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  • सीएम सुक्खू ने रखी पालमपुर हेलीपोर्ट की आधारशिला, यात्रियों को मिलेगी ये सुविधाएं

    सीएम सुक्खू ने रखी पालमपुर हेलीपोर्ट की आधारशिला, यात्रियों को मिलेगी ये सुविधाएं

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने पालमपुर के अपने एक दिवसीय दौरे पर 19.77 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित होने वाले पालमपुर हेलीपोर्ट की आधारशिला रखी। हेलीपोर्ट में यात्री टर्मिनल भवन, फायर स्टेशन, उपयोगिता भवन और यात्रियों के लिए अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    मुख्यमंत्री ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि इस हेलीपोर्ट को अगले वर्ष अप्रैल तक पूरा कर दिया जाएगा, जिसके पश्चात चंडीगढ़ और शिमला के लिए किफायती किराए पर हेलीकॉप्टर सेवाएं शुरू हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कांगड़ा जिले के लिए कई विकासात्मक योजनाएं तैयार कर रही हैं। पालमपुर में एक पर्यटन गांव विकसित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था, लेकिन भाजपा के कुछ लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया और इस पर रोक लगवा दी। उन्होंने कहा कि इन बाधाओं को दूर करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कांगड़ा जिले को राज्य की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि जिले के लोगों के लिए आय के नए अवसर सृजित हो सकें।

    इससे पूर्व, उन्होंने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपालपुर का भी निरीक्षण किया और मरीजों और कर्मचारियों से बातचीत की। हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों से लेकर अन्य अस्पतालों में मरीजों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लोगों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हों, यह सुनिश्चित करने के लिए अस्पतालों में आधुनिक चिकित्सा उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं।

    विधायक आशीष बुटेल ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया और कहा कि मुख्यमंत्री शीघ्र ही क्षेत्र का दौरा कर लगभग 300 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को जनता को समर्पित करेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नए भवन के निर्माण के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने तथा साथ ही डिजिटल एक्स-रे और एम्बुलेंस सुविधा का भी आश्वासन दिया।

    इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष रघुबीर सिंह बाली, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, प्रधान सलाहकार आईटी एवं नवाचार गोकुल बुटेल, एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, हिमाचल प्रदेश कृषि विकास बैंक के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान, हिमाचल प्रदेश ऊन महासंघ के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, एपीएमसी कांगड़ा की अध्यक्ष निशु मोंगरा, कांग्रेस नेता देवेंद्र जग्गी और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

  • सीएम सुक्खू और श्री श्री रविशंकर ने की मुलाकात, राज्य में नए कॉलेज पर हुई चर्चा

    सीएम सुक्खू और श्री श्री रविशंकर ने की मुलाकात, राज्य में नए कॉलेज पर हुई चर्चा

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज कांगड़ा जिले के पालमपुर के निकट गुजरेहड़ा स्थित पंजपीरी शीतला माता मंदिर में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर के साथ पूजा-अर्चना की। उन्होंने नव-निर्मित मंदिर में दीप प्रज्वलित किया और श्री श्री रविशंकर से आशीर्वाद प्राप्त किया।

    मुख्यमंत्री ने श्री श्री रविशंकर की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह समाज में शांति, सहिष्णुता और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए दुनिया भर में अथक प्रयास कर रहे हैं। उनके विचारों और शिक्षाओं ने युवा पीढ़ी को नई प्रेरणा और एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया है। उन्होंने कहा यह हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है कि उन्होंने धौलाधार की गोद में ‘कैलाश आश्रम’ की स्थापना की है जहां दुनिया भर से अनुयायी नई ऊर्जा प्राप्त करने आएंगे।

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह अनगिनत देवी-देवताओं का निवास स्थान है। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के दृष्टिगत सरकार लोगों की सुविधा के लिए कांगड़ा हवाई अड्डे का विस्तार कर रही है। उन्होंने घोषणा कि की आर्ट ऑफ लिविंग के अनुयायियों को इस क्षेत्र में आने-जाने में किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए गुजरेहरा संपर्क मार्ग को पक्का किया जाएगा।

    श्री श्री रविशंकर ने मुख्यमंत्री की सराहना करते हुए कहा कि उनकी देवी-देवताओं में गहरी आस्था है, इसीलिए उन्हें ‘देवभूमि’ के लोगों की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि आदि हिमानी चामुंडा मंदिर के ठीक सामने भव्य पंजपीरी शीतला माता मंदिर का निर्माण किया गया है। उन्होंने जीवन में साधना के महत्व पर बल देते हुए कहा कि ईश्वर हमसे दूर नहीं हैं, बल्कि वे हमारे भीतर ही निवास करते हैं।

