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  • सीएम Sukhu बोले: आत्मनिर्भर हिमाचल हमारी प्रतिबद्धता, 1,500 करोड़ सहायता अभी नहीं मिली

    सीएम Sukhu बोले: आत्मनिर्भर हिमाचल हमारी प्रतिबद्धता, 1,500 करोड़ सहायता अभी नहीं मिली

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज मंडी के पड्डल मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्राकृतिक आपदाओं में अपनी सम्पत्तियां गंवाने वाले लोगों के लिए वित्तीय सहायता राशि 70,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद, राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही है।

    उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर हिमाचल केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि प्रदेश सरकार का जुनून और लोगों के प्रति एक प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि राज्य ने 6,000 अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया है और सरकार विधवाओं के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इस वर्ष आपदा के कारण हुई व्यापक क्षति को देखते हुए सरकार अपने सीमित संसाधनों से आपदा प्रभावितों को सहायता प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एक घर बनाने में एक परिवार की पूरी जिंदगी लग जाती है, इसलिए इन स्थितियों में 1.30 लाख रुपये की मुआवज़ा राशि कैसे काफी हो सकती है। केंद्र सरकार घर के पुनर्निर्माण के लिए केवल इतनी ही सहायता राशि देती है, लेकिन एक साधारण पृष्टभूमि से संबंध रखने के कारण मैं आम लोगों के दुख-दर्द से भली-भांति परिचित हूं। इसीलिए हमने पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए मुआवज़ा राशि को 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये किया है और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जा रही है।

    भाजपा पर राहत कार्यों का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर होता अगर मण्डी जिले के सभी भाजपा विधायक इस कार्यक्रम में शामिल होते जबकि उन्हें आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता आम लोगों की पीड़ा के प्रति असंवेदनशील हैं और उनका एकमात्र उद्देश्य राजनीति करना और झूठ फैलाना है।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के दो महीने बाद भी हिमाचल प्रदेश को कोई आर्थिक मदद नहीं मिली है। वह स्वयं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में दिल्ली जाने के लिए तैयार है। मुझमें अहंकार का कोई भाव नहीं है और मेरा एकमात्र लक्ष्य आपदा पीड़ितों की मदद करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह केंद्र से बार-बार वन भूमि पर आपदा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध कर रहे हैं।

    सुक्खू ने कहा कि वर्ष 2023 में राज्य सरकार ने 28,311 आपदा प्रभावितों को सहायता प्रदान की। उस समय उन्हें मुख्यमंत्री पद पर कार्यभार ग्रहण किए हुए कम ही समय हुआ था लेकिन हमने मिलकर आपदा का डटकर सामना किया। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने स्वयं रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर चंद्रताल झील में फंसे 300 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला। यह कांग्रेस सरकार की संवेदनशीलता को प्रदर्शित करता है।


    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने की दिशा में कार्य कर रही है। गाय के दूध के खरीद मूल्य को 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के खरीद मूल्य को 61 रुपये प्रति लीटर किया गया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं, मक्का, जौ और कच्ची हल्दी की खरीद भी सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने पारदर्शी तरीके से शराब के ठेकों की नीलामी करके एक साल में 450 करोड़ रुपये कमाए, जबकि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के धन का दुरुपयोग किया। भाजपा सरकार ने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए राज्य भर में 1,000 करोड़ रुपये की इमारतें बनवाईं। पूर्व सरकार ने बद्दी-नालागढ़ में बड़े उद्योगपतियों को एक विशेष पैकेज के तहत 5,000 बीघा भूमि केवल 14 लाख रुपये में आवंटित की। इसके बावजूद वहां एक भी उद्योग स्थापित नहीं किया जा सका, जबकि उस ज़मीन का वास्तविक बाजार मूल्य 5,000 करोड़ रुपये है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल किया। राज्य सरकार के कर्मचारी हितैषी निर्णय के बावजूद केंद्र सरकार ने राज्य पर कई प्रतिबंध लगाए हैं। उन्होंने कहा, कि ‘मैं एक सरकारी कर्मचारी का बेटा हूं और मैंने यह प्रण लिया है कि जब तक मैं मुख्यमंत्री रहूंगा, हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों को ओपीएस का लाभ मिलता रहेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासनकाल में हिमाचल प्रदेश गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में 21वें स्थान पर था, लेकिन राज्य सरकार के सुधारों की बदौलत हम पांचवें स्थान पर पहुंच गए हैं। सरकारी क्षेत्र में 100 सीबीएसई आधारित स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि राज्य के लोग पड़ोसी राज्यों में इलाज के लिए सालाना 1,000 करोड़ रुपये खर्च कर रहे थे, लेकिन अब इस स्थिति में बदलाव आ रहा है। टांडा और चमियाना में रोबोटिक सर्जरी शुरू हो गई है और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की स्थापना के साथ-साथ चरणबद्ध तरीके से इस सुविधा को सभी मेडिकल कॉलेजों में शुरू किया जाएगा।

    राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने इस अवसर पर कहा कि इस वर्ष न केवल हिमाचल प्रदेश, बल्कि उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और पंजाब भी प्राकृतिक आपदाओं से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं। केंद्र सरकार ने भाजपा शासित राज्यों को अधिक सहायता प्रदान करके हिमाचल के साथ भेदभाव किया है। उन्होंने कहा कि राज्य ने केंद्र से हिमाचल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राहत मापदंडों में संशोधन करने का आग्रह किया था, लेकिन इस अनुरोध को भी केंद्र सरकार ने नज़रअंदाज़ कर दिया गया।

    बागवानी मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने लोगों के दर्द को समझा और देश के सबसे बड़े मुआवज़े के पैकेज की घोषणा की। सभी प्रभावित परिवारों को समान सहायता सुनिश्चित करने के लिए यह विशेष राहत पैकेज पूरे राज्य में लागू किया जा रहा है और इसका क्रियान्वयन शुरू हो चुका है।

    उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान सड़कें अवरुद्ध होने के बावजूद, एचपीएमसी ने बागवानों से रिकॉर्ड एक लाख टन सेब की खरीद सुनिश्चित की। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से आपदा के दौरान प्राप्त धनराशि को सार्वजनिक करने की मांग की और भाजपा नेताओं पर संकट के समय में भी जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा किए गए सुधारों के फलस्वरूप शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा में सुधार हो रहा है और उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से अधिकतम कल्याण सुनिश्चित किया जा रहा है।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि मंडी जिले के सराज और धर्मपुर विधानसभा क्षेत्रों में इस साल आपदा के कारण भारी नुकसान हुआ, जबकि बिलासपुर जिले में लगभग 500 परिवार प्रभावित हुए, जिन्हें अब वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है।

    उन्होंने केंद्र की आलोचना करते हुए कहा किप्रधानमंत्री, जो हिमाचल को अपना दूसरा घर कहते हैं उन्होंने आपदा पीड़ितों को कोई राहत नहीं दी है। उनकी घोषणा के बावजूद 1,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि महीनों बाद भी दिल्ली से शिमला नहीं पहुंची है। भाजपा हिमाचल की आपदा को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की मांग का समर्थन नहीं करती। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें बार-बार आर्थिक मदद लेने के लिए दिल्ली बुलाया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। हिमाचल प्रदेश में भाजपा के सात सांसद हैं, फिर भी उनमें से किसी ने भी आपदा पीड़ितों के लिए केंद्र से मद्द मांगने का साहस नहीं किया।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री ने मुख्यमंत्री के समर्पण भाव की प्रशंसा करते हुए कहा कि खराब स्वास्थ्य के बावजूद उन्होंने वर्ष 2023 में आई आपदा के प्रभावितों की मदद के लिए व्यक्तिगत रूप से ज़मीनी स्तर पर कार्य किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के व्यवस्था परिवर्तन की मुहिम के फलस्वरूप हिमाचल शीघ्र ही आत्मनिर्भर राज्य बनकर उभरेगा।

    विधायक चंद्रशेखर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पिछले तीन वर्षों से प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है। मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी विभागों ने त्वरित राहत और पुनर्वास कार्य सुनिश्चित कर प्रभावितों की मद्द की।

    पर्यावरण संरक्षण की तत्काल आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि अब ग्लोबल वार्मिंग के प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। प्राकृतिक आपदाओं में हो रही वृद्धि इसका प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने राहत राशि को 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये करके संवेदनशीलता का परिचय दिया है। केंद्र ने 1,500 करोड़ रुपये की सहायता राशि की घोषणा की है, लेकिन 45 दिन बीत जाने के बाद भी हिमाचल प्रदेश तक एक भी रुपये की राशि नहीं पहुंची है। इन चुनौतियों के बावजूद, राज्य सरकार आपदा प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना जारी रखे हुए है। पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर और विधायक अनिल शर्मा ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे।

