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  • इस वर्ष के अंत तक सभी चिकित्सा महाविद्यालय का होगा उन्नयनः मुख्यमंत्री

    इस वर्ष के अंत तक सभी चिकित्सा महाविद्यालय का होगा उन्नयनः मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने गुरुवार शाम यहां स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्देश दिए कि राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों को इस वर्ष के अंत तक अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस किया जाएगा ताकि प्रदेश के लोगों को राज्य में ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने हजारों पदों पर भर्ती की है। उन्होंने कहा कि एम्स, नई दिल्ली की तर्ज पर सरकार स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करवा रही हैं, जिससे मरीजों को बेहतर और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित हो रही है।

    सुक्खू ने कहा कि डॉ. राजेन्द्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा, डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर तथा अटल इन्स्टीच्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पैशियलिटी आयुर्विज्ञान चमियाणा (एआईएमएसएस) में स्थापित की जा रही अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशालाओं के लिए सरकार ने 75 करोड़ रुपये जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय (आईजीएमसी), शिमला में पीईटी स्कैन मशीन स्थापित की गई है तथा टांडा और हमीरपुर चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए पीईटी स्कैन मशीनों की खरीद की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि विभिन्न पैरामेडिकल श्रेणियों के 71 पदों तथा 50 जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। इसके अतिरिक्त पैरामेडिकल श्रेणियों के 162 नए पद स्वीकृत किए गए हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालयों मंे अध्ययनरत विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध करवाया जाएगा तथा प्रत्येक बैच में 60 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने आईजीएमसी, शिमला में तीन लेक्चर थिएटर और एक परीक्षा भवन के निर्माण के लिए 5.76 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इसके अतिरिक्त टांडा चिकित्सा महाविद्यालय में लेक्चर थिएटर के निर्माण के लिए अतिरिक्त 14.13 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि एआईएमएसएस चमियाणा में 23.75 करोड़ रुपये की लागत से क्रिटिकल ब्लॉक तथा 42 करोड़ रुपये की लागत से अतिरिक्त ब्लॉक का निर्माण कार्य प्रगति पर है। उन्होंने अधिकारियों को इन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों को अत्याधुनिक आधारभूत अधोसंरचना और विश्वस्तरीय तकनीक से स्तरोन्नत किया जा रहा है।

    CM सुक्खू ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने और आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होने के बाद प्रदेश के लोगों को उनके घर के निकट ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।

  • उप-मुख्य सचेतक ने के.सी. वेणुगोपाल से की भेंट

    उप-मुख्य सचेतक ने के.सी. वेणुगोपाल से की भेंट

    शिमला : उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया ने आज नई दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के संगठन महासचिव एवं सांसद के.सी. वेणुगोपाल के साथ शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उप-मुख्य सचेतक ने के.सी. वेणुगोपाल को प्रदेश मंे चलाई जा रही विकासात्मक परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के दूरदर्शी नेतृत्व में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है। प्रदेश में प्राकृतिक खेती पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है और किसानों को अनेक प्रोत्साहन प्रदान किए जा रहे हैं जिनका लाभ उठाकर किसानोें की आय में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्राकृतिक खेती के आदर्श राज्य के रूप में उभर रहा है।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश, देश का पहला राज्य है जिसने प्राकृतिक खेती से तैयार की गई फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान किया है। राज्य सरकार ने प्राकृतिक खेती से तैयार की गई फसलों की एमएसपी में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। अब प्राकृतिक खेती से तैयार किए गए गेहूं की खरीद 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की 50 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, पांगी घाटी की जौ 80 रुपये प्रति किलोग्राम तथा अदरक की 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीद की जा रही है। पशु पालकों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से गाय के दूध के एमएसपी को 32 रुपये से बढ़ाकर 61 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध के एमएसपी को 47 रुपये से बढ़ाकर 71 रुपये प्रति लीटर किया गया है।

    उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेशवासियों के हितों की रक्षा कर रही है। सरकार ने किशाऊ बांध परियोजना में बड़ी सफलता हासिल की है। अब 15,000 करोड़ रुपये से निर्मित होने वाली 422 मेगावाट की इस परियोजना के बनने पर बिजली उत्पादन के रूप में होने वाले 2,000 करोड़ रुपये के खर्च को पानी के रूप में लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा राज्य वहन करेंगे। इससे बिजली उत्पादन शुरू होने पर हिमाचल को हर साल 600 करोड़ रुपये की आय सुनिश्चित होगी।

    उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त, कड़छम-वांगतू जलविद्युत परियोजना में जेएसडब्ल्यू एनर्जी कंपनी राज्य को 12 प्रतिशत के बजाय 18 प्रतिशत रॉयल्टी प्रदान करेगी जिससे प्रदेश के खजाने में प्रतिवर्ष 250 करोड़ से अधिक की आय होगी। उप-मुख्य सचेतक ने कहा कि इस अवसर पर के.सी. वेणुगोपाल के साथ विभिन्न विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। उनका मार्गदर्शन, अनुभव और रणनीति हमारे लिए निरन्तर प्रेरणा एवं नई ऊर्जा का स्रोत है।

  • नई औद्योगिक नीति से व्यापार में सुगमता को मिलेगा प्रोत्साहनः मुख्यमंत्री

    नई औद्योगिक नीति से व्यापार में सुगमता को मिलेगा प्रोत्साहनः मुख्यमंत्री

    शिमला: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि राज्य सरकार नई औद्योगिक नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है, जिसे शीघ्र अधिसूचित किया जाएगा। नई नीति राज्य में निवेश आकर्षित करने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने तथा हिमाचल प्रदेश में व्यापार में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वह बुधवार सायं उद्योग विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

    उन्होंने कहा कि नीति को व्यापक और उद्योग-अनुकूल बनाने के लिए सभी हितधारकों से परामर्श किया जा रहा है। साथ ही, निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एकल खिड़की स्वीकृति प्रणाली को भी सुदृढ़ किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस पहल के तहत नियमों और प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा रहा है, ताकि उद्योगपति अपने उद्योगों की स्थापना और संचालन अधिक आसानी से कर सकें। उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान इस दिशा में कई नीतिगत पहल और कानूनी सुधार किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने ऊना में विकसित किए जा रहे बल्क ड्रग पार्क तथा धर्मशाला में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल के कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दोनों परियोजनाओं में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि देश की प्रतिष्ठित कंपनियों को बल्क ड्रग पार्क में निवेश के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए। 2,071 करोड़ रुपये की इस परियोजना से प्रदेश के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने बताया कि लगभग 800 बीघा भूमि को समतल किया जा चुका है तथा कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।

    सुक्खू ने अधिकारियों को आगामी 15 जुलाई तक कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट और स्टीम जनरेशन सुविधा का कार्य पूरा करने के भी निर्देश दिए। धर्मशाला में निर्माणाधीन यूनिटी मॉल परियोजना की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए 66 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की जा चुकी है और कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ‘वन डिस्ट्रिक्ट, थ्री प्रोडक्ट्स’ कार्यक्रम के तहत उत्पादों की पहचान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल लोगों के लिए नए आजीविका के अवसर सृजित करने के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत करेगी।

     

     

  • अयोध्या चढ़ावा चोरी से आस्था को गहरी ठेस, मामले में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए

    अयोध्या चढ़ावा चोरी से आस्था को गहरी ठेस, मामले में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए

    शिमला : मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहाकार (मीडिया) नरेश चौहान ने आज यहां प्रत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या राम मंदिर चढ़ावे मामले में उजागर भ्रष्टाचार और इसमें भाजपा तथा इससे जुड़े संगठनों की संदेहपूर्ण भूमिका बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जय श्री राम के उद्घोष के पीछे छिपकर तथा प्रभु श्री राम के नाम का इस्तेमाल कर भाजपा हमेशा से अपनी राजनीति चमकाती आई है। चढ़ावा चोरी के मामले में भाजपा के शासन में राजनीतिक शह प्राप्त कुछ लोभी लोगों ने लोक आस्था को गहरी ठेस पहुंचाई है और मानवता को शर्मसार करने वाला कृत्य किया है।
    उन्होंने कहा कि यह मामला 150 करोड़ भारतवासियों की भावनाओं से जुड़ा है। चालीस दिनों की वीडियो फुटेज की पड़ताल में सामने आया है कि 40 दिनों में 70 बार चोरी को अंजाम दिया गया है। यह स्पष्ट दर्शाता है कि चोरी करने वाला गिरोह कितना बेखौफ था क्योंकि उसे राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने मामले की जांच सर्वोच्च न्यायालय अथवा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की निगरानी में करवाने की मांग की।

