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  • राज्य सरकार ने जुलाई माह में करुणामूलक रोजगार नीति के तहत 94 ग्रुप-सी कर्मचारियों को दी नियुक्ति

    राज्य सरकार ने जुलाई माह में करुणामूलक रोजगार नीति के तहत 94 ग्रुप-सी कर्मचारियों को दी नियुक्ति

    शिमला: राज्य सरकार ने दिवंगत सरकारी कर्मचारियों के परिवारों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए निदेशालय भर्ती, हिमाचल प्रदेश के माध्यम से जुलाई 2026 के दौरान करुणामूलक रोजगार नीति के तहत विभिन्न विभागों में 94 ग्रुप-सी कर्मचारियों को नियुक्ति प्रदान की है।

    यह नियुक्तियां जल शक्ति, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, गृह तथा बागवानी विभागों में की गई हैं। सरकार ने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिए हैं कि वे करुणामूलक नियुक्ति के वास्तविक मामलों को प्राथमिकता के आधार पर भेजें, ताकि पात्र आश्रितों को बिना अनावश्यक विलंब के रोजगार उपलब्ध करवाया जा सके। करुणामूलक रोजगार नीति के तहत नियुक्ति प्राप्त करने वाले कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने संबंधित विभागों को करुणामूलक नियुक्ति के मामलों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा करने के निर्देश दिए, जिससे वर्षों से लंबित पात्र परिवारों को राहत मिली है।

    ऊना जिले के कुठेड़ा खैरला निवासी अक्षय कुमार ने बताया कि उनके पिता सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग में ऑपरेटर के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2018 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने उसी वर्ष करुणामूलक रोजगार के लिए आवेदन किया, लेकिन उनका मामला वर्ष 2018 से 2022 तक लंबित रहा। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के बाद उनके मामले पर कार्रवाई शुरू हुई। फरवरी, 2026 में उन्हें चयन की सूचना मिली, मार्च 2026 में उन्होंने टाइपिंग परीक्षा दी और जुलाई, 2026 में उन्हें नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ।

    शिमला जिले के कोटखाई की शालू चौहान ने बताया कि उनके पिता जल शक्ति विभाग में पंप ऑपरेटर थे और वर्ष 2013 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में उनकी करुणामूलक नियुक्ति की मांग पर कोई विचार नहीं किया गया। लेकिन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में वर्तमान कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में उनके मामले का शीघ्र निपटारा किया गया। उन्होंने मार्च 2026 में टाइपिंग परीक्षा दी और जुलाई, 2026 में उन्हें नियुक्ति पत्र मिला इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का हृदय से आभार व्यक्त किया।

    कांगड़ा जिले के बैजनाथ की आकांक्षा कपूर ने बताया कि उनके पिता हाइड्रोलॉजी विभाग में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2019 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में उनके करुणामूलक रोजगार के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वर्तमान राज्य सरकार ने उनके मामले को प्राथमिकता से निपटाते हुए जुलाई, 2026 में उन्हें नियुक्ति प्रदान की।

    सिरमौर जिले के नाहन निवासी लोकेश चौहान ने बताया कि उनके पिता जल शक्ति विभाग में कार्यरत थे और वर्ष 2014 में उनका निधन हो गया था। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने उन्हें जुलाई, 2026 में करुणामूलक आधार पर रोजगार प्रदान किया, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया है।
    हमीरपुर जिले के कुठेड़ा की शिवानी कुमारी ने स्वास्थ्य विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के पद पर नियुक्ति मिलने पर मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। उनके पति स्वास्थ्य विभाग में डेंटल मैकेनिक के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2023 में उनका निधन हो गया था।

    राज्य सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि विभिन्न विभागों द्वारा पूर्व में विभिन्न कारणों से अस्वीकृत किए गए करुणामूलक नियुक्ति के मामलों की भी समीक्षा की जाएगी। एकमुश्त विशेष पहल के तहत वास्तविक एवं पात्र अस्वीकृत मामलों की दोबारा जांच की जाएगी तथा नीति के प्रावधानों के अनुरूप जहां आवश्यक होगा, वहां उपयुक्त छूट प्रदान करने पर विचार किया जाएगा, ताकि पात्र परिवारों को राहत मिल सके।

    राज्य सरकार करुणामूलक रोजगार के पात्र मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए प्रतिबद्ध है तथा यह सुनिश्चित करेगी कि इस नीति का लाभ सभी पात्र एवं जरूरतमंद परिवारों तक निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पहुंचा सके।

  • नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर शिमला में सर्वदलीय कैंडल मार्च

    नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर शिमला में सर्वदलीय कैंडल मार्च

    शिमला : नीट परीक्षा पेपर लीक मामले को लेकर आज शिमला में विभिन्न दलों और आम जनता की ओर से सर्वदलीय कैंडल मार्च निकाला गया। मार्च का नेतृत्व मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने किया। कैंडल मार्च इंदिरा गांधी राज्य खेल परिसर से शुरू होकर स्कैंडल प्वाइंट होते हुए रिज स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा तक पहुंचा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों को संविधान की प्रस्तावना की शपथ भी दिलाई। पत्रकारों से बातचीत करते हुए ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि यह मार्च विभिन्न दलों के सहयोग से निकाला गया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे बच्चों को न्याय दिलाने की यह एक कोशिश है। हिमाचल प्रदेश की जनता न्याय की इस लड़ाई में संघर्ष कर रहे सभी युवाओं के साथ खड़ी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता होनी चाहिए, ताकि युवाओं को उनकी मेहनत का उचित फल मिल सके। उन्होंने नीट परीक्षा विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले युवाओं के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की। भाजपा पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां-जहां भाजपा की सरकारें होती हैं, वहां पेपर लीक के मामले सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पिछली भाजपा सरकार के दौरान पुलिस भर्ती का पेपर लीक हुआ था। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन आयोग से जुड़े भर्ती परीक्षाओं के पेपर भी लीक हुए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आते ही आयोग को भंग कर उसके स्थान पर राज्य चयन आयोग का गठन किया गया और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।

    सुक्खू ने कहा कि लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बच्चों की न्याय की लड़ाई को अपनी आवाज दी है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री ने इस सफल आयोजन के लिए मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआईएम) और आम जनता का धन्यवाद किया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, विधायक कुलदीप राठौर और संजय रतन, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार, महासचिव विनोद जिंटा, पूर्व विधायक राकेश सिंघा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेंद्र चौहान, पार्षद, कांग्रेस तथा सीपीआईएम के नेताओं सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

  • हिमाचल प्रदेश ने निवेश अनुकूलता सूचकांक-2026 में पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों में तीसरा स्थान हासिल किया

    हिमाचल प्रदेश ने निवेश अनुकूलता सूचकांक-2026 में पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों में तीसरा स्थान हासिल किया

    शिमला : राज्य सरकार की निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने की प्रतिबद्धता और निरंतर प्रयासों को नीति आयोग द्वारा जारी ‘इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स (आईएफआई)-2026’ में व्यापक सराहना मिली है। इस सूचकांक में हिमाचल प्रदेश ने पर्वतीय एवं उत्तर-पूर्वी राज्यों की श्रेणी में तीसरा स्थान प्राप्त करते हुए ‘फ्रंटरनर’ श्रेणी में अपनी जगह बनाई है। यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा व्यापार में सुगमता को बढ़ावा देने तथा विभिन्न नीतिगत सुधारों के माध्यम से निवेशकों का विश्वास मजबूत करने के लिए किए गए सतत प्रयासों का परिणाम है।

    इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने लगातार बिजनेस रिफॉर्म्स एक्शन प्लान पर विशेष बल देते हुए व्यापार सुगमता को बढ़ावा दिया है। राज्य की यह उत्कृष्ट रैंकिंग सरकार के सुधारोन्मुखी दृष्टिकोण, पारदर्शी, प्रभावी और निवेशक-अनुकूल व्यवस्था विकसित करने की प्रतिबद्धता की सफलता का प्रमाण है।
    उन्होंने कहा कि सूचकांक के विभिन्न प्रमुख मानकों में राज्य का उत्कृष्ट प्रदर्शन सतत औद्योगिक विकास तथा रोजगार सृजन के लिए मजबूत आधार को दर्शाता है। इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026 में विशेष रूप से मानव संसाधन, महिलाओं की भागीदारी, संस्थागत प्रभावशीलता, नियामकीय वातावरण तथा निवेशक-अनुकूल प्रशासनिक व्यवस्था को हिमाचल प्रदेश की प्रमुख ताकत के रूप में रेखांकित किया गया है, जो राज्य को निवेश के लिए आकर्षक बनाते हैं।

