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हरियाणा में आयुष परियोजनाओं के लिए तय हुई समय सीमा
हिसार का आयुष अस्पताल 15 अगस्त तक और नूंह का यूनानी अस्पताल मार्च 2027 तक होगा शुरू
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने राज्य में आयुष स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपनी प्रमुख आयुष परियोजनाओं के लिए स्पष्ट समयसीमा तय कर दी है। इसके तहत मय्यड़ (हिसार) स्थित राजकीय आयुष अस्पताल का उद्घाटन 15 अगस्त, 2026 तक तथा अकेहड़ा (नूंह) स्थित राजकीय यूनानी महाविद्यालय एवं अस्पताल को मार्च, 2027 तक संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। ये निर्णय स्वास्थ्य एवं आयुष विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में लिए गए। उन्होंने सभी कार्यकारी एजेंसियों को निर्देश दिए कि लंबित कार्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे किए जाएं तथा अस्पतालों को बिना किसी देरी के संचालित किया जाए। बैठक में आयुष विभाग की सभी प्रमुख आधारभूत संरचना परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि भवन निर्माण, चिकित्सा उपकरणों की खरीद तथा मानव संसाधन की नियुक्ति की प्रक्रिया समानांतर रूप से पूरी की जाए, ताकि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद स्वास्थ्य सेवाएं शुरू करने में किसी प्रकार की देरी न हो। मय्यड़ (हिसार) स्थित राजकीय आयुष अस्पताल के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि यहां ओपीडी सेवाएं पहले ही शुरू हो चुकी हैं। इस पर डॉ. मिश्रा ने अग्नि सुरक्षा प्रणाली तथा अन्य वैधानिक व्यवस्थाओं का कार्य शीघ्र पूरा करने, अतिरिक्त मानव संसाधन की तैनाती सुनिश्चित करने और आईपीडी सेवाएं जल्द शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि प्रस्तावित उद्घाटन से पहले यह संस्थान पूर्ण रूप से आयुष अस्पताल के रूप में कार्य करने लगे। अकेहड़ा (नूंह) स्थित राजकीय यूनानी महाविद्यालय एवं अस्पताल, जो मेवात क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के विस्तार की दृष्टि से राज्य की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है, को मार्च, 2027 तक संचालन के लिए तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में निर्देश दिए गए कि निर्माण कार्य के साथ-साथ चिकित्सा उपकरणों की खरीद की प्रक्रिया भी पूरी की जाए तथा स्टाफ भर्ती की स्वीकृति समय रहते प्राप्त की जाए, ताकि अस्पताल शुरू होते ही मरीजों को सेवाएं मिल सकें। बैठक में चांदपुरा (अंबाला) स्थित राजकीय होम्योपैथिक महाविद्यालय एवं अस्पताल की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी संशोधनों के बाद संशोधित संरचनात्मक डिजाइन तैयार हो चुके हैं। 31 जुलाई तक नए टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे तथा 31 अगस्त तक कार्यादेश जारी किए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे निर्माण कार्य में तेजी लाई जा सके। इसके अलावा, पट्टीकरा (नारनौल) स्थित बाबा खेतानाथ आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल में प्रस्तावित आयुष वेलनेस सेंटर के निर्माण को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। लोक निर्माण विभाग को 15 अगस्त तक सभी टेंडर संबंधी औपचारिकताएं पूरी करने तथा लंबित संरचनात्मक समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश दिए गए, ताकि निर्माण कार्य शीघ्र शुरू किया जा सके। निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयुष विभाग राज्यभर के उद्योगों के लिए एक परामर्श भी जारी करेगा, जिसमें कर्मचारियों के कार्यस्थल पर ‘योग ब्रेक’ अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। बैठक के अंत में डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी संबंधित विभागों को लंबित कार्यों में तेजी लाने तथा निर्धारित समयसीमा के अनुसार प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक आयुष संस्थानों की स्थापना तथा सस्ती एवं सुलभ पारंपरिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। -

हरियाणा में दुग्ध उत्पादन और नस्ल सुधार को मिलेगी गति- पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा
चंडीगढ़: हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार पशुपालकों के हितों को ध्यान में रखकर निरंतर काम कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ाना और पशुधन की नस्ल सुधार के काम को तेज गति देना है, ताकि पशुपालक अधिक से अधिक दुग्ध उत्पादन करके अपनी आर्थिक स्थिति को और अधिक मजबूत कर सकें। हरियाणा सिविल सचिवालय में आज पशुपालन एवं डेयरी विभाग की उच्च स्तरीय खरीद समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा ने यह बात कही। इस अवसर पर हरियाणा के शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा भी मौजूद रहे। बैठक में पशुधन के आनुवंशिक सुधार के लिए एक बड़ा निर्णय लेते हुए, उच्च क्वालिटी के फ्रोजन सीमन के सुरक्षित भंडारण हेतु तरल नाइट्रोजन की निर्बाध आपूर्ति के लिए अगले 2 वर्ष के लिए दर अनुबंध को मंजूरी दी गई है।बोवाइन फ्रोजन सीमन का संरक्षण होगा सुनिश्चित
