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  • सर्दियों मैं अंजीर को भिगोकर सुबह खाने से मिलते हैं अद्भुत फायदे

    सर्दियों मैं अंजीर को भिगोकर सुबह खाने से मिलते हैं अद्भुत फायदे

    सूखी अंजीर स्वाद में मीठी होती है और इसकी बनावट चमड़े जैसी होती है। ये खाने में मुलायम और चबाने वाले होते हैं. अंजीर में फैट और कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है. साथ ही इसमें बहुत कम सोडियम और फाइबर, कार्बोहाइड्रेट और शुगर की संतुलित मात्रा होती है. रात भर भीगे हुए अंजीर नियमित रूप से खाने से कई स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं. अगर आप भीगे हुए अंजीर खाने के फायदों के बारे में नहीं जानते हैं तो यहां इसके कुछ जबरदस्त स्वास्थ्य लाभों के बारे में बताया गया है. हालांकि अंजीर के स्वास्थ्य लाभ (Health Benefits Of Fig) बहुत सारे हैं, लेकिन अंजीर को पानी में भिगोने से आपको बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिलेगा. पहले से भिगोने से अंजीर की घुलनशील फाइबर सामग्री को तोड़ने में मदद मिलती है।

    1. सूखे अंजीर के 2-4 टुकड़े लें।
    2. पानी से आधा भरा एक छोटा कटोरा लें. इसमें अंजीर के टुकड़े भिगो दें. इसे रात भर भीगने दें।
    3. सुबह पानी निकाल दें।
    4. भीगे हुए अंजीर को खाली पेट खाएं. आप उन पर थोड़ा शहद भी मिला सकते हैं।

    भीगी हुई अंजीर खाने के शानदार फायदे | Amazing Benefits Of Eating Soaked Figs

    1) कब्ज रोकता है

    सुबह भीगे हुए अंजीर खाने से कब्ज की समस्या से छुटकारा मिलता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि अंजीर घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर से भरपूर होते हैं, जो मल त्याग में सुधार करने में मदद करते हैं. इससे आपका पाचन तंत्र भी दुरुस्त रहेगा. आप सामान्य रूप से एक हेल्दी डाइट खाएं जो संतुलित और पौष्टिक हो, फलों और सब्जियों से भरपूर हो।

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    2) हड्डियों को हेल्दी रखती है

    अंजीर कैल्शियम से भी भरपूर होती है, जो हेल्दी हड्डियों के लिए जरूरी है. हमारा शरीर खुद कैल्शियम का उत्पादन नहीं करता है, इसलिए ऐसे फूड्स का सेवन करना जरूरी है जो हमारे शरीर को कैल्शियम प्रदान कर सकें. अंजीर के अलावा कैल्शियम के अन्य अच्छे स्रोतों में सोया, दूध और हरी पत्तेदार सब्जियां शामिल हैं।

    3) वजन घटना

    अंजीर लो कैलोरी और फाइबर से भरपूर होती है, जो उन्हें अपने आहार में शामिल करने के लिए एक बेहतरीन फूड्स बनाता है, खासकर अगर आप अपना वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं. सुबह भीगे हुए अंजीर खाने के साथ-साथ आप भोजन के बीच भूख-प्यास को शांत करने के लिए भी इन्हें खा सकते हैं. चॉकलेट या आइसक्रीम खाने के बजाय भोजन के बाद अपने मीठे दांत को तृप्त करने के लिए भी ये बहुत अच्छे हैं. फल और ड्राई फ्रूट्स खाने से मदद मिल सकती है।

    4) ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करें

    अंजीर में क्लोरोजेनिक एसिड और पोटेशियम होता है, जो आपके ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करता है. ये उन्हें उन लोगों के लिए एक बेहतरीन बनाता है जो डायबिटीज से पीड़ित हैं या अपने ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रण में रखना चाहते हैं।

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    5) प्रजनन स्वास्थ्य

    अंजीर में मौजूद जिंक, मैंगनीज, मैग्नीशियम और आयरन जैसे खनिज महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं. इसे खाने से आपके शरीर को हार्मोनल असंतुलन और मेनोपॉज के बाद की समस्याओं से सुरक्षा मिलती है. अंजीर पीएमएस की समस्या को कम करने में भी मदद कर सकता है।

    अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

  • सर्दियों में जाने दिन में कितने बादाम खाना है सेहत के लिए फायदेमंद

    सर्दियों में जाने दिन में कितने बादाम खाना है सेहत के लिए फायदेमंद

    बीजों और सूखे मेवों को खानपान में शामिल करने की सलाह एक्सपर्ट्स हमेशा से देते आए हैं। सूखे मेवों में बादाम (Almond) की बात करें तो इसमें मोनोसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट्स पाए जाते हैं। ये दोनों ही गुड फैट्स होते हैं। इसके अलावा बादाम विटामिन ई और डाइट्री फाइबर का भी अच्छा स्त्रोत है। लेकिन, बादाम के अनेक फायदों के बीच इसकी तासीर और खाने की मात्रा को लेकर अक्सर लोग उलझन में रहते हैं। कहते हैं ना कि अति किसी भी चीज की बुरी होती है। इसीलिए बादाम (Badam) को भी जरूरत से ज्यादा ना खाया जाए इसपर ध्यान देना जरूरी है। यहां जानिए बादाम से जुड़े कुछ तथ्यों के बारे में।

    एक दिन में कितने बादाम खाने चाहिए

    सेहत के लिए लाभकारी बादाम की तासीर गर्म होती है। गर्म तासीर होने के चलते ही बादाम को सीमित मात्रा में ही खाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा गर्मियों में बादाम की गर्म तासीर को देखते हुए इसे ठंडी चीजों के साथ खाया जाता है। वहीं, सर्दियों में बादाम की गर्म तासीर के चलते इसे खानपान में शामिल किया जाता है। एक दिन में खाने के लिए 50 से 55 ग्राम तक बादाम परफेक्ट होते हैं। यानी मुट्ठीभर बादाम रोजाना खाए जा सकते हैं। इस बात का खास ध्यान रखें कि बादाम का जरूरत से ज्यादा सेवन वजन बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। 

    बादाम खाने के फायदे 

    विटामिन ई से भरपूर बादाम इंफेक्शंस को दूर रखते हैं। रोजाना खाए जाने पर बादाम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी (Immunity) को बढ़ाने वाले साबित होते हैं। 
    बादाम फाइबर का अच्छा स्त्रोत है। इसे मिड मॉर्निंग स्नैक में खाया जा सकता है, सुबह खाया जा सकता है या शाम के समय भी। बादाम खाने पर पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है और वजन घटाने में मदद मिलती है।
    फाइबर होने के चलते बादाम को डायबिटीज की डाइट में भी शामिल किया जा सकता है। बादाम ब्लड शुगर लेवल को मेंटेन करने में मददगार है।
    अनसैचुरेटेड फैट्स होने के कारण बादाम खाने पर सेरोटोनिन लेवल इंप्रूव होते हैं और रात में नींद अच्छी आती है।
    बादाम दांतों और हड्डियों के लिए भी अच्छा है क्योंकि इसमें कैल्शियम (Calcium) और विटामिन डी अच्छी मात्रा में पाया जाता है।
    भीगे हुए बादाम (Soaked Almonds) पाचन को बेहतर करते हैं। 
    शरीर से टॉक्सिन निकालने के लिए भी बादाम का सेवन किया जा सकता है।

  • 5 हेल्थ टिप्स जो आपको हमेशा स्वस्थ रखेंगी 

    5 हेल्थ टिप्स जो आपको हमेशा स्वस्थ रखेंगी 

    योग विज्ञान से सीखें 5 हेल्थ टिप्स – सेहत और स्वास्थ के लिए कुछ सरल हेल्थ टिप्स। भारतीय संस्कृति में जीने के कुछ ऐसे तौर-तरीके हैं जिनका हम कई पीढ़ियों से पालन करते आ रहे हैं, जैसे – उपवास करना, उठने और बैठने के ढंग, और पानी भरकर रखने के लिए तांबे के बर्तनों का प्रयोग…जानते हैं इन टिप्स के बारे में।

