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  • कृषि मशीनरी खरीद के लिए एग्री मशीनरी पोर्टल 31 जुलाई से शुरू होगा

    कृषि मशीनरी खरीद के लिए एग्री मशीनरी पोर्टल 31 जुलाई से शुरू होगा

    शिमला: कृषि विभाग के एक प्रवक्ता ने जानकारी दी कि कृषि अभियान्त्रिकी के अन्तर्गत सरकार द्वारा पहाड़ी खेती के मशीनीकरण के लिए प्रदेश के किसानों में नये विकसित उपकरण तथा आधुनिक मशीनरी को प्रचलित किया जा रहा है। विभाग द्वारा किसानों को बड़े स्तर पर पावर टिलर व पावर वीडर एवं अन्य कृषि उपकरण उपदान पर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। सरकार के कृषि अभियांत्रिकी उप-मिशन के अंतर्गत कृषि उपकरण अनुदान के लिए किसान कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं।

    पोर्टल पूर्ण पारदर्शी तरीके से लॉटरी सिस्टम के सिद्धांत पर काम करता है। यह पोर्टल 31 जुलाई, 2026 से वर्ष 2026-27 के लिए सक्रिय हो जाएगा तथा हर जरूरतमंद किसान इसके माध्यम से 20 अगस्त, 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। 21 अगस्त, 2026 को लॉटरी के माध्यम से किसानों को सम्बन्धित उपकरणों के लिए चयनित किया जाएगा। कृषि यंत्र लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध होगें।

    प्रवक्ता ने बताया कि मशीनरी आधुनिक कृषि का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। मशीनों के उपयोग से सभी कृषि कार्यों को समयबद्ध तथा कुशलतापूर्वक पूर्ण करने से बहुफसली सघन खेती की सफलता सुनिश्चित की जा सकती है। कृषि कार्यों में मशीनों का उपयोग करने से किसानों की कार्यक्षमता तथा आमदनी बढ़ने के साथ-साथ खेती की लागत कम होती है तथा उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ती है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति तथा खेतों के छोटे आकार के कारण अधिक भारी मशीनरी का प्रयोग नहीं किया जा सकता। इसके दृष्टिगत कृषि विभाग द्वारा निरन्तर प्रयत्न किए जा रहे हैं कि किसानों को छोटे आकार की/छोटी, कम वजन वाली नई सुधरी हुई आधुनिक मशीनें तथा उपकरण उपलब्ध करवाए जाएं।

    किसानों से आग्रह किया कि किसान केवल भारत सरकार से पंजीकृत फर्म से स्वीकृत मॉडल ही खरीदें ताकि बाद में उन्हें किसी भी तरह की कोई परेशानी का सामना न करना पड़े।

  • गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर राज्यपाल ने बावा लाल जी ध्यानपुर धाम में शीश नवाया

    गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर राज्यपाल ने बावा लाल जी ध्यानपुर धाम में शीश नवाया

    शिमला: गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने लेडी गवर्नर बिंदु गुप्ता के साथ पंजाब स्थित श्रद्धेय बावा लाल जी ध्यानपुर धाम में माथा टेका तथा प्रदेश और देशवासियों के लिए शांति, समृद्धि एवं सभी के समृद्ध जीवन की कामना की। इस अवसर पर कविन्द्र गुप्ता ने आशा व्यक्त की कि गुरु पूर्णिमा का यह पावन पर्व सभी को विनम्रता, अनुशासन, श्रद्धा तथा समाज सेवा जैसे उच्च मानवीय मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा देगा।

  • राज्यपाल ने चंबा सड़क दुर्घटना में पांच लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया

    राज्यपाल ने चंबा सड़क दुर्घटना में पांच लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज प्रातः पठानकोटदृचंबा राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनीखेत के निकट लाहड़ में हुई दुखद सड़क दुर्घटना में पांच लोगों के निधन पर शोक व्यक्त किया है। राज्यपाल ने ईश्वर से दिवंगत आत्माओं की शांति और उन्हें अपनेे चरणों में स्थान प्रदान करने की प्रार्थना की। उन्होंने शोकाकुल परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति एवं संबल प्रदान करने प्रार्थना भी की।

