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  • स्वस्थ हरियाणा की दिशा में बड़ा कदम, मुख्यमंत्री ने 100 करोड़ से अधिक की स्वास्थ्य परियोजनाओं का किया शुभारंभ

    स्वस्थ हरियाणा की दिशा में बड़ा कदम, मुख्यमंत्री ने 100 करोड़ से अधिक की स्वास्थ्य परियोजनाओं का किया शुभारंभ

    चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने स्वस्थ हरियाणा-समृद्व हरियाणा के संकल्प को और मजबूत करते हुए और प्रदेशवासियों के बेहतर स्वास्थ्य और सम्मानजनक जीवन की दिशा में एक बडा कदम उठाते हुए पंचकूला में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में स्वास्थ्य क्षेत्र की 100 करोड रूपये से अधिक की 9 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उदघाटन एवं शिलान्यास किया। इस अवसर पर हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री कुमारी आरती सिंह राव और महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती श्रुति चैधरी भी उपस्थित रही।

    मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य अवसंरचना को आधुनिक और सशक्त बनाने की दिशा में बडा कदम उठाते हुए 22.29 करोड रूपये की लागत से 30 स्वास्थ्य संस्थानों का उदघाटन और 21.50 करोड रूपये की लागत से 16 स्वास्थ्य संस्थानों का शिलान्यास किया। इसके अलावा उन्होने जिला नागरिक अस्पताल सोनीपत में 6.45 करोड रूपये की लागत से विश्राम गृह का शिलान्यास, 0.34 करोड रूपये  प्रतिवर्ष की लागत से 23 जिला अस्पताओं में स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार क्लिनिक( महिला क्लिनिक) का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होने पीपीपी माॅडल के तहत सीटी स्कैन एंव एमआरआई सेवाओं का विस्तार करते हुए 12 करोड रूपये की लागत से जिला अस्पताल पानीपत और कुरूक्षेत्र में एमआरआई और 10 करोड रूपये की लागत से सब डिविजनल अस्पताल बहादुरगढ और जिला अस्पताल दादरी में 10 करोड रूपये की लागत से सीटी स्कैन सेवाओं का शुभारंभ किया।

    मुख्यमंत्री ने हृदय रोगों की समय पर पहचान एवं उपचार हेतु 600 स्वास्थ्य संस्थाओं में 3 करोड रूपये प्रतिवर्ष की लागत से टेली-ईसीजी सेवाओं का शुभारंभ, कारपोरेट सोशल रिंसपोंसिबिलिटि के तहत 24 करोड रूपये से अधिक राशि के एनस्थिसिया वर्कस्टेशन, डिफिब्रिलेटर, एक्स-रे मशीन, टूनैट मशीन और आईसीयू बेड की व्यवस्था का शुभारंभ, 3.60 करोड रूपये प्रतिवर्ष की लागत से महर्षि च्वयन मैडिकल कोलेज, कोरियावास (नारनौल) और श्री अटल बिहारी वाजेपयी राजकीय मैडिकल कालेज छांयसा (फरीदाबाद) में निशुल्क डायलिसिस सुविधा का शुभारंभ, 1.73 करोड रूप्ये की लागत से 23 जिला अस्पतालों में आमजन को ब्रांडेड दवाईयां सस्ती दरों पर उपलब्ध करवाने के लिए अमृत फार्मेसी का शिलान्यास और 0.91 करोड रूपये की लागत से 4600 आशा कार्यकर्ताओं के लिए आपदा प्रबंधन का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा का आज का दिन इसलिए भी विशेष है क्योंकि हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों की जनसेवा यात्रा का गौरवपूर्ण उत्सव मना रहे हैं। इन 12 वर्षों में भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में जो ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है, वह अभूतपूर्व है। उन्होने कहा कि एक समय था जब गरीब परिवार इलाज के लिए बड़े शहरों के चक्कर लगाते थे। बीमारी केवल शारीरिक पीड़ा नहीं देती थी, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी तोड़ देती थी। लेकिन आज आयुष्मान भारत योजना, जन औषधि केंद्र, डिजिटल हेल्थ मिशन, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और आधुनिक जांच सुविधाओं ने स्वास्थ्य सेवाओं को गरीब के घर-द्वार तक पहुंचा दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होने स्वास्थ्य विभाग को लक्ष्य दिया था कि हर जिला अस्पताल अपने शहर का सबसे बेहतर अस्पताल बने। आज उन्हें खुशी है कि हरियाणा के जिला अस्पतालों में तेजी से बदलाव दिखाई दे रहा है।

