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  • शोंगटोंग-कड़छम जलविद्युत परियोजना मार्च -अप्रैल 2027 तक शुरू होगीः CM Sukhu

    शोंगटोंग-कड़छम जलविद्युत परियोजना मार्च -अप्रैल 2027 तक शुरू होगीः CM Sukhu

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज ऊर्जा विभाग की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को किन्नौर जिला में सतलुज नदी पर निर्माणाधीन 450 मेगावाट क्षमता वाली शोंगटोंग-कड़छम जलविद्युत परियोजना के निर्माण कार्य को गति प्रदान करने के निर्देश दिए ताकि इस परियोजना को मार्चदृअप्रैल 2027 तक चालू किया जा सके। उन्होंने कहा कि परियोजना के पावर हाउस का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वर्तमान मानसून के दौरान भी बांध का निर्माण कार्य जारी रहेगा। इसके लिए सतलुज नदी के जल प्रवाह को चार और पांच गेट से मोड़ा जाएगा, जबकि गेट (डायवर्जन बे) 1, 2 और 3 पर समानांतर रूप से कार्य जारी रहेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश की स्वच्छ ऊर्जा अवसंरचना को सुदृढ़ करने और सतत् विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ-साथ ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और पर्यावरण-अनुकूल विकास को भी गति प्रदान करेगी। सुक्खू ने कहा कि कई तकनीकी एवं भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद राज्य सरकार निरंतर निगरानी और बेहतर परियोजना नियोजन के माध्यम से इस परियोजना का निर्माण सुनिश्चित कर रही है। निर्माण कार्य की गति बनाए रखने के लिए भौगोलिक स्थिति के अनुरूप तकनीकी उपाय नियमित रूप से अपनाए जा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप परियोजना का 80 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है।

    परियोजना के पूर्ण होने पर इससे प्रतिवर्ष लगभग 1,579 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन होने की संभावना है। इससे राज्य की ऊर्जा क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा ग्रिड की स्थिरता सुदृढ़ होगी। इस परियोजना से राज्य की अर्थव्यवस्था को प्रतिवर्ष लगभग 900 करोड़ रुपये का योगदान मिलने का अनुमान है। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव आर.डी. नज़ीम, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पाेरेशन लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • ओटीए, रेडियोग्राफर और वरिष्ठ प्रयोगशाला तकनीशियन के 105 अतिरिक्त पदों पर आवेदन आमंत्रित

    ओटीए, रेडियोग्राफर और वरिष्ठ प्रयोगशाला तकनीशियन के 105 अतिरिक्त पदों पर आवेदन आमंत्रित

    शिमला: हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग (एचपीआरसीए) ने प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने के उद्देश्य से चिकित्सा क्षेत्र में विभिन्न वर्गों के 105 अतिरिक्त पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इन पदों में ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के 60 पद, रेडियोग्राफर के 30 पद तथा वरिष्ठ प्रयोगशाला तकनीशियन/एमएलटी ग्रेड-2 के 15 पद शामिल हैं। इन सभी पदों पर भर्ती जॉब ट्रेनी आधार पर की जाएगी। यह 105 पद आयोग द्वारा पूर्व में विज्ञापन संख्या 04/2026, दिनांक 28 फरवरी, 2026 के माध्यम से विज्ञापित 196 पदों के अतिरिक्त हैं। पहले जारी विज्ञापन में ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट (पोस्ट कोड-26008) के 176 पद, वरिष्ठ प्रयोगशाला तकनीशियन/एमएलटी ग्रेड-2 (पोस्ट कोड-26012) के 10 पद तथा रेडियोग्राफर (पोस्ट कोड-26009) के 10 पद शामिल थे। इसके बाद 30 मार्च, 2026 को इस विज्ञापन में विभिन्न श्रेणियों के 18 अतिरिक्त पद भी जोड़े गए थे।

    इन अतिरिक्त पदों को 28 फरवरी, 2026 के मूल विज्ञापन तथा 30 मार्च, 2026 को जारी परिशिष्ट के साथ सम्मिलित किया जाएगा। इसी के मद्देनजर आयोग ने तीनों पोस्ट कोड के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल को 11 जुलाई से 25 जुलाई, 2026 तक पुनः खोल दिया है। अभ्यर्थी 25 जुलाई, 2026 की रात 11.59 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    इच्छुक अभ्यर्थी हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट https://hprca.hp.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन अभ्यर्थियों ने विज्ञापन संख्या 04/2026 दिनांक 28 फरवरी, 2026 अथवा 30 मार्च, 2026 के परिशिष्ट के तहत पहले ही आवेदन कर दिया है, उन्हें दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है।

