मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हरियाणा में इन तीनों आपराधिक कानूनों को पूर्ण रूप से लागू कर दिया है। ऐसे परिवर्तन के दौर में कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि, वे प्रशासनिक प्रणाली का वह स्तंभ हैं, जिनके कंधों पर कानून-व्यवस्था, जन सुरक्षा, शांति और निष्पक्ष न्याय की सीधी जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने कहा कि इस पुस्तक की विशेषता यह है कि यह कानूनों का संकलन मात्र नहीं है। यह एक ऐसा व्यापक मार्गदर्शक है, जो कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की भूमिका से लेकर उनकी शक्तियों, व्यावहारिक प्रक्रियाओं, कानूनी आवश्यकताओं और जमीनी परिस्थितियों में उनके प्रयोग तक, हर पहलू को अत्यंत सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करती है। 10 भागों और 45 अध्यायों में लिखी गई यह पुस्तक अपने आप में एक संपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।
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शब्दों में संवेदना, पन्नों में अनुभव, सीएम नायब सिंह सैनी ने किया महत्वपूर्ण प्रशासनिक पुस्तक का विमोचन
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को ‘हैंडबुक फॉर एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट्स’ का विमोचन किया। यह पुस्तक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी (सेवानिवृत्त) डॉ. के.के. खंडेलवाल और हरियाणा सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव अपूर्व कुमार सिंह द्वारा लिखी गई है। हरियाणा आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन के तत्वाधान में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में आईएएस एसोसिएशन के पदाधिकारी तथा कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। इस मौके पर हरियाणा आईएएस ऑफिसर एसोसिएशन के सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने एसोसिएशन की ओर से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को स्मृति चिन्ह भेंट किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर को राज्य की प्रशासनिक और न्यायिक व्यवस्था के लिए सार्थक बताते हुए कहा कि यह साधारण समारोह नहीं है बल्कि यह विचारों का उत्सव है। जब एक पुस्तक लिखी जाती है तो वह केवल शब्दों का संगम नहीं होता बल्कि वह लेखक की सोच, उसकी साधना और उसकी संवेदनाओं का संगम होता है। पुस्तक केवल लाइब्रेरी की शोभा ही नहीं बनती, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों का एक मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के पवित्र संविधान को मजबूत करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगी। सैनी ने कहा कि आज का यह विमोचन इसलिए भी ऐतिहासिक है, क्योंकि यह पुस्तक ऐसे समय में प्रकाशित हो रही है, जब देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में एक नया अध्याय आरम्भ हुआ है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता – 2023 ने क्रिमिनल प्रोसीजर कोड, 1973 का स्थान लिया है। यह परिवर्तन न्याय प्रक्रिया को तेज, सरल, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में उठाया गया एक निर्णायक कदम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राज्य सरकार ने हरियाणा में इन तीनों आपराधिक कानूनों को पूर्ण रूप से लागू कर दिया है। ऐसे परिवर्तन के दौर में कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की भूमिका और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि, वे प्रशासनिक प्रणाली का वह स्तंभ हैं, जिनके कंधों पर कानून-व्यवस्था, जन सुरक्षा, शांति और निष्पक्ष न्याय की सीधी जिम्मेदारी होती है।
उन्होंने कहा कि इस पुस्तक की विशेषता यह है कि यह कानूनों का संकलन मात्र नहीं है। यह एक ऐसा व्यापक मार्गदर्शक है, जो कार्यकारी मजिस्ट्रेटों की भूमिका से लेकर उनकी शक्तियों, व्यावहारिक प्रक्रियाओं, कानूनी आवश्यकताओं और जमीनी परिस्थितियों में उनके प्रयोग तक, हर पहलू को अत्यंत सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करती है। 10 भागों और 45 अध्यायों में लिखी गई यह पुस्तक अपने आप में एक संपूर्ण संदर्भ ग्रंथ है।
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सरकार का कदम: एचकेआरएन भुगतान प्रक्रिया के लिए एसओपी लागू
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (एचकेआरएन) को समय पर एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित करने तथा वैधानिक दायित्वों, विशेषकर कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के सुचारू और समयबद्ध अनुपालन के लिए एक सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों तथा बोर्डों और निगमों के प्रबंध निदेशकों को जारी एक पत्र में कहा कि इस एसओपी का उद्देश्य एचकेआरएन के माध्यम से तैनात अनुबंध कर्मचारियों के भुगतान तंत्र में एकरूपता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि वैधानिक दायित्व, विशेषकर ईपीएफ अनुपालन केंद्रीयकृत व्यवस्था के तहत सुनिश्चित किए जाएंगे और विभाग सीधे तौर पर पीएफ खातों का संचालन नहीं करेंगे।
एसओपी के अनुसार, भुगतान प्रक्रिया में सभी संबंधित पक्षों की जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित की गई हैं। कार्यालय प्रमुख रिकॉर्ड के सत्यापन और समय पर प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने के लिए उत्तरदायी होंगे, जबकि आहरण एवं संवितरण अधिकारी (डी.डी.ओ.) को केंद्रीय भूमिका प्रदान की गई है। डी.डी.ओ. की जिम्मेदारी होगी कि वे उपस्थिति, तैनाती रिकॉर्ड और बिलों का सत्यापन करें। प्रत्येक माह की 7 तारीख से पहले एचकेआरएन को भुगतान सुनिश्चित करें, एचकेआरएन पोर्टल पर ईपीएफ एवं ईएसआई संबंधित सही विवरण अपलोड करें तथा कर्मचारियों के कार्यमुक्त होने या मातृत्व अवकाश की जानकारी अद्यतन करें।
