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  • मुख्यमंत्री ने डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने पर दी बधाई

    मुख्यमंत्री ने डी.के. शिवकुमार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री बनने पर दी बधाई

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बेंगलुरु में कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर डी.के. शिवकुमार को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री बेंगलूरू में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व में कर्नाटक विकास और जन कल्याण के नए आयाम स्थापित करेगा। उन्होंने शिव कुमार के सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दी।

  • शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख सुधारों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित

    शिक्षा क्षेत्र में प्रमुख सुधारों की प्रगति की समीक्षा बैठक आयोजित

    शिमला: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने आज यहां शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा क्षेत्र में चल रही विभिन्न योजनाओं एवं सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान की है तथा अनेक महत्त्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार स्नातक डिग्री पूर्ण कर चुके विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप समाहित डिग्री कार्यक्रम प्रारम्भ करने जा रही है। इस पहल के तहत विद्यार्थियों को विभिन्न उद्योगों के साथ कार्य करने का अवसर मिलेगा तथा उन्हें स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाएगा। इससे उनके कौशल विकास के साथ-साथ रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा महाविद्यालय स्तर पर विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने की योजना है, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर की भाषा दक्षता प्राप्त होगी और अंतरराष्ट्रीय रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने कौशल आधारित स्नातक पाठ्यक्रम (बी.वोक.) की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम से विद्यार्थियों से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है। इसी को देखते हुए सरकार इस योजना के अंतर्गत चार नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि बजट घोषणा के अनुरूप शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत एसएमसी अध्यापकों, मिड-डे मील कर्मियों, जल वाहकों, कंप्यूटर शिक्षकों तथा बहु-उद्देशीय कर्मियों के मानदेय में 500 रुपये प्रति माह की वृद्धि की गई है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षाओं में विद्यार्थियों के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए कक्षा 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए तथा कहा कि लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है। उन्होंने बायोमैट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य बनाने और अनुपालना न होने की स्थिति में वेतन कटौती जैसे कदमों पर भी बल दिया।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि विभिन्न श्रेणियों के 1,131 एसएमसी शिक्षकों की नियुक्तियां एलडीआर श्रेणी के माध्यम से की गई हैं। इसके अतिरिक्त 714 पीजीटी तथा 102 डीपीई पदों के लिए एलडीआर प्रक्रिया शीघ्र आरम्भ की जाएगी। कंप्यूटर शिक्षकों के मामलों में आवश्यक नियम संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने अधिकारियों को राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजे गए शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के भी निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणा के अनुरूप बागवानी विषय को विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा के रूप में आरम्भ किया जा चुका है। उन्होंने विभाग को विशेष रूप से बागवानी प्रधान क्षेत्रों में इस कार्यक्रम का और विस्तार करने के निर्देश दिए। ठाकुर ने विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण की समीक्षा करते हुए विभाग को इस प्रक्रिया में तेजी लाने तथा प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए, ताकि पात्र विद्यार्थी अपनी आवश्यकता एवं पसंद के अनुसार उपकरण खरीद सकें। उन्होंने उप-निदेशकों को निर्देश देते हुए कहा कि उपलब्ध करवाई गई राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए सुनिश्चित किया जाए। बैठक में शिक्षा मंत्री ने विभाग को उपनिदेशकों की पदोन्नति संबंधी विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की औपचारिकताएं शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिला अटॉर्नी के पद सृजित करने संबंधी प्रस्ताव मंत्रिमंडल के समक्ष शीघ्र ही प्रस्तुत किया जाएगा।

    शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान शैक्षणिक सत्र में राज्य के 148 सरकारी विद्यालयों को सीबीएसई संबद्धता प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि भविष्य में और अधिक विद्यालयों को सीबीएसई पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा। उन्होंने सभी ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश वाले विद्यालयों में बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर दिसंबर माह में परीक्षाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए।

    बैठक के दौरान विभाग के अधिकारियों द्वारा पीडीएनए कार्यों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं से क्षतिग्रस्त विद्यालयों के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्यों के लिए लोक निर्माण विभाग तथा हिमुडा को 19 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को गैर-कार्यशील केंद्रीय विद्यालयों से संबंधित लंबित औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा कर उन्हें जल्द संचालित करने के निर्देश दिए।