    उन्होने कहा कि प्रदेश सरकार हर जिले तक हाई-एंड डायग्नोस्टिक सुविधाएं पहुंचाने के लिए निरंतर काम कर रही है। आज प्रदेश के 18 जिलों में सी.टी. स्कैन सेवाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा, 7 जिलों में एम.आर.आई. सेवाएं शुरू हो चुकी हैं तथा सभी जिलों में अल्ट्रासाउंड और ब्लड एनालाइजर सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस वित्त वर्ष के बजट में शेष जिलों में भी सी.टी.स्कैन, एम.आर.आई. और डिजिटल एक्स-रे मशीनों की व्यवस्था करने का प्रावधान किया है। उन्होने कहा कि इसके अलावा 13 और जिला अस्पतालों में एम.आर.आई. सेवाओं के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आने वाले समय में हरियाणा का नागरिक अपने ही जिले में विश्वस्तरीय जांच सुविधाओं का लाभ ले सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 22 जिला अस्पतालों में डे-केयर कैंसर सेंटर शुरू किए गए हैं। अब कैंसर मरीजों को अपने जिले में ही इलाज की सुविधा मिलेगी। इससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है। उन्होने कहा कि समय पर जाचं को ही जीवन की सुरक्षा माना जाता है। इसलिए हम जांच सेवाएं व्यापक कर रहे हैं। पिछले वर्ष पीपीपी मॉडल के माध्यम से जिला अस्पतालों में लगभग 2 लाख डायलिसिस सत्र, 1 लाख 65 हजार सीटी स्कैन, 70 हजार एम.आर.आई स्कैन, 36 हजार ईको कार्डियोग्राफी और हजारों कोरोनरी एंजियोग्राम एवं स्टेंट प्रत्यारोपण किए गए। ये आंकड़े बताते हैं कि अब लोगों को उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं अपने जिले में ही मिल रही हैं।

    मुख्यमंत्रीे कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता डॉक्टरों और चिकित्साकर्मियों की उपलब्धता पर भी निर्भर करती है। पिछले वर्ष 777 मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती पूरी की गई है और 450 मेडिकल ऑफिसर्स की भर्ती अंतिम चरण में है। आने वाले समय में हरियाणा के अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को और मजबूत किया जाएगा। उन्होने कहा कि स्वस्थ नागरिक किसी भी राज्य की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। इसी सोच के साथ हमने स्वास्थ्य बजट में ऐतिहासिक वृद्धि की है। इस वर्ष स्वास्थ्य क्षेत्र के बजट में 32.89 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए 14 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उन्होने कहा कि जब वर्ष 2014 में हमने जनसेवा का दायित्व संभाला था, तब प्रदेश का स्वास्थ्य बजट केवल 2 हजार 646 करोड़ रुपये था। आज यह कई गुणा बढ़ चुका है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए हमने वर्ष 2014 में हर जिले में मेडिकल कॉलेज खोलने का संकल्प लिया था। उस समय हरियाणा में केवल 6 मेडिकल कॉलेज थे। आज उनकी संख्या बढ़कर 17 हो चुकी है। इसके अलावा एम.बी.बी.एस सीटें 700 से बढ़कर 2 हजार 710 हो गई हैं। इसी प्रकार नर्सिंग, फिजियोथैरेपी और पैरामेडिकल शिक्षा का भी तेजी से विस्तार किया गया है।

  • वैश्विक प्रतिस्पर्धा में डटे हरियाणा के विश्वविद्यालय

    वैश्विक प्रतिस्पर्धा में डटे हरियाणा के विश्वविद्यालय

    चंडीगढ़ : हरियाणा के सरकारी विश्वविद्यालय शैक्षणिक उत्कृष्टता, रोजगारपरक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मामले में बड़े बदलावों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। रासाथ ही, राज्य सरकार हर जिले में एक-एक मॉडल संस्कृति कॉलेज स्थापित करने की योजना पर भी कार्य कर रही है। ये 22 मॉडल संस्कृति कॉलेज स्वायत्त बहुविषयक उत्कृष्टता केंद्रों के रूप में विकसित किए जाएंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय मेगा एजुकेशनल हब स्थापित कर सहयोगात्मक अनुसंधान और शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित किया जाएगा। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में आज यहां एक उच्च स्तरीय बैठक में राज्य सरकार द्वारा इस दिशा में शुरू किए गए सुधारों की प्रगति की समीक्षा की गई।

    बैठक में 5वें राष्ट्रीय मुख्य सचिव सम्मेलन की सिफारिशों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभाग को सभी सुधारात्मक पहलों को निर्धारित समय सीमा में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप वैश्विक स्तर के शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास केंद्रों के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा विभागों को निर्देश दिए कि सुधारों की गति को बनाए रखते हुए सभी पहलों का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों का राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 तथा भविष्य की आर्थिक एवं तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार एवं कौशल विकास के केंद्रों के रूप में विकास होना चाहिए।

    राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों ने भारतीय मूल के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए पहल की है। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू), रोहतक ने ग्लोबल टैलेंट रिटर्न स्कीम के लिए एक समिति का गठन किया है, जबकि गुरुग्राम विश्वविद्यालय वैश्विक पूर्व छात्र (एलुमनाई) डेटाबेस विकसित कर रहा है तथा आईजीयू रेवाड़ी ने वैश्विक शिक्षाविदों को आकर्षित करने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों में उद्योग विशेषज्ञों को ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के रूप में नियुक्त किया जा रहा है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने दो उद्योग विशेषज्ञों को नियुक्त किया है, जबकि सीबीएलयू भिवानी ने चार और गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने तीन विशेषज्ञों को पैनल में शामिल किया है। कई विश्वविद्यालय 2026-27 शैक्षणिक सत्र से ऐसी नियुक्तियों का विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।

