Category: Government News|Himachal

  • 40 कनिष्ठ अभियंताओं को जल शक्ति विभाग में सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर मिली पदोन्नति

    40 कनिष्ठ अभियंताओं को जल शक्ति विभाग में सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर मिली पदोन्नति

    शिमला : जल शक्ति विभाग द्वारा 40 कनिष्ठ अभियंताओं को सहायक अभियंता (सिविल) के पद पर पदोन्नत किया गया है। विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अभिषेक जैन ने कहा कि 08 जुलाई, 2026 को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक में पात्र कनिष्ठ अभियंताओं को सहायक अभियंता (सिविल) के स्वीकृत रिक्त पदों पर पदोन्नत करने की अनुशंसा की गई थी। उन्होंने बताया कि इनमें डिप्लोमा धारक श्रेणी से 22 तथा स्नातक/एएमआईई श्रेणी से 18 कनिष्ठ अभियंताओं के नाम शामिल हैं। श्रेणीवार अनुशंसित पदोन्नतियों में सामान्य वर्ग के 21, अन्य पिछड़ा वर्ग के 6, अनुसूचित जाति के 9 तथा अनुसूचित जनजाति के 4 अधिकारी शामिल हैं।

    इसके अतिरिक्त, 12 कनिष्ठ अभियंताओं को एसडीओ के पदों पर पदोन्नत किया गया है। यह पदोन्नतियां निकट भविष्य में रिक्त होने वाले एसडीओ के पदों के विरुद्ध की गई हैं। उन्होंने कहा कि इन पदोन्नतियों से विभाग की प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही विभिन्न परियोजनाओं एवं विकास कार्यों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक तकनीकी पदों पर अनुभवी अधिकारियों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली और अधिक सुदृढ़ बनेगी।

    उन्होंने कहा कि जल शक्ति विभाग प्रदेश में पेयजल आपूर्ति, सिंचाई एवं जल संसाधनों के विकास, संचालन और रख-रखाव का कार्य करता है। विभाग प्रदेश के नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण एवं सुचारू सेवाएं उपलब्ध करवाने मे महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह पदोन्नतियां उच्च न्यायालय में दाखिल विभिन्न याचिकाओं पर न्यायालय के अंतिम निर्णय के आधार पर प्रभावी होंगी। उन्होंने कहा कि इन पदोन्नतियों के माध्यम से विभाग अपनी संस्थागत क्षमता को और मजबूत करने तथा प्रदेश के लोगों को बेहतर एवं समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में अपनी प्रतिबद्धता को और सशक्त करेगा।

  • राज्यपाल ने समाजसेवी राज कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया

    राज्यपाल ने समाजसेवी राज कुमार के निधन पर शोक व्यक्त किया

    शिमला : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने सोलन जिला के अर्की के प्रसिद्ध समाजसेवी राज कुमार के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। वे 85 वर्ष के थे। अपने शोक संदेश में राज्यपाल ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना तथा शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त की। राज कुमार सेना प्रशिक्षण कमांड शिमला से वरिष्ठ लेखा अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। सेवानिवृत्ति के उपरांत उन्होंने अपना जीवन विभिन्न सामाजिक गतिविधियों के लिए समर्पित कर दिया और मानव कल्याण के कार्यों में सक्रिय रहे। वे नियमित रूप से विभिन्न धार्मिक संस्थाओं एवं आश्रमों को सहयोग प्रदान करते थे तथा अपने गांव के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को हर महीने राशन एवं अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाते थे।

    उनके निःस्वार्थ सेवाभाव को याद करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वह रेड क्रॉस से भी जुड़े रहे और जीवनपर्यन्त मानवता की सेवा के लिए समर्पित रहे। उन्होंने कहा कि वंचित एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता के प्रति उनके समर्पण और करुणा की भावना समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका निधन समाज के लिए एक

  • राज्य सरकार ने 3336 करोड़ रुपये की बिजली परियोजनाओं के कार्यान्वयन समझौते हस्ताक्षरित किए

    राज्य सरकार ने 3336 करोड़ रुपये की बिजली परियोजनाओं के कार्यान्वयन समझौते हस्ताक्षरित किए

    मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग की उपलब्धि को सराहा

    शिमला : प्रदेश सरकार ने इस वर्ष के दौरान लगभग 3336 करोड़ रुपये लागत की 278 मेगावाट क्षमता की 19 जल विद्युत परियोजनाओं के कार्यान्वयन समझौते हस्ताक्षरित किए हैं। इनमें 9 मेगावाट की सोयल डाशल, 6 मेगावाट की खौली-2, 9 मेगावाट की ग्रामांग, 10 मेगावाट की उमली, 24 मेगावाट की भरमौर चरण-1, 21 मेगावाट की भरमौर चरण-2, 22.5 मेगावाट की हरसर, चरण-2, 19 मेगावाट की हरसर, चरण-3, 24 मेगावाट की टुंडह चरण-2, 18 मेगावाट की जंगलिक, 15 मेगावाट की रूपिन चरण-2, 17 मेगावाट की दुनाली-1 एवं 2, 12 मेगावाट की जरी, 18 मेगावाट की तोरल कुंडली, 15 मैगावाट की टुंडन, 10 मेगावाट की कोट डोगरी, 8 मेगावाट की अप्पर कुर्मी, 11 मेगावाट की कलाल खोल और 9.6 मेगावाट की मेलन विद्युत परियोजनाएं शामिल हैं।

    प्रदेश सरकार ने यह भी पाया कि पहले से आवंटित 15 विद्युत परियोजनाओं के निर्माणकर्त्ताओं ने परियोजना के कार्यान्वयन में कोई विशेष रूचि नहीं दिखाई तथा सरकार ने इन परियोजनाओं का आवंटन रद्द कर दिया। सरकार पुनः इनके त्वरित कार्यान्वयन के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर निविदाएं आमंत्रित करने के लिए प्रयासरत है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने ऊर्जा विभाग की उपलब्धियों के लिए विभाग अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में विद्यमान विद्युत क्षमता के दोहन के लिए सरकार कृत संकल्प है। उन्होंने ऊर्जा विभाग की इस क्षमता के त्वरित दोहन के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऊर्जा के क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अपनी ऊर्जा नीति में संशोधन करते हुए 25 मेगावाट क्षमता तक की जल विद्युत परियोजनाओं में रॉयल्टी दरों में बदलाव कर 40 वर्षों के लिए एक समान 12 प्रतिशत कर दिया है।

    उन्होंने कहा कि 150 मैगावाट की टिडोंग, चरण-1 जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। प्रदेश सरकार ने जियो थर्मल विद्युत परियोजना के अन्वेषण व विकास के लिए जियो ट्रॉपी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किया है। प्रदेश में विद्यमान लगभग 24000 मेगावाट विद्युत क्षमता में से राज्य द्वारा 12588 मेगावाट क्षमता की 189 परियोजनाओं का निर्माण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि 1528 मेगावाट क्षमता की 54 परियोजनाएं निर्माणधीन हैं तथा 7539 मेगावाट क्षमता की 526 परियोजनाएं स्वीकृति के विभिन्न चरणों में है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार विद्युत क्षमता के दोहन को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान कर रही है ताकि हिमाचल प्रदेश को आर्थिक तौर पर समृद्ध किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इन परियोजनाओं में प्रदेश के हितों को सुरक्षित रखकर ही समझौता ज्ञापन कर रही है।

  • कांग्रेस सरकार के प्रयासों से 137 करोड़ रुपये से सुदृढ़ होगी चैल-चौक-जंजैहली सड़कः मुख्यमंत्री

    कांग्रेस सरकार के प्रयासों से 137 करोड़ रुपये से सुदृढ़ होगी चैल-चौक-जंजैहली सड़कः मुख्यमंत्री

    शिमला : मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू से आज उनके सरकारी आवास ‘ओक ओवर’ में मंडी जिला के सराज विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न प्रतिनिधिमंडलों ने ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश रेड्डी के नेतृत्व में शिष्टाचार भेंट की तथा क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न मुदृदों पर विस्तृत चर्चा की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को सराज विधानसभा क्षेत्र के दौरे के लिए आमंत्रित भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार प्रदेश के सभी क्षेत्रों के संतुलित एवं समान विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सराज विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न सड़कों के रख-रखाव एवं सुदृढ़ीकरण के लिए धनराशि स्वीकृत करने की घोषणा की। इनमें नौणा-छलैला-विनीधार सड़क के लिए 10 लाख रुपये, बालीचौकी-खलोआ-शारश सड़क के लिए 20 लाख रुपये, नौणा-भराड़ी सड़क के लिए 10 लाख रुपये, खनेठी-खूहन सड़क के लिए 10 लाख रुपये तथा हणोगी-शलोई-छमार सड़क के लिए 10 लाख रुपये प्रदान किए जाएंगे।

    सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार के सतत प्रयासों से चैल-चौक-जंजैहली सड़क को चौड़ा करने के लिए 137.40 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत हुई है। आपदा के दौरान हुए व्यापक नुकसान तथा मंडी जिला में संपर्क व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से कांग्रेस सरकार ने 83 किलोमीटर लंबी इस सड़क परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर केंद्रीय सड़क एवं अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) के तहत भेजा। इस परियोजना के पूर्ण होने से क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि आपदा के दौरान सराज विधानसभा क्षेत्र में काफी नुकसान हुआ और उन्होंने स्वयं इस विधानसभा क्षेत्र का दौरा कर प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। प्रभावित परिवारों को राज्य सरकार द्वारा अधिकतम सहायता उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने कहा कि देश में पहली बार हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपने संसाधनों से आपदा प्रभावितों को दी जाने वाली राहत राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने विशेष राहत पैकेज के माध्यम से आपदा प्रभावित परिवारों को अभूतपूर्व सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है। इसके तहत पूर्णतः क्षतिग्रस्त मकानों के लिए राहत राशि को 1.30 लाख रुपये से बढ़ाकर 7 लाख रुपये कर दिया गया है। अन्य आर्थिक सहायता को मिलाकर प्रभावित परिवारों को कुल 8 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि घरेलू उपयोग की वस्तुओं के नुकसान पर दी जाने वाली राहत राशि को 2,500 रुपये से बढ़ाकर मकान मालिकों के लिए 1 लाख रुपये तथा किरायेदारों के लिए 50 हजार रुपये किया गया है। आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कच्चे एवं पक्के मकानों के लिए भी 1 लाख रुपये की सहायता राशि निर्धारित की गई है।

    सुक्खू ने कहा कि पूर्व में पॉलीहाउस को क्षति तथा मकानों से मलबा अथवा गाद हटाने के लिए किसी प्रकार की राहत राशि का प्रावधान नहीं था, लेकिन वर्तमान सरकार ने पॉलीहाउस के नुकसान पर 25 हजार रुपये तथा मलबा या गाद हटाने के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पशुधन के नुकसान पर दी जाने वाली मुआवजा राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। गाय की मृत्यु पर 55 हजार रुपये तथा भेड़ एवं बकरियों के लिए प्रति पशु 9 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है। इसके अतिरिक्त, गौशालाओं के पुनर्निर्माण के लिए 50 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान भी किया गया है। जगदीश रेड्डी ने क्षेत्र की सड़कों के लिए धनराशि उपलब्ध करवाने पर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार के कार्यकाल में सराज विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए अभूतपूर्व सहयोग और संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

     

  • समावेशी, टिकाऊ और सशक्त पशुपालन अर्थव्यवस्था की नींव रखेगी नई चराई नीति-2026

    समावेशी, टिकाऊ और सशक्त पशुपालन अर्थव्यवस्था की नींव रखेगी नई चराई नीति-2026

     शिमला : पशुपालकों की आजीविका में सुधार लाने और राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने ‘हिमाचल प्रदेश चराई नीति-2026’ को मंजूरी प्रदान की है। यह नीति चराई प्रबंधन व्यवस्था में सुधार कर उसे पर्यावरणीय संतुलन और आर्थिक सशक्तिकरण के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी नीति के अंतर्गत अब पारंपरिक और कठोर प्रतिबंधों के स्थान पर वैज्ञानिक और लचीला दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। नीति में जिम्मेदार चराई को घास भूमियों की उत्पादकता बनाए रखने, मिट्टी में कार्बन भंडारण बढ़ाने तथा जैव विविधता के संरक्षण का प्रभावी माध्यम माना गया है इस नीति के अंतर्गत पशुपालन विभाग के सहयोग से वन विभाग एक व्यापक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करेगा जिसमें अगले छह माह के भीतर पशुपालकों को अपना नाम, पता, पशुओं की संख्या, पारंपरिक चराई मार्ग और पड़ाव स्थलों का पंजीकरण करवाना होगा। इस प्रणाली के माध्यम से पशुपालकों की जानकारी को आधार पर आधुनिक विधि से हिम परिवार और भारत पशुधन पोर्टल से जोड़ा जाएगा जिससे उनकी पहचान और विवरण का सत्यापन आसानी से किया जा सकेगा।