     

  • प्रदेश सरकार ने प्रोसेसिंग ग्रेड आम, सिट्रस फलों और C-Grade सेब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मंजूर किया

    प्रदेश सरकार ने प्रोसेसिंग ग्रेड आम, सिट्रस फलों और C-Grade सेब के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य मंजूर किया

    शिमला: बागवानी विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 के लिए प्रोसेसिंग ग्रेड आम, सिट्रस फलों और सी-ग्रेड सेब की खरीद के लिए मंडी मध्यस्थता योजना लागू करने को मंजूरी दी है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश के फल उत्पादकों को उनकी उपज का उचित मूल्य और बाजार उपलब्ध करवाना है। हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पाद विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) के माध्यम से फलों की खरीद की जाएगी। इसके अतिरिक्त, आवश्यकतानुसार सेब की खरीद में हिमफेड का भी सहयोग लिया जाएगा।

    योजना के तहत प्रोसेसिंग ग्रेड सीडलिंग, ग्राफ्टेड और कच्चे अचारी किस्म के आम की खरीद 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 15 जुलाई, 2026 से 31 अगस्त, 2026 तक की जाएगी। आम की खरीद और ढुलाई 20 किलोग्राम क्षमता के रिसाइकलेबल प्लास्टिक क्रेट में की जाएगी। किसान अपनी उपज किसी भी उपयुक्त पैकिंग में ला सकते हैं तथा इन क्रेटों को किसानों को वापिस कर दिया जाएगा। प्रदेश में आम की खरीद के लिए 42 संग्रहण केन्द्र बनाए गए हैं।

    प्रोसेसिंग ग्रेड किन्नू, माल्टा और संतरा की खरीद 12 रुपये प्रति किलोग्राम, जबकि गलगल की खरीद 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से की जाएगी। इन फलों की खरीद 21 नवंबर, 2026 से 15 फरवरी, 2027 तक होगी। किन्नू, माल्टा और संतरा की खरीद 15 किलोग्राम क्षमता वाले प्लास्टिक क्रेट में तथा गलगल की खरीद 40 किलोग्राम के जूट के बैग में की जाएगी।

    योजना के तहत अधिकतम 1.50 लाख मीट्रिक टन सी-ग्रेड सेब की खरीद 12 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 1 अगस्त, 2026 से 31 अक्तूबर, 2026 तक की जाएगी। सेब की खरीद 35 किलोग्राम के जूट के बैग में की जाएगी। इसके अतिरिक्त, आवश्यकतानुरूप ढुलाई के लिए 16 किलोग्राम क्षमता वाले रिसाइकलेबल प्लास्टिक क्रेट को प्राथमिकता दी जाएगी। किसान अपनी उपज किसी भी उपयुक्त पैकिंग में ला सकते हैं और परिवहन के दौरान फलों की गुणवत्ता बनाए रखना आवश्यक है। केवल 51 मिलीमीटर से अधिक आकार और निर्धारित गुणवत्ता मानकों वाले सेब ही खरीदे जाएंगे। सड़े-गले, पक्षियों द्वारा खाए हुए, अधिक रोगग्रस्त, कीटग्रस्त, सिकुड़े हुए या एथेफोन से उपचारित सेब योजना के तहत स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    प्रवक्ता ने बताया कि पंजीकृत किसान ही इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए एचपीएमसी एमआईएस पोर्टल पर पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। किसान निर्धारित गुणवत्ता वाले फलों को ही अधिसूचित खरीद केंद्रों पर ला सकते हैं। योजना के नियमों के अनुसार किसानों को खरीद के समय वाष्पीकरण और अन्य वजन की कमी की भरपाई के लिए कुल वजन का 2.5 प्रतिशत अतिरिक्त फल भी देना होगा।

    प्रवक्ता ने सभी पात्र फल उत्पादकों से समय पर पंजीकरण करवाने और योजना का पूरा लाभ उठाने की अपील की है। अधिक जानकारी और पंजीकरण के लिए किसान अपने नजदीकी बागवानी कार्यालय या अधिसूचित खरीद केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