    राज्य सरकार समन्वित भर्ती रणनीति के माध्यम से शिक्षकों की कमी को दूर करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सहयोग से एक डिजिटल डैशबोर्ड विकसित किया जा रहा है। उभरती प्रौद्योगिकियों और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा को ढालने के लिए पाठ्यक्रमों में व्यापक सुधार किए जा रहे हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने अपने शैक्षणिक कार्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन तथा डेटा एनालिटिक्स को शामिल किया है, जबकि सीबीएलयू ने एआई, ड्रोन टेक्नोलॉजी, जियो-इन्फॉर्मेटिक्स तथा साइबर सुरक्षा जैसे पाठ्यक्रम शुरू किए हैं। आईजीयू रेवाड़ी ने एनईपी 2020 को पूर्ण रूप से लागू करते हुए भारतीय ज्ञान परंपरा, सतत विकास और नैतिकता को अपने पाठ्यक्रमों में शामिल किया है।

    विश्वविद्यालय वैकल्पिक वित्तीय संसाधनों और उद्योग साझेदारी को भी मजबूत कर रहे हैं। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय ने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम मॉडल के अंतर्गत 23 ऑनलाइन कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिनमें लगभग 10,000 विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, जबकि उसके एलुमनाई एसोसिएशन ने शैक्षणिक विकास के लिए लगभग 1.7 करोड़ रुपये जुटाए हैं। गुरुग्राम विश्वविद्यालय ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत सहयोग प्राप्त किया है तथा कई शैक्षणिक साझेदारियां की हैं। राज्य की ‘अर्न व्हाइल लर्न’ पहल का भी लगातार विस्तार हो रहा है, जिससे वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 7,000 विद्यार्थियों को लाभ मिला है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय वर्तमान में चार अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड डिग्री प्रोग्राम चला रहा है और सात नए कार्यक्रम प्रस्तावित  हैं, जबकि आईजीयू रेवाड़ी ने रोजगार क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में छह माह की अनिवार्य अप्रेंटिसशिप शुरू की है।

  • एमडीयू ने पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम्स की डेटशीट वापस ली, नई अधिसूचना जारी

    एमडीयू ने पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम्स की डेटशीट वापस ली, नई अधिसूचना जारी

    चंडीगढ़ : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू)रोहतक ने मई 2026 परीक्षाओं के तहत संचालित अधिकांश पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम्स की थ्योरी परीक्षाओं की डेटशीट वापस ले ली है। विश्वविद्यालय द्वारा इस संबंध में 25 मई 2026 को अधिसूचना जारी की गयी थी। विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि एपीजीडीसीए तथा पीजी डिप्लोमा इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग को छोड़कर सभी पीजी डिप्लोमा प्रोग्राम्स की थ्योरी डेटशीट फिलहाल वापस ले ली गई है।

    इसके साथ ही कुछ यूजी, लॉ और डिप्लोमा प्रोग्राम्स की परीक्षाओं की तिथियों में संशोधन किया गया है। परीक्षा शाखा ने स्पष्ट किया है कि संशोधित परीक्षाओं का समय और परीक्षा केंद्र पूर्व निर्धारित मुख्य डेटशीट के अनुसार ही रहेगा। प्रवक्ता ने आगे बताया कि छात्र विश्वविद्यालय वेबसाइट और संबंधित विभागों से अपडेटेड जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

  • बीटेक-एमटेक के कुछ पेपरों की परीक्षा की आयोजन तिथि में बदलाव, नई तिथि जारी

    बीटेक-एमटेक के कुछ पेपरों की परीक्षा की आयोजन तिथि में बदलाव, नई तिथि जारी

    चंडीगढ़ : महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) रोहतक ने  बीटेक एवं एमटेक सेमेस्टर के कुछ पेपरों की आयोजन तिथि में बदलाव किया है।

    विश्वविद्यालय के प्रवक्ता ने बताया कि एमटेक तीसरे सेमेस्टर (सीबीसीएस ब्रांच) के ओपन इलेक्टिव विषयों की अलग डेटशीट जारी की गई है। वहीं बीटेक छठे सेमेस्टर (जी स्कीम) के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग (सीएसई) के इलेक्टिव-III विषय डिस्ट्रिब्यूटेड सिस्टम (पेपर कोड: PEC-CSE-3) की परीक्षा, जो पहले 11 जून 2026 को होनी थी, अब 30 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा का समय सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक रहेगा तथा परीक्षा केंद्र में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विद्यार्थियों संशोधित डेटशीट विश्वविद्यालय की वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं।

