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  • शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने की अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस

    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने की अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस

    शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने आज यहां एक प्रेस-वार्ता के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता जगत प्रकाश नड्डा के बयानों का खंडन किया। हिमाचल प्रदेश की जनता राजनीतिक द्वेष से प्रेरित निरर्थक बयानबाजी के बजाय तथ्यों और ठोस उपलब्धियों पर चर्चा की उम्मीद करती है।

    जे.पी. नड्डा हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले केंद्र सरकार के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और एक महत्वपूर्ण पद पर आसीन हैं, इसलिए राज्य की जनता की उनसे अपेक्षाएं स्वाभाविक रूप से अधिक हैं। लोग चाहते हैं कि प्रदेश हित के मुद्दे, वित्तीय हितों और विकास संबंधी प्राथमिकताओं की राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी पैरवी हो।जब-जब केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय रहा है, हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। राज्य में स्थापित प्रमुख शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास परियोजनाएं केंद्र में कांग्रेस सरकारों के दौरान स्थापित किए गए थे।

    आज हिमाचल प्रदेश को उसी उदार सहयोग की आवश्यकता है, विशेषकर ऐसे समय में जब राज्य वित्तीय दबाव, पुनर्निर्माण की चुनौतियों और बढ़ती विकासात्मक जरूरतों का सामना कर रहा है। वर्तमान में राज्य के सामने सबसे बड़ी चिंता राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) का बंद होना है, जो संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता तंत्र रहा है। दशकों तक विभिन्न वित्त आयोगों ने पर्वतीय राज्यों की विशेष चुनौतियों को स्वीकार करते हुए इस सहायता की अनुशंसा की थी। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से राज्य को प्रतिवर्ष लगभग 8,100 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में निवेश पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

    वर्ष 2023 में आई प्राकृतिक आपदा ने हिमाचल प्रदेश में भारी तबाही मचाई। सड़कों, पुलों, स्कूलों, जलापूर्ति योजनाओं, स्वास्थ्य संस्थानों और अन्य सार्वजनिक ढांचों को भारी नुकसान हुआ, जिससे हजारों करोड़ रुपये की क्षति हुई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए केंद्र से कई बार अतिरिक्त सहायता की मांग की, लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की राशि अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में वित्तपोषण को लेकर किए जा रहे दावों और राज्य को वास्तव में प्राप्त सहायता के बीच बड़ा अंतर है। उन्होंने कहा कि विशेष श्रेणी के राज्यों के लिए आयुष्मान भारत योजना में 90ः10 की फंडिंग व्यवस्था का उल्लेख किया जाता है, लेकिन वर्ष 2025-26 में लगभग 155 करोड़ रुपये के स्वास्थ्य दावों के मुकाबले हिमाचल प्रदेश को केंद्र से केवल 49 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए।

    इससे योजना के अंतर्गत वास्तविक सहायता को लेकर प्रश्न उठते हैं। वर्ष 2018-19 से 2025-26 के बीच स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत उपचार संबंधी दावे लगभग 599 करोड़ रुपये रहे। इस दौरान लाभार्थियों को निर्बाध उपचार उपलब्ध करवाने के लिए राज्य सरकार को अपने संसाधनों से अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ा। वित्तीय चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार ने हाल ही में हिमकेयर योजना की लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए 100 करोड़ रुपये जारी किए हैं, ताकि अस्पतालों और मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

    मंत्रियों ने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम चला रही है। लगभग 3,000 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य अवसंरचना का विकास किया जा रहा है। अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना, आईजीएमसी शिमला तथा डॉ. राजेंद्र प्रसाद चिकित्सा महाविद्यालय टांडा में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं स्थापित की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त रोबोटिक सर्जरी, पीईटी स्कैन, आधुनिक कैंसर उपचार सुविधाएं, ट्रॉमा सेंटर और उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीकों का विस्तार भी किया जा रहा है।

    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि वित्तीय चुनौतियों के बावजूद हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है और देश का अग्रणी राज्य बनकर उभर रहा है। हाल ही में जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स 2.0 में हिमाचल प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर छठा स्थान तथा सभी राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। राज्य को प्रतिष्ठित ‘प्रचेष्ठा-2’ श्रेणी में स्थान मिला है।