पशुपालन मंत्री ने बताया कि बोवाइन फ्रोजन सीमन के उत्पादन, भंडारण और सुरक्षित परिवहन के लिए तरल नाइट्रोजन की नियमित और बिना किसी बाधा के उपलब्धता बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से विभाग द्वारा इस दर अनुबंध की व्यवस्था को लागू किया गया है। बैठक में जानकारी दी गई कि निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तरल नाइट्रोजन की समयबद्ध आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। सीमन उत्पादन और उसके संरक्षण का कार्य बिना किसी व्यवधान के लगातार संचालित हो सकेगा। यह अनुबंध विभिन्न सीमन उत्पादन केन्द्रों तथा उनसे संबंधित इकाइयों की जरूरतों के अनुसार पूरी तरह प्रभावी रहेगा।कृत्रिम गर्भाधान को मिलेगी रफ्तार, पशुपालकों को होगा सीधा लाभ
मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले बोवाइन फ्रोजन सीमन के उत्पादन को निरंतर बनाए रखना और पशुधन प्रजनन कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाना है। तरल नाइट्रोजन की निर्बाध उपलब्धता से राज्य में कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों को गति मिलेगी। इसका सीधा लाभ ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को होगा, क्योंकि उन्हें बेहतर आनुवंशिक गुणवत्ता वाले पशुधन प्राप्त होंगे। मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पशुपालन को एक मुनाफे का व्यवसाय बनाने और इसे बढ़ावा देने के लिए कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, जिनका लाभ उठाकर राज्य के लाखों पशुपालक आत्मनिर्भर और समृद्ध हो रहे हैं। इस अवसर पर पशुपालन एवं डेयरी के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के प्रबंध निदेशक डा. वीरेंद्र सिंह व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। -

मंत्री राजेश नागर का सख्त रुख, लापरवाह डाकघर अधीक्षक पर गिरी गाज
चण्डीगढ़: हरियाणा के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री राजेश नागर की अध्यक्षता में जिला लोकसंपर्क एवं कष्ट निवारण समिति भिवानी की आयोजित मासिक बैठक में 13 परिवादों की सुनवाई की, जिनमें 11 परिवादों का मौके पर ही समाधान किया।
नागर ने भिवानी में आयोजित जिला लोकसंपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में मुंढाल खुर्द निवासी ऋषिकेश के डाकघर से आरडी खाते से जुड़े एक मामले में घोर लापरवाही बरते जाने पर एफआईआर दर्ज करने और जांच पूरी होने तक डाकघर के अधीक्षक को निलंबित किए जाने के निर्देश दिए। साथ ही मामले की जांच पुलिस आर्थिक अपराध शाखा को सौंपने के निर्देश दिए। वहीं खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री ने नागरिकों को निर्बाध रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नागरिकों को पर्याप्त स्वच्छ पेयजल और निर्बाध रूप से बिजली मिलनी चाहिए। बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति आने वाले फाल्ट को तुरंत प्रभाव से दूर किया जाए और पेयजल की लीकेज को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए ताकि लोगों को पीने के लिए साफ पानी मिल सके।
बैठक में खाद्य एवं आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले मंत्री ने स्थानीय फैंसी चौक निवासी धर्म सिंह के परिवाद की सुनवाई में मामले की मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद पुलिस को त्वरित कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामलों में तीन अगस्त को मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई कर दी जाएगी। ग्वार फैक्ट्री के पास सेवा नगर निवासी महाबीर के मामले की सुनवाई करते हुए उन्होंने पुलिस की सहायता से पाइप लाइन डालकर पेयजल समस्या के समाधान के निर्देश दिए। एक अन्य मामले में नागर ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण को ग्रीन बेल्ट की खाली जगह पर पार्क विकसित करने और इससे पहले नगर परिषद को यहां दो दिन के अंदर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए।
एक अन्य मामले में गंदे पानी की समस्या की सुनवाई करते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति मंत्री ने सम्बंधित अधिकारियों को आगामी दस दिन में समस्या के समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को वार्ड वाइज सर्वे कर पानी की लीकेज लाईनों की पहचान की जाए। उन्होंने शहर में नालों की सफाई व्यवस्था को भी दुरुस्त किए जाने के मामलों की एडीसी द्वारा जांच किए जाने के निर्देश दिए। नूनसर जोहड़ भिवानी निवासी पदमावती के परिवाद की सुनवाई पर मंत्री ने मामले में गैर सरकारी दो सदस्यीय कमेटी द्वारा जांच कर रिपोर्ट दिए जाने के निर्देश दिए।