    1. तांबे के बर्तन का पानी पीयें

    तांबे के बैक्टीरिया-नाशक गुणों में मेडिकल साईंस बड़ी गहरी रुचि ले रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कई प्रयोग हुए हैं और वैज्ञानिकों ने यह मालूम किया है कि पानी की अपनी याददाश्त होती है – यह हर उस चीज को याद रखता है जिसको यह छूता है। पानी की अपनी स्मरण-शक्ति होने के कारण हम इस बात पर ध्यान देते हैं कि उसको कैसे बर्तन में रखें। पहले सही तरह का खाना खाने की आदत डालें, तब उपवास की सोचें। अगर खाने की अपनी इच्छा को आप जबर्दस्ती रोकने की कोशिश करेंगे तो यह आपके शरीर को हानि पहुंचाएगा। अगर आप पानी को रात भर या कम-से-कम चार घंटे तक तांबे के बर्तन में रखें तो यह तांबे के कुछ गुण अपने में समा लेता है। यह पानी खास तौर पर आपके लीवर के लिए और आम तौर पर आपकी सेहत और शक्ति-स्फूर्ति के लिए उत्तम होता है। अगर पानी बड़ी तेजी के साथ पंप हो कर अनगिनत मोड़ों के चक्कर लगाकर लोहे या प्लास्टिक की पाइप के सहारे आपके घर तक पहुंचता है तो इन सब मोड़ों से रगड़ाते-टकराते गुजरने के कारण उसमें काफ़ी दोष आ जाता है। लेकिन पानी में याद्दाश्त के साथ-साथ अपने मूल रूप में वापस पहुंच पाने की शक्ति भी होती है। अगर आप नल के इस पानी को एक घंटे तक बिना हिलाये-डुलाये रख देते हैं तो दोष अपने-आप खत्म हो जाता है।

    2. शरीर को नींद नहीं, आराम दें

    आप सोने किस वक्त जाते हैं, यह तो आपके लाइफ स्टाइल पर निर्भर करता है, लेकिन महत्व इस बात का है कि आपको कितने घंटे की नींद की जरूरत है। अकसर कहा जाता है कि दिन में आठ घंटे की नींद लेनी ही चाहिए। आपके शरीर को जिस चीज की जरूरत है, वह नींद नहीं है, वह आराम है। अगर आप पूरे दिन अपने शरीर को आराम दें, अगर आपका काम, आपकी एक्सरसाइज सब कुछ आपके लिए एक आराम की तरह हैं तो अपने आप ही आपकी नींद के घंटे कम हो जाएंगे। लोग हर चीज तनाव में करना चाहते हैं। मैंने देखा है कि लोग पार्क में टहलते वक्त भी तनाव में होते हैं। अब इस तरह का व्यायाम तो आपको फायदे की बजाय नुकसान ही करेगा, क्योंकि आप हर चीज को इस तरह से ले रहे हैं जैसे कोई जंग लड़ रहे हों। आप आराम के साथ क्यों नहीं टहलते? चाहे टहलना हो या जॉगिंग, उसे पूरी मस्ती और आराम के साथ क्यों नहीं कर सकते?
    तो सवाल घूमफिर कर वही आता है कि मेरे शरीर को कितनी नींद की जरूरत है? यह इस बात पर निर्भर है कि आप किस तरह का शारीरिक श्रम करते हैं। आपको न तो भोजन की मात्रा तय करने की जरूरत है और न ही नींद के घंटे। मुझे इतनी कैलरी ही लेनी है, मुझे इतने घंटे की नींद ही लेनी है, जीवन जीने के लिए ये सब बेकार की बातें हैं। आज आप जो शारीरिक श्रम कर रहे हैं, उसका स्तर कम है, तो आप कम खाएं। कल अगर आपको ज्यादा काम करना है तो आप ज्यादा खाएं। नींद के साथ भी ऐसा ही है। जिस वक्त आपके शरीर को पूरा आराम मिल जाएगा, यह उठ जाएगा चाहे सुबह के 3 बजे हों या 8। आपका शरीर अलार्म की घंटी बजने पर नहीं उठना चाहिए। एक बार अगर शरीर आराम कर ले तो उसे खुद ही जग जाना चाहिए।

