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  • मुख्यमंत्री का निर्देश, मरीजों को मिले केवल मानक दवाएं

    मुख्यमंत्री का निर्देश, मरीजों को मिले केवल मानक दवाएं

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को गुणवत्तायुक्त दवाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही लगभग 100 करोड़ रुपये की दवाओं की खरीद के लिए टेंडर जारी करेगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रतिष्ठित दवा कंपनियां भी इसमें भाग ले सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि दवाएं सीधे दवा निर्माता कंपनियों से खरीदी जाएंगी, जिससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों को विश्वस्तरीय दवाइयां मिल सकें। उन्होंने कहा कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण दवाइयों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यकता अनुसार ड्रग्स एक्ट में भी संशोधन किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार के दृष्टिगत अनेक कदम उठाए हैं। अच्छी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गुणवत्तायुक्त दवाइयां बहुत जरूरी हैं। लोगों को प्रदेश में ही विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम को भी निर्देश दिए कि जन औषधि और अन्य दवा दुकानों के लिए दवाइयां अधिकृत डीलरों के बजाय सीधे दवा कंपनियों से खरीदी जाएं। राज्य सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है, लेकिन जनता का पैसा केवल जनहित के लिए ही खर्च किया जाना चाहिए।

    बैठक में स्वास्थ्य सचिव प्रियंका बासु इंगटी, हिमाचल प्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक राजेश्वर गोयल, विशेष सचिव स्वास्थ्य जितेंद्र संजटा, स्वास्थ्य सेवाएं निदेशक डॉ. गोपाल बेरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

     

  • महिला एवं बाल कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता, ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की दिशा में ठोस कदम

    महिला एवं बाल कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता, ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की दिशा में ठोस कदम

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज कहा कि पिछले तीन सालों में प्रदेश सरकार ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत बड़े और साहसिक कदम उठाए हैं। इसका उद्देश्य महिलाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाकर समावेशी विकास सुनिश्चित करना है।

    उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य का शिशु लिंग अनुपात 947 से बढ़कर 964 हो गया है। यह बदलाव बालिकाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए सरकार के निरंतर और गंभीर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इस सकारात्मक सुधार ने कई नए और महत्त्वपूर्ण कल्याणकारी कदमों की नींव रखी है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी सुख सुरक्षा योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा से नीचे बसर करने वाले परिवारों में जन्म लेने वाली बेटियों के लिए जन्म के समय 25,000 रुपये जमा किए जाते हैं। इसके साथ ही माता-पिता दोनों का 2-2 लाख रुपये का जीवन बीमा भी किया जाता है, जिसकी राशि बेटी के 18 वर्ष पूरे होने पर या उसकी इच्छा अनुसार 27 वर्ष की आयु तक मिल सकती है। उन्होंने कहा कि इस योजना से ‘बेटी है अनमोल योजना’ अधिक सुदृढ़ हुई है।

    कामकाजी महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने सोलन, पालमपुर, बद्दी, गगरेट, नागरोटा-बगवां सहित विभिन्न जिलों में 13 नए महिला छात्रावास बनाने का निर्णय लिया है। इन पर लगभग 132 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ये छात्रावास महिलाओं को सुरक्षित और सस्ती आवास सुविधा प्रदान करेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी 18,925 आंगनवाड़ी केंद्रों को ‘आंगनवाड़ी सह प्री-स्कूल’ के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को खेल-आधारित प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बच्चों की शिक्षा की नींव मजबूत हो सके।

    मुख्यमंत्री ने सरकार की प्रमुख ‘सुख आश्रय योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना अनाथ बच्चों और बेसहारा महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इसके तहत राज्य सरकार उनकी परवरिश, शिक्षा और आजीविका की पूरी जिम्मेदारी उठाती है ताकि कोई भी बच्चा या महिला आत्मनिर्भर बनने की राह में पीछे न रहे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी दूरदर्शी कदम समावेशी विकास और सामाजिक कल्याण के प्रति हमारी मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। बेटियों, महिलाओं और बच्चों पर ध्यान केंद्रित कर हम हिमाचल प्रदेश को एक मजबूत, आत्मनिर्भर और समानजनक भविष्य की ओर ले जा रहे हैं।