     

  • बोह क्षेत्र के बेघर परिवारों को गृह निर्माण और अन्य सामान के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता: मुख्यमंत्री

    बोह क्षेत्र के बेघर परिवारों को गृह निर्माण और अन्य सामान के लिए मिलेगी आर्थिक सहायता: मुख्यमंत्री

    प्रभावित परिवारों को गृह निर्माण के लिए सरकारी भूमि भी करवाई जाएगी उपलब्ध

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बोह पहुंचकर आपदा प्रभावित परिवारों का जाना हाल

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के बोह में बादल फटने की घटना से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत एवं पुनर्वास कार्यों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बोह में स्थापित राहत शिविर का निरीक्षण किया तथा वहां ठहराए गए प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन परिवारों के घर इस आपदा में पूरी तरह नष्ट हो गए हैं, उन्हें मकान निर्माण के लिए 7.50 लाख की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कपड़े, बर्तन एवं अन्य आवश्यक घरेलू सामान की खरीद के लिए एक लाख की सहायता भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन प्रभावित परिवारों के पास रहने के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है, उन्हें सरकार आवश्यकतानुसार सरकारी भूमि भी उपलब्ध करवाएगी। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जिन परिवारों की गाय या भैंस आपदा में मर गई है, उन्हें 55 हजार प्रति पशु तथा जिनकी बकरियां मरी हैं, उन्हें 15 हजार प्रति बकरी की सहायता राशि दी जाएगी। जिन घरों में बाढ़ या आपदा के पानी से नुकसान हुआ है, उन्हें एक लाख की राहत प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार, क्षतिग्रस्त दुकानों के लिए नुकसान के आधार पर 50 हजार से एक लाख तक की सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें 5 हजार प्रति कनाल के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा। जिन परिवारों को अस्थायी रूप से किराए के मकान में रहना पड़ेगा, उन्हें 5 हजार प्रतिमाह किराया सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रभावित परिवारों को छह माह का राशन भी निःशुल्क उपलब्ध करवाया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने रिडकमार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्तरोन्नत करने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023-24 की आपदा के दौरान प्रदेश में 23 हजार से अधिक घर क्षतिग्रस्त हुए थे और लगभग 500 बहुमूल्य जीवन गवांए थे। प्रदेश सरकार ने 75 हजार से अधिक लोगों का सुरक्षित रेस्क्यू किया था, जिसकी सराहना नीति आयोग और विश्व बैंक ने भी की थी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार किए हैं, जिसके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में 21वें स्थान से पांचवें स्थान पर पहुंचा है। मुख्यमंत्री ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं और आवश्यकताओं को गंभीरता से सुना तथा उन्हें आश्वस्त किया कि प्रदेश सरकार आपदा की इस घड़ी में उनके साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रभावित परिवार को स्वयं को अकेला महसूस करने की आवश्यकता नहीं है। राज्य सरकार प्रत्येक प्रभावित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है तथा राहत एवं पुनर्वास कार्यों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं हिमाचल प्रदेश के लिए लगातार गंभीर चुनौती बनती जा रही हैं। ऐसे में राज्य सरकार केवल राहत कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी आधारभूत ढांचे के विकास का निर्णय लिया गया है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करते हुए जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार राज्य सरकार ने आपदा राहत नियमों में संशोधन करते हुए प्रभावित परिवारों को दी जाने वाली सहायता राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसके अतिरिक्त संकट की घड़ी में प्रभावित परिवारों को शीघ्र आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विशेष आपदा राहत कोष का भी गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत प्रदान करते हुए 25 परिवारों को 25-25 हजार रुपये तथा 16 अन्य परिवारों को 10-10 हजार रुपये की अंतरिम सहायता राशि जारी की गई है। अब तक 13 राजस्व प्रमाण-पत्र तैयार किए जा चुके हैं तथा प्रभावित परिवारों कोे बोनाफाइड प्रमाण-पत्र जारी किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त शैक्षणिक प्रमाण पत्रों के पुनःनिर्माण की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास के लिए उपयुक्त भूमि चिन्हित करने का कार्य भी युद्धस्तर पर जारी है। मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों में लगे जिला प्रशासन, पुलिस, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, भारतीय सेना, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा स्थानीय लोगों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी के सामूहिक सहयोग से राहत कार्यों को गति मिली है। इस अपादा में घुड़घुं, भंगार और सपेड़ा गांवों के कुल 25 परिवार प्रभावित हुए हैं। इनमें घुड़घुं गांव के 11 मकानों में रह रहे 18 परिवारों के 52 सदस्य, भंगार गांव के एक मकान में रह रहे 3 परिवारों के 16 सदस्य तथा सपेड़ा गांव के 4 मकानों में रह रहे 4 परिवारों के 16 सदस्य प्रभावित हुए हैं। सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए सपेड़ा गांव के 13 मकानों को डेंजर जोन घोषित किया गया है। इस अवसर पर शाहपुर के विधायक एवं उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, वूल फेडरेशन के अध्यक्ष मनोज कुमार, स्थानीय पंचायत प्रधान नीलम कुमारी, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
  • राज्यपाल ने अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का किया शुभारंभ