    3. दो हफ्ते में एक बार उपवास करें

    आप शरीर के प्राकृतिक चक्र से जुड़ा ‘मंडल’ नाम की एक चीज होती है। मंडल का मतलब है कि हर 40 से 48 दिनों में शरीर एक खास चक्र से गुजरता है। हर चक्र में तीन दिन ऐसे होते हैं जिनमें आपके शरीर को भोजन की आवश्यकता नहीं होती। अगर आप अपने शरीर को लेकर सजग हो जाएंगे तो आपको खुद भी इस बात का अहसास हो जाएगा कि इन दिनों में शरीर को भोजन की जरूरत नहीं होती। इनमें से किसी भी एक दिन आप बिना भोजन के आराम से रह सकते हैं। 11 से 14 दिनों में एक दिन ऐसा भी आता है, जब आपका कुछ भी खाने का मन नहीं करेगा। उस दिन आपको नहीं खाना चाहिए। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि कुत्ते और बिल्लियों के अंदर भी इतनी सजगता होती है। कभी गौर से देखें, किसी खास दिन वे कुछ भी नहीं खाते। दरअसल, अपने सिस्टम के प्रति वे पूरी तरह सजग होते हैं। जिस दिन सिस्टम कहता है कि आज खाना नहीं चाहिए, वह दिन उनके लिए शरीर की सफाई का दिन बन जाता है और उस दिन वे कुछ भी नहीं खाते। अब आपके भीतर तो इतनी जागरूकता नहीं कि आप उन खास दिनों को पहचान सकें। फिर क्या किया जाए! बस इस समस्या के समाधान के लिए अपने यहां एकादशी का दिन तय कर दिया गया। हिंदी महीनों के हिसाब से देखें तो हर 14 दिनों में एक बार एकादशी आती है। इसका मतलब हुआ कि हर 14 दिनों में आप एक दिन बिना खाए रह सकते हैं। अगर आप बिना कुछ खाए रह ही नहीं सकते या आपका कामकाज ऐसा है, जिसके चलते भूखा रहना आपके वश में नहीं और भूखे रहने के लिए जिस साधना की जरूरत होती है, वह भी आपके पास नहीं है, तो आप फलाहार ले सकते हैं। कुल मिलाकर बात इतनी है कि बस अपने सिस्टम के प्रति जागरूक हो जाएं।
    एक बात और, अगर आप बार-बार चाय और कॉफ़ी पीने के आदी हैं और उपवास रखने की कोशिश करते हैं तो आपको बहुत ज्यादा दिक्कत होगी। इस समस्या का तो एक ही हल है। अगर आप उपवास रखना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने खानपान की आदतों को सुधारें। पहले सही तरह का खाना खाने की आदत डालें, तब उपवास की सोचें। अगर खाने की अपनी इच्छा को आप जबर्दस्ती रोकने की कोशिश करेंगे तो यह आपके शरीर को हानि पहुंचाएगा। यहां एक बात और बहुत महत्वपूर्ण है कि किसी भी हाल में जबर्दस्ती न की जाए।

    4. पीठ को सीधा रखकर बैठें

    शरीर के भीतरी अंगों के आराम में होने का खास महत्व है। इसके कई पहलू हैं। फिलहाल हम इसके सिर्फ एक पहलू पर विचार कर रहे हैं। शरीर के ज्यादातर महत्वपूर्ण भीतरी अंग छाती और पेट के हिस्से में होते हैं। ये सारे अंग न तो सख्त या कड़े होते हैं और न ही ये नट या बोल्ट से किसी एक जगह पर स्थिर किए गए हैं। ये सारे अंग ढीले-ढाले और एक जाली के अंदर झूल रहे से होते हैं। इन अंगों को सबसे ज्यादा आराम तभी मिल सकता है, जब आप अपनी रीढ़ को सीधा रखकर बैठने की आदत डालें। आधुनिक विचारों के मुताबिक, आराम का मतलब पीछे टेक लगाकर या झुककर बैठना होता है। लेकिन इस तरह बैठने से शरीर के अंगों को कभी आराम नहीं मिल पाता।
    मुझे इतनी कैलरी ही लेनी है, मुझे इतने घंटे की नींद ही लेनी है, जीवन जीने के लिए ये सब बेकार की बातें हैं। आज आप जो शारीरिक श्रम कर रहे हैं, उसका स्तर कम है, तो आप कम खाएं। कल अगर आपको ज्यादा काम करना है तो आप ज्यादा खाएं
    इस स्थिति में, शारीरिक अंग उतने ठीक ढंग से काम नहीं कर पाते जितना उनको करना चाहिए – खासकर जब आप भरपेट खाना खाने के बाद आरामकुर्सी पर बैठ जाएं। आजकल काफी यात्राएं आराम कुर्सी में होती हैं। अगर आप कार की आरामदायक सीट पर बैठकर एक हजार किलोमीटर की यात्रा करते हैं, तो आप अपने जीवन के कम-से-कम तीन से पांच माह खो देते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि लगातार ऐसी मुद्रा में बैठे रहने की वजह से आपके अंगों पर इतना बुरा असर होता है कि उनके काम करने की शक्ति में नाटकीय ढंग से कमी आ जाती है या फि र वे बहुत कमजोर हो जाते हैं।
    शरीर को सीधा रखने का मतलब यह कतई नहीं है कि हमें आराम पसंद नहीं है, बल्कि इसकी सीधी सी वजह यह है कि हम आराम को बिल्कुल अलग ढंग से समझते और महसूस करते हैं। आप अपनी रीढ़ को सीधा रखते हुए भी अपनी मांसपेशियों को आराम में रहने की आदत डाल सकते हैं। लेकिन इसके विपरीत, जब आपकी मांसपेशियां झुकीं हों, तो आप अपने अंगों को आराम में नहीं रख सकते। आराम देने का कोई और तरीका नहीं है। इसलिए यह जरूरी है कि हम अपने शरीर को इस तरह तैयार करें कि रीढ़ को सीधा रखते हुए हमारे शरीर का ढांचा और स्नायुतंत्र आराम की स्थिति में बने रहें।