    शिक्षा मंत्री ने डॉ. वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना की भी समीक्षा की। इस योजना अन्तर्गत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज की दर से 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने इस योजना की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाने के निर्देश दिए ताकि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ सुनिश्चित हो सके।

    शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग, समग्र शिक्षा तथा शिक्षक समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआई) 2.0 में हिमाचल प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि प्राप्त की है। राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर छठा स्थान तथा राज्यों में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। इसके अतिरिक्त देश में दूसरे सर्वाेच्च ग्रेड वाली प्रचेस्टा-2 श्रेणी में द्वितीय स्थान हासिल किया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षा विभाग इसी समर्पण और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करते हुए अन्य राज्यों के लिए भी एक आदर्श स्थापित करेगा।

    बैठक में सचिव शिक्षा राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. हरीश कुमार अवस्थी सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • राज्यपाल ने प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता सिस्टर शिवानी के ध्यान प्रवचन कार्यक्रम की अध्यक्षता की

    राज्यपाल ने प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता सिस्टर शिवानी के ध्यान प्रवचन कार्यक्रम की अध्यक्षता की

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज शिमला में प्रसिद्ध आध्यात्मिक वक्ता सिस्टर शिवानी के ध्यान एवं प्रवचन कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस कार्यक्रम का आयोजन ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल ने ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा आध्यात्मिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों, आंतरिक शांति तथा समाज कल्याण के क्षेत्र में दिए जा रहे महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह संस्था वर्षों से सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और मूल्य-आधारित जीवनशैली को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

    राज्यपाल ने कहा कि आज की तेज रफ्तार दुनिया में भौतिक सफलता की दौड़ में अनेक लोग तनाव, चिंता और असंतोष का अनुभव कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी लोगों को ध्यान, आत्मचिंतन और संतुलित जीवनशैली के माध्यम से आत्म-जागरूकता विकसित करने में सहायता करती हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाज के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। गुप्ता ने सिस्टर शिवानी के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके सरल, व्यावहारिक और प्रेरणादायक संदेशों ने भारत सहित विश्वभर में लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।

    उन्होंने कहा सिस्टर शिवानी की शिक्षाएं हमें यह याद दिलाती है कि वास्तविक खुशी बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती। यह हमारे विचारों, मूल्यों और जीवन के प्रति हमारे दृष्टिकोण से उत्पन्न होती है। आज की व्यस्त जीवनशैली में यह संदेश विशेष रूप से प्रासंगिक है।

    राज्यपाल ने कहा कि ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय ने पारिवारिक संबंधों, प्रभावी संवाद, मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण, आत्म-सशक्तिकरण और सकारात्मक सोच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से युवा वर्ग इन शिक्षाओं से प्रेरणा लेकर आत्मविश्वास, अनुशासन और मजबूत नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन जी सकता है।

    राज्यपाल ने आध्यात्मिकता के महत्व पर बल देते हुए कहा कि जो व्यक्ति भीतर से शांत और सशक्त होते हैं, वे समाज और राष्ट्र निर्माण में अधिक सकारात्मक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता सद्भाव, सहिष्णुता, करुणा और साझा उत्तरदायित्व की भावना को बढ़ावा देती है। इससे पूर्व, सिस्टर शिवानी ने राज्यपाल को सम्मानित किया। राज्यपाल ने भी सिस्टर शिवानी को हिमाचली टोपी और शॉल भेंट कर सम्मानित किया।

    प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, पंथाघाटी की बीके सुनीता बहन ने कार्यक्रम में राज्यपाल का स्वागत किया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया, अन्य गणमान्य, श्रद्धालु तथा समाज के विभिन्न वर्गों के लोग भी उपस्थित रहे।

     

  • राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल से की भेंट, नौतोड़ वन भूमि की स्वीकृति प्रदान करने का किया आग्रह

    राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल से की भेंट, नौतोड़ वन भूमि की स्वीकृति प्रदान करने का किया आग्रह