  • मुख्यमंत्री का CMO, BMO और MS से सीधा संवाद, प्रदेश में पहली बार राज्य स्तरीय सत्र

    मुख्यमंत्री का CMO, BMO और MS से सीधा संवाद, प्रदेश में पहली बार राज्य स्तरीय सत्र

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए जायका चरण-दो के तहत 1300 करोड़ रुपये व्यय करेगी। उन्होंने बताया कि आगामी तीन वर्षों में स्वास्थ्य संस्थानों को विश्व स्तरीय उपकरणों से लैस करने के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री शनिवार सायं पीटरहॉफ, शिमला में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (सीएमओ), खंड चिकित्सा अधिकारियों (बीएमओ) और चिकित्सा अधीक्षकों (एमएस) के साथ आयोजित प्रदेश के पहले राज्य स्तरीय संवाद सत्र को संबोधित कर रहे थे।

    लगभग साढ़े चार घंटे तक चले इस संवाद सत्र में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याओं और सुझावों पर विस्तार से चर्चा की और कई मामलों में मौके पर ही निर्णय लेते हुए समाधान किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए प्रशासनिक ढांचे का सशक्तिकरण आवश्यक है, जिसके तहत प्रशासनिक और वित्तीय शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया जाएगा। सीएमओ, बीएमओ और एमएस को अधिक वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे तथा प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए वित्तीय नियमों में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के तहत किए जा रहे सुधारों के परिणामस्वरूप एक वर्ष के भीतर स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव दिखाई देंगे और आगामी तीन वर्षों में हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में देश का नंबर वन राज्य बनेगा। उन्होंने बताया कि आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में आधुनिक उपकरण, रोबोटिक सर्जरी, स्मार्ट लैब और सुदृढ़ सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है, जिससे मरीजों को बेहतर सुविधाएं और चिकित्सकों को कार्य में सुविधा मिलेगी।

  • 78वां सेना दिवस आरट्रैक शिमला में मनाया गया, राज्यपाल ने की सराहना

    78वां सेना दिवस आरट्रैक शिमला में मनाया गया, राज्यपाल ने की सराहना

    शिमला: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज शिमला स्थित आर्मी ट्रेनिंग कमांड (आरट्रैक) में 78वें सेना दिवस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के कारण रक्षा क्षेत्र में निरंतर चुनौतियां बढ़ रही है। साइबर और सूचना युद्ध जैसी स्थितियों में आरट्रैक की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि यहां दी जा रही नेतृत्व क्षमता और प्रशिक्षण भारतीय सेना को सशक्त बनाने के साथ-साथ नैतिक और मानवीय मूल्यों से भी समृद्ध बनाते हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि सेना दिवस राष्ट्र की सम्प्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा में भारतीय सेना के अतुलनीय बलिदान, अदम्य साहस और अटूट संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने आरटैªक को भारतीय सेना के प्रशिक्षण और संस्थागत उत्कृष्टता का केंद्र बताते हुए कहा कि भविष्य के युद्ध क्षेत्रों की जटिल चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए आरट्रैक द्वारा दिया जा रहा तकनीक-सक्षम और बहुआयामी प्रशिक्षण यह सुनिश्चित करता है कि हमारी सेना सदैव तैयार और सक्षम बनी रहे। हिमाचल प्रदेश और सशस्त्र बलों के बीच गहरे और भावनात्मक संबंधों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि के रूप में भी जाना जाता है। राज्य का लगभग हर गांव सैन्य सेवा की गौरवशाली परंपरा को दर्शाता है, जो हमारी संस्कृति और मूल्यों का अभिन्न अंग है। सैनिकों और उनके परिवारों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्होंने कहा कि हर सैनिक के पीछे एक परिवार होता है, जिसका मौन बलिदान हमारे सशस्त्र बलों की सबसे बड़ी शक्ति है। राष्ट्र उनके योगदान को कभी नहीं भूल सकता।

    राज्यपाल ने कहा कि भारत सरकार ने हाल के वर्षों में रक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए कई दूरदर्शी और ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2025दृ26 में रक्षा मंत्रालय के लिए 6,81,210 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 9.5 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह बदलते वैश्विक सुरक्षा परिवेश में भारत की रणनीतिक प्रतिबद्धता और दीर्घकालिक दृष्टि को रेखांकित करता है।