  • मुख्यमंत्री सुक्खू ने किया शिक्षा के मंदिर का उद्घाटन, पनारसा कॉलेज से शुरू हुई नई राह

    मुख्यमंत्री सुक्खू ने किया शिक्षा के मंदिर का उद्घाटन, पनारसा कॉलेज से शुरू हुई नई राह

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज मंडी जिला के पनारसा में राजकीय महाविद्यालय पनारसा के 13.14 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा प्रदेश सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा में व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से गुणात्त्मक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सत्त प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि नए संस्थान खोलने का उद्देश्य केवल इमारतें खड़ी करना नहीं होना चाहिए, बल्कि उनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है। वर्तमान प्रदेश सरकार विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है ताकि उनमें आत्मविश्वास का संचार हो और वह भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें।

    उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में गुणात्त्मक शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने अनेक सुधारात्मक कदम उठाए हैं जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पहली कक्षा से लेकर जमा दो तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अलग स्कूल शिक्षा निदेशालय स्थापित किया गया है। वर्तमान राज्य सरकार द्वारा उठाए गए सुधारात्मक कदमों से शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल 21वें स्थान से 5वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि पहली कक्षा से इंग्लिश मीडियम शुरू किया गया है और 100 सीबीएसई स्कूल बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 40 स्कूलों को एफिलिएटिड किया जा चुका है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों तक गुणात्मक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉलेज स्तर पर भी सरकार ने अलग निदेशालय बनाया है और उच्च शिक्षा में संरचनात्मक बदलावों की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि कभी-कभी सुधार के लिए कड़े फैसले लेने पड़ते हैं, जो शुरुआत में कठिन लगते हैं, परंतु ये फैसले जनता की भलाई के लिए ही होते हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को भविष्य के लिए तैयार करने के उद्देश्य से उन्हें सूचना प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा प्रदान की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश की 6,297 प्राथमिक स्कूलों में प्री-प्राईमरी कक्षाएं शुरू की गई हैं। हर विद्यार्थी को आधुनिक और गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में राजीव गांधी राजकीय आदर्श डे-बोर्डिंग स्कूल स्थापित किए जा रहे हैं। यह स्कूल स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, खेल सुविधाओं और अन्य अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस हैं जिससे विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा। प्रदेश के विद्यार्थियों के लिए महत्त्वाकांक्षी डॉ. यशवंत सिंह परमार विद्यार्थी ऋण योजना शुरू की गई है जिसके तहत वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को देश और विदेश में एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक ऋण की सुविधा दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने महाविद्यालय पनारसा में अगले सत्र से सेल्फ फाइनेंसिंग आधार पर बी.वॉक और बी.सी.ए. की कक्षाएं शुरू करने की घोषण की। उन्होंने कहा कि इन पाठ्यक्रमों को शुरू करने से विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा मिलेगी।

    पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री का द्रंग विधानसभा क्षेत्र का तीव्र विकास सुनिश्चित करने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय पनारसा में विज्ञान कक्षाएं शुरू करने से विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि होगी और इससे कुल्लू महाविद्यालय का दबाव भी कम होगा।

    पनारसा पहुंचने पर स्थानीय लोगों और विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया। इस अवसर पर राजस्व एवं बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी, पूर्व विधायक जवाहर ठाकुर, एपीएमसी अध्यक्ष कुल्लू राम सिंह मियां, एचपीएमसी निदेशक जोगिंद्र गुलेरिया, जिला परिषद अध्यक्ष अनीता ठाकुर व अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