  • प्राकृतिक खेती से सुदृढ़ हो रही प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था

    प्राकृतिक खेती से सुदृढ़ हो रही प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था

    राज्य अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला में प्राकृतिक उत्पादों की होगी गुणवत्ता जांच

    शिमला: हिमाचल की माटी पर किसानों की समृद्धि की नई ईबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने समृद्धि की इस कहानी की रूप रेखा तैयार की है। उनके दूरदर्शी नेतृत्व में कल्याणकारी नीतियों और योजनाओं से किसानों के जीवन में खुशहाली आ रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा प्रदान कर रही है।

    हिमाचल प्रदेश, देश का पहला राज्य है, जिसने प्राकृतिक खेती से तैयार की गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। वर्ष-दर-वर्ष इसमें उल्लेखनीय वृद्धि भी की जा रही है। अब प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी की जौ 80 रुपये प्रति किलोग्राम तथा अदरक की 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद की जा रही है।

    सरकार के सतत प्रयासों से किसानों का प्राकृतिक खेती के प्रति रुझान बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 में 838 किसानों से 2123.58 क्विंटल गेहूं की खरीद की तुलना में इस रबी के सीजन में प्रदेश सरकार ने 1,891 किसानों से प्राकृतिक पद्धति से उत्पादित 2,679.89 क्विंटल गेहूं की खरीद सुनिश्चित की है।

    मुख्यमंत्री प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र के गुणवत्तायुक्त एवं पोषण युक्त प्राकृतिक खाद्यान्नों को विशेष पहचान और बाजार दिलवाने के लिए ठोस प्रयास कर रहे हैं। जिला चंबा के पांगी उप-मंडल को राज्य का पहला प्राकृतिक खेती उप-मंडल घोषित किया गया है। इससे क्षेत्र के लोग अपनी पारंपरिक कृषि पद्धतियों का संरक्षण और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं। विगत खरीफ सीजन में पांगी उप-मंडल की हुडान, सुराल, किलाड़, सांच और सेचु पंचायत के किसानों ने अच्छे दाम में जौ की बिक्री सुनिश्चित की।

    मुख्यमंत्री ने हाल ही में बड़ा भंगाल के प्रवास के दौरान अधिकारियों को किसानों को प्राकृतिक खेती के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं। इसके अतिरिक्त, बड़ा भंगाल क्षेत्र को प्राकृतिक खेती पंचायत और क्षेत्र में उत्पादित राजमाह के लिए जीआई टैग प्राप्त करने की दिशा में कार्य करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

    वर्तमान में प्रदेश के 2,56,870 किसान 44,784.73 हेक्टेयर भूमि पर प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्रदेश सरकार की नई पहलों के बाद प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए कृषि विभाग में अलग मार्केटिंग विंग स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

    कृषि क्षेत्र के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। समृद्ध किसान के लक्ष्य को हासिल करने के लिए वैज्ञानिक, अनुसंधान और व्यवहारिक प्रशिक्षण को प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है। इस दिशा में किसानों के प्राकृतिक उत्पादों और बीज की जांच की सुविधा के लिए जिला हमीरपुर में 8.64 करोड़ रुपये की लागत से राज्य अवशेष परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई है। इस प्रयोगशाला के स्थापित होने से कृषि उत्पादों विशेषकर प्राकृतिक उत्पादों की वैज्ञानिक जांच सुनिश्चित होगी। यह प्रयोगशाला अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों से लैस है जो कृषि उत्पादों में मौजूद सूक्ष्म तत्वों का भी सटीकता से पता लगाने में सक्षम है। प्रयोगशाला में प्राकृतिक उत्पादों की गुणवत्ता और प्रमाणिकता की जांच की जाएगी। प्रदेश में शून्य बजट प्राकृतिक खेती पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे लोगों की सेहत के साथ मिट्टी की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हिमाचल का प्राकृतिक खेती मॉडल देश के प्राकृतिक खेती मिशन में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है।

  • Special Task Force की कार्रवाई में 77.59 ग्राम चिट्टा/हेरोइन तथा दो किलोग्राम चरस बरामद