    नरेश चौहान ने कहा कि जब चढ़ावा भी चोरी किया जा रहा है तो निर्माण के समय इकठ्ठे किए गए चंदे की कैसी लूट हुई होगी, यह कल्पना से परे है। ट्रस्ट के लोग भाजपा के द्वारा चयनित थे तथा पार्टी के विश्वासपात्र थे, इसलिए जवाबदेही भी भाजपा की ही बनती है। उन्हांेने कहा कि यह हास्यास्पद है कि लोगों द्वारा इस्तिफा दिया जा रहा है और उसे स्वीकार कर उनकी छवि को बेदाग दर्शाया जा रहा है, जबकि पुख्ता जांच के उपरांत इसमें शामिल लोगों को उनके पदों से हटाया जाना चाहिए था।

    उन्होंने कहा कि श्री राम भगवान के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के तुच्छ प्रयास करने वाली भाजपा ने प्रभु श्री राम के आदर्शो का अनुसरण करना तो दूर बल्कि इसके उल्ट कार्य किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा जय श्री राम का उच्चारण उनके प्रति आस्था एवं समर्पण का संकेतक नही अथवा अयोध्या में एकत्रित चढ़ावे पर उनकी खोट भरी नजर का प्रतीक बनकर सामने आया है। उन्होंने इस मामले में नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें बताना चाहिए कि क्या वो चढ़ावा चोरी को सही मानते हैं और यदि नहीं तो अब तक उन्होंने इसकी निन्दा क्यांे नहीं की।
    नरेश चौहान ने कहा कि चंदा चोरी मामले में सामने आए नामों और उनके सभी साथियों सहित इस चढ़ावा चोर गिरोह के मुखिया का चेहरा देश के सामने लाया जाना चाहिए। उन्होंने जांच एजेंसियों से अपील करते हुए कहा कि अयोध्या मंदिर में चढ़ावे चोरी की निष्पक्ष जांच की जाए तथा आरोपियों और इन्हें शह देने वालों की जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि चढ़ावा चोरी से जो संपत्ति एकत्रित की गई है उसे भी जब्त किया जाना चाहिए।

    प्रदेश भाजपा नेतृत्व द्वारा राज्य सरकार के विरुद्ध किए जा रहे तथ्य रहित दुष्प्रचार पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने भाजपा को सकारात्मक विपक्ष की संविधानिक जिम्मेदारी निभाने में विफल करार दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने जब से प्रदेश की बागडोर संभाली है तभी से वह प्रदेश हित के मुद्दों पर मुखर रहे हैं तथा न्यायलयों एवं केंद्र सरकार सहित विभिन्न महत्त्वपूर्ण मंचों पर हिमाचल के पक्ष में मजबूती के साथ आवाज उठाई है। उन्होंने कहा कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू एक ऐसे व्यक्ति है जिन्होंने सदैव राजनीति से उपर उठकर हिमाचल के हकों की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि श्री सुक्खू को प्रदेश के अधिकारों के लिए निडरता से आवाज उठाने तथा संसाधन सृजन के अग्रणी प्रयासों के लिए ध्वजवाहक के रूप में याद किया जाएगा।

    हिमाचल को आत्मनिर्भर, सबसे समृद्ध तथा हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री द्वारा उठाए जा रहे कदम सराहनीय एवं अनुकरणीय हैं। इसके विपरीत, भाजपा की गत तीन वर्षों में विकास कार्यों की गति रोकने के अतिरिक्त कोई अन्य उपलब्धि नहीं है। हिमाचल आज आर्थिक चुनौती से जूझ रहा है और इससे उबरने के लिए एक ओर जहां ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कड़े निर्णय लिए हैं वहीं भाजपा नेता संसाधन सृजन तथा अतिरिक्त केंद्रीय सहायता लाने में प्रदेश सरकार के प्रयासों में भागीदार बनना तो दूर बल्कि केंद्र से मिलने वाली वित्तीय सहायता को रोकने में लगे हैं।

     

  • सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में 3468 अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया जारी: शिक्षा मंत्री

    सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में 3468 अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया जारी: शिक्षा मंत्री

