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  • हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लिख रहे हैं विकास की नई इबारत

    हिमाचल के जनजातीय क्षेत्र लिख रहे हैं विकास की नई इबारत

    दुर्गम क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मिला नया संबल

    शिमला: प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों की विषम भौगोलिक और जलवायु संबंधी प्रतिकूलताओं केे कारण इन क्षेत्रों में विकास संबंधी गतिविधियां चुनौतियों से भरी रहती है। लाहौल-स्पीति, किन्नौर, पांगी और भरमौर जैसे दुर्गम, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कम आबादी, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और लंबे समय तक रहने वाली बर्फबारी विकास कार्यों तथा जनसेवाओं की पहुंच को चुनौतीपूर्ण बनाती रही हैं। वर्तमान में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार ने जनजातीय विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, आजीविका, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रदेश के अनुसूचित क्षेत्र राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 42.49 प्रतिशत हिस्सा हैं जबकि यहां केवल 3.92 लाख लोग रहते हैं जो प्रदेश की कुल आबादी का 5.71 प्रतिशत हैं। इन क्षेत्रों में जनसंख्या घनत्व मात्र सात व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर है जबकि प्रदेश का औसत 123 व्यक्ति प्रतिवर्ग किलोमीटर है। इन विषम परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार ने सभी स्थायी और मौसमी जनजातीय बस्तियों में शत-प्रतिशत विद्युतीकरण और सुरक्षित पेयजल सुविधा सुनिश्चित की है। जनजातीय क्षेत्रों का लिंगानुपात भी प्रति एक हजार पुरुषों पर 1,018 महिलाएं है जो राज्य के औसत 972 से कहीं बेहतर है। जनजातीय क्षेत्रों के विकास को प्रमुख्ता प्रदान करते हुए सरकार हर वर्ष अपनी विकास योजनाओं के कुल बजट का नौ प्रतिशत हिस्सा ट्राइबल सब-प्लान (एसटीपी) के तहत निर्धारित करती है जो अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के अनुपात से भी अधिक है। वर्ष 2024-25 में एसटीपी के तहत 890.28 करोड़ रुपये और 2025-26 में 638.73 करोड़ रुपये अनुसूचित जनजाति घटक के लिए आवंटित किए गए हैं। सरकार जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। वर्ष 2025-26 में 3,361 विद्यार्थियों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति, 5,693 विद्यार्थियों को पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति तथा 304 मेधावी छात्रों को मेरिट छात्रवृत्ति प्रदान की गई। प्रदेश में संचालित चार एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में 1,008 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और यहां के छात्र आईआईटी, मेडिकल कॉलेज, आईआईएसईआर सहित देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश प्राप्त कर प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। इन क्षेत्रों में छात्रावास, पुस्तकालय और शिक्षकों के आवास जैसी सुविधाओं का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी व्यापक विस्तार हुआ है। यहां दो जिला अस्पताल, छह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 49 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 123 स्वास्थ्य उपकेंद्र सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। इसके अलावा 568 आंगनवाड़ी केंद्र मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण सेवाएं उपलब्ध करवा रहे हैं, जिनसे 5,084 लाभार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। राज्य सरकार की एक बड़ी उपलब्धि लाहौल-स्पीति और भरमौर में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना है। इन संस्थानों में विशेषज्ञ चिकित्सकों, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी आधुनिक जांच सुविधाओं, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं तथा प्रशिक्षित नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की उपलब्धता से दूरदराज के लोगों को अब बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं घर-द्वार के निकट ही सुनिश्चित हो रही हैं। सरकार जनजातीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री कृषि संवर्धन योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 9,000 क्विंटल प्रमाणित बीज और 3,200 मीट्रिक टन उर्वरक लगभग 197.05 लाख रुपये की लागत से वितरित किए