    राज्यपाल ने अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का किया शुभारंभ

    सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और नशामुक्त समाज के निर्माण का किया आह्वान

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज चंबा के ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने इस अवसर पर चंबा और हिमाचल प्रदेश की जनता को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सदियों पुराना यह मेला प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सांप्रदायिक सौहार्द और जीवंत लोक परंपराओं का प्रतीक है। राज्यपाल ने ऐतिहासिक चौगान में जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश ने अपनी समृद्ध परंपराओं, लोक-कलाओं, मेलों और त्योहारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोकर रखा है। उन्होंने युवाओं से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहने तथा भारत की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का आह्वान किया। मिंजर जैसे मेले हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ एकता, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव की भावना को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए समाज से नशे के खिलाफ जनजागरूकता अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे के विरूद्ध हमें मिलकर अपने युवाओं की रक्षा करनी होगी और नशामुक्त हिमाचल का निर्माण करना होगा। उन्होंने इस दिशा में चंबा पुलिस द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की। राज्यपाल ने चंबा की विश्वप्रसिद्ध पारंपरिक हस्तकलाओं, जिनमें चंबा रूमाल, चंबा चप्पल और चंबा थाल शामिल हैं, का उल्लेख करते हुए उन शिल्पकारों की प्रशंसा की जो जिले की समृद्ध कलात्मक विरासत को संरक्षित रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। इससे पूर्व, कारगिल विजय दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने चंबा के कारगिल शहीदों आशीष थापा, खेम राज और ओम प्रकाश को पुष्पांजलि अर्पित की तथा उपस्थित जनसमूह को राष्ट्र के वीर सैनिकों के आदर्शों और बलिदान को सदैव स्मरण रखने एवं उनका सम्मान करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कारगिल युद्ध के वीर सैनिकों तथा वीरता पुरस्कार प्राप्त सैन्य कर्मियों के परिजनों को भी सम्मानित किया। इनमें सेवानिवृत्त कर्नल रवि वैद्य, विद्या देवी, मुशरबू देवी, सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर अशोक कुमार, हवलदार मिलाप सिंह, हेम राज, हवलदार सुशील कुमार, हवलदार करण सिंह, अश्वनी कुमार तथा हवलदार धर्मपाल शामिल थे। राज्यपाल ने मिंजर ध्वज फहराकर मेले का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर अजीत भट्ट एवं उनकी मंडली ने पारंपरिक कुंजड़ी-मल्हार की प्रस्तुति दी। यह मंडली पिछले 32 वर्षों से इस विशिष्ट सांस्कृतिक परंपरा का निर्वहन कर रही है। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, विधायक नीरज नैयर एवं डी.एस. ठाकुर, एपीएमसी अध्यक्ष ललित ठाकुर, जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष सुरजीत भरमौरी, नगर परिषद चंबा की अध्यक्षा भुवनेश्वरी गुलाटी, जिला परिषद के उपाध्यक्ष लियाकत अली, प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव यशवंत खन्ना, अतिरिक्त उपायुक्त अमित मेहरा, पुलिस अधीक्षक विजय सकलानी सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
  • मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर निर्णय का दिया आश्वासन

