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  • ‘गुरु के लंगर’ सेवा में भाग लेकर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने किया योगदान

    ‘गुरु के लंगर’ सेवा में भाग लेकर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने किया योगदान

    शिमला: उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने आज आईजीएमसी शिमला में प्रो. सिम्मी अग्निहोत्री की पुण्य स्मृति में ‘ऑलमाईट ब्लेसिंग्ज संस्था’ द्वारा वर्षों से संचालित ‘गुरु के लंगर’ सेवा में सहभागिता कर सेवा कार्य किया।

    इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘गुरु के लंगर’ जैसी सेवाएं निस्वार्थ भाव से मानवता की सच्ची मिसाल प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने कहा कि इस सेवा के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों एवं उनके परिजनों को प्रेम, सम्मान और आत्मीयता के साथ भोजन उपलब्ध करवाया जाता है, जो समाज में सेवा और करुणा की भावना को सुदृढ़ करता है।

    अग्निहोत्री ने ‘ऑलमाईट ब्लैसिंग्ज संस्था’ के संस्थापक सरबजीत सिंह बॉबी की सराहना करते हुए कहा कि वे पिछले 11 वर्षों से पूर्ण समर्पण और सेवा भावना के साथ इस महान मानवीय कार्य को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। यह पहल समाज के लिए प्रेरणास्रोत है और सेवा, सहयोग व संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उप-मुख्यमंत्री ने संस्था से जुड़े सभी सेवाभावियों को इस पुनीत कार्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सरकार ऐसे सामाजिक और मानवीय प्रयासों को सदैव प्रोत्साहित करती रहेगी।

  • IA&AS अधिकारियों के क्षमता निर्माण प्रशिक्षण का उद्घाटन, राज्यपाल ने किया शुभारंभ

    IA&AS अधिकारियों के क्षमता निर्माण प्रशिक्षण का उद्घाटन, राज्यपाल ने किया शुभारंभ

    शिमला: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने गुरुवार को शिमला के यारोज में भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा (आईएएंडएएस) के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के प्रशिक्षण कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। उन्होंने युवा अधिकारियों से संवैधानिक मूल्यों, ईमानदारी और पेशेवर उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया, ताकि वे देशभर में लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा द्वारा स्थापित उच्च मानकों के सच्चे संरक्षक बन सकें।

    राज्यपाल ने अधिकारियों से मर्यादा बनाए रखने तथा ज़मीनी स्तर पर वित्तीय जवाबदेही और रिपोर्टिंग व्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर संवाद बनाए रखने का आग्रह किया। राज्यपाल ने अकादमी की 1950 में स्थापना से जुड़ी समृद्ध विरासत का स्मरण करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी (एनएएए) ने देश में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और सुशासन को सुदृढ़ करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि इतने प्रतिष्ठित संस्थान से व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करना प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए गर्व की बात है।

    राज्यपाल ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखाकार (सीएजी) के संवैधानिक महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह संस्था सबसे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक संस्थानों में से एक मानी जाती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को बताया कि अब वे ऐसे संगठन से जुडे़ हैं, जो सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा करता है और प्रशासन में वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करता है।

    राज्यपाल ने कहा कि एक ऑडिटर के रूप में आपकी भूमिका केवल वित्तीय जांच तक ही सीमित नहीं। आपके द्वारा सम्पन्न प्रत्येक लेखा व्यवस्थित सुधार सुनिश्चित करते हुए प्रणालीगत सुधार का मार्ग प्रशस्त करने के अलावा जनसेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाता है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भूटान और मालदीव के अधिकारी भी शामिल हैं।

     

    शुक्ल ने 21वीं सदी में सतत् सीखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि ज्ञान और अनुकूलन क्षमता ही पेशेवर उत्कृष्टता की कुंजी हैं। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से अकादमी के संसाधनों का भरपूर उपयोग कर अपनी बौद्धिक और व्यावसायिक क्षमताओं को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने इस अवसर पर एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया।

    राष्ट्रीय लेखा एवं लेखा परीक्षा अकादमी के महानिदेशक एस. आलोक ने राज्यपाल का स्वागत किया। उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को शपथ भी दिलाई। निदेशक पुष्पलता ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) पुरुषोत्तम तिवारी, प्रधान महालेखाकार (लेखा एवं हकदारी) सुशील कुमार ठाकुर, राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, कर्मचारियों व पेंशनरों के एरियर पर सरकार ने खर्च किए ₹2,155 करोड़