गए। पिछले तीन वर्षों में 815 जनजातीय युवाओं को ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 577 युवाओं ने रोजगार प्राप्त किया या स्वयं का व्यवसाय स्थापित किया। इसके साथ-साथ 2025-26 के दौरान 6,576 अनुसूचित जनजाति युवाओं ने रोजगार कार्यालयों में अपना पंजीकरण करवाया है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न आजीविका कार्यक्रमों के माध्यम से 3,234 महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। इसके साथ ही पात्र महिलाओं को इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत प्रतिमाह 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है, जिससे उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली है। राज्य के 75 वर्षों के इतिहास में पहली बार स्पीति घाटी के काजा में हिमाचल दिवस का आयोजन किया गया। इस आयोजन के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों तक शासन की पहुंच को सुनिश्चित किया गया और समावेशी विकास की प्रतिबद्धता का संदेश दिया गया। जनजातीय क्षेत्रों में आधारभूत संरचना के विकास को गति देने के लिए शिक्षकों के लिए आवासीय परिसर, सिविल अस्पताल, आंगनवाड़ी केंद्र, सम्मेलन-सह-पुस्तकालय भवन, जनजातीय संग्रहालय, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के छात्रावास तथा लदारचा पर्यटन पार्क एवं कॉम्प्लेक्स जैसी अनेक परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इन परियोजनाओं से पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा मिल रही है। सरकार जनजातीय क्षेत्रों में सतत आजीविका को बढ़ावा देने के लिए पर्यटन और नवीकरणीय ऊर्जा पर विशेष ध्यान दे रही है। होम-स्टे स्थापित करने, उनका विस्तार करने अथवा उन्नयन के लिए पांच करोड़ रुपये तक के निवेश पर पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। इसी प्रकार राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना के तहत निजी भूमि पर 100 किलोवाट से दो मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए भी पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है। पांगी घाटी को प्रदेश का पहला प्राकृतिक खेती उपमंडल घोषित कर एक नई पहल की गई है। पांच करोड़ रुपये के रिवॉल्विंग फंड और प्राकृृतिक रूप से उगाई गई जौ के लिए 80 रुपये प्रति किलोग्राम के न्यूनतम समर्थन मूल्य ने यहां रसायन-मुक्त और जलवायु-अनुकूल खेती को नई दिशा दी है। दुर्गम जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारतनेट परियोजना के तहत 3,793 किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर बिछाई गई है, जिससे 705 ग्राम पंचायतें डिजिटल नेटवर्क से जुड़ चुकी हैं। इससे ई-गवर्नेंस, टेलीमेडिसिन, ऑनलाइन शिक्षा और बैंकिंग सेवाएं अब गांव-गांव तक पहुंच रही हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश के 10 जिलों के 270 गांवों का चयन किया गया है। 17 मंत्रालयों द्वारा 25 विभिन्न हस्तक्षेपों के माध्यम से इन गांवों में समग्र विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत हर घर नल से जल, भारतनेट कनेक्टिविटी, एलपीजी गैस की पहुंच तथा विभिन्न आधारभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। राज्य सरकार विकास के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को भी समान महत्व दे रही है। जनजातीय संग्रहालयों, सामुदायिक पुस्तकालयों और सांस्कृतिक अधोसंरचना को सुदृढ़ किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त जलागम प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देकर हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने यह साबित किया है कि दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, संवेदनशील प्रशासन और दूरदर्शी योजनाओं के माध्यम से विकास की रोशनी प्रदेश के दुर्गम गांवों तक पहुंचाई जा सकती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, आधारभूत ढांचे, पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल कनेक्टिविटी और सतत आजीविका के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश से जनजातीय समुदायों का जीवन स्तर बेहतर हुआ हैं। प्रदेश सरकार उनकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए समावेशी और संतुलित विकास को बढ़ावा दे रही है। जनजातीय विकास का हिमाचली मॉडल देश के सामने एक प्रेरक उदाहरण स्थापित कर रहा है।      
  • जिला के उत्पादों को पहचान और बाजार उपलब्ध करवाने के लिए अक्तूबर, 2026 में होगा मेगा आयोजन