  • खेलों में रुचि रखने वाले बच्चों की ग्राम स्तर पर पहचान करके उन्हें दिया जाएगा खेल का माहौल

    खेलों में रुचि रखने वाले बच्चों की ग्राम स्तर पर पहचान करके उन्हें दिया जाएगा खेल का माहौल

    चंडीगढ़ : मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा में खेलों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार एक नई पहल करने जा रही है। खेलों का पावर हाऊस बन चुके हरियाणा में अब खेलों में रुचि रखने वाले बच्चों की ग्राम स्तर पर पहचान की जाएगी और बच्चे की पसंद के खेल में उसे तैयार किया जाएगा। इसके लिए पंचायत, स्कूल व खेल विभाग मिलकर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। यह बात मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बुधवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन 2047 के अंतर्गत खेल विभाग के अगले 5 वर्ष के रोडमैप व कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सभी खेल परिसरों में लगे उपकरणों की समुचित जांच करवाई जाए ताकि किसी खिलाड़ी को दुर्घटना का शिकार न होना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग केवल शहरों और अपने स्टेडियम तक सीमित न रहे बल्कि खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए गांवों का रुख करे। ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्कूलों के परिसरों को खेलों के लिए इस्तेमाल किया जाए और यहां खेलों में रुचि रखने वाले बच्चों का रजिस्ट्रेशन किया जाए। इस कार्य में पंचायत, स्कूल व खेल विभाग मिलकर कार्ययोजना बनाए। जिन बच्चों की जिन खेलों में रुचि है उन्हें उन खेलों के लिए आवश्यक माहौल व उपकरण उपलब्ध करवाए जाएं तो हरियाणा में खेल के क्षेत्र में आमूलचूल बदलाव हो सकता है। जो बच्चे स्कूल नहीं जाते उन्हें भी खेलों से जोड़ा जाए ताकि उन्हें नशे आदि की लत से बचाया जा सके।

    नायब सिंह सैनी ने कहा कि ओलंपिक-2036 के लिए अभी से दीर्घकालिक योजना बनाकर तैयारियां की जानी आवश्यक है। इसके लिए 10-12 साल के बच्चों की पहचान कर उनकी खेल रुचि को परिष्कृत करें और उनके लिए स्पेशल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएं। इसके लिए क्षेत्र अनुसार व खेलों के अनुसार सूची बनाई जाए कि किस क्षेत्र में किस खेल के प्रति कितने युवाओं की रुचि है। इसके बाद संबंधित खेलों में उत्कृष्टता पाने के लिए फोकस किया जाए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि खेल विभाग एक पोर्टल तैयार करे जहां ब्लॉक स्तर पर खेलों में भागीदारी कर रहे बच्चों का पूरा रिकॉर्ड हो। केवल विजेता खिलाड़ियों का ही नहीं बल्कि जो बच्चा अभ्यास कर रहा है और खेलों में भागीदारी कर रहा है उन सबका भी रिकॉर्ड तैयार किया जाए। खेल एसोसिएशनों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए। उन्होंने बच्चों को खेलों में भागीदारी के लिए प्रेरित करने हेतु सभी खेल परिसरों में स्थानीय स्तर के ऐसे खिलाड़ियों के फोटो लगाने के भी निर्देश दिए जिन्होंने खेल के क्षेत्र में राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय स्तर का अवार्ड प्राप्त किया हो।

    खेल विभाग के निदेशक श्री पार्थ गुप्ता ने खेल विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों तथा 2030 तक की योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि फिलहाल प्रदेश में कोई भी स्थान ऐसा नहीं है जिसके 10 किलोमीटर के दायरे में खेल स्टेडियम न हो। उन्होंने जमीनी स्तर पर ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में खेल के आधारभूत ढांचे व सुविधाओं को बढ़ाने, खेल प्रतिभाओं की पहचान करने तथा खिलाड़ियों की भागीदारी सुनिश्चित करने के संबंध में तैयार की गई कार्ययोजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी भविष्य के दृष्टिकोण के आधार पर विभाग का कायाकल्प करें ताकि अंतर्राष्ट्रीय मैपिंग में हरियाणा की स्थिति अच्छे स्तर पर हो। मुख्यमंत्री ने सीएम अनाउंसमेंट के तहत दौलताबाद, गुरुग्राम में बनाए जा रहे दिव्यांग स्टेडियम की स्थिति की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ओलंपिक-2036 में प्राप्त की जाने वाली उपलब्धियों में इस प्रकार के आधुनिक खेल परिसरों का विशेष योगदान होगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण कुमार गुप्ता, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव श्रीमती अमनीत पी कुमार, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव श्री यशपाल यादव, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा खेल विभाग के निदेशक श्री पार्थ गुप्ता सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए अभियान चलाकर किया जाए रजिस्ट्रेशन

    गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए अभियान चलाकर किया जाए रजिस्ट्रेशन

    चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए नई योजनाएं तैयार कर रही हैं। इसके लिए प्रदेश में कार्यरत सभी गिग वर्कर्स का विशेष अभियान चलाकर रजिस्ट्रेशन किया जाए और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए जागरूक किया जाए। मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी ने यह निर्देश बुधवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा विजन 2047 के अंतर्गत श्रम विभाग के अगले 5 वर्ष के रोडमैप व कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए दिए। उन्होंने असंगठित क्षेत्र के कामगारों के कल्याण तथा वर्कफोर्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के संबंध में भी अधिकारियों को व्यापक दिशा-निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने चालू वित्त वर्ष के बजट में गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा व अन्य लाभ देने की घोषणा की थी। इसी प्रकार केंद्र सरकार भी गिग वर्कर्स के कल्याण की योजना बना रही है। पात्र व्यक्तियों तक समुचित लाभ पहुंचाने के लिए आवश्यक है कि सभी गिग वर्कर्स का रजिस्ट्रेशन किया जाए, इस कार्य को जल्द पूरा करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। गिग वर्कर्स की नियुक्ति वाले सभी प्लेटफॉर्म से भी संपर्क किया जाए। गिग वर्कर्स को अन्य योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए विशेष शिविर लगाकर उनकी जागरूकता के कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

    श्रम विभाग के प्रधान सचिव राजीव रंजन ने बताया कि इस समय प्रदेश में 21777 गिग वर्कर्स के रजिस्ट्रेशन किए जा चुके हैं और बचे हुए गिग वर्कर्स के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए विभाग द्वारा संबंधित प्लेटफार्म पर कर्मचारियों को भेजकर जानकारी जुटाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग गिग वर्कर्स के रजिस्ट्रेशन तथा अन्य कामगारों तक योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए किए जाने वाले कार्यों का पूरा कैलेंडर बनाकर दें। नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्रम विभाग के माध्यम से श्रमिकों के लिए 30 से अधिक योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं को श्रमिकों तक प्रभावशाली ढंग से पहुंचाने के लिए श्रम विभाग का संरचनात्मक पुनर्गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने विभाग को अगले 5 साल तक प्रतिवर्ष किए जाने वाले कार्यों तथा विजन का पूरा ब्यौरा टाइमलाइन सहित बनाकर उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कार्ययोजना तैयार की जाए। इसके लिए सभी विभागों का संयुक्त सहयोग आवश्यक है। कृषि व घरेलू क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं के श्रम का मूल्यांकन नहीं हो पाता है। कामकाजी महिलाओं को कार्य का उचित माहौल देने के लिए उनके लिए हर जिला में वर्किंग वुमैन होस्टल बनाए जाएं और उनके छोटे बच्चों के लिए क्रैच खोले जाएं। उन्होंने कहा कि ग्रीन जॉब में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। सरकार का लक्ष्य अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी को राष्ट्रीय औसत से ऊपर लेकर जाना है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता, श्रम विभाग के प्रधान सचिव श्री राजीव रंजन, डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव श्रीमती अमनीत पी कुमार, मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव श्री यशपाल यादव सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

     
  • पीने के पानी की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश

    पीने के पानी की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश

    चंडीगढ़ : हरियाणा के जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी एवं लोकनिर्माण मंत्री रणबीर गंगवा ने गर्मी के इस मौसम में पेयजल की सुचारु सप्लाई को लेकर जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग को पूरी तरह अलर्ट मोड पर कर दिया है। उन्होंने विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि गर्मी के इस चुनौतीपूर्ण सीजन में आमजन को किसी भी प्रकार की पेयजल समस्या का सामना न करना पड़े। इसके लिए अधिकारी फील्ड में रहकर कार्य करें, शिकायतों का त्वरित समाधान करें तथा जलापूर्ति व्यवस्था को पूरी क्षमता के साथ संचालित रखें। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि गर्मी का अगला महीना भी विभाग के लिए सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण होता हैं। ऐसे समय में विभागीय अधिकारियों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय पर उपलब्ध रहें तथा बिना अनुमति मुख्यालय न छोड़ें। साथ ही गर्मी के मौसम को देखते हुए कर्मचारियों की छुट्टियां भी रद्द करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी स्थिति में पेयजल आपूर्ति प्रभावित न हो।

    जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री  रणबीर गंगवा ने बुधवार को विभागीय के अधिकारियों के साथ पेयजल व्यवस्था, जल संरक्षण, जल निकासी तथा फ्लड सीजन की तैयारियों को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक की है। बैठक में प्रदेश के सभी सर्कलों की पेयजल व्यवस्था की अलग-अलग समीक्षा की गई तथा उन क्षेत्रों की विशेष रूप से चर्चा की गई जहां से पेयजल संकट की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही हैं। इस दौरान मुख्य अभियंता श्री देवेंद्र दाहिमा सहित विभिन्न सर्कलों के अभियंता उपस्थित रहे, जबकि सभी सर्कलों के अंतर्गत आने वाले अधीक्षण अभियंता (एसई) और उपमंडल अभियंता (एसडीओ) वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े। मंत्री रणबीर गंगवा ने बैठक के दौरान कहा कि प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक तक स्वच्छ, सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से सरकार “हर घर नल में नल और उसमें स्वच्छ जल” के तहत कार्य कर रही है। इसका उद्देश्य केवल पानी पहुंचाना ही नहीं, बल्कि हर परिवार तक गुणवत्तापूर्ण और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना है। विभागीय अधिकारी इस उद्देश्य को मिशन मोड में पूरा करें।