    श्री श्री रविशंकर ने यह भी बताया कि उनका संगठन हिमाचल प्रदेश में एक ऑस्टियोपैथी कॉेलेज स्थापित करने का इच्छुक है, ताकि स्थानीय युवा इस आधुनिक उपचार पद्धति को सीख कर स्थायी आजीविका अर्जित कर सकें। उन्होंने कहा कि समाज को नवीन और पारंपरिक, दोनों पद्धतियों को अपनाकर आगे बढ़ना चाहिए।

    इस अवसर पर एचपीटीडीसी के अध्यक्ष रघुबीर सिंह बाली, विधायक आशीष बुटेल, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा, प्रधान सलाहकार (आईटी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, एचआरटीसी के उपाध्यक्ष अजय वर्मा, हिमाचल प्रदेश कृषि विकास बैंक के अध्यक्ष संजय सिंह चौहान, हिमाचल प्रदेश ऊन महासंघ के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, ए.पी.एम.सी. कांगड़ा के अध्यक्ष निशु मोंगरा, कांग्रेस नेता देवेंद्र जग्गी, उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक अशोक रत्न और अन्य गणमान्य भी उपस्थित थे।

  • नशामुक्ति अभियान में युवा-महिला-वृद्ध एकजुट: डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में दिलाई शपथ

    नशामुक्ति अभियान में युवा-महिला-वृद्ध एकजुट: डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने राज्य स्तरीय कार्यक्रम में दिलाई शपथ

    शिमला: नशा मुक्त भारत अभियान के पांच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज यहां सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया।

    नशा मुक्त भारत अभियान गत पांच वर्षों से देश के सभी राज्यों में सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य युवाओं में मादक द्रव्यों के सेवन के दुष्प्रभाव के बारे में जारूकता पैदा करना है। इस अवसर पर डॉ. शांडिल ने प्रदेशवासियों से मादक द्रव्यों के सेवन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक रहने, इसके विरुद्ध सामूहिक सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और नशे के समूल नाश के लिए एकजुटता का आह्वान किया। उन्होंने नशे के विरुद्ध राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर किए जा रहे विभिन्न प्रयासों को नशा मुक्त समाज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने हिमाचल को नशा मुक्त बनाने के उद्देश्य से कार्यक्रम में उपस्थित युवाओं सहित सभी लोगों को नशा निवारण शपथ दिलवाई।

    नशे के खिलाफ प्रदेश सरकार की पहलों, प्रयासों, नवीन योजनाओं और कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश संगठित अपराध (निवारण एवं नियंत्रण) विधेयक-2025 पारित कर नशा तस्करों को मुत्यु दंड, आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये जुर्माने के अतिरिक्त अवैध तरीके से अर्जित सम्पत्ति की कुर्की किए जाने का प्रावधान किया है। हिमाचल प्रदेश ड्रग्स एवं नियंत्रण पदार्थ (रोकथाम, नशामुक्ति और पुनर्वास) विधेयक-2025 पारित कर अवैध व्यापार में शामिल तस्करों को कड़ी सजा व जुर्माने के प्रावधान सहित नशा मुक्ति, पुनर्वास, निवारक शिक्षा एवं आजीविका सहायता के वित्तपोषण के लिए एक राज्य कोष की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है।

    सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री ने कहा कि हाल ही में चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान का शुभारम्भ मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा शिमला से किया गया, जिसमें प्रदेशवासियों ने नशे को जड़ से उखाड़ फैंकने की शपथ ली। उन्होंने कहा कि यदि हम मिलकर संकल्प लें कि अपने घर-परिवार, समाज, प्रदेश और देश को खुशहाल बनाने के उद्देश्य से नशामुक्त वातावरण तैयार करने के लिए एकजुट होकर नशामुक्त हिमाचल बनाने में अपना योगदान देंगे और इस बुराई से हमेशा दूर रहेंगे तो हम निश्चित ही नशामुक्त हिमाचल और नशा मुक्त भारत के निर्माण में सफल होंगे।

    इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री पंजाब के अमृतसर स्थित गुरू नानक देव विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्र स्तरीय नशा मुक्त भारत अभियान कार्यक्रम से भी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। नशा मुक्त भारत अभियान के तहत गत पांच वर्षों में लगभग 23 करोड़ लोगों को मादक द्रवों के सेवन के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया गया है तथा 20 हजार से अधिक मास्टर स्वयं सेवियों के माध्यम से देश में सात लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसके तहत राष्ट्रीय ऑनलाइन शपथ में 16.72 लाख शैक्षणिक संस्थानों ने भाग लिया है।

    इस अवसर पर वृद्ध एवं स्कूली छात्रों के मध्य संवाद तथा विचार-विमर्श सत्र का आयोजन भी किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित वृद्धजनों ने छात्रों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया और अपने अनुभवों को साझा कर उन्हें नशे की लत, बुराइयों और उनके जीवन पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभाव के बारे में सचेत किया। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वह अपने-अपने घरों, आसपास की जगहों और अपने दोस्तों के बीच नशे से दूर रहने का संदेश फैलाएं और अपने आचरण से दूसरों के लिए प्रेेरणा बने।

    राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला संजौली की दसवीं कक्षा की छात्रा आईशा ने एक कविता के माध्यम से नशे से दूर रहने तथा बड़े बुजुर्गों के साथ समय बिताकर उनके अनुभवों से अनमोल सीख लेने का संदेश दिया। कोटशेरा कॉलेज के छात्रों द्वारा समाज के समक्ष गंभीर संकट बनकर खड़े नशे की समस्या पर लघु नाटिका प्रस्तुत की।

    निदेशक ईसोमसा सुमित खिमटा, निदेशक महिला एवं बाल विकास, डॉ. पंकज ललित, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स रमेश शर्मा, वरिष्ठ अधिकारी, वृद्धजन, महिलाएं, स्वयं सहायता समूह और पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधि, विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों से आए अध्यापकों एवं छात्रों और अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

     

  • मुख्यमंत्री सुक्खू ने चंडीगढ़ में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत 7.19% हिस्सा जारी करने की मांग की

    मुख्यमंत्री सुक्खू ने चंडीगढ़ में पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत 7.19% हिस्सा जारी करने की मांग की

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चंडीगढ़ की भूमि और परिसंपत्तियों में हिमाचल प्रदेश के 7.19 प्रतिशत हिस्से के वैध अधिकार की पुरज़ोर वकालत की है। यह पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत अनिवार्य है। उन्होंने सर्वाेच्च न्यायालय के 2011 के उस निर्णय का भी हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के तहत जनसंख्या अनुपात हस्तांतरण के आधार पर हिमाचल प्रदेश संयुक्त पंजाब में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का हकदार है और यही बीबीएमबी द्वारा उत्पादित विद्युत में वैध हिस्सेदारी का आधार भी है।

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू आज हरियाणा के फरीदाबाद में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की 32वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सर्वाेच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से लंबित बकाया राशि जारी करने और बीबीएमबी में हिमाचल से एक स्थायी सदस्य की नियुक्ति की भी मांग की। उन्होंने केंद्र द्वारा संचालित जल विद्युत परियोजनाओं में राज्य को 12 प्रतिशत मुफ्त बिजली रॉयल्टी देने की नीति को लागू करने और उन परियोजनाओं में हिमाचल की मुफ्त रॉयल्टी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का भी आग्रह किया, जिनकी लागत पहले ही वसूल हो चुकी है।

    उन्होंने आग्रह किया कि हिमाचल प्रदेश को उसका वैध हक मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए इस मुद्दे को उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की अगली बैठक के एजेंडा में रखा जाए। उन्होंने अनुरोध किया कि हिमाचल प्रदेश में 40 वर्ष पूरे कर चुकी जल विद्युत परियोजनाओं को राज्य को सौंप दिया जाए।

    मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन किशाऊ और रेणुका बांध जलविद्युत परियोजनाओं के विद्युत घटकों के लिए पूर्ण केंद्रीय वित्त पोषण की मांग की और आग्रह किया कि इनका कार्य पूर्ण होने के बाद हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को 50-50 प्रतिशत विद्युत प्रदान की जाए। सुक्खू ने केंद्र से पहाड़ी राज्यों की बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए आपदा राहत नियमों की समीक्षा करने और आपदा पूर्व एवं आपदा पश्चात प्रबंधन मानदंडों में उचित संशोधन करने का आग्रह किया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती आवृत्ति और हर वर्ष होने वाले व्यापक नुकसान को देखते हुए पूरे उत्तरी क्षेत्र के लिए एक एकीकृत, परस्पर निर्भर और सतत् विकास ढांचे का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों की अर्थव्यवस्था के संरक्षण और सामूहिक एवं केंद्रित प्रयासों के माध्यम से मूल्यवान मानवीय क्षति को कम करने के लिए ऐसी समन्वित योजना आवश्यक है।