    जिला के उत्पादों को पहचान और बाजार उपलब्ध करवाने के लिए अक्तूबर, 2026 में होगा मेगा आयोजन

    एक जिला तीन उत्पाद कार्यक्रम से हिमाचल प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा: मुख्यमंत्री

    शिमला: हिमाचल के प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को पहचान दिलवाने के उद्देश्य से सरकार नवीन कदम उठा रही है। इस क्रम में राज्य सरकार के वन डिस्ट्रिक्ट थ्री प्रोडक्ट (ओडीटीपी) कार्यक्रम के तहत प्रत्येक जिले के विशिष्ट उत्पादों को विशेष पहचान दिलाने तथा स्थानीय लोगों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर सृजित करने के प्रयासों को गति प्रदान की जा रही है। इस पहल के अंतर्गत प्रत्येक जिले से तीन-तीन उत्पादों सहित प्रदेश के कुल 36 उत्पादों का चयन उनकी आर्थिक संभावनाओं, बाजार में मांग तथा स्थानीय महत्त्व के व्यापक आकलन के आधार पर किया गया है। इनमें बिलासपुर से अदरक, रेशम उत्पादन (सेरीकल्चर) और मत्स्य पालन, चंबा से चंबा चप्पल, सफेद मक्की और ऊन, हमीरपुर से हल्दी, बांस और मक्की, कांगड़ा से कांगड़ा चाय, कांगड़ा लघु चित्रकला और गिलोय, किन्नौर से हिमाचली चुल्ली तेल, किन्नौरी शॉल और चिलगोजा, कुल्लू से ट्राउट मछली, हेम्प ऑयल और कुल्लू टोपी, लाहौल-स्पीति से सी-बकथॉर्न, पुल्ले और हरी मटर, मंडी से सेपू बड़ी, धातु शिल्प तथा पत्थर/लकड़ी की नक्काशी, शिमला से सेब आधारित उत्पाद, स्थानीय शहद, जौ का माल्ट एवं आटा तथा गुच्छी (मोरेल) मशरूम, सिरमौर से लहसुन, अदरक और सिरमौरी लोइया, सोलन से मशरूम, टमाटर और औषधि (फार्मास्यूटिकल) उत्पाद तथा ऊना से आलू, लीची और ड्रैगन फ्रूट शामिल हैं। प्रदेश में उद्यमिता को प्रोत्साहन प्रदान करने और स्थानीय उत्पादकों को संभावित खरीदारों तथा उद्योगों से जोड़ने के लिए राज्य सरकार द्वारा तीन विक्रेता विकास कार्यक्रम और पांच रोजगार विकास कार्यक्रम आयोजित करवाए गए हैं। कार्यक्रम के अगले चरण में अक्टूबर 2026 में ओडीटीपी के तहत चयनित उत्पादों की एक भव्य प्रदर्शनी तथा रिवर्स बायर-सेलर मीट आयोजित की जाएगी। इस आयोजन में उत्पादकों, निर्यातकों, निवेशकों, खुदरा विक्रेताओं तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाया जाएगा, जिससे व्यापारिक साझेदारियों को बढ़ावा मिलेगा और उत्पादों को विस्तृत बाजार मिलेगा। इस पहल से स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाएं सुदृढ़ होंगी, युवाओं और महिलाओं में उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य में मूल्य संवर्धन के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य की आगामी औद्योगिक नीति में चिन्हित उत्पादों से जुड़े उद्यमों के लिए व्यापक प्रोत्साहन पैकेज प्रदान किया जाएगा। इसमें भूमि पर रियायत, स्टाम्प शुल्क में छूट, रियायती बिजली, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति तथा प्राथमिकता क्षेत्र के दर्जे जैसी सुविधाएं प्रदान की जाएगी, जिससे स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन में निवेश को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार उद्योग निवेशक वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। इससे स्थानीय उद्यमियों को अपने कारोबार का विस्तार करने और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रभावी प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि चयनित उत्पादों की ब्रांडिंग और विपणन पर विशेष बल दिया जाएगा। इसके लिए उत्पादकों को प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्ड करने के साथ-साथ उन्हें व्यापारिक मेलों, प्रदर्शनियों और बायर-सेलर मीट में भागीदारी के लिए भी सहयोग प्रदान किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जिला तीन उत्पाद कार्यक्रम न केवल हिमाचल प्रदेश की समृद्ध विरासत और पारंपरिक कौशल के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर सृजित करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और राज्य के समग्र आर्थिक विकास में भी मील पत्थर साबित होगा।
  • नई औद्योगिक नीति शीघ्र लागू होगी, उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी: मुख्यमंत्री

    नई औद्योगिक नीति शीघ्र लागू होगी, उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी: मुख्यमंत्री

    मुख्यमंत्री ने आईटी क्षेत्र में निवेश का किया आहवान, निवेश के लिए हिमाचल सबसे उपयुक्त राज्य