    अग्निवीर योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस योजना ने सशस्त्र बलों में युवा ऊर्जा का संचार किया है। इसके लिए बजटीय प्रावधान बढ़ाकर 11,000 करोड़ रुपये से अधिक किया गया हैं, जिससे हमारी सेना और अधिक सक्षम बनी है। युवाओं में अनुशासन, कौशल और राष्ट्र सेवा की भावना विकसित हो रही है।

    उन्होंने कहा कि यह योजना युवाओं को अनुशासन, कौशल और राष्ट्र निर्माण की भावना से भी जोड़ती है। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर बल देते हुए राज्यपाल ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण भारत की रणनीतिक प्राथमिकता है और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी प्रणालियों का प्रभावी उपयोग इस प्रगति का सशक्त प्रमाण है।

    पूर्व सैनिकों के लिए उठाए गए कल्याणकारी कदमों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि जुलाई, 2024 से लागू ‘वन रैंक वन पेंशन’ योजना के संशोधनों से लाखों पूर्व सैनिक परिवारों को सम्मानजनक आर्थिक सुरक्षा मिली है। साथ ही, पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना के लिए लगभग 8,317 करोड़ रुपये के आवंटन से देशभर में 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि मजबूत रक्षा बजट राष्ट्र की रणनीतिक सोच और राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इससे पहले, आरट्रैक के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने राज्यपाल का स्वागत किया और भारतीय सेना की तैयारियों और पेशेवर दक्षता पर प्रकाश डाला। आरट्रैक ट्रेनिंग कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. दहिया ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, सांसद सुरेश कश्यप, नगर निगम महापौर सुरेंद्र चौहान, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के अध्यक्ष प्रबोध सक्सेना, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, नागरिक एवं सैन्य अधिकारी तथा अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

  • मुख्यमंत्री ने केंद्र से की मांग, पीक सीजन में सेब आयात पर लगे रोक

    मुख्यमंत्री ने केंद्र से की मांग, पीक सीजन में सेब आयात पर लगे रोक

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार सायं नई दिल्ली में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से भेंट की और सेब उत्पादन के पीक सीज़न (जुलाई से नवंबर) के दौरान सेब आयात पर प्रतिबंध लगाने का पुरजोर आग्रह किया। उन्होंने सेब पर आयात शुल्क को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का भी आग्रह किया ताकि विदेशी सेब के आयात से राज्य के बागवानों को हानि न हो।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लगभग 2.5 लाख किसान सेब उत्पादन से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के कुल फल उत्पादन में सेब का योगदान लगभग 80 प्रतिशत है। सेब उत्पादन से सालाना लगभग 4500 करोड़ रुपये की आय होती है। उन्होंने प्रदेश के बागवानों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले सप्ताह प्रदेश के बागवानों ने उनके समक्ष अपनी समस्याएं रखी थी जिन्हें उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष उठाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंनं इस मामले को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष भी रखा और बागवानों के हित में शीघ्र उचित कार्यवाही का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को सेब पर आयात शुल्क कम किए जाने से बागवानों को हो रही हानि के बारे में भी अवगत करवाया। उन्होंने कहा की पिछले दस वर्षों में सेब आयात में लगभग ढाई गुणा वृद्धि हुई है और मुक्त व्यापार समझौतों के कारण इसमें और वृद्धि हो सकती है। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड से सेब आयात अधिकतम अप्रैल से अगस्त के दौरान होता हैै और इस समय आयात शुल्क 25 प्रतिशत तय किया गया है, जबकि अन्य महीनों में पूर्व की तरह 50 प्रतिशत शुल्क लागू रहता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों से न केवल सेब सीज़न के दौरान बागवान प्रभावित होगें, बल्कि राज्य में कोल्ड स्टोरेज में रखे सेबों की कीमतों और ऑफ-सीज़न कारोबार पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर भी बैठक में उपस्थित थे।

  • सिरमौर आग दुर्घटना: CM ने छह मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई

    सिरमौर आग दुर्घटना: CM ने छह मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने जिला सिरमौर के रेणुका जी विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत घंडूरी के गांव तलांगना में बीती रात भीषण आग लगने की दुःखद घटना में छह लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है।मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की।

    उन्होंने जिला प्रशासन को प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता और घायलों को बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने घटना के कारणों की गंभीरता से जांच करने भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्माओं की शांति की प्रार्थना और शोक संतप्त परिजनों को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है।