  • हिमाचल की बेटियां देश की नई पहचान, राज्यपाल ने रेणुका ठाकुर पर जताया गर्व

    हिमाचल की बेटियां देश की नई पहचान, राज्यपाल ने रेणुका ठाकुर पर जताया गर्व

    शिमला: राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने विद्यार्थियों से खुद पर विश्वास करने, असीमित सपने देखने और सामाजिक परिवर्तन का वाहक बनने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल अवसरों का लाभ उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी आंतरिक शक्ति और क्षमता को साकार करने के बारे में है। राज्यपाल आज सेंट बीड्स कॉलेज, शिमला द्वारा आयोजित दो दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव ‘सिम्फोरिया 2025’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि यह केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं है बल्कि प्रतिभा, रचनात्मकता और सशक्तिकरण का उत्सव है जो इस शैक्षणिक संस्थान की गौरवशाली विरासत को दर्शाता है। वर्ष 1904 में अपनी स्थापना के बाद महिला शिक्षा में उल्लेखनीय योगदान के लिए सेंट बीड्स कॉलेज की सराहना करते हुए राज्यपाल ने इसे उत्तर भारत में शिक्षा और प्रगतिशील विचारों का एक प्रकाश स्तंभ बताया। उन्होंने शैक्षणिक उत्कृष्टता के साथ-साथ छात्राओं में चरित्र, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता के विकास के लिए कॉलेज प्रशासन की सराहना की।

    सिम्फोरिया 2025 के प्रमुख विषयों जैसे लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण जागरूकता, भारतीय ज्ञान प्रणाली और संस्कृति एवं विविधता पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि ये वर्तमान समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के बिना कोई भी समाज प्रगति नहीं कर सकता, जबकि पर्यावरण जागरूकता और भारतीय ज्ञान प्रणाली सतत विकास और सांस्कृतिक पहचान की नींव रखते हैं।
    शुक्ल ने कहा कि युवा महिलाएं आधुनिक भारत की नई पहचान का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी ऊर्जा, रचनात्मकता और दूरदर्शिता राष्ट्र के भविष्य को आकार देगी। महिला क्रिकेट विश्व कप में भारत की जीत पर प्रसन्नता व्यक्त करते उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि हिमाचल की बेटी रेणुका ठाकुर ने इस जीत में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई और राज्य का नाम रोशन किया। उन्होंने कहा कि चाहे खेल हो, शिक्षा हो या सशस्त्र बल, हिमाचल की बेटियां आगे बढ़कर नेतृत्व कर रही हैं और हमें उन पर बहुत नाज है।

    राज्यपाल ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी अवलोकन किया और उनकी सराहना की। कॉलेज की प्रधानाचार्या सिस्टर रोज़ली ने राज्यपाल का स्वागत किया और उन्हें सिम्फोरिया 2025 की विस्तृत जानकारी दी। राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा, जिला प्रशासन के अधिकारी, संकाय सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

     

  • तरन तारन उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग अलर्ट, नकदी-शराब बांटने पर होगी सख्त कार्रवाई

    तरन तारन उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग अलर्ट, नकदी-शराब बांटने पर होगी सख्त कार्रवाई

    चंडीगढ़: पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी सिबिन सी ने 11 नवंबर को तरन तारन सीट के उपचुनाव में मतदान से पहले की अंतिम तैयारियों का जायज़ा लेने के लिए शुक्रवार को जिले के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। बैठक में डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला निर्वाचन अधिकारी राहुल, एस.एस.पी. डॉ. रवजोत गरेवाल और रिटर्निंग अधिकारी गुरमीत सिंह उपस्थित थे। बैठक के दौरान सिबिन सी ने मतदान से 72, 48 और 24 घंटे पहले से लेकर चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक चौकसी बढ़ाने के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि यदि मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए नकदी, शराब या किसी भी प्रकार की मुफ्त वस्तु बांटने की शिकायत मिलती है तो उसके विरुद्ध तुरंत और सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि 9 नवंबर की शाम को चुनाव प्रचार समाप्त होने के बाद किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े बाहरी व्यक्ति को तरन तारन क्षेत्र में प्रवेश न करने दिया जाए।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने वास्तविक समय में निगरानी के लिए सभी मतदान केंद्रों की 100 प्रतिशत लाइव वेबकास्टिंग सुनिश्चित करने के आदेश दिए। उन्होंने मतदान बूथों, स्ट्रांग रूमों और मतगणना हॉल में उपयुक्त व्यवस्थाएं करने को कहा ताकि मतदाताओं और चुनाव कर्मियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार समयबद्ध कार्रवाई की जाए। सिबिन सी ने कहा कि पुलिस नाकों पर सीसीटीवी और पेट्रोलिंग टीमों के माध्यम से 24 घंटे निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि शराब, नकदी, नशीले पदार्थ और अन्य वस्तुओं की अवैध तस्करी को रोका जा सके।