    शिमला: राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जनशिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी ने सोमवार सायं लोक भवन में राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता से भेंट की। जगत सिंह नेगी ने राज्यपाल से जनजातीय क्षेत्रों में लोगों को नौतोड़ वन भूमि की स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। प्रदेश सरकार ने सत्ता संभालते ही वर्ष 2023 में नौतोड़ भूमि आवंटन को लेकर जनजातीय क्षेत्रों में वन संरक्षण अधिनियम 1980 को हटाने का आग्रह किया था। जगत सिंह नेगी ने कहा कि नौतोड़ वन भूमि की स्वीकृति संविधान के शेड्यूल 5 के अंतर्गत राज्यपाल के पास निहित है।

    वन संरक्षण अधिनियम 1980 को निरस्त किया जाए ताकि प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र और सीमावर्ती क्षेत्र की युवा पीढ़ी को नौतोड़ भूमि का लाभ मिल सके। उन्होंने अवगत करवाया कि प्रदेश में वर्ष 2014, 2016, और 2018 में एफसीए 1980 को निरस्त किया गया था, जिससे काफी लोगों को लाभ मिला था। जगत सिंह ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में लोगों के पास भूमि बहुत कम है और रोजगार की तलाश में लोग पलायन करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में लोगों की आर्थिकी सुदृढ़ करने और पलायन रोकने के लिए पात्र लोगों को नौतोड़ भूमि आबंटित करना आवश्यक है। नौतोड़ वन भूमि के तहत पात्र परिवारों को 20 बीघा तक भूमि दी जा सकती है। राज्यपाल ने इस विषय पर गंभीरता से चर्चा की और जल्द उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।

  • राज्यपाल ने तेलंगाना स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की

    राज्यपाल ने तेलंगाना स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन में आयोजित तेलंगाना स्थापना दिवस समारोह की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया। राज्यपाल ने कहा कि यह राष्ट्रव्यापी पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने तथा भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक समन्वय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरम्भ की गई है।

    इस अवसर पर राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि विभिन्न राज्यों के स्थापना दिवस मनाने से उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं तथा राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को पहचानने और सम्मानित करने का अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम नागरिकों के बीच भाईचारे, एकता और देशभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं तथा उन लोगों के प्रयासों और बलिदानों को स्मरण करने का अवसर प्रदान करते हैं, जिन्होंने अपने-अपने राज्यों के गठन और विकास के लिए कार्य किया।

    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ एक दूरदर्शी पहल है, जिसका उद्देश्य एकजुट, समृद्ध और सौहार्दपूर्ण भारत का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम लोगों को देश की विविधता को समझने और उसका सम्मान करने के लिए प्रेरित करता है तथा राष्ट्रीय एकता की भावना को और सुदृढ़ करता है। राज्यपाल ने कहा कि भारत भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं और रीति-रिवाजों की अपार विविधता वाला देश है, जिसकी एकता ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि लोग भले ही अलग-अलग राज्यों, समुदायों, जातियों या धर्मों से संबंधित हों लेकिन उनकी पहली पहचान भारतीय होने की है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों में एकता, सद्भाव, पारस्परिक सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का संदेश निरंतर प्रसारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

    उन्होंने कहा कि ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना नागरिकों को देश की सामूहिक आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए एकजुट होकर कार्य करने तथा एक मजबूत और समावेशी भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर राज्यपाल ने समारोह से जुड़े तेलंगाना के नागरिकों को सम्मानित भी किया।
    कार्यक्रम में राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज तथा अन्य गणमान्य अतिथि भी उपस्थित थे।

     

  • मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जनगणना-2027 में एक्टिव भागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जनगणना-2027 में एक्टिव भागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जनगणना-2027 के तहत चल रहे स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) अभियान में भाग लिया और ऑनलाइन पोर्टल se.census.gov.in के माध्यम से जनगणना संबंधी अपनी जानकारी दर्ज की। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश की जनगणना संचालन निदेशक दीप शिखा शर्मा और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया, इसकी प्रमुख विशेषताओं तथा नागरिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी।