    Special Task Force की कार्रवाई में 77.59 ग्राम चिट्टा/हेरोइन तथा दो किलोग्राम चरस बरामद

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू द्वारा 15 नवंबर, 2025 को आरंभ किए गए प्रदेशव्यापी एंटी-चिट्टा जन-आंदोलन के अंतर्गत ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल’ के संकल्प को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में पुलिस विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा राज्य के विभिन्न जिलों में निरंतर अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस विभाग के प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि 11 जुलाई, 2026 को स्पेशल टास्क फोर्स की टीम द्वारा ऊना जिला के अम्ब क्षेत्र में गश्त के दौरान स्पेशल टास्क फोर्स की टीम को सूचना प्राप्त हुई कि मुबारिकपुर, अम्ब क्षेत्र में चिट्टा/हेरोइन की तस्करी की जा रही है।

    इस सूचना के आधार पर स्पेशल टास्क फोर्स के दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्ध व्यक्तियों को निरुद्ध किया तथा उनके कब्जे से 60.45 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद की तथा उनके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई। इस संबंध में पुलिस थाना अम्ब, जिला ऊना में एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत किया गया है। उन्होंने बताया कि मामले के अन्वेषण के दौरान 12 जुलाई, 2026 को प्राप्त बैकवर्ड लिंकेज के आधार पर ग्राम तलवाड़ा स्थित दो व्यक्तियों के आवास पर विधि अनुसार तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान घर से अतिरिक्त 17.14 ग्राम चिट्टा/हेरोइन बरामद कर दोनों व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। बरामदगी के संबंध में नियमानुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई है। मामले का अन्वेषण जारी है तथा बरामद मादक पदार्थ के स्रोत, इसकी आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय लेन-देन एवं इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता की गहनता से जांच की जा रही है।

    प्रवक्ता ने बताया कि 12 जुलाई, 2026 को स्पेशल टास्क फोर्स की ज़िला मंडी टीम द्वारा नियमित गश्त एवं निगरानी के दौरान मनालीदृहरिद्वार रूट पर एक वोल्वो बस की तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान बस में यात्रा कर रहे हरियाणा के एक व्यक्ति के कब्जे से 2.006 किलोग्राम चरस बरामद की गई तथा स्पेशल टास्क फोर्स के नवस्थापित पुलिस थाना, मंडी में अभियोग पंजीकृत किया गया है। मामले का अन्वेषण स्पेशल टास्क फोर्स द्वारा नियमानुसार किया जा रहा है तथा बरामद मादक पदार्थ के स्रोत, इसकी आपूर्ति श्रृंखला, वित्तीय लेन-देन तथा इस अवैध नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता सहित प्रकरण के प्रत्येक पहलू की गहनता से जांच की जा रही है, ताकि इस नेटवर्क से संबंधित सभी व्यक्तियों एवं उनकी संलिप्तता का शीघ्र पता लगाया जा सके।

    इस समन्वित कार्रवाई का उद्देश्य न केवल नशा तस्करी पर प्रभावी अंकुश लगाना है, बल्कि युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाना तथा समाज में व्यापक जन-जागरूकता को बढ़ावा देना भी है। प्रवक्ता ने बताया कि चिट्टा/नशे से संबंधित किसी भी सूचना की जानकारी देने के लिए 112 या नजदीकी पुलिस थाना में संपर्क करें। सूचना देने वालों की पहचान पूर्णतः गोपनीय रखी जाएगी।

  • हाई वैल्यू नट मिशन से बागवानों के लिए समृद्धि के नए अवसर खुलेंगे

    हाई वैल्यू नट मिशन से बागवानों के लिए समृद्धि के नए अवसर खुलेंगे

    शिमला: हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को सशक्त बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार वर्ष 2026 से 2031 तक हाई वैल्यू नट मिशन की शुरूआत करेगी। इस मिशन के तहत अखरोट, बादाम, खुमानी तथा चिलगोजा जैसी उच्च मूल्य वाली समशीतोष्ण (टेम्परेट) नट फसलों की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