    मुख्यमंत्री ने शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर निर्णय का दिया आश्वासन

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्राथमिक शिक्षकों को आश्वस्त किया है कि राज्य सरकार शिक्षक दिवस से पहले नई कॉम्प्लेक्स प्रणाली पर उचित निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार इस व्यवस्था की सहानुभूतिपूर्वक समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि इसमें सुधार की आवश्यकता है या इसे पूरी तरह वापस लिया जाए।

    आज शिमला के चौड़ा मैदान में आयोजित प्राथमिक शिक्षक संघ की आम सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और शिक्षक संघ के बीच होने वाली आगामी बैठक में इस विषय पर निष्पक्ष एवं सहानुभूतिपूर्ण निर्णय लिया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि प्राथमिक शिक्षकों के विरुद्ध की गई निलंबन की कार्रवाइयों, विभागीय जांचों तथा दर्ज एफआईआर को वापस लिया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मुख्य अध्यापकों, केंद्र मुख्य अध्यापकों तथा खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारियों के अधिकारों की शक्तियों में कमी नहीं की जाएगी। साथ ही, प्राथमिक विद्यालयों में खेल गतिविधियों को भी पुनः शुरू किया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जेबीटी शिक्षकों को टीजीटी पदों पर पदोन्नति प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्राथमिक शिक्षक संघ की मांगों पर शनिवार को सचिवालय में संघ के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में विस्तार से चर्चा की गई है। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों को भरोसा दिलाया कि उनके हितों की पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार लागू कर रही है और शिक्षकों के सहयोग से प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों को राज्य के सर्वश्रेष्ठ विद्यालय बनाया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्तर पर अंग्रेजी माध्यम में शिक्षा पहले ही शुरू की जा चुकी है। उन्होंने इस दिशा में प्राथमिक शिक्षकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने बताया कि सीबीएसई विद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्ति लगभग पूरी हो चुकी है और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया भी जारी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने मंत्रिमंडल की पहली बैठक में 1.36 लाख कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल की थी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय किसी राजनीतिक कारण से नहीं, बल्कि कर्मचारियों के सम्मान और कल्याण को ध्यान में रखकर लिया गया। उन्होंने कहा, मैं स्वयं एक सरकारी कर्मचारी का बेटा हूं। हमने ओपीएस इसलिए बहाल की क्योंकि नई पेंशन योजना के तहत कई कर्मचारियों को मात्र 3,000 रुपये तक पेंशन मिल रही थी, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा और सम्मान प्रभावित हो रहा था। ओपीएस लागू होने के बाद अनेक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब लगभग 30,000 रुपये मासिक पेंशन मिल रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के अधिकारों और संसाधनों की सुरक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उसने राज्य के हितों की रक्षा नहीं की। उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से हुए आर्थिक नुकसान तथा लगभग 10,000 करोड़ रुपये की देनदारियां वर्तमान सरकार के लिए छोड़ दी गईं। उन्होंने प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए सभी से एकजुट होकर कार्य करने का आह्वान किया।

  • कारगिल विजय दिवस के 27 वर्ष, सेना प्रशिक्षण कमान ने ऑपरेशन विजय के अमर वीरों के शौर्य को किया नमन

    कारगिल विजय दिवस के 27 वर्ष, सेना प्रशिक्षण कमान ने ऑपरेशन विजय के अमर वीरों के शौर्य को किया नमन

    शिमला: मुख्यालय सेना प्रशिक्षण कमान (एआरटीआरएसी) ने आज कारगिल विजय दिवस की 27वीं वर्षगांठ पर वर्ष 1999 के ऑपरेशन विजय के दौरान देश की संप्रभुता की रक्षा करते हुए सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और सर्वाेच्च बलिदान को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

    स्मृति समारोह का शुभारंभ अनाडेल स्थित श्रद्धांजलि स्थल पर हुआ, जहां सेना प्रशिक्षण कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम ने समस्त अधिकारियों एवं जवानों की ओर से शहीद वीरों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर बिगुल की धुन पर ‘लास्ट पोस्ट’ बजाई गई तथा शहीदों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा गया।