    राज्य की रणनीतिक स्थिति और पर्यटन क्षमता पर बल देतु हुए ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में हवाई नेटवर्क के विस्तार की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाले कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार पर काम कर रही है। उन्होंने केंद्र से भूमि अधिग्रहण लागत वहन करने, परियोजना के लिए पूर्ण वित्त पोषण प्रदान करने और राज्य में छोटे हवाई अड्डों और हेलीपोर्ट के विकास के लिए एक अलग मास्टर प्लान तैयार करने का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने स्थानीय बस्तियों को सहायता प्रदान करने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सीमावर्ती और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में एक उच्च ऊंचाई अनुसंधान केंद्र, आइस हॉकी स्टेडियम, एक साहसिक खेल केंद्र और अन्य प्रशिक्षण सुविधाओं की स्थापना का प्रस्ताव रखा। उन्होंने स्पीति के जनजातीय क्षेत्र में राष्ट्रीय बौद्ध संस्थान परियोजना शुरू करने का भी अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने भारत-तिब्बत सीमा के साथ-साथ शिपकी-ला से सीमावर्ती पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने शिपकी-ला से पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू करने की राज्य की मांग भी दोहराई।

    नशीले पदार्थों के खिलाफ राज्य की लड़ाई का उल्लेख करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बहुआयामी कार्रवाई कर रहा है। कानून-व्यवस्था के सख्त पालन के साथ-साथ, नशे की लत से प्रभावित व्यक्तियों के उपचार और पुनर्वास के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि चिट्टा जैसे खतरनाक पदार्थों के उन्मूलन के लिए तीन महीने का व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया गया है।

    उन्होंने इस अवसर पर प्रदेश में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम 2012 के कड़ाई से पालन और ऐसे अपराधों के प्रति राज्य की जीरो टॉलरेंस नीति पर भी महत्त्वपूर्ण जानकारी साझा की। मुख्यमंत्री ने बैठक में हिमाचल प्रदेश तथा केंद्र शासित लद्दाख के मध्य सरचू और शिंकुला क्षेत्रों में अंतरराज्यीय सीमा विवाद को सुलझाने, शिमला में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उप कार्यालय को एकीकृत क्षेत्रीय कार्यालय के रूप में स्तरोन्नत करने और प्रदेश के वन संरक्षण अधिनियम से सम्बद्ध मामलों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया।

    उन्होंने हिमाचल के आपदा प्रभावित परिवारों को पुनर्वास के लिए वन भूमि पर आवास निर्माण के लिए एक बीघा तक भूमि देने की अनुमति वन संरक्षण अधिनियम के तहत प्रदान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि हिमाचल में निजी भूमि के अतिरिक्त सारी भूमि तकनीकी रूप से वन भूमि की परिभाषा में आती है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल ने कठिन वित्तीय स्थिति के साथ भी अपने स्तर पर आपदा पीड़ितों को विशेष राहत पैकेज देकर उनके ज़ख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास किया है किंतु प्रदेश आपदा पश्चात आवश्यकता आकलन के तहत लगभग 10 हजार करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री द्वारा घोषित 1500 करोड़ रुपये के पैकेज का इंतजार कर रहा है। उन्होंने समूची धनराशि शीघ्र प्रदान करने का अनुरोध किया।

    मुख्यमंत्री ने राजस्व घाटा अनुदान में हो रही कमी, जी.एस.टी. मुआवजे के उपरांत भी वर्ष 2023-24 तक राज्य को 9478 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे की भरपाई के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि समूचे उत्तर भारत में पर्यावरण संरक्षण तथा स्वच्छ जल उपलब्धता के लिए हिमाचल और हिमालय विशिष्ट हैं। हिमाचल को हरित राज्य बनाने के लिए प्रदेश सरकार विभिन्न स्तरों पर कार्य कर रही है। बैठक में राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल और केंद्र एवं प्रदेश सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • स्पोर्ट्स और कल्चरल मीट-2025 बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव बनकर संपन्न