    अवसंरचना स्तंभ में हिमाचल प्रदेश ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि लॉजिस्टिक्स, डिजिटल कनेक्टिविटी, विद्युत अवसंरचना तथा औद्योगिक सुविधाओं में राज्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन को दर्शाती है।
    संसाधन स्तंभ में भी राज्य प्रथम स्थान पर रहा है। इसका श्रेय उच्च श्रमबल भागीदारी, सुदृढ़ मानव संसाधन संकेतकों तथा देश में महिलाओं की सर्वाधिक कार्यबल भागीदारी दरों में से एक होने को जाता है।
    नियामकीय सुगमता स्तंभ में हिमाचल प्रदेश ने चौथा स्थान प्राप्त किया, जो राज्य में अनुकूल कारोबारी वातावरण, निवेशक सुविधा तंत्र तथा प्रभावी नियामकीय व्यवस्था को दर्शाता है।
    संस्थागत वातावरण स्तंभ में भी राज्य का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा, जिसका आधार कम साइबर अपराध दर, प्रभावी शिकायत निवारण प्रणाली तथा स्थिर नियामकीय वातावरण रहा।
    व्यावसायिक वातावरण स्तंभ में हिमाचल प्रदेश पांचवें स्थान पर रहा, जो राज्य में लागू किए जा रहे निरंतर सुधारों की सफलता को रेखांकित करता है।

    उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए किए गए प्रयासों की महत्त्वपूर्ण मान्यता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार औद्योगिक विकास को गति देने, निवेश आकर्षित करने तथा पूरे हिमाचल प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।
    प्रधान सचिव (उद्योग) एम. सुधा देवी ने बताया कि निर्माण अनुमति से जुड़े सुधारों, स्वास्थ्य क्षेत्र सुधारों तथा सेवा क्षेत्र सुधारों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हिमाचल प्रदेश को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में भी स्थान प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि राज्य की सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से वर्तमान में 30 विभागों की 180 सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे निवेशकों एवं उद्यमों को त्वरित, सरल और प्रभावी सेवाएं सुनिश्चित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि उद्योग विभाग राज्य की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने तथा प्रगतिशील सुधारों एवं हितधारक-केंद्रित सुशासन के माध्यम से निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए भविष्य में भी निरंतर कार्य करता रहेगा।

  • मुख्यमंत्री ने विदेश से एमबीबीएस करने वाले स्नातकों की इंटर्नशिप अवधि एक वर्ष करने के निर्देश दिए

    मुख्यमंत्री ने विदेश से एमबीबीएस करने वाले स्नातकों की इंटर्नशिप अवधि एक वर्ष करने के निर्देश दिए

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पात्र विदेशी चिकित्सा महाविद्यालयों से एमबीबीएस कर चुके और कोविड-19 महामारी में उत्पन्न अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से अध्ययन करने वाले स्नातकों को एक वर्ष की इंटर्नशिप की अनुमति प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने आज यहां विद्यार्थियों और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार प्रभावित विद्यार्थियों की चिंताओं का समाधान निष्पक्ष, व्यावहारिक और छात्र हितैषी दृष्टिकोण के साथ करेगी। प्रदेश सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोविड-19 महामारी के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों के कारण प्रभावित योग्य विद्यार्थियों को किसी प्रकार की हानि न उठानी पड़े।

    सुक्खू ने कहा कि विदेश से चिकित्सा स्नातक करने वाले विद्यार्थियों की इंटर्नशिप अवधि को लेकर अनिश्चितता उत्पन्न हो गई थी, क्योंकि एक ही शैक्षणिक बैच के विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग अवधि निर्धारित की गई थी। कुछ विद्यार्थियों को एक वर्ष की इंटर्नशिप करने की अनुमति दी गई, जबकि समान परिस्थितियों में कोविड-19 के दौरान पढ़ाई करने वाले अन्य छात्रों को दो वर्ष की इंटर्नशिप करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने महामारी के दौरान ऑनलाइन माध्यम से पढ़ने वाले विदेशी चिकित्सा स्नातकों के लिए प्रतिपूरक प्रशिक्षण अवधि की उपयुक्तता का आकलन करने का अधिकार राज्य सरकारों को सौंपा है। एनएमसी के प्रावधानों तथा विद्यार्थियों द्वारा झेली गई वास्तविक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने पात्र अभ्यर्थियों के लिए इंटर्नशिप अवधि एक वर्ष निर्धारित करने का निर्णय लिया है।

    मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर आवश्यक आदेश जल्द जारी किए जाएं, ताकि प्रभावित छात्र अविलंब अपनी इंटर्नशिप शुरू या पूरी कर सकें। इस निर्णय से प्रभावित चिकित्सा स्नातकों को बड़ी राहत मिलेगी और वे अनावश्यक बाधाओं के बिना अपने चिकित्सा करियर को आगे बढ़ा सकेंगे। इससे राज्य में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी बनी रहेगी। बैठक में प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान, स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार तथा चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. गोपाल बेरी भी उपस्थित थे।

  • राज्य में सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू की जाएगी

    राज्य में सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू की जाएगी

    सड़क सुरक्षा के प्रति सक्रिय एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना रही है राज्य सरकारः मुख्यमंत्री

    शिमला: वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी आने के बावजूद, हिमाचल प्रदेश सरकार ने सड़क सुरक्षा को और अधिक सदृढ़ करने तथा दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देश्य से एक और महत्त्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य सरकार ने लोक निर्माण विभाग के अधीन आने वाली सड़कों के लिए सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति लागू करने को मंजूरी प्रदान की है, ताकि सड़क सुरक्षा को राज्य में सड़कों की योजना, डिज़ाइन, निर्माण, संचालन और रखरखाव का अभिन्न हिस्सा बनाया जा सके। विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्य में दुर्गम भू-भाग, तीखे मोड़ और प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियां अतिरिक्त जोखिम उत्पन्न करती हैं, सड़क सुरक्षा एक गंभीर सार्वजनिक चिंता का विषय बन चुकी है। सड़क सुरक्षा संबंधी कमियों की व्यवस्थित पहचान और उनके प्रभावी समाधान की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने भारतीय सड़क कांग्रेस के दिशा-निर्देशों एवं सिफारिशों के अनुरूप एक व्यापक सड़क सुरक्षा ऑडिट ढांचा अपनाया है। इस नीति का उद्देश्य सड़क अवसंरचना में सुधार करना, दुर्घटनाओं के जोखिम को कम करना तथा सभी सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक सुरक्षित सड़क नेटवर्क विकसित करना है। इस नीति के अंतर्गत किसी भी सड़क परियोजना के पांच महत्त्वपूर्ण चरणों में सड़क सुरक्षा ऑडिट किया जाएगा। इनमें व्यवहार्यता अथवा प्रारंभिक डिज़ाइन चरण, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) चरण, निर्माण चरण, सड़क को यातायात के लिए खोलने से पूर्व का चरण तथा पहले से निर्मित सड़कों का ऑडिट शामिल है। व्यवहार्यता चरण में ऑडिटर मार्ग चयन, सड़क की संरेखण (अलाइनमेंट), चौराहों, क्रॉस-सेक्शन तथा मौजूदा सड़क नेटवर्क से संपर्क का परीक्षण करेंगे। विस्तृत डिज़ाइन चरण में ज्यामितीय डिज़ाइन, सड़क संकेतक, सड़क चिह्नांकन, प्रकाश व्यवस्था, संवेदनशील सड़क उपयोगकर्ताओं (जैसे पैदल यात्री एवं साइकिल चालक) के लिए सुविधाएं तथा सड़क किनारे सुरक्षा प्रावधानों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। निर्माण चरण के दौरान ऑडिट में कार्यस्थल सुरक्षा, यातायात प्रबंधन योजना, श्रमिकों की सुरक्षा तथा पूर्व में दिए गए ऑडिट सुझावों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी। सड़क को यातायात के लिए खोलने से पूर्व दिन एवं रात्रि दोनों समय विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, पहले से निर्मित सड़कों का भी समय-समय पर ऑडिट किया जाएगा ताकि उभरते हुए जोखिमों और सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान कर उनका समय पर समाधान किया जा सके। नीति के अनुसार सड़क सुरक्षा ऑडिट केवल भारतीय सड़क कांग्रेस द्वारा प्रमाणित ‘रोड सेफ्टी ऑडिटर’ अथवा ऐसे विभागीय अधिकारी एवं कर्मचारी करेंगे जिन्होंने 15 दिवसीय सड़क सुरक्षा ऑडिट प्रमाणन प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया हो तथा पर्वतीय सड़कों के निर्माण का कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखते हों। साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि ऑडिटर स्वतंत्र हों और जिस परियोजना का ऑडिट कर रहे हों, उसके निर्माण, क्रियान्वयन या संचालन से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध न हो। संस्थागत व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में एक समर्पित ‘रोड सेफ्टी सेल’ स्थापित किया जाएगा। यह सेल सड़क सुरक्षा ऑडिट कार्यक्रम के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा, प्रगति का आकलन करेगा, योग्य ऑडिटरों का पैनल तैयार करेगा, अनुपालन रिपोर्टों की समीक्षा करेगा तथा अभियंताओं और अन्य हितधारकों के लिए प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगा। नीति में यह भी प्रावधान किया गया है कि विभाग के अभियंता-प्रमुख द्वारा प्रत्येक तिमाही में कार्यक्रम की समीक्षा की जाएगी, ताकि इसकी प्रभावशीलता सुनिश्चित की जा सके और आवश्यक सुधार किए जा सकें। नीति का एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान यह है कि एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली प्रत्येक सड़क परियोजना में सड़क सुरक्षा ऑडिट के लिए परियोजना लागत का एक प्रतिशत अनिवार्य रूप से निर्धारित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सड़क संकेतकों, सड़क चिह्नांकन, यातायात शांत करने के उपायों, कार्यस्थल प्रबंधन, पैदल यात्री सुविधाओं, साइकिल ट्रैक, पर्वतीय सड़कों, सुरक्षा अवरोधकों, चौराहों तथा ज्यामितीय डिज़ाइन संबंधी भारतीय सड़क कांग्रेस के विभिन्न मानकों एवं मैनुअलों का पालन करना भी अनिवार्य होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हिमाचल प्रदेश में निर्मित सड़कें सर्वाेच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों और सभी सड़क उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित यात्रा उपलब्ध कराएं। ‘राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश के सड़क नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, अधिक सक्षम और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रत्येक सड़क परियोजना में मानव जीवन और सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सड़क सुरक्षा ऑडिट नीति विकास के प्रत्येक चरण में संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते आवश्यक सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करेगी। सुरक्षित सड़कें न केवल दुर्घटनाओं को रोकती हैं और लोगों का जीवन बचाती हैं, बल्कि राज्य में आर्थिक विकास तथा बेहतर संपर्क व्यवस्था को भी बढ़ावा देती हैं। राज्य सरकार स्वतंत्र सड़क सुरक्षा ऑडिट को संस्थागत रूप देकर तथा सभी स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करके सड़क सुरक्षा के प्रति सक्रिय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपना रही है। उन्होंने दोहराया कि मानव जीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और प्रदेश में सुरक्षित एवं टिकाऊ सड़क अवसंरचना विकसित करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। राज्य सरकार द्वारा सड़क सुरक्षा एवं यातायात प्रबंधन के क्षेत्र में किए गए निरंतर प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। वर्ष 2023 की तुलना में वर्ष 2024 में हिमाचल प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं में 6.48 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। वर्ष 2023 में जहां कुल 2,253 सड़क दुर्घटनाए दर्ज की गई थीं, वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 2,107 रह गई। इसी प्रकार, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मृत्यु संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2023 में 892 लोगों की मृत्यु हुई थी, जबकि वर्ष 2024 में यह संख्या घटकर 806 रह गई। इसके अतिरिक्त, सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वालों की संख्या भी वर्ष 2023 के 3,449 से घटकर वर्ष 2024 में 3,290 हो गई।  
  • भाजपा सरकार में नीलाम हुए भर्ती पेपर, लाखों युवाओं के साथ हुआ धोखाः कांग्रेस