    फील्ड में रहकर करें कामखराबी पर तुरंत लें एक्शन

    जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने एक्सईएन, एसडीओ और जेई स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे नियमित रूप से अपने क्षेत्रों का दौरा करें तथा पेयजल आपूर्ति व्यवस्था की स्वयं निगरानी करें। उन्होंने कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर कार्य न करें बल्कि गांवों और शहरों में जाकर वास्तविक स्थिति का जायजा लें। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसी ट्यूबवेल, मोटर, पाइपलाइन, बूस्टिंग स्टेशन या जलघर में खराबी आती है तो उस पर तत्काल कार्रवाई की जाए। मरम्मत कार्य में देरी के कारण यदि किसी क्षेत्र में पेयजल संकट उत्पन्न होता है तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    सिंचाई विभाग के साथ बेहतर समन्वय बनाने के निर्देश

     कैबिनेट मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने कहा कि गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए सिंचाई विभाग के साथ बेहतर तालमेल आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे प्रत्येक सप्ताह सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करें और नहरों में पानी की उपलब्धता, जल वितरण तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में भूमिगत जल स्तर कम है वहां विशेष रणनीति बनाकर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को टैंकरों या अन्य वैकल्पिक साधनों पर निर्भर न रहना पड़े।

    पानी की बर्बादी रोकने के लिए विशेष अभियान

     जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री श्री रणबीर गंगवा ने बैठक के दौरान जल संरक्षण को लेकर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर में पानी की बर्बादी रोकने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। विभागीय कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वे करें और जहां पानी की अनावश्यक बर्बादी होती दिखाई दे वहां नोटिस जारी किए जाएं। उन्होंने कहा कि पेयजल की सप्लाई आने पर कई स्थानों पर लोगों के घरों से व्यर्थ पानी बह रहा होता है, इस प्रकार की लापरवाही पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि पानी की बर्बादी किसी सूरत में नहीं होनी चाहिए। इसके लिए जागरूकता अभियान चलाने के साथ-साथ नियमों के तहत कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए। मंत्री ने कहा कि जल संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि वर्तमान समय में पानी बचाने की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में जल संकट और गंभीर हो सकता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को पानी बचाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

  • प्रदेश की सभी आईटीआई में बनेंगी मॉडर्न वर्कशॉप

    प्रदेश की सभी आईटीआई में बनेंगी मॉडर्न वर्कशॉप

    चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश की सभी आईटीआई की वर्कशॉप को मॉडर्न करके यहां आधुनिक जरूरतों के अनुरूप उपकरण उपलब्ध करवाए जाएं। सभी विद्यार्थियों को रोजगार सुनिश्चित करने के लिए आईटीआई के कोर्स और पढ़ाई को उद्योगों की जरूरत के अनुसार तैयार किया जाए ताकि युवाओं को कोर्स खत्म होते ही रोजगार मिल सके और उद्योगों को अपनी आवश्यकता के अनुसार कुशल युवा उपलब्ध हो सकें। इसके साथ ही स्वरोजगार करने वाले युवाओं को भी प्रोत्साहित किया जाए और उनके आइडियाज को स्टार्ट-अप में बदलने के लिए उनकी सहायता की जाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश हरियाणा विजन 2047 के अंतर्गत आज हरियाणा सिविल सचिवालय में युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग के अगले 5 वर्ष की कार्ययोजना की समीक्षा करते हुए दिए। उन्होंने कहा कि आईटीआई, पोलिटेक्निक व वोकेशनल शिक्षा देने वाले सभी संस्थानों के शिक्षकों की भी समय-समय पर ट्रेनिंग और उद्योगों के साथ कॉर्डिनेशन करवाया जाए ताकि वे अपने विद्यार्थियों को समय की मांग के अनुरूप तैयार कर सकें। सरकार भी युवाओं को नौकरी देने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन राशि दे रही है ताकि अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार मिल सके।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि समय के साथ उद्योगों की जरूरतों में बदलाव हुए हैं लेकिन आईटीआई जैसे प्रशिक्षण संस्थान अभी भी पुरानी पद्धति से पढ़ाई करवा रहे हैं। इसके चलते उद्योगों को कार्यकुशल युवा नहीं मिल पा रहे हैं और कोर्स कर चुके युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता है। इसके लिए जरूरी है कि सभी आईटीआई में कोर्स और वर्कशॉप को पूरी तरह से उद्योगों की मांग के अनुरूप व मॉडर्न किया जाए। युवा सशक्तिकरण एवं उद्यमिता विभाग के प्रधान सचिव श्री राजीव रंजन ने बताया कि आईटीआई की वर्कशॉप्स को मॉडर्न करने का सर्वे करवाया जा रहा है। पहले चरण में सर्वे हो चुकी आईटीआई के लिए 10 करोड़ रुपये के आधुनिक उपकरणों की खरीद के ऑर्डर कर दिए गए हैं, जल्द ही ये उपकरण आईटीआई में पहुंच जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग उद्योगों के साथ एमओयू साइन करके युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करके उन्हें रोजगार के काबिल बनाए। विभाग सभी उद्योगों से समन्वय बनाकर उनकी जरूरतों का अध्ययन करे और उसी के अनुरूप कुशल युवा तैयार करे। उन्होंने कहा कि अगली तिमाही में होने वाली बैठक में विभाग उन्हें यह विवरण प्रदान करे कि कितने उद्योगों के साथ समझौते किए गए हैं।