    स्पोर्ट्स और कल्चरल मीट-2025 बच्चों के लिए एक यादगार अनुभव बनकर संपन्न

    शिमला: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने गत सायं तीन दिवसीय चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट स्पोटर्स एंड कल्चरल मीट-2025 के समापन समारोह की अध्यक्षता की।

    इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री ने बच्चों के जोश, प्रतिभा, आत्मविश्वास और विभिन्न प्रतियोगिताओं में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि यह आयोजन बच्चों के सपनों, साहस और सकारात्मक सोच का उत्सव रहा।

    उन्होंने कहा कि हर बच्चा, चाहे उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि कुछ भी हो समान अवसर और सम्मान का अधिकारी है। प्रदेश सरकार बच्चों के संरक्षण, शिक्षा, प्रशिक्षण एवं सर्वांगीण विकास को विशेष प्राथमिकता प्रदान कर रही है। राज्य के सभी चाइल्ड केयर संस्थानों में सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास तथा खेल व सांस्कृतिक गतिविधियों के व्यापक अवसर उपलब्ध करवाए जा रहे हैं ताकि बच्चे आत्मनिर्भर व सक्षम बने और अपने सपनों को पूरा करने में सक्षम हो सके।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार की सोच स्पष्ट है कि हर बच्चा आत्मनिर्भर बने और अपने सपनों को साकार करने का साहस रखे। बच्चों के लिए नए अवसर, नई दिशाएं और नई संभावनाओं के द्वार खोलने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा निरंतर ऐसे प्रयास किए जा रहे हैं जिनसे बच्चों को सुरक्षित वातावरण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं, स्वास्थ्य देखभाल, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों।

    इस अवसर पर नगर निगम शिमला की उप-महापौर उमा कौशल, निदेशक महिला एवं बाल विकास डॉ पंकज ललित, बाल कल्याण समिति के सदस्य तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारी, कर्मचारी तथा अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

  • बाल दिवस पर CM सुक्खू ने शुरू की ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट स्पोर्ट्स एंड कल्चरल मीट–2025’

    बाल दिवस पर CM सुक्खू ने शुरू की ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट स्पोर्ट्स एंड कल्चरल मीट–2025’

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज बाल दिवस के अवसर पर रिज शिमला में ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट स्पोर्टस एंड कल्चरल मीट-2025’ का शुभारम्भ किया। इसका आयोजन पुलिस एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा किया गया। 16 नवम्बर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रदेश के 29 बाल-बालिका सुखाश्रय आश्रम के लगभग 600 विद्यार्थी हिस्सा ले रहे हैं। इस अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल दिवस देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की पावन स्मृति को समर्पित है। यह खेल एवं सांस्कृतिक महोत्सव नेहरू जी की उसी भावना, समान अवसर और उज्ज्वल भविष्य को आगे बढ़ाने के प्रदेश सरकार के संकल्प को प्रतिबिंबित करता है।

    ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि अनाथ और बेसहारा बच्चों तथा महिलाओं के लिए कानून के तहत योजना बनाने वाला हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य है। प्रदेश सरकार ने एक अभिभावक के रूप में 6000 अनाथ और बेसहारा बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में अपनाया है। योजना के तहत बच्चों के सर्वांगीण विकास व स्वावलंबन के लिए हर स्तर पर सहायता प्रदान कर 27 वर्ष तक इन बच्चों के माता-पिता का दायित्व निभाएगी। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को आगे बढ़ने का मौका प्रदान करने के लिए जिलों के प्रमुख स्कूलों में इनका दाखिला करवाएगी और दाखिले का खर्चा भी प्रदेश सरकार वहन करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने संकल्प लिया है कि हर बेटी को पूर्ण सुरक्षा, उत्तम शिक्षा और आसमान छूने का अवसर प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ‘बेटी पढ़ाओ’ सिर्फ एक नारा नहीं है, यह मेरा व्यक्तिगत मिशन है। उन्होंने कहा कि खेल केवल मनोरंजन नहीं हैं बल्कि ये जीवन की सच्ची पाठशाला है। यहां जीतते हैं तो विनम्रता सीखते हैं और जब हारते हैं तो दोबारा उठने का साहस। उन्होंने कहा कि चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट किसी प्रमाण-पत्र के मोहताज नहीं है। उन्होंने अपनी चुनौतियों को दृढ़ता से स्वीकार किया है। प्रदेश सरकार उन्हें वो हर संसाधन और सुविधा प्रदान करेगी जिससे वे दुनिया को बता सके कि वे क्या कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इस खेल एवं सांस्कृतिक महोत्सव के लिए पुलिस एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायक बताया।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बच्चों को ‘लैपटॅाप स्कूल बैग’ भी भेंट किए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने प्रदेश सरकार संस्थागत देखभाल में रहने वाले बच्चों में भी खेल, कला और संस्कृति के माध्यम से आत्मविश्वास और नेतृत्व की भावना विकसित करने के लिए बहुआयामी प्रयास कर रही है। उन्होंने विभाग द्वारा कार्यान्वित की जा रही ‘बेटी है अनमोल योजना’, इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना, सखी निवास योजना सहित विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तृत जानकारी दी। पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि यह आयोजन मुख्यमंत्री की दूरदर्शी प्रेरणा से ही संभव हो पाया है। उन्होंने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी प्रदान की और कहा कि पुलिस विभाग बच्चों के बहुआयामी विकास के लिए निरंतर अनेक पहल कर रहा है। आईजी पुलिस विमल गुप्ता ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