  • अयोध्या नाथ शर्मा के निधन पर मुख्यमंत्री ने परिवार के प्रति शोक संदेश भेजा

    अयोध्या नाथ शर्मा के निधन पर मुख्यमंत्री ने परिवार के प्रति शोक संदेश भेजा

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वरिष्ठ पत्रकार अश्वनी शर्मा के पिता, अयोध्या नाथ शर्मा के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। अयोध्या नाथ शर्मा का निधन आज सुबह उनके पैतृक गांव करलूप, तहसील मढ़, जिला जम्मू में हुआ। वह 93 वर्ष के थे।

    मुख्यमंत्री ने अश्वनी शर्मा एवं शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त कीं तथा ईश्वर से दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करने और शोक संतप्त परिजनों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।

  • प्रदेश में पोषण नीति लागू करने की तैयारी, कंडाघाट टेस्टिंग लैब होगी अपग्रेड

    प्रदेश में पोषण नीति लागू करने की तैयारी, कंडाघाट टेस्टिंग लैब होगी अपग्रेड

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार राज्य में स्टेट न्यूट्रिशन पॉलिसी बनायेगी। इस पॉलिसी का मुख्य उद्देश्य बच्चों, किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं सहित सभी संवेदनशील वर्गों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाने के लिए समयबद्ध और प्रभावी कदम उठाना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की कण्डाघाट स्थित कम्पोजिट टेस्टिंग लैब को विश्व स्तरीय हाई-ऐंड टेक्नोलॉजी से लैस किया जाएगा, ताकि सूक्ष्म और सटीक विश्लेषण और दक्षता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए प्रथम चरण में बद्दी, मण्डी, कांगड़ा और शिमला शहर में भी क्षेत्रीय प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी। द्वितीय चरण में सभी जिलों में इस तरह की प्रयोगशालाएं खोली जाएंगी।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य में न्यूट्रिशनल सरविलेंस को और सघन किया जाएगा। खाद्य पदार्थों की जांच सुनिश्चित कर उनमें उपलब्ध पोषक तत्वों की प्रोफाइलिंग और मैपिंग की जाएगी। उन्होंने विभाग को सार्वजनिक वितरण प्रणाली, आंगनवाड़ी और मिड-डे-मील सहित अन्य योजनाओं में प्रदान किये जाने वाले खाद्यानों की भी समय समय पर जांच करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा जांच, जागरूकता क्षमता विकास और प्रशिक्षण के लिए मोबाइल वैन का उपयोग किया जाएगा, ताकि सभी जिलों में विभाग की कार्यप्रणाली को और सुदृढ़ किया जा सके।

    उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली को सुगम एवं समयबद्ध बनाने के लिए नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित करने और सारी प्रक्रियाओं का डिजिटाइजेशन करने के निर्देश भी दिए। विभाग द्वारा खाद्य पदार्थों के सैंपल लेने तथा इसकी जांच के नतीजों सहित सभी प्रक्रियाओं के डिजिटल निष्पादन के लिए स्टेट पोर्टल विकसित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने स्टेट न्यूट्रिशन डेटाबेस भी तैयार करने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों की कमी तथा कीटनाशकों के कारण लोगों में बीमारियों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। प्रदेश सरकार इन दोनों विषयों पर गम्भीरता से विचार कर समाधान के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी के दृष्टिगत प्रदेश सरकार राज्य में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है और इससे जुड़े किसानों को प्रोत्साहित कर विभिन्न योजनाओं के तहत लाभान्वित किया जा रहा है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को निरन्तर सुदुढ़ कर रही है। स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में विश्व स्तरीय मापदण्डों को अपनाया जा रहा है। हर चिकित्सा महाविद्यालय में आईसीयू स्थापित किये जा रहे हैं तथा अस्पतालों में विश्वस्तरीय डॉक्टर-पेशेंट अनुपात दर को अपनाया जा रहा है। बैठक में निदेशक डीडीटीजी डॉ. निपुण जिंदल, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन जितेन्द्र सांजटा एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • बागवानी से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील बागवानों से की चर्चा

    बागवानी से जुड़े मुद्दों पर मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील बागवानों से की चर्चा