    मुख्यमंत्री सुक्खू का ऐलान, कर्मचारियों व पेंशनरों के एरियर पर सरकार ने खर्च किए ₹2,155 करोड़

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पेंशनर्स दिवस के अवसर पर आज बिलासपुर जिला के घुमारवीं में हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा द्वारा आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में संबोधित करते हुए कहा कि यह दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि उन सेवाओं, त्याग और समर्पण को नमन करने का अवसर है, जिनके बल पर हिमाचल प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था सशक्त और सुचारू बनी हुई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पेंशनरों ने अपने सेवाकाल में ईमानदारी, निष्ठा और कर्तव्यबोध के साथ कार्य करते हुए प्रदेश और सरकार की नींव को मजबूत किया है। आज जो संस्थाएं सुदृढ़ हैं और व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से कार्य कर रही हैं, उसके पीछे सेवानिवृत्त कर्मचारियों का अथक परिश्रम और बहुमूल्य अनुभव निहित है। प्रदेश सरकार उनके इस अमूल्य योगदान के प्रति सदैव कृतज्ञ रहेगी।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों और पेंशनरों के कल्याण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सत्ता संभालते ही पहली कैबिनेट बैठक में अपने वायदे को निभाते हुए पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) को बहाल किया गया। उन्होंने कहा कि ओपीएस बहाली से प्रदेश के 1.36 लाख कर्मचारियों को सम्मान, सुरक्षा और भरोसे का संबल मिला है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार के दौरान वेतन और पेंशन से जुड़ी जो बड़ी बकाया राशि प्रदेश पर छोड़ी गई थी, उसे भी वर्तमान सरकार चरणबद्ध और व्यवस्थित तरीके से अदा कर रही है।

    राज्य सरकार ने प्राथमिकता के आधार पर 75 वर्ष या इससे अधिक उम्र के पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों को उनके बकाया पेंशन/पारिवारिक पेंशन एरियर का पूरा भुगतान कर दिया है। पिछली सरकार ने केवल 20 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया था। प्रदेश सरकार ने 80 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया है। सरकार ने 70 वर्ष से अधिक उम्र के पेंशनरों/पारिवारिक पेंशनरों को उनके कुल पेंशन/पारिवारिक पेंशन के एरियर का 70 प्रतिशत का भुगतान कर दिया है। पिछली सरकार ने 20 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया था, जबकि प्रदेश सरकार ने इस वर्ग के पेंशनरों को 50 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया है। इन पेंशनरों के बकाया एरियर का भुगतान 40 दिन के भीतर कर दिया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि 65 से 70 वर्ष की आयु वर्ग के पेंशनर्स के कुल एरियर का 38 प्रतिशत भुगतान कर दिया है। पिछली सरकार ने 20 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया गया था, जबकि हमारी सरकार ने गंभीर वित्तीय स्थिति के बावजूद अतिरिक्त 18 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया है। इस पर 75 करोड़ रुपये खर्च हुआ है। उन्होंने कहा कि 65 वर्ष से कम आयु के पेंशनर्स को 35 प्रतिशत एरियर का भुगतान कर दिया गया है। पिछली सरकार ने 20 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया है, जबकि हमारी सरकार ने अब तक अतिरिक्त 15 प्रतिशत एरियर का भुगतान किया है। इस पर कुल 110 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने 1 जनवरी, 2016 से 31 दिसम्बर, 2021 तक के सेवानिवृत कर्मचारियों को उनके ग्रेच्युटी एरियर के 20 प्रतिशत भाग का भुगतान कर दिया गया है। बकाया एरियर का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जायेगा और प्रदेश सरकार इस बारे में आगामी बजट से पहले निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा कर्मचारियों के वेतन के एरियर की किश्त के तौर पर 50 हजार रुपये प्रथम श्रेणी से तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों तथा 60 हजार रुपये चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भुगतान किया जा चुका है। इस पर 800 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। राज्य सरकार द्वारा चतुर्थ श्रेणी के सभी कर्मचारियों को उनके वेतन एरियर का अतिरिक्त 20 हजार रुपये का भुगतान 19 अक्तूबर, 2024 को किया गया। इस पर 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अब तक प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों व पेंशनरों के एरियर पर कुल 2155 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी कुछ समय पहले हमने चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को पेंशन का लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से उनके पांच साल की दैनिक सेवा के बदले एक साल की क्वालिफाइंग सर्विस का लाभ, पेंशन गणना के लिए दिया है। प्रदेश सरकार ने राज्य को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने के लिए आर्थिक फैसले लिए हैं, इन फैसलों का लाभ धीरे-धीरे दिखाई देगा और जैसे ही प्रदेश के राजस्व में सुधार होगा, कर्मचारियों एवं पेंशनरों के एरियर आदि देनदारियों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।

