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  • CM Sukhu ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में फ्री बिजली Royalty में वृद्धि का किया आग्रह

    CM Sukhu ने केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में फ्री बिजली Royalty में वृद्धि का किया आग्रह

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने गत सायं नई दिल्ली में केंद्रीय ऊर्जा और आवास एवं शहरी मामलों मंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में प्रारंभिक 12 वर्षों की अवधि पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं में सामान्य 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी के अतिरिक्त निःशुल्क बिजली रॉयल्टी की हिस्सेदारी बढ़ाने का अनुरोध किया। उन्होंने केन्द्र सरकार से 180 मेगावाट की बैरा-स्यूल जलविद्युत परियोजना के संचालन के 44 वर्ष पूर्ण होने के परिणामस्वरूप इस परियोजना में निःशुल्क बिजली की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) परियोजनाओं में राज्य को देय ऊर्जा बकाया के भुगतान में हो रहे विलम्ब का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के निर्माण के दौरान प्रदेश के लोगों ने कठिनाइयों का सामना किया और हजारों लोगों ने विस्थापन का दंश झेला। राज्य को प्रतिकूल पर्यावरणीय प्रभावों का सामना करना पड़ा और पौंग बांध से विस्थापित लोगों का पुनर्वास आज भी पूरी तरह नहीं हो सका है।

    सुक्खू ने आग्रह किया कि हरियाणा और पंजाब दोनों राज्य अपनी सहमति प्रदान कर 31 अक्तूबर, 2011 तक के 13,066 मिलियन यूनिट ऊर्जा बकाया तथा उसके बाद 6 प्रतिशत ब्याज सहित राज्य को प्रदान करें। यदि ऊर्जा बकाया का भुगतान धनराशि के रूप में किया जाता है, तो इस स्थिति में 6 प्रतिशत चक्रवृद्धि ब्याज की दर से अब तक की गणना के अनुसार इसकी अनुमानित धन राशि 7,784 करोड़ रुपये बनती है। मुख्यमंत्री ने शानन जलविद्युत परियोजना की पृष्ठभूमि के बारे में भी अवगत करवाया और इस परियोजना पर राज्य के वैध अधिकार का पक्ष रखा।

    मुख्यमंत्री ने कांगड़ा में प्रस्तावित ‘एयरो सिटी’ और ‘हिम चंडीगढ़’ के विकास के लिए भी केंद्रीय मंत्री से वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य राज्य में सुनियोजित शहरीकरण, आर्थिक विकास, पर्यटन तथा निवेश को बढ़ावा देना है।

    उन्होंने केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया कि राज्य सरकार द्वारा 24 शहरी स्थानीय निकायों में ‘अर्बन चैलेंज फंड’ के तहत 1,179 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित की जा रही है। इनमें से 660 करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रथम चरण में भारत सरकार को भेजी जा चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री ने ‘क्लीन हिली एंड हिमालयन सिटीज़ इनिशिएटिव’ के अंतर्गत स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन संबंधी कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए 12.33 करोड़ रुपये जारी करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने अमृत योजना के तहत पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं के लिए शेष 64.45 करोड़ रुपये जारी करने का अनुरोध किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने भारत सरकार को अनुमोदन के लिए भेजी गई अमृत मित्रा योजना के अंतर्गत 14 शहरी स्थानीय निकायों में 43 परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी स्थानीय निकायों में प्रत्येक संपत्ति को विशिष्ट पहचान प्रदान करने के उद्देश्य से क्यूआर-आधारित डिजिटल डोर प्लेट प्रणाली राज्य में प्रक्रियाधीन है। उन्होंने इस परियोजना के दूसरे चरण के सफल क्रियान्वयन के लिए आगामी पांच वर्षों में 18 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का भी अनुरोध किया। बैठक में मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह तथा ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित थे।

     

  • राज्यपाल ने फतेहपुर में सर्व धर्म पीठ के तपोस्थान मुख्य दरबार साहिब का लोकार्पण किया

    राज्यपाल ने फतेहपुर में सर्व धर्म पीठ के तपोस्थान मुख्य दरबार साहिब का लोकार्पण किया

