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  • बाजारों को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार का अभियान, व्यापारियों से सहयोग की अपील

    बाजारों को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार का अभियान, व्यापारियों से सहयोग की अपील

    चंडीगढ़- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए प्रदेश के खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने आज पलवल स्थित अनाज मंडी में आयोजित स्वच्छता अभियान के अंतर्गत कूड़ेदान वितरण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर लगभग 250 कूड़ेदान वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य बाजार क्षेत्र को स्वच्छ, व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है।

    खेल राज्य मंत्री गौरव गौतम ने अनाज मंडी के दुकानदारों और आढ़तियों को कूड़ेदान वितरित करते हुए उन्हें स्वच्छता के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सरकार की जिम्मेदारी के साथ-साथ समाज के हर नागरिक का भी नैतिक कर्तव्य है। यदि सभी लोग मिलकर अपने आसपास सफाई बनाए रखने का संकल्प लें, तो शहरों और बाजारों को स्वच्छ और सुंदर बनाया जा सकता है।अनाज मंडी और सब्जी मंडी किसी भी शहर की आर्थिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र होती हैं। यहां रोजाना हजारों लोग खरीदारी के लिए आते हैं, इसलिए इन स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखना बेहद जरूरी है। उन्होंने व्यापारियों से अपील की कि वे कचरा इधर-उधर फेंकने के बजाय कूड़ेदान में डालें और अपने ग्राहकों को भी स्वच्छता के प्रति प्रेरित करें।

    खेल राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्र और हरियाणा सरकार प्रदेश में स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। नगर निकायों के माध्यम से बाजारों, सार्वजनिक स्थलों और आवासीय क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने के लिए समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्वच्छ वातावरण न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है, बल्कि इससे शहर की छवि भी बेहतर बनती है। स्वच्छ और व्यवस्थित बाजारों में लोगों का विश्वास बढ़ता है और व्यापार को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि यदि मंडी के सभी व्यापारी और कर्मचारी मिलकर सफाई का ध्यान रखें, तो यह स्थान पूरे जिले के लिए एक आदर्श उदाहरण बन सकता है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे अपने घर, बाजार और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने में सक्रिय भूमिका निभाएं, ताकि पलवल को स्वच्छ और सुंदर शहर बनाया जा सके। इस मौके पर एसडीएम ज्योति, डीएमसी मनीषा शर्मा व अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

     
  • HCS अधिकारियों की APAR अब ऑनलाइन होगी दर्ज, सरकार ने विभाग को दिए निर्देश

    HCS अधिकारियों की APAR अब ऑनलाइन होगी दर्ज, सरकार ने विभाग को दिए निर्देश

    चंडीगढ़- हरियाणा सरकार ने सभी विभागों को हरियाणा सिविल सेवा (कार्यकारी शाखा) के अधिकारियों की वर्ष 2025–26 की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (पीएआर) राज्य के इंट्रानेट पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी द्वारा इस संबंध में जारी एक पत्र के अनुसार एचसीएस अधिकारियों की पीएआर वेबसाइट http://intrahry.gov.in पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी और इसे 31 दिसंबर, 2026 तक अंतिम रूप देना अनिवार्य होगा।

    सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, उपायुक्तों तथा बोर्डों और निगमों के प्रमुखों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। पत्र के अनुसार, अधिकारी एचआरएमएस पोर्टल पर उपलब्ध अपने पेयी कोड और पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे। सत्यापन के लिए पंजीकृत मोबाइल नंबर पर वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (डीएससी) अथवा स्कैन किए गए हस्ताक्षर अपलोड कर भी प्रमाणीकरण किया जा सकेगा।