    यह मिशन बागवानी क्षेत्र के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों, जैसे पुराने हो चुके बागानों, कम उत्पादकता, कटाई के बाद पर्याप्त आधारभूत संरचना की कमी तथा मूल्य संवर्धन के सीमित अवसरों का समाधान करेगा। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक बाग प्रबंधन, आधुनिक अवसंरचना तथा बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से बागवानी के सतत् विकास के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना है। मिशन के अंतर्गत लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र को बागों के कायाकल्प और उच्च घनत्व पौधारोपण के तहत शामिल किया जाएगा। इनमें से 900 हेक्टेयर पुराने और कम उत्पादन वाले बागों का वैज्ञानिक तरीकों से पुनरुद्धार किया जाएगा। इसके लिए कैनोपी प्रबंधन, टॉप-वर्किंग, पुराने एवं अनुपयोगी पेड़ों का प्रतिस्थापन, मृदा स्वास्थ्य में सुधार तथा जल प्रबंधन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।

    इसके अतिरिक्त, 100 हेक्टेयर क्षेत्र में मॉडल उच्च घनत्व वाले बाग विकसित किए जाएंगे, जहां उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री, सूक्ष्म सिंचाई, जलवायु-अनुकूल खेती की तकनीकें तथा अन्य आधुनिक कृषि उपाय अपनाए जाएंगे। प्रदेश सरकार प्रमाणित एवं रोगमुक्त पौध सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख नट उत्पादक क्षेत्रों में चार हाई-टेक नर्सरियां तथा दो उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगी। ये संस्थान, अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रदर्शन तथा विस्तार सेवाओं के केंद्र के रूप में भी कार्य करेंगे, जिससे बागवान आधुनिक बाग प्रबंधन तकनीकों को अपनाकर उत्पादकता बढ़ा सकेंगे।

    मूल्य श्रृंखला को मजबूत बनाने और बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाने के लिए मिशन के तहत 10 आधुनिक संग्रह, ग्रेडिंग, छंटाई, पैकेजिंग, प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इन सुविधाओं से कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आएगी, उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर होगी तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे। मिशन के अंतर्गत किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा दिया जाएगा, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा तथा कृषि अवसंरचना निधि जैसी योजनाओं के तहत वित्तीय संस्थानों तक किसानों की पहुंच आसान बनाई जाएगी।

    चिलगोजा के पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्व को ध्यान में रखते हुए मिशन के तहत जनजातीय क्षेत्रों में इसके संरक्षण और पुनर्जीवन को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा देने, समुदाय आधारित वन प्रबंधन तथा चिलगोजा बीजों के अंकुरण हेतु विशेष प्रसार सुविधाओं की स्थापना जैसे कदम उठाए जाएंगे। इससे जैव विविधता के संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर भी सृजित होंगे।

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हाई वैल्यू नट मिशन हिमाचल प्रदेश के बागवानी क्षेत्र में विकास, विविधीकरण और आधुनिकीकरण के नए युग की शुरूआत करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य में समशीतोष्ण नट फसलों की खेती की अपार संभावनाएं हैं और यह मिशन आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री तथा बेहतर आधारभूत संरचना के माध्यम से किसानों को इन संभावनाओं का पूरा लाभ उठाने में सक्षम बनाएगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल उत्पादकता और लाभप्रदता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी तथा ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। प्रदेश सरकार बागवानी को एक सुदृढ़, तकनीक आधारित और बाजारोन्मुखी क्षेत्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सुक्खू ने कहा कि मिशन के तहत बागों के कायाकल्प, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और निर्यात संवर्धन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे बागवानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि चिलगोजा संरक्षण द्वारा महिलाओं, जनजातीय समुदायों और किसान उत्पादक संगठनों को लक्षित सहायता के माध्यम से समावेशी एवं सतत् विकास सुनिश्चित होगा, जिससे हिमाचल प्रदेश के हजारों बागवान परिवारों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

     