    डिप्टी कमिश्नर-कम-जिला निर्वाचन अधिकारी और एस.एस.पी. ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को बताया कि उपचुनाव के लिए सभी प्रकार की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और चुनाव आयोग के निर्देशों व नियमों के अनुसार चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा। जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि निर्वाचन क्षेत्र में कुल 114 स्थानों पर 222 (60 शहरी और 162 ग्रामीण) मतदान केंद्र बनाए गए हैं। इनमें से 100 मतदान केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया गया है, जहां सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। इसके अलावा 9 मॉडल मतदान केंद्र और महिलाओं के लिए विशेष रूप से समर्पित 3 मतदान केंद्र स्थापित किए गए हैं। साथ ही, दिव्यांग मतदाताओं और युवा मतदाताओं के लिए एक-एक विशेष मतदान केंद्र भी बनाया गया है। सभी मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग सुनिश्चित की गई है।

    एस.एस.पी. ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार जिले में 9 नवंबर शाम 6 बजे से 11 नवंबर शाम 6 बजे तक ‘ड्राई डे’ घोषित किया गया है। इस दौरान पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें अवैध शराब की आवाजाही पर कड़ी नजर रखेंगी। उन्होंने आगे बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के 768 और पंजाब पुलिस के 876 जवान तैनात किए गए हैं। सभी 114 मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों के 480 जवान रहेंगे तैनात। अवांछनीय तत्वों पर निगरानी रखने, अवैध गतिविधियों को रोकने और शराब, नकदी व नशीले पदार्थों की तस्करी पर नियंत्रण के लिए पड़ोसी जिलों की सीमाओं पर 6 नाके लगाए गए हैं। इसके अलावा मतदान से 72 घंटे पहले 22 पेट्रोलिंग टीमें संवेदनशील मतदान केंद्रों पर गश्त करेंगी ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

    उल्लेखनीय है कि तरन तारन निर्वाचन क्षेत्र में कुल मतदाताओं की संख्या 1,92,838 है, जिसमें 1,00,933 पुरुष, 91,897 महिला और 8 तृतीय लिंग के मतदाता शामिल हैं। इसके अलावा कुल सेवा मतदाता 1,357 हैं, जबकि 85 वर्ष से अधिक आयु वाले मतदाताओं की संख्या 1,657 है। वहीं कुल एनआरआई मतदाता 306 और दिव्यांग मतदाता 1,488 हैं। 18 से 19 वर्ष की आयु वाले कुल मतदाताओं की संख्या 3,333 है। बैठक में अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी अमनदीप बांसल, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी सकतर सिंह बंल सहित मुख्य निर्वाचन कार्यालय और तरन तारन जिले के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

  • राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राजभवन में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम

    राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में राजभवन में आयोजित हुआ विशेष कार्यक्रम

    शिमला: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आज राजभवन, शिमला में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल की उपस्थिति में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर राजभवन के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना का जश्न मनाते हुए वंदे मातरम का भावपूर्ण गायन किया।

    समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ भारत माता के प्रति प्रेम, श्रद्धा और अटूट भक्ति का एक अनंत गान है। उन्होंने कहा कि यह गीत प्रत्येक भारतीय के हृदय में राष्ट्रवाद की ज्योति प्रज्वलित करता रहता है। राज्यपाल ने सभी से राष्ट्रीय गीत सार को आत्मसात करने और एक मजबूत, एकजुट और विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक लक्ष्य के लिए स्वयं को समर्पित करने का आग्रह किया।

    कार्यक्रम में बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय, कुशीनगर, उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी विशेष आकर्षण रही। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव सी.पी. वर्मा और बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. कौस्तुभ नारायण मिश्रा भी उपस्थित थे।

  • सीएम सुक्खू का निर्देश, विद्युत परियोजनाओं के कार्य में लाई जाए तेजी

    सीएम सुक्खू का निर्देश, विद्युत परियोजनाओं के कार्य में लाई जाए तेजी

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) की कार्य प्रणाली की समीक्षा कर निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने 450 मेगावाट की शोंग टोंग विद्युत परियोजना की समीक्षा की और इसे दिसंबर, 2026 तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना का 60 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है और शेष कार्य को पूरा करने के लिए इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है। इस परियोजना से समय पर बिजली उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने समानांतर ट्रांसमिशन लाइन स्थापित करने के निर्देश भी दिए।