    अधिकारियों को 31 मई तक अपना स्व-मूल्यांकन प्रस्तुत करना होगा। रिपोर्टिंग प्राधिकारी को 31 जुलाई तक मूल्यांकन पूरा करना होगा। रिव्यूइंग प्राधिकारी को 30 सितंबर तक समीक्षा करनी होगी, जबकि स्वीकार करने वाले प्राधिकारी द्वारा 31 दिसंबर, 2026 तक रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा। 40 वर्ष से अधिक आयु के एचसीएस अधिकारियों के लिए स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है और स्व-मूल्यांकन के साथ मेडिकल रिपोर्ट का सारांश भी अपलोड करना होगा। पत्र के अनुसार कार्य निष्पादन का मूल्यांकन 1 से 10 के पैमाने पर संख्यात्मक ग्रेडिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। इसमें कार्य निष्पादन, व्यक्तिगत गुणों तथा कार्यात्मक दक्षताओं को शामिल किया जाएगा। ऑनलाइन प्रणाली में यह व्यवस्था भी की गई है कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित प्राधिकारी द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती है तो रिपोर्ट स्वतः अगले स्तर पर अग्रेषित हो जाएगी, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके।

  • हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, 100 स्वास्थ्य संस्थानों में 24 घंटे मिलेंगी आपातकालीन सेवाएं

    हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, 100 स्वास्थ्य संस्थानों में 24 घंटे मिलेंगी आपातकालीन सेवाएं

    चंडीगढ़ – हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि राज्य सरकार ने नेशनल हेल्थ मिशन  (एनएचएम) के तहत प्रदेश में द्वितीयक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 100 स्वास्थ्य संस्थानों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में नामित किया है। इस पहल का उद्देश्य विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर मामलों में मरीजों को त्वरित उपचार मिल सके। उन्होंने बताया कि इन एफआरयू को 24 घंटे आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इन केंद्रों पर प्रसूति सेवाएं, नवजात शिशु देखभाल तथा रक्त भंडारण जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इससे माताओं और नवजात शिशुओं से जुड़ी आपात स्थितियों में तुरंत और प्रभावी चिकित्सा सहायता मिल सकेगी।

    स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ये फर्स्ट रेफरल यूनिट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और तृतीयक अस्पतालों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करेंगी। सरकार द्वारा इन केंद्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, विशेषज्ञ चिकित्सा स्टाफ की तैनाती करने और रेफरल व्यवस्था को तेज व प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार का लक्ष्य हरियाणा में मातृ और नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाना है। इन एफआरयू के सुदृढ़ होने से गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा, जिससे पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में सुधार होगा।

    प्रदेश में जिन 100 स्वास्थ्य संस्थानों को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) के रूप में नामित किया है उनमें अंबाला जिला के 5 संस्थान हैं। इनके अलावा, भिवानी के 4, चरखी दादरी के 2, फरीदाबाद के 5, फतेहाबाद के भी 5, गुरुग्राम के 4, हिसार के 5, झज्जर के 6, जींद के 6, कैथल के 4, करनाल के 6, कुरुक्षेत्र के 5, महेंद्रगढ़ के 4, नूंह के 5, पलवल के 4, पंचकूला के 4, पानीपत के 4, रेवाड़ी के 4, रोहतक के 4, सिरसा के 5, सोनीपत के 5 तथा यमुनानगर जिला के 4 सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों को एफआरयू के तौर पर नामित किया गया है।

     
  • पेट्रोल, डीज़ल एवं घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य

    पेट्रोल, डीज़ल एवं घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य

    हरियाणा:  मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में आज खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में वर्तमान में मिडिल ईस्ट में उत्पन्न युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण एलपीजी गैस की आपूर्ति बाधित होने संबंधी फैल रही अफवाहों की स्थिति पर चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजा शेखर वुंडरू, महानिदेशक  अंशज सिंह तथा ऑयल कंपनियों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक के दौरान अधिकारियों ने अवगत करवाया कि भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा 9 मार्च को जारी एक आदेश में प्राथमिक क्षेत्रों के लिए घरेलू एलपीजी की आपूर्ति तथा उसके समुचित एवं समान वितरण एवं उपलब्धता सुनिश्चित करने के सम्बन्ध में आवश्यक दिशा – निर्देश जारी किये गए हैं।

    ऑयल कंपनियों के अधिकारियों द्वारा बताया गया कि वर्तमान में पेट्रोल, डीज़ल एवं घरेलू एलपीजी गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सामान्य है तथा ऑयल कंपनियों के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त गैस की आपूर्ति निरंतर रूप से प्राप्त हो रही है। हालाँकि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में अस्थाई रूप से बाधा आ रही है। कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में प्राथमिकता शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों को दी जा रही है और शेष आपूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए ऑयल कंपनियां लगातार प्रयास कर रही हैं।