  • मुख्यमंत्री ने अत्याधुनिक 3-टेस्ला MRI मशीन का किया शुभारंभ

    मुख्यमंत्री ने अत्याधुनिक 3-टेस्ला MRI मशीन का किया शुभारंभ

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के अटल इंस्टीच्यूूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटीज़, चमियाना में अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई सुविधा का शुभारंभ किया। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला के बाद एआईएमएसएस प्रदेश का दूसरा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान बन गया है, जहां यह उन्नत इमेजिंग तकनीक उपलब्ध करवाई गई है। लगभग 23 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित यह अत्याधुनिक 3-टेस्ला एमआरआई मशीन बेहतर गुणवत्ता की इमेजिंग, कम समय में जांच तथा अधिक सटीक निदान की सुविधा प्रदान करेगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक से सुसज्जित करना वर्तमान राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस उन्नत एमआरआई सुविधा के शुरू होने से विभिन्न सुपर स्पेशियलिटी विभागों की निदान क्षमता अत्यधिक सुदृढ़ होगी, जिससे चिकित्सकों को जटिल बीमारियों का अधिक प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनका उपचार करने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब मरीजों को एमआरआई जांच के लिए संस्थान से बाहर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे उनके समय और धन दोनों की बचत होगी तथा उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त होंगी।

    मुख्यमंत्री ने मीडिया से संवाद करते हुए कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताएं हैं तथा इन दोनों महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए धन की कमी को आड़े नहीं आने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में कार्यरत चिकित्सकों से व्यापक विचार-विमर्श के पश्चात् पूरे प्रदेश में चिकित्सा तकनीक को उन्नत बनाने के लिए व्यापक सुधार कर रही है। राज्य सरकार प्रदेश के लोगों को सस्ती, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में सरकार जहां एक ओर चिकित्सकों के रिक्त पद भर रही है, वहीं दूसरी ओर सभी सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों को अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक और आधुनिक निदान उपकरणों से लैस किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग्य चिकित्सकों को सरकारी सेवाओं में बनाए रखने के लिए प्रतिस्पर्धी वेतनमान भी प्रदान किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों में 125 करोड़ रुपये की लागत से स्वचालित (ऑटोमेटेड) प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी, जहां अत्याधुनिक और पूरी तरह स्वचालित जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे जांच की सटीकता बढ़ेगी और मरीजों के उपचार में उल्लेखनीय सुधार होगा।

    सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार एआईएमएसएस को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहली बार रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी यहीं शुरू की गई थी, जिसके पश्चात् डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा, आईजीएमसी शिमला तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नेरचौक में भी रोबोटिक सर्जरी सुविधा आरम्भ की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार मरीजों को रोबोटिक सर्जरी की सुविधा रियायती दरों पर उपलब्ध करवा रही है, जबकि निजी अस्पतालों में यह उपचार अत्यंत महंगा होता है। इसी प्रकार एमआरआई और पैट स्कैन जैसी जांच भी प्रदेश में न्यूनतम दरों पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधारों के माध्यम से सभी जांचों के लिए शून्य प्रतीक्षा अवधि सुनिश्चित करना है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एआईएमएसएस मोबाइल एप्लीकेशन का भी शुभारंभ किया, जिसके माध्यम से मरीज संस्थान और उसकी विभिन्न सेवाओं से संबंधित समस्त जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान की स्वच्छता निगरानी प्रणाली का भी शुभारंभ किया, जिससे अस्पताल परिसर में साफ-सफाई और स्वच्छता प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

     

     