    मंत्रियों ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड से जुड़े मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। हिमाचल प्रदेश लगातार अपने वाजिब हितों से जुड़े विषयों को उठाता रहा है और जल संसाधनों, विद्युत लाभों तथा वित्तीय हितों से संबंधित मामलों पर निरंतर ध्यान दिए जाने की अपेक्षा करता है। राज्य को उम्मीद है कि उसके वाजिब अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए अधिक प्रभावी समर्थन मिलेगा।

    हिमाचल प्रदेश सरकार किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रही है, बल्कि केवल वही चाहती है जो संविधान, कानून और वित्तीय व्यवस्था के अनुसार राज्य की जनता का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक पर्वतीय राज्य होने के कारण हिमाचल प्रदेश को अपनी विशिष्ट चुनौतियों से निपटने के लिए निरंतर सहयोग, समय पर वित्तीय सहायता और केंद्र सरकार की वास्तविक साझेदारी की आवश्यकता है। राज्य की जनता ठोस परिणाम, प्रभावी सहयोग और दीर्घकालिक विकास एवं समृद्धि के प्रति साझा प्रतिबद्धता की अपेक्षा रखती है।

    राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ नेताओं को ऐसी नकारात्मक या भ्रामक टिप्पणियों से बचना चाहिए जो राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाती हों। जगत प्रकाश नड्डा से आग्रह किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार में अपने प्रभाव का उपयोग हिमाचल प्रदेश के लिए अधिक वित्तीय सहायता, आपदा राहत तथा विकासात्मक परियोजनाएं सुनिश्चित करने के लिए करें।

  • प्रदेश सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध

    प्रदेश सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ अधिक से अधिक पशुपालकों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध

    शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी दूध उत्पादक संघ (मिल्कफेड) द्वारा पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखते हुए तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ अधिक से अधिक ग्रामीण परिवारों तक पहुंचाने के उद्देश्य से दूध खरीद व्यवस्था में एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।

    राज्य सरकार के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि सरकार द्वारा दूध उत्पादकों को न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करवाए जाने के उपरांत प्रदेश में दूध उत्पादन एवं सहकारी व्यवस्था के प्रति पशुपालकों की सहभागिता में निरंतर वृद्धि हुई है। राज्य सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए गाय के दूध पर न्यूनतम समर्थन मूल्य को 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति किलो और भैंस के दूध पर 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति किलो किया है।

    न्यूनतम समर्थन मूल्य का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि इसका लाभ केवल सीमित परिवारों तक न रहकर प्रदेश के अधिकाधिक दूध उत्पादकों, विशेषकर छोटे एवं सीमांत पशुपालकों तक पहुंचे। दो वर्षों में मिल्कफेड में दूध उत्पादकों की भागीदारी 28,645 से बढ़कर 42,500 तक पहुंच गई है। दूध संग्रहण भी 1.57 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 2.20 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। यह वृद्धि प्रदेश के पशुपालकों के बढ़ते विश्वास एवं दूध क्षेत्र के विस्तार को दर्शाती है।

    प्रवक्ता ने बताया कि इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए दूध खरीद पर प्रति पशुपालक प्रतिदिन अधिकतम 20 लीटर की सीमा निर्धारित करने का निर्णय लिया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक नए दूध उत्पादकों को सहकारी ढांचे से जोड़ना तथा ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि के अवसर उपलब्ध करवाना है। इस निर्णय से अधिक संख्या में किसानों को दूध विपणन का अवसर प्राप्त होगा, नए दूध उत्पादकों का सहकारी क्षेत्र में पंजीकरण बढ़ेगा और दूध उत्पादन से जुड़े परिवारों की आय एवं आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

    प्रवक्ता ने सभी दूध उत्पादकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार एवं मिल्कफेड के लिए पशुपालकों के हित सर्वाेच्च प्राथमिकता हैं तथा भविष्य में भी दूध क्षेत्र के विस्तार एवं पशुपालकों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। प्रवक्ता ने प्रदेश के सभी दुग्ध उत्पादकों एवं सहकारी समितियों से इस जनहितकारी पहल में सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया।