    शिमला : शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में सीबीएसई से संबद्ध सरकारी विद्यालयों के लिए 3,468 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। इनमें 19 श्रेणियों के 2,668 नियमित पदों का मामला हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग, हमीरपुर को भेजा जा चुका है, जबकि 800 अस्थायी अंग्रेजी एवं गणित अध्यापकों की नियुक्ति भी की जा रही है। संस्कृत, शारीरिक शिक्षा, संगीत, ड्रॉइंग, विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, हिंदी, भूगोल, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, कंप्यूटर विज्ञान, ललित कला तथा लोक प्रशासन विषयों के शिक्षकों की भर्ती भी शीघ्र पूरी की जाएगी। शिक्षा मंत्री बुधवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में चल रहे विभिन्न सुधारात्मक कार्यक्रमों और योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने अधिकारियों को सरकार की जनकल्याणकारी पहलों को निर्धारित समय सीमा में प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए, ताकि शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बने।

    डॉ. वाई.एस. परमार डिजिटल विद्यार्थी योजना की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2022-23, 2023-24 तथा 2024-25 के दौरान 9,359 विद्यार्थियों को इस योजना के अंतर्गत टैबलेट प्रदान किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को शेष पात्र विद्यार्थियों को भी बिना विलंब प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से योजना का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
    उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी विद्यालय सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) से जुड़ चुके हैं। पहली बार राज्य सरकार को 524 विद्यालयों में पुराने कंप्यूटरों के प्रतिस्थापन की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त 777 सरकारी विद्यालयों में बेहतर इंटरनेट एवं नेटवर्क सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए बीएसएनएल के साथ नेटवर्किंग टेंडर अंतिम चरण में है, जिससे विद्यालयों में डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।

    सीबीएसई स्कूल पहल की समीक्षा करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि 158 विद्यालयों को सीबीएसई पाठ्यक्रम की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से 146 विद्यालयों को सीबीएसई की संबद्धता प्राप्त हो चुकी है। शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अस्थायी आधार पर 400 अंग्रेजी तथा 400 गणित अध्यापकों की नियुक्ति की है, जिनमें से 292 अंग्रेजी और 284 गणित अध्यापक अपने-अपने विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं। शिक्षा मंत्री ने एसएमसी अध्यापकों, कंप्यूटर अध्यापकों तथा एलडीआर मामलों सहित विभिन्न सेवा एवं भर्ती संबंधी विषयों की भी समीक्षा की। उन्होंने प्रथम प्रयास में असफल एसएमसी अभ्यर्थियों को दूसरा अवसर प्रदान करने तथा लंबित सेवा मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निपटारा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शास्त्री पदों के लिए काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी कर 191 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र जारी किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त 870 शारीरिक शिक्षा अध्यापक (पीईटी) पदों की भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है, जिनमें से 355 पदों के लिए काउंसलिंग भी संपन्न हो गई है।

    मुख्यमंत्री द्वारा घोषित भर्ती प्रस्तावों तथा विधानसभा आश्वासनों की समीक्षा के दौरान शिक्षा मंत्री को अवगत करवाया कि शारीरिक शिक्षकों के 486 नए पद सृजित किए जा चुके हैं तथा 112 अतिरिक्त पदों को भरने की स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने मल्टी टास्क वर्कर भर्ती की भी समीक्षा की। स्वीकृत 8,000 पदों में से 6,703 पद भरे जा चुके हैं। उन्होंने शेष पदों को शीघ्र भरने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री पोषण योजना के सामाजिक अंकेक्षण की समीक्षा करते हुए बताया कि राज्य सामाजिक अंकेक्षण इकाई ने वर्ष 2025-26 के दौरान 503 विद्यालयों का सामाजिक अंकेक्षण पूरा कर लिया है। उन्होंने सभी जिलों को शीघ्र कार्रवाई प्रतिवेदन (एटीआर) प्रस्तुत करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रोहित ठाकुर ने डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि इस योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग को इस योजना की प्रक्रियाओं को और सरल एवं विद्यार्थी हितैषी बनाने के निर्देश दिए।