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज कांगड़ा जिला के फतेहपुर में सर्व धर्म पीठ तपोस्थान, गुरुद्वारा नानक ज्योत साहिब में नव-निर्मित मुख्य दरबार साहिब का लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने श्रद्धालुओं, संतों, सेवादारों और अतिथियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह स्थान भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत, सांस्कृतिक समावेशिता और सद्भाव का एक जीवंत उदाहरण है जो सर्व धर्म समभाव की भावना को बढ़ाता है।

    इस स्थान के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि मान्यता के अनुसार गुरु नानक देव जी अपनी तीसरी उदासी के दौरान इस स्थान पर रहे थे। यहां मिली प्राचीन कृतियां, पुराने नागनी माता मंदिर और पवित्र बरगद के वृक्ष इस बात का प्रमाण हैं कि यह क्षेत्र लंबे समय से तपस्या और साधना का केंद्र रहा है।

    गुरु नानक देव जी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि समानता, करुणा, सेवा भाव और सत्य की उनकी शिक्षाएं वर्तमान परिपेक्ष्य में प्रासंगिक हैं और लोगों को मिल-जुलकर रहने के लिए प्रेरित करती हैं। उन्होंने मुख्य सेवादार संत बाबा लवप्रीत जी महाराज के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस पवित्र स्थल को सर्व धर्म पीठ के रूप में विकसित करने की उनकी परिकल्पना भारत की प्राचीन समावेशी, सह-अस्तित्व और आध्यात्मिक सद्भाव की परंपरा को दर्शाती है।

    एक ही परिसर में गुरु ग्रंथ साहिब जी की स्थापना, मंदिर तथा अखंड ज्योति का होना सच्ची आध्यात्मिकता का प्रतीक है, जहां जाति, धर्म, सामाजिक स्थिति, शिक्षा या आर्थिक पृष्ठभूमि के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता और आस्था के द्वार सभी के लिए खुले रहते हैं।

    गुरु अर्जुन देव की शहीदी दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने पांचवें सिख गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय बलिदान, साहस और सत्य, न्याय तथा मानवता के प्रति अटूट समर्पण को याद किया। उन्होंने कहा कि गुरु अर्जन देव जी का जीवन लोगों को विपरीत परिस्थितियों में भी सेवा, धर्म और मानव कल्याण के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है।

    युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए गुप्ता ने कहा कि मादक पदार्थों का दुरुपयोग समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है और यह युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए खतरा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे नियमित रूप से गुरुद्वारा साहिब में सेवा करें और अपने मित्रों तथा साथियों को भी इसके लिए प्रेरित करें। सेवा भावना, संगत का साथ और धार्मिक स्थलों का आध्यात्मिक वातावरण युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है तथा इससे वे नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहते हैं।

    नशे के समूल नाश के लिए समाज, परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक संगठनों और युवाओं की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है। एकजुट प्रयासों से ही हम नशा-मुक्त गांव, नशा-मुक्त हिमाचल प्रदेश और अंततः नशा-मुक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं। गुप्ता ने विश्वास व्यक्त किया कि दरबार साहिब आध्यात्मिक जागरण, सामाजिक सद्भाव, सामुदायिक सेवा और राष्ट्रीय एकता का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरेगा। ऐसे पवित्र स्थल नैतिक मूल्यों के संवर्धन और आने वाली पीढ़ियों को मानवता, निस्वार्थ सेवा तथा राष्ट्र निर्माण के आदर्शों के प्रति प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    इस अवसर पर पूर्व मंत्री डॉ. राजन सुशांत, जम्मू के पूर्व विधायक अश्विनी कुमार शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, धार्मिक नेता और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

  • नरेंद्र कुमार को जिला नगर आयुक्त, रोहतक की अतिरिक्त जिम्मेदारी

    नरेंद्र कुमार को जिला नगर आयुक्त, रोहतक की अतिरिक्त जिम्मेदारी

    चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से आईएएस अधिकारी नरेंद्र कुमार को उनके वर्तमान कार्यभार के साथ ही जिला नगर आयुक्त, रोहतक का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा है। वर्ष 2021 बैच के अधिकारी नरेंद्र कुमार वर्तमान में रोहतक में अतिरिक्त उपायुक्त-सह-जिला नागरिक संसाधन सूचना अधिकारी, जिला परिषद और डीआरडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा नगर निगम, रोहतक के आयुक्त के पदों पर कार्यरत हैं।