    सरकार द्वारा यह भी सुनिश्चित किया गया है कि घरेलू एलपीजी गैस की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे तथा किसी भी प्रकार की चोरी या कालाबाज़ारी पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य के सभी उपायुक्तों, पुलिस अधीक्षकों और जिला खाद्य एवं आपूर्ति तथा पूर्ती नियंत्रकों को आवश्यक दिशा – निर्देश जारी कर दिए गए हैं। राज्य सरकार ने आमजन से अपील की है कि एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें तथा किसी भी प्रकार की अनावश्यक घबराहट एवं भण्डारण से बचें क्यूंकि राज्य में आवश्यक पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी है।

  • नवाचार और प्रौद्योगिकी में हरियाणा-कनाडा साझेदारी की अपार संभावनाएं: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

    नवाचार और प्रौद्योगिकी में हरियाणा-कनाडा साझेदारी की अपार संभावनाएं: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

     हरियाणा: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को अपने आवास संत कबीर कुटीर पर इंडो-कनाडा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष प्रशांत श्रीवास्तव के नेतृत्व में आए एक प्रतिनिधिमंडल के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कनाडा के साथ बढ़ते सहयोग को एक महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में वे देश और क्षेत्र तेजी से प्रगति कर रहे हैं, जो ज्ञान, नवाचार और प्रौद्योगिकी पर आधारित साझेदारियां स्थापित कर रहे हैं।

    हरियाणा और कनाडा कई ऐसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं, जिनसे साझा प्रगति और सतत विकास का एक मजबूत मॉडल तैयार किया जा सकता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और स्मार्ट गवर्नेंस में संभावित सहयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार प्रशासन को अधिक पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए डिजिटल और एआई आधारित समाधानों को बढ़ावा दे रही है।

    कृषि और एग्री-टेक के संदर्भ में  प्रिसिजन फार्मिंग, पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट, फूड प्रोसेसिंग और कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सहयोग से हरियाणा के किसानों की उत्पादकता और आय दोनों को बढ़ाने में मदद मिल सकती है। स्टार्टअप, नवाचार और तकनीकी उद्यमिता भी परस्पर सहयोग के लिए एक बड़ा क्षेत्र है। हरियाणा निरंतर नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर है और कनाडा का वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित टेक स्टार्टअप इकोसिस्टम राज्य के प्रयासों को और मजबूती प्रदान कर सकता है।

    मुख्यमंत्री ने पर्यटन क्षेत्र में भी व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यटन प्रबंधन के क्षेत्र में कनाडा का अनुभव हरियाणा के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि यह पहल हरियाणा और कनाडा के बीच दीर्घकालिक और संस्थागत सहयोग की मजबूत आधारशिला बन सकती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को श्रीमद्भगवद्गीता की एक प्रति भी भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को कनाडा आने का निमंत्रण दिया, ताकि सहयोग को और आगे बढ़ाया जा सके तथा भारत–कनाडा साझेदारी को सुदृढ़ किया जा सके।

     
  • पंचकूला सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा, डॉक्टरों को दिए सख्त निर्देश

    पंचकूला सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा, डॉक्टरों को दिए सख्त निर्देश

    चंडीगढ़— हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री Aarti Singh Rao ने बुधवार को सेक्टर-6 स्थित Civil Hospital Panchkula का औचक निरीक्षण किया और विभिन्न वार्डों का दौरा कर स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने इमरजेंसी, लेबर रूम, एनआईसीयू, ओपीडी, आईसीयू, ईएनटी और ऑर्थोपेडिक विभाग सहित कई वार्डों का निरीक्षण किया तथा मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत कर इलाज, दवाइयों और अन्य सुविधाओं के बारे में फीडबैक लिया। अधिकांश मरीजों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार और सेवाओं को लेकर संतोष व्यक्त किया। मंत्री ने प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत संचालित जनऔषधि केंद्र का भी निरीक्षण किया और दवाइयों की उपलब्धता की जांच के निर्देश दिए।

    निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल की सफाई व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन को लेकर संतुष्ट नजर नहीं आईं। उन्होंने पाया कि अस्पताल में 16-17 सफाई कर्मचारी तैनात होने के बावजूद उनकी ड्यूटी और कार्यस्थल का स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इस पर उन्होंने अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए और कहा कि भविष्य में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए इसे पीपीपी मोड पर देने पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने सिविल सर्जन को निर्देश दिए कि गर्मियों को देखते हुए अस्पताल में एयर कंडीशनिंग व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

    स्वास्थ्य मंत्री ने महिला वार्ड की सुरक्षा व्यवस्था का भी विशेष रूप से निरीक्षण किया और जरूरत के अनुसार अतिरिक्त सुरक्षा कर्मियों की नियुक्ति के निर्देश दिए। उन्होंने नर्सरी वार्ड का भी दौरा किया और नवजात शिशुओं की देखभाल की व्यवस्था का जायजा लिया। कुछ मरीजों द्वारा बाहर की दवाइयां लिखे जाने की शिकायत मिलने पर उन्होंने तुरंत तीन डॉक्टरों को तलब किया और स्पष्ट किया कि बिना उचित कारण मरीजों को बाहर से दवा लिखना स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini के निर्देशानुसार सरकारी अस्पतालों में साफ-सफाई, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

  • हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में कृषि मेला 23 व 24 मार्च को

    हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में कृषि मेला 23 व 24 मार्च को

    चंडीगढ़– चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में किसानों को खरीफ फसलों की उन्नत तकनीकों से अवगत कराने के उद्देश्य से 23 व 24 मार्च को दो दिवसीय कृषि मेला खरीफ का आयोजन किया जाएगा। मेले में प्रदेशभर के किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, कृषि उद्यमियों, विभिन्न विभागों और संस्थाओं की भागीदारी रहेगी।

    विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि इस कृषि मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों को खरीफ फसलों की नवीनतम किस्मों, उन्नत कृषि तकनीकों, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण तथा कृषि यंत्रीकरण से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराना है। मेले के दौरान विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक किसानों को धान, कपास, बाजरा, दलहन एवं तिलहन फसलों की उन्नत किस्मों और वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। मेले में किसानों के लिए फसल उत्पादन तकनीक, कीट एवं रोग प्रबंधन, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य, कृषि यंत्रीकरण, बागवानी, पशुपालन तथा मधुमक्खी पालन से संबंधित विभिन्न प्रकार की प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों, जैविक उत्पादों तथा कृषि आधारित उद्योगों की भी प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी।

  • हरियाणा में 250 पीएम श्री स्कूलों का चयन, शिक्षा व्यवस्था होगी मजबूत

    हरियाणा में 250 पीएम श्री स्कूलों का चयन, शिक्षा व्यवस्था होगी मजबूत

    चंडीगढ़ — हरियाणा में स्कूली शिक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रत्येक पीएम श्री स्कूल को बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दो वर्षों तक 2 करोड़ रुपये की राशि दी जाएगी। यह राशि केंद्र सरकार द्वारा प्रदान की जाएगी, जिसमें 21 प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है, ताकि सरकारी स्कूलों को आधुनिक शिक्षा केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सके। मुख्य सचिव Anurag Rastogi ने पीएम श्री योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि स्कूलों की बुनियादी और शैक्षणिक जरूरतों का आकलन करने तथा कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उपायुक्त और अतिरिक्त उपायुक्तों की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियां गठित की जाएं।

    उन्होंने निर्देश दिया कि ये समितियां अपने-अपने क्षेत्र के स्कूलों का दौरा कर बुनियादी ढांचे और शैक्षणिक जरूरतों का आकलन करें तथा प्राथमिकता वाले कार्यों की पहचान करें, ताकि उपलब्ध राशि का सही ढंग से उपयोग किया जा सके। मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि इन स्कूलों में सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए और जिलों में तैनात एचसीएस अधिकारी कम से कम एक पीएम श्री स्कूल को गोद लेकर उनके मार्गदर्शन और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएं। उन्होंने बताया कि सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले तीन पीएम श्री स्कूलों और तीन मॉडल संस्कृति स्कूलों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा।