    इस नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उन पारंपरिक पशुपालकों को भी मान्यता दी जाएगी, जो वर्षों से बिना किसी औपचारिक अनुमति के चराई कार्य करते रहे हैं। ऐसे पशुपालक अब अपना पंजीकरण करवा सकेंगे, जिसके बाद स्थानीय चराई सलाहकार समितियां उनके मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार नए परमिट जारी करेंगी।
    नई चराई अनुमति देने की प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक आधार पर होगी। इसके लिए चरागाहों की उपलब्धता, वन क्षेत्रों की वहन क्षमता, वन्यजीवों की आवश्यकताएं तथा स्थानीय लोगों के पारंपरिक चराई अधिकारों का आकलन किया जाएगा। राज्य के वन क्षेत्रों के संरक्षण और पुनर्जीवन को सुनिश्चित करने के लिए नीति में क्रमबद्ध चराई व्यवस्था (रोटेशनल ग्रेजिंग) का प्रावधान किया गया है। इसके अंतर्गत चराई सलाहकार समितियां समय-समय पर चराई गतिविधियों की समीक्षा करेंगी।

    इन समितियों में प्रवासी और स्थानीय पशुपालकों, पंचायत प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों तथा ऊन संघ के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। वन संरक्षक और जिला वन अधिकारी की अध्यक्षता में कार्य करने वाली ये समितियां प्रत्येक पांच वर्ष में पर्यावरणीय परिस्थितियों के आधार पर चराई परमिटों की समीक्षा करेंगी। नीति के अनुसार, ऐसे चराई परमिट जिनका उपयोग नहीं किया जा रहा है या जो अनुपस्थित व्यक्तियों के नाम पर हैं, उन्हें विस्तृत जांच के बाद रद्द किया जाएगा। इसके बाद उपलब्ध चराई क्षमता को ग्राम सभाओं के माध्यम से सक्रिय और वास्तविक पशुपालकों को आवंटित किया जाएगा।
    इसके अलावा पारंपरिक चरवाहों, जिन्हें ‘पोहाल’ कहा जाता है, को भी आधिकारिक रूप से राज्य पोर्टल में शामिल कर उनकी सुरक्षा और आजीविका को संरक्षण दिया जाएगा।

    पारंपरिक चराई विरासत को आधुनिक विकास परियोजनाओं से सुरक्षित रखने के लिए नीति में पारंपरिक प्रवासी मार्गों, जल स्रोतों और पड़ाव स्थलों के संरक्षण का विशेष प्रावधान किया गया है। इन सभी मार्गों को विशेष मानचित्रण परियोजना के तहत जियो-टैग किया जाएगा। साथ ही सात वर्ष से अधिक पुराने वनरोपण क्षेत्रों में नियंत्रित चराई की अनुमति दी जाएगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण और पारंपरिक पशुपालन दोनों को बढ़ावा मिल सके। ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि चराई नीति-2026 हमारी ‘हरियाली भी, खुशहाली भी’ की सोच को साकार करती है। यह हमारे चरागाहों की रक्षा करती है, पशुपालक परंपराओं का सम्मान करती है और पशुधन पर निर्भर परिवारों के भविष्य को सुरक्षित बनाती है। यह नीति पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि के बीच संतुलन स्थापित करते हुए राज्य में एक समावेशी, टिकाऊ और सशक्त पशुपालन अर्थव्यवस्था की नींव रखेगी।

  • मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जनगणना-2027 में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान

    मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से जनगणना-2027 में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का किया आह्वान