    भाजपा सरकार में नीलाम हुए भर्ती पेपर, लाखों युवाओं के साथ हुआ धोखाः कांग्रेस

    शिमला: स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल तथा कृषि मंत्री चन्द्र कुमार ने केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा पर झूठ बोलकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। आज यहां जारी एक बयान में दोनों मंत्रियों ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में भर्ती पेपरों की मंडी सजी हुई थी और उस मंडी में पेपर खुलेआम नीलाम होते थे, जबकि तत्कालीन मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर सोए रहे। उन्होंने कहा कि जय राम सरकार के कार्यकाल में पुलिस भर्ती का पेपर लीक हुआ और हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ चयन आयोग में खुलेआम भर्ती पेपरों की नीलामी होती रही, लेकिन एक भी दोषी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने प्रदेश के लाखों बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया और अपने चहेतों को नौकरियां बांटी।

    धनी राम शांडिल और चन्द्र कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद पेपर लीक करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई और उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार ने युवाओं के साथ धोखा करने वालों पर सख्त कार्रवाई की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार पारदर्शिता और ईमानदारी में विश्वास रखती है तथा मेरिट के आधार पर युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए वचनबद्ध है।

    पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ चयन आयोग को भंग कर उसके स्थान पर राज्य चयन आयोग का गठन किया। उन्होंने कहा कि राज्य चयन आयोग के माध्यम से पूरी पारदर्शिता के साथ भर्ती परीक्षाएं आयोजित करवाई जा रही हैं और वर्तमान सरकार के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है। दोनों मंत्रियों ने कहा कि जगत प्रकाश नड्डा द्वारा हिमाचल के संदर्भ में पेपर लीक का मुद्दा उठाना भाजपा सरकार के पापों की याद दिलाता है, क्योंकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है। उन्होंने कहा कि तथ्यों के विपरीत बयान देकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जय राम सरकार के कार्यकाल में पेपर लीक के सारे रिकॉर्ड टूटे और बेरोजगार युवाओं के साथ छल हुआ।

    भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के कार्यकाल में देश के विभिन्न हिस्सों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं। हाल ही में नीट परीक्षा से जुड़े विवादों ने भी देशभर के करोड़ों विद्यार्थियों और अभिभावकों में चिंता पैदा की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करनी चाहिए। युवाओं पर बल प्रयोग की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे युवाओं की आवाज को केंद्र सरकार दबाने का प्रयास कर रही है। इसी कारण उन पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया और प्रदर्शन में शामिल लड़कियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

  • मुख्यमंत्री ने नंद लाल शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया

    मुख्यमंत्री ने नंद लाल शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड (एसजेवीएनएल) के पूर्व अध्यक्ष नंद लाल शर्मा के निधन पर शोक व्यक्त किया है। नंद लाल शर्मा का आज प्रातः हरियाणा के पंचकूला में 63 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नंद लाल शर्मा ने विभिन्न पदों पर रहते हुए प्रदेश की जनता की सेवा की। उन्होंने कहा कि एसजेवीएनएल को सुदृढ़ बनाने में भी नंद लाल शर्मा का योगदान सराहनीय रहा। सुक्खू ने ईश्वर से दिवंगत की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और शोकाकुल परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

  • राज्यपाल ने ‘टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ की समीक्षा की: टीबी उन्मूलन की दिशा में हिमाचल की प्रगति की सराहना

    राज्यपाल ने ‘टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ की समीक्षा की: टीबी उन्मूलन की दिशा में हिमाचल की प्रगति की सराहना

    राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले टीबी मुक्त हिमाचल बनाने के लिए जनभागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोकभवन में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (एनटीईपी) के तहत टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने राज्य की नवाचार पहलों, सामुदायिक सहभागिता और जनकेंद्रित दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल राष्ट्रीय लक्ष्य से पहले क्षय रोग उन्मूलन के उद्देश्य की प्राप्ति की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हिमाचल प्रदेश के उप-मिशन निदेशक एवं राज्य टीबी अधिकारी डॉ. राजेश गुलेरिया ने राज्य में कार्यक्रम के तहत संचालित की जा रही गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रस्तुतीकरण दिया। प्रदेश में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम के तहत किए गए निरंतर एवं प्रभावी प्रयासों के परिणामस्वरूप वर्ष, 2024 में टीबी के 15,455 मामलों की तुलना में वर्ष, 2025 में टीबी के मामले 14,636 रह गए। बैठक में राज्यपाल को अवगत करवाया गया कि केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 24 मार्च, 2026 को 100 दिवसीय ‘टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0’ का शुभारंभ किया था। अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश में 5,147 उच्च जोखिम वाले गांवों की पहचान की गई, जिनमें से 2,547 गांवों (49 प्रतिशत) को आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से पहले ही कवर किया जा चुका है। इन शिविरों के माध्यम से उच्च जोखिम समूहों के लगभग 1.85 लाख लोगों की एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे तकनीक से जांच की गई है। इससे टीबी की समय पर पहचान और शीघ्र उपचार सुनिश्चित हो रहा है। राज्यपाल को जानकारी दी गई कि टीबी मुक्त ग्राम पंचायत पहल के तहत वर्ष, 2023 में 731 ग्राम पंचायतों, वर्ष, 2024 में 823 ग्राम पंचायतों तथा वर्ष, 2025 में 1,052 ग्राम पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया गया, जो रोग उन्मूलन की दिशा में निरन्तर हो रही प्रगति को दर्शाता है। बैठक में बताया गया कि आयुष्मान आरोग्य शिविरों के माध्यम से उच्च जोखिम वाले गांवों एवं शहरी वार्डों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है। इन शिविरों में टीबी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और एनीमिया की निःशुल्क जांच के साथ-साथ एआई आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है। इसके अतिरिक्त, मोबाइल हेल्थ यूनिट्स राज्य के दुर्गम क्षेत्रों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। अधिकारियों ने बताया कि वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में 26 एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनें तथा सभी विकास खंडों में 119 आधुनिक एनएएटी डायग्नोस्टिक मशीनों के माध्यम से टीबी की त्वरित जांच और मरीजों का शीघ्र उपचार संभव हो रहा है। राज्यपाल ने कहा कि क्षय रोग का उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह एक जनआंदोलन है, जिसमें समाज के प्रत्येक वर्ग की सक्रिय सहभागिता नितांत आवश्यक है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि आयुष्मान आरोग्य शिविरों में जनप्रतिनिधियों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले लोगों को समय पर टीबी जांच, खासकर छाती के एक्स-रे के लिए प्रेरित करने हेतु जागरूकता अभियान और अधिक प्रभावी बनाए जाएं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक प्रयासों, सक्रिय जनसहभागिता और समय पर रोग की पहचान से हिमाचल प्रदेश शीघ्र ही टीबी मुक्त राज्य बनने का लक्ष्य हासिल करेगा। बैठक में राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एल.आर. शर्मा तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य सलाहकार डॉ. निशांत सोनी भी उपस्थित थे।
  • उदयपुर में Polytechnic College निर्माण को भूमि की सैद्धान्तिक स्वीकृतिः Rajesh Dharmani

    उदयपुर में Polytechnic College निर्माण को भूमि की सैद्धान्तिक स्वीकृतिः Rajesh Dharmani

    शिमला: तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने आज जानकारी दी है कि प्रदेश सरकार के सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप हिमाचल के जनजातीय जिला लाहौल स्पीति के उदयपुर में पॉलिटेक्निक कॉलेज के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। उन्होंने बताया कि लाहौल स्पीति के उदयपुर में कॉलेज के निर्माण संबंधी मामला लगभग 15 वर्षों से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय में लम्बित था। इस मामले में प्रदेश सरकार के ठोस प्रयासों से मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय चंडीगढ़ द्वारा वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम-1980 के तहत तकनीकी शिक्षा विभाग, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान को 2.0435 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग के लिए सैद्धान्तिक स्वीकृति प्रदान की गई है।

    उन्होंने कहा कि यह स्वीकृति इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्रदेश सरकार जनजातीय समुदायों को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा में समावेशिता और समान विकास को बढ़ावा प्रदान कर रही है।

    धर्माणी ने कहा कि इस स्वीकृति से जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को तकनीकी शिक्षा में उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में सहायता मिलेगी। सरकार जनजातीय क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ-साथ इन क्षेत्रों में क्षमता निर्माण संस्कृति को बढ़ावा दे रही है और प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण आधारित अवसरंचना को विस्तार प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में मील पत्थर साबित होगा।

     

  • हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शुरू होंगे नए पाठ्यक्रम, विद्यार्थी और शिक्षकों को एक्सपोजर विजिट पर भेजेंगेः CM Sukhu

    हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शुरू होंगे नए पाठ्यक्रम, विद्यार्थी और शिक्षकों को एक्सपोजर विजिट पर भेजेंगेः CM Sukhu

    मुख्यमंत्री ने बी.टेक. एआई पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए 5 करोड़ रुपये की घोषणा की