    इसके अतिरिक्त 16 वें वित्त आयोग की सिफारिशों के आधार पर केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त होने पर कर्मचारियों/पेंशनरो के सभी वित्तीय देनदारियों का भुगतान चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पेंशनरों के सभी चिकित्सा प्रतिपूर्ति बिलों की अदायगी की 30 दिन के भीतर कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिलासपुर में भाखड़ा बांध के विस्थापितों की मदद के लिए प्रदेश सरकार द्वारा पॉलिसी बनाने पर विचार किया जा रहा है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की आर्थिक मदद करने के सही आंकड़े प्रस्तुत नहीं कर रहे हैं। वास्तविकता यह है कि केंद्र द्वारा हिमाचल के हितों की अनदेखी की जा रही है। इस अवसर पर पेंशनर संयुक्त मोर्चा की मंडी स्थित शाखा ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक लाख रुपए का चेक भेंट किया।

    नगर एवं ग्राम नियोजन व तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने घुमारवीं पधारने पर मुख्यमंत्री का स्वागत किया और क्षेत्र के लिए 69 करोड़ रुपए लागत की विकासात्मक परियोजनाएं समर्पित करने के लिए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मुख्यमंत्री ने वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित किया और आय के नए संसाधन भी सृजित किए। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी।

    हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त मोर्चा के राज्य अध्यक्ष आत्मा राम शर्मा ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। उन्होंने वर्तमान प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों को दिए जा रहे विभिन्न वित्तीय लाभों की विस्तार से जानकारी दी और पेंशनर्स की मांगों के बारे में भी अवगत करवाया। इस अवसर पर आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू, महिला आयोग की सदस्य रीना पुंडीर, एपीएमसी के अध्यक्ष सतपाल वर्धन, पूर्व विधायक तिलक राज और बंबर ठाकुर, कांग्रेस नेता विवेक कुमार, हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी, सदस्य और गणमान्य उपस्थित थे।

     

     

     

  • खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की बैठक में उद्योग मंत्री ने किया वेबसाइट का शुभारंभ

    खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की बैठक में उद्योग मंत्री ने किया वेबसाइट का शुभारंभ

    शिमला: उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज यहां हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की 246वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान बोर्ड से संबंधित विभिन्न विभागीय एवं नीतिगत मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई तथा खादी एवं ग्रामोद्योग क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए महत्त्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

    बैठक के दौरान उद्योग मंत्री ने खादी एवं ग्रामोद्योग से जुड़े कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, रोज़गार सृजन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने पर विशेष बल दिया। उद्योग मंत्री ने इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह वेबसाइट विभाग की योजनाओं, कार्यक्रमों, गतिविधियों एवं उपलब्धियों की जानकारी आमजन तक सरल एवं पारदर्शी तरीके से पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी। विभागीय वेबसाइट http://hpkhadi.in के माध्यम से लाभार्थियों, उद्यमियों तथा आम नागरिकों को विभाग से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध हो सकेंगी।

    अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग आर.डी. नजीम, मुख्य कार्यकारी अधिकारी खादी एवं ग्रामोद्योग जितेंद्र कुमार, उप-सचिव (वित्त) भुवनेश शर्मा, संयुक्त निदेशक उद्योग रमेश वर्मा, राज्य नोडल अधिकारी-सह जिला अधिकारी (डी.ओ.) संजीव जस्टा इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • नशे के खिलाफ सख्त लड़ाई, हमीरपुर से मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिया साफ संदेश