    ऑपरेशन विजय के वीरों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए सेना कमांडर ने कारगिल की दुर्गम एवं बर्फीली चोटियों पर विषम परिस्थितियों में उनके असाधारण साहस, अटूट संकल्प और कर्तव्यनिष्ठा को याद किया। उन्होंने कहा कि कारगिल के वीरों की गौरवगाथा और उनका अदम्य जज्बा आज भी भारतीय सेना के लिए प्रेरणा का अक्षय स्रोत है तथा देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता की रक्षा के प्रति सेना की अटूट प्रतिबद्धता को और अधिक सुदृढ़ करता है।

    इस अवसर पर सेना कमांडर ने अन्नाडेल स्थित आर्मी हेरिटेज म्यूजियम का भी दौरा किया। मनोरम घाटी अनाडेल स्थित यह संग्रहालय विभिन्न पीढ़ियों के भारतीय सैनिकों के अद्वितीय साहस, वीरता और बलिदान की गौरवशाली गाथा को संजोए हुए है। सेना कमांडर ने संग्रहालय द्वारा बहुमूल्य सैन्य धरोहर, युद्ध स्मृतिचिह्नों तथा ऐतिहासिक अभिलेखों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे देशभक्ति और सैन्य सम्मान की विरासत आने वाली पीढ़ियों तक प्रभावी रूप से पहुंच रही है।

    समारोह का समापन मुख्यालय एआरटीआरएसी के सभी अधिकारियों एवं जवानों द्वारा राष्ट्रभक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा के सर्वाेच्च आदर्शों का पालन करने की सामूहिक शपथ के साथ हुआ। उन्होंने संकल्प लिया कि कारगिल के वीरों का सर्वाेच्च बलिदान सदैव राष्ट्र की सामूहिक स्मृति में अमर रहेगा और आने वाली पीढ़ियों सहित करोड़ों भारतीयों को निरंतर प्रेरित करता रहेगा।

     

  • ODF से सतत स्वच्छता की ओरः ग्रामीण स्वच्छता का नया अध्याय लिख रहा हिमाचल प्रदेश

    ODF से सतत स्वच्छता की ओरः ग्रामीण स्वच्छता का नया अध्याय लिख रहा हिमाचल प्रदेश

    नवाचार आधारित समाधान प्रशस्त कर रहे विकास की नई राह

    7,000 से अधिक गांवों को मिला वैज्ञानिक स्वच्छता प्रबंधन का लाभ

    शिमला: खुले में शौच मुक्त होना स्वस्थ, स्वच्छ और सम्मानजनक समाज की आधारशिला है। स्वच्छता के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए हिमाचल प्रदेश पहले ही खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) राज्य का दर्जा प्राप्त कर चुका है।अब राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है कि स्वच्छता के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियां दीर्घकाल तक कायम रहें और उन्हें वैज्ञानिक तथा पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सके।

    इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि राज्य में वैज्ञानिक फीकल स्लज मैनेजमेंट (एफएसएम) पहल को व्यापक स्तर पर लागू किया जा रहा है। यह महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम प्रदेश के लगभग 7,000 गांवों को लाभान्वित करेगा तथा सेप्टिक टैंकों और एकल गड्ढा शौचालयों से निकलने वाले मल अपशिष्ट का सुरक्षित संग्रहण, परिवहन, उपचार और निस्तारण सुनिश्चित करेगा।

    पिछले वर्षों में ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण और उपयोग को बढ़ावा देने में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। अधिकांश ग्रामीण परिवारों तक शौचालय सुविधाएं पहुंच चुकी हैं। हालांकि, स्वच्छता केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है। समय-समय पर सेप्टिक टैंकों और गड्ढों की सफाई तथा उनमें जमा होने वाले फीकल स्लज का सुरक्षित प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है।

    यदि इस अपशिष्ट का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण न किया जाए तो यह जल स्रोतों, कृषि भूमि और पर्यावरणीय दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों को प्रदूषित कर सकता है। इससे डायरिया, हैजा और टायफाइड जैसी जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ने के साथ-साथ पेयजल की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है।