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने निवेशकों को हिमाचल प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि प्रदेश निवेश की दृष्टि से देश के सर्वोत्तम गंतव्यों में से एक है। मुख्यमंत्री ने शनिवार देर सायं द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (टीआईई) चंडीगढ़ द्वारा आयोजित चंडीगढ़ लीडरशिप कॉन्क्लेव एवं 23वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को हर संभव सुविधा और सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चौबीसों घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने और निवेश आकर्षित करने के लिए राज्य सरकार नई औद्योगिक नीति ला रही है, जिसके तहत बिजली दरों को कम रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में तीव्र गति से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में उठाए गए कदमों के तहत प्रदेशभर में बायोचार संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त किन्नौर जिले में जियोथर्मल ऊर्जा परियोजना स्थापित की जा चुकी है। हिमाचल प्रदेश को पावर सरप्लस राज्य के रूप में रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब को बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तीन वर्षों का पावर परचेज एग्रीमेंट किया जा रहा है। पंजाब को हिमाचल का ‘बड़ा भाई’ बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता पंजाब के साथ हमारे रिश्ते को और सुदृढ़ करेगा। हिमाचल प्रदेश आईटी क्षेत्र को विस्तार प्रदान करने के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रहा है। राज्य सरकार डेटा स्टोरेज अधोसंरचना विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। इसके अतिरिक्त सोलन जिले के कंडाघाट में आईटी पार्क विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने से पूर्व प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों से राज्य को लगभग 4,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता था, लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद यह घटकर लगभग 150 से 200 करोड़ रुपये रह गया है। प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार अपनी औद्योगिक नीतियों में आवश्यक संशोधन कर रही है। प्राकृतिक आपदाओं का प्रतिकूल प्रभाव केवल हिमाचल प्रदेश तक ही सीमित नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी आपदाएं आ रही हैं। ग्लोबल वार्मिंग के कारण बादल फटने की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान भी हिमाचल प्रदेश पर्यटकों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन मौसम की स्थिति को देखते हुए नदियों और खड्डों-नालों से दूर रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान भी प्रदेश में लगभग 75 लाख लोग रहते हैं। इसलिए पर्यटकों को बिना किसी भय के हिमाचल प्रदेश की यात्रा करनी चाहिए। हिमाचल प्रदेश चंडीगढ़ में अपने 7.19 प्रतिशत हिस्से को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है और इस विषय पर लगातार संवाद जारी है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ से बद्दी तक रेल लाइन का निर्माण किया जा रहा है, जिसमें भूमि अधिग्रहण और निर्माण लागत का 50 प्रतिशत व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है। इस परियोजना के आगामी तीन वर्षों में पूर्ण होने की संभावना है, जिससे बद्दी और नालागढ़ के उद्योग विशेष रूप से लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार किया जा रहा है, जिससे पर्यटकों और औद्योगिक क्षेत्र दोनों को लाभ मिलेगा। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार प्रदेश में हेलीपोर्ट का निर्माण कर रही है तथा भविष्य में सभी जिला मुख्यालयों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रमुखता से कार्य कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अनेक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्योगपति निवेश हितैषी पहलों का लाभ उठा सकते हैं, जिससे प्रदेश के लोगों के आर्थिक विकास को भी गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन तथा आईटी क्षेत्र को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है। चिकित्सा महाविद्यालयों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शीघ्र ही स्वास्थ्य पर्यटन को भी बढ़ावा देने की दिशा में प्रभावी कदम उठाएगी। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आर.एस. बाली, विधायक सुरेश कुमार एवं सुन्दर सिंह ठाकुर, हिमाचल पथ परिवहन निगम के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, पूर्व विधायक सतपाल रायजादा, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल, टीआईई चंडीगढ़ के अध्यक्ष पुनीत वर्मा, टीआईई के पदाधिकारी तथा उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
  • राज्यपाल ने JUIT के 7वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए

    राज्यपाल ने JUIT के 7वें दीक्षांत समारोह में मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए

    प्रौद्योगिकी का उपयोग जनहित में करने तथा रोजगार प्रदाता के रूप में पहचान बनाने का किया आहवान