  • शिमला में नरेश चौहान ने प्रेस वार्ता में कई महत्वपूर्ण विषयों पर दी जानकारी

    शिमला में नरेश चौहान ने प्रेस वार्ता में कई महत्वपूर्ण विषयों पर दी जानकारी

    शिमला: मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार नरेश चौहान ने शिमला में पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा केन्द्र में हिमाचल के हितों की पैरवी करने में असफल रहे हैं। हाल ही में हिमाचल के प्रवास पर आए जे.पी. नड्डा ने हिमाचल से जुड़े मुद्दों को नहीं उठाया, लेकिन उन्होंने पिछली भाजपा सरकार की नाकामियों पर पर्दा डालने का काम किया। आरडीजी बन्द करने के निर्णय को न्यायसंगत करार देना यह साबित करता है कि उन्होंने प्रदेश के हितों से समझौता कर लिया है। उनको यह ज्ञात होना चाहिए कि इस पहाड़ी राज्य के गठन के समय भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य की राजस्व की कमी की भरपाई के लिए आरडीजी का प्रावधान किया गया था।

    आरडीजी हिमाचल प्रदेश का संवैधानिक अधिकार है, कोई खैरात नहीं। इसका प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 275(1) में किया गया है और इसे बन्द करना हिमाचल के लोगों के अधिकारों के साथ कुठाराघात है।

    जे.पी. नड्डा केन्द्र में प्रभावशाली स्थान रखते हैं। उन्हें प्रदेश के हितों को सर्वोपरि रखते हुए प्रदेश सरकार और विपक्ष को साथ लेकर बैठक करनी चाहिए थीं और इस मामले को प्रभावशाली तरीके से केन्द्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए था लेकिन यह आर्श्चजनक है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री राजनीतिक दृष्टि से आरडीजी बन्द होने को न्यायसंगत बता रहे हैं। यह सरासर प्रदेश के लोगों के हितों के साथ खिलवाड़ है क्योंकि आरडीजी बंद होने से प्रदेश के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

    पिछली भाजपा सरकार को आरडीजी के रूप में हज़ारों करोड़ रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 16 हज़ार करोड़ रुपये प्राप्त हुए। इस सबके बावजूद पूर्व सरकार ने हिमाचल पर भारी भरकम कर्ज़ के बोझ तले दबा दिया। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री को प्रदेश की आर्थिक स्थिति के बारे में पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से सवाल पूछने चाहिए कि उन्होंने पांच वर्ष के कार्यकाल में प्रदेश के राजस्व को बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए थे।

    नरेश चौहान ने कहा कि तमाम वित्तीय प्रतिकूलताओं के बावजूद मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान प्रदेश सरकार ने राजस्व सृजन की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सुधार आ रहा है।

    जे.पी नड्डा ने कर्मचारियों के ओपीएस से जुड़े सवालों को टालने का प्रयास किया। पिछली भाजपा सरकार ने कर्मचारियों की ओपीएस की मांग को सिरे से नकार दिया था जबकि वर्तमान प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के भविष्य की चिंता करते हुए ओपीएस की बहाली की। जे.पी. नड्डा ने उनकी पार्टी की 2022 की नीति का हवाला दिया और यह नीति स्पष्ट रूप से ओपीएस के खिलाफ है। इससे यह स्पष्ट जाहिर होता है कि भाजपा कर्मचारी विरोधी पार्टी है।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार के 12 वर्ष के कार्यकाल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में करवाए जा रहे आयोजनों का उल्लेख करते हुए नरेश चौहान ने कहा कि केन्द्र सरकार जनता के मुद्दों का समाधान न करते हुए उनके मुद्दों की अनदेखी कर रही है। अलग-अलग तरह के आयोजनों से केन्द्र सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने का प्रयास कर रही है।

    महंगाई, पेपर लीक, बेरोजगारी जैसे राष्ट्रीय मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। करोड़ों युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इन सभी मुद्दों पर प्रधानमंत्री की जवाबदेही बनती है। इन 12 सालों में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने के निरंतर प्रयास किए गए।