    5. पंच तत्वों से जुड़कर जीवन जीयें

    हम कुछ लोगों को बता रहे थे कि हमारे योग केंद्र में एक योगिक अस्पताल है, तो अमेरिका से कुछ डॉक्टर इसे देखना चाहते थे और वे हमारे यहां आए। वे एक हफ्ते यहां थे और एक हफ्ते के बाद वे मुझसे बहुत नाराज़ थे। मैंने कहा – “क्यों, मैंने क्या किया? वे चारों तरफ यही बातें कर रहे थे – “ये सब फ़ालतू बकवास है! सद्गुरु ने कहा यहां एक योगिक अस्पताल! कहां है योगिक अस्पताल? हमें कोई बिस्तर नहीं दिख रहे हैं, हमें कुछ नहीं दिख रहा”। फिर मुझे समझ आया कि उनकी समस्या क्या है, फिर मैंने उन्हें बुलाया और मैंने कहा – “परेशानी क्या है” उनमें से एक महिला, जिनकी आँखों में आंसू थे, बोलीं – मैं यहां इतने विश्वास के साथ आई और यहां धोखा हो रहा है, यहां कोई अस्पताल नहीं है, बिल्कुल भी कुछ नहीं यहां और आप बोल रहे हैं कि यहां अस्पताल है। मैंने कहा – “आराम से बैठिये। आपके अस्पताल के बारे में ये विचार हैं कि – बहुत से बिस्तर हों जहां मरीजों को सुला दो और उन्हें दवाइयां देते रहो – ये अस्पताल ऐसा नहीं है। मैं आपको आस-पास घुमाता हूँ – सभी मरीज़ यहां बगीचे में काम कर रहे हैं, और रसोई घर में काम कर रहे हैं। हम उनसे काम करवाते हैं, और वे ठीक हो जाते हैं।

    तो, सबसे महत्वपूर्ण चीज़ ये है कि अगर कोई बीमार हो तो हम उनसे बगीचे में काम करवाते हैं। उन्हें खाली हाथों धरती के संपर्क में कम से कम आधे घंटे से लेकर 45 मिनट तक जरुर होना होता है। ऐसा करने से वे स्वस्थ हो जाते हैं। क्योकि आप जिस चीज़ को शरीर कहते हैं वो बस इस धरती का एक टुकडा है, है न? हां या ना? वे सभी अनगिनत लोग जो इस धरती पर चले, वे सब कहां गए? सब धरती की उपरी सतह पर हैं, है न? ये शरीर भी धरती की सतह पर चला जाएगा – जब तक कि आपके दोस्त – इस डर से कि आप फिर से न जाग जाएं – आपको बहुत गहरा न दफना दें। तो, यह बस धरती का एक टुकड़ा है। तो यह अपने सर्वोत्तम रूप में तब रहेगा, जब आप धरती से थोडा संपर्क बनाकर रखें। फिलहाल आप हर वक़्त सूट और बूट पहन कर पचासवें फ्लोर पर चलते रहते हैं, और कभी भी धरती के संपर्क में नहीं आते। ऐसे में आपका शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार होना स्वाभाविक है। फिर मैंने उन्हें दिखाया – “देखो इस व्यक्ति को दिल का रोग है, उस व्यक्ति को वो बीमारी है। मैंने सभी मरीजों से उनका परिचय कराया और फिर मरीज़ अपनी बातें बताने लगे – “तीन हफ्ते पहले हम ऐसे थे, और अब हमें बहुत अच्छा लग रहा है, हम अपनी बीमारी ही भूल गए हैं।” और अब सभी मेडिकल मापदंड भी कह रहे हैं कि वे ठीक हैं। अमेरिकी डॉक्टर को यह विश्वास दिलाने में कि ये लोग सच में मरीज़ हैं हमें बहुत मेहनत करनी पड़ी। हम उन्हें अच्छे काम में भी लगा रहे हैं।