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां प्रदेश के बागवानों के प्रतिनिधियों और प्रगतिशील बागवानों के साथ आयोजित बैठक में कहा कि सेब उत्पादन प्रदेश की आर्थिकी का प्रमुख संसाधन है और इसका संरक्षण व संवर्द्धन प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यूजीलैंड से आयात किए जाने वाले सेब पर आयात शुल्क घटाने से बागवानों के हितों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि वह इस विषय के सकारात्मक समाधान के लिए केन्द्र सरकार के समक्ष मामला उठाएंगे। वह केन्द्रीय वित्त मंत्री तथा केन्द्रीय वाणिज्य मंत्री से भेंट कर प्रदेश के बागवानांे के हितों के संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए आग्रह करेंगे।

    बैठक में बागवानों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, सचिव सी. पालरासु, निदेशक बागवानी विनय सिंह, हिमाचल सेब उत्पादक संघ की राज्य कमेटी के अध्यक्ष संजय चौहान, हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव राकेश सिंघा, स्टोन फूट ग्रोवर एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक सिंघा, प्रोग्रेसिव ग्रोवर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष आशुतोष चौहान और प्रगतिशील बागवान बैठक में उपस्थित थे।

  • प्राकृतिक खेती किसानों का डेटा अब हिम परिवार पोर्टल से जुड़ेगा, CM ने किया ऐलान

    प्राकृतिक खेती किसानों का डेटा अब हिम परिवार पोर्टल से जुड़ेगा, CM ने किया ऐलान

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती कर रहे किसानों का पूरा डेटा 20 जनवरी, 2026 तक हिम परिवार पोर्टल से जोड़ने के निर्देश दिए हैं। डेटा में प्राकृतिक खेती से सम्बन्धित सम्पूर्ण विवरण का समावेश किया जाएगा। प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों का ब्लॉक आधार डेटा तैयार कर उसकी मैपिंग की जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने आज यहां कृषि विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए युवाओं को प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाएगा। उन्होंने प्रदेश में इस पद्धति से खेती करने पर बल दिया ताकि किसान अधिक से अधिक आय अर्जित कर सके। हम प्राकृतिक खेती आधारित व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों से इस माह हमीरपुर में आयोजित होने वाले सम्मेलन में संवाद करेंगे।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, मक्की और कच्ची हल्दी से सम्बन्धित विभिन्न विषयों की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं के आटे को ‘हिम चक्की आटा’, मक्की के आटे को ‘हिम भोग मक्की’ आटा और कच्ची हल्दी को ‘हिम हल्दी’ के ब्रांड के साथ बाजार में उतारा गया है। उन्होंने आटे की पैकिंग के पैकेट में एक्सपायरी डेट से सम्बन्धित जानकारी प्रमुखता से प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों में पौष्टिकता के सम्बन्ध में भी उचित जानकारी होनी चाहिए। इसका आकलन करने के लिए एक विशेष इकाई के गठन करने के भी निर्देश दिए।

    उन्होंने कहा कि प्राकृतिक विधि से उगाई गई 606.8 मीट्रिक टन मक्की की खरीद की गई है और 2.31 करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में डाले गए हैं। प्राकृतिक खेती से उत्पादित 2123 क्विंटल गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीद की गई और किसानों के खातों में एक करोड़ 31 लाख 57 हजार रुपये की राशि डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित किये गए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती से उगाई कच्ची हल्दी पर 90 रुपये समर्थन मूल्य प्रदान करने के उत्साहजनक परिणाम सामने आ रहे हैं। इस वर्ष 1629 किसानों से लगभग 2422 क्विंटल हल्दी के प्रापण का अनुमान है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कृषि विभाग द्वारा अपने 25 फार्मों में प्राकृतिक खेती पद्धति से विभिन्न फसलों का उत्पादन किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती के उत्पादों का बेहतर विपणन सुनिश्चित किया जाए। कृषि मंत्री प्रो. चन्द्र कुमार ने बैठक में बहुमूल्य सुझाव दिए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, महाधिवक्ता अनूप रतन, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव सी. पालरासु और अशीष सिंहमार, निदेशक डीडीटीजी डा. निपुण जिंदल, निदेशक कृषि डॉ. रविन्द्र सिंह जसरोटिया, निदेशक बागवानी विनय सिंह और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।