    इस अवसर पर पुलिस विभाग द्वारा डॉग शो, सांस्कृतिक कार्यक्रम, नुक्कड़-नाटक, रस्साकस्सी प्रतियोगिता आकर्षण का केन्द्र रहे। इस अवसर पर विधायक हरीश जनारथा, महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी, वरिष्ठ अधिकारी, पार्षद और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

  • ग्रामीण विकास विभाग ने जल संरक्षण की दिशा में बढ़ाया कदम, हुआ वाटरशेड महोत्सव का आयोजन

    ग्रामीण विकास विभाग ने जल संरक्षण की दिशा में बढ़ाया कदम, हुआ वाटरशेड महोत्सव का आयोजन

    शिमला: ग्रामीण विकास के प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा देश में 11 नवंबर से 16 दिसंबर तक वाटरशेड महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हिमाचल प्रदेश में राज्य स्तरीय कार्यक्रम 12 नवंबर को पट्टा ब्लॉक में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान भूमि पूजन, लोकार्पण और वाटरशेड पुनरुत्थान मिशन का शुभारंभ इत्यादि गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा।

    प्रदेश के सभी ब्लॉकों में जहां प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत वाटरशेड विकास घटक 2.0 लागू है, वहां विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। महोत्सव के दौरान एक ऑनलाइन प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा, जिसमें लोगों से रील्स और फोटोग्राफ्स आमंत्रित किए जाएंगे। इस प्रतियोगिता में तीन पुरस्कार 50,000 रुपये के होंगे और 50 फोटोग्राफ्स के लिए 1,000 रुपये प्रति फोटोग्राफ का पुरस्कार दिया जाएगा। महोत्सव के दौरान प्रभात फेरी, नारा लेखन प्रतियोगिता, रंगोली प्रतियोगिता जैसी गतिविधियों का आयोजन भी किया जाएगा। इन गतिविधियों का उद्देश्य लोगों को योजना के बारे में जागरूक करना और उनकी भागीदारी बढ़ाना है।

    वाटरशेड पुनरुत्थान मिशन इस महोत्सव का एक महत्वपूर्ण भाग होगा। इसके तहत, वाटरशेड विकास घटक 1.0 के तहत किए गए कार्यों का जीर्णोद्धार और मरम्मत की जाएगी। साथ ही, लोगों द्वारा विकसित की गई वाटरशेड संरचनाओं का जीर्णोद्धार भी किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग लाभान्वित हो सकें। उन्होंने लोगों से इस महोत्सव में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया।

  • केलांग में अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की कार्यशाला आयोजित, विशेषज्ञों ने दी डेटा आधारित नीति की वकालत

    केलांग में अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की कार्यशाला आयोजित, विशेषज्ञों ने दी डेटा आधारित नीति की वकालत

    शिमला: राज्य की सांख्यिकीय गतिविधियों में समन्वय, पारदर्शिता एवं दक्षता को सुदृढ़ बनाने के दृष्टिगत आज लाहौल-स्पीति जिले के केलांग में सचिव वित्त, अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी तथा योजना डॉ. अभिषेक जैन की अध्यक्षता में एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