डी.डी.ओ. यह भी सुनिश्चित करेगा कि यदि ईएसआईसी के अंतर्गत आने वाले किसी भी कर्मचारी के साथ दुर्घटना हो जाती है तो उस स्थिति में 24 घंटे के भीतर एचकेआरएनएल को सूचित किया जाए तथा सभी भुगतान केवल एचकेआरएन के बिलों में दर्शाए गए वीएएन (वर्चुअल अकाउंट नंबर) खाते में ही जमा किए जाएं।
लेखा शाखा भुगतान राशि की जांच कर एचकेआरएन के नामित खाते में भुगतान करेगी, जबकि नोडल अधिकारी मानव संसाधन रिकॉर्ड, किसी तरह के स्पष्टीकरण तथा शिकायत निवारण के मकसद से एचकेआरएन के साथ तालमेल बनाकर रखेंगे। एसओपी में भुगतान की स्पष्ट प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसकी शुरुआत एचकेआरएन से प्राप्त समेकित मासिक बिल से होती है। इस बिल में कर्मचारियों का विवरण, वेतन, वैधानिक अंशदान एवं सेवा शुल्क शामिल हैं। डी.डी.ओ. द्वारा तैनाती, उपस्थिति, स्वीकृत पदों की संख्या तथा गणना की शुद्धता का सत्यापन किए जाने के बाद, निर्धारित सत्यापन प्रपत्र के साथ बिलों को स्वीकृति हेतु कार्यालय प्रमुख को भेजा जाएगा।
स्वीकृति प्राप्त होने के उपरांत स्वीकृति आदेश जारी किया जाएगा तथा भुगतान केवल एचकेआरएन के नामित खाते में ही हस्तांतरित किया जाएगा। विभागों को कर्मचारी भविष्य निधि की राशि सीधे कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में जमा करने से सख्ती से प्रतिबंधित किया गया है। सभी विभागों को मासिक भुगतान रजिस्टर कायम करने तथा लेखा परीक्षा के उद्देश्य से बिलों, उपस्थिति शीट्स, भुगतान प्रमाणों और अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। अनुबंध कर्मचारियों की पीएफ से संबंधित शिकायतें एचकेआरएन के माध्यम से ही भेजी जाएंगी।
एसओपी में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि एचकेआरएन द्वारा समयबद्ध वेतन भुगतान और वैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए, समय पर सत्यापन और भुगतान जारी किया जाना अत्यंत आवश्यक है। बिल में कोई भी विसंगति पाए जाने पर तीन कार्य दिवसों के भीतर एचकेआरएन को सूचित करना अनिवार्य होगा। विभागों, बोर्डों और निगमों को वेतन या पीएफ से संबंधित मामलों में एचकेआरएन के माध्यम से तैनात कर्मियों के साथ किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष अनुबंध करने से भी प्रतिबंधित किया गया है। सभी डीडीओ को इन नई प्रक्रियाओं का तत्काल प्रभाव से सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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हरियाणा की जेलों में शिक्षा और कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा, मुख्य न्यायाधीश करेंगे शुभारंभ
चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, हरियाणा सरकार के साथ मिलकर प्रदेश की विभिन्न जेलों में कौशल विकास केंद्रों, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पाठ्यक्रमों और आईटीआई-स्तरीय व्यावसायिक प्रशिक्षण की शुरुआत करेगा। इसका उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा 6 दिसंबर 2025 को जिला जेल गुरुग्राम में किया जाएगा।
इस अवसर पर भारतीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायमूर्ति शील नागू तथा उच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीश भी मौजूद रहेंगे।
एक सरकारी प्रवक्ता ने बताया कि न्यायमूर्ति कुलदीप तिवारी की अध्यक्षता वाली “विचाराधीन / जेल कैदियों के पुनर्वास एवं कौशल विकास” संबंधी समिति के निरंतर प्रयासों ने इस पहल को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका साझा दृष्टिकोण इस विश्वास को रेखांकित करता है कि जेलों को सुधार, क्षमता निर्माण और मानवीय गरिमा के संस्थानों के रूप में विकसित होना चाहिए।
हरियाणा की जेलों में पॉलिटेक्निक और कौशल विकास कार्यक्रमों का उद्घाटन सुधारात्मक न्याय के प्रति राज्य के दृष्टिकोण में एक क्रांतिकारी बदलाव का प्रतीक है। इस पहल के तहत कैदियों को व्यावसायिक और तकनीकी शिक्षा की एक विस्तृत श्रृंखला तक पहुंच प्राप्त होगी, जिसमें कंप्यूटर ऑपरेटर और प्रोग्रामिंग सहायक, वेल्डर, प्लंबर, ग्रेस मेकर, इलेक्ट्रीशियन, बुडवर्क टेक्नीशियन, सिलाई तकनीक और कॉस्मेटोलॉजी जैसे व्यवसायों में आईटीआई पाठ्यक्रम और कंप्यूटर इंजीनियरिंग में तीन वर्षीय पॉलिटेक्निक डिप्लोमा शामिल है। इस पहल का उद्देश्य कैदियों को वर्तमान उद्योग की मांगों के अनुरूप रोजगारपरक कौशल से परिपूर्ण करना है। इन कार्यक्रमों की न केवल तकनीकी ज्ञान प्रदान करने के लिए बल्कि कैदियों में आत्मविश्वास, अनुशासन और उद्देश्य का संचार करने के लिए भी रूपरेखा तैयार की गयी है।
इस कार्यक्रम का व्यापक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि रिहाई के बाद, कैदियों पर सामाजिक अस्वीकृति या आर्थिक अनिश्चितता का बोझ न पड़े, बल्कि उन्हें सार्थक रोजगार पाने के लिए आवश्यक कौशल और योग्यताएँ प्रदान की जाएं। यह इस सिद्धांत का प्रतीक है कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे उसके पिछले कर्म कुछ भी हों, अपने भीतर सुधार, विकास और पुनः एकीकरण की क्षमता रखता है। इन शैक्षिक और व्यावसायिक हस्तक्षेपों के माध्यम से, कार्यक्रम का उद्देश्य फिर से अपराध करने की दर को घटाना, वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देना और कैदियों को सम्मानपूर्वक जीवन जीने के लिए सशक्त बनाना है।