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जिलास्तर पर निवेशकों के आवेदन लंबित न रहें, एक ही बार में दर्ज हों सभी आपत्तियां : राव नरबीर सिंह
चंडीगढ़: हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला स्तर पर निवेशकों के किसी भी आवेदन में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी आवेदन में कोई कमी या आपत्ति हो तो संबंधित अधिकारी सभी आपत्तियां एक ही बार में दर्ज करें, ताकि निवेशकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और समयबद्ध तरीके से अनुमतियां मिल सकें।
राव नरबीर सिंह आज हरियाणा सिविल सचिवालय स्थित एनआईसी केंद्र में पर्यावरण विभाग के क्षेत्रीय अधिकारियों, जिला उद्योग अधिकारियों तथा औद्योगिक सम्पदा अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, महानिदेशक यश गर्ग तथा एचएसआईआईडीसी के प्रबंध निदेशक सुशील सारवान भी उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार का लक्ष्य प्रदेश को निवेश के लिए सबसे अनुकूल राज्य बनाना है। इसके लिए अनुमोदन प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निवेशकों को विभागीय प्रक्रियाओं में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। बैठक में डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि विभाग यूनिफाइड सिंगल विंडो सिस्टम को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसके तहत नया एसडब्ल्यूएस पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसे राजस्व विभाग के भू-अभिलेखों के साथ एकीकृत किया जाएगा। एचएसआईआईडीसी की औद्योगिक सम्पदाओं में उपलब्ध खाली भूखंडों की जानकारी भी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी।
निवेशकों की सुविधा के लिए पोर्टल पर निकटतम रेलवे स्टेशन, बिजली एवं पानी की उपलब्धता जैसी आधारभूत सुविधाओं की जानकारी भी उपलब्ध होगी। साथ ही इसे जीआईएस तकनीक से जोड़ा जाएगा, जिससे निवेशकों को उपयुक्त स्थान के चयन में आसानी होगी। बैठक में यह भी बताया गया कि निवेशकों के लिए दस्तावेज संग्रहण केंद्र, मार्गदर्शन सेवाओं तथा आवश्यक अनुमतियों की विस्तृत जानकारी भी इसी पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा जिला एवं राज्य स्तर पर कारोबार सुधार कार्ययोजना तैयार की जा रही है, जिससे निवेश प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाया जा सके।
समीक्षा बैठक के दौरान राव नरबीर सिंह ने ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में आरडब्ल्यूए से संबंधित लगाता मिल रही शिकायतों का भी संज्ञान लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपार्टमेंट सोसायटी अधिनियम में आवश्यक संशोधनों के लिए नीति तैयार की जाए, ताकि निवासियों की समस्याओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
एमएसएमई विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों की सहायता के लिए बीडीएस हेल्पडेस्क तथा ‘उद्योग साथी’ नियुक्त किए गए हैं, जो निवेशकों को विभिन्न योजनाओं, अनुमतियों और प्रक्रियाओं संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे। इसके लिए शीघ्र ही ‘संगम पोर्टल’ भी शुरू किया जाएगा, जिसमें केंद्र सरकार की ‘जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट’ नीति को विशेष रूप से शामिल किया जाएगा। उद्योग मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य सरकार निवेशकों को बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए निवेशकों को त्वरित एवं पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।
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हरियाणा में अनुपालन में कमी एवं विनियमन-सरलीकरण अभियान का दूसरा दौर
चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने प्रदेश में कारोबारी प्रक्रिया को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अनुपालन में कमी (कम्प्लायंस रिडक्शन) एवं विनियमन-सरलीकरण (डी-रेग्यूलेशन) अभियान के तहत 28 प्राथमिकता वाले सुधारों में से 21 सुधारों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के इस अभियान में हरियाणा अग्रणी राज्यों में शुमार हो गया है।
मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने आज यहां एक उच्चस्तरीय बैठक में इन सुधारों की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि शेष सुधारों को निर्धारित समय-सीमा में लागू किया जाए तथा उनकी प्रगति से संबंधित दस्तावेजी साक्ष्य समय पर एमआईएस पोर्टल पर अपलोड किए जाएं, ताकि राष्ट्रीय स्तर पर हरियाणा की उपलब्धियां सही रूप में परिलक्षित हो सकें। मुख्य सचिव ने कहा कि हरियाणा सरकार का उद्देश्य ऐसा नियामक ढांचा विकसित करना है जो पारदर्शी, प्रौद्योगिकी आधारित और उद्योगों के अनुकूल हो। इससे निवेश को बढ़ावा मिलेगा, उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा तथा राज्य में कारोबार करने की सुगमता में और सुधार होगा।