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और 15 जून, 2026 तक अपनी स्व-गणना पूरी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जनगणना लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था और विकास की आधारशिला है, जो जनसंख्या, परिवारों की स्थिति, आवास, संसाधनों तथा सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाती है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विकास योजनाएं बनाई जाती हैं तथा जनकल्याणकारी नीतियों और कार्यक्रमों का निर्माण किया जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जनगणना-2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। प्रथम चरण 16 जून से 15 जुलाई, 2026 तक संचालित किया जाएगा, जोकि ‘गृह सूचीकरण एवं आवास जनगणना’ पर आधारित होगा। द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। गणनाकर्ता (एन्यूमरेटर) और पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) मोबाइल उपकरणों के माध्यम से घरों और परिवारों से संबंधित जानकारी एकत्रित करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के दुर्गम बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 11 से 30 सितंबर, 2026 तक होगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह कार्य 9 से 28 फरवरी, 2027 तक संपन्न किया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस राष्ट्रीय महत्त्व के अभियान को सफल बनाने के लिए गणनाकर्ताओं, पर्यवेक्षकों तथा अन्य जनगणना अधिकारियों को सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाकर सहयोग करने का आग्रह किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक देहरा कमलेश ठाकुर तथा मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार भी उपस्थित थे।

  • सूचना एवं जन संपर्क विभाग में निजी सहायक सदानन्द कपिल सेवानिवृत्त

    सूचना एवं जन संपर्क विभाग में निजी सहायक सदानन्द कपिल सेवानिवृत्त

    शिमला: सूचना एवं जन सम्पर्क निदेशालय में आज निजी सहायक सदानन्द कपिल की सेवानिवृत्ति पर विदाई समारोह आयोजित किया गया। सदानन्द कपिल ने 18 जनवरी, 1989 को विभाग में आशुटंकक के पद पर सेवाएं शुरू कीं। लगभग 37 वर्षों तक विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए उन्होंने जिला लोक सम्पर्क अधिकारी कार्यालय बिलासपुर, किन्नौर, कांगड़ा तथा निदेशालय में अपनी सेवाएं दीं।

    इस अवसर पर संयुक्त निदेशक उत्तम चंद कौंडल ने उनके स्वस्थ, खुशहाल और सुखद जीवन की कामना की और उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने सदैव कर्तव्य-निष्ठा, ईमानदारी एवं अनुशासन के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी उन्हें सुखद, स्वस्थ एवं आनंदमय जीवन के लिए शुभकामनाएं दीं।

  • सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले डोप टेस्ट अनिवार्य होगा: मुख्यमंत्री

    सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले डोप टेस्ट अनिवार्य होगा: मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को प्रशासनिक सचिवों के साथ आयोजित बैठक में बजट घोषणा के अनुसार चतुर्थ श्रेणी के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित ग्रेच्युटी एवं अवकाश नकदीकरण के भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागाध्यक्षों को करुणामूलक आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों का पूरा विवरण उपलब्ध करवाने को कहा ताकि प्रदेश सरकार इन मामलों में उचित निर्णय ले सके।

    मुख्यमंत्री ने चिट्टा तस्करी में संलिप्त पाए गए सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने चिट्टा के विरुद्ध जन आंदोलन शुरू किया है तथा नशा माफिया के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है। युवाओं को नशे की बुराई से बचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि सरकारी सेवा में नियुक्ति से पहले अभ्यर्थियों का डोप टेस्ट अनिवार्य करने और इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने को कहा। मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों से रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए, ताकि इन्हें शीघ्र भरा जा सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट के 500 पद भरने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने हाल ही में आए तूफान के कारण वन भूमि पर गिरे और उखड़े पेड़ों की जानकारी एकत्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन पेड़ों को हटाने के लिए 1 जून से विशेष अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि गिरे हुए पेड़ों को हटाने में देरी से राज्य को संसाधनों की हानि होती है इसलिए वन विभाग प्राथमिकता के आधार पर इनका शीघ्र निष्पादन और निस्तारण सुनिश्चित करे।

    मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत एवं ओंकार चंद शर्मा, प्रधान सचिव देवेश कुमार, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर और आशीष सिंहमार सहित अन्य प्रशासनिक सचिव इस बैठक में उपस्थित थे।

     

  • प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज पर दे रही ऋण सुविधा: मुख्यमंत्री

    प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज पर दे रही ऋण सुविधा: मुख्यमंत्री