    पर्वतीय प्रदेश हिमाचल में प्राकृतिक जल स्रोतों, झरनों, खड्डों और नदियों का संरक्षण अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग और जल शक्ति विभाग के माध्यम से एक अभिनव एवं व्यवहारिक मॉडल अपनाया है।

    राज्य सरकार ने अलग-अलग फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करने के बजाय सह-उपचार (को-ट्रीटमेंट) मॉडल को अपनाया है। इस मॉडल के अंतर्गत मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) का उपयोग फीकल स्लज के वैज्ञानिक उपचार के लिए किया जाएगा।

    यह व्यवस्था हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य के लिए विशेष रूप से उपयुक्त है, जहां सीमित भूमि, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां और व्यापक वन क्षेत्र बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के समक्ष चुनौतियां प्रस्तुत करते हैं। मौजूदा सुविधाओं का उपयोग करके राज्य सरकार संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित कर रही है, जिससे लागत में कमी आने के साथ पर्यावरणीय प्रभाव भी न्यूनतम होगा।

    को-ट्रीटमेंट मॉडल के अंतर्गत चयनित एसटीपी में आवश्यक आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है, जहां ग्रामीण क्षेत्रों से एकत्रित फीकल स्लज का वैज्ञानिक उपचार नगरों के सीवेज के साथ किया जाएगा। इससे अलग उपचार संयंत्रों की आवश्यकता नहीं होगी और अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण सुनिश्चित होगा।

    परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक अनुमोदन समिति का गठन किया गया है, जो उपचार क्षमता, अपशिष्ट उत्पादन के अनुमान और तकनीकी व्यवहार्यता का मूल्यांकन करने के बाद परियोजनाओं को स्वीकृत करेगी। अब तक प्रदेश में 30 को-ट्रीटमेंट परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। राज्य सरकार ने इस महत्त्वाकांक्षी पहल के लिए जल शक्ति विभाग को लगभग 15 करोड़ रुपये की राशि जारी की है। ग्रामीण विकास विभाग और जल शक्ति विभाग के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) ने विभागीय समन्वय को और मजबूत बनाया है तथा परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई है।

    पालमपुर और सुंदरनगर में मौजूदा एसटीपी के साथ को-ट्रीटमेंट सुविधाओं के निर्माण कार्य शुरू हो चुके हैं और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को इसका लाभ मिलना भी प्रारंभ हो गया है। यह दर्शाता है कि सरकार की योजनाएं धरातल पर प्रभावी रूप से साकार हो रही हैं।

    यह पहल हिमाचल प्रदेश की स्वच्छता यात्रा में एक महत्त्वपूर्ण पड़ाव है। अब ध्यान केवल शौचालय निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण स्वच्छता श्रृंखला के सुरक्षित और सतत प्रबंधन पर केंद्रित किया जा रहा है। इससे ओडीएफ उपलब्धि को स्थायी बनाए रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और जन स्वास्थ्य को भी नई मजबूती मिलेगी।

    राज्य सरकार ने 31 मार्च, 2027 तक सभी स्वीकृत को-ट्रीटमेंट परियोजनाओं को संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनके पूर्ण होने के बाद हजारों गांवों को वैज्ञानिक फीकल स्लज प्रबंधन सेवाएं उपलब्ध होंगी, जिससे जल स्रोतों का संरक्षण, ग्रामीण स्वच्छता में सुधार और पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ बनाने में सहायता मिलेगी।

    ओडीएफ उपलब्धि से आगे बढ़ते हुए हिमाचल प्रदेश अब सतत स्वच्छता प्रबंधन की दिशा में एक नया मानक स्थापित कर रहा है। यह पहल न केवल ग्रामीण स्वच्छता की एक महत्त्वपूर्ण कमी को दूर करेगी, बल्कि यह भी दर्शाती है कि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप नवाचार आधारित समाधान किस प्रकार विकास की नई राह प्रशस्त कर सकते हैं।