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज जनगणना-2027 के तहत चल रहे स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) अभियान में भाग लिया और ऑनलाइन पोर्टल ेमण्बमदेनेण्हवअण्पद  के माध्यम से जनगणना संबंधी अपनी जानकारी दर्ज की। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश की जनगणना संचालन निदेशक दीप शिखा शर्मा और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को डिजिटल जनगणना की प्रक्रिया, इसकी प्रमुख विशेषताओं तथा नागरिकों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और 15 जून, 2026 तक अपनी स्व-गणना पूरी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जनगणना लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था और विकास की आधारशिला है, जो जनसंख्या, परिवारों की स्थिति, आवास, संसाधनों तथा सार्वजनिक सेवाओं तक पहुंच से संबंधित महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाती है। इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विकास योजनाएं बनाई जाती हैं तथा जनकल्याणकारी नीतियों और कार्यक्रमों का निर्माण किया जाता है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जनगणना-2027 दो चरणों में आयोजित की जाएगी। प्रथम चरण 16 जून से 15 जुलाई, 2026 तक संचालित किया जाएगा, जोकि ‘गृह सूचीकरण एवं आवास जनगणना’ पर आधारित होगा। द्वितीय चरण में जनसंख्या गणना की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से की जाएगी। गणनाकर्ता (एन्यूमरेटर) और पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) मोबाइल उपकरणों के माध्यम से घरों और परिवारों से संबंधित जानकारी एकत्रित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के दुर्गम बर्फबारी प्रभावित क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 11 से 30 सितंबर, 2026 तक होगी, जबकि अन्य क्षेत्रों में यह कार्य 9 से 28 फरवरी, 2027 तक संपन्न किया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस राष्ट्रीय महत्त्व के अभियान को सफल बनाने के लिए गणनाकर्ताओं, पर्यवेक्षकों तथा अन्य जनगणना अधिकारियों को सही एवं पूर्ण जानकारी उपलब्ध करवाकर सहयोग करने का आग्रह किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक देहरा कमलेश ठाकुर तथा मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार भी उपस्थित थे।

  • पूर्व सैनिकों ने मानद नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया

    पूर्व सैनिकों ने मानद नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया

    हिमाचल प्रदेश पुलिस में कार्यरत पूर्व सैनिकों ने आज ओक ओवर में आयोजित एक समारोह में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। राज्य सरकार के हाल ही में लिए गए निर्णय के तहत 246 पूर्व सैनिकों को हेड कांस्टेबल तथा 115 को सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) के रूप में नियुक्ति प्रदान की गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हेड कांस्टेबल सुधीर शर्मा और कांस्टेबल रवि दत्त के पाइपिंग समारोह में भाग लिया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान राज्य सरकार पुलिस बल में पूर्व सैनिकों के अनुभव, समर्पण और अनुशासन को अत्यंत महत्व देती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रावधानों के अनुसार पुलिस कर्मियों को मानद हेड कांस्टेबल के पद के लिए 20 वर्ष तथा मानद सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) के पद के लिए 32 वर्ष की सेवा पूर्ण करनी होती है। पूर्व सैनिक सामान्यतः अपने सेवाकाल के अपेक्षाकृत बाद के चरण में पुलिस सेवा में शामिल होते हैं, जिसके कारण उनके पास इन मानद नियुक्ति के लिए आवश्यक सेवा अवधि पूर्ण करने का पर्याप्त समय नहीं बचता।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों के लिए पात्रता सेवा अवधि में आवश्यक छूट देने का निर्णय लिया है ताकि उन्हें मानद हेड कांस्टेबल और मानद एएसआई के रूप में नियुक्ति का अवसर मिल सके। उन्होंने कहा कि यह निर्णय राष्ट्र और राज्य के प्रति उनके अमूल्य योगदान तथा सेवाओं को उचित सम्मान प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगा। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व सैनिकों ने पहले देश की सीमाओं की रक्षा कर राष्ट्र की सेवा की है और अब पुलिस बल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्हें एक रैंक उच्च नियुक्ति देने से उनकी गरिमा बढ़ेगी और उनकी सेवाओं को उचित सम्मान मिलेगा। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों में अग्निवीर भर्ती योजना लागू होने के बाद युवाओं का सेना के प्रति आकर्षण कुछ कम हुआ है। इसके बावजूद राज्य सरकार अग्निवीरों के लिए रोजगार के अधिकतम अवसर सृजित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 218 के तहत पहले कानूनी संरक्षण केवल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को प्राप्त था, लेकिन राज्य सरकार ने अब कठिन और प्रतिकूल परिस्थितियों में कार्य करने वाले पुलिस कर्मियों तक भी यह संरक्षण विस्तारित कर दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पुलिस बल के आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या को तर्कसंगत बनाया जा रहा है। आईएएस, आईपीएस और आईएफएस कैडर में भी कमी की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नशे के खिलाफ, विशेष रूप से ‘‘चिट्टा’’ की तस्करी के विरुद्ध व्यापक अभियान शुरू किया है, जिसमें पुलिस विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सरकार नशा तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है और नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में संलिप्त पाए जाने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध भी सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी तथा अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे।