    नायब सिंह सैनी ने कहा कि आईटीआई व पोलिटेक्निक के शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिलवाया जाए ताकि वे भी अपने आप को समय की जरूरत के अनुसार अपडेट कर सकें। आईटीआई शिक्षकों को उद्योगों की जरूरतों का अध्ययन करने के लिए औद्योगिक इकाइयों में भी भेजा जाए। इसी प्रकार समय-समय पर उद्योगों के प्रतिनिधि या विशेषज्ञों को आईटीआई में बुलाकर विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन कार्यक्रम करवाए जाएं। अधिकारियों ने बताया कि कुरुक्षेत्र में प्रदेश स्तरीय इंस्ट्रक्टर ट्रेनिंग सेंटर खोलने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सेंटर तैयार होने तक प्रदेश के श्री विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय के साथ मिलकर इसी साल से शिक्षकों की ट्रेनिंग करवाई जाए। डिपार्टमेंट ऑफ फ्यूचर की प्रधान सचिव अमनीत पी कुमार ने बताया कि विदेश सहयोग विभाग के माध्यम से युवाओं को विदेश में रोजगार उपलब्ध करवाने हेतु प्रदेश में 4 जिलों में प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएंगे। दो जिलों, करनाल व पंचकूला में इनके लिए स्थान चिह्न्ति किए जा चुके हैं, दो जिलों का चयन करने की प्रक्रिया चल रही है। इन केंद्रों के शुरू होने के बाद अधिक से अधिक युवाओं को विदेशों में रोजगार के लिए तैयार किया जा सकेगा।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए अधिक से अधिक रोजगार मेले लगवाए जाएं। मुख्यमंत्री ने गत वर्ष आयोजित किए गए रोजगार मेलों की संख्या और इनके माध्यम से रोजगार प्राप्त युवाओं की संख्या की जानकारी मांगते हुए कहा कि प्लेसमेंट और ऑफर लैटर मिलने वाले युवाओं की ट्रेकिंग करवाई जाए ताकि पता लगे कि उसे स्थाई रोजगार मिला है या नहीं। उन्होंने कहा कि रोजगार अधिकारियों को भी उद्योगों में जाकर उनकी जरूरतों की जानकारी लेते रहना चाहिए और उसी के अनुरूप विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करना चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री अरुण कुमार गुप्ता,  मुख्यमंत्री के ओएसडी व स्वर्ण जयंती हरियाणा राजकोषीय प्रबंधन संस्थान के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू तथा मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव यशपाल यादव सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।

  • ऊर्जा मंत्री अनिल विज का बिजली कॉल सेंटर पर औचक निरीक्षण

    ऊर्जा मंत्री अनिल विज का बिजली कॉल सेंटर पर औचक निरीक्षण

    चण्डीगढ़ : हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने आज पंचकूला स्थित उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम के कॉल सेंटर का औचक निरीक्षण कर बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के निस्तारण की व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कॉल सेंटर में आने वाली शिकायत कॉल्स, उनके समाधान की प्रक्रिया तथा उपभोक्ताओं को दिए जा रहे रिस्पॉन्स की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी कार्यप्रणाली की जानकारी भी ली।

    औचक निरीक्षण के उपरांत मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए 1912 कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी उपभोक्ता को बिजली आपूर्ति या बिलिंग संबंधी कोई समस्या आती है तो वह सीधे कर्मचारियों को फोन करने की बजाय 1912 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाए, ताकि शिकायतों की मॉनिटरिंग पारदर्शी तरीके से हो सके और उपभोक्ताओं व कर्मचारियों के बीच किसी प्रकार की असुविधा या विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।