    आपदा प्रभावित विद्यालयों के पुनर्निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 एवं 2025 की प्राकृतिक आपदाओं से क्षतिग्रस्त विद्यालयों के पुनर्स्थापन के लिए लोक निर्माण विभाग तथा हिमुडा को 19 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। कुल 101 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्राप्त हुई है, जबकि 80 करोड़ रुपये की राशि अभी प्राप्त होनी शेष है। शिक्षा मंत्री ने आवश्यक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर पुर्नस्थापन कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। शिक्षा मंत्री ने गैर-कार्यशील केंद्रीय विद्यालयों को शीघ्र संचालित करने, विद्यालयों के लिए समयबद्ध मौसम परामर्श प्रणाली विकसित करने तथा भारत सरकार के शिक्षक पुरस्कार-2026 के प्रति अधिकाधिक शिक्षकों को जागरूक करने के भी निर्देश दिए, ताकि प्रदेश से अधिक संख्या में नामांकन सुनिश्चित हो सकें।

    उन्होंने नए खोले गए शिक्षण और खेल विद्यालयों को शीघ्र शुरू करने तथा प्रस्तावित एआई विश्वविद्यालय की स्थापना, प्रवासियों के स्कूल नहीं जा रहे बच्चों की पहचान एवं उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों की भी समीक्षा की। इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर की तर्ज पर व्हाट्सएप एवं गूगल मीट के माध्यम से ऑनलाइन निरीक्षण व्यवस्था अपनाने पर बल दिया, ताकि निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी बने, प्रशासनिक दक्षता बढ़े और अनावश्यक विलंब को कम किया जा सके। शिक्षा सचिव राकेश कंवर, समग्र शिक्षा के परियोजना निदेशक राजेश शर्मा, स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह तथा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

  • मुख्यमंत्री ने कहा वीबी-जी-राम-जी योजना हिमाचल के हित में नहीं, केंद्र से उठाएंगे मामला

    मुख्यमंत्री ने कहा वीबी-जी-राम-जी योजना हिमाचल के हित में नहीं, केंद्र से उठाएंगे मामला

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण हिमाचल के समग्र विकास में इस विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। मुख्यमंत्री ने आज यहां विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि विभाग में खाली पड़े पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है ताकि प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक प्रभावी बन सके। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में नई भर्तियां की जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को बंद कर उसकी जगह ‘वीबी-जी-राम-जी योजना’ लागू करना हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है।

    उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत केंद्र सरकार 100 प्रतिशत धनराशि उपलब्ध करवाती थी, जबकि नई योजना में कुल खर्च का 10 प्रतिशत राज्य सरकार को वहन करना होगा। इससे राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, इसलिए इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में निर्माणाधीन पंचायत घरों को पूरा करने के लिए सरकार 30 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाएगी। ऊना में बन रहे जिला पंचायत संसाधन केंद्र के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए भी अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए हैं। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को आजीविका मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक 310 स्वयं सहायता समूहों को 65.56 लाख रुपये की ऋण सहायता प्रदान की जा चुकी है।

    स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों के बेहतर विपणन के लिए शिमला में ‘हिमाचल हाट’ का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा पंडोह और कुल्लू में भी शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि धर्मशाला में ऐसा शोरूम पहले से संचालित है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के उद्योग को बढ़ावा देने के लिए उन्हें फूड वैन भी उपलब्ध करवाई गई हैं और भविष्य में ऐसी और वैन भी प्रदान की जाएंगी।
    मुख्यमंत्री ने विभाग की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं का तेजी से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए ताकि पात्र लोगों को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव को विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं को मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जोड़ने के निर्देश भी दिए, ताकि उनकी ऑनलाइन निगरानी प्रभावी ढंग से की जा सके। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, सचिव सी. पालरासु, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

     

  • रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए एचपीएमसी ने कांच की बोतलों की बायबैक योजना शुरू की

    रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए एचपीएमसी ने कांच की बोतलों की बायबैक योजना शुरू की

    शिमला : पर्यावरण संरक्षण और सतत कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण पहल करते हुए, हिमाचल प्रदेश बागवानी उपज विपणन एवं प्रसंस्करण निगम (एचपीएमसी) ने इस्तेमाल की गई और खाली कांच की बोतलों की रीसाइक्लिंग के लिए बायबैक योजना की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) को लागू किया है। इस पहल का उद्देश्य उपभोक्ताओं, खुदरा विक्रेताओं (रिटेलर्स) और वितरकों (डिस्ट्रीब्यूटर्स) को एचपीएमसी की खाली कांच की बोतलों की वापसी के लिए प्रोत्साहित करना है। इससे न केवल कांच के कचरे का सही तरीके से निपटान होगा, बल्कि योजना से जुड़े सभी लोगों को आर्थिक प्रोत्साहन भी मिलेगा।