    शिमला: राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज जेपी यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (जेयूआईटी), वाकनाघाट के 7वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर मेधावियों को उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए कुलाधिपति स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक तथा अन्य शैक्षणिक पुरस्कार प्रदान किए गए। दीक्षांत समारोह में 1,966 बी.टेक., 3 इंटीग्रेटिड एम.टेक., 69 एम.टेक., 116 एम.एससी. तथा 90 पीएच.डी. की 2,244 डिग्रियां प्रदान की गई। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक उत्कृष्टता के 25 वर्ष पूर्ण होने पर शुभकामनाएं दी। उन्होंने रजत जयंती को एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि हजारों विद्यार्थियों के सपनों, शिक्षकों के समर्पण तथा हिमाचल प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के उल्लेखनीय योगदान का प्रतीक है। इस अवसर पर विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए गुप्ता ने उन्हें चुनौतियों का दृढ़ता से सामना करने तथा सफलता को मंजिल नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत मानने का संदेश दिया। सूचना प्रौद्योगिकी, एआई, डिजिटल इंडिया और इंडस्ट्री 4.0 के इस युग में प्रौद्योगिकी का उद्देश्य मानवता की सेवा होना चाहिए। जेयूआईटी के विद्यार्थियों द्वारा विकसित एआई आधारित मानसिक स्वास्थ्य सहायता चैटबॉट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण है कि नवाचार के माध्यम से समाज की वास्तविक आवश्यकताओं का समाधान किया जा सकता है। राज्यपाल ने अनुसंधानकर्ताओें और युवा नवोन्मेषकों का आहवान किया कि वे पहाड़ी राज्यों की विशिष्ट चुनौतियों, जैसे आपदा प्रबंधन, सतत कृषि तथा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रौद्योगिकी आधारित समाधान विकसित करें। विद्यार्थियों से हिमाचल प्रदेश की समृद्ध औषधीय गुणवत्ता से युक्त जड़ी-बूटियों और वनस्पतियों पर वैज्ञानिक अनुसंधान करने का भी आहवान किया। ऐसे नवाचार स्थानीय किसानों के लिए लाभकारी होने के साथ-साथ उद्यमिता के नए अवसर भी सृजित कर सकते हैं। सतत विकास पर बल देते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण करने वाले प्रत्येक इंजिनियर और पेशेवर को अपने कार्यों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने दायित्वों को सर्वाेच्च प्राथमिकता प्रदान करनी चाहिए। उन्होंने हरित प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने, जल संसाधनों के संरक्षण तथा प्रकृति के साथ समन्वय स्थापित करते हुए विकास सुनिश्चित करने का आहवान किया। डिग्री एवं पुरस्कार प्राप्त करने वाली छात्राओं को बधाई देते हुए राज्यपाल ने कहा कि महिलाएं इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय की छात्राएं विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश और देश का नाम रोशन करती रहेंगी। राज्यपाल ने कहा कि जेयूआईटी ने देश और दुनिया के लिए कुशल और निपुण पेशेवर तैयार किए हैं। उन्होंने स्नातकों से रोजगार तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार प्रदाता के रूप में स्थापित होने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं में उद्यमिता की भावना हिमाचल प्रदेश और देश की आर्थिक प्रगति को नई गति प्रदान करेगी। इससे पूर्व, कुलपति प्रो. आर.के. शर्मा ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा विश्वविद्यालय की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने शैक्षणिक उपलब्धियों, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, प्लेसमेंट, पेटेंट, शोध प्रकाशनों, स्टार्टअप इकोसिस्टम तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक रैंकिंग में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने धन्यवाद प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया। इस अवसर पर उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, पुलिस अधीक्षक साई दत्तात्रेय, विश्वविद्यालय की गवर्निंग काउंसिल एवं अकादमिक काउंसिल के विशिष्ट सदस्य, शिक्षकगण, पूर्व छात्र, स्नातक विद्यार्थी अभिभावक तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
  • डेंटल कॉलेज शिमला का नाम राजीव गांधी डेंटल कॉलेज, शिमला होगा: मुख्यमंत्री

    डेंटल कॉलेज शिमला का नाम राजीव गांधी डेंटल कॉलेज, शिमला होगा: मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला में एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स ऑफ इंडिया (एओएमएसआई) के हिमाचल प्रदेश स्टेट चैप्टर के चौथे वार्षिक सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए घोषणा की कि शिमला स्थित डेंटल कॉलेज का नाम राजीव गांधी डेंटल कॉलेज, शिमला किया जाएगा। उन्होंने हमीरपुर में 300 करोड़ रुपये की लागत से डेंटल हेल्थ रिसर्च सेंटर स्थापित करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस सेंटर से रोजगार के अवसर सृजित होंगे तथा लोगों को बेहतर और आधुनिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स का कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे न केवल रोगियों का उपचार करते हैं, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और बेहतर जीवन गुणवत्ता प्रदान करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन लोगों की सेवा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

    सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला रही है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ वर्ष पहले तक यह कल्पना करना भी कठिन था कि हिमाचल प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी जैसी आधुनिक सुविधाएं और 3 टेस्ला एमआरआई जैसी उन्नत तकनीक उपलब्ध हो सकती है। राज्य सरकार सभी मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ जिला अस्पतालों में भी उन्नत तकनीक और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रयास कर रही है, ताकि लोगों को अपने घर के नजदीक ही बेहतर और किफायती उपचार की सुविधा मिल सके तथा इलाज के लिए बाहरी राज्यों का रुख न करना पड़े।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के चिकित्सकों के साथ संवाद स्थापित कर स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। इसी तरह का एक कार्यक्रम डेंटल डॉक्टरों के साथ भी आयोजित किया जाएगा, ताकि डेंटल कॉलेजों में लोगों को आधुनिक और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला से शिक्षा प्राप्त कर निकले डॉक्टर आज देश-विदेश में हिमाचल प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के डॉक्टर अत्यंत प्रतिभाशाली और सक्षम हैं तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

    इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार, कांग्रेस नेता पवन ठाकुर, कैलाश फैडरेशन के चेयरमैन बलदेव ठाकुर, डेंटल कॉलेज शिमला के प्रिंसिपल डॉ. योगेश भारद्वाज, एओएमएसआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आशीष गुप्ता, हिमाचल प्रदेश स्टेट चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. रंगीला राम सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

     

  • लोकायुक्त ने राज्यपाल को हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग की वार्षिक रिपोर्ट सौंपी

    लोकायुक्त ने राज्यपाल को हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग की वार्षिक रिपोर्ट सौंपी

    शिमला: हिमाचल प्रदेश के लोकायुक्त न्यायमूर्ति चंद्र भूषण बरोवालिया, जो हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाल रहे हैं, ने आज यहां लोक भवन में राज्यपाल कविंद्र गुप्ता को हिमाचल प्रदेश मानवाधिकार आयोग की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस रिपोर्ट में आयोग की पिछले एक वर्ष की कार्यप्रणाली और गतिविधियों का विस्तृत विवरण दिया गया है। यह रिपोर्ट राज्य में मानवाधिकारों के संरक्षण और संवर्धन के प्रति आयोग के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है। राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री ने कजाकिस्तान एक्सपोजर विजिट पर गए आईटीआई विद्यार्थियों से बातचीत की

    मुख्यमंत्री ने कजाकिस्तान एक्सपोजर विजिट पर गए आईटीआई विद्यार्थियों से बातचीत की

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कजाकिस्तान के एक्सपोजर विज़िट पर गए हिमाचल प्रदेश के विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के प्रशिक्षुओं से शुक्रवार सायं दूरभाष पर बातचीत की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से उनके अनुभव और उपलब्ध करवाई जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने प्रशिक्षुओं को इस अंतरराष्ट्रीय शिक्षण अवसर का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि कहा कि ऐसे शैक्षणिक दौरे विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    सुक्खू ने कहा कि यह पहली बार है जब राज्य सरकार ने तकनीकी संस्थानों के प्रशिक्षुओं के लिए विदेश में एक्सपोजर विजिट का आयोजन किया है। इससे पहले सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए भी शैक्षणिक एवं एक्सपोजर यात्राओं का आयोजन किया जा चुका है और भविष्य में भी यह पहल जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर दौरे आयोजित करने पर विचार कर रही है ताकि वे वैश्विक स्तर पर आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का अनुभव प्राप्त कर सकें और हिमाचल की स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ बना सकें।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के युवाओं को सुरक्षित और विदेश में रोजगार के सुरक्षित अवसर उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एचपीएसईडीसी) ओवरसीज एम्प्लॉयमेंट सेल की स्थापना की है। उन्होंने विद्यार्थियों से निगम में पंजीकरण करवाने का आग्रह किया ताकि उन्हें विदेश में रोजगार के अवसर मिल सकें। यह पहल नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को फर्जी ट्रैवल एजेंट से बचाने के साथ-साथ उन्हें विदेशों में वास्तविक और बेहतर वेतन वाली नौकरियों तक पहुंच सुनिश्चित करेगी। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने मुख्यमंत्री को प्रशिक्षुओं द्वारा देखे गए शैक्षणिक संस्थानों, उद्योगों और अन्य प्रतिष्ठानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस यात्रा से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान और बहुमूल्य सीख प्राप्त हुई है।

    विद्यार्थियों ने इस अनूठे अवसर के लिए मुख्यमंत्री आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस एक्सपोजर विजिट ने उनके दृष्टिकोण का विस्तार और उनकी तकनीकी समझ को समृद्ध किया है तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का अनुभव प्रदान किया है जो भविष्य के लिए अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगा।