बैठक में बताया गया कि केंद्र सरकार के डी-रेग्यूलेशन सेल द्वारा छह प्रमुख सुधारों को पहले ही स्वीकृति दी जा चुकी है। इनमें बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल एवं त्वरित बनाना, दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए नियमों का उदारीकरण, सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से सेवाओं की समयबद्ध उपलब्धता, हरियाणा सेवा का अधिकार व्यवस्था के तहत ऑटो-अपील प्रणाली, पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया में सुधार तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए जांच सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।
उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बताया कि विभिन्न विभागों द्वारा 15 अन्य सुधारों पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। इनमें भूमि उपयोग नियमों का उदारीकरण, औद्योगिक प्लॉटों के प्रबंधन में अधिक लचीलापन, भवन निर्माण स्वीकृति प्रक्रिया का सरलीकरण, वैश्विक मानकों के अनुरूप अग्नि सुरक्षा नियम लागू करना, स्वास्थ्य क्षेत्र में लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाना, राज्य के कानूनों एवं नियमों का डिजिटलीकरण तथा निवेश को प्रोत्साहित करने वाले उपाय शामिल हैं।
हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (एचएसआईआईडीसी) ने उद्योगों की सुविधा के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें औद्योगिक भूखंडों का विभाजन एवं एकीकरण, पूर्व अनुमति के बिना औद्योगिक परियोजनाओं में परिवर्तन की सुविधा, दस वर्ष बाद लीजहोल्ड को फ्रीहोल्ड में परिवर्तित करने की व्यवस्था, लचीले लीज नियम तथा भूमि के बेहतर उपयोग के लिए उदार विकास नियम शामिल हैं।
बैठक में यह भी बताया गया कि उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने हरियाणा राइट टू बिजनेस विधेयक, 2026 का प्रारूप तैयार कर लिया है। प्रस्तावित विधेयक के तहत पात्र विनिर्माण एमएसएमई इकाइयों को स्व-घोषणा के आधार पर सैद्धांतिक स्वीकृति प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा तथा राज्य सरकार के विभागों द्वारा निरीक्षण से तीन वर्ष तक की छूट का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा हरियाणा एंटरप्राइजेज प्रमोशन सेंटर (एचईपीसी) को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी तथा जिला स्तरीय स्वीकृति समितियों को सिंगल विंडो प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध अनुमोदन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के अधिकारियों ने बैठक में बताया कि प्रदेश के लगभग 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र, जो नियंत्रित क्षेत्रों से बाहर है, में कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में परिवर्तित करने के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन (सीएलयू) की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। विभाग नियंत्रित क्षेत्रों में भी बिना मानवीय हस्तक्षेप के सिस्टम जनरेटेड सीएलयू स्वीकृति की दिशा में कार्य कर रहा है।
अग्निशमन सेवा विभाग के अधिकारियों ने अवगत कराया कि हरियाणा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2022 में संशोधन कर जोखिम आधारित अग्नि सुरक्षा मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप लागू करने की प्रक्रिया जारी है। बैठक में श्रम विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन, स्कूल शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, अग्निशमन सेवाएं विभाग के महानिदेशक शेखर विद्यार्थी, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के महानिदेशक यश गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे
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वंचित बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए बाल भवनों में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की गतिविधियां शुरू करने की पहल सराहनीय – राज्यपाल
चंडीगढ़: हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने राज्य के सभी बाल भवनों में वंचित बच्चों के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की गतिविधियां शुरू करने की पहल की सराहना की है। यहां लोक भवन में हरियाणा राज्य भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की 44वीं वार्षिक आम बैठक को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा की पहल तथा राज्य आयुक्त (बुलबुल) के नेतृत्व में प्रदेश के सभी बाल भवनों में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की गतिविधियां प्रारंभ की गई हैं। उन्होंने कहा कि यह सराहनीय पहल वंचित बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना तथा जीवनोपयोगी कौशल विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और उन्हें जिम्मेदार एवं सशक्त नागरिक बनने के लिए प्रेरित करेगी। राज्यपाल, जो हरियाणा राज्य भारत स्काउट्स एवं गाइड्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं, ने एसोसिएशन द्वारा प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर वहां रोवर्स एवं रेंजर्स इकाइयों की स्थापना की पहल की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इससे युवाओं के बीच भारत स्काउट्स एवं गाइड्स गतिविधियां का और अधिक विस्तार होगा। प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके युवा नागरिकों के चरित्र पर निर्भर करता है। स्काउटिंग एवं गाइडिंग ईमानदारी, करुणा, साहस, प्रकृति के प्रति सम्मान तथा ‘स्वयं से पहले सेवा’ जैसे जीवन मूल्यों का संस्कार देती है। यही मूल्य एक सशक्त, प्रगतिशील और समावेशी भारत के निर्माण की आधारशिला हैं।भारत स्काउट्स एवं गाइड्स केवल एक संगठन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और निस्वार्थ सेवा की भावना विकसित करने वाला एक सशक्त जन आंदोलन है।केवल दो प्रतिशत आबादी, लेकिन 17 प्रतिशत स्काउट्स-गाइड्स सदस्यता का योगदान देता है हरियाणा – राज्यपाल
हरियाणा के उल्लेखनीय योगदान का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के देशभर में 70 लाख से अधिक सदस्य हैं। देश की कुल जनसंख्या में हरियाणा की हिस्सेदारी लगभग दो प्रतिशत होने के बावजूद स्काउट्स एवं गाइड्स की कुल सदस्यता में प्रदेश का योगदान लगभग 17 प्रतिशत है। उन्होंने इसे हरियाणा के लिए गौरव और अत्यंत उल्लेखनीय उपलब्धि बताया। इस अवसर पर राज्यपाल ने पदाधिकारियों, कब्स, बुलबुल्स, स्काउट्स, गाइड्स, रोवर्स, रेंजर्स, यूनिट लीडर्स तथा स्वयंसेवकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए वारंट एवं पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया। इससे पूर्व हरियाणा राज्य भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के स्टेट चीफ कमिश्नर डॉ. के.के. खंडेलवाल ने राज्यपाल का स्वागत किया तथा एसोसिएशन की गतिविधियों, उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर स्टेट चीफ कमिश्नर धीरा खंडेलवाल, स्टेट कमिश्नर (गाइड्स) अमनीत पी. कुमार, आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़, स्टेट कमिश्नर (मुख्यालय) साकेत कुमार, राज्यपाल के सचिव विजयकुमार भाविकट्टी, मनी राम शर्मा तथा भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के अन्य पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे। -

गौशालाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए प्रभावी योजनाएं क्रियान्वित- CM Saini
पशुधन की देखरेख के लिए 820 ई रिक्शा करवाई जाएंगी उपलब्ध
चंडीगढ: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा गौशालाओं को आत्मनिर्भर एवं सशक्त बनाने के लिए अनेक प्रभावी योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं। इसी कड़ी में राज्य की गौशालाओं को पशुधन की देखरेख के लिए 820 ई रिक्शा उपलब्ध करवाई जाएंगी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी सोमवार को चण्डीगढ में हाईपावर्ड परचेज कमेटी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा, राजस्व एवं आपदा मंत्री विपुल गोयल, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा, लोक निर्माण, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री रणबीर गंगवा, महिला एवं बाल विकास तथा सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना अनुसार एक हजार तक पशु रखने वाली गौशालाओं को एक तथा इससे अधिक गायों को रखने वाली गौशालाओं को दो ई-रिक्शा उपलब्ध करवाई जाएंगी। बैठक में 10.25 करोड़ रुपए की लागत से ई रिक्शा खरीद को अनुमति प्रदान की गई। प्रदेश की कुल 770 गौशालाओं में से 553 गौशालाओं में एक हजार से कम पशु, 79 गौशालाओं में दो हजार तक, 20 गौशालाओें में तीन हजार तक, 8 गौशालाओं में चार हजार तथा एक गौशाला में 5 हजार व एक गौशाला में 6 हजार तक पशुधन है।
मुख्यमंत्री ने कैथल शहर की विभिन्न कॉलोनियों में 12.87 करोड़ रुपए की लागत से सीवरेज लाइन डालने के कार्य को मंजूरी प्रदान की। इससे शहर की अधिकांश आबादी में सीवरेज व्यवस्था शुरू हो जाएगी जो आगामी 2042 तक की जनसंख्या को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके अलावा खेदड़ में वाटर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने एवं आरसीसी टैंक का निर्माण करने की भी मंजूरी दी गई। इस कार्य पर लगभग 27.70 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
मुख्यमंत्री ने फरीदाबाद मैट्रोपोलियन विकास प्राधिकरण में 10 एमएलडी क्षमता के 5 रैनीवैल टयूबवैल लगाए जाने की स्वीकृति प्रदान की। गांव मंझावली, मोठूका के आसपास यमुना नदी के जलभराव वाले क्षेत्रों में लगभग 164.75 करोड़ रुपए की लागत से लगाए जाने वाले रेनीवैल टयूबवैल से पेयजल हेतु टेस्टिंग की जाएगी।