  • ज्यादा नमक खाना ब्रेन के लिए खतरनाक, हो सकती है ये बीमारियों

    ज्यादा नमक खाना ब्रेन के लिए खतरनाक, हो सकती है ये बीमारियों

    हम सभी ये सुनते आए हैं कि अधिक नमक का सेवन हमारी सेहत के लिए नुकसानदेह है।  यह ना केवल हमारे ब्‍लड प्रेशर को प्रभावित करता है, यह हार्ट डिजीज और स्‍ट्रोक का कारण भी होता है।  एक शोध में इस बात की भी जानकारी मिली है कि ये हमारे ब्रेन की सेहत को भी नुकसान पहुंचाने का काम करता है।  वेबएमडी में एक शोध के हवाले से बताया गया है कि  अधिक नमक का सेवन डिमेंशिया की वजह भी बन सकता है। 

    क्‍या कहते हैं शोधकर्ता?

    न्यूयॉर्क स्थित वेइल कॉर्नेल मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी और न्यूरोसाइंस के प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता कोस्टेंटिनो इडेकोला के अनुसार, अधिक नमक का सेवन करने से इंसान में मेमोरी लॉस, भटकाव, कपड़े पहनने, खाना बनाने, बिलों का भुगतान करने या रोज़मर्रा के अन्य कामों को करने में दिक्‍कत आती है।  एनआईएच के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने पाया है कि आहार में अधिक मात्रा में नमक ताऊ नामक प्रोटीन में रासायनिक परिवर्तन करता है जिससे ब्रेन में ताऊ में टकराने की प्रक्रिया होती है और ताऊ के गुच्छे बन जाते हैं जो डिमेंशिया व अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। 

    ज्यादा नमक खाने के अन्‍य नुकसान

    • -बहुत अधिक नमक खाने से बार बार पेशाब आने की समस्‍या हो सकती है। 
    • -अधिक नमक के सेवन से डिहाइड्रेशन और बार बार प्‍यास लगती है।
    • -अधिक नमक के सेवन से घुटनों, टखनों आदि में सूजन हो सकता है।
    • -इसके अलावा, ब्‍लड प्रेशर हाई होने की समस्‍या भी हो सकती है। 
  • सर्दियों के मौसम में कई बीमारियों का इलाज है लहसुन, जानें इसके फायदे

    सर्दियों के मौसम में कई बीमारियों का इलाज है लहसुन, जानें इसके फायदे

    सर्दियों के मौसम की शुरुआत हो चुकी है। यह सीजन अपने साथ कई बेहतरीन चीजों को लेकर आता है। लेकिन, इस मौसम में कोल्ड, फ्लू और कई अन्य सीजनल डिजीज की संभावना भी बढ़ जाती है। इसलिए, इस दौरान हमेशा ऐसी डाइट लेने की सलाह दी जाती है जिससे इम्युनिटी बढे और आप हेल्दी रहें. विंटर में गर्म और न्यूट्रिशनल आहार का सेवन करना चाहिए। इसमें हर किचन में पाया जाने वाला सामान्य इंग्रेडिएंट गार्लिक भी शामिल है। लहसुन की खुशबु और फ्लेवर इतना अच्छा होता है जिससे डिश का स्वाद एकदम से बदल जाता है। यानी, सर्दियों के मौसम में लहसुन बहुत गुणकारी है, जानिए इस के बारे में कई जरूरी बातें। 

    हाई ब्लड शुगर को कम करने में सहायक है मेथी दाना, जानें कब खाने से होगा ज्यादा फायदा