    इस अवसर पर डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि सटीक एवं समेकित डेटा नीति निर्माण की रीढ़ है और सरकार की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की सफलता डेटा की विश्वसनीयता, समयबद्धता तथा पारदर्शिता पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि सांख्यिकीय आंकड़े और डेटा यह दर्शाते हैं कि लाहौल-स्पीति जिला विकास के विभिन्न संकेतकों में कहां स्थित है और ये जिले की सामाजिक-आर्थिक स्थिति तथा सकल घरेलू उत्पाद की स्थिति को भी प्रतिबिंबित करते हैं।

    उन्होंने सभी विभागों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन करें ताकि विकास के रुझानों को समझकर योजनाओं और क्रियान्वयन के स्तर पर सुधार किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सुधारों और नीति निर्धारण में डेटा का वैज्ञानिक उपयोग किया जाना चाहिए ताकि विकास के लक्ष्यों को प्रभावी तरीके से पूरा किया जा सके।

    उन्होंने जिला लाहौल-स्पीति को पारदर्शिता एवं उत्तरदायित्व व पर्यावरण संरक्षण में श्रेष्ठ प्रदर्शन तथा अपराध मुक्त होने पर बधाई दी तथा इसमें निरंतर प्रयास करते रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ई-ऑफिस तथा आधार नवीनीकरण में सुधार करने के निर्देश भी दिए।

    डॉ. जैन ने कहा कि प्रत्येक विभाग प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दे और इसके लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन सुनिश्चित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि विकास के प्रमुख आंकड़े संतोषजनक बने रहें, इसके लिए प्रत्येक विभाग को ठोस कदम उठाने चाहिए और जहां कमी हो, वहां सुधार किया जाना अनिवार्य है। उन्होंने स्थानीय उत्पादों, कृषि, बागवानी और हस्तशिल्प क्षेत्रों के रुझानों को बेहतर समझने तथा सुधारने पर भी बल दिया।

    उन्होंने कहा कि प्रवासन, बागवानी, कृषि उत्पादन और हस्तशिल्प जैसे विषयों पर अनुसंधान के लिए छोटे शोध समूह बनाए जाएं और स्थानीय उत्पादों के विपणन एवं ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया जाए। डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि कार्यशालाएं केवल सैद्धांतिक ज्ञान का मंच नहीं होतीं बल्कि सीखने, विचार-विनिमय और नीतिगत दिशा तय करने का प्रभावी माध्यम भी होती हैं।

    उपायुक्त लाहौल-स्पीति किरण भड़ाना ने कहा कि डेटा आधारित निर्णय प्रणाली प्रशासनिक उत्तरदायित्व को बढ़ाकर बेहतर परिणाम सुनिश्चित करती है और इस प्रकार की कार्यशालाएं स्थानीय स्तर पर डेटा को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होती हैं। आर्थिक सलाहकार डॉ. विनोद राणा ने कहा कि डेटा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुशासन का मूल आधार है।

    कार्यशाला के तकनीकी सत्र में आवश्यक डेटा आवश्यकताओं पर प्रस्तुतियां दी गई। सत्र के उपरांत प्रतिभागियों के लिए एक रोचक क्विज भी आयोजित की गई जिसने ज्ञान वृद्धि के साथ प्रतिस्पर्धात्मक उत्साह को भी प्रोत्साहित किया। कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों, सांख्यिकी विशेषज्ञों एवं प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।

  • आपदा प्रभावितों की मदद के लिए आगे आया एक्सिस बैंक, मंडी में बनाएगा 57 मौसम-रोधी आश्रय स्थल

    आपदा प्रभावितों की मदद के लिए आगे आया एक्सिस बैंक, मंडी में बनाएगा 57 मौसम-रोधी आश्रय स्थल

    शिमला: एक्सिस बैंक के उत्तरी क्षेत्र प्रमुख अभिषेक पाराशर और राज्य प्रमुख वरुण शर्मा ने आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू से ओक ओवर में भेंट की। उन्होंने आपदा प्रभावित मंडी जिले, विशेषकर सिराज विधानसभा क्षेत्र को निगमित सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत 57 मौसम-रोधी आश्रय स्थलों के निर्माण के लिए सहयोग प्रदान किया। इन आश्रय स्थलों में तापरोधी इन्सुलेशन, पीसीसी फर्श, रसोई स्लैब और बुनियादी विद्युत फिटिंग की व्यवस्था होगी, जिससे विस्थापित परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास की सुविधा उपलब्ध होगी।