गुरुग्राम के बसई में 1000 एमएलडी का बनेगा दूसरा जलघर
मुख्यमंत्री ने गुरूग्राम मैट्रोपोलियन विकास प्राधिकरण के गांव बसई में 1000 एमएलडी क्षमता का दूसरा जल घर बनाने के कार्य को भी स्वीकृति प्रदान की गई। इसके निर्माण पर लगभग 149 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इस प्रकार 380.40 करोड़ रुपए के विभिन्न कार्यों को 363.82 करोड़ रुपए में टेंडर छोड़कर लगभग 16.58 करोड़ रुपए की बचत की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों में किसी प्रकार की देरी व लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी तथा सभी कार्य निर्धारित अवधि में पूर्ण किए जाने चाहिए। इसके अलावा विकास कार्यो में उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, एफएमडीए व जीएमडीएम के सलाहकार डी. एस. ढेसी, प्रधान सचिव पंकज यादव, विजय सिंह दहिया, जीएमडीए के सीईओ पी सी मीणा, महानिदेशक सप्लाई एवं डिस्पोजल पंकज सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। -

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच रही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं: आरती सिंह राव
नूंह जिले के तीन स्वास्थ्य उपकेंद्र होंगे अपग्रेड
चंडीगढ़: हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के अपने संकल्प को निरंतर साकार कर रही है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2026-27 के बजट में की गई घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए जिला नूंह के तीन स्वास्थ्य उपकेंद्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के रूप में अपग्रेड करने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने बताया कि जिन स्वास्थ्य उपकेंद्रों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपग्रेड किया जाएगा, उनमें लूहिंगा कलां, चंदेनी तथा शाह चोखा शामिल हैं। इन केंद्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के रूप में विकसित होने से आसपास के हजारों ग्रामीण नागरिकों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा उपचार के लिए दूरस्थ अस्पतालों पर उनकी निर्भरता कम होगी। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा इन तीनों परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि, भवन, मानव संसाधन, चिकित्सा उपकरणों सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं का विस्तृत आकलन किया गया है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनने के बाद यहां सामान्य रोगों का उपचार, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, टीकाकरण, प्रसव संबंधी सुविधाएं, आवश्यक जांच तथा दवाइयों की उपलब्धता जैसी स्वास्थ्य सेवाएं अधिक प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाएंगी। आरती सिंह राव ने कहा कि इन परियोजनाओं से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि मेवात क्षेत्र के ग्रामीण परिवारों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिलने से गंभीर बीमारियों की रोकथाम एवं उपचार में भी सहायता मिलेगी। इससे क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ होगी तथा आम नागरिकों को उनके घर के निकट ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा। हरियाणा सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राज्य सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने, आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने तथा अंतिम पंक्ति तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नूंह जिले के इन तीन स्वास्थ्य उपकेंद्रों का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उन्नयन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। -

राजस्व विभाग में डिजिटल बदलाव से पारदर्शी, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित सेवाएं हो रही सुनिश्चित: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
चंडीगढ़: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को हरियाणा निवास चंडीगढ़ में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए डिजिटल गवर्नेंस, भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण तथा नागरिक-केंद्रित सुधारों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राजस्व विभाग की प्रत्येक सेवा पारदर्शी, तकनीक आधारित और निर्धारित समय सीमा के भीतर उपलब्ध कराई जाए ताकि नागरिकों को बिना किसी अनावश्यक देरी के सुगम सेवाएं मिल सकें। बैठक में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्त, डीएमसी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि विभाग ने मई 2025 में अपना पहला इन-हाउस सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) प्रभाग स्थापित कर व्यापक डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया । इससे बाहरी एजेंसियों पर निर्भरता कम हुई है तथा विभागीय डिजिटल प्लेटफॉर्म के विकास और रखरखाव में तेजी आई है। इस तकनीकी टीम में सॉफ्टवेयर डेवलपर, यूआई/यूएक्स डिजाइनर, तकनीकी दस्तावेज विशेषज्ञ तथा सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर सहित 16 स्वीकृत पद शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने एकीकृत राजस्व पोर्टल (इंटीग्रेटेड रेवेन्यू पोर्टल) की प्रगति की समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि यह पोर्टल नागरिकों और विभागीय अधिकारियों के लिए एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया गया है। इसके माध्यम से नागरिकों को ऑनलाइन राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। पोर्टल में अधिकारियों के लिए सिंगल साइन-ऑन प्रणाली तथा सेवा वितरण एवं लंबित मामलों की रियल टाइम निगरानी के लिए एकीकृत डैशबोर्ड की सुविधा भी उपलब्ध है।
राजस्व शिकायत निवारण प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश
मुख्यमंत्री ने शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसे अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक हितैषी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक पात्र नागरिक को न्याय मिलना चाहिए। जिन आवेदकों के आवेदन अस्वीकृत हुए हैं और यदि वे निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं तो उन्हें पुनर्विचार का उचित अवसर दिया जाना चाहिए। शिकायत डैशबोर्ड की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी आवेदनों के निपटान में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए। प्रत्येक अस्वीकृत आवेदन में अस्वीकृति का स्पष्ट कारण दर्ज किया जाए तथा उसका समुचित रिकॉर्ड रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अस्वीकृत मामलों की समय-समय पर रैंडम जांच की जाए ताकि किसी भी पात्र व्यक्ति को प्रक्रियागत त्रुटि या गलत जांच के कारण लाभ से वंचित न रहना पड़े।
मुख्यमंत्री ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए कि जिलों में आयोजित किए जा रहे साप्ताहिक समाधान शिविरों में तहसीलदारों तथा राजस्व विभाग के अन्य अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि मौके पर ही राजस्व से जुड़ी समस्याओं का समाधान संभव हो सके
मिशन मोड में होगा भूमि अभिलेखों का आधुनिकीकरण
मुख्यमंत्री ने राज्य के भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए इसकी प्रगति की जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि अब तक 40.20 करोड़ से अधिक पुराने राजस्व अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है, जिससे राज्य में डिजिटल भूमि अभिलेख उपलब्ध हो पाया है। ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से लगभग 44 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर किया जा चुका है, जबकि राज्य की भू-स्थानिक (जियोस्पेशियल) संरचना को मजबूत करने के लिए 19 कंटीन्यूअसली ऑपरेटिंग रेफरेंस स्टेशन (सीओआरएस) स्थापित किए गए हैं।
बैठक में बताया गया कि राज्य के 99 प्रतिशत गांवों के नक्शों का जियो-रेफरेंसिंग कार्य पूरा हो चुका है। लगभग 60 लाख ततीमा नक्शों को अद्यतन किया गया है तथा रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (अधिकार अभिलेख) का लगभग 60 प्रतिशत मानकीकरण किया जा चुका है। डिजिटलीकृत अभिलेखों में से 99.5 प्रतिशत से अधिक का प्रथम स्तर का सत्यापन भी पूरा हो चुका है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को पूर्ण करने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि नागरिक-केंद्रित सुधारों के तहत 6,761 गांवों में संपत्ति कार्ड तैयार कर लगभग 25.16 लाख संपत्ति मालिकों को वितरित किए जा चुके हैं। लगभग 95 प्रतिशत गांवों के नक्शे भू-नक्शा पोर्टल पर अपलोड किए जा चुके हैं। पारदर्शिता एवं प्रामाणिकता बढ़ाने के लिए लगभग 42 लाख आधार नंबर पुराने राजस्व अभिलेखों से जोड़े जा चुके हैं तथा नागरिकों की सुविधा के लिए आईटी हेल्पडेस्क भी स्थापित किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि विभाग ने पांच लाख से अधिक लंबित इंतकाल (म्यूटेशन) मामलों का निपटारा किया है। सरल पोर्टल की लगभग 80 प्रतिशत सेवाओं को ऑटो अपील प्रणाली से जोड़ा जा चुका है ताकि निर्धारित समय से अधिक लंबित मामलों का स्वतः उच्च स्तर पर संज्ञान लिया जा सके और सेवाओं का समयबद्ध वितरण सुनिश्चित हो। डिजिटल पंजीकरण सुधारों से 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रह हो पाया है।
मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि कागज रहित दस्तावेज पंजीकरण व्यवस्था की नियमित निगरानी करें। अधिकारियों ने बताया कि दस्तावेज पंजीकरण की प्रक्रिया अब पूर्णतः एंड-टू-एंड पेपरलेस हो चुकी है तथा लंबित मामलों की निगरानी के लिए सार्वजनिक लाइव डैशबोर्ड भी उपलब्ध है।
सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में नागरिकों के लिए बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित हों
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी भूमि पंजीकरण कार्यालयों में आने वाले नागरिकों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यालय में उचित वेटिंग रूम सहित सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हों। साथ ही सभी कार्यालयों में क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाए तथा डिजिटल स्क्रीन पर टोकन नंबर प्रदर्शित किए जाएं ताकि नागरिकों को व्यवस्थित और सुविधाजनक ढंग से सेवाएं प्राप्त हो सकें। मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (सीएमजीजीए) के परियोजना निदेशक डॉ. यशपाल ने बताया कि पेपरलेस प्रणाली के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अब तक 12,300 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। जियो-रेफरेंस गांवों के आंकड़ों के सत्यापन के लिए जिलों की नियमित निगरानी की जा रही है ताकि लैंड डिमार्केशन को अधिक सटीक एवं पारदर्शी बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने ऐसे मामलों के त्वरित निदान में सिरसा जिले के कार्य की सराहना करते हुए अन्य जिलों को भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले जिलों की कार्यप्रणाली अपनाने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि राजस्व अभिलेखों की आधार से जोड़ने का कार्य भी तेजी से जारी है। अब तक कुल 1.69 करोड़ अभिलेखों में से 42.55 लाख से अधिक अभिलेख आधार से जोड़े जा चुके हैं, जो कुल अभिलेखों का लगभग 25 प्रतिशत है। इससे भूमि अभिलेख अधिक सटीक होंगे, डुप्लीकेट प्रविष्टियां समाप्त होंगी, पारदर्शिता बढ़ेगी, सेवाओं की गति तेज होगी तथा फर्जी भूमि लेन-देन पर प्रभावी रोक लगेगी।
15 अगस्त तक एग्री स्टैक पंजीकरण बढ़ाने के निर्देश
बैठक में एग्री स्टैक किसान रजिस्ट्री की प्रगति की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि किसानों के एग्री स्टैक आईडी बनवाने के लिए व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त तक किसान पंजीकरण में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की जाए ताकि अधिक से अधिक किसान भविष्य की डिजिटल कृषि पहलों एवं सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें। मुख्यमंत्री ने डिजिटल फसल सर्वेक्षण की तैयारियों की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि आगामी फसल सीजन में राज्य के सभी गांवों को शत-प्रतिशत कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए डाटा सत्यापन, मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण, जिला स्तर पर क्षमता निर्माण, मोबाइल एप की तैयारी, मॉक सर्वे तथा अगस्त मध्य से राज्यव्यापी सर्वेक्षण प्रारंभ किया जाएगा। वर्ष के अंत तक सर्वेक्षण पूर्ण कर उसका ऑडिट भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने ऑफलाइन जमाबंदी के लंबित मामलों तथा पटवार सर्किलों के युक्तिकरण की प्रगति की भी समीक्षा की।
बैठक में यह भी बताया गया कि विभाग ने आधार सीडिंग, ऑटो म्यूटेशन, प्रमाणित प्रतियां, सीमांकन, ऋण प्रविष्टियां तथा उपयोगकर्ता पंजीकरण सहित विभिन्न डिजिटल मॉड्यूल के लिए विस्तृत संचालन प्रक्रिया (एसओपी) एवं उपयोगकर्ता पुस्तिकाएं तैयार की हैं ताकि पूरे राज्य में इनका एक समान क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके
आयुष्मान भारत एवं चिरायु हरियाणा योजना की करी समीक्षा
मुख्यमंत्री सुशासन सहयोगी कार्यक्रम (सीएमजीजीए) की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में आयुष्मान भारत एवं चिरायु हरियाणा योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने उपायुक्तों को निर्देश दिए कि प्रत्येक पात्र लाभार्थी को इन योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार कैशलेस स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक सरकारी अस्पताल को निजी अस्पतालों के समकक्ष आधुनिक सुविधाओं, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं और आवश्यक चिकित्सा संसाधनों से सुसज्जित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल स्वच्छता, मरीजों की देखभाल और सेवा वितरण के सर्वोच्च मानक स्थापित करें। उन्होंने उपायुक्तों को सरकारी अस्पतालों का नियमित औचक निरीक्षण करने तथा चिकित्सकों, दवाइयों और जांच सुविधाओं की उपलब्धता की व्यक्तिगत निगरानी करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, विद्यालय शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव विजय सिंह दहिया, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के आयुक्त एवं सचिव अशोक कुमार मीणा, सभी उपायुक्त, नगर निगम आयुक्त तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