     

  • राज्यपाल ने एनसीसी माउंट दियो टिब्बा अभियान-2026 को झंडी दिखाकर किया रवाना

    राज्यपाल ने एनसीसी माउंट दियो टिब्बा अभियान-2026 को झंडी दिखाकर किया रवाना

    एनसीसी चरित्र निर्माण, नेतृत्व, देशभक्ति और अनुशासन का प्रतीक : राज्यपाल

    शिमला : राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने आज लोक भवन, से राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के माउंट दियो टिब्बा अभियान-2026 को झंडी दिखाकर रवाना किया। यह हिमालयी पर्वतारोहण अभियान पर जाने वाले कैडेटस एवं स्टाफ के लिए आयोजित औपचारिक समारोह था। राज्यपाल ने इस अवसर पर कैडेटस को संबोधित करते हुए उन्हें साहस, अनुशासन और टीम भावना की उत्कृष्ट परंपराओं को बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि साहसिक गतिविधियां युवाओं में आत्मविश्वास, सहनशक्ति, नेतृत्व क्षमता तथा दृढ़ संकल्प की भावना विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
    कविन्द्र गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) चरित्र निर्माण, नेतृत्व क्षमता, देशभक्ति और अनुशासन का प्रतीक है। यह युवाओं में जिम्मेदार नागरिक बनने व नेतृत्व की भावना का विकास करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के अभियान और गतिविधियों में भाग लेने वाले प्रतिभागी फिटनेस, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रसेवा के प्रेरक दूत बनकर उभरते हैं। उन्होंने कहा कि साहसी, अनुशासित और समर्पित युवा ही विकसित भारत की सशक्त नींव हैं।

    राज्यपाल ने कहा कि माउंट दियो टिब्बा अभियान में भाग ले रहे कैडेटस देश की युवा शक्ति की अपार क्षमता और सामर्थ्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका समर्पण, दृढ़ संकल्प और कठिन परिश्रम अन्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने अभियान दल को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि यह चुनौतीपूर्ण अभियान उनके साहसिक जज्बा, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों से जूझने की क्षमता को और अधिक मजबूत करेगा। 6,001 मीटर की ऊंचाई तक संचालित होने वाला माउंट दियो टिब्बा अभियान एनसिसी के प्रमुख पर्वतारोहण अभियानों में से एक है। इस दल में देशभर से कठोर चयन प्रक्रिया और विशेष प्रशिक्षण के बाद चुने गए कैडेटस शामिल हैं। इन कैडेटस को अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान (एबीवीआईएमएएस), सोलंग वैली में प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। अभियान के दौरान दल को ग्लेशियर यात्रा, हिमकला (स्नो क्राफ्ट) तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जीवन-निर्वाह जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना होगा। इस अभियान का नेतृत्व विंग कमांडर कुनाल शर्मा कर रहे हैं।

    इससे पूर्व, एनसीसी अधिकारियों ने राज्यपाल को अभियान के उद्देश्यों एवं तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर एनसीसी महानिदेशालय के अतिरिक्त महानिदेशक मेजर जनरल विकास भारद्वाज, उप महानिदेशक जनरल ब्रिगेडियर राजीव कपूर, राज्यपाल के सचिव संदीप भारद्वाज, ग्रुप कमांडर कर्नल आदित्य वर्मा, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और अन्य गणमान्य उपस्थित थे।

