्षा और राज्य की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार के सतत् प्रयासों से 422 मेगावाट क्षमता वाली किशाऊ बांध परियोजना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। भारत सरकार ने परियोजना से लाभान्वित होने वाले राज्यों द्वारा हिमाचल प्रदेश के विद्युत् घटक पर होने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत को वहन करने पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है, जिससे राज्य पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम होगा। उन्होंने कहा कि परियोजना पूर्ण होने पर राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली प्राप्त होगी, जिससे करीब 600 करोड़ रुपये का वार्षिक राजस्व अर्जित होने की संभावना है।

    सरकार ने पिछले अढ़ाई वर्षों के दौरान विवेकपूर्ण वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की है तथा केंद्र सरकार के समक्ष राज्य के वैध अधिकारों की मजबूती से पैरवी की है। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रीन बोनस और 110 मेगावाट क्षमता वाली शानन विद्युत् परियोजना को पुनः प्राप्त करने तथा भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से राज्य के लंबित बकाये की वसूली के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से राज्य के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया, जो राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में कमी तथा जीएसटी व्यवस्था से उत्पन्न राजस्व हानि का आकलन कर सके।

    उन्होंने कड़छम-वांगतू जलविद्युत् परियोजना की रॉयल्टी संबंधी मामले में उच्चतम न्यायालय के हिमाचल प्रदेश के पक्ष में आए निर्णय का भी उल्लेख किया, जिससे राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी। इसके अतिरिक्त उन्होंने वाइल्ड फ्लावर हॉल होटल मामले के सफल समाधान का भी जिक्र किया, जिससे राज्य को प्रतिवर्ष 20 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हो रहा है।

    शिक्षा क्षेत्र में हो रहे सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने शत-प्रतिशत साक्षरता हासिल कर देश में अग्रणी स्थान प्राप्त किया है तथा राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण में शीर्ष पांच राज्यों में अपना स्थान बनाया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा आरंभ की है, राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं, चयनित सरकारी विद्यालयों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू किया गया है, 5,400 से अधिक शिक्षकों की भर्ती तथा विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु व्यावसायिक एवं कौशल आधारित शिक्षा का विस्तार किया है।

    सुक्खू ने कहा कि युवाओं को स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने और ई-मोबिलिटी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 680 करोड़ रुपये की राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत ई-टैक्सियों की खरीद पर 50 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा रही है, जिससे युवाओं को सुनिश्चित आय के अवसर उपलब्ध हो रहे है। इसके अतिरिक्त निजी भूमि पर सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए ब्याज अनुदान तथा प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने हेतु प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि 500 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाएं तथा ग्रीन पंचायत कार्यक्रम राज्य में सतत् आजीविका और रोजगार के नए अवसर सृजित करेंगे।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की प्राथमिकताओं को इंगित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा अधोसंरचना के आधुनिकीकरण और संस्थानों में नई मशीनें स्थापित करने के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा आरंभ की गई है, जिससे लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रदेश से बाहर नहीं जाना पड़ रहा।

    नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने जनसहभागिता के साथ ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान’ शुरू किया है तथा सूचना देने वालों के लिए पुरस्कार की व्यवस्था की गई है, साथ ही उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि आगामी ‘खेलो इंडिया चिट्टा-मुक्त अभियान’ के माध्यम से युवाओं को खेलों और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे नशा मुक्त और प्रगतिशील हिमाचल का निर्माण सुनिश्चित होगा।

    इस अवसर पर राजपूत कल्याण ट्रस्ट के अध्यक्ष कुलदीप ठाकुर, संरक्षक टी.सी. राणा तथा राजपूत कल्याण सभा के अध्यक्ष ने भी अपने विचार व्यक्त किए। समारोह में आयुष, युवा सेवाएं एवं खेल मंत्री यादविंद्र गोमा, विधायक एवं एचपीटीडीसी के अध्यक्ष आर.एस. बाली, उप मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, विधायक नीरज नैयर, पूर्व सांसद विप्लव ठाकुर एवं कृपाल परमार, पूर्व विधायक सुरेंद्र काकू, धर्मशाला नगर निगम के पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी, ऊन महासंघ के अध्यक्ष मनोज कपूर, कांगड़ा कृषि बैंक के अध्यक्ष रामचंद पठानिया, सहकारी बैंक के उपाध्यक्ष संजय चौहान, उपायुक्त हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक अशोक रतन, राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, राजपूत कल्याण सभा के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित थे।