    मुख्यमंत्री ने 130 मेगावाट की काशांग-II और III, 48 मेगावाट की चांजू- III, 40 मेगावाट की रेणुका बांध और 191 मेगावाट की थाना प्लाऊं जल विद्युत परियोजनाओं की प्रगति पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं को तय समयसीमा में पूरा करने के निदेर्शों की सख्ती से अनुपालना से सुनिश्चित की जाए।

    मुख्यमंत्री ने पंप भंडारण परियोजनाओं की स्थापना पर बल दिया और निगम को प्रस्तावित 1630 मेगावाट की रेणुकाजी पंप भंडारण परियोजना और 270 मेगावाट की थाना प्लाऊं पंप भंडारण परियोजना पर जल्द से जल्द काम शुरू करने को कहा। उन्होंने कहा कि पंप भंडारण परियोजनाएं व्यस्त समय में बिजली की आपूर्ति करने और ग्रिड पर भार कम करने में उपयोगी हैं।

    उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा का दोहन राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि एचपीपीसीएल कार्यान्वित की जा रही सौर ऊर्जा परियोजनाओं के कार्यों में भी तेजी लाना सुनिश्चित करें। उन्होंने निगम को राज्य भर में नई सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करने के लिए नए स्थानों की पहचान करने के भी निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने नालागढ़ में प्रस्तावित एक मेगावाट हरित हाइड्रोजन संयंत्र की भी समीक्षा की और परियोजना को जून, 2026 के अंत तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने निगम को अपनी कार्यशैली में व्यावसायिकता अपनाने के निर्देश देते हुए कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने अगले वर्ष तक हिमाचल प्रदेश को देश का हरित ऊर्जा राज्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

    बैठक में मुख्य सचिव संजय गुप्ता, सचिव ऊर्जा राकेश कंवर, प्रबंध निदेशक एचपीपीसीएल आबिद हुसैन सादिक और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शिमला में उपस्थित रहेे, जबकि मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।

  • डिजिलॉकर पर सेवाओं के एकीकरण के लिए हिमाचल प्रदेश को मिला ‘पीपल फर्स्ट इंटीग्रेशन’ अवार्ड

    डिजिलॉकर पर सेवाओं के एकीकरण के लिए हिमाचल प्रदेश को मिला ‘पीपल फर्स्ट इंटीग्रेशन’ अवार्ड

    शिमला: नागरिक-केंद्रित डिजिटल सेवा वितरण में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सम्मानित किया गया है। हिमाचल प्रदेश के डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग (डीडीटीजी) ने 51 हिमसेवा (ई-जिला सेवाओं) के साथ-साथ हिमपरिवार और हिमएक्सेस कार्ड को डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया है। यह राज्य की डिजिटल परिवर्तन यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

    डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग को 4 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित डिजिलॉकर 2025 पर राष्ट्रीय कार्यशाला एवं सम्मेलन में प्रतिष्ठित ‘पीपल्स फर्स्ट इंटीग्रेशन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया।
    यह पुरस्कार हिमाचल प्रदेश सरकार के डीडीटीजी सचिव आशीष सिंहमार को केन्द्रीय इलैक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव ने अतिरिक्त सचिव/महानिदेशक, एनआईसी और राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस प्रभाग (एनईजीडी) के सीईओ की उपस्थिति में प्रदान किया गया।

    यह उपलब्धि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के हिम परिवार और हिम एक्सेस परियोजनाओं की परिकल्पनाओं की सफलतापूर्वक कार्यन्वित करने का प्रमाण है। इसका उददेश्य प्रत्येक नागरिक के लिए पारदर्शी, कुशल और समावेशी सेवा वितरण सुनिश्चित करने हेतु एक एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

    मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (आईटी एवं नवाचार) गोकुल बुटेल ने विभाग को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि नवाचार और प्रौद्योगिकी के माध्यम से डिजिटल समावेशन और नागरिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को इंगित कर रही है।