    देश के लोग दिल से कांग्रेस पार्टी से जुड़े हैं। जिसने आजादी से लेकर वर्तमान तक देश के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्तमान में कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं के माध्यम से प्रदेश सरकार ने राज्य मेें परिवर्तनकारी पहल की हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सरकार की नीतियों पर विश्वास व्यक्त कर रही है।

  • जनगणना-2027 के प्रथम चरण की 16 जून, 2026 से होगी शुरुआत

    जनगणना-2027 के प्रथम चरण की 16 जून, 2026 से होगी शुरुआत

    शिमला: जनगणना कार्य निदेशालय के प्रवक्ता ने आज यहां जानकारी दी कि राज्य में 16 जून, 2026 से जनगणना 2027 के प्रथम चरण ‘मकान सूचीकरण और मकानों की गणना’ का औपचारिक शुभारंभ किया जा रहा है। यह जनगणना 15 जुलाई, 2026 तक संचालित की जाएगी। प्रदेश के सभी जिलों में 13 जून, 2026 तक सभी प्रगणकों तथा पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण पूर्ण हो चुका है। इस बार की जनगणना डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिसमें प्रगणक एचएलओ मोबाइल ऐप का उपयोग कर रहे हैं। जिन नागरिकों ने 1 से 15 जून 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी स्व-गणना पूर्ण कर ली है, वे प्रगणकों को अपनी स्व-गणना आईडी प्रथम चरण के दौरान उपलब्ध करवाएंगे, यदि सामान्य कारणों से नागरिक ऐसा नहीं कर पाए, तो भी 16 जून से 15 जुलाई 2026 तक प्रगणक घर-घर आकर जानकारी एकत्र करेंगे।

    उन्होंने बताया कि इस दौरान प्रगणक आधिकारिक रूप से प्रकाशित 33 प्रश्नों के माध्यम से आपके मकान, परिवार, घर की बुनियादी जरूरतों (पानी, बिजली, शौचालय, अनाज) तथा घरेलू उपकरणों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी जुटाएंगे। जन-सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि घर आए प्रगणक की पहचान के लिए आम नागरिक उनके आईडी कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन कर उनकी सत्यता की जांच कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, निदेशालय यह स्पष्ट करता है कि जनगणना के दौरान किसी भी प्रकार की बैंक डिटेल्स, ओटीपी या कोई भी वित्तीय दस्तावेज नहीं मांगा जाता है। नागरिक किसी भी भ्रामक सूचना से सावधान रहें।

    जनगणना से संबंधित किसी भी आधिकारिक जानकारी या सहायता के लिए नागरिक हेल्पलाइन नंबर 1855 पर संपर्क कर सकते हैं। जनगणना कार्य निदेशालय, हिमाचल प्रदेश सभी नागरिकों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आग्रह करता है।

  • न्याय के प्रति जागरूक समाज ही लोकतंत्र की असली ताकत: Kavinder Gupta

    न्याय के प्रति जागरूक समाज ही लोकतंत्र की असली ताकत: Kavinder Gupta

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज कांगड़ा जिला के धर्मशाला स्थित राजकीय महाविद्यालय में भारत सरकार के विधि विभाग द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला एवं सुधार उत्सव में ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान का शुभारंभ किया। राज्यपाल ने कहा कि भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार न्याय, समानता और कानून के अनुरूप शासन है। भारत का संविधान केवल अधिकारों का दस्तावेज नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को सम्मान और न्याय तक समान पहुंच का अधिकार देता है।

    राज्य नीति के निर्देशक सिद्धांतों के अनुच्छेद 39ए के अंतर्गत राज्य का उत्तरदायित्व है कि आर्थिक और अन्य किसी प्रकार की कमी के कारण कोई भी व्यक्ति न्याय से वंचित न रहे तथा जरूरतमंदों को निःशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाई जाए। न्याय केवल न्यायालयों के निर्णयों तक ही सीमित नहीं, बल्कि इसका अर्थ एक ऐसे समाज के निर्माण से जुड़ा है, जहां प्रत्येक नागरिक स्वयं को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस करे।