    इसके अतिरिक्त, बैंक 15 सामुदायिक शौचालय इकाइयां भी स्थापित करेगा। प्रत्येक इकाई में तीन से छह परिवारों के लिए सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें पानी की टंकियां, स्टेनलेस स्टील के सिंक और सीपीवीसी पाइप की फिटिंग होंगी ताकि समुचित स्वच्छता सुनिश्चित हो सके। एक्सिस बैंक प्रभावी कार्यान्वयन के लिए लॉजिस्टिक्स और प्रशासनिक सहयोग भी प्रदान करेगा, जिसमें लाभार्थियों की पहचान, पर्यवेक्षण और प्रभावी मूल्यांकन शामिल है।

    बैंक द्वारा वृद्धजनों, बच्चों और दिव्यांगजनों और कमजोर समूहों पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। ये आश्रय स्थल टिकाऊ और भविष्य की आपात स्थितियों में पुनः उपयोग के साथ-साथ आपदा तैयारी के लिए डिजाइन किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने इस नेक पहल के लिए एक्सिस बैंक का आभार व्यक्त किया और कहा कि इस तरह के प्रयास विपरीत परिस्थितियों में प्रभावित परिवारों की सहायता करने में सहायक सिद्ध होंगे।

  • मुख्यमंत्री सुक्खू ने मंडी में आपदा प्रभावितों को वितरित की 81 करोड़ रुपये की राहत

    मुख्यमंत्री सुक्खू ने मंडी में आपदा प्रभावितों को वितरित की 81 करोड़ रुपये की राहत

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज मंडी के पड्डल मैदान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आपदा प्रभावित परिवारों को राहत राशि प्रदान की। उन्होंने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के माध्यम से 4,914 लाभार्थियों को 81.28 करोड़ रुपये की राहत राशि वितरित की।

    इस अवसर पर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 1,513 लाभार्थियों को 7 लाख रुपये में से 4-4 लाख रुपये की पहली किस्त प्रदान की गई। इनमें से 781 लाभार्थी मंडी, 631 लाभार्थी कुल्लू तथा 101 लाभार्थी बिलासपुर जिले से संबंधित हैं। इसके अतिरिक्त, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 3,401 लाभार्थियों को एक-एक लाख रुपये प्रदान किए गए। राहत राशि प्राप्त करने वाले 1,547 लाभार्थी मंडी, 1,541 लाभार्थी कुल्लू और 313 लाभार्थी बिलासपुर जिले से संबंधित हैं।

    अब तक, मंडी जिले के 4,375 प्रभावित परिवारों को 14.46 करोड़ रुपये की राहत सहायता वितरित की जा चुकी है। वर्तमान में राज्य सरकार द्वारा मंडी में 72 करोड़ रुपये की लागत से 27 आपदा न्यूनीकरण परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, राज्य कार्यकारी समिति ने 18.84 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत की पांच और परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जबकि सात अतिरिक्त न्यूनीकरण परियोजनाओं के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘मधु मांडव’ पहल का शुभारंभ भी किया। इस पहल को मुख्य रूप से जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में शुरू किया जाएगा। इसके तहत प्रभावित परिवारों को मधुमक्खी पालन को आजीविका के साधन के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। लाभार्थियों को वित्तीय सहायता के साथ-साथ मधुमक्खी पालन इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत उत्पादित शहद का विपणन ‘हिम-ईरा मांडव’ ब्रांड नाम से किया जाएगा।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सराज विधानसभा क्षेत्र के पंगलूर में बाढ़ में अपने माता-पिता को खोने वाली एक बच्ची निकिता को 7.95 लाख रुपये का चेक प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने निकिता के लिए 21 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय सहायता की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि निकिता जैसी बेटियां अकेली नहीं हैं और प्रदेश सरकार इन बच्चियों के साथ खड़ी है।

    राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, विधायक चंद्र शेखर और अनिल शर्मा, पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, रंगीला राम राव और प्रकाश चौधरी, पूर्व सीपीएस सोहन लाल ठाकुर, एपीएमसी मंडी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, हिमाचल प्रदेश नागरिक आपूर्ति निगम के उपाध्यक्ष विशाल चंबियाल, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जीवन ठाकुर, पवन ठाकुर, विजय पाल सिंह, लाल सिंह कौशल, जगदीश रेड्डी, चेत राम ठाकुर, नरेश चौहान, विवेक कुमार, महेश राज, चंपा ठाकुर और विजय कानव, उपायुक्त अपूर्व देवगन और पुलिस अधीक्षक साक्षी वर्मा तथा अन्य गणमान्य इस अवसर पर उपस्थित थे।