    डीडीटीएंडजी के निदेशक डॉ. निपुण जिंदल ने कहा कि विभाग ने डिजिलॉकर प्लेटफॉर्म पर 53 प्रकार के नागरिक प्रमाण पत्रों और दस्तावेजों को एकीकृत करने के लिए मिशन मोड पर काम किया है। इनमें हिम परिवार, हिम एक्सेस कार्ड, बोनाफाइड हिमाचली प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की प्रति, निवास प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र और हिमसेवा (ई-डिस्ट्रिक्ट) पोर्टल के माध्यम से प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाएं शामिल हैं।

    यह एकीकरण न्यूनतम दस्तावेज़ीकरण और नागरिकों के लिए एक सुरक्षित, एकीकृत डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करके सरकारी सेवाओं तक निर्बाध, कुशल और पारदर्शी पहुंच सुनिश्चित करता है। राष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि हिमाचल प्रदेश के नेतृत्व की त्वरित, सरल, समावेशी और नागरिक आधारित सेवा वितरण के लिए प्रौद्योगिकी का सर्वोत्तम समावेश सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित कर रही है।

  • नादौन में जल्द शुरू होगा 25 करोड़ रुपये का एकीकृत एक्वा पार्क प्रोजेक्ट

    नादौन में जल्द शुरू होगा 25 करोड़ रुपये का एकीकृत एक्वा पार्क प्रोजेक्ट

    शिमला: ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ते हुए, राज्य सरकार द्वारा हमीरपुर जिला के नादौन में 25 करोड़ रुपये के निवेश से एक एकीकृत एक्वा पार्क स्थापित किया जाएगा। परियोजना को साकार रूप प्रदान करने के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान कर ली गई है और आईसीएआर-सीआईएफए, भुवनेश्वर द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई है। यह पार्क रोज़गार एवं स्वरोज़गार और आजीविका सृजन का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरेगा। सरकार के इस कदम से मत्स्य पालन क्षेत्र एक लाभदायक और टिकाऊ उद्यम के रूप में स्थापित होगा। यह आधुनिक फ्रेश वाटर एक्वा कल्चर तकनीकों को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने के केंद्र के रूप में कार्य करेगा। परियोजना के माध्यम से विविध एक्वा कल्चर और संबद्ध उपक्रमों जैसे मत्स्य बीज उत्पादन, मत्स्य आहार निर्माण, मूल्य संवर्धन और विपणन से युवाओं और किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ होगी।

    यह पार्क उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य आहार की उपलब्धता सुनिश्चित करके स्थानीय किसानों के लिए मत्स्य उत्पादन बढ़ाने में मदद करेगा। इसमें मछली के आहार को तैयार करने और उन्नत मत्स्य पद्धतियों के लिए प्रदर्शन इकाइयां भी निर्मित की जाएंगी। यह इकाइयां बेरोजगार युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेंगी जिससे इस क्षेत्र में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

    प्रस्ताव के अनुसार, यह पार्क भारतीय मेजर कार्प (रोहू – जयंती रोहू, कतला – अमृत कतला, मृगल), विदेशी कार्प (हंगेरियन और अमूर स्ट्रेन), माइनर कार्प (कुलवांस), कैटफ़िश (पंगेसियस, मुर्रेल) और सजावटी मछलियों (गोल्ड फिश, कोई कार्प, गप्पी, मौली) के उच्च-गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करेगा। अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित, इस एक्वा पार्क में कार्प और कैटफ़िश के लिए आधुनिक हैचरी सुविधाएं नर्सरी और पालन इकाइयां, ब्रूड स्टॉक पालन सुविधाएं, बायोफ्लोक और रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) जैसी उच्च-स्तरीय जलीय प्रणालियां, एक फीड मिल, सजावटी मछली पालन इकाइयां, एक सार्वजनिक एक्वेरियम, विपणन और इनक्यूबेशन सुविधाओं के साथ एक एक्वा शॉप, एक प्रशासनिक-सह-प्रयोगशाला और प्रशिक्षण परिसर, एक क्वारंटीन और आर्द्र प्रयोगशाला, एक अपशिष्ट उपचार संयंत्र और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है और मत्स्य पालन क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। विभाग को किसानों के बीच आधुनिक मछली उत्पादन पद्धतियों को प्रोत्साहन प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे उन्हें उनकी मेहनत के लाभकारी दाम उपलब्ध करवाए जाएंगे।