    योजना के तहत, उपभोक्ता को अधिकृत रिटेलर के पास 200 मिलीलीटर की प्रत्येक खाली बोतल जमा करवाने पर एक रुपये और 600 मिलीलीटर की प्रत्येक बोतल पर दो रुपये मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, संग्रहण के अलग-अलग चरणों के अनुसार रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स को प्रति बोतल चार रुपये तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा। एचपीएमसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, खाली बोतलों को पहले रिटेलर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और एचपीएमसी के कार्यालयों के माध्यम से इकठ्ठा किया जाएगा। इसके बाद उन्हें छंटाई और रीसाइक्लिंग के लिए जरोल स्थित एचपीएमसी के फल प्रसंस्करण संयंत्र भेजा जाएगा। बोतलों के संग्रह और परिवहन को सुचारु बनाने के लिए एक विशेष व्यवस्था भी बनाई गई है। एचपीएमसी ने उपभोक्ताओं, रिटेलर्स और डिस्ट्रीब्यूटर्स से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने और हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ एवं हरित बनाए रखने में सहयोग देने की अपील की है। निगम का मानना है कि यह योजना कांच के कचरे को कम करने, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने और सभी हितधारकों के लिए लाभकारी एवं सतत व्यवस्था स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

     

  • पीएमएवाई-जी के तहत आवास प्लस प्राथमिकता सूची के पारदर्शी निर्धारण के लिए पोस्ट-डिलीशन मॉड्यूल आरम्भ

    पीएमएवाई-जी के तहत आवास प्लस प्राथमिकता सूची के पारदर्शी निर्धारण के लिए पोस्ट-डिलीशन मॉड्यूल आरम्भ

    शिमला : केन्द्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार हिमाचल प्रदेश ग्रामीण विकास विभाग के निदेशालय द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के अंतर्गत स्थाई प्रतीक्षा सूची (परमानेंट वेट लिस्ट) को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित तरीके से अंतिम रूप प्रदान करने के लिए आवास प्लस सिस्टम में पोस्ट-डिलीशन मॉड्यूल आरम्भ किया गया है। विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि विलोपन प्रक्रिया (डिलीशन प्रक्रिया) पूर्ण होने के उपरांत यह मॉड्यूल ग्राम सभाओं को सिस्टम द्वारा तैयार प्राथमिकता सूची की समीक्षा करने, लाभार्थियों के विवरण को सत्यापित करने और निर्धारित पात्रता एवं प्राथमिकता मापदंडों के आधार पर आवश्यक संशोधनों की सिफारिश करने की सुविधा प्रदान करता है। पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए किए गए प्रत्येक संशोधन का कारण प्रणाली में दर्ज करवाना अनिवार्य होगा।

    उन्होंने बताया कि इस मॉड्यूल में ग्राम सभा की जियो-टैग्ड एवं समयांकित फोटो अपलोड, कार्यवाही का स्वतः तैयार प्रारूप, पंचायती राज संस्थाओं के हस्ताक्षर एवं मुहर तथा दस्तावेजों का एआई आधारित सत्यापन जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं। उन्होंने बताया कि ग्राम सभा द्वारा अनुमोदित सूची में शामिल न किए गए पात्र परिवार निर्धारित प्रावधानों के अनुसार जिला स्तरीय अपीलीय समिति के समक्ष अपील प्रस्तुत कर सकेंगे। सभी अपीलों के निस्तारण के उपरांत अंतिम स्थायी प्रतीक्षा सूची के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत आवासों की स्वीकृति प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास निदेशालय ने सभी उपायुक्तों, जिला विकास अधिकारियों, खण्ड विकास अधिकारियों तथा पंचायती राज संस्थाओं से निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करते हुए इस कार्य को समयबद्ध 10 जुलाई 2026 तक पारदर्शी ढंग से पूर्ण करने का आग्रह किया है।

  • एचपीपीटीसीएल ने सुख आश्रय कोष में 95 लाख रुपये का चेक भेंट किया

    एचपीपीटीसीएल ने सुख आश्रय कोष में 95 लाख रुपये का चेक भेंट किया

    शिमला : मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने आज यहां हिमाचल प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीपीटीसीएल) की ओर से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व पहल के अंतर्गत मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को सुख आश्रय कोष के लिए 95 लाख रुपये का चेक भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इस सराहनीय कार्य के लिए कॉर्पोरेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के योगदान से सुख आश्रय योजना के अंतर्गत आने वाले बच्चों एवं अन्य लाभार्थियों के कल्याण, देखभाल और सहयोग को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, सचिव (विद्युत) राकेश कंवर, एचपीपीटीसीएल के प्रबंध निदेशक आबिद हुसैन सादिक तथा उप महाप्रबंधक (वित्त एवं लेखा) एचपीपीटीसीएल अनिल कुमार शर्मा भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