  • राज्यपाल ने स्व-गणना अभियान का शुभारम्भ किया

    राज्यपाल ने स्व-गणना अभियान का शुभारम्भ किया

    शिमला : राज्यपाल कविन्द्र गुप्ता ने आज लोक भवन से जनगणना-2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत स्व-गणना अभियान का शुभारम्भ किया। यह अभियान 1 जून से 15 जून, 2026 तक प्रदेश भर में संचालित किया जाएगा, जिसके माध्यम से नागरिक डिजिटल पोर्टल पर स्वयं अपनी जनगणना संबंधी जानकारी दर्ज कर सकेंगे।
    राज्यपाल ने इस अवसर पर स्वयं ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी स्व-गणना प्रक्रिया पूर्ण कर प्रदेशवासियों को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया। इस अवसर पर निदेशक, जनगणना संचालन, हिमाचल प्रदेश, दीप शिखा शर्मा और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अधिकारियों ने राज्यपाल को डिजिटल जनगणना प्रक्रिया तथा इसके विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्रदान की।

    राज्यपाल ने प्रक्रिया को पूर्ण करने के उपरांत जनगणना के महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या संबंधी आंकड़े एकत्रित करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह देश और प्रदेश की भावी विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी नीतियों तथा प्रशासनिक निर्णयों की आधारशिला है। कविन्द्र गुप्ता ने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि वे 1 जून से 15 जून के बीच स्व-गणना प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कर इस राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें। राज्यपाल ने नागरिकों को स्व-गणना पूर्ण होने के उपरांत प्राप्त होने वाली स्व-गणना पहचान संख्या को सुरक्षित रखने का परामर्श दिया। अभियान के अगले चरण में 16 जून से 15 जुलाई, 2026 तक घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित की जाएगी। स्व-गणना कर चुके लोगों द्वारा अपनी पहचान संख्या उपलब्ध करवाने से जनगणना कार्य अधिक सुगमता एवं दक्षता के साथ सम्पन्न हो सकेगा।

    कविन्द्र गुप्ता ने सटीक एवं प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराने के महत्त्व पर बल देते हुए कहा कि प्रभावी प्रशासन और योजनाबद्ध विकास के लिए सही आंकड़ों का होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर आधारित होती हैं। नागरिकों द्वारा सही जानकारी प्रदान करने से योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक पहुंचाने तथा समाज के सभी वर्गों का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। राज्यपाल ने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के बाद विकास की बदलती आवश्यकताओं और नई चुनौतियों को देखते हुए जनगणना-2027 से प्राप्त होने वाले आंकड़े राज्य एवं राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण सिद्ध होंगे।

    उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर तथा उत्तराखंड जैसे पर्वतीय एवं दुर्गम राज्यों में समयबद्ध और प्रभावी आंकड़ा संकलन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से स्व-गणना अभियान को विशेष प्राथमिकता प्रदान की गई है। राज्यपाल ने समाज के सभी वर्गों से इस अभियान में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान करते हुए कहा कि जन सहभागिता ही डिजिटल जनगणना अभियान की सफलता की कुंजी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेशवासी इस महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लेंगे। उन्होंने कहा कि जनगणना से प्राप्त सटीक आंकड़े हिमाचल प्रदेश के समावेशी, संतुलित एवं सतत विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेंगे।

  • मानव संसाधन विभाग में लिंक अधिकारी नामित

    मानव संसाधन विभाग में लिंक अधिकारी नामित

    चंडीगढ़ : जून-हरियाणा सरकार ने मानव संसाधन विभाग में प्रशासनिक कार्यों का सुचारू एवं निर्बाध संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिंक अधिकारी नामित किए हैं। मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, मानव संसाधन विभाग के निदेशक की अनुपस्थिति में नागरिक उड्डयन विभाग के निदेशक को लिंक अधिकारी-1 तथा विदेश सहयोग विभाग के निदेशक को लिंक अधिकारी-2 नामित किया गया है।

    संबंधित अधिकारी के अवकाश, प्रशिक्षण, दौरे, चुनाव ड्यूटी अथवा किसी अन्य कारण से अनुपस्थित रहने की स्थिति में तथा स्थानांतरण या सेवानिवृत्ति के कारण पद रिक्त होने पर लिंक अधिकारी विभाग का कामकाज देखेंगे। साथ ही अवकाश, प्रशिक्षण, दौरे अथवा चुनाव ड्यूटी पर जाने से पूर्व संबंधित अधिकारी को अपने नामित लिंक अधिकारी को इसकी पूर्व सूचना देनी होगी, ताकि विभाग का कार्य प्रभावित न हो।