  • रेणुका ठाकुर को राज्य सरकार से मिलेगा बड़ा सम्मान, CM Sukhu ने किया ₹1 करोड़ का ऐलान

    रेणुका ठाकुर को राज्य सरकार से मिलेगा बड़ा सम्मान, CM Sukhu ने किया ₹1 करोड़ का ऐलान

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने विश्व विजेता भारतीय क्रिकेट टीम की सदस्य हिमाचल की बेटी रेणुका ठाकुर को एक करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान करने की घोषणा की। वे जिला शिमला के रोहडू़ से संबंध रखती हैं। मुख्यमंत्री ने दूरभाष के माध्यम से रेणुका ठाकुर को टीम सहित पहला विश्व कप जीत कर इतिहास रचने के लिए बधाई दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सेमिफाइनल और फाइनल क्रिकेट मैच देखे और इन मैचों में भारत की महिला टीम ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

    उन्होंने कहा कि पूरे हिमाचल को रेणुका ठाकुर की इस उपलब्धि पर गर्व है और उन्होंने प्रदेश के साथ-साथ देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि उनके इस उत्कृष्ट प्रदर्शन तथा समर्पण से लड़कियां अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरणा प्राप्त करेंगी। भारतीय महिला क्रिकेट टीम गत सायं दक्षिण अफ्रीका की टीम को हराकर महिला विश्व कप-2025 की विजेता बनी।

  • हिमाचल में सरकारी विभागों में पारदर्शी भर्ती की दिशा में बड़ा कदम

    हिमाचल में सरकारी विभागों में पारदर्शी भर्ती की दिशा में बड़ा कदम

    शिमला: प्रदेश सरकार ने पारदर्शी, योग्यता-आधारित और एक-समान भर्ती प्रक्रिया को संस्थागत बनाने के दृष्टिगत अनेक कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में विभिन्न सरकारी विभागों में अंतर-विभागीय स्थानांतरण और मानव संसाधनों की तर्कसंगत तैनाती सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भर्ती निदेशालय के अंतर्गत कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) का पृथक संवर्ग बनाने को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस पहल का उद्देश्य सरकारी विभागों के सुचारू संचालन के लिए पारदर्शिता और आवश्यकता आधारित कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित करना है। इसके तहत प्रारम्भिक रूप से सरकार ने राज्य संवर्ग में जॉब ट्रेनी के रूप में कनिष्ठ कार्यालय सहायक के 300 पद सृजित किए हैं। ये पद हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के माध्यम से लागू आरक्षण रोस्टर के अनुरूप भरे जाएंगे।

    प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि भर्ती निदेशालय संवर्ग नियंत्रण प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगा और नियुक्ति, स्थानांतरण, सेवा रिकार्ड के रखरखाव और मानव संसाधन डेटा प्रबंधन की देख-रेख करेगा। इन कर्मचारियों का दैनिक पर्यवेक्षण, कार्य-निष्पादन मूल्यांकन और उपस्थिति निगरानी संबंधित विभागाध्यक्षों के पास रहेगी जहां उनकी तैनाती होगी। राज्य सरकार द्वारा अपनाए जाने वाले वरिष्ठता के सामान्य सिद्धांतों के आधार पर निदेशालय द्वारा संवर्ग वरिष्ठता बनाए रखी जाएगी।

    प्रवक्ता ने कहा कि सरकार सलाहकार विभागों के परामर्श से भर्ती एवं प्रशासनिक व्यवस्थाएं और मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) तैयार करेगी। ये प्रक्रियाएं नियुक्ति, नियंत्रण और अनुशासनात्मक प्राधिकारियों के साथ-साथ इन पदों को भरने के लिए विज्ञापन जारी होने से पहले रिक्यूजिशन, पोस्टिंग और रिपोर्टिंग की प्रक्रियाओं को परिभाषित करेंगी। संवर्ग क्षमता, पोस्टिंग और सर्विस रिकॉडॅ की वास्तविक समय पर निगरानी के लिए एनआईसी के माध्यम से एक केन्द्रित मानव संसाधन प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचआरएमआईएस) भी विकसित की जाएगी। प्रवक्ता ने कहा कि यह व्यवस्था विभिन्न विभागों में श्रमशक्ति की समयबद्ध तैनाती सुनिश्चित करने के साथ पारदर्शी और कुशल तरीके से युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर भी प्रदान करेगी।