     

  • राज्यपाल ने माता वैष्णो देवी मंदिर में की पूजा-अर्चना

    राज्यपाल ने माता वैष्णो देवी मंदिर में की पूजा-अर्चना

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज जम्मू के कटरा स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता भी उपस्थित थीं। राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश तथा देशवासियों की शांति, समृद्धि, प्रगति एवं खुशहाली के लिए प्रार्थना की। उन्होंने देश में आपसी सद्भाव, एकता और निरंतर विकास की कामना करते हुए माता वैष्णो देवी से सभी नागरिकों के सुखद जीवन के लिए कामना की।

     

     

  • स्पीकर संधवां ने पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए माता-पिता से की खास अपील

    स्पीकर संधवां ने पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए माता-पिता से की खास अपील

    चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा के स्पीकर स कुलतार सिंह संधवां ने आज नशों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति की पुष्टि करते हुए कहा कि पंजाब सरकार द्वारा नशों के खिलाफ अपनी निर्णायक मुहिम में तेजी लाई गई है, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 67,000 से अधिक नशा तस्करों को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि अवैध पदार्थों की आपूर्ति में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    स्पीकर ने कहा कि नशों के पूर्ण खात्मे के लिए लोगों का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से जिम्मेदार नागरिकों के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन करने और पुलिस के साथ नशीले पदार्थों की तस्करी संबंधी जानकारी साझा करने की अपील की। नागरिकों को नशीले पदार्थों से संबंधित किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत कानून लागू करने वाली एजेंसियों को सूचना देनी चाहिए। पुलिस विभाग सूचना देने वाले के विवरण को पूरी तरह गोपनीय रखेगा। नशों के पूर्ण खात्मे के लिए सरकार और समुदाय के बीच तालमेल बेहद आवश्यक है।

    उन्होंने माता-पिता से अपने बच्चों के विकास के वर्षों के दौरान बेहद सतर्क रहने और उनके साथ सहयोगात्मक व्यवहार रखने की अपील की। माता-पिता को बच्चों को बुरी आदतों से दूर रखने के लिए उनके साथ अधिक से अधिक समय बिताना चाहिए। युवाओं को शारीरिक फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए खेलों को अपनी दैनिक जीवनशैली में अपनाना चाहिए। युवा पीढ़ी को अपनी ऊर्जा को शिक्षा और खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की दिशा में लगाना चाहिए।

    स्पीकर संधवां ने कहा कि हमारी सरकार ने नशों की बुराई को समाप्त करने का दृढ़ संकल्प लिया है। नशों के खिलाफ चल रही राज्य स्तरीय मुहिम के तहत नशों की बड़ी सप्लाई लाइनों को सफलतापूर्वक तोड़ दिया गया है, जिसके कारण अनगिनत युवाओं को नशों की दलदल में जाने से बचाया गया है। अंत में उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं के भविष्य को नशों से बचाने के लिए जनसहयोग अंतिम और बेहद महत्वपूर्ण कड़ी है।

  • राज्यपाल ने लुधियाना स्थित स्वामी विवेकानंद मेडिटेशन पिरामिड का दौरा किया

    राज्यपाल ने लुधियाना स्थित स्वामी विवेकानंद मेडिटेशन पिरामिड का दौरा किया

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज पंजाब के लुधियाना स्थित स्वामी विवेकानंद मेडिटेशन पिरामिड का दौरा किया और शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति तथा आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देने में योग और ध्यान की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि आज की तेज-रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में योग और ध्यान न केवल अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि संतुलित, सकारात्मक और सार्थक जीवन जीने के लिए भी अत्यंत प्रभावी साधन हैं।