उन्होंने बताया कि सुधारात्मक परिवर्तन के साथ-साथ, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) ने एक व्यापक नशा विरोधी जागरूकता अभियान की भी संकल्पना की है , जिसका इसी कार्यक्रम के दौरान उद्घाटन किया जाएगा। यह पहल पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश एवं हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (हालसा) की कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति लिसा गिल के मार्गदर्शन और दूरदर्शिता के तहत आकार ले रही है। यह महत्वाकांक्षी एक महीने तक चलने वाला राज्यव्यापी नशा-विरोधी जागरूकता अभियान, पूरे राज्य में युवाओं और उनके परिवारों को प्रभावित करने वाले मादक द्रव्यों के दुरुपयोग के मामलों में खतरनाक वृद्धि को दूर करने के लिए शुरू किया जाएगा। यह अभियान लक्षित सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रभावित व्यक्तियों और उनके परिवारों के बीच निरंतर व्यावहारिक परिवर्तन लाने का प्रयास करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय के सदस्यों को मादक द्रव्यों की लत के स्वास्थ्य संबंधी खतरों, मनोवैज्ञानिक प्रभावों और दीर्घकालिक परिणामों के बारे में शिक्षित करना है। इस अभियान का उद्देश्य स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) के तहत कानूनी प्रावधानों, मादक द्रव्यों की तस्करी और सेवन के गंभीर परिणामों और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए उपलब्ध पुनर्वास सहायता प्रणालियों के बारे में भी जन जागरूकता बढ़ाना भी है। विभिन्न जिलों में समन्वित प्रयासों के माध्यम से, यह पहल शीघ्र पहचान तंत्र को मजबूत करेगी, परामर्श और नशा मुक्ति सेवाओं को बढ़ावा देगी, और मादक द्रव्यों के प्रसार के विरुद्ध सामुदायिक स्तर पर सतर्कता को प्रोत्साहित करेगी।
इस अभियान की व्यापक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग, समाज कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायती राज संस्थाएँ, गैर-सरकारी संगठन, युवा संगठन, स्कूल एवं कॉलेज प्रशासन, पुनर्वास केंद्र और सामुदायिक नेताओं सहित विभिन्न हितधारकों को शामिल किया गया है।
राज्य और जिला स्तर पर सप्ताह-वार कार्य योजना तैयार की गई है, जिसमें जागरूकता रैलियों, नुक्कड़ नाटक, कानूनी साक्षरता कार्यशालाएं, परस्पर संवादात्मक स्कूल सत्र, परामर्श शिविर, सोशल मीडिया पहुँच, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण और कमजोर समुदायों के हितार्थ कार्य शामिल होंगे।
उन्होंने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय और हरियाणा सरकार के मार्गदर्शन में ये कार्यक्रम इस विश्वास की पुष्टि करते हैं कि जब व्यवस्थाएं शिक्षा, पुनर्वास, सहायता और सशक्तिकरण पर केंद्रित हों तथा हरियाणा सरकार ने भी इन पहलों की सफलता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव सहायता और व्यवस्था उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है, तो सार्थक परिवर्तन संभव है। कैदियों के लिए कौशल विकास कार्यक्रमों और राज्यव्यापी नशा विरोधी अभियान का एक साथ शुभारंभ एक सुरक्षित, जागरूक और सहानुभूतिशील समाज के निर्माण के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है। ये हस्तक्षेप सलाखों के पीछे मानवीय गरिमा को मजबूत करते हैं, नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ समुदायों की सुरक्षा करते हैं, तथा अधिक समावेशी और स्वस्थ समाज का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
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दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना: सीएम सैनी ने जारी की दूसरी किस्त, 7 लाख से अधिक बहनों को लाभ
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने आज ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ की दूसरी किस्त जारी की। आज की किश्त जारी होने के साथ ही 7 लाख 1 हजार 965 लाभार्थी बहनों के खातों में लगभग 148 करोड़ रुपये की राशि का लाभ पहुंचा है। मुख्यमंत्री बुधवार को यहां आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर सामाजिक न्याय अधिकारिता अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अंत्योदय (सेवा) मंत्री श्री कृष्ण कुमार बेदी भी उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने निर्णय लिया है कि अब इस योजना का लाभ 3 माह के अंतराल में दिया जाएगा और 3 माह की राशि का एक साथ भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह योजना सिर्फ आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि महिलाओं के सामाजिक सशक्तिकरण और आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में एक मजबूत पहल है।
गत 25 सितंबर को ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी’ ऐप का शुभारंभ पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के 109वें जन्मदिवस के अवसर पर किया था। उसके बाद 1 नवंबर को पात्र महिलाओं को पहली किस्त जारी कर उन्हें लाभ प्रदान किया गया।
इस ऐप पर गत 30 नवंबर तक 9 लाख 592 महिलाओं ने आवेदन किया है। इनमें से 7 लाख 1 हजार 965 महिलाएं पात्र पाई गई हैं। इनमें से 5 लाख 58 हजार 346 महिलाओं ने अपना आधार KYC पूरा कर लिया है। जबकि, 1 लाख 43 हजार 619 महिलाओं का वेरिफिकेशन पेंडिंग है।