  • मुख्यमंत्री ने बैंटनी, शिमला में अत्याधुनिक डिजिटल संग्रहालय का शुभारंभ किया

    मुख्यमंत्री ने बैंटनी, शिमला में अत्याधुनिक डिजिटल संग्रहालय का शुभारंभ किया

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज शिमला के बैंटनी में अत्याधुनिक डिजिटल संग्रहालय का शुभारंभ किया। यह संग्रहालय आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से हिमाचल प्रदेश की समृद्ध संस्कृति, इतिहास और विरासत को संरक्षित करने और दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंटनी का शिमला के इतिहास में विशेष महत्व रहा है। यहां डिजिटल संग्रहालय की शुरूआत राज्य की विरासत के संरक्षण, सम्मान और वैश्विक स्तर पर प्रचार-प्रसार की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक नए संस्थान का उद्घाटन नहीं है, बल्कि विरासत संरक्षण के एक नए युग की शुरूआत है। यह डिजिटल संग्रहालय अतीत और भविष्य के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करेगा। यहां आने वाले लोग हिमाचल प्रदेश के समृद्ध इतिहास और जीवंत संस्कृति को आधुनिक तकनीक के माध्यम से नए और रोचक तरीके से अनुभव कर सकेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि संग्रहालय को इस तरह तैयार किया गया है कि हर आयु वर्ग के लोग इतिहास को आसानी से समझ सकें और उससे जुड़ सकें। इसके लिए हाई-रेजोल्यूशन 3डी स्कैनिंग, वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी, इंटरैक्टिव टाइमलाइन और इमर्सिव स्टोरी टेलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। इन सुविधाओं के माध्यम से आगंतुक हिमाचल की लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, आध्यात्मिक विरासत और स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणादायक गाथाओं को जीवंत और आकर्षक रूप में देख सकेंगे। उन्होंने कहा कि संग्रहालय में शिमला के विकास की पूरी कहानी को दर्शाया गया है। इसमें एक छोटे से पहाड़ी नगर से ऐतिहासिक महत्व वाले शहर बनने तक की यात्रा को प्रस्तुत किया गया है। साथ ही, हिमाचल प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहरों, महान विभूतियों के जीवन और योगदान, कालका-शिमला रेलवे, राज्य गठन के बाद की विकास यात्रा, समृद्ध कला एवं संस्कृति तथा पारंपरिक खान-पान को भी आकर्षक तरीके से प्रदर्शित किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह डिजिटल संग्रहालय भविष्य में हिमाचल प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केन्द्र बनेगा। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए राज्य की अमूल्य विरासत को सुरक्षित रखने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के माध्यम से उसे वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिलाएगा। इस अवसर पर उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, विधायक हरीश जनारथा, नगर निगम शिमला के महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप, भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग की निदेशक रीमा कश्यप और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

  • हिमाचल प्रदेश में 3,500 करोड़ रुपये की आपदा-रोधी आधारभूत संरचना बनेगी: मुख्यमंत्री

    हिमाचल प्रदेश में 3,500 करोड़ रुपये की आपदा-रोधी आधारभूत संरचना बनेगी: मुख्यमंत्री

    शिमला :मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने और राज्य को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से आपदा-रोधी  (डिजास्टर रेजिलिएंट) आधारभूत संरचना विकसित की जाएगी। वह आज शिमला स्थित डॉ. मनमोहन सिंह हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा) में आयोजित ‘टूवार्डस रेजिलिएंस इन्फ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग इन हिमालय’ विषय पर उच्च स्तरीय कार्यशाला के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पहाड़ी और भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य है, इसलिए यहां प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
    उन्होंने वर्ष 2023 की भीषण आपदा को याद करते हुए कहा कि उस समय लगभग 75,000 पर्यटक राज्य के विभिन्न हिस्सों में फंस गए थे। सरकार, मंत्रियों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से सभी पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया और आवश्यक सेवाओं को तेजी से बहाल किया गया। उन्होंने राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और विधायक संजय अवस्थी की भी सराहना की, जिन्होंने स्वयं चंद्रताल झील क्षेत्र में फंसे लगभग 300 पर्यटकों को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 की आपदा में करीब 23,000 मकान पूरी तरह नष्ट हो गए थे और 51 लोगों की जान चली गई थी। प्रभावित परिवारों की मदद के लिए सरकार ने राहत नीति में बड़ा बदलाव करते हुए पूरी तरह क्षतिग्रस्त मकानों के लिए मुआवजा 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 की आपदा से मिले अनुभवों के कारण सरकार वर्ष 2025 की आपदा का बेहतर तरीके से सामना कर सकी, जिससे स्थिति गंभीर होने के बावजूद नुकसान अपेक्षाकृत कम रहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बढ़ रही बादल फटने की घटनाएं जलवायु परिवर्तन और बड़े बांधों के जलाशयों से बढ़ते वाष्पीकरण से जुड़ी हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि आज यह समस्या हिमाचल में दिखाई दे रही है, लेकिन आने वाले समय में अन्य राज्यों को भी इसका सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए विकास की नीतियों में आवश्यक बदलाव और साहसिक फैसले लेने होंगे और राज्य सरकार इसके लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है और पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। प्रदेश सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कार्यशाला के आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल आधारभूत संरचना के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षित, मजबूत और समावेशी भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यशाला से मिले सुझाव भविष्य की नीतियां बनाने में उपयोगी साबित होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ‘टुवर्ड्स रेजिलिएंट हिमाचल प्रदेशः लेसनस एंड रिकमडेशनज फ्रॉम 2023 और 2025 हाइड्रो मेट्रोलॉजिकल डिजास्टर’ शीर्षक से रिपोर्ट का विमोचन भी किया। इसके अलावा ‘हिमाचल सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (एसआईएयू पोर्टल)’ भी लॉन्च किया। उन्होंने कहा कि यह पोर्टल बेहतर डेटा आधारित निर्णय लेने, विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने और प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगा। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक राठौर ने कहा कि पश्चिमी हिमालय पर्यावरण की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र है और हाल के वर्षों में यहां प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने आपदा-रोधी विकास, मजबूत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली, संवेदनशील हिमनदीय झीलों की लगातार निगरानी, पर्वतीय क्षेत्रों के लिए अलग इंजीनियरिंग मानक और लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया।