    सर्दियों में लहसुन के फायदे क्या हैं?
    हेल्थलाइनके अनुसार गार्लिक अनियन फैमिली का प्लांट है. विंटर में इसके फायदे इस प्रकार हैं:
    सर्दी और खांसी से राहत: विंटर में कोल्ड, खांसी, गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गार्लिक को इस मौसम में इन हेल्थ इशूज से राहत दिलाने का काम करता है।

    वजन कम करने में मददगार: विंटर में वजन कम करना बहुत मुश्किल काम है। लेकिन लहसुन का सेवन करने से यह आसान हो सकता है। गार्लिक में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो आपको डिटोक्स करने और हेल्दी मेटाबॉलिज्म को प्रमोट करने में मदद करता है। जिससे वजन कम करने में मदद मिलती है।

    रेस्पिरेटरी हेल्थ: गार्लिक की एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज रेस्पिरेटरी और लंग हेल्थ को सही रखने में सहायक है। जो विंटर में अक्सर बुखार, कंजेशन और गले में खराश के कारण होता है।

  • बार-बार भूख लगने को शांत रखने के 5 कारगर उपाय

    बार-बार भूख लगने को शांत रखने के 5 कारगर उपाय

    भूख लगना आम बात है।  जब काम करेंगे तो भूख लगेगी ही, लेकिन कुछ लोगों को हर वक्त भूख लगती है यानी कुछ लोग हर समय भूखा महसूस करते हैं।  ये सामान्य बात नहीं है।  इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।  हर वक्त भूख महसूस होने के पीछे शरीर में प्रोटीन और फाइबर की कमी हो सकती है।  वहीं, नींद में कमी की वजह से भी ज्यादा और बार-बार भूख लगती है. दरअसल, जब नींद पूरी नहीं होती तो शरीर में ग्रेलिन नामक हॉर्मोन की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे बार-बार भूख लगती है।  हालांकि, बार-बार भूख लगना कोई बीमारी नहीं है, लेकिन अगर इसके कारणों पर ध्यान ना दिया जाए तो प्रोटीन, फाइबर या नींद संबंधी बीमारी बड़ा रूप ले सकती है, इसलिए कोशिश करनी चाहिए कि अपनी डाइट में इन पोषक तत्वो की कमी ना होने दें और भरपूर नींद लें. इसके अलावा हर समय लगने वाली भूख को कंट्रोल करने के लिए कुछ उपाय करने चाहिए. चलिए जानते हैं इन उपायों के बारे में।

    स्टाइल क्रेज के अनुसार, ज्यादा भूख को नियंत्रित करने का असरदार तरीका है कि पानी पीते रहें. खाने से पहले खासतौर पर पानी पीने से देर तक भूख नहीं लगती, इसलिए शरीर में पानी की कमी ना होने दें।

    भूख लगे तो सेब खाएं

    भूख लगे तो तला भुना या मसालेदार खाने की बजाय एक सेब खाएं। सेब में भरपूर फाइबर मौजूद है, जो आपकी भूख को भी शांत करेगा और शरीर में फाइबर की कमी पूरी करेगा. इसके अलावा, सेब इसलिए भी फायदेमंद है, क्योंकि इसमें पाया जाने वाला पेक्टिन भूख शांत करने में मदद करता है।

    भूख लगे तो दलिया खाएं

    भूख लगे तो दलिया खाना चाहिए। इसमें पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट होता है, जो शरीर में लंबे समय तक ऊर्जा को बनाए रखता है. इसे खाने से फाइबर भी मिलेगा और प्रोटीन भी. इसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ रहेगा, लेकिन शरीर में फैट जमा नहीं होता।

    अखरोट से दूर होगी बार-बार भूख लगने की समस्या

    अगर बार-बार भूख लगती है तो अखरोट खाना चाहिए। अखरोट में खूब प्रोटीन और फाइबर होता है। इसे खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा हुआ लगता है और इसे खाने के बीद नींद भी अच्छी आती है।

    चबा-चबा कर आराम से भोजन करें

    अगर आप जल्दीबाजी में भोजन करते हैं तो इस आदत को बदल लेना चाहिए। दरअसल, जल्दीबाजी में खाना खाने से पेट को हमेशा भूख महसूस होती रहती है। अगर आराम से चबा-चबा कर भोजन करेंगे तो भोजन सही से पचेगा और इससे मिलने वाली ऊर्जा शरीर को भूख महसूस नहीं होने देगी।