जिन महिलाओं का आधार केवाईसी का अंतिम चरण अभी भी बकाया है, उनसे निवेदन है कि वे जल्द से जल्द इसे पूरा कर लें। जैसे ही यह प्रोसेस पूरा होगा, उन्हें भी इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
टेक्नोलॉजी से पारदर्शिता
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का लाभ 23 वर्ष या इससे अधिक आयु की वे सभी महिलाएं ले सकती हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय एक लाख रुपये से कम है। इस योजना का विशेष पहलू यह है कि परिवार की सभी पात्र महिलाएं इस योजना का लाभ ले सकती हैं। इस योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन है। आवेदन ‘लाडो लक्ष्मी मोबाइल ऐप’ के माध्यम से किसी भी स्थान से किसी भी समय सरलता से किया जा सकता है। आवेदन पूरा होते ही 24 से 48 घंटे में सारी वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है और पात्र पाई गई महिलाओं को एसएमएस द्वारा सूचित कर दिया जाता है। इस एसएमएस में उनसे निवेदन किया जाता है कि वे आवेदन के अंतिम चरण में इसी ऐप पर दोबारा जाकर अपना लाइव फोटो खींचकर अपलोड करें। जैसे ही आधार डेटाबेस के माध्यम से ई- केवाईसी हो जाती है, उसके बाद सेवा विभाग इस योजना की आईडी जारी कर देता है। इस योजना के लिए महिलाओं का बहुत अच्छा रिस्पॉन्स आ रहा है और प्रतिदिन औसतन 3 से 4 हजार महिलाओं की ओर से आवेदन किया जा रहा है। हरियाणा सरकार की यह पहल न सिर्फ सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के संकल्प को भी मजबूती देती है।
राज्य सरकार ने जन कल्याण के लिए जो संकल्प किए थे, उसे सरकार लगातार पूरा कर रही है। हर घर – हर गृहिणी योजना के तहत लगभग 15 लाख से ज्यादा महिलाओं को 500 रुपये में गैस सिलेंडर दिया जा रहा है। इसके अलावा किडनी रोगियों को फ्री डायलिसिस की सुविधा प्रदान की गई है। इतना ही नहीं हरियाणा देश का पहला राज्य है जहां किसानों की फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की जा रही है।
इस अवसर पर सामाजिक न्याय अधिकारिता अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अंत्योदय (सेवा) विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुपमा, सूचना जनसंपर्क भाषा एवं संस्कृति विभाग के महानिदेशक के मकरंद पांडुरंग, सेवा विभाग के निदेशक प्रशांत पंवार और सूचना जनसंपर्क भाषा एवं संस्कृति विभाग की अतिरिक्त निदेशक (प्रशासन) वर्षा खांगवाल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने ज्ञान और धर्म का संदेश दिया
चंडीगढ़: भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने आज हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2025 से इतर आयोजित अखिल भारतीय देवस्थानम सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।
इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर बोलते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह “वेदों की भूमि” कुरुक्षेत्र की पावन धरती पर खड़े होकर अत्यंत सम्मानित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह पवित्र स्थान हजारों वर्षों से इस स्थान के रूप में पूजनीय है जहां भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को भगवद् गीता का दिव्य ज्ञान प्रदान किया था। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र हमेशा याद दिलाता है कि धर्म अंततः अधर्म पर विजय प्राप्त करता है, चाहे अधर्म कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो।
उपराष्ट्रपति ने भगवद् गीता को एक धार्मिक ग्रंथ से कहीं अधिक “धार्मिक जीवन, साहसी कार्य और प्रबुद्ध चेतना के लिए एक सार्वभौमिक ग्रंथ” बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि धर्म द्वारा निर्देशित अपने कर्म पर ध्यान केंद्रित करने का भगवान कृष्ण का आह्वान, एक सार्थक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की कुंजी है।
मजबूत चरित्र निर्माण की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि चरित्र, धन या अन्य सांसारिक उपलब्धियों से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गीता मानवता को एक सदाचारी और अनुशासित जीवन जीने का मार्गदर्शन करती है और भगवान कृष्ण की तरह हमें याद दिलाती है कि नैतिक शक्ति उद्देश्य की स्पष्टता और धार्मिकता के प्रति समर्पण से उत्पन्न होती है।
यह आशा व्यक्त करते हुए कि तेजी से बदलते युग में, गीता व्यक्तियों, समाजों और राष्ट्रों को शांति और सद्भाव की दिशा में मार्गदर्शन करती रहेगी, उपराष्ट्रपति ने इसकी स्थायी प्रासंगिकता के महत्व के बारे में बताया।
इस आयोजन के विकास की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि प्रतिवर्ष मनाई जाने वाली गीता जयंती पिछले नौ वर्षों में एक वैश्विक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उत्सव के रूप में विकसित हुई है। उन्होंने महोत्सव को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने और हरियाणा को प्रगति की नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने के लिए हरियाणा सरकार और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को बधाई दी।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव भगवान कृष्ण के दिव्य गुणों, श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षाओं और सनातन धर्म की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सभी उम्र के लोगों के लिए सुलभ तरीके से प्रदर्शित करता है।