     

  • बागवानों को सेब खरीद बकाया भुगतान के लिए 45 करोड़ रुपये जारी: मुख्यमंत्री

    बागवानों को सेब खरीद बकाया भुगतान के लिए 45 करोड़ रुपये जारी: मुख्यमंत्री

    खरीद प्रक्रिया के डिजिटलीकरण के लिए वेबसाइट और मोबाइल ऐप का शुभारंभ किया

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज बागवानी विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के अंतर्गत वर्ष 2022, 2023, 2024 और 2025 में खरीदे गए सेबों के बकाया भुगतान प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से सेब उत्पादकों के खातों में भेज दिए हैं। एमआईएस के अंतर्गत 30 बैग तक सेब बेचने वाले उत्पादकों को भुगतान पहले ही किया जा चुका है जबकि 100 बैग या उससे अधिक सेब बेचने वाले उत्पादकों को भुगतान की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लंबित देनदारियों के भुगतान के लिए राज्य सरकार ने 45 करोड़ रुपये जारी किए हैं। वर्तमान सीजन में एमआईएस के तहत सेब खरीद की तैयारियों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने बागवानी मंडी मध्यस्थता योजना (एचएमआईएस) की वेबसाइट और मोबाइल ऐप का भी शुभारंभ किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सेब खरीद से लेकर उसके प्रसंस्करण तक की पूरी प्रक्रिया का ऑनलाइन रिकॉर्ड रखेगा, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित होगी। सेब उत्पादकों को पोर्टल पर आधार संख्या, भूमि संबंधी विवरण और बैंक खाते की जानकारी देकर पंजीकरण करवाना होगा। इसके साथ ही वे अपनी उपज बेचने के लिए ऑनलाइन समय स्लॉट भी बुक कर सकेंगे, जिससे प्रतीक्षा समय कम होगा और उन्हें अधिक सुविधा मिलेगी। खरीद और भुगतान की स्थिति से संबंधित जानकारी उत्पादकों को उनके मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध करवाई जाएगी, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी। मुख्यमंत्री ने खरीद सीजन के दौरान सभी संग्रहण केंद्रों (कलेक्शन सेंटर) पर उत्पादकों की सहायता के लिए पर्याप्त कर्मचारी तैनात करने के निर्देश दिए। आवश्यकता पड़ने पर अन्य विभागों के कर्मचारियों की भी सेवाएं ली जा सकती हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खरीद सीजन शुरू होने से पहले सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली जाएं, ताकि बागवानों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। सुक्खू ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार किसानों और बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है तथा उनके उत्थान के लिए अनेक योजनाएं लागू की हैं। उन्होंने कहा कि सेब की पैकेजिंग के लिए यूनिवर्सल कार्टन प्रणाली लागू की गई है ताकि बागवानों को बिचौलियों के शोषण से बचाया जा सके। हिमफेड के अध्यक्ष महेश्वर सिंह चौहान, बागवानी सचिव सी. पॉलरासु, निदेशक डिजिटल प्रौद्यागिकी एवं नवाचार डॉ. निपुण जिंदल, एचपीएमसी के प्रबंध निदेशक डी.सी. राणा, बागवानी निदेशक सतीश कुमार तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।  
  • अत्याधुनिक व उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का उभरता केंद्र बना हिमाचल: Naresh Chauhan

    अत्याधुनिक व उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का उभरता केंद्र बना हिमाचल: Naresh Chauhan