    शिमला: पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से लाभान्वित अनुसूचित जनजातीय क्षेत्र के 21 विद्यार्थियों ने आज यहां मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिह सुक्खू से भेंट की और अपने शैक्षणिक अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योेजना  के अंतर्गत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए 20 लाख रुपये तक का ऋण एक प्रतिशत ब्याज दर पर उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने विद्यार्थियों से इस सुविधा का भरपूर लाभ उठाकर जीवन में अपने लक्ष्य हासिल करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में विभिन्न सुधार किए हैं ताकि विद्यार्थियों को उनके घरों के निकट गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो सके।

     

    सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के 156 से अधिक स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू किया है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को कला, विज्ञान और वाणिज्य संकायों में शिक्षा प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के व्यावहारिक प्रयासों के परिणामस्वरूप शिक्षा क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है और हाल ही में किए गए एक राष्ट्रीय सर्वेक्षण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में हिमाचल प्रदेश 13वें स्थान से बढ़कर 6वें स्थान पर पहुंच गया है।

     

     

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बेटियों की विवाह योग्य आयु को भी लड़कों के समान 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में अनुसूचित जनजाति समुदाय की शिक्षा में भूमिका से लोगों को अवगत करवाने के लिए 10 मई से 9 जून, 2026 तक अनुसूचित जनजाति गरीमा उत्सव मनाया जा रहा है।
    इस अवसर पर शिक्षा सचिव राकेश कंवर, उच्च शिक्षा निदेशक हरीश कुमार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

     

  • यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एचएसपीसीबी सख्त, यमुनानगर के उद्योगों को दिए कड़े निर्देश

    यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए एचएसपीसीबी सख्त, यमुनानगर के उद्योगों को दिए कड़े निर्देश

    चंडीगढ़: यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण को रोकने और नदी के पर्यावरण तंत्र को सुरक्षित करने के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने पूरी तैयारी कर ली है। यमुना एक्शन प्लान (वाईएपी) के तहत जिला स्तर पर निगरानी प्रणाली को बेहद मजबूत और कड़ा कर दिया गया है।

    एचएसपीसीबी के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह के आदेशानुसार और सदस्य सचिव श्री योगेश कुमार के कुशल क्रियान्वयन के तहत सभी संबंधित जिलों में वाईएपी की गतिविधियों को समय पर पूरा करने के लिए एसईई और सीईई रैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

    इसी कड़ी में आज यमुनानगर के एचएसपीसीबी के एसईई-सह-नोडल अधिकारी श्री नवीन गुलिया की अध्यक्षता में स्थानीय औद्योगिक संगठनों के साथ जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मेटल इंडस्ट्रीज एसोसिएशंस, बल्लारपुर पेपर मिल, सरस्वती शुगर मिल और ब्लू क्राफ्ट स्टार्च मिल सहित कई प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

    बैठक के दौरान नोडल अधिकारी श्री नवीन गुलिया ने पूर्ण पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी उद्योगों के लिए चार बड़े और अनिवार्य निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि जिन उद्योगों का अपशिष्ट जल डिस्चार्ज 10 केएलडी से कम है, उन्हें भी अब अनिवार्य रूप से ऑनलाइन फ्लो मीटर और पीटीजेड कैमरों से लैस रियल-टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना होगा।

    उन्होंने कहा कि यमुना नदी में मिलने वाले स्थानीय नालों में कोई भी उद्योग बिना उपचारित या आधा उपचारित केमिकल या गंदा पानी नहीं बहा सकेगा। इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) को लगातार और पूरी क्षमता व कुशलता के साथ चलाना अनिवार्य होगा।

    उद्योगों को ‘हजार्डस एंड अदर वेस्ट्स रूल्स’ को सख्ती से लागू करते हुए खतरनाक कचरे का वैज्ञानिक भंडारण और सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना होगा। बोर्ड के इन कड़े निर्देशों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए बैठक में उपस्थित औद्योगिक प्रतिनिधियों और एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नदी की सुरक्षा के लिए पूरा सहयोग देने का वादा किया है।

    बैठक में एपीएस भट्टी, हंसराज बारटा, श्रीकांत गर्ग, पारस सेठी, प्रदीप गुप्ता, दीक्षांत आहूजा व कई गणमान्य उद्योगपति शामिल रहे।