    नशे के खिलाफ सख्त लड़ाई, हमीरपुर से मुख्यमंत्री सुक्खू ने दिया साफ संदेश

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में मादक पदार्थ चिट्टे के खिलाफ व्यापक जन आंदोलन के तहत आज हमीरपुर में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (छात्र) के खेल मैदान से पुलिस लाइन दोसड़का ग्राउंड तक आयोजित एंटी चिट्टा जागरूकता वॉकथॉन का नेतृत्व किया, जिसमें समाज के सभी वर्गों ने भाग लिया। इनमें भारी संख्या में विद्यार्थी, जन प्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने वॉकथॉन आरम्भ होने से पहले राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (छात्र) के खेल मैदान में उपस्थित लोगों को चिट्टे और मादक पदार्थों के सेवन के खिलाफ जागरूकता शपथ भी दिलाई। पुलिस लाइन ग्राउंड दोसड़का में उपस्थित जनसैलाब को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल चिट्टे के खिलाफ निर्णायक जंग लड़ रहा है। प्रदेश में युवाओं के भविष्य को खोखला कर रहे चिट्टा जैसे घातक नशे के विरुद्ध राज्य सरकार आर-पार की लड़ाई लड़ रही है। चिट्टा रूपी दीमक को समाप्त करने की दिशा में सख्त और निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। नशे के इस अवैध नेटवर्क से जुड़े तस्करों, सप्लायरों और उनका संरक्षण देने वालों पर एक-एक कर शिकंजा कसा जा रहा है। चिट्टा के कारोबार से जुड़े संगठित गिरोहों की कमर तोड़ने के लिए तकनीक, खुफिया तंत्र और कड़े कानूनों का प्रभावी इस्तेमाल किया जा रहा है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार अपने संकल्प के अनुसार चिट्टा सौदागरों की पहचान, नाम और नेटवर्क सब मिटा देगी। यह जन आंदोलन, प्रदेश के लोगों की पुकार और हिमाचल की अस्मिता का युद्ध है। उन्होंने कहा कि इस महा आंदोलन को आरम्भ हुए 30 दिन हो चुके हैं। इस दौरान 22 नवम्बर को हिमाचल के इतिहास में पहली बार पूरे प्रदेश में पुलिस द्वारा एक साथ 121 स्थानों पर छापामारी की गई। बड़े तस्करों के नेटवर्क पर सीधा प्रहार किया गया तथा तीन दिन बाद 41 शिक्षण संस्थानों, 598 दुकानों, बाजारों और कॉलेजों के आसपास गहन छानबीन की गई। 12 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए और 385 चालान किए गए।

    उन्होंने कहा कि 7 दिसंबर को पीआईटी एण्ड एनडीपीएस के तहत एक साथ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से 16 नामी तस्करों को हिरासत में लिया गया। इस अधिनियम के तहत अब तक 63 तस्कर गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 1214 तस्कर और संदिग्धों की पहचान तथा 950 अवैध संपत्तियां सीमांकित की गई हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान तीन वर्ष में एनडीपीएस के तहत 13 करोड़ रुपये की चल-अचल सम्पत्ति जब्त की गई थी, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान अब तक 50 करोड़ रुपये से अधिक की चल-अचल जब्त की जा चुकी है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा चिट्टे के खिलाफ बहुस्तरीय व बहुआयामी कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में नशा निवारण केन्द्र स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश में नशा मुक्ति रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड का गठन भी किया गया है। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हम नशे के चंगुल में फंसे युवाओं को समाज की मुख्य धारा में ला रहे हैं। उन्होंने प्रहारक शब्दों में कहा कि चिट्टे के माफिया और उनसे जुड़े तस्करों की सूचना देने वालों को दस हजार रुपये से 10 लाख रुपये तक ईनाम दिया जाएगा और गोपनीयता 100 प्रतिशत होगी। उन्होंने वीरभूमि हमीरपुर से चिट्टा का समूल नाश करने के लिए समाज के सभी वर्गों को एकजुट होने का आह्वान किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि नशामुक्त हिमाचल के लक्ष्य को जमीनी स्तर पर हासिल करने के लिए 15 दिसम्बर को प्रदेश की 234 सबसे ज्यादा नशा प्रभावित पंचायतों और शहरी निकायों में नशा निवारण समितियों की बैठकें आयोजित की गई हैं। इन बैठकों के दौरान जन भागीदारी को सशक्त बनाने तथा स्थानीय हालात का आकलन करने के दृष्टिगत व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श किया गया।

    एंटी चिट्टा अवेयरनेस वॉकथॉन के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से संवाद भी किया। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि चिट्टा किस प्रकार सेहत और समाज के लिए खतरा बन गया है। उन्होंने बच्चों को अपने आस-पास के लोगों को चिट्टे व मादक पदार्थों के दुष्प्र्रभावों के बारे में जागरूक करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर गुब्बारे व अन्य माध्यम द्वारा नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया। पुलिस विभाग ने नशे के दुष्प्रभावों के संबंध में जागरूकता फैलाने के लिए आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।