    स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए की गई 2,432 नियुक्तियां

    शिमला: मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (मीडिया) नरेश चौहान ने आज यहां पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन किए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल हैं। आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण विरासत में मिलने के बावजूद सरकार ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के अपने संकल्प पर अडिग रही है। वर्तमान प्रदेश सरकार ने आधुनिक तकनीक के समावेश, स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार और श्रमशक्ति को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा प्रदान की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के 70 स्वास्थ्य संस्थानों को ‘आदर्श स्वास्थ्य संस्थान’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं और आधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही है ताकि लोगों को उनके घर-द्वार के समीप ही गुणवत्तापूर्ण एवं किफायती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। नरेश चौहान ने कहा कि हिमाचल सरकारी क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। इसके साथ ही सरकार अस्पतालों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं से लैस कर रही है। सभी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में 3 टेस्ला एमआरआई मशीनें स्थापित की जा रही हैैं। आईजीएमसी शिमला और एआईएमएसएस चमियाना में यह सुविधा उपलब्ध करवा दी गई है। वहीं जिला एवं क्षेत्रीय अस्पतालों में 1.5 टेस्ला एमआरआई, पीईटी स्कैन, सीटी स्कैन तथा आधुनिक कैंसर उपचार प्रणाली स्थापित की जा रही है। साथ ही 16 से 20 वर्ष पुराने चिकित्सा उपकरणों को भी बदला जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए लगभग 3,000 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त ट्रॉमा, कैंसर और क्रिटिकल केयर सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप और एम्स दिल्ली की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जायका) के सहयोग से स्वास्थ्य क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को क्रियान्वित कर रही है। प्रथम चरण के तहत लगभग 1,710 करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जिनमें अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों की खरीद और स्वास्थ्य अधोसंरचना का विकास शामिल है। वहीं द्वितीय चरण के लिए 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया है। इन परियोजनाओं में अत्याधुनिक बाल चिकित्सा सुविधाएं, आधुनिक दंत चिकित्सालय तथा राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों को और अधिक सशक्त बनाने का प्रावधान है। नरेश चौहान ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में श्रमशक्ति को सुदृढ़ करने पर भी विशेष बल दिया जा रहा है। पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में चिकित्सकों, विशेषज्ञ चिकित्सकों, फैकल्टी सदस्यों, नर्सों, पैरामेडिकल तथा अन्य सहायक कर्मचारियों सहित कुल 2,432 नियुक्तियां की गई हैं। इसके अतिरिक्त 218 वरिष्ठ रेजिडेंट एवं ट्यूटर विशेषज्ञ के पद भी सृजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन पदों के मानदेय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है ताकि प्रदेश में विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने के लिए चिकित्सा शिक्षा का भी व्यापक विस्तार किया गया है। राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर चिकित्सा (पीजी) सीटों की संख्या 277 से बढ़ाकर 597 करना प्रस्तावित है। इसके अलावा बीएससी मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, रेडियोलॉजी एवं इमेजिंग, एनेस्थीसिया तथा ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी की सीटों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है ताकि भविष्य के लिए कुशल स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। नरेश चौहान ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर वित्तीय अव्यवस्था छोड़कर गई थी, जिसके कारण हिमकेयर और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं में अनियमितताएं तथा वित्तीय देनदारियां बढ़ गई थीं। उपचार पैकेज और सर्जरी दरों के निर्धारण के लिए कोई वैज्ञानिक व्यवस्था नहीं थी, जिससे वित्तीय अनुशासन प्रभावित हुआ और भुगतान में देरी हुई। वर्तमान सरकार ने इन सभी कमियों को दूर करने तथा पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित करने के लिए व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजनाओं को पारदर्शी एवं प्रभावी प्रतिपूर्ति प्रणाली के माध्यम से सुव्यवस्थित कर रही है ताकि दावों का समय पर निपटारा सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकारी कर्मचारियों के लंबित चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावों के भुगतान के लिए हाल ही में 212 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं तथा हिमकेयर और आयुष्मान भारत के लंबित भुगतान भी शीघ्र जारी किए जाएंगे। नरेश चौहान ने कहा कि वर्तमान सरकार केवल स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र में व्यापक बदलाव लाने के लिए कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है कि हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच सकें तथा प्रदेश को अत्याधुनिक चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाया जा सके।  
  • राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत आवेदक के लिए आयु सीमा बढ़ाई गई

    राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत आवेदक के लिए आयु सीमा बढ़ाई गई

    शिमला: रोजगार एवं विदेशी नियोजन विभाग के एक प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि स्वरोजगार को बढ़ावा देने तथा योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना-2023 में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इसके अंतर्गत आवेदक की अधिकतम आयु सीमा 23 से 45 वर्ष के स्थान पर 23-50 वर्ष कर दी गई है। इस योजना के तहत प्रदेश सरकार द्वारा ई-टैक्सी खरीदने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जा रही है।

    पात्र आवेदकों के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 23 जुलाई, 2026 निर्धारित की गई है। सभी इच्छुक आवेदक अपना आवेदन ऑनलाइन पोर्टल https://etaxihpdt.org/home पर कर सकते हैं। जिन आवेदनकर्ताओं ने 2 जून, 2026 से 16 जून, 2026 के बीच इस योजना के अंतर्गत आवेदन कर दिया है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने सभी पात्र एवं इच्छुक आवेदकों को इस अवसर का लाभ उठाने और निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से जमा करने का आग्रह किया।