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विश्वविद्यालय में नए युग के पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। राज्य सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए विदेशों में एक्सपोजर विजिट की व्यवस्था करेगी, जिसके लिए पर्याप्त धनराशि उपलब्ध करवाई जाएगी। स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को ग्रीन हाइड्रोजन के लिए नोडल एजेंसी बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और डेटा स्टोरेज जैसी आधुनिक तकनीकों के अनुरूप स्वयं को विकसित करना होगा। राज्य सरकार इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए निरन्तर प्रयासरत है।विश्वविद्यालय में बी.टेक. एआई पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए 5 करोड़ रुपये के अनुदान की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में उन्होंने अपने जीवन के आठ वर्ष बिताए हैं और उनकी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत भी यहीं से हुई थी। इस विश्वविद्यालय ने उन्हें बहुत कुछ सीखने का अवसर दिया और इस संस्थान से शिक्षा ग्रहण करने के उपरान्त वह मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे हैं। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह भी इसी संस्थान से जुड़े हैं। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भी इसी विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। आज हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की पूरे देश में सराहना हो रही है और इसके पूर्व छात्र देश और प्रदेश में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी उल्लेखनीय सेवाएं दे रहे हैं। सुक्खू ने कहा कि जब कांग्रेस सरकार ने कार्यभार संभाला था, तब प्रदेश गंभीर वित्तीय संकट से गुजर रहा था। इसके बावजूद राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र में व्यापक सुधार किए। वर्ष, 2021 में केंद्र सरकार के एक सर्वेक्षण में शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश 21वें स्थान पर था, जबकि वर्तमान सरकार के प्रयासों से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में अब पांचवें स्थान पर पहुंच गया है। पिछली भाजपा सरकार द्वारा राजनीतिक लाभ लेने के उद्देश्य से खोले गए लगभग 500 शैक्षणिक संस्थानों को वर्तमान सरकार ने बंद करने का निर्णय लिया और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर ध्यान केंद्रित किया। राज्य सरकार ने पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम, राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल तथा एक्सपोजर विजिट जैसी योजनाएं शुरू की हैं। प्रदेश में 150 से अधिक नए सीबीएसई स्कूल खोले गए हैं जिन्हें सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। पहले जहां विद्यार्थी सरकारी स्कूलों से निजी स्कूलों की ओर पलायन कर रहे थे, वहीं अब सरकारी स्कूलों में 24 हजार से अधिक विद्यार्थियों का नामांकन बढ़ा है। उच्च शिक्षा क्षेत्र में भी सुधार की आवश्यकता है और विश्वविद्यालयों को रोजगारोन्मुखी तथा आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू करने पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों को भी एक्सपोजर विजिट का अनुभव दिया जाएगा। राज्य सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य क्षेत्र को भी सुदृढ़ बनाने को प्राथमिकता दे रही है। हिमाचल के लोग हर वर्ष उपचार के लिए प्रदेश से बाहर लगभग 1,000 करोड़ रुपये खर्च करते हैं। इस स्थिति में सुधार करने के उद्देश्य से सरकार सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की पुरानी मशीनों और तकनीक को अत्याधुनिक मशीनों से बदल रही है तथा प्रदेश में एम्स, दिल्ली के समान आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश के चार चिकित्सा महाविद्यालयों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की गई है। इसमें प्रति सर्जरी लगभग 1.25 लाख रुपये खर्च आता है और राज्य सरकार इस पर 80 हजार रुपये की सब्सिडी प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच स्वचालित प्रयोगशालाएं स्थापित करने के लिए 125 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएंगी। सरकार की इन पहलों से हिमाचल स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। दिल्ली में हिमाचल भवन का निर्माण कार्य लगभग एक माह में पूरा हो जाएगा। इससे दिल्ली में प्रदेश के विद्यार्थियों तथा अन्य लोगों को किफायती दरों पर रहने की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे पहले, मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय में 10.25 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले आधुनिक डिजिटल पुस्तकालय तथा 6.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाली यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज के प्रशासनिक भवन का शिलान्यास किया। डिजिटल लाइब्रेरी के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक ई-संसाधनों और शोध सामग्री उपलब्ध होगी, जबकि लीगल स्टडीज संस्थान में गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। विश्वास व्यक्त किया कि ये नई सुविधाएं विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्तर को और ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक साबित होंगी। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय के विकास में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का महत्वपूर्ण योगदान रहा है और वह शिक्षा में आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए निरंतर प्रोत्साहित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री की परिकल्पना के अनुरूप विश्वविद्यालय में पांच नए केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं तथा सभी विभागों को इन केंद्रों से जोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशों पर विश्वविद्यालय ने आईआईटी रुड़की जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, राज्य वन विकास निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची, नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान, कैलाश फेडरेशन के अध्यक्ष बलदेव ठाकुर, विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र डॉ. विजय कुमार स्टोक्स, डॉ. राज बहादुर, उपायुक्त अनुपम कश्यप और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।