    मुख्यमंत्री ने वॉकथॉन के आयोजन के लिए पुलिस विभाग और सहभागियों के प्रयासों की सराहना की। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू, विधायक सुरेश कुमार व कैप्टन रणजीत सिंह, एपीएमसी के अध्यक्ष अजय शर्मा, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, उपायुक्त अमरजीत सिंह, पुलिस अधीक्षक बलबीर सिंह, प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, नशा मुक्ति, रोकथाम एवं पुनर्वास बोर्ड के संयोजक व सलाहकार नरेश ठाकुर, उप-संयोजक संजय भारद्वाज, कांग्रेस नेता पुष्पेन्दर वर्मा, सुभाष ढटवालिया, व विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

  • बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्ड की बड़ी पहल, हजारों लाभार्थियों को 14.17 करोड़ की सहायता

    बीओसीडब्ल्यू कल्याण बोर्ड की बड़ी पहल, हजारों लाभार्थियों को 14.17 करोड़ की सहायता

    शिमला: हिमाचल प्रदेश भवन एवं सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने आज यहां बोर्ड की 53वीं निदेशक मंडल बैठक की अध्यक्षता की। इस अवसर पर नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि बोर्ड द्वारा अब तक 3,835 लाभार्थियों में 14.17 करोड़ रुपये की सहायता वितरित की गई है, जिनमें से 9.28 करोड़ रुपये शिक्षा सहायता योजनाओं के तहत आवंटित किए गए हैं।

    बैठक के दौरान निदेशक मंडल ने ज़िला मंडी के बलद्वाड़ा (भांबला) में नए उप-कार्यालय स्थापित करने को मंज़ूरी प्रदान की। वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए वार्षिक खातों को मंजू़री प्रदान की गई तथा दावों की लंबितता को स्पष्ट करने पर चर्चा हुई। उन्होंने श्रमिकों के क्लेम फॉर्म और ई-केवाईसी की प्रक्रिया को तेज़ करने के भी निर्देश दिए।

    उन्होंने कामगारों को समय पर लाभ सुनिश्चित करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए ताकि लंबित दावों को शीघ्रता से निपटाया जा सके। उन्होंने कहा कि ई-केवाईसी और अन्य आवश्यक औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा किया जाए, ताकि पात्र लाभार्थियों को बिना देरी सहायता मिल सके।

    अध्यक्ष ने बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों को उनके उपयोगी सुझावों और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।
    नरदेव सिंह कंवर ने कहा कि प्रदेश भर में निर्माण कामगारों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा और उत्थान के प्रति बोर्ड की मजबूत प्रतिबद्धता के चलते अब सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं और पात्र लाभार्थियों को विभिन्न योजनाओं का भरपूर लाभ मिल रहा है।

    बैठक में बोर्ड के गैर-आधिकारिक सदस्य रविंद्र सिंह रवि, भूपेंद्र सिंह, जे.सी. चौहान और प्रदीप कुमार तथा विशेष सचिव (वित्त) विजय वर्धन, सचिव-कम-सीईओ राजीव कुमार तथा अतिरिक्त सचिव (विधि) आर.एस. तोमर भी उपस्थित थे।

  • राज्यपाल ने जलवायु परिवर्तन पर आधारित बच्चों की फिल्म ‘क्रासिंग्स’ की तारीफ की

    राज्यपाल ने जलवायु परिवर्तन पर आधारित बच्चों की फिल्म ‘क्रासिंग्स’ की तारीफ की

    शिमला: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने आज लोक भवन में ‘क्रासिंग्स’ फिल्म देखने के उपरांत बच्चों में जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए इस फिल्म की सराहना की। उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित फिल्म निर्माता विवेक मोहन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस फिल्म के माध्यम से एक संवेदनशील और प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत किया गया है। फिल्म पर्यावरण संरक्षण पर आधारित है और यह दर्शाती है कि मानव गतिविधियों के कारण किस तरह प्राकृतिक आपदाएं आती है।

    विवेक मोहन ने बताया कि ‘क्रासिंग्स’ दो वास्तविक घटनाओं से प्रेरित एक लघु फिल्म है। यह फिल्म ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि यह फिल्म उनकी पहले की फिल्म ‘फॉर हूम द जिंगल बेल्स टोल’ में दिए गए संदेश को आगे बढ़ाती है। फिल्म में दर्शाया गया है कि पृथ्वी हमें अपने पूर्वजों से विरासत में नहीं मिली है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है।

    राज्यपाल ने फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की रचनात्मक पहलें, सभी लोगों, विशेषकर बच्चों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता लानेे में, बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश प्राकृतिक संपदा से भरपूर राज्य है और इसे सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
    राज्यपाल ने कहा कि ‘क्रासिंग्स’ जैसी फिल्में पर्यावरण के प्रति चेतना बढ़ाने में सार्थक योगदान देती हैं और प्रशंसा के योग्य हैं।