    राज्यपाल ने हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की बाधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य के अनेक क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम हैं। इस स्थिति में तकनीक आधारित समाधान, डिजिटल मंच, कानूनी जागरूकता अभियान और स्थानीय सहायता प्रणाली नागरिकों को न्याय दिलाने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने ‘दिशा’ जैसे नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों को घर-द्वार पर न्याय पहुंचाना है। टेली-लॉ, न्याय बंधु तथा कानूनी साक्षरता एवं जागरूकता कार्यक्रम न्याय व्यवस्था को अधिक सुलभ, समावेशी और नागरिक-केंद्रित बना रहे हैं।

    भारत सरकार के विधि विभाग द्वारा शुरू किए गए ‘न्याय प्रबोधः न्याय के प्रति जागृति’ अभियान की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कानूनी जागरूकता, न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में पहला और सबसे महत्त्वपूर्ण कदम है। अधिवक्ताओं और कानून के विद्यार्थियों से प्रो बोनो प्लैज पहल से जुड़ने तथा कमजोर, वंचित और जरूरतमंद वर्गों को निःशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करने में योगदान देने का आह्वान किया।

    राज्यपाल ने कहा कि सुधार उत्सव केवल उपलब्धियों का उत्सव नहीं है, बल्कि न्याय क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों को भी स्वीकृति प्रदान करता है। इनमें न्यायिक अवसंरचना का विस्तार, डिजिटलीकरण, ई-कोट, न्यायालयों की क्षमता में वृद्धि, वैकल्पिक विवाद निपटान तंत्र को बढ़ावा देना तथा विधिक सहायता सेवाओं को सुदृढ़ करना शामिल है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों ने न्याय वितरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और जन-अनुकूल बनाया है तथा इससे लोगों को सरल, सुलभ और समयबद्ध न्याय मिल रहा है।

    युवा भारत का भविष्य हैं। संविधान एक शैक्षणिक विषय नहीं बल्कि जीवन के मार्गदर्शक के रूप में अपनाएं। इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि कार्यपालिका और न्यायपालिका की शक्तियां संविधान में निहित हैं और राष्ट्र सेवा में एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक न्याय सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

    भौगोलिक और आर्थिक प्रतिकूलताओं के कारण न्यायालयों तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों में कॉमन सर्विस सेंटर और टेली-लॉ जैसी पहलें इन लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुई हैं। इन मंचों के माध्यम से नागरिक अपनी कानूनी समस्याएं विशेषज्ञ वकीलों के समक्ष रख सकते हैं और निःशुल्क कानूनी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं, इसका खर्च भारत सरकार द्वारा वहन किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की न्याय तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मेघवाल ने कहा कि इस कार्यक्रम का संचालन पूरे देश में किया जाता है लेकिन अभी भी लोगों को इसके बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं है। ऐसी कार्यशालाओं का उद्देश्य लोगों को इन सेवाओं के प्रति जागरूक करना तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में किए गए प्रमुख न्यायिक और कानूनी सुधारों की जानकारी देना है।

    टेली-लॉ सेवा के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त कर चुके लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और इस पहल के सकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया। कार्यक्रम में सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज, विधायक भवानी सिंह पठानिया और सुधीर शर्मा, भारत सरकार के विधि विभाग के सचिव नीरज वर्मा, संयुक्त सचिव सुरेश कुमार तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

  • CM Sukhu ने पंचायत प्रतिनिधियों से चिट्टे के विरुद्ध अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया

    CM Sukhu ने पंचायत प्रतिनिधियों से चिट्टे के विरुद्ध अभियान में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू आज शिमला के पीटरहॉफ होटल में आयोजित नव निर्वाचित पंचायत प्रधान एवं उप-प्रधानों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने प्रधानों एवं उप-प्रधानों को एंटी चिट्टा शपथ दिलाई तथा उनसे चिट्टा के खिलाफ अभियान में सक्रियता से सहभागिता सुनिश्चित करते हुए चिट्टा मुक्त पंचायत व समाज बनाने का आहवान् किया। पंचायत प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि पंचायत शासन व जनता के बीच महत्त्वपूर्ण कड़ी है और उन्हें पूर्ण आशा है कि वह विकास, जनसेवा और सरकार की योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने में प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे। पंचायत प्रधानों से आग्रह किया कि वे समाज में खेल, शिक्षा, संस्कृति व सकारात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देकर युवाओं को नशे से दूर रखने में अपना योगदान दें।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने समाज के हर वर्ग के कल्याण व समग्र विकास के लिए अनेक महत्त्वाकांक्षी पहल व योजनाएं कार्यान्वित की हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थ-व्यवस्था, ग्रीन हिमाचल, शिक्षित हिमाचल, स्वस्थ हिमाचल, रोजगार, वित्तीय प्रबन्धन, नशा निवारण, कर्मचारी कल्याण सहित अन्य अनेक क्षेत्रों में दूरदर्शी सोच के साथ कार्य किया है।

    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने जिला के नव-निर्वाचित पंचायत प्रधान और उप-प्रधानों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर 7वें वित्तायोग के अध्यक्ष नंद लाल, विधायक कुलदीप सिंह राठौर, मोहन लाल ब्राक्टा व हरीश जनारथा, महिला आयोग अध्यक्ष विद्या नेगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (सूचना प्रौद्योगिकी व नवाचार) गोकुल बुटेल, अध्यक्ष हिमफेड महेश्वर सिंह चौहान, अध्यक्ष एपीएमसी देवानंद वर्मा, अध्यक्ष हिमकॉन विकेश चौहान, अध्यक्ष बाल आयोग अनीता ठाकुर, उपाध्यक्ष नशा निवारण बोर्ड संजय भारद्वाज, उपायुक्त अनुपम कश्यप, पुलिस अधीक्षक गौरव सिंह, पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त निदेशक केवल शर्मा व वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • कुपवी क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट

    कुपवी क्षेत्र के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से की भेंट

    शिमला: एचपीएमसी के उपाध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में शिमला जिले के कुपवी क्षेत्र के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से भेंट की और उन्हें अपनी मांगों से अवगत करवाया। मुख्यमंत्री ने उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य मन्नत तेगवान और हि.प्र. कांग्रेस कमेटी के महासचिव यशपाल तनाईक भी उपस्थित थे।

  • चिट्टा के खिलाफ लड़ाई जन आंदोलन में हुई परिवर्तित: CM Sukhu

    चिट्टा के खिलाफ लड़ाई जन आंदोलन में हुई परिवर्तित: CM Sukhu

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने रविवार देर सायं यहां पुलिस ग्राउंड भराड़ी में आयोजित शिमला क्रिकेट कार्निवल के समापन समारोह की अध्यक्षता की। इस क्रिकेट चैंपियनशिप का आयोजन ‘नशा छोड़ो, खेल खेलो’ थीम के अंतर्गत किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कार्निवल आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में मादक पदार्थों, विशेषकर चिट्टा के विरुद्ध छेड़ी गई मुहिम अब एक व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी से नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान प्रभावी ढंग से संचालित किए जा रहे हैं।

    युवाओं को नशे से दूर रखने और उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा प्रदान करने के उद्देश्य से इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव के दौरान वॉलीबॉल और क्रिकेट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। खेल गतिविधियां युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देती हैं तथा उन्हें नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। चिट्टा मुक्त समाज के निर्माण के प्रति प्रदेश सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सभी महाविद्यालयों में नशे के दुष्प्रभावों पर आधारित सेमिनार और वॉकथॉन आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों को विद्यालयों में जाकर विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में नियमित रूप से जागरूक करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

    प्रदेश में पुलिस, सामाजिक संगठन, पंचायतें, शिक्षक, अभिभावक और युवा मिलकर नशे के विरुद्ध इस निर्णायक लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। राज्य सरकार केवल नशा तस्करों की गिरफ्तारी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उनके आर्थिक नेटवर्क और जड़ों पर भी कड़ा प्रहार कर रही है। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान लगभग 51 करोड़ रुपये मूल्य की अवैध संपत्तियां जब्त कीं र्गइं हैं तथा कई तस्करों और माफिया तत्वों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है।

    नशे से संबंधित मामलों में अब तक 123 सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई है। 10 राज्य कर्मचारियों और 21 पुलिस कर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है। प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में नियुक्ति से पूर्व डोप टेस्ट अनिवार्य करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जो नशामुक्त हिमाचल के निर्माण की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