  • भारी बारिश से निपटने के लिए लगभग 15,500 कर्मचारी एवं 1156 मशीनरी तैनातः विक्रमादित्य सिंह

    भारी बारिश से निपटने के लिए लगभग 15,500 कर्मचारी एवं 1156 मशीनरी तैनातः विक्रमादित्य सिंह

     शिमला : लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आज यहां मॉनसून सीजन के दौरान प्रदेश के समक्ष संभावित चुनौतियों तथा इनसे निपटने के लिए विभागीय तैयारियों सहित अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर आयोजित लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में पिछले तीन वर्षों में भारी बरसात के दौरान प्रदेश को हुई जान-माल की क्षति को ध्यान में रखते हुए और इन अनुभवों से सीख लेते हुए इस वर्ष मॉनसून से जुड़ी तैयारियों, सड़कों के रख-रखाव और अग्रिम निवारक उपायों पर ध्यान केन्द्रित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

    विक्रमादित्य सिंह ने विभागीय अधिकारियों को किसी भी आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में विभाग में 11,137 बेलदार और 4,228 मल्टी टास्क वर्कर कार्यरत हैं, जो प्रदेश भर में किसी भी स्थान पर सम्पर्क सुविधा बाधित होने पर हर परिस्थिति में उसे त्वरित बहाल करने में पूर्ण रूप से सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेशभर में 1,156 विभागीय एवं निजी मशीनरी तैनात है, जो आवश्यकता पड़ने पर कहीं भी सड़क बहाली कार्य के लिए प्रतिदिन चौबीस घंटे उपलब्ध रहंेगी। इनमें जेसीबी, डोजर, रोबोट और टिप्पर आदि मशीनरी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन परिस्थिति से निपटने के लिए छः बेली ब्रिज भी उपलब्ध हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण स्थलों पर आवश्यक मशीनरी, बेली ब्रिज एवं आवश्यक निर्माण सामग्री की तैनाती सुनिश्चित की जाए।

    लोक निर्माण मंत्री ने अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त निजी मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम टेंडर की व्यवस्था के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बरसात शुरू होने से पूर्व लोक निर्माण विभाग द्वारा भारी बारिश से होने वाले नुकसान की सम्भावनाओं को कम करने के उद्देश्य से 155.95 किलोमीटर सड़कों पर नई परत बिछाने, 924.94 किलोमीटर सड़कों पर पैच वर्क, 8,893.58 किलोमीटर सड़कों के ड्रेनेज चैनल की सफाई और 9,414 किलोमीटर लम्बी सड़कों के कलवर्ट की सफाई का कार्य सम्पन्न किया जा चुका है। उन्होंने निर्देश दिए कि बरसात के दौरान भी नियमित अंतराल में ड्रेनेज और कलवर्ट की सफाई की जाए ताकि इनके भरने से होने वाले नुकसान से बचा जा सके।

    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महत्वपूर्ण संस्थान जैसे अस्पताल, पुलिस स्टेशन, शिक्षण संस्थान, अग्निशमन केन्द्र, पंपिंग स्टेशन, विद्युत केन्द्र आदि संस्थानों के लिए निर्बाध सम्पर्क सुविधा सुनिश्चित करने पर विशेष रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में पड़ने वाली संवेदनशील सड़कों एवं पुलों की सूची तैयार कर उनका आकलन करने तथा भू-स्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थलों की पहचान कर इनकी निगरानी के भी निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिए कि बरसात के दौरान भू-स्खलन, बादल फटने एवं बाढ़ जैसी संभावित घटनाओं से होने वाले नुकसान को राजस्व अधिकारियों के साथ साझा किया जाए तथा उन्हें इस नुकसान से संबंधित फोटो एवं वीडियो भी प्रदान की जाए। उन्होंने अधिकारियों को मॉनसून के दौरान 24ग7 नियंत्रण कक्ष स्थापित करने के निर्देश भी दिए।