    योग शरीर को स्वस्थ, ऊर्जावान और रोगमुक्त रखने में सहायता करता है, जबकि ध्यान मन को शांत, एकाग्र और तनावमुक्त बनाए रखता है। दोनों मिलकर आंतरिक संतुलन और समग्र कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। भारत ऋषियों, योगियों और आध्यात्मिक परंपराओं की पावन भूमि रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने भारत की प्राचीन योग और ध्यान परंपरा को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और 21 दिसंबर को विश्व ध्यान दिवस के रूप में मान्यता दिया जाना भारत की शाश्वत ज्ञान-परंपरा को विश्व समुदाय के समक्ष स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।

    यह पहल भारत को एक वैश्विक आध्यात्मिक नेतृत्वकर्ता के रूप में पुनः स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में भारत योग, ध्यान और समग्र कल्याण के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखता है। स्वामी विवेकानंद ट्रस्ट द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक कल्याण कार्यों की सराहना करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि ट्रस्ट विभिन्न मानवीय परियोजनाओं के माध्यम से समाज की सराहनीय सेवा कर रहा है। उन्होंने वृद्धाश्रम, स्वामी विवेकानंद मेडिटेशन पिरामिड, अस्पताल, फिजियोथेरेपी केंद्र, स्वर्ग आश्रम, निःशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण संस्थान, हेयर एवं ब्यूटी प्रशिक्षण संस्थान, वस्त्र बैंक, व्हीलचेयर बैंक, वॉकर बैंक, अस्पताल बेड बैंक, ऑक्सीजन कंसेंट्रेटर बैंक तथा पुस्तक बैंक जैसी सेवाओं का विशेष उल्लेख किया।

    ये पहलें समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। ट्रस्ट द्वारा प्रस्तुत सेवा और आध्यात्मिकता का समन्वय समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का एक प्रभावशाली माध्यम बन सकता है। राज्यपाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद मेडिटेशन पिरामिड ध्यान, आध्यात्मिक जागरण और मानव चेतना के विस्तार का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र लोगों को ध्यान और आत्म-विकास की सरल, वैज्ञानिक और व्यावहारिक विधियां सीखने का अवसर प्रदान करेगा।

    गुप्ता ने आशा व्यक्त की कि पिरामिड स्पिरिचुअल सोसायटीज मूवमेंट के सहयोग से प्रारंभ किया गया यह अभियान समाज में शांति, सद्भाव, मानसिक स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जागरूकता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे पूर्व ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल भारती ने राज्यपाल का स्वागत करते हुए कहा कि कविन्द्र गुप्ता जैसे अनुभवी और दूरदर्शी नेताओं का मार्गदर्शन जनसेवा और सामाजिक परिवर्तन की भावना को और अधिक सशक्त बनाएगा। इस अवसर पर ट्रस्ट के उपाध्यक्ष ए.के. शर्मा, उपाध्यक्ष संजीव भारती, ट्रस्ट के सदस्य तथा अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

  • हिमाचल के हितों की पैरवी, मुख्यमंत्री ने नीति आयोग बैठक में उठाए प्रमुख मुद्दे

    हिमाचल के हितों की पैरवी, मुख्यमंत्री ने नीति आयोग बैठक में उठाए प्रमुख मुद्दे

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में भाग लिया। बैठक का विषय ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ था। बैठक में देशभर में समावेशी विकास सुनिश्चित करने तथा विकसित भारत के दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में परिवर्तित करने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के समक्ष मौजूदा वित्तीय चुनौतियों को प्रमुखता से उठाते हुए प्रधानमंत्री से राज्य के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया, जो राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में कमी तथा जीएसटी व्यवस्था से उत्पन्न राजस्व हानि का आकलन कर सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति में हिमाचल प्रदेश महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है, लेकिन उक्त परिस्थितियों के कारण राज्य को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार राज्य को उसका न्यायोचित हिस्सा प्रदान करने का अनुरोध किया। राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति से प्रदेश की अर्थव्यवस्था बहुत प्रभावित हुई है। राज्य को प्रदान किए गए 25,000 करोड़ रुपये इस नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने विकास गतिविधियों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए इस राशि को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने का आग्रह किया।