    गौरतलब है कि राज्य में विभिन्न चरणों के तहत कुल 250 पीएम श्री स्कूलों का चयन किया गया है और 143 विकास खंडों में से 137 को इस योजना के अंतर्गत कवर किया जा चुका है। वर्ष 2025-26 के लिए योजना का स्वीकृत बजट 191.69 करोड़ रुपये है, जिसमें से 95.87 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है और 29.78 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। इन विद्यालयों को ग्रीन स्कूल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिनमें सौर ऊर्जा संयंत्र, एलईडी लाइटिंग, जल संरक्षण प्रणाली, पोषण वाटिका, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और प्लास्टिक मुक्त परिसर जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, साथ ही स्मार्ट कक्षाएं और डिजिटल शिक्षण उपकरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को आधुनिक और कौशल आधारित शिक्षा प्रदान की जाएगी।

  • स्वर्णिम व विकसित बंगाल के लिए जनता तैयार, परिवर्तन की राह पर बढ़ रहा राज्य: मुख्यमंत्री नायब सैनी

    स्वर्णिम व विकसित बंगाल के लिए जनता तैयार, परिवर्तन की राह पर बढ़ रहा राज्य: मुख्यमंत्री नायब सैनी

    हरियाणा:  मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्वर्णिम और विकसित बंगाल बनाने के लिए जनता परिवर्तन संकल्प को मजबूत करने का कार्य करेगी। उन्होंने पारदर्शी शासन, जनकल्याणकारी योजनाओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास आधारित राजनीति के महत्व पर बल दिया। मुख्यमंत्री मंगलवार को बंगाल के 24 परगना के कुल्पी में परिवर्तन यात्रा के दौरान आयोजित जनसभा को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों का धन्यवाद किया और विश्वास जताया कि देश में विकास और परिवर्तन की भावना लगातार मजबूत हो रही है।  हरियाणा की भूमि से बंगाल के लोगों के बीच आने का मौका मिला है जिस भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने गीता का संदेश दिया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल मछली पालक किसानों की धरा है। यहां के लोगों ने इतिहास व संस्कृति को बदलने का कार्य किया। बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की भावना पूरे देश में फैली है। बंगाल की माटी के लोग हमारे लिए गर्व और गौरव हैं। इस धरा ने स्वामी विवेकानन्द, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस, बंकिमचन्द्र चटर्जी जैसे महान सपूत दिए हैं। यहां के रणबांकूरों ने देश की आजादी की लड़ाई को नई दिशा देने का काम किया। उन्होंने कहा कि बंगाल की भूमि ने वंदे मातरण का मंत्र देकर देश में राष्ट्रवाद की ज्योत जलाई जो आज भी जग रही है।

    बंगाल की जनता बदलाव और विकास के साथ-भय, भ्रष्टाचार से चाहती है मुक्ति

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह केवल राजनैतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि बंगाल की लचर पचर, भ्रष्टाचार में फंसी सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए परिवर्ततन की पुकार है। बंगाल की जनता बदलाव और विकास के साथ चलकर भय और भ्रष्टाचार से मुक्ति चाहती है। इसी उत्साह एवं जोश के साथ भारी संख्या में जनसभा में आना इस बात का संकेत है कि बंगाल अब परिवर्तन की राह पर गति से आगे बढ रहा है।

     24 परगना की खास पहचान है कि यहां जनता मेहनती है, समुद्र के किनारे बसे मछुआरे किसान मेहनत से जीवन यापन कर रहे हैं। किसानों को सुविधाएं व बाजार नहीं मिल रही, युवा बेरोजगार हैं और भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण व हिंसा का बोलबाला है। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं व चक्रवात से होने वाले नुकसान की भरपाई भी नहीं की। नाले टूट गए, खेती बह गई, उनका पैसा भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। बंगाल का भ्रष्टाचार किसी से छुपा हुआ नहीं है। सरकार जनता के साथ बहुत अन्याय कर रही है।