उन्होंने महोत्सव की सराहना करते हुए इसे एक ऐसा मंच बताया जो सदियों से भारत को जीवित रखने वाले मूल्यों – धर्म, कर्तव्य, आत्मानुशासन और उत्कृष्टता की खोज को सुदृढ़ करता है। उन्होंने कहा कि ये मूल्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा व्यक्त आत्मनिर्भर भारत और 2047 तक विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण की नींव हैं।
उपराष्ट्रपति ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड और गीता ज्ञान संस्थान द्वारा आयोजित सम्मेलन की भी सराहना की, जिसमें पूरे भारत के संत, विद्वान, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ, कलाकार और सांस्कृतिक नेता एक साथ आए। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन संवाद को गहरा करते हैं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मजबूत करते हैं और युवा मन को भगवद् गीता को एक दूरस्थ ग्रंथ के रूप में नहीं, बल्कि साहस, विनम्रता और ज्ञान के जीवंत मार्गदर्शक के रूप में देखने के लिए प्रेरित करते हैं।
अपने संबोधन को समाप्त करते हुए श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने उपस्थित सभी लोगों से भगवद् गीता की शाश्वत शिक्षाओं को आत्मसात करने, धर्मानुसार कार्य करने, ज्ञान प्राप्त करने, शांति को अपनाने और मानवता के कल्याण में योगदान देने का आग्रह किया। इससे पहले उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कुरूक्षेत्र में मां भद्रकाली शक्तिपीठ मंदिर का दौरा किया और पूजा-अर्चना की।
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स्वयं सहायता समूह आत्मनिर्भर भारत की अग्रदूत, देश की वास्तविक ताकत: सीएम सैनी
चण्डीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश की बहनों ने अपनी मेहनत और हुनर से देशभर में नाम कमाया है। यही आत्मनिर्भर भारत की पहचान है हर घर में हुनर और हर हाथ को काम है। आज हरियाणा के हजारों स्वयं सहायता समूह आत्मनिर्भर भारत के सबसे मजबूत स्तंभ बन चुके हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शनिवार को पंचकूला में स्वयं सहायता समूह सम्मेलन में महिलाओं को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह आत्मनिर्भर भारत के अग्रदूत हैं। आत्मनिर्भर भारत का असली चेहरा हैं। जब किसी गांव की महिला सिलाई मशीन लेकर या कोई युवा बेटी डेयरी या हस्तशिल्प का कार्य शुरू करती है, तो वह सिर्फ अपने परिवार की आजीविका नहीं बनाती, वह समाज का भविष्य गढ़ती है।जैविक खेती व डिजिटल सेवाओं से लेकर छोटे उद्योगों तक में भागीदारी बखूबी निभा रही स्वयं सहायता समूह
नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश सरकार ने अब तक 65 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाया है। इनमें लाखों महिला सदस्य अपनी मेहनत से समाज में सम्मान और पहचान बना रही हैं। सहायता समूहों को बैंक ऋण, प्रशिक्षण, विपणन और ब्रांडिंग की पूरी सुविधा दी है, ताकि वे केवल उत्पादन ही नहीं, बिक्री में भी आत्मनिर्भर बन सकें। प्रदेश की महिलाएं पापड़, अचार, हस्तशिल्प व डेयरी उत्पादों में अपने कौशल का कमाल दिखा रही हैं। साथ ही जैविक खेती और डिजिटल सेवाओं से लेकर छोटे उद्योगों तक में अपनी भागीदारी बखूबी निभा रही हैं। हमारी बहनें अब डिजिटल पेमेंट, ई-कॉमर्स, और ऑनलाइन मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।
प्रदेश के स्वयं सहायता समूहों के काम की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की प्रशंसा
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के काम की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रशंसा की है। उन्होंने 28 जुलाई, 2024 को मन की बात कार्यक्रम में रोहतक जिले के हथकरघा उद्योग का जिक्र किया है। उस उद्योग में लगी बहनों की मेहनत और कौशल की तारीफ की । उसमें हमारे रोहतक जिले की 250 से अधिक महिलाएं ब्लॉक प्रिटिंग एवं रंगाई का काम करती हैं। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर ट्रेनिंग हासिल की है। जिला गुरुग्राम में शंकर की ढाणी गांव में शंकर स्वयं सहायता समूह में 250 बहनें अपना रोजगार चला रही हैं। वे 150 से अधिक घरों से दूध लेकर डेयरी चला रही हैं, मिठाई की दुकान चला रही हैं और मोटे अनाज के लड्डू, खिचड़ी व अन्य उत्पाद भी बनाकर बेचती हैं। इसी प्रकार, गुरुग्राम के गांव चांदू निवासी पूजा शर्मा को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-2022 के अवसर पर देश के राष्ट्रपति द्वारा ‘नारी शक्ति‘ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए पदमा स्कीम के तहत वन ब्लॉक-वन प्रोडक्ट को कर रहे प्रोत्साहित
उन्होंने कहा कि बहनें पशुपालन, बागवानी, मछली पालन, ब्यूटी पार्लर, किराना की दुकानों, कैंटीन आदि के माध्यम से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दे रही हैं। हर क्षेत्र में किसी न किसी उत्पाद की अपनी ही खासियत होती है। हम ऐसे ही उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए पदमा स्कीम के तहत वन ब्लॉक-वन प्रोडक्ट को प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस पहल में स्वयं सहायता समूहों की बहनों का अनुभव और कौशल बड़ा काम आएगा।सूक्ष्म उद्योगों में निवेश की ऊपरी सीमा को बढ़ाया गया
नायब सिंह सैनी ने कहा कि सूक्ष्म उद्योग में निवेश की ऊपरी सीमा 25 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है। इसी प्रकार, लघु औद्योगिक इकाइयों में निवेश की ऊपरी सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये तथा मध्यम इकाई में 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से आग्रह किया कि इस तरह के उद्योग लगाकर भी स्वदेशी को बढ़ावा दें और देश-प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने में और अधिक योगदान करें।