    विज ने बताया कि पंचकूला स्थित इस कॉल सेंटर में लगभग 250 कर्मचारी 24 घंटे कार्यरत रहते हैं और बिजली से संबंधित शिकायतों को लगातार अटेंड करते हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं यह देखने के लिए यहां पहुंचे हैं कि शिकायतों का निस्तारण तय समयसीमा के भीतर और प्रभावी ढंग से हो रहा है या नहीं। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कई उपभोक्ताओं से सीधे फोन पर बातचीत कर शिकायत समाधान की स्थिति की जानकारी ली। कुछ उपभोक्ताओं ने समाधान पर संतोष जताया, जबकि कुछ मामलों में अपेक्षित रिस्पॉन्स न मिलने की बात सामने आई, जिस पर उन्होंने अधिकारियों को तुरंत सुधार के निर्देश दिए। ऊर्जा मंत्री ने कहा कि विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि शहरी क्षेत्रों में बिजली संबंधी शिकायतों का समाधान अधिकतम दो घंटे के भीतर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार घंटे के भीतर सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बताया कि आज कॉल सेंटर में लगभग 2500 शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिनमें से आधी शिकायतों का समाधान किया जा चुका है, जबकि शेष शिकायतों पर तेजी से कार्य जारी है।

    मोरनी क्षेत्र की एक शिकायत का उल्लेख करते हुए विज ने बताया कि वहां पिछले दिन से बिजली आपूर्ति बाधित थी। इस संबंध में उन्होंने तत्काल संबंधित अधीक्षण अभियंता से बातचीत कर मौके पर स्टाफ भेजने और शीघ्र बिजली बहाल करने के निर्देश दिए। इसी प्रकार, रोहतक क्षेत्र में अधिक शिकायतें मिलने पर उन्होंने वहां के अधिकारियों को भी शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। विज ने कहा कि उन्होंने स्वयं अपने मोबाइल फोन से भी कॉल सेंटर में एक शिकायत दर्ज कर उसकी कार्यप्रणाली की जांच की। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो कॉल सेंटर में अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती भी की जाएगी ताकि बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों का और अधिक तेजी एवं प्रभावी तरीके से समाधान सुनिश्चित किया जा सके। औचक निरीक्षण के दौरान ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बिजली उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और शिकायतों के समाधान में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ जवाबदेही तय की जाए। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार उपभोक्ताओं को बेहतर, पारदर्शी और जवाबदेह बिजली सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

  • ड्रोन सर्वे के आधार पर होगा शिकोहपुर भूमि मामले का समाधान 

    ड्रोन सर्वे के आधार पर होगा शिकोहपुर भूमि मामले का समाधान 

    चंडीगढ़ : हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नगर निगम मानेसर के गांव शिकोहपुर में अनुसूचित जाति के लोगों के लिए चिन्हित लगभग सात एकड़ भूमि का ड्रोन सर्वे करवाकर 15 जून तक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। यह भूमि खसरा नंबर 2345 में स्थित है, जिसे ग्राम पंचायत द्वारा अनुसूचित जाति कॉलोनी निर्माण हेतु चिन्हित किया गया था।राव नरबीर सिंह आज इस मुद्दे पर बुलाई गई शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में उपायुक्त गुरुग्राम तथा आयुक्त नगर निगम मानेसर ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।

    वर्ष 1991 में 13 लोगों को किया गया था भूमि आवंटन

    बैठक में उपायुक्त गुरुग्राम ने मंत्री को अवगत कराया कि वर्ष 1991 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के कृषि विकास केंद्र से संबंधित यह भूमि अनुसूचित जाति के 13 लोगों को आवंटित की गई थी। अधिकारियों ने बताया कि पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से लोगों का बसासत कब्जा इस भूमि पर बना हुआ है। राव नरबीर सिंह ने कहा कि हिसार के चार गांवों से जुड़े इसी प्रकार के भूमि मामले में कैबिनेट द्वारा स्वीकृत नीति को आधार बनाते हुए वर्ष 2004 के कलेक्टर रेट के अनुसार लोगों को विभिन्न श्रेणियों के प्लॉट आवंटित किए जाएं।

    गैरकानूनी कब्जों की भी होगी जांच

    मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भूमि पर कब से कितने लोग काबिज हैं तथा कहीं कोई व्यक्ति गैरकानूनी तरीके से कब्जा तो नहीं किए हुए है। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि वर्तमान में यह भूमि पंचायत के अधीन नहीं है, इसलिए इस संबंध में निर्णय हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 के तहत लिया जाएगा। साथ ही ड्रोन सर्वे का कार्य हरियाणा सरकार की अधिकृत एजेंसी से करवाया जाएगा।

    महेंद्रगढ़ में विकास कार्यों की भी हुई समीक्षा बैठक में नगरपालिका महेंद्रगढ़ के विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि विकास कार्यों के लिए 22 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की जा चुकी है, जिसमें से 13 करोड़ रुपये बरसाती पानी की निकासी के लिए निर्धारित किए गए हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि मानसून से पहले नालों एवं सीवरेज की सफाई का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। बैठक में महेंद्रगढ़ से विधायक कँवर सिंह, आयुक्त एवं सचिव पंचायत एवं विकास श्री वाई एस गुप्ता, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के निदेशक श्री मुकुल कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।