    हिमाचल प्रदेश देश का ‘ग्रीन फ्रंटियर’ है और विकसित भारत के लक्ष्य को वास्तविक रूप देने के लिए केंद्र सरकार को राज्य की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन इसके अनुरूप राज्य को कोई पर्याप्त आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही है।

    हिमाचल प्रदेश में लगभग 13,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन होने के बावजूद राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। इसके अतिरिक्त भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से राज्य को लगभग 7,000 करोड़ रुपये की बकाया राशि भी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव झेलने के बावजूद प्रदेश को केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि का अभी भी इंतजार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीएसटी व्यवस्था के कारण पिछले आठ वर्षों में राज्य को लगभग 25,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ा है।

    मुख्यमंत्री ने मानव विकास सूचकांकों में प्रदेश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर घोषित हुआ तथा वर्ष 2026 में स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में राज्य में छठा स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2022 में उनकी सरकार के कार्यभार संभालने के समय राज्य इस सूचकांक में 21वें स्थान पर था। उच्च शिक्षा में प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात 43 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से 28.4 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी राज्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख किया।

    सुक्खू ने कहा कि सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पंप स्टोरेज तथा बैटरी स्टोरेज जैसी पहलों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान राज्य के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य के लगभग 1.5 लाख निर्धन परिवारों की पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

    मुख्यमंत्री ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर हवाई संपर्क की आवश्यकता पर बल देते हुए गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का मुद्दा उठाया, ताकि हिमाचल प्रदेश को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने बच्चों के पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच डेटा साझाकरण को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित, सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित तथा साक्ष्य-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान की भी जानकारी दी। उन्होंने खुफिया तंत्र को सुदृढ़ बनाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया। बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, विशेष आमंत्रित सदस्य, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के.के. पंत भी उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री ने नाविक आदित्य शर्मा के निधन पर किया शोक व्यक्त

    मुख्यमंत्री ने नाविक आदित्य शर्मा के निधन पर किया शोक व्यक्त

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने हॉर्मुज स्टेªट में अमेरिकी हमले के दौरान एक तेल टैंकर पर कार्यरत नाविक आदित्य शर्मा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। आदित्य शर्मा हमीरपुर जिले के गलोड़ क्षेत्र के निवासी थे।

    मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार परिवार के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवार को हर संभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना तथा शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।

  • राज्य सरकार ने अध्ययन अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के लिया फैसला

    राज्य सरकार ने अध्ययन अवकाश पर जाने वाले कर्मचारियों को पूरा वेतन देने के लिया फैसला

    शिमला: राज्य सरकार ने सेवा अवधि के दौरान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अध्ययन अवकाश पर जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का निर्णय लिया है। पहले अध्ययन अवकाश लेने वाले कर्मचारियों को अवकाश पर जाने से पूर्व प्राप्त वेतन का केवल 40 प्रतिशत और महंगाई भत्ते के साथ आवास भत्ता दिया जा रहा था। कर्मचारियों के हित में संवेदनशील और कर्मचारी-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाते हुए राज्य सरकार ने ‘सीसीएस (अवकाश) नियम, 1972’ के नियम 56 में संशोधन किया है, जिसके अंतर्गत अध्ययन अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों को उच्च शिक्षा की अवधि के दौरान 100 प्रतिशत वेतन मिलेगा।

    यह निर्णय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा को पूरा करता है। जिन कर्मचारियों ने पहले पुराने प्रावधानों के तहत अध्ययन अवकाश लिया था, उन्हें भी संशोधित नियमों के अनुसार वेतन की बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा और उन्नत व्यावसायिक कौशल प्राप्त करने से न केवल कर्मचारियों का व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि उनकी कार्यकुशलता और प्रभावशीलता भी बढ़ती है, जिससे आम जनता को बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकती हैं।

    इस सुविधा का लाभ लेने के लिए सरकारी कर्मचारी को इस घोषणा के साथ एक शपथ-पत्र देना होगा कि अध्ययन अवधि के दौरान वह किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति, स्टाइपेंड या अंशकालिक रोजगार से कोई पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर रहे हैं। राज्य सरकार इससे पहले भी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में उच्च एवं विशेषज्ञता पाठ्यक्रम करने वाले एलोपैथिक चिकित्सकों के लिए अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन बहाल कर चुकी है। इस कदम से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है और राज्य के लोगों को लाभ पहुंचा है।