स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार चलाने के लिए दिए कई प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार चलाने के लिए कई प्रोत्साहन दिए हैं। इन्हें रिवोलविंग फण्ड और सामुदायिक निवेश निधि के रूप में सरल ऋण के तौर पर वित्तीय सहायता दी है । अब तक लगभग 548 करोड़ रुपये की विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है। सरकार ने सामुदायिक निवेश निधि की राशि 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख 50 हजार रुपये कर दी है। रिवोलविंग फण्ड की राशि 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये की है। महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक का ऋण लेने पर स्टाम्प शुल्क से छूट भी दी गई है।सहायता समूहों ने आर्थिक मजबूती के साथ आत्मविश्वास, नेतृत्व और उद्यमिता को दी नई दिशा
उन्होंने कहा कि सहायता समूहों ने न केवल आर्थिक मजबूती दी है बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व और उद्यमिता को नई दिशा दी है। गांव-गांव में महिलाओं के प्रति बदलती सोच, घर-घर में बढ़ता सम्मान और समाज में उभरती नई ऊर्जा, यह सब स्व-सहायता समूहों के योगदान का ही परिणाम है। विकसित हरियाणा-विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में समूहों की भूमिका का महत्व बहुत ज्यादा है। आत्मनिर्भर भारत-आत्मनिर्भर हरियाणा के निर्माण में आप जितना ज्यादा और जितना सक्रिय योगदान देंगी, हम अपने लक्ष्य को उतना ही जल्दी प्राप्त कर पाएंगे।हमारी सरकार निरंतर महिलाओं को सशक्त बनाने का कर रही है काम
नायब सिंह सैनी ने कहा कि हमारी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने का निरंतर काम कर रही है। हमारे सरकार ने जो कहा है उसको धरातल पर उतारने का काम किया है। सरकार ने पहले ही बजट में लाडो लक्ष्मी योजना के लिए 5 हजार करोड़ रूपये के बजट का प्रावधान किया। इस योजना में लगातार पंजीकरण हो रहा है जिसकी हमने पहली किस्त भी जारी कर दी है। जिसकी दूसरी किस्त भी जल्द जारी की जाएगी। जिन परिवारों की आय 1 लाख 80 हजार से कम है उन बहनों को 500 रुपये में गैस सिलेंडर दिया है। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बडौली, विधायक शक्ति रानी शर्मा सहित काफी संख्या में स्वयं सहायता समूह उपस्थित रहे। -

हरियाणा की अर्थव्यवस्था को नई गति देगी आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा—सीएम सैनी
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना केवल नारा नहीं, बल्कि 21वीं सदी में भारत को अग्रणी आर्थिक शक्ति बनाने का संकल्प है। मुख्यमंत्री आज पंचकूला में आयोजित आत्मनिर्भर भारत सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन से प्राप्त विचार–मंथन ‘विकसित भारत–विकसित हरियाणा’ के लक्ष्य को नई गति देगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने और 2030 तक पांच ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा है। आत्मनिर्भर भारत का सार है उद्योग, कृषि, शिक्षा, कौशल, तकनीक और व्यापार में स्वावलंबन।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा बताए पाँच स्तंभ इकोनॉमी, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिस्टम, डेमोग्राफी और डिमांड आज राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला हैं। हरियाणा इन सभी स्तंभों को सुदृढ़ करने में प्रमुख भूमिका निभा रहा है। स्वयं प्रधानमंत्री हरियाणा को ‘भारत का ग्रोथ इंजन’ कह चुके हैं।
कृषि क्षेत्र पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हरियाणा ने देश को खाद्यान आत्मनिर्भरता दिलाने में अग्रणी भूमिका निभाई है और राज्य अब विविधीकरण, दलहन–तिलहन उत्पादन को बढ़ावा दे रहा है। उद्योग क्षेत्र में ‘हरियाणा आत्मनिर्भर पोर्टल’ उद्यमियों को योजनाओं का सीधा लाभ उपलब्ध करा रहा है। 12 लाख से अधिक MSME द्वारा 65 लाख से अधिक लोगों को रोजगार दिया है तथा ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सुधारों के अंतर्गत लगभग 400 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।
स्टार्टअप, MSME और इंफ्रास्ट्रक्चर में हरियाणा दे रहा राष्ट्रीय योगदान
उन्होंने कहा कि ‘पदमा कार्यक्रम’ के माध्यम से हर ब्लॉक में क्लस्टर स्तर पर औद्योगिक बुनियादी ढांचा विकसित हो रहा है। 48 विभागों में 1100 से अधिक गैर-जरूरी नियम समाप्त कर उद्योग-सुलभ माहौल तैयार किया गया है। पिछले 11 वर्षों में 7.66 लाख MSME स्थापित हुए हैं, जिनसे 39 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने डेमोग्राफी को महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि हरियाणा का लक्ष्य नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले युवा तैयार करना है। ‘हरियाणा स्टार्टअप नीति–2022’ के बाद राज्य में 9,500 से अधिक स्टार्टअप स्थापित हुए हैं। हाल ही में 22 स्टार्टअप्स को 1.14 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है और 2,000 करोड़ रुपये का ‘फंड ऑफ फंड्स’ स्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि डिमांड–सप्लाई चेन को मजबूत बनाने के लिए हरियाणा अपने NCR क्षेत्र को बड़े लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित कर रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक्सप्रेस–वे, फ्रेट कॉरिडोर, मल्टी–मॉडल लॉजिस्टिक हब, ग्रीनफील्ड परियोजनाएं तथा गुरुग्राम की 1000 एकड़ ‘ग्लोबल सिटी’, IMT सोहना में इलेक्ट्रॉनिक्स क्लस्टर और हिसार–नारनौल के औद्योगिक क्लस्टर तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। HSIIDC द्वारा 10 नए इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप स्थापित करने पर कार्य जारी है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस अवसर पर अधिवक्ताओं और उपस्थित जन–प्रतिनिधियों से यह आह्वान किया कि वे 1 दिसंबर को प्रातः 11 बजे एक साथ एक मिनट का गीता–पाठ कर गीता जयंती के इस पावन पर्व से स्वयं को जोड़ें और समाज में धर्म, कर्तव्य तथा राष्ट्र निर्माण के संदेश का प्रसार करें।