  • एपीएआर सॉफ्टवेयर को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से ली प्रगति रिपोर्ट

    एपीएआर सॉफ्टवेयर को लेकर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से ली प्रगति रिपोर्ट

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) सॉफ्टवेयर के विकास कार्य की प्रगति की समीक्षा की। यह सॉफ्टवेयर डिजिटल टेक्नोलॉजीज एवं गवर्नेंस विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के लिए एक पारदर्शी, प्रभावी एवं पूर्णतः डिजिटल प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली स्थापित करना है।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को अवगत करवाया गया कि एपीएआर पोर्टल के माध्यम से एपीएआर तथा वार्षिक कार्य योजनाओं की एंड-टू-एंड ऑनलाइन प्रोसेसिंग एक सुव्यवस्थित डिजिटल वर्कफ्लो के तहत की जा सकेगी। यह प्रणाली प्रदर्शन मूल्यांकन प्रक्रिया में निष्पक्षता, जवाबदेही तथा निगरानी में सुगमता सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है।

    मुख्यमंत्री को बताया गया कि एपीएआर की शुरुआत संबंधित रिपोर्टिंग अथॉरिटी द्वारा तैयार की गई वार्षिक कार्य योजना एवं स्पष्ट रूप से निर्धारित गुणात्मक एवं मात्रात्मक लक्ष्यों के आधार पर की जाएगी। सॉफ्टवेयर में यह प्रावधान भी होगा कि प्रशासनिक आवश्यकताओं एवं बदलती प्राथमिकताओं के अनुरूप व्यक्तिगत अधिकारियों अथवा संपूर्ण कैडर के लक्ष्यों में वार्षिक संशोधन किया जा सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समूह ‘ए’, ‘बी’, ‘सी’ एवं ‘डी’ के सभी कर्मचारियों के लिए एक समान एवं मानकीकृत एपीएआर प्रारूप लागू किया जाएगा, जिससे प्रदर्शन मूल्यांकन में एकरूपता एवं निष्पक्षता सुनिश्चित होगी। पोर्टल के माध्यम से एपीएआर की शुरुआत के समय रिपोर्टिंग, रिव्यूइंग एवं एक्सेप्टिंग अधिकारियों की ऑनलाइन पहचान एवं अनुमोदन की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

    मुख्यमंत्री को यह भी अवगत करवाया गया कि यह प्रणाली एक ही वित्तीय वर्ष में एक से अधिक एपीएआर शुरू करने की सुविधा प्रदान करेगी, बशर्ते प्रत्येक एपीएआर की न्यूनतम अवधि तीन माह हो। इससे स्थानांतरण अथवा दायित्वों में परिवर्तन की स्थिति में अधिक सटीक मूल्यांकन संभव हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने प्रगति की समीक्षा करते हुए सॉफ्टवेयर को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने तथा इसे उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि एपीएआर पोर्टल प्रदर्शन-आधारित शासन को सुदृढ़ करने, पारदर्शिता बढ़ाने तथा सरकारी तंत्र में जवाबदेही की संस्कृति को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

    बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (नवाचार, डिजिटल टेक्नोलॉजीज एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, विधायक सुरेश कुमार, डिजिटल टेक्नोलॉजीज एवं गवर्नेंस विभाग के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल, संयुक्त निदेशक अनिल सेमवाल तथा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • डिजिटल युग की ओर शिक्षा, मुख्यमंत्री ने नई शैक्षणिक सुविधाओं का किया शुभारंभ

    डिजिटल युग की ओर शिक्षा, मुख्यमंत्री ने नई शैक्षणिक सुविधाओं का किया शुभारंभ

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज समग्र शिक्षा निदेशालय में नव-निर्मित विद्या समीक्षा केंद्र, शिक्षा दीर्घा, कार्यक्रम प्रबंधन स्टूडियोदृसम्मेलन क्षेत्र, नए सम्मेलन कक्ष तथा आधुनिक केंद्रीय ताप व्यवस्था का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह अत्याधुनिक सुविधाएं न केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य प्रणाली को अधिक सक्षम बनाएंगी, बल्कि हिमाचल प्रदेश में डिजिटल शिक्षा प्रबंधन के एक नए युग की शुरुआत करेंगी। यह पहल सरकार की उस दूरदर्शी सोच का सशक्त प्रमाण है, जिसमें शिक्षा को विकास की रीढ़ माना गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में प्रदेश सरकार ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अनेक निर्णायक सुधार लागू किए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता के आकलन में हिमाचल प्रदेश ने 21वें स्थान से उल्लेखनीय सुधार करते हुए पांचवां स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सामूहिक मेहनत के साथ-साथ प्रदेश सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है।