    मुख्यमंत्री का कहना है कि राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी उन्हें विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के तुरंत बाद 1.36 लाख एनपीएस कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की गई, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उनकी आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन की यह सुविधा कर्मचारियों को उच्च शिक्षा और उन्नत कौशल अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे अंततः जनता को प्रदान की जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार होगा।

  • अब पढ़ाई के साथ पूरी सैलरी, राज्य सरकार ने बढ़ाए अध्ययन अवकाश लाभ

    अब पढ़ाई के साथ पूरी सैलरी, राज्य सरकार ने बढ़ाए अध्ययन अवकाश लाभ

    शिमला: राज्य सरकार ने सेवा अवधि के दौरान उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अध्ययन अवकाश पर जाने वाले सरकारी कर्मचारियों को पूरा वेतन देने का निर्णय लिया है। पहले अध्ययन अवकाश लेने वाले कर्मचारियों को अवकाश पर जाने से पूर्व प्राप्त वेतन का केवल 40 प्रतिशत और महंगाई भत्ते के साथ आवास भत्ता दिया जा रहा था। कर्मचारियों के हित में संवेदनशील और कर्मचारी-अनुकूल दृष्टिकोण अपनाते हुए राज्य सरकार ने ‘सीसीएस (अवकाश) नियम, 1972’ के नियम 56 में संशोधन किया है, जिसके अंतर्गत अध्ययन अवकाश पर रहने वाले कर्मचारियों को उच्च शिक्षा की अवधि के दौरान 100 प्रतिशत वेतन मिलेगा।

    यह निर्णय मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा को पूरा करता है। जिन कर्मचारियों ने पहले पुराने प्रावधानों के तहत अध्ययन अवकाश लिया था, उन्हें भी संशोधित नियमों के अनुसार वेतन की बकाया राशि का भुगतान किया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि उच्च शिक्षा और उन्नत व्यावसायिक कौशल प्राप्त करने से न केवल कर्मचारियों का व्यक्तिगत विकास होता है, बल्कि उनकी कार्यकुशलता और प्रभावशीलता भी बढ़ती है, जिससे आम जनता को बेहतर सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकती हैं।

    इस सुविधा का लाभ लेने के लिए सरकारी कर्मचारी को इस घोषणा के साथ एक शपथ-पत्र देना होगा कि अध्ययन अवधि के दौरान वह किसी भी प्रकार की छात्रवृत्ति, स्टाइपेंड या अंशकालिक रोजगार से कोई पारिश्रमिक प्राप्त नहीं कर रहे हैं। राज्य सरकार इससे पहले भी प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में उच्च एवं विशेषज्ञता पाठ्यक्रम करने वाले एलोपैथिक चिकित्सकों के लिए अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन बहाल कर चुकी है। इस कदम से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिली है और राज्य के लोगों को लाभ पहुंचा है। राज्य सरकार अपने कर्मचारियों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और भविष्य में भी उन्हें विभिन्न सुविधाएं प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि सत्ता में आने के तुरंत बाद 1.36 लाख एनपीएस कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की गई, ताकि सेवानिवृत्ति के बाद उनकी आर्थिक सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित हो सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्ययन अवकाश के दौरान पूर्ण वेतन की यह सुविधा कर्मचारियों को उच्च शिक्षा और उन्नत कौशल अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, जिससे अंततः जनता को प्रदान की जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में सुधार होगा।

  • राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने राज्यपाल से भेंट की

    राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष ने राज्यपाल से भेंट की

    शिमला: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य और आयोग के सदस्यों निरुपम चकमा व डॉ. आशा लकड़ा ने आज यहां लोकभवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से शिष्टाचार भेंट की। आयोग के संयुक्त सचिव अमित निर्मल, निदेशक पुरेंदु कांत एवं पी. कल्याण रेड्डी भी उनके साथ शामिल थे। आयोग हिमाचल प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर शिमला में हैं।