मुख्यमंत्री ने यह उल्लेख भी किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में कर्नाटक के उडुपी दौरे के दौरान कुरुक्षेत्र में निर्मित महाभारत विषयक ‘अनुभव केंद्र’ का विशेष रूप से जिक्र किया है और देशवासियों से अपील की है कि वे अवश्य इस अद्वितीय केंद्र का अवलोकन करें।
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हरियाणा पवेलियन चमका अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में, स्वच्छ मंडप श्रेणी में मिला गोल्ड मेडल
चंडीगढ़: नई दिल्ली के भारत मंडपम में चले अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले-2025 में हरियाणा को स्वच्छ मंडप में गोल्ड मेडल मिला है। व्यापार मेले में अलग-अलग श्रेणियों में मेडल दिए गए थे, इसमें हरियाणा प्रदेश के पवेलियन ने स्वच्छ मंडप में बाजी मारी है। इस संबंध में जानकारी देते हुए मंडप के निदेशक अनिल चौधरी ने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन व मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्य प्रशासक श्यामल मिश्रा, प्रशासक विनय प्रताप सिंह की अगुवाई में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 14 नवंबर से 27 नवंबर तक 14 दिन चले इस 44वें अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में हरियाणा पवेलियन लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पवेलियन में हरियाणवी संस्कृति, निरंतर जारी इनोवेशन और प्रदेश के विकास की झलक देखने को मिल रही थी। मेले के समापन के उपरांत पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया था, इसमें हरियाणा पवेलियन ने स्वच्छ मंडप में गोल्ड मेडल जीता है। उन्होंने इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, मुख्य प्रशासक श्यामल मिश्रा व प्रशासक विनय प्रताप सिंह का धन्यवाद किया।एआई ताऊ ने खींचा सभी का ध्यान
निदेशक अनिल चौधरी ने बताया कि पवेलियन में यूं तो कला व संस्कृति से जुड़ी बहुत से नए प्रयोग किए गए थे लेकिन इस बार एक नया प्रयोग एआई ताऊ का किया गया था। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाए गया ताऊ हंसा-हंसाकर लोगों को हरियाणा सरकार से जुड़ी अलग-अलग योजनाओं की जानकारी देता था। यह पवेलियन में विशेष आकर्षण का केंद्र था। जैसे ही कोई व्यक्ति बटन दबाता था एआई ताऊ खड़ा हो जाता था और हरियाणवी अंदाज में बात करने लगता था।अलग-अलग स्टॉल भी रहे आकर्षण का केंद्र
उन्होंने बताया कि हरियाणा पवेलियन में अलग-अलग स्टॉल लगाए गए थे। इसमें 11 कारीगरों और स्वयं सहायता समूह ने स्टॉल लगाए थे जबकि 22 एमएसएमई ने अपने स्टॉल लगाए थे। ये भी खरीदारों के आकर्षण का केंद्र रहे। हरियाणा पवेलियन एक भारत-श्रेष्ठ भारत के थीम पर बनाया गया था। पवेलियन में सूरजकुंड मेला और गीता जयंती को दर्शाया गया था। लोगों ने पवेलियन में जमकर सेल्फी व फोटो क्लिक की और हरियाणा को जाना। निदेशक अनिल चौधरी ने बताया कि इस बार का मेला बेहद सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। -

श्रमिक कल्याण की ओर कदम: मानेसर में शुरू हुई अटल श्रमिक किसान कैंटीन
चंडीगढ़: हरियाणा स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एचएसआईआईडीसी) ने आईएमटी मानेसर में सेक्टर-4 और सेक्टर-5 स्थित दो अटल श्रमिक किसान कैंटीनों को संचालित कर दिया है। इन कैंटीनों के शुभारंभ के साथ क्षेत्र में श्रमिक कल्याण सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
एचएसआईआईडीसी द्वारा आईएमटी मानेसर में कुल पांच स्थानों की पहचान अटल श्रमिक किसान कैंटीन योजना के तहत की गई है। शेष तीन कैंटीनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिन्हें आने वाले सप्ताहों में शुरू कर दिया जाएगा। इसके बाद औद्योगिक क्षेत्र के अधिकाधिक श्रमिकों को इन सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
इन कैंटीनों का निर्माण उद्योग जगत और प्रमुख औद्योगिक संगठनों के सीएसआर सहयोग से किया जा रहा है, जो श्रमिक कल्याण और सामाजिक उत्थान के प्रति उद्योगों की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कैंटीनों का संचालन स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) द्वारा किया जाएगा। इससे जहां कैंटीनों का कुशल प्रबंधन सुनिश्चित होगा, वहीं स्थानीय महिलाओं और समुदाय के सदस्यों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
हरियाणा सरकार की अटल श्रमिक किसान कैंटीन योजना के तहत श्रमिकों को केवल 10 रुपये की पौष्टिक और स्वच्छ भोजन थाली उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे उद्योग क्षेत्र में किफायती और पौष्टिक भोजन की सुगमता बढ़ेगी।
एचएसआईआईडीसी अपने औद्योगिक परिसरों में श्रमिक-केंद्रित ढाँचे को लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। कैंटीनों का शुभारंभ इस मिशन को और मजबूती प्रदान करता है और औद्योगिक श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