  • सर्दियों मैं अमरूद का जूस पीने से जाने क्या होते है फायदे

    सर्दियों मैं अमरूद का जूस पीने से जाने क्या होते है फायदे

    सर्दियों के मौसम में अमरूद खूब मिलता है।  यह फल अन्य फलों के मुकाबले सस्ता भी होता है।  इस वजह से भी लोग इसे खूब खाते हैं. पोषक तत्वों से भरपूर अमरूद पेट के लिए बहुत बढ़िया फल होता है।  इसके सेवन से कब्ज की समस्या नहीं होती है।  अमरूद का जूस पीना भी सेहत के लिए काफी अच्छा होता है।  यह आपको हाइड्रेटेड रखता है।  अमरूद के जूस में विटामिन सी भरपूर होता है और विटामिन सी इम्यूनिटी को मजबूत करता है।  अमरूद का फल हो या फिर जूस, दोनों ही डाइजेस्टिव सिस्टम के लिए बेस्ट माने गए हैं।  यह नेचुरल लैक्सेटिव की तरह काम करता है।  इसमें फाइबर भी काफी होता है, जो पेट संबंधित समस्याओं को दूर रखता है। 

    अमरूद के जूस में मौजूद पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें एनर्जी, विटामिन ए, सी, ई, लाइकोपीन, एंटीऑक्सीडेंट्स, मैंगनीज, फोलेट, पोटैशियम, कार्बोहाइड्रेट्स, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, फाइटोकेमिकल्स, फाइबर, आयरन आदि होते हैं।  आइए जानते हैं अमरूद का जूस पीने के फायदे क्या होते हैं। 

    1. टीओआई में छपी एक खबर के अनुसार, अमरूद के जूस में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है. इस तरह अमरूद का जूस पीने से वजन बढ़ने की टेंशन नहीं होती है. यह मेटाबॉलिज्म को भी बूस्ट करता है। 

    2. इसमें विटामिन सी काफी अधिक होता है, इसलिए यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत बनाता है।  यह शरीर को इंफेक्शन और बीमारियों से लड़ने में मदद करता है।  प्रतिदिन विटामिन सी का इनटेक इम्यूनिटी को स्ट्रॉन्ग बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी है।  अमरूद का जूस पीकर आप सर्दियों में होने वाली समस्याएं से भी बचे रह सकते हैं। 

    3. कई तरह के विटामिन जैसे विटामिन सी, ई और मिनरल्स से भरपूर होने के कारण यह स्किन के लिए भी बेहतरीन ड्रिंक है।  विटामिंस और मिनरल्स में एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टीज होती हैं, जो एक्ने, मुहांसों की समस्या का इलाज करने में कारगर साबित होते हैं।  अमरूद का जूस पीने से झुर्रियों, बढ़ती उम्र के लक्षणों से भी बचाव होता है। 

    4. जैसा की अमरूद में डायटरी फाइबर होता है, जो पेट की सेहत के लिए बेहद अच्छा होता है।  चाहे आप अमरूद खाएं या इसका जूस पिएं, कब्ज की समस्या आपको परेशान नहीं करेगी।  डाइजेस्टिव डिसऑर्डर से भी बचे रहने के लिए अमरूद के जूस का सेवन करना फायदेमंद होता है। 

    5. अमरूद के जूस में विटामिन ए भी अच्छी मात्रा में होता है।  विटामिन ए आंखों की रोशनी बढ़ाने और स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है।  इसके सेवन से आंखों में होने वाले इंफेक्शन, मोतियाबिंद आदि के जोखिम को भी कम करता है।  ऐसे में डेली डाइट में अमरूद का जूस जरूर शामिल करें।  आजकल बच्चों की भी आंखें कम उम्र में ही खराब हो जाती हैं, उन्हें भी इस जूस को जरूर पिलाएं। 

    6. डायबिटीज के मरीजों के लिए अमरूद खाना बेस्ट होता है. आप इसका जूस भी पी सकते हैं, क्योंकि यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने के लिए जाना जाता है।  अमरूद में ग्लाइसेमिक इंडेक्स काफी कम होता है।  अमरूद का फल हार्ट हेल्थ के लिए भी बेस्ट है।