    खेल अवसंरचना को सुदृढ़ करने तथा खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और महत्वाकांक्षी पहलों की भी विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को नशे के विरुद्ध शपथ भी दिलाई।इस अवसर पर उन्होंने प्रतियोगिता के आयोजन के लिए दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा क्रिकेट ग्राउंड शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की। इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, महापौर सुरेंद्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पार्षदगण, शिमला क्रिकेट कार्निवल क्लब के अध्यक्ष वीरेंद्र बांसटु, टूर्नामेंट अध्यक्ष मनोज चौहान, उपायुक्त अनुपम कश्यप भी उपस्थित थे।

  • Eco-Adventure Zipline ने Dharmshala पर्यटन में भरा नया रोमांच

    Eco-Adventure Zipline ने Dharmshala पर्यटन में भरा नया रोमांच

    शिमला: पर्यटन हिमाचल प्रदेश की अर्थव्यवस्था का एक महत्त्वपूर्ण आधार है जो न केवल राज्य की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाता है बल्कि हज़ारों लोगों की आजीविका से भी जुड़ा हुआ है। इसी क्षेत्र की संभावनाओं को नए आयाम देने के लिए राज्य सरकार सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है।

    इसी दिशा में ज़िला कांगड़ा के धर्मशाला के नड्डी क्षेत्र में विकसित की जा रही इको-एडवेंचर जिपलाइन परियोजना एक महत्त्वपूर्ण पहल है। धौलाधार पर्वतमाला की मनमोहक वादियों से घिरा नड्डी क्षेत्र अपनी शांत प्राकृतिक सुंदरता और हिमालय के अद्भुत दृश्यों के लिए पर्यटकों का पसंदीदा गंतव्य रही है। नई जिपलाइन से यह क्षेत्र रोमांचक पर्यटन गतिविधियों के साथ और अधिक आकर्षक बनने जा रहा है।

    सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के अंतर्गत 7.41 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही यह परियोजना राज्य की पर्यटन अवसंरचना में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। लगभग 4.3 किलोमीटर लंबी यह जिपलाइन गल्लू देवी मंदिर से आरंभ होकर बल गांव, नड्डी तथा मैगी प्वाइंट खड्ड सहित धर्मशाला क्षेत्र के अनेक मनोहारी प्राकृतिक स्थलों से होकर गुजरती है। इस दौरान पर्यटक घने जंगलों, गहरी घाटियों और हिमालय की भव्य पर्वत श्रृंखलाओं के अद्भुत दृश्यों का आनंद लेते हुए रोमांचकारी अनुभव प्राप्त करेंगे। इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, होम-स्टे, परिवहन सेवाओं, स्थानीय खान-पान व्यवसायों, पर्यटन गाइडों तथा एडवेंचर पर्यटन से जुड़े उद्यमों को लाभ मिलेगा। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार और कौशल विकास के नए अवसर भी सृजित होंगे।

    पर्यावरणीय संरक्षण इस परियोजना का महत्त्वपूर्ण आधार है। राज्य सरकार जिम्मेदार पर्यटन और प्रकृति हितैषी अवसंरचना को बढ़ावा दे रही है, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बना रहे तथा क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता अक्षुण्ण बनी रहे। रोमांचक गतिविधियों के साथ-साथ यह परियोजना पर्यटकों को क्षेत्र की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक विरासत से भी जोड़ने का अवसर प्रदान करेगी, जिससे उनका यात्रा अनुभव और अधिक समृद्ध एवं यादगार बनेगा।

    धर्मशाला और कांगड़ा क्षेत्र के लिए यह परियोजना पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह राज्य सरकार द्वारा ज़िला कांगड़ा को हिमाचल प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने के विजन को साकार करने में भी सहायक सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश आर्थिक विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक कल्याण के संतुलित मॉडल को आगे बढ़ा रहा है। नड्डी इको-एडवेंचर जिपलाइन परियोजना इसी सोच का प्रतीक है, जो विकास के नए अवसर सृजित करते हुए प्रदेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण को भी सुनिश्चित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।