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मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने गुरुग्राम में टेस्ला इंडिया मोटर्स के देश के पहले ऑल-इन-वन केंद्र का उद्घाटन किया
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा सिर्फ एक बाज़ार नहीं है, यह विनिर्माण की महाशक्ति है। यह ऑटोमोबाइल, आई.टी. और अन्य उद्योगों का बड़ा केन्द्र है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें पूर्ण विश्वास है कि टेस्ला भारत में अपना पहला इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण संयंत्र हरियाणा में ही स्थापित करेगा और टेस्ला की अन्य संबंधित इकाइयां भी यहां लगेंगी।
मुख्यमंत्री वीरवार को गुरुग्राम में टेस्ला इंडिया मोटर्स के देश के पहले ऑल इन वन केंद्र का उद्घाटन करने उपरांत उपस्थित जन को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, पटौदी की विधायक श्रीमती बिमला चौधरी, सोहना के विधायक श्री तेजपाल तंवर, गुरुग्राम के विधायक श्री मुकेश शर्मा भी मौजूद रहे।
उद्योगों की ‘कॉस्ट ऑफ डुइंग बिजनेस’ को कम करने के लिए हरियाणा सरकार निरंतर प्रयासरत
मुख्यमंत्री ने टेस्ला इंडिया मोटर्स के केंद्र का उद्घाटन करने उपरांत अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा में उद्योगों की ‘कॉस्ट ऑफ डुइंग बिजनेस’ को कम करने के लिए हरियाणा सरकार निरन्तर प्रयासरत है। इन्हीं प्रयासों के तहत औद्योगिक प्लाटों के लिए विशेष ‘लीजिंग पॉलिसी’ बनाई गई है। इसी क्रम में यहां स्थापित उद्योगों के साथ मिलकर लोकल सप्लाई चेन को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी कंपनियों और विदेशों से प्रभावशाली वार्तालाप के लिए हरियाणा सरकार ने विदेश सहयोग विभाग की स्थापना की है जो विदेशी निवेशकों के साथ लगातार सहयोग स्थापित करने का काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के औद्योगिक विकास को गति देने के लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ का एक ‘इको-सिस्टम’ तैयार किया है, जिसके चलते हरियाणा ईज आफॅ डुईंग बिजनेस की टॉप अचीवर्स केटेगरी में अग्रणी स्थान बना चुका है। उन्होंने कहा कि हरियाणा को अपने आटोमोबाइल सेक्टर पर गर्व है, जो भारत में सबसे अधिक यात्री कारों का निर्माण करता है।
निवेश व उद्योग हितैषी नीतियों के साथ हरियाणा बना आशाओं और अवसरों की धरा, पिछले 11 वर्षों में निर्यात में हुई 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा प्रदेश आज अपनी निवेश व उद्योग हितैषी नीतियों के आधार पर आशाओं और अवसरों की धरा बन गया है। आज प्रदेश की गिनती देश के सम्पन्न राज्यों में होती है। देश की जी.डी.पी. में हरियाणा का योगदान 3.6 प्रतिशत है। वर्ष 2014 से पहले प्रदेश का निर्यात लगभग 70 हजार करोड़ रुपए तक था, जो अब बढ़कर 2 लाख 75 हजार करोड़ रुपये को पार कर गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा उद्योगों को लॉजिस्टिक सुविधा देने में देश में दूसरे तथा उत्तर भारत में पहले स्थान पर है।
अप्रासंगिक हुए कानूनों में बदलाव कर कारोबारियों को दिलाई लालफीताशाही से मुक्ति
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने कारोबारियों को लालफीताशाही से मुक्ति दिलाने की दिशा में कार्य करते हुए उन पुराने कानूनों में बदलाव किया है, जो आज के समय में प्रासंगिक नहीं रह गये थे। उन्होंने कहा कि सरकार ने जन विश्वास अध्यादेश, 2025 को गत 11 अक्तूबर को अधिसूचित किया है, ताकि 42 राज्य अधिनियमों में 164 प्रावधानों का अपराधीकरण समाप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि यह हरियाणा सरकार की नीतियों का ही प्रभाव है कि पिछले 11 वर्षों में प्रदेश में 12 लाख 20 हजार 872 सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग लगे हैं तथा इनमें 49 लाख 15 हजार लोगों को रोजगार मिला है।
हर्ट टू हर्ट मॉडल पर काम कर रहा हरियाणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा गीता की धरती है। यहां केवल बी-टू-बी अथवा जी-टू-जी मॉडल में काम नहीं करते बल्कि एच-टू-एच अर्थात हर्ट टू हर्ट मॉडल के साथ काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा देश की अर्थव्यवस्था में अपना योगदान बढ़ाने के लिए वर्ष 2047 तक एक ट्रिलियन डालर के लक्ष्य को लेकर चल रहा है। नए स्टार्टअप्स, इनोवेशन और टेक बेस्ड इंडस्ट्री को हरियाणा प्रदेश टेस्ला जैसे बड़े ब्रांड के माध्यम से बढ़ावा दे रहा है।
हरियाणा भारत में स्टार्टअप की संख्या में 7वां बड़ा राज्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा भारत में स्टार्टअप की संख्या में 7वें बड़े राज्य के रूप में उभरा है। वर्तमान में, हरियाणा में 9,100 से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स हैं। इसी प्रकार प्रदेश में ए.आई. आधारित स्टार्टअप्स और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए गुरुग्राम और पंचकूला में ए.आई. हब स्थापित किया जा रहा है। साथ की भविष्य की तकनीकों जैसे कि ए.आई., रोबोटिक्स, बायो टेक्नोलॉजी व डीप-टेक को अपनाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में अलग से ‘एम.एस.एम.ई.’ विभाग का गठन किया है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए उद्यमकर्ता ज्ञापन फाइल करने की ऑनलाइन सुविधा शुरू की है।
इस अवसर पर उपायुक्त अजय कुमार, हरियाणा विदेश सहयोग विभाग के सलाहकार पवन चौधरी, टेस्ला की वरिष्ठ निदेशक इसाबेल फैन, भारत में टेस्ला के जीएम शरद अग्रवाल सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।