    स्वच्छता के क्षेत्र में यह परिवर्तनकारी पहल एक स्वच्छ, स्वस्थ, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल हिमाचल प्रदेश के निर्माण की दिशा में राज्य सरकार की दूरदर्शी सोच और प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।

     

  • मछुआरों को राहत देगी मुख्यमंत्री सम्मान निधि योजना

    मछुआरों को राहत देगी मुख्यमंत्री सम्मान निधि योजना

    शिमला: मत्स्य संरक्षण एवं प्रजनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हर वर्ष लागू होने वाले मछली पकड़ने के प्रतिबंध (क्लोज़ सीजन) के दौरान मछुआरों को होने वाली आर्थिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’ शुरू की है। इस योजना के तहत हिमाचल प्रदेश के जलाशयों में मत्स्य पालन से जुड़े पात्र मछुआरों को वित्तीय सहायता एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी।

    हर वर्ष मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि के दौरान आजीविका के लिए मुख्य रूप से मत्स्य पालन पर निर्भर बड़ी संख्या में मछुआरों की आय अस्थायी रूप से बंद हो जाती है, जिससे उनके परिवार आर्थिक संकट का सामना करते हैं। इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य सरकार ने प्रतिबंध अवधि के दौरान प्रत्येक पात्र लाभार्थी को प्रतिवर्ष 3,500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य गैर-मत्स्यन अवधि में समयबद्ध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर मछुआरों की आजीविका को सुरक्षित बनाना है।

    यह योजना पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों के माध्यम से जलाशयों में मत्स्य पालन से जुड़े सक्रिय एवं पात्र मछुआरों पर लागू होगी, जिनके पास वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस होगा। योजना का उद्देश्य प्रतिबंध अवधि के दौरान आर्थिक राहत प्रदान करना, मत्स्य संसाधनों के सतत प्रबंधन को बढ़ावा देना तथा मत्स्य क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले वास्तविक मछुआरों को सहयोग प्रदान करना है।

    पात्र मछुआरों को निर्धारित प्रपत्र में संबंधित मत्स्य सहकारी समिति के माध्यम से आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ वैध मत्स्य आखेट लाइसेंस, आधार कार्ड, परिवार रजिस्टर की प्रति, वैध एनएफडीपी पंजीकरण संख्या तथा सहकारी समिति की सदस्यता प्रमाण-पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने आवश्यक हैं। प्राप्त आवेदनों की जांच एवं सत्यापन संबंधित मत्स्य सहकारी समितियों तथा मत्स्य विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जाएगा। इसके उपरांत जिला स्तर पर उपनिदेशक मत्स्य अथवा सहायक निदेशक मत्स्य द्वारा अनुमोदन प्रदान किया जाएगा। स्वीकृत वित्तीय सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, लाभार्थियों का रिकॉर्ड तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मत्स्य निदेशालय द्वारा नियमित निगरानी एवं सत्यापन किया जाएगा, ताकि योजना का लाभ केवल वास्तविक पात्र मछुआरों तक पहुंचे।

    इस योजना से प्रतिवर्ष गोबिंद सागर, पौंग बांध, कोल बांध, चमेरा तथा रंजीत सागर जलाशयों से जुड़े लगभग 3,700 मछुआरें परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है। योजना के क्रियान्वयन पर राज्य सरकार द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 1.20 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है तथा समाज के प्रत्येक वर्ग को पर्याप्त सहयोग एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि मछुआरें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और मत्स्य क्षेत्र में उनका बहुमूल्य योगदान है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘मुख्यमंत्री मछुआरा सम्मान निधि योजना’ जलाशयों पर निर्भर मत्स्यजीवी परिवारों को मछली पकड़ने की प्रतिबंध अवधि के दौरान आवश्यक वित्तीय संबल प्रदान करेगी। राज्य सरकार मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने, मछुआरों की आय बढ़ाने तथा जलीय संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अनेक महत्त्वपूर्ण पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि यह योजना जनकल्याणकारी शासन व्यवस्था को और मजबूत बनाने तथा विकास का लाभ राज्य के दूरदराज़ एवं कमजोर वर्गों तक पहुंचाने की दिशा में एक और महत्त्वपूर्ण कदम है।