    मुख्य सचिव के.के. पंत ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। वर्ष 2023 और 2025 की आपदाओं से आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान हुआ और कई लोगों की जान गई। सरकार का लक्ष्य केवल क्षतिग्रस्त ढांचे का पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम मजबूत आधारभूत संरचना तैयार करना है। उन्होंने आपदा प्रबंधन के लिए संस्थागत क्षमता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। नीति आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. वी.के. पॉल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को पहले से ही भौगोलिक परिस्थितियों के कारण कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और अब वैश्विक तापमान वृद्धि ने इन्हें और गंभीर बना दिया है। उन्होंने कहा कि आपदा-रोधी विकास के लिए सभी विभागों और संस्थाओं के सहयोग से व्यापक नीति अपनानी होगी। उन्होंने वर्ष 2023 की आपदा को एक चेतावनी बताते हुए समय रहते ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन के सेंटर हेड देबोजीत पालित, निदेशक हिप्पा रूपाली ठाकुर, वरिष्ठ अधिकारी और अन्य गणमान्य इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • आईटीआई के 30 प्रशिक्षुओं का प्रतिनिधिमंडल अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र विज़िट पर होगा रवाना

    आईटीआई के 30 प्रशिक्षुओं का प्रतिनिधिमंडल अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र विज़िट पर होगा रवाना

    शिमला: हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के 30 मेधावी प्रशिक्षुओं का प्रतिनिधिमंडल कजाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र विज़िट के लिए जाएगा। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल 12 जुलाई को दिल्ली से कजाकिस्तान के लिए रवाना होगा। राज्यभर के आईटीआई से चयनित प्रतिनिधिमंडल में 30 मेधावी प्रशिक्षु, तकनीकी शिक्षा निदेशक और 3 संकाय सदस्य शामिल हैं।

    तकनीकी शिक्षा मंत्री ने आज कहा कि इस एक्सपोज़र विज़िट का उद्देश्य राज्य के युवाओं को वैश्विक स्तर के व्यवसायिक प्रशिक्षण की जानकारी उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू वर्चुअल माध्यम से प्रशिक्षुओं के इस दल को रवाना करेंगे। यह वैश्विक स्तर का अनुभव, कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    इस प्रतिनिधिमंडल में 21 पुरुष एवं 9 महिला प्रशिक्षु शामिल हैं। ये प्रशिक्षु राज्य के 16 राजकीय आईटीआई तथा 10 विभिन्न ट्रेड क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल में इलेक्ट्रीशियन, फिटर, ड्राफ्ट्समैन (सिविल), इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक, मैकेनिक मोटर व्हीकल, सूचना प्रौद्योगिकी, मशीनिस्ट, सर्वेयर, वायरमैन तथा टेक्नीशियन पावर इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम जैसे प्रमुख ट्रेड के प्रशिक्षु शामिल हैं।

    उन्होंने कहा कि कजाकिस्तान के अल्माटी की भौगोलिक परिस्थितियां हिमाचल प्रदेश से समरूप हैं। अल्माटी के साप्ताहिक अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र विज़िट के दौरान प्रशिक्षु प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों जैसे वाहन निर्माण के लिए हंुडई ट्रांसप्लांट तथा सामल वाटर बॉटलिंग प्लांट का भ्रमण कर आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं एवं गुणवत्ता मानकों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करेंगे। प्रतिनिधिमंडल शिम्बुलक की यात्रा के माध्यम से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी गोंडोला-आधारित केबल कार प्रणाली की इंजीनियरिंग एवं संचालन पर विशेष प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे।

    उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों अल्माटी मैनेजमेंट यूनिवर्सिटी, अल्माटी टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी तथा तूरान यूनिवर्सिटी का भी दौरा करेगा, ताकि भविष्य में सहयोग की संभावनाओं का पता लगाया जा सके। इन संवाद सत्रों, छात्र आदान-प्रदान कार्यक्रमों, संयुक्त प्रमाणन पाठ्यक्रमों तथा संकाय क्षमता-निर्माण के क्षेत्रों में संस्थागत सहभागिता का मार्ग प्रशस्त होगा।

    उन्होंने कहा कि इस अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर विजिट का मुख्य उद्देश्य प्रशिक्षुओं एवं संकाय सदस्यों को तकनीकी एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही श्रेष्ठ प्रक्रियाओं, आधुनिक प्रशिक्षण पद्धतियों, उद्योग आधारित कौशल विकास प्रणालियों तथा नवीन तकनीकों से अवगत करवाना है। इस कार्यक्रम से राज्य में संचालित आईटीआई प्रशिक्षण प्रणाली की गुणवत्ता में सुधार तथा कौशल विकास पहलों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस एक्सपोजर विजिट के माध्यम से प्रदेश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कार्यबल को तैयार करने मे सहायता मिलेगी तथा वह दीर्घकालिक शैक्षणिक एवं औद्योगिक साझेदारियों के द्वार भी खोलेगी। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम हिमाचल प्रदेश सरकार की गुणवत्तापूर्ण कौशल विकास, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, उद्योग आधारित प्रशिक्षण एवं वैश्विक स्तर पर सक्षम मानव संसाधन तैयार करने की प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

  • सरदार पटेल की एकता और संघवाद की सोच देश की शक्तिः राज्यपाल

    सरदार पटेल की एकता और संघवाद की सोच देश की शक्तिः राज्यपाल

    शिमला : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल केवल भारत के राजनीतिक एकीकरण के शिल्पकार ही नहीं थे, बल्कि भारतीय संघीय व्यवस्था के भी मजबूत समर्थक थे। उन्होंने कहा कि भारत का संघीय ढांचा दुनिया में अनोखा है, जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं संविधान के माध्यम से एक सूत्र में बंधी हुई हैं जो देश की एकता की मजबूत नींव है। राज्यपाल आज भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘सरदार पटेल की दृष्टि, एकीकरण, एकात्मता और संघवाद की परिकल्पना’ तथा ‘वंदे मातरम् की यात्रा- एक प्रदर्शनी’ के शुभारम्भ समारोह को संबोधित कर रहे थे। भारत के उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन को कार्यक्रम में शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम के कारण वे नहीं आ सके। इस अवसर पर उप-राष्ट्रपति ने वीडियो के माध्यम से अपना संदेश दिया।

    राज्यपाल ने कहा कि ये दोनों कार्यक्रम भारत की राष्ट्रीय चेतना के दो महत्त्वपूर्ण स्तंभों को समर्पित हैं। वंदे मातरम् की यात्रा- एक प्रदर्शनी स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों में जागृत हुई राष्ट्रभक्ति की भावना को दर्शाती है, जबकि यह संगोष्ठी सरदार पटेल के उस दूरदर्शी नेतृत्व को याद करती है, जिसने देश को एकजुट कर मजबूत भारत की नींव रखी। राज्यपाल ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका योगदान केवल 560 से अधिक रियासतों के विलय तक सीमित नहीं था। बारडोली सत्याग्रह में उनके नेतृत्व, संगठन क्षमता, अनुशासन और राष्ट्र निर्माण के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए कहा कि इन्हीं गुणों के कारण उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि मिली।

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गुजरात के केवड़िया में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के निर्माण की पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह स्मारक सरदार पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में दिए गए अद्वितीय योगदान को समर्पित है और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना का सशक्त प्रतीक है। इससे पूर्व, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार ने संस्थान की स्थापना के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्षभर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने सरदार पटेल की एकता और संघवाद की सोच को आज भी प्रासंगिक बताते हुए भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को सही दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने की संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।

    ‘ऑर्गेनाइजर वीकली’ के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने सरदार पटेल के अखंड भारत के निर्माण में ऐतिहासिक योगदान पर अपने विचार साझा किए। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी ने राज्यपाल को सम्मानित किया तथा संगोष्ठी और प्रदर्शनी की जानकारी दी। संस्थान के सचिव मेहर चंद नेगी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।