    भारत की चतुर्थ आर्थिक शक्ति के रूप में विश्व स्तर पर बढ़ी साख

     सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने का काम कर रही है। जब तक नारी सशक्त नहीं होती तब तक देश पूर्ण रूप से तरक्की नहीं कर सकता। इसलिए सरकार ने तीन लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का निर्णय लिया है। लाडो लक्ष्मी योजना के तहत 2100 रुपए की राशि दी जा रही है। अब तक 5 किस्तों में 750 करोड़ रुपए की राशि महिलाओं को दी जा चुकी है।

     युवाओं के रोजगार और उद्योगों के लिए ऐसी नीतियां बनाई जानी चाहिए, जिसमें उद्योगों को बढ़ावा मिले और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों। उन्होंने कहा कि विकास केंद्रित शासन से उद्योगों का पलायन रुकता है और युवाओं को अपने ही राज्य में बेहतर रोजगार के अवसर मिलते हैं। भ्रष्टाचार मुक्त शासन और पारदर्शिता की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि देश की जनता विकास, सुशासन और जवाबदेही चाहती है। उन्होंने लोगों से विकास और प्रगति की राजनीति का समर्थन करने का आह्वान करते हुए एक मजबूत व समृद्ध बंगाल के निर्माण में योगदान देने की अपील की। कार्यक्रम में पहुँचने पर ग्रामीणों ने फूलों की वर्षा कर मुख्यमंत्री का अभिवादन किया।

  • जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में सतत विकास के लिए उभरती जैव प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

    जे.सी. बोस विश्वविद्यालय में सतत विकास के लिए उभरती जैव प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ

    चंडीगढ़: जे.सी. बोस विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, वाईएमसीए, फरीदाबाद के जीवन विज्ञान विभाग द्वारा “सतत विकास के लिए उभरते जैव प्रौद्योगिकी रुझान” पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी  आज शुरू हुई, जो जलवायु, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता जैसे वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका का पता लगाने के लिए है। कार्यक्रम का कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ। पैनासिया बायोटेक लिमिटेड, नई दिल्ली के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. अमुल्या पांडा उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि रहे।

    राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक प्रो. सचिन तियोटिया ने स्वागत भाषण में विभाग की 2020 में स्थापना के बाद तेजी से प्रगति और जैविक विज्ञानों में नवीन, स्वदेशी समाधानों को बढ़ावा देने के मिशन पर प्रकाश डाला। सत्र की अध्यक्षता करते हुए, जे.सी. बोस विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजीव कुमार ने जैव प्रौद्योगिकी की परिवर्तनकारी क्षमता पर जोर दिया, जो संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायक है। उन्होंने वैश्विक संकटों, जिसमें युद्ध जैसी स्थितियां शामिल हैं, के सामना में जैव प्रौद्योगिकीविदों को नवीकरण के वास्तुकार के रूप में उल्लेखित किया। उन्होंने कहा कि ये व्यवधान आपूर्ति श्रृंखलाओं को तोड़ते हैं, खाद्य एवं ऊर्जा की कमी को गहराते हैं तथा लाखों लोगों के विस्थापन का कारण बनते हैं, जिससे पुनर्बहाली के लिए जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका अहम हो जाती है।

    बाद के सत्र में जलवायु के अनुरूप कृषि और सूक्ष्मजीवी इंजीनियरिंग पर मुख्य व्याख्यान हुए। फरीदाबाद के क्षेत्रीय जैव प्रौद्योगिकी केंद्र से डॉ. रामू एस. वेमन्ना ने “सतत जैव अर्थव्यवस्था के लिए पौधों का पुनःप्रोग्रामिंग: जलवायु-अनुरूप कृषि के लिए जैव प्रौद्योगिकी” पर बात की, जिसमें सूखा-सहिष्णु फसलों पर केंद्रित था। नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कुमार प्रनाव ने “एक्सोपॉलीसैकेराइड-उत्पादक राइजोबैक्टीरिया: फसल के लिए प्रकृति के छिपे इंजीनियर” पर व्याख्यान दिया, जिसमें पर्यावरण-अनुकूल सूक्ष्मजीवी सहायकों की खोज की गई।