    उन्होंने कहा कि विद्या समीक्षा केंद्र इस परिवर्तनकारी यात्रा का एक महत्त्वपूर्ण अध्याय है। हिमाचल प्रदेश उन अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है, जहां एकीकृत डिजिटल मंच के माध्यम से शिक्षण, मूल्यांकन, उपस्थिति, संसाधन प्रबंधन और विद्यालय संचालन से संबंधित वास्तविक समय का आंकड़ा उपलब्ध करवाया जा रहा है। ‘अभ्यास हिमाचल’, भू-स्थानिक तकनीक आधारित स्मार्ट उपस्थिति प्रणाली तथा ‘निपुण प्रगति’ जैसे नवाचार विद्यार्थियों के सीखने के स्तर का वैज्ञानिक विश्लेषण सुनिश्चित कर रहे हैं। अब सीखने की कमियों की पहचान अनुमान के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस आंकड़ों के माध्यम से की जा रही है, जिससे शिक्षा व्यवस्था अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और परिणाम-केंद्रित बन रही है।

    उन्होंने कहा कि ‘शिक्षक सहायक’ डिजिटल उपकरण शिक्षकों के लिए एक सशक्त मंच बनकर उभरा है। इसके माध्यम से शिक्षक शिक्षण सामग्री, दिशा-निर्देश और शैक्षणिक संसाधन त्वरित रूप से प्राप्त कर पा रहे हैं, जिससे शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ प्रशासनिक बोझ में भी कमी आई है।

    ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता केवल नए संस्थान स्थापित करना नहीं है, बल्कि मौजूदा शैक्षणिक संस्थानों को सशक्त, सक्षम और आधुनिक बनाना है, ताकि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक भी समान रूप से पहुंच सके।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों में 21वीं सदी के कौशल विकसित करने के लिए प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र से प्री-नर्सरी से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों द्वारा स्कूल परिसर में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबन्ध लगा दिया जाएगा। अध्यापक अपने मोबाइल फोन स्टाफ रूम या बैग में रख सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में दृढ़ता से कार्य किया जा रहा है। स्कूली पाठ्यक्रम में संगीत, संस्कृति और भविष्य के विषयों का समावेश भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा विभाग में व्यापक स्तर पर भर्तियां करने जा रही है, जिसमें अस्थाई व स्थाई दोनों तरह की भर्तियां की जाएंगी। अस्थाई भर्तियां पांच वर्ष के लिए व स्थाई भर्तियां बैच वाइज व प्रतिस्पर्धा के आधार पर की जाएंगी। मल्टी यूटिलिटी वर्कर्ज की भर्ती भी की जाएगी। आगामी शैक्षणिक सत्र से प्राथमिक विद्यालयों की खेल प्रतिस्पर्धाएं भी आयोजित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2032 तक प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में देश के सबसे बेहतरीन स्कूल होंगे। हिमाचल शिक्षा के क्षेत्र में देश भर में नंबर एक स्थान पर होगा। प्रदेश सरकार द्वारा गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने की परिकल्पना बहुआयामी दृष्टिकोण से की गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा विभाग में बेहतर तबादला नीति लाने पर विचार किया जा रहा है। राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल और सीबीएसई पाठ्यक्रम स्कूलों के लिए विशेष कैडर बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को शिक्षा विभाग से सबसे अधिक सहयोग प्राप्त हो रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने संकल्प वर्कबुक का विमोचन भी किया।

    शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रदेश की साक्षरता दर 99.30 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। प्रदेश सरकार ने सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ शिक्षा क्षेत्र में गुणात्मक सुधार किए हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर सराहना की जा रही है। उन्होंने कहा कि संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए क्लस्टर स्कूल प्रणाली लागू की गई है, जिसके तहत 300 से 500 मीटर की परिधि में स्थित विद्यालयों को एक क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है। इस मॉडल ने पुस्तकालय, प्रयोगशालाओं, खेल सामग्री और शिक्षकों की विशेषज्ञता का साझा उपयोग संभव बनाया है। इससे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच और सीखने के अनुभव दोनों में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा की परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स में भी हिमाचल का प्रदर्शन उल्लेखनीय रूप से उभरा है। मेधावी छात्रों के लिए जेईई और एनईईटी कोचिंग की मुफ्त सुविधा प्रदेश सरकार का अत्यंत महत्त्वपूर्ण कदम है। यह पहल सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक स्थिति किसी भी बच्चों के भविष्य के रास्ते में बाधा ना बने। उन्होंने शिक्षा विभाग की विभिन्न पहलों का विस्तार से वर्णन किया।

    परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा राजेश शर्मा ने समग्र शिक्षा की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश ने विभिन्न सर्वेक्षणों में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। शिक्षकों को आईआईटी और आईआईएम में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। शिक्षण कौशल को और निखारने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकी का उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है।

    भविष्य उन्मुख शिक्षा प्रणाली के निर्माण के लिए यूनेस्को के साथ हिमाचल प्रदेश फ्यूचर्स प्रोग्राम के अंतर्गत एक महत्त्वपूर्ण समेझौता किया है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा तंत्र में नवाचार, सतत विकास लक्ष्य और वैश्विक सहभागिता को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर विधायक सुरेश कुमार, सुदर्शन बबलू, निदेशक शिक्षा आशीष कोहली, निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. अमरजीत सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • विशेष अभियान से मजबूत हुआ चिट्टा मुक्त हिमाचल मिशन

    विशेष अभियान से मजबूत हुआ चिट्टा मुक्त हिमाचल मिशन

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा शुक्रवार को राज्य-स्तर पर एक विशेष, सुनियोजित एवं सघन अभियान संचालित किया गया। यह अभियान प्रदेश सरकार द्वारा 15 नवंबर से शुरू किए गए राज्यव्यापी एंटी-चिट्टा जन-आंदोलन के अंतर्गत ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल’ के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने के दृष्टिगत चलाया गया है। इस अभियान के अंतर्गत पूरे प्रदेश में चिन्हित एकांत एवं अर्ध-सार्वजनिक स्थलों जैसे सुनसान पहाड़ी ढलानें, जंगलों के हिस्से, खाली भवन, कमरे, पार्किंग स्थल, नदी-नाले के किनारे, पुराने बस-स्टैंड, गैराज शेड आदि का व्यापक निरीक्षण एवं गहन तलाशी की गई।

    इस राज्य-स्तरीय अभियान के दौरान प्रदेश भर में कुल 254 निर्जन एवं अर्ध-सार्वजनिक स्थलों का पुलिस द्वारा आकस्मिक एवं सघन निरीक्षण किया गया तथा 596 वाहनों की तलाशी ली गई। यह अभियान सभी पुलिस रेंजों में समान रूप से प्रभावी ढंग से संचालित किया गया, जिससे इस अभियान का महत्त्व स्पष्ट होता है। इसके तहत दक्षिणी रेंज में सोलन, किन्नौर, सिरमौर एवं बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में व्यापक तलाशी ली गई। केंद्रीय रेंज में मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, हमीरपुर एवं बिलासपुर जिलों में सघन निरीक्षण किया गया, जबकि उत्तरी रेंज में कांगड़ा, नूरपुर, देहरा, चंबा एवं ऊना जिलों में चिन्हित स्थलों पर विशेष कार्रवाई की गई।

    अभियान के दौरान 301 व्यक्तियों की जांच/काउंसलिंग की गई, जिनमें से नौ व्यक्तियों के रक्त/मूत्र के नमूने सुरक्षित किए गए। एनडीपीएस अधिनियम एवं अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत नौ आपराधिक मामले दर्ज किए गए। साथ ही अभियान के दौरान एकांत अथवा सुनसान स्थलों पर पाए गए अन्य व्यक्तियों को समुचित परामर्श, आवश्यक दस्तावेजीकरण एवं काउंसलिंग के उपरांत उनके परिजनों को सौंपा गया।

    यह राज्य-स्तरीय एंटी-चिट्टा अभियान पूर्णत व्यवस्थित, खुफिया-आधारित एवं अंतर-जिला समन्वय के साथ संचालित किया गया, ताकि विधि-सम्मत, सुरक्षित एवं प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सके।
    अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं को चिट्टे तथा किसी भी प्रकार के नशे की लत की ओर बढ़ने से रोकना और ऐसे एकांत स्थलों पर विकसित हो रही समूह-आधारित नशा प्रवृत्तियों को समाप्त करना है, जो नए युवाओं को चिट्टे एवं नशे की ओर आकर्षित करती हैं।

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से चिट्टा एवं नशे से संबंधित सूचना को टॉल फ्री नंबर 112 या नजदीकी पुलिस थाना में देने का आग्रह किया। सूचना देने वालों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।